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मध्यप्रदेश शासन•
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल, शुक्रवार , दिनांक 11 मार्च 2022-फाल्गुन 20, शक़ 1943
क्रमांक 114]
वन विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल, दिनांक 11 मार्च 2022 क्र. एफ- 16-4-1991 - दस-2
संकल्प
जन सहभागिता से वनों के संरक्षण हेतु मध्य प्रदेश शासन का संकल्प , 2021
1. प्रस्तावना:-
वन प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की भूमिका को अधिक सशक्त बनाने तथा विगत दो दशकों में हुए वैधानिक बदलावों के साथ सामंजस्य बनाए रखने के लिए मध्य प्रदेश शासन , वन विभाग द्वारा वन प्रबंधन में जन सहयोग प्राप्त करने हेतु जारी संकल्प दिनांक 22-10-2001 का पुनरीक्षण आवश्यक हो गया है । अतः राष्ट्रीय वन नीति 1988 एवं मध्य प्रदेश राज्य की वन नीति, 2005 के अध्यधीन उक्त संकल्प व उसके अनुक्रम में समय -समय पर जारी आदेशों को अधिक्रमित करते हुए यह पुनरीक्षित संकल्प पारित किया जाता है: -
2. परिभाषायें: - इस संकल्प में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो:-
2.1 . वनमंडल अधिकारी से अभिप्रेत है वनमंडल अधिकारी (क्षेत्रीय/ वन्यप्राणी) , उप संचालक राष्ट्रीय उद्यान एवं संभागीय प्रबंधक राज्य वन विकास निगम।
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2.2. उप वनमंडल अधिकारी से अभिप्रेत है उप वनमंडल अधिकारी (क्षेत्रीय/ वन्यप्राणी) , राष्ट्रीय उद्यान/ अभयारण्य के सहायक संचालक/अधीक्षक एवं वन विकास निगम में पदस्थ उप संभागीय प्रबंधक । 2.3. वन परिक्षेत्राधिकारी से अभिप्रेत है वन परिक्षेत्र अधिकारी (क्षेत्रीय/वन्यप्राणी/अनुसंधान एवं विस्तार) एवं मध्यप्रदेश वन विकास निगम में पदस्थ परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी।
2.4. परिक्षेत्र सहायक से अभिप्रेत है उप- परिक्षेत्र स्तर पर पदस्थ एवं क्षेत्रीय अधिकारिता रखने वाले वन विभाग एवं वन विकास निगम के अधिकारी ।
2.5. बीट गार्ड (परिसर रक्षक) से अभिप्रेत है बीट स्तर पर वन क्षेत्र का भारसाधक वनरक्षक/वनपाल/ एवं वन विकास निगम में पदस्थ क्षेत्ररक्षक ।
2.6. कार्य आयोजना से अभिप्रेत है वन क्षेत्र के प्रबंधन के लिये प्रभावशील कार्य आयोजना/ वन्यप्राणी प्रबंध योजना।
2.7. लघु वनोपज से अभिप्रेत है पादप मूल के सभी गैर -ईमारती वनोत्पाद जिनमें बांस , झाड़ - झंखाड, ठूंठ, बेंत , टसर , कोया, शहद, मोम , लाख , तेन्दु पत्ता , औषधीय पौधे और जड़ी बूटिंया , मूल , कन्द और इसी प्रकार के उत्पाद सम्मिलित है ।
2.8. वन विकास अभिकरण से अभिप्रेत है मध्य प्रदेश सोसाइटीज एक्ट 1973 के अंतर्गत वनमंडल एवं राज्य स्तर पर गठित अभिकरण ।
3. सामुदायिक वन प्रबंधन समिति ( Community Forest Management Committee) : - 3.1. वन संसाधनों के प्रबंधन के लिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 में परिभाषित ग्राम सभा के प्रस्ताव पर गठित समिति " सामुदायिक वन प्रबंधन समिति (Community Forest Management Committee) " कहलायेगी , जिसे आगे वन समिति कहा जाएगा ।
3.2. सामुदायिक वन प्रबंध समितियों का गठन प्रचलित कार्य आयोजनाओं के अनुसार वन्य प्राणी संरक्षित क्षेत्रों, सघन वन, बिगड़े वन क्षेत्र के प्रबंधन के लिए किया जा सकेगा ।
3.3. वन समिति के गठन में प्राथमिकता ऐसी ग्राम सभा को दी जाएगी जो परम्परागत रूप से वन क्षेत्र पर आश्रित हो।
3.4. ग्रामसभा सामुदायिक वन प्रबंधन समिति की आमसभा होगी ।
4. समितियों के गठन की प्रक्रियाः-
4.1 . पूर्ववर्ती संकल्प के अन्तर्गत गठित वन समिति कार्यकाल समाप्त होने तक इस संकल्प के अन्तर्गत गठित वन समिति मानी जाएगी ।
4.2. इस संकल्प के अन्तर्गत वन प्रबंधन में भागीदार बनने का आशय रखने वाले ग्राम की ग्रामसभा वन क्षेत्र के विवरण के साथ संकल्प पारित करके क्षेत्राधिकार रखने वाले वन परिक्षेत्र अधिकारी को सूचना प्रेषित करेगी। सूचना मिलने पर परिक्षेत्र अधिकारी आसपास के सभी ग्रामों में इस सूचना का व्यापक प्रचार प्रसार सुनिश्चित करेगा, ताकि उस वनक्षेत्र में हित रखने वाली ग्राम सभायें यदि चाहें तो वन परिक्षेत्र अधिकारी को अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकें। यदि किसी क्षेत्र के प्रबंधन में शामिल होने के लिए एक से अधिक ग्राम सभायें दावा प्रस्तुत करती हैं तो वन परिक्षेत्र अधिकारी दावा प्रस्तुत करने वाली ग्राम सभाओं का संयुक्त सम्मेलन कराकर , यथासम्भव आम सहमति से दावों का निराकरण कराएगा ।
4.3. यदि ऐसा कोई समुदाय वन समिति का गठन करना चाहता है जो पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम 1996 की धारा 4 (ख) के अनुसार ऐसे आवास या आवास समूह अथवा छोटे गांव या उनके समूह जिसमें ऐसे समुदाय समाविष्ट हों, जो परम्पराओं तथा रूढ़ियों के अनुसार अपने कार्यकलापों का प्रबंध करते हों, किंतु अधिसूचित ग्राम सभा नही हो तो उसे 228 ( 1)
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अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को आवेदन देकर ग्राम सभा के रूप में गठित करने की प्रक्रिया को पूर्ण करना होगा ।
4.4. ग्राम सभा को आवंटित किये जाने वाले वन क्षेत्र का विनिश्चयन हो जाने के पश्चात परिक्षेत्राधिकारी वन समिति के गठन का प्रस्ताव उप वनमंडल अधिकारी के माध्यम से वनमंडल अधिकारी को पंजीकरण हेतु भेजेगा । गठन के प्रस्ताव में वन समिति के लिए चिन्हांकित वन क्षेत्र/क्षेत्रों की चतुर्सीमाओं का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा । प्रस्ताव का परीक्षण करने के उपरान्त वनमंडल अधिकारी वन समिति का पंजीकरण करके प्रमाणपत्र जारी करेगा एवं परिक्षेत्राधिकारी और ग्राम सभा को सूचित करेगा ।
5. कार्यकारिणी:-
5.1 . उत्तरदायित्वों का निर्वहन करने के लिये वन समिति एक " कार्यकारिणी " का गठन करेगी , जिसका कार्यकाल गठन दिनांक से पांच वर्ष तक रहेगा । पूर्व से गठित वन समितियों की कार्यकारिणी का पुनर्गठन पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद किया जाएगा। पंजीकरण के पश्चात क्षेत्र पर अधिकारिता रखने वाला परिक्षेत्र सहायक, वन समिति की कार्यकारिणी का गठन करने के लिये मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा-6 के अन्तर्गत मध्य प्रदेश ग्राम सभा (सम्मिलन की प्रक्रिया) नियम 2001 में दर्शायी गई प्रक्रिया अनुसार बैठक आयोजित करने के लिये ग्राम सभा को सूचित करेगा एवं बैठक में उपस्थित रहकर वन समिति की कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया में समन्वय करेगा ।
5.2 . वन समिति की कार्यकारिणी में चयनित सदस्यों की न्यूनतम संख्या 11 रहेगी एवं ग्रामसभा आवश्यकता होने पर कार्यकारिणी में चयनित सदस्यों की संख्या 15 तक बढ़ा सकेगी । कार्यकारिणी के सदस्यों का चयन ग्राम सभा के सदस्यों में से ही किया जाएगा । कार्यकारिणी में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति एवं अन्य पिछड़ें वर्ग का प्रतिनिधित्व जनसंख्या के अनुपात में रहेगा, किंतु ग्राम में अनुसूचित जनजाति के सदस्यों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक होने पर अध्यक्ष आवश्यक रूप से अनुसूचित जनजाति समुदाय से होगा। प्रत्येक वन समिति में चयनित किये जाने वाले सदस्यों में से 1/3 पद महिलाओं के लिये आरक्षित रहेंगे । ग्राम पंचायत का सरपंच कार्यकारिणी का पदेन सदस्य होगा ।
5.3. कार्यकारिणी में चयनित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष , कोषाध्यक्ष पदाधिकारी होंगे । वन समिति का सचिव वह वन अधिकारी होगा जिसे वन विभाग द्वारा उस क्षेत्र पर अधिकारिता रखने वाला परिसर - रक्षक नियुक्त किया गया हो। सदस्यों एवं पदाधिकारियों का चयन ग्राम सभा द्वारा यथासंभव आम- सहमति से किया जाएगा। आम सहमति बनाने के लिए एक से अधिक बार बैठकें की जाएंगी । समस्त प्रयासों के बाद आम सहमति न होने की स्थिति में ग्रामसभा के निर्णय लेने की प्रक्रिया के अनुसार वोटिंग करायी जाएगी। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 11 मार्च 2022
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5.4. कार्यकारिणी में अध्यक्ष के पद पर पुरुष का चयन होने पर उपाध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित रहेगा।
5.5. दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित करके ग्राम सभा वन समिति को भंग कर सकेगी । किन्तु इस आशय के लिये आयोजित की जाने वाली ग्राम सभा में उस क्षेत्र पर अधिकारिता रखने वाला परिक्षेत्र सहायक, पर्यवेक्षक के रूप में उपस्थित रहेगा । परंतु ऐसा प्रस्ताव गठन के एक वर्ष की अवधि में नही लाया जा सकेगा । पुनर्गठित कार्यकारिणी का कार्यकाल केवल पांच वर्ष में से शेष बची अवधि के लिए होगा ।
6. बैठकें:-
6.1. वन समिति आमसभा की कार्यवाही को अभिलिखित करने एवं उपस्थित सभी सदस्यों के हस्ताक्षर करने के लिये रजिस्टर का संधारण करेगी । वन समिति द्वारा आमसभा का सम्मेलन प्रत्येक त्रैमास में कम से कम एक बार अवश्य आयोजित कराया जाएगा। वन समिति के सचिव द्वारा सम्मेलन की सूचना 7 दिवस पूर्व सभी को दी जाएगी ।
6.2. अध्यक्ष की अनुमति से वन समिति की कार्यकारिणी की बैठक कभी भी आयोजित की जा सकेगी किंतु प्रत्येक माह एक बैठक अवश्य आयोजित की जाएगी । कार्यकारिणी में गणपूर्ति हेतु 50 प्रतिशत सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। बैठक की सूचना कार्यकारिणी के सभी सदस्यों को कम से कम तीन दिवस पूर्व दी जाएगी।
7. वन विकास अभिकरण:-
7.1 . वनमंडल स्तर पर वन विकास अभिकरण द्वारा वन समितियों के सशक्तीकरण हेतु पारस्परिक संवाद, प्रबंधन में पारदर्शिता, समितियों की क्षमता वृद्धि, विभिन्न स्त्रोतों से वित्तीय संसाधनों का प्रबंध करने में भूमिका अदा की जाएगी।
7.2. प्रदेश के स्तर पर राज्य वन विकास अभिकरण द्वारा सामुदायिक भागीदारी से वन प्रबंधन को रणनीतिक दिशा प्रदान करने, विभिन्न स्त्रोतों से वित्तीय संसाधनों का प्रबंध करने आदि गतिविधियों में वनमंडल स्तर के वन विकास अभिकरणों के साथ समन्वय किया जाएगा ।
8. सूक्ष्म प्रबंध योजनाः-
8.1 . वन समितियाँ वन क्षेत्र की कार्य आयोजना के प्रावधानों के अधीन वन प्रबंधन करेगी । सूक्ष्म प्रबंध योजना, कार्य आयोजनाओं में दिये गये प्रावधानों के अनुरूप बनायी जायेंगी । यथासंभव , प्रबंध योजना में वन समिति के सदस्यों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर प्रावधान किए जाएंगे । जलाऊ, चारा , छोटी इमारती तथा लघु वनोपजों का उत्पादन आदि की व्यवस्था की जाएगी । वन समिति की आम सभा से अनुमोदन के पश्चात, सूक्ष्म प्रबंध योजना को लागू करने की स्वीकृति वनमंडल अधिकारी द्वारा जारी की जाएगी। सहमत नही होने पर वनमंडल अधिकारी सूक्ष्म प्रबंध योजना को 228 (3)
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पुनर्विचार हेतु ग्राम सभा को वापस करेगा । वन विकास निगम एवं वन्य प्राणी प्रबंधन को आवंटित वन क्षेत्र का प्रबंधन निर्धारित उद्देश्योंके अध्याधीन किया जाएगा ।
8.2 . सूक्ष्म प्रबंध योजना में भू- दृश्य (Landscape) प्रबंधन के उद्देश्य से वनों के प्रबंधन को प्रभावित करने वाले कारकों जैसे आजीविकाओं के सुदृढीकरण हेतु ग्राम के गैर- वन प्राकृतिक संसाधनों के संवहनीय उपयोग एवं सामाजिक-आर्थिक विकास कार्यों जैसे- शिक्षा, स्वास्थ्य , एवं संस्कृति के विकास सम्बन्धी कार्यों को भी सम्मिलित किया जा सकेगा ।
8.3. सूक्ष्म प्रबंध योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक राशि वन विभाग के विभागीय मद तथा अन्य विकास योजनाओं से समन्वय करके उपलब्ध करायी जाएगी, इस हेतु वन समिति द्वारा वार्षिक कार्य योजना बनायी जाएगी तथा कार्यों के सम्पादन हेतु 10 प्रतिशत अग्रिम प्राप्त कर सकेगी। वन क्षेत्र में किये जाने वाले विकास कार्यों का पर्यवेक्षण वन विभाग द्वारा किया जाएगा। 9. लेखा संधारण तथा आडिटः- सभी वन समितियों द्वारा वित्तीय प्रबंधन हेतु राष्ट्रीयकृत बैंक में निम्नानुसार दो खाते संधारित किये जाएंगे -
9.1 . समिति खाता- वन समिति की स्व- अर्जित निधि जैसे वनोपज की बिक्री, काष्ठ से मिलने वाले लाभांश, वनों की सुरक्षा की एवज में मिलने वाली राशि एवं अन्य आय वाले खाते को " समिति खाता " कहा जाएगा । समिति खाते का संचालन अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा । समिति की आम सभा के निर्णय के अनुरूप सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करके, वन समिति को सामान्यतः ₹25.00 लाख की सीमा तक के विकास कार्य स्वीकृत करने एवं सम्पादित करने का अधिकार होगा, किंतु क्षमतावान समितियों के लिए इस सीमा को वनमंडल अधिकारी द्वारा बढ़ाया जा सकेगा। वन समिति की कार्यकारिणी का धनराशि निकाले जाने का प्रस्ताव धनादेश के साथ बैंक भेजा जाना आवश्यक होगा। प्रमाणकों पर अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष द्वारा हस्ताक्षर किये जाएंगे । लेखा एवं प्रमाणकों का संधारण कोषाध्यक्ष व्दारा किया जाएगा। समिति खाते के वित्तीय अनुशासन के लिये वन समिति की कार्यकारिणी के सभी सदस्य जिम्मेवार रहेगें। समिति खाते से व्यय का विवरण वन समिति के द्वारा ग्रामसभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा ।
9.2. विकास खाता- शासकीय अथवा गैर शासकीय संस्थाओं से स्वीकृत और वित्त पोषित वन एवं सामाजिक आर्थिक विकास के कार्यों हेतु प्राप्त होने वाली निधि के खाते को " विकास खाता " कहा जाएगा । विकास खाते का संचालन वन समिति के अध्यक्ष एवं सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा। तकनीकी स्वीकृति के अनुसार कार्यों को सम्पन्न कराने के लिये विकास खाते की राशि उपयोग की जाएगी । परिक्षेत्र सहायक द्वारा कार्यों की गुणवत्ता एवं मात्रा का सत्यापन करके प्रमाणकों को पास करने के पश्चात ही वन समिति बैंक से आहरण कर भुगतान करेगी एवं प्रमाणकों का संधारण करेगी । स्वीकृत कार्य पूर्ण होने के पश्चात वन समिति द्वारा मदवार व्यय राशि का विवरण देते हुए कार्य समाप्ति प्रतिवेदन वनमंडल/ वन विकास अभिकरण को उचित मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 11 मार्च 2022
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माध्यम से भेजा जाएगा। कार्यों का अनुश्रवण एवं मूल्यांकन वन परिक्षेत्र अधिकारी से अनिम्न श्रेणी के वनाधिकारी व्दारा किया जाएगा। कार्यों की गुणवत्ता बनाये रखने हेतु तकनीकी नियंत्रण उप वनमंडल अधिकारी द्वारा किया जाएगा । विकास खाते के वित्तीय अनुशासन के लिये संबंधित अध्यक्ष , सचिव, परिक्षेत्र सहायक तथा परिक्षेत्र अधिकारी जिम्मेवार रहेगें ।
9.3 . समिति एवं विकास खातों से राशि का उपयोग करने हेतु मध्य प्रदेश वित्तीय संहिता एवं भंडार क्रय नियम लागू होंगे।
9.4 . सभी समितियों का आंतरिक ऑडिट परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा किया जाएगा । वित्तीय वर्ष में राशि रुपए 2.00 लाख से अधिक आमद वाली वन संमितियों का संकेंद्रित वार्षिक ऑडिट (Focussed Annual Audit) भारत के नियंत्रक एवं लेखा परीक्षक (CAG ) के पैनल में शामिल चार्टर्ड अकाउन्टेन्ट से कराया जाएगा । ऑडिट के निम्नानुसार मुख्य उद्देश्य होंगे: -
9.4.1 . आय -व्यय पत्रक लेखा प्रविष्टि, प्रमाणक एवं अन्य अभिलेखों का परीक्षण करके आय- व्यय पत्रक के माध्यम से लेखा संधारण की परिशुद्धता पर अभिमत देना। ग़लतियों एवं धोखाधड़ी की पहचान एवं निराकरण करना ।
9.4.2. कार्यविधि का ऑडिट ( Process Audit) समिति के संचालन में संकल्प एवं विभिन्न निर्देशों में निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन की स्थिति, क्रय- विक्रय में नियमों का पालन , आमसभा एवं कार्यकारिणी की बैठकों के अभिलेखों का परीक्षण तथा समिति की परिसंपत्तियों का विवरण प्रस्तुत करना।
9.4.3. लक्ष्यों की प्राप्ति- उद्देश्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए समिति के द्वारा किए जा रहे कार्य-कलापों की समीक्षा एवं सुधार के लिए समिति का ध्यान आकर्षित करना। विभाग द्वारा निर्धारित मानदंडों के आधार पर समिति का श्रेणीकरण करना ।
9.5. आपत्तियों के निराकरण एवं सुधार हेतु आंतरिक ऑडिट एवं चार्टर्ड अकाउन्टेन्ट से प्राप्त ऑडिट रिपोर्ट की एक प्रति आपत्तियों के निराकरण एवं सुधार हेतु वनमंडल अधिकारी को प्रेषित की जाएगी एवं कार्यकारिणी द्वारा ऑडिट रिपोर्ट को आमसभा के समक्ष प्रस्तुत करके अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा।
10. वन समिति के अधिकार एवं कर्तव्य: -
10.1 . वन समिति के अधिकारः-
10.1.1 . आवंटित वन क्षेत्र की सफ़ाई एवं विरलन से प्राप्त होने वाली वनोपज पर वन समिति का अधिकार होगा । विरलन एवं सफ़ाई कार्य यथासम्भव वन समिति द्वारा सम्पादित किया किया जाएगा । विरलन का कार्य वन विभाग द्वारा किए जाने पर विदोहन का व्यय वन समिति से वसूल कर वनोपज प्रदाय की जा सकेगी । परन्तु, वन विकास निगम के व्यवसायिक रोपणों 228 ( 5)
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में विरलन से प्राप्त वनोपज में हिस्सा देने के लिये निगम के संचालक मण्डल द्वारा इस संबंध में लिया गया निर्णय लागू होगा । वन विकास निगम को आवंटित बिगड़े वन क्षेत्र की सफ़ाई से प्राप्त जलाऊ पर वन समिति का अधिकार होगा ।
10.1.2 .काष्ठ कूपों के विदोहन से प्राप्त होने वाली काष्ठ की बिक्री से प्राप्त राजस्व का 20 (बीस) प्रतिशत वन समिति को देय होगा। यह राशि समिति खाते में जमा की जाएगी । वन समिति अपनी आवश्यकता के अनुसार काष्ठ या नक़द राशि प्राप्त करने के सम्बंध में निर्णय कर सकेगी । काष्ठ लेने पर तत्समय प्रचलित उत्पादन की ऑफ़सेट दरों के आधार पर मूल्य का समायोजन देय राशि में किया जाएगा । वन विकास निगम के व्यवसायिक रोपणों में अन्तिम पातन से प्राप्त काष्ठ का हिस्सा देने के लिये निगम के संचालक मण्डल द्वारा इस संबंध में लिया गया निर्णय लागू होगा ।
10.1.3 . वन समिति आवंटित वन क्षेत्र के लिये कार्य आयोजना के प्रावधानों के अन्तर्गत सूक्ष्म प्रबंध योजना बनाकर वन संसाधनों के प्रबंधन , विदोहन एवं समिति के स्वामित्व की वनोपज के विपणन की व्यवस्था कर सकेगी । समिति के सदस्यों को वितरण की व्यवस्था समिति द्वारा निर्धारित की जाएगी। समिति की निस्तार की आवश्यकता से अधिक वनोपज बिक्री के लिए शासकीय डिपो भेजी जाएगी, यदि समिति चाहे तो स्थानीय स्तर पर खुले बाज़ार में बिक्री की जा सकेगी । किंतु, म.प्र. वनोपज (व्यापार विनियमन) अधिनियम 1969 के अंतर्गत विनिर्दिष्ट वनोपज को वन विभाग के माध्यम से काष्ठागार भेजकर ही विक्रय किया जाएगा । शासकीय डिपो में विक्रय के उपरांत वन विभाग द्वारा समिति को राशि उसी तरह प्रदान की जाएगी, जिस प्रकार मालिक मकबूजा के प्रकरणों में की जाती है।
10.1.4. वन क्षेत्र से प्राप्त होने वाली समस्त लघुवनोपज पर समिति का अधिकार होगा । समिति संरक्षण के उद्देश्य से किसी लघु वनोपज के विदोहन एवं संग्रहण को विनियमित कर सकेगी । तेंदूपत्ता एवं अन्य विनिर्दिष्ट लघु वनोपजों को छोड़कर शेष वनोपज के विपणन एवं संग्रहण का प्रबंधन वन समिति कर सकेगी। संग्रहण को प्रतिबंधित करने का आदेश क्षेत्रीय वनमंडल अधिकारी द्वारा मध्य प्रदेश वन उपज (जैव विविधता का संरक्षण और पोषणीय कटाई) नियम, 2005 के तहत प्रदत्त अधिकारों के अन्तर्गत वन समिति के पारित प्रस्ताव के आधार पर जारी किया जाएगा ।
10.1.5. राष्ट्रीय उद्यानों तथा वन्यप्राणी अभयारण्यों में प्रवेश शुल्क से होने वाली आय का 33 प्रतिशत हिस्सा एवं बफ़र क्षेत्रों में पर्यटन का प्रबंधन वन समिति द्वारा किया जाएगा एवं होने वाली आय का शत- प्रतिशत संबंधित वन समितियों को देय होगा ।
10.1.6. प्रचलित नियमों एवं अधिनियमों के अंतर्गत वनक्षेत्र के विकास लिए निवेश आमंत्रित करने तथा ईकोपर्यटन के माध्यम से रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के उद्देश्य से वन समिति उद्यमियों एवं वन विभाग के साथ त्रिपक्षीय अनुबंध कर सकेगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 11 मार्च 2022
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10.1.7. वन समिति आवंटित वन क्षेत्र में किये जा रहे अपराधों की रोकथाम कर सकेगी तथा वन अपराध होने पर वन विभाग को लिखित अथवा मौखिक सूचना देकर वन अपराध प्रकरण दर्ज करा सकेंगी । वन सुरक्षा कार्य के दौरान समिति के किसी सदस्य को कोई शारीरिक क्षति अथवा मृत्यु होने पर मध्य प्रदेश शासन, वन विभाग की अधिसूचना क्रमांक/ एफ-25/ 66/ 2004/ 10-3 दिनांक 06 फ़रवरी 2007 के अनुसार सहायता दी जाएगी । समितियाँ वन अपराधों के निराकरण एवं न्यायालय में चल रहे प्रकरणों को वापस लेने के लिये लोकहित में अपनी अनुशंसा प्रेषित कर सकेंगी।
10.1.8 . वन अपराध में लिप्त कार्यकारिणी के सदस्य को कार्यकारिणी से पृथक करने के लिये वन समिति बाध्य होगी । इसी प्रकार वन अपराध में लिप्त अथवा समिति के निर्णय का पालन नही करने वाले सदस्य को निश्चित समय अवधि, कम से कम एक वर्ष, के लिये समिति की ओर से मिलने वाले लाभों से वंचित कर सकेगी ।
10.1.9.स्व- अर्जित आय से सभी प्रकार के सामाजिक आर्थिक विकास के कार्य करने के लिए वन समितियां स्वतन्त्र होंगी । उदाहरणार्थ- कार्य सम्पादन के लिए कर्मचारियों की सेवाएँ ले सकेगी तथा उनके वेतन/मानदेय तय कर सकेगी। स्वसहायता समूहों को स्वरोजगार शुरू करने के लिये ऋण दे सकेगी । ग्रामीण खेलों का आयोजन कर सकेगी । स्वैच्छिक संगठनों एवं विशेषज्ञों की सेवाओं का मूल्य अदा कर सकेंगी । उत्कृष्ट कार्य करने वाले सदस्यों को पुरस्कृत कर सकेगी।
10.1.10. वन समिति आमसभा में प्रस्ताव लाकर कार्यकारिणी के अधिकारों का निर्धारण करेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर नये कार्यों के संचालन के लिये कार्यकारिणी को अधिकृत कर सकेगी। कार्यकारिणी के समस्त सदस्य लोक सेवक होंगे ।
10.2. वन समिति एवं सदस्यों के कर्तव्य: -
10.2.1 . वन समिति का प्रत्येक सदस्य संवहनीय वन प्रबंधन एवं वन्यप्राणियों की सुरक्षा में सहयोग देगा तथा समिति की अनुमति के बिना लघु वनोपजों का संग्रहण , चराई, जलाऊ निकासी नहीं करेगा । वनों में आग नहीं लगायेगा तथा आग बुझाने में हर संभव मदद करेगा । वन अपराध घटित होने पर समिति सदस्य सूचना निकटतम वनाधिकारी या परिक्षेत्र में तत्काल देगा।
10.2.2 . समिति के अध्यक्ष का कर्तव्य होगा कि वह कार्यकारिणी एवं आम सभा का संचालन करे तथा लिये गये फैसलों को लागू करने के लिये इस संकल्प के प्रावधानों के अनुरूप कार्यवाही करे । अध्यक्ष की अनुपस्थिति में, अध्यक्ष की भूमिका का निर्वहन उपाध्यक्ष करेगा। 228 (7)
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11. वनाधिकारियों के अधिकार एवं कर्तव्यः-
वनमंडल अधिकारी के अधिकार एवं कर्तव्य निम्नानुसार रहेंगे , यदि इस संकल्प में अन्यथा उल्लेख न हो तो वे उक्त अधिकारों को वनक्षेत्रपाल से अनिम्न अधिकारी को प्रत्यायोजित कर सकेंगे ।
11.1 . वनाधिकारियों के अधिकारः-
11.1.1 . वन समिति को दिये जाने वाले वन क्षेत्रों का निर्धारण करना तथा उसे सीमांकित करना । 11.1.2 . समिति की बैठक आयोजित कराना , रिकार्ड संधारण कराना तथा आंतरिक अंकेक्षण करना । 11.1.3 . वन समितियों को आवंटित क्षेत्र में वन संनिधि में हुई अभिवृद्धि को मापने के लिये प्रणाली स्थापित करना । वन संनिधि में हुए सुधार का प्रतिफल देने की व्यवस्था करना।
11.2. वनाधिकारियों के कर्तव्य: -
11.2.1 . वन प्रबंधन हेतु वन समितियों की क्षमता वृद्धि करना, वनोपज के संरक्षण /संवर्धन /विदोहन विपणन में मदद करना । समितियों का पंजीकरण , क्षेत्र आवंटन एवं अन्य जानकारियों का प्रबंधन करना। वन प्रबंधन के लिये सूक्ष्म प्रबंध योजना तैयार कराने में तकनीकी मदद करना एवं स्वीकृति प्रदान करना ।
11.2.2 . रोजगार सृजन की योजनाएं बनाना तथा समिति के माध्यम से क्रियान्वित कराना, सदस्यों का कौशल विकसित कर आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना, महिलाओं/निराश्रितों तथा गरीब वर्ग को सशक्त करने के लिये विशेष रूप से वन संसाधनों पर आधारित आजीविका के साधनों को सुदृढ़ करना। इस कार्य में स्वैच्छिक संगठनों/ विशेषज्ञों की मदद लेना । 11.2.3 . समिति की बैठक पंजी, कैश बुक, प्रमाणक, मनी रसीद, लेजर्स, चेकबुक इत्यादि को संधारित कराना एवं विकास खाते से जुड़े अभिलेखों का संधारण करना तथा आमसभा के समक्ष प्रस्तुत कराना ।
12.अपील:-
12.1 . कंडिका 10.1.8 में समिति द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध प्रभावित व्यक्ति, आदेश की तिथि से एक माह के अन्दर क्षेत्राधिकार रखने वाले उप वनमंडल अधिकारी को अपील कर सकेगा । अपीलीय अधिकारी का निर्णय अंतिम होगा ।
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
पदमाप्रिया बालाकृष्णन, सचिव.
नियंत्रक , शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2022 .