ध्य प्रदेश शासन
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल , मंगलवार, दिनांक 25 जनवरी 2022- माघ 5, शक 1943
क्रमांक 47]
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल , दिनांक 25 जनवरी 2022
एफ-2-6-2021 - बाईस पं.-1. नियमों का निम्नलिखित प्रारूप जिसके राज्य सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम , 2005 (2005 का 42) की धारा 20 की उपधारा (1 ) तथा (2 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए तथा इस निमित्त पूर्व में जारी की गई अधिसूचना दिनांक 28 जून 2013 को अतिष्ठित करते हुए बनाना प्रस्तावित करती है तथा ग्रामीण विकास विभाग भारत सरकार के उक्त अधिनियम की धारा 27 की उपधारा (1 ) के अधीन जारी क्रमांक J11060-54-2020- RE - III (373836) एनआरईजीए के अनुसार उक्त अधिनियम की धारा 32 (1 ) द्वारा अपेक्षित किए गए अनुसार उन समस्त व्यक्तियों की जानकारी के लिए जिनके कि उससे प्रभावित होने की संभावना है एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है और एतद्वारा यह सूचना दी जाती है. उक्त नियमों के प्रारूप के मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशन होने की तारीख से 30 दिवस का अवसान होने पर विचार किया जाएगा.
किसी भी ऐसी आपत्ति या सुझाव जो उक्त प्रारूप संशोधन के संबंध किसी भी व्यक्ति से, ऊपर विनिर्दिष्ट कालावधि का अवसान होने पर या उसके पूर्व प्राप्त हो राज्य सरकार द्वारा विचार किया जाएगा.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 25 जनवरी 2022
प्रारूप नियम
अध्याय एक
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
(1 ) इन नियमों का संक्षिप्त नाम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (लोकपाल की नियुक्ति शक्तियां एवं कर्तव्य) मध्यप्रदेश नियम 2021 है।
(2) थे मध्यप्रदेश राजपत्र में उनके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत होंगे।
2. लागू होना.
ये नियम प्राप्त शिकायतों पर लागू होंगे तथा इनका विस्तार सम्पूर्ण मध्यप्रदेश राज्य पर होगा ।
3. परिभाषाएं.-
इन नियमों में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) "अधिनियम" से अभिप्रेत है महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005;
(ख) "अधिनिर्णय" से अभिप्रेत है इन नियमों के अधीन नियुक्त लोकपाल द्वारा पारित अधिनिर्णय;
(ग) "सक्षम प्रतिनिधि" से अभिप्रेत है ऐसा व्यक्ति जो शिकायतकर्ता द्वारा सम्यक् रूप से प्राधिकृत किया गया हो तथा जो लोकपाल के समक्ष कार्यवाहियों के लिए उसका प्रतिनिधि हो;
(घ) "शिकायत" से अभिप्रेत है नियम 12 के अधीन मौखिक या लिखित शिकायत जिसमें स्कीम वर्कर अथवा प्राधिकारी के कुप्रशासन के परिणामस्वरूप घातक अन्याय अथवा आकस्मिक कष्ट से होने वाले दावे सम्मिलित हैं;
(ड) "पदाधिकारी" से अभिप्रेत है मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 ( क्रमांक 1 सन् 1994) के अधीन किसी ग्राम पंचायत का कोई सरपंच या उप सरपंच;
(च) "लोकपाल" से अभिप्रेत है लोकपाल के रूप में कार्य कर रहा कोई व्यक्ति :
(छ) "स्कीम वर्कर या प्राधिकारी " से अभिप्रेत है कोई व्यक्ति या व्यक्ति जिसे योजना के अधीन शक्तियां और कर्तव्य सौंपे गए हों;
(ज) "राज्य सरकार " से अभिप्रेत है मध्यप्रदेश सरकार ।
अध्याय- दो
योजना का लोकपाल
4. योजना के लोकपाल की अधिकारिता, पदावधि, स्वायत्तता , पारिश्रमिक, कार्यालय , तकनीकी तथा प्रशासनिक सहायता.-
(1) राज्य सरकार प्रत्येक जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी लोकपाल की नियुक्ति करेगी ( लेकिन पिछले 02 वर्षों में प्रदेश में औसत घ्यय से कम व्यय वाले जिलों एक ही लोकपाल रखने के लिए एक साथ जोड़ा जा सकेगा ) । मनरेगा गारंटी के अधीन कम खर्चे वाले छोटे जिलों को एक साथ जोड़ा जा सकेगा।
लोकपाल के लिए चयन समिति में निम्नलिखित सदस्य होंगे:-
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राज्य के मुख्य सचिव द्वारा इस प्रयोजन के लिए नामनिर्दिष्ट अपर मुख्य सचिव अध्यक्ष;
केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय का प्रतिनिधि सदस्य;
(केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नामनिर्दिष्ट सिविल सोसायटी का प्रख्यात व्यक्ति)- सदस्य;
प्रमुख सचिव/ सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग - संयोजक सदस्य ।
(2) राज्य सरकार चयन समिति की अनुशंसा के पश्चात् लोकपाल की नियुक्ति करेगी । चयन समिति, को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् असंतोष जनक प्रदर्शन की दशा में लोकपाल को इसके पद से हटाये जाने की अनुशंसा करने का अधिकार होगा ।
(3) लोकपाल के लिए उपयुक्त व्यक्ति का चयन चली आ रही ख्याति, निशकलंक निष्ठा के साथ लोक प्रशासन , विधि, अकादमिक , सामाजिक कार्य अथवा , प्रबंधन में कम से कम दस वर्षों के अनुभव पर आवेदन के साथ प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के अनुसार विचार किया जाएगा । व्यक्तियों या सामुदायिक संगठनों में कार्य करने वाले को अधिमान्यता/ महत्व दिया जाएगा। कोई व्यक्ति जो मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल या प्रतिबंधित संगठन का सदस्य है लोकपाल के रूप में नियुक्ति के लिए विचार नहीं किया जाएगा । प्रत्येक व्यक्ति को इस आशय की घोषणा आवेदन के साथ प्रस्तुत करना अपेक्षित होगा । लोकपाल के रूप मे चयनित होने वाला व्यक्ति शारीरिक रूप से सक्रिय तथा जिले में दूरस्थ ग्रामीण अवस्थिति का क्षेत्र भ्रमण (दौरा ) करने में समर्थ होना चाहिए ।
(4) आवेदक को संबंधित क्षेत्र में कम-से - कम दस वर्षों का अनुभव होना चाहिए। यह उसके द्वारा आवेदन के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों से परिलक्षित होना चाहिए। व्यक्ति या सामुदायिक संगठन के साथ कार्य करने का अनुभव एक वाध्यता है ।
(5) लोकपाल के चयन में ऐसे व्यक्ति को प्राथमिकता दी जाएगी जो उसी या पड़ोसी जिले का निवासी हो।
(6) आवेदन खुले विज्ञापन के माध्यम से आंमत्रित किए जाएंगे । पद के लिए आवेदन राज्य सरकार द्वारा विहित प्रपत्र पर आमंत्रित किए जाएंगे। चयन समिति प्राप्त आवेदनों के आधार पर , उपयुक्त व्यक्तियों का जिला वार पैनल लोकपाल के रूप में नियुक्ति के लिए विचार करने के लिए तैयार करेगी तथा वरीयता के क्रम में उन्हें श्रेणीवृद्ध करेगा। कोई लिखित परीक्षण या परीक्षा आयोजित नही की जाएगी , जबकि एक साक्षात्कार और आंतरिक अंकन प्रणाली को चयन समिति द्वारा विकसित किया जाना चाहिए । नियुक्ति के पूर्व चयन समिति द्वारा तैयार पैनल राज्य की आधिकारिक वेबसाईट और नोडल विभाग की आधिकारिक वेबसाईट पर जनता से टिप्पणियां आमंत्रित करने के लिए प्रकाशित किया जाएगा। प्रकाशन के 30 ( तीस ) दिवस का अवसान होने पर , प्राप्त टिप्पणियों का चयन समिति द्वारा परीक्षण किया जा सकता है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 25 जनवरी 2022
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टिप्पणियों को आमंत्रित करने की अवधि समाप्त होने की तिथि से 30 तीस दिनों के भीतर सभी टिप्पणियों तथा आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा । बेनामी और छद्म नाम वाली टिप्पणियों और आपत्तियों पर तब तक विचार नहीं किया जाएगा जब तक कि उनमें ऐसे आरोप न हों जिन्हें बिना किसी अतिरिक्त जांच के आधिकारिक अभिलेख से आसानी से सत्यापित किया जा सकता है ।
(7) पात्र व्यक्तियों का अनुमोदित जिलावार पैनल 2 (दो) वर्षों के लिए वैध होगा, जिसे दो बार एक वर्ष से अधिक नही बढ़ाया जाएगा । त्याग पत्र , हटाने, मृत्यु आदि के कारण कोई रिक्ति होने की दशा में, अनुमोदित पैनल में अगले व्यक्ति को लोकपाल के रूप में नियुक्ति का प्रस्ताव चयन समिति की नयी बैठक बुलाए बिना किया जाएगा । लोकपाल 2 ( दो) वर्ष के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया जाएगा जिसे प्रदर्शन मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर दो बार एक-एक वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जाएगा या जब तक कि 68 (अइसठ) वर्ष की आयु प्राप्त नही हो जाती, जो भी पहले हो । कोई पुनर्नियुक्ति नहीं की जाएगी ।
(8) नियुक्ति के लिए पैनल से चुने गए व्यक्ति को एक रिक्ति के विरुद्ध उन्हें विनिर्दिष्ट जिले के लिए लोकपाल नियुक्त करने के लिए एक पत्र जारी किया जाएगा और उसमें ऐसी नियुक्ति की निबंधन और शर्तों का उल्लेख किया जाएगा ।
(9) राज्य सरकार लोकपाल के लाभ के लिए मनरेगा अधिनियम और परिचालन दिशा निर्देशों के साथ संबंधित प्रक्रियाओं में निहित अधिकारों से परिचित कराने के लिए उन्मुखीकरण प्रशिक्षण का आयोजन करेगी। ऐसा उन्मुखीकरण उनकी नियुक्ति की तारीख से एक महीने आयोजित किया जाना चाहिए ।
( 10 ) राज्य सरकार द्वारा चयन समिति की अनुशंसा पर लोकपाल को पर्यवसित किया जा सकेगा । चयन समिति उसकी अनुशंसा के कारणों को अभिलिखित करेगी । ऐसी अनुशंसा राज्य सरकार के मुख्य सचिव को की जाएगी जिस पर वह समुचित आदेश पारित करेगा। लोकपाल एक माह का नोटिस देकर लोकपाल का कार्य त्यागने के अपने आशय को सूचित करेगा ।
(11 ) किसी पीड़ित पक्षकार द्वारा जिसमें मनरेगा के प्राधिकारी या मनरेगा हितग्राही भी शामिल है लोकपाल के विरुद्ध लिखित और हस्ताक्षरित तथ्यों और दस्तावेजी साक्ष्यों द्वारा समर्थित शिकायत राज्य के मुख्य सचिव तथा प्रमुख सचिव , ग्रामीण विकास विभाग को की जा सकेगी । वेनामी , छद्म नाम वाली ओर तुच्छ शिकायतों पर तब तक विचार नहीं किया जाना चाहिए जब तक कि उनमें प्रथम दृष्टया ऐसा आक्षेप न हो उनमें प्रथम दृष्टया ऐसा आक्षेप न हो जिसे आगे जांच के बिना आधिकारिक दस्तावेजी रिकार्ड से सत्यापित किया जा सकता है । 94(3)
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5. लोकपाल की स्वायत्तता.-
महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम और इन निर्देशों के अलावा केन्द्र या राज्य सरकार के अधिकारियों को किसी लोकपाल को उसके कर्तव्य निर्वहन के संबंध में अनुदेश और निर्देश जारी करने का अधिकार नहीं होगा ।
6. पारिश्रमिक.-
(1) राज्य सरकार द्वारा किसी अधिसूचना के अध्यधीन रहते हुए लोकपाल को शुल्क के रूप में रूपए 1000/- ( एक हजार ) प्रति बैठक के साथ अधिकतम ऊपरी सीमा 20,000 ( बीस हजार ) प्रतिमाह पारिश्रमिक अनुज्ञात किया जाएगा । (2) बैठक का अर्थ है प्रतिदिन कार्य करना चाहे जितने भी मामले प्रबंधित किए गए हों और कार्य के घंटों के संदर्भ में इसकी अवधि । बैठक एक दिन के एक भाग के लिए भी हो सकती है । सभी बैठकें ठीक से प्रलेखित होनी चाहिए तथा किए गए कार्य द्वारा उसे न्यायोचित होना चाहिए । लोकपाल द्वारा बैठक की आवृति आवश्यकता आधारित होगी तथा नियत नही की जा सकेगी । बैठने के स्थान का विनिश्चय लोकपाल द्वारा संबंधित मरनेगा के श्रमिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।
(3) राज्य सरकार अपने स्वयं के वित्तीय संसाधनों से या तो बैठक शुल्क या अधिकतम ऊपरी सीमा के संबंध में मंत्रालय द्वारा निर्धारित बैठक शुल्क के अलावा लोकपाल को अतिरिक्त रकम का भुगतान कर सकेगी ।
(4) राज्य सरकार द्वारा बैठक शुल्क तथा भत्ते का भुगतान समय पर किया जाएगा । जब भी लोकपाल किसी जिले के किसी भाग में क्षेत्र जांच करने के प्रयोजन से निरीक्षण करने जाना चाहेंगे तो डी पी सी उपयुक्त परिवहन सुविधा उपलब्ध करायेगा।
7. क्षेत्रीय अधिकारिता.-
(1) किसी लोकपाल के साधारण अवकाश सहित किसी कारण से जिले में उपलब्ध नही होने की दशा में , निकटवर्ती जिले के लोकपाल को जिले का समस्त या कोई कार्य दिया जा सकेगा जैसा कि विनिर्दिष्ट किया जाए ।
(2) सेवा समाप्त होने, त्याग देने की दशा में निकटवर्ती जिले के लोकपाल को नई नियुक्ति होने तक जिले का प्रभार दिया जा सकेगा जो रिक्ति की तारीख से तीन माह से अधिक नहीं होगा ।
8. कार्यालय का स्थान तथा प्रशासनिक सहयोग.-
.(1) योजना के लोकपाल का कार्यालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी , जिला पंचायत के कार्यालय में अवस्थित होगा। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 25 जनवरी 2022
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(2) इस संबंध में डी आर डी ए या राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट अन्य निकाय द्वारा तकनीकी तथा प्रशासनिक सहायता प्रदान की जाएगी। लोकपाल को सौंपे गए कृत्यों को कार्यान्वित करने में सक्षम बनाने के लिए सहायक कर्मचारी वृन्द सहिल , कार्यालय उपकरण शिकायत पेटी, तथा टेलीफोन इंत्यादि उपलब्ध कराया जाएगा ।
9. टी ए/डी ए तथा परिवहन.- ( 1 ) राज्य सरकार के प्रथम श्रेणी अधिकारियों को अनुज्ञेय दरों पर टी ए/डी ए अनुज्ञात किया जाएगा। ऐसी कोई एक समान दर उपलब्ध नहीं होने की दशा में, राज्य सरकार इस प्रयोजन के लिए दरें नियत कर सकेगी । राज्य सरकार आवश्यकता होने पर स्थानीय पूल में से वाहन उपलब्ध कराएगी। तथापि मनरेगा निधि से लोकपाल के उपयोग के लिए कोई नया वाहन नहीं खरीदा जाएगा। आधिकारिक उद्देश्य के लिए अपने स्वयं के या किराए के वाहन से लोकपाल द्वारा यात्रा की दशा में संबंधित जिला, राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर यात्रा की लागत की प्रतिपूर्ति कर सकता है ।
(2) लोकपाल के कार्यालय पर होने वाला कार्यालय व्यय बैठक शुल्क और टी ए/डी ए आदि मनरेगा की धारा 22 (1 ) ( सी ) के अधीन अनुमत 6 प्रतिशत प्रशासनिक व्यय से राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा ।
अध्याय - तीन
10. लोकपाल की शक्तियां तथा उत्तरदायित्व.-
(1) योजना के लोकपाल को निम्नलिखित शक्तियां होगी, अर्थात्:-
(क) नियम 7 में विनिर्दिष्ट किसी एक या अधिक मुद्दों पर योजना कार्यकर्ताओं और अन्य व्यक्तियों से शिकायतें प्राप्त करना;
(ख
) शिकायतों पर विचार करना और इन नियमों के अनुसार उनके निपटारे की सुविधा प्रदान करना;
(ग) राज्य के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को समन करने तथा हाजिर कराने तथा उनका शपथ पर परीक्षण करना;
( घ) किसी दस्तावेज को खोजने तथा प्रस्तुत करने की अपेक्षा करना;
(ड.) शपथ पत्र पर साक्ष्य लेना;
(च) किसी कार्यालय से लोकअभिलेख या उसकी प्रति प्राप्त करना;
(छ) साक्षियों तथा दस्तावेजों के परीक्षण के लिए कमीशन जारी करना।
(2) लोकपाल शिकायत की विषय वस्तु से संबंधित कोई जानकारी प्रदान करने तथा किसी भी दस्तावेज की प्रमाणित प्रतिलिपि प्रस्तुत करने के लिए योजना प्राधिकारियों से अपेक्षा कर सकेगा जो उसके कब्जे में है या उसके कब्जे में होने का आरोप लगाया गया है :
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 25 जनवरी 2022
94(5) परन्तु ऐसे प्राधिकारी के बिना किसी पर्याप्त कारण के मांग के अनुपालन में विफलता की दशा में , योजना के लोकपाल यदि वह उचित समझे यह निष्कर्ष निकाल सकेगा कि जानकारी , यदि प्रदान की जाती है या प्रतियां यदि प्रस्तुत की जाती है, तो सबंधित योजना प्राधिकारी के प्रतिकूल होंगी।
(3) लोकपाल मौके पर जांच करने के लिए निर्देश जारी कर सकता है ।
(4) लोकपाल अपने क्षेत्राधिकार में उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति जिस के कारण कोई शिकायत हो सकती है स्वप्ररेणा से कार्यवाही शुरू कर सकता है ।
(
5) लोकपाल शिकायत के निपटारे को सुकर बनाने के लिए विशेषज्ञों को नियुक्त कर सकता है ।
(6) लोकपाल किसी शिकायत का अन्वेषण कर सकता है और उसके निष्कर्ष की रिपोर्ट राज्य सरकार को दे सकता है और समुचित समझे जाने पर अनुशासनात्मक और दण्डात्मक कार्रवाई की सिफारिश भी कर सकेगा ।
11. लोकपाल के कर्तव्य. लोकपाल के निम्नलिखित कर्तव्य होंगे, अर्थात्: -
(क) वह अपने कार्यालय में कामकाज के संचालन के प्रति उत्तरदायी होगा;
(ख) वह अपने कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान अपनी जानकारी या आधिपत्य की किसी सूचना या दस्तावेज की गोपनीयता बनाए रखेगा और ऐसी सूचना या दस्तावेज को प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति की सहमति के सिवाय राज्य सरकार/जिला कार्यक्रम समन्वयक के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति को प्रकट नहीं करेगा:
परन्तु इस खण्ड में अंतर्विष्ट कोई भी बात उसे किसी पक्षकार द्वारा शिकायत के रूप में प्रस्तुत की गई सूचना या दस्तावेज को किसी अन्य पक्षकार या पक्षकारों को उस सीमा तक जहां तक कि वह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और कार्यवाहियों में न्यायपूर्ण व्यवहार का अनुपालन करने के लिए युक्तियुक्त रूप से आवश्यक समझे प्रकट करने से नहीं रोकेगी;
(ग ) वह जांच करने के पश्चात् समुचित कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए राज्य सरकार की प्रतिवेदन देगा । प्रतिवेदन विशिष्टितया उन प्रकरणों को चिहिंत किया जाएगा जिनमें चूक करने वाले स्कीम कृत्मकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाने की आवश्यकता है । प्रतिवेदन में अपचारी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई मुख्य करने के लिए आवश्यक प्राथमिक साक्ष्य सम्मिलित किए जाएंगे;
(घ) वह पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान लोकपाल के कार्यालय के कार्यकलापों के सामान्य पुनर्विलोकन को समाविष्ट करते हुए, एक रिपोर्ट प्रत्येक वर्ष ऐसी अन्य जानकारी के साथ जैसी कि उसके द्वारा आवश्यक समझी जाए , राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा। वार्षिक रिपोर्ट में , लोकपाल , उसके द्वारा निपटाई गई मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 25 जनवरी 2022
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शिकायतों के आधार पर स्कीम प्राधिकारियों के कामकाज की गुणवत्ता का पुनर्विलोकन करेगा और स्कीम के क्रियान्वयन को सुधारने के लिए सिफारिशें करेगा । रिपोर्ट को स्कीम की वेबसाइट पर रखा जाएगा;
(ङ) वह प्रत्येक ऐसे स्कीम प्राधिकारी के संबंध में , जिसके विरुद्ध रिपोर्ट की गई हो, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अप्रैल और मार्च के बीच उसके द्वारा प्रेषित रिपोर्टों की एक सूची संकलित करेगा और उसे राज्य सरकार को रिपोर्ट करेगा। इस रिपोर्ट को स्कीम की वेबसाइट पर भी रखा जाएगा;
(च) यदि वह कुप्रबंध के कारण किसी व्यक्ति के साथ घातक अन्याय या व्यथित होना पाता है, तो वह शिकायतकर्ता के पक्ष में अधिनिर्णय पारित कर सकेगा।
अध्याय चार
शिकायतों के निवारण के लिए प्रक्रिया
12. शिकायतों के विषय.-
लोकपाल को निम्नलिखित में से किसी एक या अधिक विषयों से संबंधित योजना के क्रियान्वयन में कमी अधिकथित करने वाली शिकायतें प्रस्तुत की जा सकेंगीः
(एक) ग्राम सभा;
(दो) परिवारों का पंजीकरण और जॉब कार्ड जारी किया जाना;
(तीन) जॉब कार्डों की अभिरक्षा;
(चार) कार्य की माँग;
(पांच) कार्य के लिए प्रस्तुत आवेदन के विरुद्ध तारीखयुक्त अभिस्वीकृति जारी किया जाना;
(छः ) मजदूरी का भुगतान;
(सात) बेरोजगारी भत्ते का भुगतान;
(आठ) लिंग के आधार पर भेदभाव;
(नौ) कार्यस्थल पर सुविधाएँ;
(दस) कार्य की माप;
(ग्यारह) कार्य की गुणवत्ता;
(बारह) मशीनों का उपयोग;
(तेरह) ठेकेदारों से काम लेना;
(चौदह) बैंक या डाकघरों में खातों का संचालन;
(पंद्रह) शिकायतों का पंजीयन और निपटारा;
(सोलह) मस्टर रोल का सत्यापन;
(सत्रह) दस्तावेजों का निरीक्षण;
(अठारह) निधियों का उपयोग;
(उन्नीस) निधियों का जारी किया जाना;
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(बीस) सामाजिक संपरीक्षा ( सोशल ऑडिट) ;
(इक्कीस) अभिलेख का संधारण;
(बाइस) अधिनियम /अनुसूचियों में आश्वासित किसी पात्रता से वंचित रखा जाना ।
13. शिकायतें प्रस्तुत करने और निपटारे की प्रक्रिया.-
(1 ) कोई व्यक्ति जिसे स्कीम प्राधिकारी या कामगार के विरुद्ध कोई शिकायत हो, स्वयं या अपने प्राधिकृत सक्षम प्रतिनिधि के माध्यम से स्कीम प्राधिकारी या कामगार के विरुद्ध लोकपाल को लिखित में या मौखिक शिकायत कर सकेगा।
(2) कोई शिकायत जहां तक संभव हो किसी ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा स्वयं या ऐसे सक्षम प्रतिनिधि के माध्यम से प्रस्तुत की जा सकेगी , जिसके लिए लोकपाल अनुमति दे।
(3) शिकायत , शिकायतकर्ता या उसके प्राधिकृत सक्षम प्रतिनिधि, यदि कोई हो, द्वारा सम्यक् रूप से हस्ताक्षरित की जाएगी और उसमें शिकायतकर्ता का नाम तथा पता तथा उस विभाग के अधिकारी का नाम जिसके विरुद्ध शिकायत की गई है, शिकायत को उठाने वाले दस्तावेजों , यदि कोई हों , द्वारा समर्थित वे तथ्य , जिन पर कि शिकायतकर्ता निर्भर हो तथा लोकपाल से चाही गई सहायता स्पष्ट रूप से कथित की जाएगी ।
(4) लोकपाल द्वारा इलैक्ट्रॉनिक साधनों के माध्यम से की गई शिकायतें भी स्वीकार की जाएंगी तथा ऐसी शिकायत की एक मुद्रित प्रति लोकपाल के अभिलेख पर ली जाएगी ।
(5 ) इलैक्ट्रॉनिक माध्यम से की गई शिकायत की एक मुद्रित प्रति शिकायतकर्ता द्वारा यथासंभव शीघ्र लोकपाल को निराकरण के लिए कदम उठने के पूर्व हस्ताक्षरित की जाएगी ।
(6) हस्ताक्षरित मुद्रित प्रति शिकायत समझी जाएगी और वह उस पीछे की तारीख से संबंधित होगी, जिसको कि वह शिकायत इलैक्ट्रॉनिक माध्यम से की गई थी।
(7) लोकपाल को कोई शिकायत नहीं होगी , यदि शिकायत उसी विषय-वस्तु के संबंध में हो, जिसका कि लोकपाल के कार्यालय द्वारा किन्हीं पूर्ववर्ती कार्यवाहियों में निराकरण किया जा चुका हो , भले ही वह उसी शिकायतकर्ता द्वारा या एक या अधिक शिकायतकर्ताओं के साथ या विषय- वस्तु से संबंध रखने वाले एक या अधिक पक्षकारों से प्राप्त हुई हो या न हुई हो।
(8) लोकपाल को किसी ऐसे मुद्दे पर शिकायत नहीं की जाएगी , जो किसी अधिकरण या न्यायालय के समक्ष किसी अपील, पुनरीक्षण, निर्देश अथवा रिट की कार्यवाहियों की विषय-वस्तु रहा हो या हो । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 25 जनवरी 2022
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14. कार्यवाहियों का प्रकृति में संक्षिप्त होना.-
लोकपाल साक्ष्य के किन्ही भी नियमों द्वारा आबद्ध नहीं होगा तथा ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण कर सकेगा, जो उसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार न्यायोचित तथा उचित प्रतीत हो। लोकपाल के समक्ष कार्यवाहियां संक्षिप्त प्रकृति की होंगी ।
15. शिकायतों का निपटारा.-
( 1 ) शिकायत की प्राप्ति पर, लोकपाल शिकायत को समुचित मनरेगा प्राधिकरण को सात ( 07) दिन के भीतर निपटारा करने के लिए निर्दिष्ट कर सकेगा । शिकायत का निपटारा करने में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी प्राधिकरण के असफल रहने की स्थिति में , मामला निपटारे के लिए लोकपाल द्वारा हाथ में लिया जा सकेगा ।
(2) लोकपाल शिकायत की एक प्रति के साथ शिकायत की प्राप्ति की एक सूचना उस महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी ( मनरेगा) प्राधिकरण को भिजवाएगा जिसके विरुद्ध शिकायत की गई है ।
(3) जब पक्षकारों द्वारा मामले के तथ्यों को स्वीकार किया जाता है, तब लोकपाल , महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) अधिनियम, नियमों तथा दिशा निर्देशों की अपेक्षाओं के अनुसार मामले का निपटारा करेगा।
(4) यदि किसी मामले में पक्षकारों द्वारा तथ्यों को स्वीकार नहीं किया जाता है , तो लोकपाल , पक्षकारों को अपना मामला प्रस्तुत करने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात् अधिनिर्णय (अवार्ड ) पारित कर सकेगा । लोकपाल, पक्षकारों द्वारा उसके समक्ष रखी गई साक्ष्य , सामाजिक अंकेक्षण की रिपोर्ट , यदि कोई हो , महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा ) अधिनियम तथा योजना और राज्य सरकार अथवा केन्द्र सरकार द्वारा समय- समय पर जारी प्रक्रिया निर्देशों और अनुदेशों के उपबंधों तथा ऐसे अन्य कारकों से मार्गदर्शित होगा , जो कि उसकी राय में न्याय हित में आवश्यक हों । (5) लोकपाल, मामले को संतोषप्रद रूप में निपटाने में समर्थ होने के लिए किसी मामले में अपेक्षित हो तो स्थल पर के अन्वेषण कर सकेगा या स्थल मुआयने के आधार पर किसी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) कृत्यकारी से रिपोर्ट मांग सकेगा। यदि राज्य सरकार इस प्रयोजन के लिए दिशा निर्देश जारी करती है , तो वह किसी विशेषज्ञ से रिपोर्ट भी मांग सकेगा। सामान्यतः कोई स्थल मुआयना समस्त पक्षकारों तथा स्थानीय ग्राम पंचायत को अग्रिम सूचना के साथ तथा पक्षकारों की उपस्थिति में किया जाना चाहिए। लोकपाल द्वारा स्थल पर पृथक् स्थल मुआयना सारांश तैयार किया जाएगा तथा उसे ऐसा करने की इच्छा रखने वाले किसी पक्षकार द्वारा हस्ताक्षित किया जाएगा । तथापि, यदि लोकपाल की यह राय है, कि सही स्थिति का पता लगाने के लिए आकस्मिक निरीक्षण आवश्यक है , तो वह ऐसे समस्त मामलों 94(9)
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में स्थल अन्वेषण की सामान्य अवस्थिति के कार्यक्रम अधिकारी को सूचित करने के पश्चात् ऐसा कर सकेगा। वह उसके स्थल अन्वेषण सारांश में वास्तविक रूप से उपस्थित व्यक्तियों के ब्यौरे दर्ज करेगा तथा स्थल तथा उपस्थित व्यक्तियों की निरपवाद रूप से फोटोग्राफ लेगा तथा उसका एक प्रिंट आऊट स्थल अन्वेषण सारांश के साथ संलग्न करेगा । यदि स्थल अन्वेषण किया गया था , तो स्थल अन्वेषण सारांश की प्रति लोकपाल की रिपोर्ट में भी संलग्न की जाएगी ।
(6) लोकपाल जहां तक संभव हो सामाजिक अंकक्षेण की जन सुनवाई में भाग लेगा तथा उन समस्त मामलों को स्वतः संज्ञान में लेगा , जहां इन दिशा- निर्देशों के अनुसार निपटारे के लिए समुचित पात्रता प्रदान नहीं की गई है।
16. लोकपाल द्वारा अधिनिर्णय तथा अपील.-
(1 ) यदि किसी मामले में पक्षकारों द्वारा तथ्यों को स्वीकार नहीं किया जाता है, तो लोकपाल , पक्षकारों को अपना मामला प्रस्तुत करने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात्, अधिनिर्णय पारित कर सकेगा। वह पक्षकारों द्वारा उसके समक्ष रखी गई साक्ष्य , सामाजिक अंकेक्षण की रिपोर्ट, यदि कोई हो, अधिनियम तथा योजना एवं प्रक्रिया, राज्य सरकार या केन्द्र सरकार द्वारा समय समय पर जारी प्रक्रिया निर्देशों तथा अनुदेशों के उपबंधों तथा ऐसे अन्य कारकों से मार्गदर्शित होगा , जो कि उसकी राय में न्यायहित में आवश्यक हों । (2) उप- नियम ( 1 ) के अधीन पारित अधिनिर्णय विस्तार से होगा जो निम्नलिखित घटक सम्मिलित होंगे; अर्थात:-
(एक) मामले के पक्षकारों के ब्यौरे;
(दो) मामले के संक्षिप्त तथ्य;
(तीन) विचार के लिए प्रश्नः
(चार) कारणों सहित प्रश्न के विरुद्ध निष्कर्ष;
(पांच) व्यय , यदि कोई हो ।
(3) यदि कोई शिकायत मिथ्या, विद्वेषपूर्ण अथवा तंग करने वाली पाई जाती है, तो लोकपाल लिखित में अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से शिकायत को खारिज करेगा और ऐसा आदेश करेगा कि शिकायतकर्ता विरोधी पक्षकार को ऐसे व्यय का भुगतान करे, जितना कि लोकपाल द्वारा समुचित समझा जाए । (4) अधिनिर्णय की एक प्रति शिकायतकर्ता और योजना प्राधिकारी को भेजी जाएगी ।
(5) लोकपाल के समक्ष ऐसे मामलों में जिसमें कार्यक्रम अधिकारी या जिला कार्यक्रम समन्वयक पक्षकार हो, तो वहां कार्यक्रम अधिकारी या जिला कार्यक्रम समन्वयक का कोई प्रतिनिधि उपस्थित हो सकेगा। कार्यक्रम अधिकारी या जिला कार्यक्रम समन्वयक, लोकपाल के समक्ष केवल तभी उपस्थित होंगे, जब कि लोकपाल के समक्ष ऐसी कार्यवाही विचारण में हो , उस दशा में वह या वे उत्तरदायी हैं और उन्हें सुनवाई का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। लोकपाल मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 25 जनवरी 2022
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के समक्ष किसी कार्यवाही में यदि तथ्य अवैध परितोषण , रिश्वत या दुर्विनियोग के मामले को प्रकट करें, तो वह उसके द्वारा विधि के अनुसार आगे की कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा।
17. अपील प्राधिकरण.-
राज्य सरकार , लोकपाल के अधिनिर्णयों द्वारा व्यथित किसी पक्षकार द्वारा अभ्यावेदन पर विचार करने के लिए एक शिक्षाविद , एक सेवानिवृत्त लोक सेवक तथा एक सिविल सोसायटी प्रतिनिधि से मिलकर बनने वाले तीन सदस्यीय अपील प्राधिकरण का गठन करेगी। ऐसा कोई अभ्यावेदन अपील प्राधिकरण द्वारा दो माह की कालावधि के भीतर निपटाया जाएगा । अपील प्राधिकरण का कार्यालय मनरेगा का कार्यान्वयन करने वाले राज्य सरकार के नोडल विभाग के कार्यालय में अवस्थित होगी । ऐसे किसी अपील प्राधिकरण के व्यय राज्य सरकार द्वारा मनरेगा की धारा 22 की उप- धारा ( 1 ) के खण्ड ( ग ) के अधीन 6% प्रशासनिक व्यय से वहन किए जाएंगे।
अपील प्राधिकरण के सदस्य की आवश्यक अर्हताएं.-
18.
(एक) अकादमिक (शिक्षण ) या सिविल सेवा या सिविल सोसायटी संगठन में न्यूनतम 30 वर्ष का अनुभव;
(दो) प्रख्यात प्रतिष्ठा तथा निष्कलंक सत्यनिष्ठा वाला व्यक्ति;
(तीन) किसी राजनीतिक पार्टी तथा किसी वर्तमान में प्रतिबंधित संगठन का सदस्य न हो;
(चार ) शारीरिक रूप से क्रियाशील , सक्षम तथा राज्य में दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण करने में सक्षम तथा उसका इच्छुक हो;
पांच) नियुक्ति के समय आयु 66 वर्ष से कम हो;
(
(छह) मनरेगा लोकपाल के रूप में कम से कम 1 वर्ष पूर्ण करने वाले को अधिमानता प्रदान की जाएगी;
(सात) अपील प्राधिकरण के सदस्यों का कार्यकाल 2 वर्ष का होगा, जो कि प्रदर्शन मूल्यांकन की प्रक्रिया के आधार पर या पदधारी द्वारा 68 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, जो भी पहले हो , एक एक वर्ष करके दो बार से अधिक नही बढ़ाया जा सकेगा , कोई पुनर्नियुक्ति नहीं होगी;
(आठ) अपील प्राधिकरण के तीन सदस्यों में से वरिष्ठतम सदस्य अध्यक्ष होगा । अध्यक्ष अपने को सम्मिलित करते हुए सदस्यों के बीच विचार के लिए कार्य (अपीलें) आबंटित करेगा तथा प्राधिकारी को रिपोर्ट करेगा;
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94(11) (नौ) अपील प्राधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्य निःस्वार्थ लोक सेवा की प्रकृति का है और कोई पद सृजित नहीं किया जाना है;
(दस) अपील प्राधिकारी के अध्यक्ष तथा सदस्य 11 माह में रुपए 30,000/- की अधिकतम सीमा के साथ बैठक शुल्क के रूप में रूपए 15,000/- प्राप्त करने के लिए हकदार होंगे । बैठक से अभिप्रेत है प्रतिदिन का कार्य , मामलों की संख्या तथा कार्य के घण्टों के सदंर्भ में उसकी कालावधि चाहे जितनी भी हो। राज्य सरकार , अपने स्वयं के वित्तीय संसाधनों से मंत्रालय द्वारा निर्धारित बैठक शुल्क से बढ़कर किसी अतिरिक्त रकम का भुगतान कर सकेगी । कोई बैठक पूरे दिन या उसके भाग के लिए हो सकेगी। कार्यालय के कार्य के लिए अपील प्राधिकरण , मनरेगा का क्रियान्वयन करने वाले राज्य नोडल विभाग के परिसर से कार्य करेगा तथा आवश्यक लाजिस्टिक तथा प्रशासनिक सहयोग सचिव/आयुक्त, मनरेगा के कार्यालय द्वारा प्रदान किया जाएगा। राज्य सरकार के प्रथम श्रेणी अधिकारियों को स्वीकार्य दरों पर टी.ए/डी.ए को अनुमत किया जा सकेगा । राज्य सरकार आवश्यकता के अनुसार अधिकारिक प्रयोजन के लिए अपील प्राधिकारण को अपने स्थानीय पूल से अपील वाहन उपलब्ध करा सकेगी । तथापि, अपील प्राधिकरण के उपयोग के लिए मनरेगा निधि से कोई नवीन वाहन क्रय नहीं किया जा सकेगा । अपील प्राधिकरण के अध्यक्ष या सदस्यों द्वारा आधिकारिक प्रयोजन के लिए अपने स्वयं या किराए के वाहन में यात्रा की दशा में संबंधित राज्य सरकार प्रतीक्षा प्रभार सम्मिलित करते हुए , यात्रा की लागत की प्रतिपूर्ति कर सकेगी। राज्य सरकार इस प्रयोजन के लिए दरें नियत कर सकेगी;
(ग्यारह) लोकपाल के अधिनिर्णयों द्वारा व्यथित पक्षकारों को अधिनिर्णय की एक प्रति के साथ ऐसे निष्कर्ष प्रस्तुत किए जाने के 15 दिनों के भीतर अपील प्राधिकरण को हस्तक्षारित लिखित अपील प्रस्तुत करनी चाहिए । अपील प्राधिकरण प्राप्ति की तारीख से 2 माह के भीतर किसी अपील का निपटारा करेगा । लोकपाल के अधिनिर्णय के विरुद्ध अपील पर अपील प्राधिकरण के समस्त विनिश्चय सभी तीन सदस्यों द्वारा किए जाएंगे । आम सहमति के अभाव की दशा में समस्त विनिश्चय अध्यक्ष सहित, तीनों के बहुमत द्वारा किए जाएंगे । अपील प्राधिकरण के निर्णय विनिश्चय अंतिम तथा मामले के मूल पक्षकारों पर तथा संबंधित लोकपाल पर अंतिम तथा बंधनकारी होगा। प्रमुख सचिव/ सचिव , नोडल विभाग का यह उत्तरदायित्व होगा कि वह अपील प्राधिकारी के विनिश्चय प्रवृत्त कराए ;
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(बारह) कार्यक्रम अधिकारी/जिला कार्यक्रम समन्वयक का कोई प्रतिनिधि मामले में उपस्थितहो सकेगा , जहां कि जिला कार्यक्रम समन्वयक पक्षकार हो जब तक कि उसकी स्पष्ट व्यक्तिगत विफलता न हो;
(तेरह) ऐसे समस्त मामले जिनमें तथ्य या विधि के जटिल प्रश्न अन्तर्ग्रस्त न हों, लोकपाल द्वारा शिकायत की प्राप्ति की तारीख से 15 दिनों के भीतर निपटाए जाएंगे । अन्य मामले 60 दिनों के भीतर निपटाए जाएंगे;
(चौदह) लोकपाल के समक्ष किसी कार्यवाही में यदि तथ्य अवैध परितोषण , रिश्वत या दुर्विनियोग का मामला प्रकट करते हैं तथा लोकपाल का समाधान हो जाता है कि मामला विधि के उपयुक्त न्यायालय द्वारा आगे अन्वेषण के लिए समुचित है , तो वह लोकपाल द्वारा मामले में अन्तर्गस्त व्यक्तियों के आपराधिक अभियोजन की मंजूरी देने के लिए सक्षम प्राधिकारी को निर्दिष्ट किया जाएगा , जो विहित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करेगा;
(पन्द्रह) अधिवक्ताओं द्वारा पक्षकारों का प्रतिनिधित्व अनुज्ञेय नहीं है। लोकपाल का अधिनिर्णय कड़ाई से मनरेगा अधिनियम , नियमों तथा इसके अधीन बनाई गई स्कीमों तथा भारत सरकार द्वारा समय - समय पर जारी परिचालन दिशा- निर्देशों के परिधि तथा सीमाओं के भीतर होगा।
19. लोकपाल की रिपोर्ट पर कार्रवाई.-
(1) राज्य सरकार , लोकपाल के अधिनिर्णयों पर की गई कार्रवाई की निगरानी के लिए नोडल विभाग में एक प्रणाली स्थापित करेगा । जहां कहीं ऐसे अधिनिर्णय पर कार्रवाई नही की जाती है , जो अंतिम हो , गया हो वही संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी ।
(2) कार्रवाई रिपोर्ट की एक प्रति कार्रवाई किए जाने के तत्काल पश्चात् संबंधित लोकपाल को प्रेषित की जाएगी तथा किसी भी दशा में लोकपाल द्वारा अधिनिर्णय रिपोर्ट की तारीख से 2 (दो ) माह से अधिक नहीं होगी ।
लोकपाल के मामले की संक्षिप्त रिपोर्ट तथा अधिनिर्णयों पर की गई कार्रवाई इस की बैठक में सचिव , राज्य नोडल विभाग द्वारा राज्य रोजगार गारंटी परिषद् को रिपोर्ट प्रतिवेदित की जाएगी तथा नोडल विभाग के वार्षिक रिपोर्ट का हिस्सा भी होगी। (3)
(4) लोकपाल द्वारा निपटाए गए मामले की संक्षिप्त रिपोर्ट तथा अधिनिर्णयों पर की गई कार्रवाई , सचिव, राज्य नोडल विभाग द्वारा केन्द्रीय रोजगार गारंटी परिषद् के समक्ष रखने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय , भारत सरकार को भी. प्रतिवेदित की जाएगी । 94(13)
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अध्याय- पांच
प्रकीर्ण
20. लोकपाल का सूचना का अधिकार अधिनियम , 2005 के अन्तर्गत होना : -
लोकपाल को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अधीन रखा जाएगा । राज्य सरकार का नोडल विभाग इस प्रयोजन के लिए लोक सूचना अधिकारी तथा अपील प्राधिकारी अधिसूचित करेगा ।
21. राज्य में लोकपाल के कार्यालय के कार्य की कालिक समीक्षा:-
राज्य सरकार , राज्य में लोकपाल के कार्यालय के कार्य की कालिक समीक्षा करेगी। 22. निरसन तथा व्यावृत्ति :-
इन नियमों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी उक्त नियमों के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई तत्स्थानी नियमों के अधीन की गई बात या की गई कार्रवाई समझी जाएगी ।
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार ,
अमर पाल सिंह , अपर सचिव.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2022