Servants of Knowledge
Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

लोक एवं निजी संपत्ति को नुकसान का निवारण एवं नुकसानी की वसूली विधेयक 2021...

Published 22 December 2021

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
500
Identifier
in.gazette.madhya.2021-12-22.500.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

प्रध्य प्रदेश शासन

इसे वेबसाईट www.govtpressmp.nic.in से भी डाउन लोड किया जा सकता है.

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

भोपाल, बुधवार , दिनांक 22 दिसम्बर 2021- पौष 1 , शक 1943

क्रमांक 500]

विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश

भोपाल , दिनांक 22 दिसम्बर 2021

क्र. 20178 - मप्रविस- 15 - विधान-2021 .- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश लोक एवं निजी संपत्ति को नुकसान का निवारण एवं नुकसानी की वसूली विधेयक, 2021 (क्रमांक 34 सन् 2021 ) जो विधान सभा में दिनांक 22 दिसम्बर, 2021 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

999 1000

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 22 दिसम्बर 2021

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक ३४ सन् २०२१

मध्यप्रदेश लोक एवं निजी संपत्ति को नुकसान का निवारण एवं नुकसानी की वसूली

विधेयक, २०२१

विषय-सूची

खण्ड:

अध्याय -एक

प्रारंभिक

१. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ.

२. परिभाषाएं.

अध्याय-दो

दावा याचिका प्रस्तुत करना

३. दावा याचिका प्रस्तुत करना.

अध्याय-तीन

दावा अधिकरण का गठन, कर्तव्य तथा शक्तियां

४. दावा अधिकरण का गठन.

५. दावा अधिकरण के कर्तव्य.

६. अपनाई जाने वाली प्रक्रिया.

७. सिविल न्यायालय की शक्ति.

अध्याय-चार

दावा याचिका की प्रक्रिया

८. दावा याचिका प्रस्तुत करने हेतु समय- सीमा तथा शुल्क.

९. दावा याचिका में अंतर्विष्ट होगा .

१०. दावा अधिकरण के समक्ष उपस्थित होना.

११ . दावा अधिकरण द्वारा आदेश.

१२ . प्रतिकर की राशि पर ब्याज.

१३. संपत्ति को हुई क्षति की राशि के निर्धारण के संबंध में सिद्धांत तथा इसका दायित्व.

१४. अपील.

१५. भू- राजस्व के बकाए के रूप में धन की वसूली.

१६. सिविल न्यायालय की अधिकारिता का वर्जन.

१७. दाण्डिक कार्यवाही का वर्जन न होना.

१८. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण.

अध्याय-पांच

प्रकीर्ण

१९ . नियम बनाने की शक्ति.

२०. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति.

1000 ( 1)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 22 दिसम्बर 2021

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक ३४ सन् २०२१

मध्यप्रदेश लोक एवं निजी संपत्ति को नुकसान का निवारण एवं नुकसानी की वसूली विधेयक, २०२१

लोक व्यवस्था की अशांति के दौरान संपत्तियों को पहुंचाए गए नुकसान की वसूली तथा किए गए नुकसान का निर्धारण करने तथा प्रतिकर अधिनिर्णीत करने हेतु दावा अधिकरण का गठन करने तथा उससे संबंधित एवं उससे आनुषंगिक विषयों के लिए उपबंध करने हेतु विधेयक.

भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय-एक

प्रारंभिक

संक्षिप्त नाम , विस्तार और प्रारंभ.

१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश लोक एवं निजी संपत्ति को नुकसान का निवारण एवं नुकसानी की वसूली अधिनियम, २०२१ है.

( २ ) इसका विस्तार संपूर्ण मध्यप्रदेश राज्य पर होगा.

(३ ) यह मध्यप्रदेश राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा.

परिभाषाएं.

२. इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो ,-

(क) " दावा आयुक्त" से अभिप्रेत है , धारा ५ की उपधारा ( २ ) के अधीन इस प्रकार नियुक्त कोई व्यक्ति;

(ख) " दावा अधिकरण " से अभिप्रेत है, धारा ४ के अधीन गठित कोई दावा अधिकरण;

(ग) " नुकसान पहुंचाने वाला कार्य " से अभिप्रेत है, किसी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के समूह, जो कि उक्त जमाव के भाग थे, द्वारा सांप्रदायिक दंगा, हड़ताल, बंद, प्रदर्शन, जुलूस , यातायात का घेराव या कोई ऐसा जमाव जो किसी भी नाम से जाना जाता हो, के कारण किसी संपत्ति को कोई हानि या नुकसान पहुंचाने का कोई कार्य;

(घ) " रिष्टि" का वही अर्थ है, जैसा कि भारतीय दण्ड संहिता ( १८६० का ४५) की धारा ४२५ में उसे समनुदेशित किया गया है;

(ङ) " संपत्ति" से अभिप्रेत है , किसी व्यक्ति , जिसमें सम्मिलित हैं, -

(एक) केन्द्र सरकार; या

(दो) राज्य सरकार; या

(तीन) कोई स्थानीय प्राधिकरण; या

(चार) मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम, १ ९ ६० ( क्रमांक १७ सन् १ ९ ६१ ) के अधीन रजिस्ट्रीकृत या रजिस्ट्रीकृत समझी गई कोई सहकारी सोसायटी; या मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 22 दिसम्बर 2021

1000 ( 2)

(पांच) कोई कम्पनी; या

(छह) किसी केन्द्रीय अथवा राज्य अधिनियम के अधीन गठित कोई कानूनी निकाय; या (सात) कोई संस्था या उपक्रम;

के स्वामित्व की, अथवा कब्जे में की या उसके नियंत्रण में की कोई जंगम या स्थावर संपत्ति.

अध्याय-दो

दावा याचिका प्रस्तुत करना

याचिका दावा प्रस्तुत करना.

३. ( १ ) जहां सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान कारित किया गया है, वहां जिला मजिस्ट्रेट या सार्वजनिक संपत्ति का भारसाधक अधिकारी उस तारीख से ३० दिवस के भीतर, जिसको कि दावा अधिकरण गठित किया गया है , दावा अधिकरण के समक्ष , प्रतिकर अधिनिर्णीत करने के लिए ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, दावा याचिका प्रस्तुत करेगा.

(२ ) जहां निजी संपत्ति को नुकसान कारित किया गया है , वहां वह व्यक्ति जो उक्त क्षतिग्रस्त संपत्ति का स्वामी है या उसके कब्जे में थी या उसके नियंत्रणाधीन थी, उस तारीख से ३० दिवस के भीतर, जिसको कि दावा अधिकरण गठित किया गया है , दावा अधिकरण के समक्ष प्रतिकर अधिनिर्णीत करने के लिए अपनी दावा याचिका, ऐसी रीति में, जैसी कि विहित की जाए, प्रस्तुत कर सकेगा.

अध्याय-तीन

दावा अधिकरण का गठन, कर्तव्य तथा शक्तियां

दावा अधिकरण का गठन.

४. ( १ ) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , संपत्ति को नुकसान के संबंध में , प्रतिकर हेतु दावों के न्यायनिर्णयन के प्रयोजन के लिए, ऐसी कालावधि तथा ऐसे क्षेत्र के लिए, जैसी कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए तथा इस अधिनियम के अधीन सौंपे गए कृत्यों के निर्वहन हेतु, एक या अधिक दावा अधिकरण गठित करेगी.

( २ ) दावा अधिकरण एक या अधिक सदस्यों से मिलकर गठित होगा जैसा कि राज्य सरकार नियुक्त करना उचित समझे और जहां इसके दो या अधिक सदस्य हों, वहां उनमें से एक को उसके अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जाएगा.

(३ ) कोई व्यक्ति दावा अधिकरण में नियुक्त होने के लिए तब तक अर्हित नहीं होगा , जब तक कि वह, - (क) सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश, जिसने जिला न्यायाधीश के रूप में ५ वर्ष या अधिक की सेवा न की हो; या

(ख) अधिकारी जिसने राज्य सरकार के सचिव से अनिम्न श्रेणी का पद धारण न किया हो या समकक्ष अधिकारी.

(४ ) जहां किसी क्षेत्र के लिए दो या अधिक दावा अधिकरण गठित किए गए हैं, वहां राज्य सरकार सामान्य या विशेष आदेश द्वारा उनके बीच कारबार का वितरण अवधारित कर सकेगी .

दावा अधिकरण के कर्तव्य.

५. ( १ ) दावा अधिकरण का यह कर्तव्य होगा कि संपत्ति को कारित नुकसान अवधारित करे तथा उसका उचित प्रतिकर अधिनिर्णीत करे.

( २ ) दावा अधिकरण , यदि वह ठीक समझे, जांच करने में उसकी सहायता के लिए, कोई दावा आयुक्त को ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, नियुक्त कर सकेगा.

1000 (3 )

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 22 दिसम्बर 2021

(३ ) दावा अधिकरण , ऐसी प्रक्रिया का पालन करेगा , जैसी कि विहित की जाए.

अपनाई जाने वाली प्रक्रिया.

६. ( १ ) दावा अधिकरण प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत तथा इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों का अनुपालन करेगा. दावा प्रधिकरण को अपनी कार्यवाहियों को विनियमित करने जिसमें स्थान और अपनी बैठकों का समय नियत करना सम्मिलित है, की शक्ति होगी.

(२ ) दावा अधिकरण प्रत्येक दावा आवेदन का, ऐसा आवेदन प्रस्तुत किए जाने की तारीख से यथा संभव तीन मास के भीतर विनिश्चय करेगा.

( ३ ) इस अधिनियम के अधीन दावा अधिकरण की कार्यवाहियां यथासंभव दिन प्रतिदिन के आधार पर अपने निष्कर्ष तक जारी रहेंगी.

सिविल न्यायालय की शक्ति.

७. दावा अधिकरण को सिविल प्रक्रिया संहिता , १ ९ ०८ ( १ ९ ०८ का ५ ) के अधीन समन करने, शपथ पर साक्ष्य लेने के प्रयोजन हेतु, साक्षियों की हाजिरी को सुनिश्चित करने, दस्तावेजों तथा सारवान वस्तुओं के प्रकटीकरण तथा पेश कराने हेतु बाध्य करने और ऐसे अन्य प्रयोजन के लिए जैसा कि विहित किया जाए, सिविल न्यायालय की समस्त शक्तियां होंगी और दावा अधिकरण दण्ड प्रक्रिया संहिता, १ ९ ७३ (१ ९७४ का २ ) की धारा १ ९ ५ और अध्याय XXVI के समस्त प्रयोजनों के लिए सिविल न्यायालय समझा जाएगा.

अध्याय-चार

दावा याचिका की प्रक्रिया

८. प्रतिकर के लिए प्रत्येक दावा याचिका दावा अधिकरण के गठन से ३० दिवस के भीतर प्रस्तुत की जाएगी, जब तक कि विस्तार के कारण लिखित में कथित न किए जाएं और दावा अधिकरण द्वारा अनुमति न दी जाए.

याचिका दावा प्रस्तुत करने हेतु समय -सीमा और शुल्क.

दावा याचिका में अंतर्विष्ट होगा.

९ . दावा याचिका प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति उन व्यक्तियों को, जिन्होंने उसकी जानकारी में अधिनियम के अधीन नुकसान पहुंचाने वाले कार्य का उद्दापन किया है, उकसाया है या कारित किया है, प्रत्यर्थी के रूप में सम्मिलित कर सकेगा.

दावा अधिकरण के समक्ष उपस्थिति.

१०. दावा अधिकरण मामले की सुनवाई के दौरान किसी पक्षकार को किसी विधि व्यवसायी के माध्यम से उपस्थित होने हेतु अनुज्ञात कर सकेगा.

दावा अधिकरण द्वारा आदेश.

११. ( १ ) दावा अधिकरण आदेश पारित करते समय , विरचित विवाद्यक के लिए निष्कर्ष और ऐसे निष्कर्ष के लिए कारणों को अभिलिखित करेगा और भुगतान किए जाने वाले प्रतिकर की राशि को विनिर्दिष्ट करते हुए अधिनिर्णय तैयार करेगा और ऐसा प्रतिकर उन व्यक्तियों द्वारा , संयुक्त रूप से अथवा अलग- अलग देय होगा , जिन्होंने धारा २ के खण्ड ( ग ) में उल्लिखित समूह में नुकसान पहुंचाने वाले कार्य का उद्दापन किया है , उकसाया है या कारित किया है:

परन्तु राज्य सरकार प्रतिकर की राशि को अवधारित करने के लिए नियम विहित कर सकेगी:

परन्तु यह और कि दावा अधिकरण ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किए जाएं, अधिनिर्णय कर सकेगा, जिसमें संदत्त किए जाने योग्य प्रतिकर दुगना तक हो.

(२ ) जहां उपधारा ( १ ) के अधीन दो या अधिक व्यक्तियों को प्रतिकर अधिनिर्णीत किया जाए, वहां दावा अधिकरण उनमें से प्रत्येक के लिए संदेय राशि को भी विनिर्दिष्ट करेगा.

(३ ) दावा अधिकरण , प्रतिकर हेतु दावे का निराकरण करते समय कार्यवाही में उपगत खर्चे तथा व्ययों से संबंधित ऐसा आदेश कर सकेगा , जैसा कि वह समुचित समझे.

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 22 दिसम्बर 2021

1000 (4)

प्रतिकर की राशि पर ब्याज.

१२. जहां कोई दावा अधिकरण , इस अधिनियम के अधीन प्रतिकर हेतु किए गए किसी दावे को अनुमति देता है वहां ऐसा अधिकरण यह निदेश दे सकेगा कि प्रतिकर की राशि के अतिरिक्त साधारण ब्याज का भी , ऐसी दर से तथा ऐसी तारीख से, जो दावा किए जाने की तारीख से पूर्व की न हो, जैसा कि वह इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, भुगतान किया जाए.

१३. ( १ ) आत्यंतिक दायित्व का सिद्धांत तब लागू होगा जब घटना का संबंध जिसके कारण क्षति हुई हो, स्थापित हो जाता है .

संपत्ति को हुई क्षति की राशि के निर्धारण के संबंध में सिद्धांत तथा इसका दायित्व.

(२ ) दायित्व का वहन उन व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा जिन्होंने नुकसान पहुंचाने वाले कार्य का उद्दापन किया है, उकसाया है या कारित किया है , जिससे कि उत्पन्न दायित्व , का साझा ऐसे किया जाएगा जैसा कि दावा अधिकरण द्वारा अंतिम रूप से अवधारित किया जाए.

अपील.

१४. दावा अधिकरण द्वारा पारित किसी अधिनिर्णय के विरुद्ध अपील, ऐसे अधिनिर्णय के ९ ० दिवस के भीतर उच्च न्यायालय के समक्ष की जाएगी.

भू-राजस्व के बकाया के रूप में राशिकी वसूली.

१५. जहां किसी अधिनिर्णय के अधीन किसी व्यक्ति से शोध्य कोई राशि ऐसे अधिनिर्णय के १५ दिवस के भीतर जमा नहीं की जाती है, वहां दावा अधिकरण , कलक्टर को उस राशि हेतु प्रमाण - पत्र जारी करेगा जो उसकी वसूली भू- राजस्व के बकाया के रूप में करेगा.

सिविल न्यायालय की अधिकारिता वर्जन.

१६. जहां किसी क्षेत्र के लिए कोई दावा अधिकरण गठित किया गया है, वहां किसी सिविल न्यायालय को प्रतिकर का के लिए किसी दावे के संबंध में कोई प्रश्न ग्रहण करने की अधिकारिता नहीं होगी , जिसका कि न्यायनिर्णयन उस क्षेत्र के दावा अधिकरण द्वारा किया जाना हो और प्रतिकर हेतु दावे के संबंध में दावा अधिकरण द्वारा या उसके समक्ष की गई अथवा की जाने वाली किसी कार्रवाई के संबंध में कोई व्यादेश सिविल न्यायालय द्वारा नहीं दिया जाएगा .

१७. नुकसान पहुंचाने वाले कार्य से संबंधित दावा याचिका की कार्यवाहियां यदि कोई हों, दाण्डिक कार्यवाहियों, द्वारा वर्जित नहीं होंगी.

दाण्डि क कार्यवाहियों का वर्जन न होना. स‌द्भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण.

१८. इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए किसी प्राधिकृत व्यक्ति के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्रवाई, नहीं होगी.

अध्याय-पांच

प्रकीर्ण

१९ . ( १ ) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , इस अधिनियम के उपबंधों को क्रियान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी.

नियम बनाने की शक्ति.

( २ ) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, उसके बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा.

कठिनाइयां दूर करने कीशक्ति.

२०. ( १ ) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उद्भूत होती है, तो राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित किसी आदेश द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों से अनअसंगत , कोई भी बात कर सकेगी , जो उसे कठिनाई दूर करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत होः

परन्तु ऐसा आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख से दो वर्ष की कालावधि के समाप्त होने के पश्चात् नहीं किया जाएगा.

(२ ) उपधारा ( १ ) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश , उसके बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र राज्य विधान- मण्डल के समक्ष रखा जाएगा.

1000 (5)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 22 दिसम्बर 2021

उद्देश्यों और कारणों का कथन

निर्णयों की श्रृंखला ( इन . रीः डिस्ट्रक्शन ऑफ पब्लिक एण्ड प्राईवेट प्रापर्टीज विरूद्ध आन्ध्रप्रदेश राज्य एवं अन्य, ( २००९ ) ५ एस सी सी २१२ , कोशी जेकब विरूद्ध भारत संघ ( २०१८ ) , ११ एस सी सी ७५६ और कोडुंगलूर फिल्म सोसाइटी विरूद्ध भारत संघ ( २०१८ ) , १० एस सी सी ७१३ ) में, भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने लोक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, १ ९८४ (१ ९८४ का ३ ) के उपबंधों को अपर्याप्त तथा अप्रभावी पाया है . सर्वोच्च न्यायालय ने इसे कठोर तथा भयोपरत बनाने के लिए सरकारों को भी विधि को संशोधित करने हेतु निर्देशित किया है.

२. वर्ष २००७ में, भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न घटनाओं का स्वप्रेरणा से संज्ञान लिया है, जहां आंदोलन, बंद , हड़ताल या उसके समान गतिविधियों के नाम पर सार्वजनिक तथा निजी संपत्ति को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया गया था और विधि में परिवर्तन हेतु सुझाव देने के लिए, सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति के. टी. थामस तथा वरिष्ठ अधिवक्ता श्री फाली नरिमन की अध्यक्षता में दो समितियां गठित की थीं. वर्ष २०० ९ में, इन. रीः डिस्ट्रक्शन ऑफ पब्लिक एण्ड प्राईवेट प्रापर्टीज विरूद्ध आन्ध्रप्रदेश राज्य व अन्य के मामले में, उच्चतम न्यायालय ने दो विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशों के आधार पर दिशानिर्देश जारी किए थे.

३. अब मध्यप्रदेश राज्य, इन. रीः डिस्ट्रक्शन ऑफ पब्लिक एण्ड प्राईवेट प्रापर्टीज विरूद्ध आन्ध्रप्रदेश राज्य व अन्य में की गई सिफारिशों तथा दिए गए निर्देशों के आधार पर हड़ताल, बंद, दंगों ( सांप्रदायिक या अन्यथा ) , लोक अशांति, अभ्यापत्ति के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर बर्बरता , पत्थर फेंकने, आगजनी, हिंसा के समस्त कार्यों का प्रभावी रूप से सामना करने , इसकी पुनरावृत्ति तथा प्रसार को नियंत्रित करने और इसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक तथा प्रसार को नियंत्रित करने और सार्वजनिक तथा निजी संपत्ति को होने वाले नुकसान तथा क्षति को रोकने तथा कम करने हेतु विधि को अधिनियमित करना प्रस्तावित करती है. विधेयक सार्वजनिक तथा निजी संपत्ति को हुए नुकसान को निर्धारित करने तथा अपराधी से इन नुकसानों को वसूल करने का प्रयास करता है.

४. प्रस्तावित अधिनियमिति आंदोलन या अन्य प्रकार की अध्यापत्तियों के दौरान बर्बरता या सार्वजनिक/ निजी संपत्ति को नष्ट करने से पूर्वेक्षित अतिक्रमणकारी को भयोपरत करना चाहता है. अधिक महत्वपूर्ण यह है कि प्रस्तावित अधिनियमिति इन संगठनों के पदाधिकारियों को भी भयोपरत करेगी.

५. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र भोपाल :

भारसाधक सदस्य.

तारीख १७ दिसम्बर, २०२१ मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 22 दिसम्बर 2021

1000 ( 6)

प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन

प्रस्तावित विधेयक के जिन खण्डों द्वारा राज्य शासन को विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन किया जा रहा है , उनका विवरण निम्नानुसार है:-

खण्ड ३- द्वारा दावा याचिका में प्रतिकर अधिनिर्णीत करने तथा प्राधिकरण के समक्ष दावा याचिका प्रस्तुत किये जाने की रीति विहित किए जाने;

खण्ड ४ ( १ ) - द्वारा संपत्ति को नुकसान के संबंध में , प्रतिकर हेतु दावों के न्यायनिर्णयन के प्रयोजन के लिए कालावधि तथा क्षेत्र के लिए दावा अधिकरण गठित करने की अधिसूचना जारी किए जाने;

( २ ) - दावा अधिकरण के सदस्यों की नियुक्ति के लिए;

खण्ड ५ ( १ ) - द्वारा संपत्ति को कारित नुकसान अवधारित करने तथा उसका उचित प्रतिकर अधिनिर्णीत करने;

(२ ) -दावा अधिकरण की सहायता के लिए दावा आयुक्त नियुक्त करने;

खण्ड ११ ( ३ ) - द्वारा दावा अधिकरण को प्रतिकर हेत दावे का निराकरण करते समय कार्यवाही में उपगत खर्चे तथा व्ययों से संबंधित आदेश करने;

खण्ड १२ -द्वारा प्रतिकर की राशि पर ब्याज की दर निर्धारित करने ;

खण्ड १३ ( २ ) - द्वारा संपत्ति को हुई क्षति की राशि के निर्धारण के संबंध में सिद्धांत तथा दायित्व निर्धारित करने ;

खण्ड १ ९ ( १ ) - द्वारा अधिनियम के उपबंधों को क्रियान्वित करने ; तथा

खण्ड २० ( १ ) - द्वारा अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में उद्भूत कठिनाई को दूर करने ,

के संबंध में नियम बनाये जाएंगे , जो सामान्य स्वरूप के होंगे .

ए. पी. सिंह

प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2021 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 22 December 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2021-12-22.500.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2021-12-22.500.Extraordinary.