Servants of Knowledge
Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

श्री सचिन बिरला, सदस्‍य मध्‍यप्रदेश विधान सभा (निर्वाचन क्षेत्र क्र.182 -बडवाह) को निरर्ह घोषित करने के संबध में...

Published 29 December 2021

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
521
Identifier
in.gazette.madhya.2021-12-29.521.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

इसे वेबसाईट www.govtpressmp.nic.in से भी डाउन लोड किया जा सकता है.

मध्यप्रदेश शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

भोपाल, बुधवार, दिनांक 29 दिसम्बर 2021- पौष 8 , शक 1943

क्रमांक 521 ]

मध्यप्रदेश विधान सभा सचिवालय

बुधवार, दिनांक 29 दिसम्बर, 2021 ( पौष 8 , 1943)

क्रमांक 20758 - मप्रविस -15- विधान-2021 .- श्री गिरीश गौतम, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश विधान सभा ने भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 6 ( 1 ) के अधीन प्राप्त शक्तियों के अनुसरण में डॉ. गोविन्द सिंह , सदस्य, मध्यप्रदेश विधान सभा की ओर से, मध्यप्रदेश विधान सभा सदस्य ( दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता ) नियम, 1986 के अन्तर्गत श्री सचिन बिरला, सदस्य, मध्यप्रदेश विधान सभा (निर्वाचन क्षेत्र क्र. 182- बड़वाह ) को निरर्ह घोषित करने के संबंध में प्राप्त अर्जी के परिप्रेक्ष्य में समस्त तथ्यों पर विचारोपरान्त यह विनिश्चय किया है कि-

उक्त अर्जी में प्रथम दृष्टया नियम, 1986 के नियम 6 ( 6 ) एवं 6 ( 7 ) का अनुपालन नहीं किया गया है. दिनांक 10 नवम्बर 2021 को अर्जीदार द्वारा यह निवेदन किया गया है कि 09 नवम्बर 2021 की अर्जी में कुछ दस्तावेज की कमी रह गयी है . अतः उस पर अग्रिम कार्यवाही न की जाये और यथासंभव हो तो अर्जी वापस देने का कष्ट करें.

दिनांक 25 नवम्बर 2021 को अर्जीदार द्वारा पुनः आवेदन प्रस्तुत किया गया जिसके द्वारा 09 नवम्बर 2021 की अर्जी के समर्थन में दिनांक 09 नवम्बर 2021 को निष्पादित शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया है और उक्त आधार पर श्री सचिन बिरला, सदस्य की निरर्हता के संबंध में आदेश का निवेदन किया गया है. अर्जी का अनुशीलन किया और अर्जीदार को पर्याप्त अवसर देने के बाद भी प्रथम दृष्टया अर्जी में मध्यप्रदेश विधान सभा सदस्य ( दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता ) नियम, 1986 के नियम 6 का अनुपालन नहीं किया जाना पाया जाता है.

मध्यप्रदेश विधान सभा सदस्य ( दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता ) नियम, 1986 का नियम निम्नानुसार है:-

नियम-6 निर्देश का अर्जी द्वारा किया जाना-

( 1 ) कोई सदस्य दसवीं अनुसूची के अधीन निरर्हता से ग्रस्त हो गया है , या नहीं इस प्रश्न का निदेशं उस सदस्य के संबंध में इस नियम के उपबंधों के अनुसार दी गई अर्जी द्वारा ही किया जायेगा अन्यथा नहीं.

(2) किसी सदस्य के संबंध में कोई अर्जी किसी अन्य सदस्य द्वारा अध्यक्ष को लिखित रूप में दी जा सकेगी: परन्तु अध्यक्ष के संबंध में कोई अर्जी प्रमुख सचिव /सचिव को सम्बोधित की जायेगी.

1041 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 29 दिसम्बर 2021

1042

(3) प्रमुख सचिव/सचिव-

उपनियम (2 ) के परन्तुक के अधीन दी गई अर्जी की प्राप्ति के पश्चात् यथाशीघ्र, उसके बारे में सदन को एक रिपोर्ट (क)

देगा, और

(ख ) दसवीं अनुसूची के पैरा 6 के उप- पैरा ( 1 ) के परन्तुक के अनुसरण में, सदन द्वारा किसी सदस्य के निर्वाचित किये जाने के पश्चात्अर्जी को यथाशीघ्र उस सदस्य के समक्ष प्रस्तुत करेगा.

(4) किसी सदस्य के संबंध में कोई अर्जी देने से पूर्व, अर्जीदार अपना समाधान करेगा कि यह विश्वास करने के युक्तियुक्त आधार है कि यह प्रश्न उठता है कि क्या वह सदस्य दसवीं अनुसूची के अधीन निरर्हता से ग्रस्त हो गया है या नहीं.

(5) प्रत्येक अर्जी-

(क) अर्जी में उन सात्विक तथ्यों का संक्षिप्त विवरण होगा, जिन पर अर्जीदार निर्भर करता है , और

(ख ) अर्जी के साथ ऐसे दस्तावेज साक्ष्य की, यदि कोई हो, प्रतियां संलग्न होंगी जिस पर अर्जीदार निर्भर करता है और जहां अर्जीदार किसी व्यक्ति द्वारा उसे दी गई किसी जानकारी पर निर्भर करता है, वहां उन व्यक्तियों के नाम और पते सहित विवरण और ऐसे प्रत्येक व्यक्ति द्वारा दी गई ऐसी जानकारी का सारांश संलग्न होगा.

(6) प्रत्येक अर्जी पर अर्जीदार के हस्ताक्षर होंगे और उसे , अभिवचनों के सत्यापन के लिये सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5 ) में अधिकथित रीति से सत्यापित किया जायेगा.

(7) अर्जी के प्रत्येक उपाबंध पर भी अर्जीदार के हस्ताक्षर होंगे और उसे अर्जी के समान रीति से सत्यापित किया जायेगा.

अर्जीदार द्वारा प्रस्तुत अर्जी के अनुशीलन से स्पष्ट होता है कि नियम, 1986 के नियम 6 के उपनियम ( 6 ) के अनुसार अर्जी पर अर्जीदार के हस्ताक्षर तो हैं लेकिन उस पर किये गये अभिवचनों का सत्यापन सिविल प्रक्रिया संहिता , 1908 के आदेश 6 नियम 15 के प्रावधान के अंतर्गत नहीं किये गये हैं, अर्जी में सत्यापन का पूरी तरह से लोप है. इसी तरह अर्जी के साथ लगाये गये दस्तावेजों/उपबंध का भी सत्यापन नियम, 1986 के नियम 6 (7 ) के रीति अनुसार नहीं किया गया है . उपबंधों दस्तावेजों पर भी अर्जीदार के सिर्फ हस्ताक्षर हैं, लेकिन सत्यापन नहीं किया गया है.

अर्जी के साथ प्रस्तुत शपथ- पत्र भी त्रुटिपूर्ण है. शपथ- पत्र 09-11-2021 के आवेदन के समर्थन में दिये जाने का उल्लेख सिर्फ 25-11-2021 के पत्र में है लेकिन शपथ- पत्र के अवलोकन से ये स्पष्ट नहीं होता है कि वह शपथ- पत्र 09-11-2021 के आवेदन के समर्थन में दिया गया है. इसके अतिरिक्त क्योंकि यह शपथ - पत्र 09 नवम्बर 2021 को निष्पादित किया गया है इसके बाद भी उक्त दिनांक को अर्जी के साथ शपथ - पत्र क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया ? इसके स्पष्टीकरण का भी अभाव है.

शपथ- पत्र की कंडिका 3 के अनुसार अर्जीदार की अर्जी में वर्णित सरल क्रमांक 1 से 5 तक अर्जीदार की निजी जानकारी के अनुसार सत्य है लेकिन अर्जी में किये गये अभिवचनों के अवलोकन से प्रथम दृष्टया ये स्पष्ट है कि अर्जी के अभिवचन निजी ज्ञान पर आधारित न होकर दूसरे स्त्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं. माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा स्टेट बैंक ऑफ बाम्बे विरुद्ध पुरूषोत्तम जास नाईक AIR 1952 SC 317 में यह प्रतिपादित किया गया है कि यदि शपथ- पत्र के किये गये अभिवचन शपथ की कंडिकाओं अभिवचनों से मेल न खाते हों तो शपथ- पत्र त्रुटिपूर्ण है और उनको ग्राह्य नहीं किया जा सकता. प्रस्तुत अर्जी दिनांक 09 नवम्बर 2021 की कंडिका 3 से सर्वथा भिन्न है.

इसके अतिरिक्त शपथ- पत्र के सत्यापन में अर्जीदार का कथन है कि शिकायत की कंडिका 1 से 5 तक उसके द्वारा प्राप्त व्यक्तिगत ज्ञान अनुसार और समस्त जानकारी के आधार पर आधारित है. जिसके सत्य होने पर उन्हें विश्वास है. अतः स्पष्ट है कि शपथ- पत्र का सत्यापन शपथ- पत्र की कंडिका 2 से भिन्न है क्योंकि कंडिका 3 के अनुसार अर्जी में वर्णित 1 से 5 शपथकर्ता की निजी जानकारी से सत्य है. परन्तु सत्यापन में उल्लेख अनुसार उक्त कंडिकाएं व्यक्तिगत ज्ञान एवं प्राप्त जानकारी के आधार पर सत्य हैं, अतः विरोधाभाषी कथन किये गये हैं. इसके अतिरिक्त शपथ- पत्र के सत्यापन में कौन सी कंडिका व्यक्तिगत ज्ञान और कौन सी कंडिका प्राप्त जानकारी पर आधारित है इसका स्पष्ट विवरण नहीं है . माननीय उच्चतम न्यायालय ने बल्देव सिंह बनाम सिंदरपाल सिंह एवं अन्य ( 2007 ) 1 SCC 341 में यह प्रतिपादित किया गया है कि सत्यापन में शपथकर्ता को स्पष्ट करने की अपेक्षा है कि कौन सी कंडिका व्यक्तिगत ज्ञान पर आधारित है और कौन सी कंडिका उसके अर्जित ज्ञान पर आधारित है और स्पष्ट तौर से निर्णित किया गया है कि तथ्यात्मक अभिवचन , व्यक्तिगत ज्ञान और प्राप्त जानकारियों दोनों पर कभी भी आधारित नहीं हो सकता.

1042(1)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 29 दिसम्बर 2021

नियम, 1986 के नियम 6 ( 4 ) यह उपबंधित करता है कि अर्जी देने के पूर्व अर्जीदार अपना यह समाधान करेगा कि विश्वास करने के युक्तियुक्त आधार हैं कि यह प्रश्न उठता है कि क्या वह सदस्य दसवीं अनुसूची के आधार पर निरर्हता से ग्रस्त हो गया है. प्रस्तुत प्रकरण में विधिवत सत्यापन नहीं होने से शपथ - पत्र त्रुटिपूर्ण है. जिससे उक्त नियम का अनुपालन किया जाना नहीं पाया जाता है.

प्रस्तुत अर्जी के साथ समाचार - पत्रों की कटिंग , कुछ काम्पेक्ट डिस्क (CD ) एवं सोशल मीडिया एकाउंट प्रस्तुत किये गये हैं. लेकिन इन दस्तावेजों के साथ नियम, 1986 के नियम 6 (5 ) ( ख ) के अनुपालन में न तो समाचार पत्रों का विधिवत विवरण दिया गया है और न ही सोशल मीडिया एकाउंट URL/Web Address प्रस्तुत किये गये हैं. अतः नियम 6 ( 5 ) का पालन किया जाना भी नहीं पाया गया है. उपरोक्त स्थिति में यह स्पष्ट है कि अर्जीदार को पर्याप्त अवसर देने के बाद भी नियम, 1986 के नियम 6 के अनुसार अर्जी प्रस्तुत नहीं की गई है .

अतः विचारोपरान्त विचाराधीन अर्जी याचिका में मध्यप्रदेश विधान सभा सदस्य ( दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता ) नियम , 1986 में उल्लिखित उक्तानुसार अपेक्षाओं का अनुपालन नहीं होने से मध्यप्रदेश विधान सभा सदस्य ( दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता ) नियम, 1986 के नियम 7 ( 2 ) के अधीन अर्जी को एतद्वारा निरस्त किया गया है.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2021 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 29 December 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2021-12-29.521.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2021-12-29.521.Extraordinary.