मध्य प्रदेश शास
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल , मंगलवार , दिनांक 21 दिसम्बर 2021-अग्रहायण 30 , शक 1943
क्रमांक 496]
विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश
भोपाल , दिनांक 21 दिसम्बर 2021
क्र. 19940- मप्रविस - 15- विधान-2021 .- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( संशोधन ) विधेयक, 2021 ( क्रमांक 30 सन् 2021 ) जो विधान सभा में दिनांक 21 दिसम्बर, 2021 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक ३० सन् २०२१
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( संशोधन ) विधेयक, २०२१
विषय-सूची.
खण्ड:
१. संक्षिप्त नाम.
२ . धारा १३ - क का अन्तःस्थापन.
३. धारा १ ९ का संशोधन.
४.
धारा ५५ का अन्तःस्थापन.
धारा ११० का संशोधन.
५.
धारा २४७ का संशोधन.
६.
धारा २५८ का संशोधन.
७.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 दिसम्बर 2021
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक ३० सन् २०२१
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( संशोधन ) विधेयक, २०२१
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता , १ ९ ५ ९ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान - मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम.
१. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( संशोधन ) अधिनियम, २०२१ है .
धारा १३ -क का
अन्तःस्थापन.
२. मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, १ ९ ५९ ( क्रमांक २० सन् १ ९ ५९ ) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा १३ - क को धारा १३ - ख के रूप में पुनर्क्रमांकित किया जाए तथा इस प्रकार पुनर्क्रमांकित धारा १३ - ख के पूर्व , निम्नलिखित नई धारा अन्तःस्थापित की जाए, अर्थात्:-
" १३ -क. साइबर तहसील - राज्य सरकार, ऐसे मामलों के वर्ग , जैसे कि राज्य सरकार साधारण आदेश द्वारा अधिसूचित करे, के निराकरण के प्रयोजन के लिए, एक या एक से अधिक जिले समाविष्ट करते हुए, उसके मुख्यालय के साथ साइबर तहसील सृजित कर सकेगी तथा ऐसी साइबर तहसील को समाप्त कर सकेगी या उसकी सीमाओं को परिवर्तित कर सकेगी. ".
धारा १ ९ का
संशोधन .
३. मूल अधिनियम की धारा १ ९ में , उपधारा ( ३ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधाराएं जोड़ी जाएं, अर्थात्-
" (४) राज्य सरकार, प्रत्येक साइबर तहसील के लिए किसी राजस्व अधिकारी या किसी राजपत्रित अधिकारी को, जैसा कि वह ठीक समझे , साइबर तहसीलदार नियुक्त कर सकेगी , जो ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कर्तव्यों का पालन करेंगे , जो इस संहिता द्वारा या उसके अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति द्वारा या उसके अधीन किसी तहसीलदार को प्रदत्त की गयी हैं या अधिरोपित किए गए हैं तथा ऐसा साइबर तहसीलदार ऐसे मामलों की जांच, जो कि राज्य सरकार द्वारा साधारण आदेश द्वारा , धारा १३ - क के अधीन अधिसूचित किया गए हैं , ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, कर सकेगा.
(५) साइबर तहसीलदार, धारा ११ के प्रयोजन के साथ - साथ इस संहिता तथा इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के लिए एक राजस्व अधिकारी होगा . " .
४. मूल अधिनियम की धारा ५४ के पश्चात्, निम्नलिखित नई धारा अन्तःस्थापित की जाए, अर्थात्:-
धारा ५५ का अन्तःस्थापन.
" ५५. इस अध्याय के उपबंध, साइबर तहसील से संबंधित मामलों में साइबर तहसीलदार की समस्त कार्यवाहियों तथा पारित आदेशों पर इस प्रकार लागू होंगे जैसे कि वे किसी तहसीलदार की, उसकी अधिकारिता वाली तहसील की कार्यवाहियों और पारित आदेशों पर लागू होते . "
साइबर तहसीलदार द्वारा पारित आदेश की अपील, पुनर्विलोकन या पुनरीक्षण.
धारा ११० का संशोधन.
५. मूल अधिनियम की धारा ११० में, उपधारा ( ७ ) के पश्चात्, निम्नलिखित नई उपधारा जोड़ी जाए, अर्थात्:-
" ( ८ ) इस धारा में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , तहसीलदार-
(क) भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, १ ९३४ ( १ ९ ३४ का २ ) या बैंककारी विनियमन अधिनियम, १ ९४ ९ 992( 1)
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(१९ ४९ का १० ) के उपबंधों के अधीन स्थापित और विनियमित कोई बैंक या वित्तीय संस्था से, यथास्थिति, बंधक या दृष्टिबंधक, जिसमें उसके द्वारा भू- धारी को दिए गए अथवा दिए जाने वाले अग्रिम, उनकी कालावधि को सम्मिलित करते हुए; या
किसी न्यायालय से
(ख)
(एक) भू- धारी पर कोई प्रभार, शास्ति या उसके द्वारा सृजित या अधिरोपित किसी दायित्व; या
(दो) उसके द्वारा पारित कोई डिक्री या आदेश ,
से संबंधित प्रज्ञापना की प्राप्ति की तारीख से तीन दिन के भीतर खसरा के समुचित कॉलम में प्रविष्टियां
करेगा तथा ऐसी प्रविष्टियां करने के पश्तात्, तहसीलदार भूमिस्वामी को सूचित करेगा, जो ऐसी प्रविष्टियों के विरुद्ध आपत्ति कर सकेगा और तहसीलदार के समक्ष इसके सुधार के लिए आवेदन कर सकेगा. तहसीलदार ऐसी जांच जैसी कि वह उचित समझे, किए जाने के पश्चात्, ऐसे सुधार कर सकेगा , जैसा कि वह आवश्यक समझे.
स्पष्टीकरण.-उपधारा ( ८ ) के खण्ड ( ख ) के प्रयोजन के लिए " न्यायालय " से अभिप्रेत है, कोई सिविल, दण्ड या राजस्व न्यायालय. ".
धारा २४७ का संशोधन.
६. मूल अधिनियम की धारा २४७ में, उपधारा ( ७ ) तथा उपधारा ( ८ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्:-
" (७ ) मामलों के ऐसे वर्ग , जिनमें विधि पूर्ण प्राधिकार के बिना किसी खान या खदान से, जिसका कि अधिकार सरकार में निहित है, तथा उसके द्वारा समनुदेशित नहीं किया गया है, खान तथा खनिज (विकास तथा विनियमन ) अधिनियम, १ ९ ५७ ( १ ९ ५७ का ६७ ) तथा उसके अतंर्गत बने नियमों के अधीन व्यवहृत किए जाएंगे.".
धारा २५८ का संशोधन.
७. मूल अधिनियम की धारा २५८ की, उपधारा ( २ ) में, खण्ड ( एक-क ) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात् :-
" ( एक-ख ) किसी साइबर तहसील में ऐसे मामलों के वर्ग को निपटाने की रीति; ".
उद्देश्यों और कारणों का कथन
यह अनुभव किया गया है कि कतिपय मामलों के वर्ग में , किसी जिले में पदस्थ राजस्व अधिकारी उनके समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों के सत्यापन द्वारा आदेश पारित कर सकें और ऐसे मामलों के निराकरण के लिए पक्षकारों को भौतिक उपस्थिति से अभिमुक्त किया जा सके. अतएव, किसी एक या एक से अधिक जिले के लिए साइबर तहसील की स्थापना करने तथा ऐसी साइबर तहसील में साइबर तहसीलदार की नियुक्ति के लिए, जो अविवादित राजस्व मामलों के निराकरण करेंगे , मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता, १ ९५९ ( क्रमांक २० सन् १ ९५९ ) में एक नई धारा १३ - क अंतःस्थापित करना और धारा १ ९ को संशोधित किया जाना प्रस्तावित है. साइबर तहसीलदार द्वारा विनिश्चित मामलों में अपील, पुनर्विलोकन या पुनरीक्षण से संबंधित किसी शंका के स्पष्टीकरण हेतु नई धारा ५५ को अंतःस्थापित किया जाना प्रस्तावित है.
२. बैंक या वित्तीय संस्थाएं, जो खाते के बंधक के आधार पर, कृषकों को अग्रिम ऋण देती हैं, और चाहती हैं कि ऐसे बंधक के संबंध में प्रविष्टियां भू- अभिलेखों में की जाएं और सम्यक् प्रज्ञापना तहसीलदार को भेजी है तो वह ऐसी प्रज्ञापना की प्राप्ति की तारीख से तीन दिन के भीतर उसे सत्यापित तथा अभिलिखित करेगा तथा इसी प्रकार यदि कोई न्यायालय , किसी खाते पर कोई प्रभार, शास्ति या दायित्व सृजित करता है या अधिरोपित करता है या किसी खाते के संबंध में कोई डिक्री या आदेश पारित करता है तो वह भी भू- अभिलेख में अभिलिखित की जाएगी. अतएव, प्रज्ञापना की तारीख से तीन दिन के भीतर ऐसी प्रविष्टियां करने के लिए उक्त संहिता की धारा ११० को संशोधित किया जाना प्रस्तावित है.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 दिसम्बर 2021
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३. उक्त संहिता की धारा २४७ की उपधारा ( ७ ) तथा उपधारा ( ८ ) में किसी खान या खदान से खनिज को विधिविरूद्ध निकालने या हटाने के लिए शास्ति से संबंधित उपबंध हैं तथा खान और खदान ( विनियमन तथा विकास ) अधिनियम , १ ९ ५७ (१ ९ ५७ का ६७ ) और इसके अधीन बने नियमों में भी इसी तरह के उपबंध हैं . यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसी विधिविरूद्ध कार्य के लिए दाण्डिक उपबंध एक अधिनियमिति में केवल एक होना चाहिए, अतएव , संहिता की उक्त धारा २४७ में संशोधन प्रस्तावित है.
४. किसी साइबर तहसील में अविवादित मामलों के निराकरण के लिए, रीति विहित करने के लिए उक्त संहिता की धारा १३ - क में यथा अपेक्षित नियम बनाने की शक्ति के लिए उपबंधों को उपबंधित करने हेतु, उक्त संहिता की धारा २५८ के अधीन संशोधन प्रस्तावित हैं.
५. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है .
गोविन्दसिंह राजपूत भोपालः
भारसाधक सदस्य.
तारीख १४ दिसम्बर, २०२१ .
प्रत्यायोजित विधि निर्माण संबंधी ज्ञापन
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( संशोधन ) विधेयक, २०२१ के खण्ड ३ ( ४ ) द्वारा किसी साइबर तहसील में अविवादित मामलों के निराकरण की रीति विहित किए जाने संबंधी विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन राज्य सरकार को किया जा रहा, जो सामान्य स्वरुप का होगा.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव
मध्यप्रदेश विधान सभा.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2021 .