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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

शाला पूर्व शिक्षा नीति 2022...

Published 18 April 2022

Department
महिला एवं बाल विकास
Type
Extraordinary
Gazette no.
176
Identifier
in.gazette.madhya.2022-04-18.176.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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मध्यप्रदेश शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

भोपाल, सोमवार, दिनांक 18 अप्रैल 2022-चैत्र 28 , शक 1944

क्रमांक 176]

महिला एवं बाल विकास विभाग

मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल , दिनांक 13 अप्रैल 2022

क्र. एफ- 3-1-2021 - पचास- 2.- राज्य शासन, एतद्वारा विभिन्न विभागों का अभिमत लेकर शाला पूर्व शिक्षा नीति 2022 विभाग द्वारा तैयार की गई है .

अजय कटेसारिया, उपसचिव.

शाला पूर्व शिक्षा नीति

मध्यप्रदेश

निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (Right To Education Act) 2009 तथा राष्ट्रीय प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख एवं शिक्षा ( ECCE) नीति 2013 के तारतम्य में " शाला पूर्व शिक्षा नीति 2022 मध्यप्रदेश " एतद्वारा अंगीकृत की जाती है.

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1. प्रस्तावना (Introduction )

संपूर्ण विश्व में इस बात को मान्यता प्रदान है कि प्रारंभिक वर्षों की सीख जीवन की नींव रखने के लिये अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है। बच्चे के मस्तिष्क का विकास प्रारंभिक वर्षों में 90 प्रतिशत तक हो जाता है। प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा ( ईसीसीई) की पहल का दस्तावेजीकरण औपचारिक रूप से 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हुआ था आंदोलन के प्रारंभिक अग्रणियों में गिजुभाई बधेका , ताराबाई मोदक, मारिसा मोंटेसरी आदि शामिल थे । हमारे देश तथा प्रदेश में इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु निजी, शासकीय तथा अशासकीय संस्थाएं तथा विभाग अपने तरीकों से कार्य करते रहे हैं।

ECCE से अभिप्राय है- Early Childhood Care and Education (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा) यानी बच्चे के सर्वांगीण विकास हेतु स्वास्थ्य देखभाल सुरक्षा व पोषण के साथ सीखने के अवसर उपलब्ध करवाना। ईसीसीई (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा) की अवधारणा सर्वप्रथम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में उभर कर आई इससे पूर्व मोंटेसरी, किंडर गार्टन , नर्सरी , प्री स्कूल आदि नामों से चल रहे कार्यक्रम ईसीसीई की समग्र अवधारणा से परे केवल शिक्षा के पहलू पर जोर देते आये हैं।

इस हेतु अब तक मुख्य रूप से तीन विभाग:- महिला एवं बाल विकास विभाग , स्वास्थ्य विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा समन्वित रूप से प्रयास किये जाते रहे हैं बच्चे के सर्वांगीण विकास हेतु पोषण , स्वास्थ्य एवं शाला पूर्व शिक्षा बच्चे का अधिकार है। भारत में आई.सी.डी.एस. कार्यक्रम सन् 1975 से प्रारंभ किया गया इसी के तहत प्रदेश के सिंगरौली जिले में बैढ़न विकासखण्ड एवं जगदलपुर जिले (जगदलपुर जिला अब छत्तीसगढ़ जिले में आता है) के आदिवासी विकासखण्ड टोंकपाल से आईसीडीएस योजना का प्रारंभ हुआ । इसके पश्चात् धीरे - धीरे कार्यक्रम का विस्तार संपूर्ण मध्यप्रदेश में किया गया। आंगनवाड़ी केंन्द्रों पर यह सभी दायित्व आईसीडीएस की 06 सेवाओं के रूप में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा संपादित किये जाते हैं। अतः शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 11 तथा राष्ट्रीय प्रारंभिक बाल्यास्था देखरेख एवं शिक्षा (ECCE ) नीति 2003 के प्रावधानों को क्रियान्वित करने , छोटे बच्चों के साथ न्याय करने , बच्चों की आयु एवं आवश्यकता अनुसार संतुलित पाठ्यक्रम एवं सुविधाएं निर्धारित किये जाने तथा उन्हेंलागू करने हेतु ' शाला पूर्व शिक्षा नीति मध्यप्रदेश' में बनाई जाती है मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 18 अप्रैल 2022

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2. नीति के संदर्भ और आवश्यकता (Context & Need for the Policy)

2.1 सामाजिक संदर्भ (Social Context) :-

भारतीय परिवेश में पूर्व में संयुक्त परिवारों की परंपरा होने से बच्चों को घर में ही आधारभूत मूल्यों और सामाजिक कुशलताओं के संस्कार सीखने के अवसर सहज रूप से उपलब्ध होते थे । वर्तमान परिदृश्य में संयुक्त परिवार की परंपरा दिनों दिन कम होती जा रही है। इससे बच्चों की देखभाल प्रभावित होती है । साथ ही पति- पत्नि दोनों का कामकाजी होना भी बच्चों की देखरेख को प्रभावित करता है।

वर्तमान परिवेश में 03 वर्ष की आयु के पश्चात् बच्चे को ऐसे वातावरण की आवश्यकता होती है जहां उसे घर से बाहर घर जैसा वातवरण मिले। परिवारिक , सामुदायिक परंपराओं तथा प्रारंभिक वर्षों में बच्चों की देखभाल के साथ उनकी शाला जाने के लिए शिक्षा की तैयारी सुनिश्चित हो सके।

बालक -बालिका शिक्षा, भेदभाव रहित सामाजिक पहचान, तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ समानतावादी वातावरण में सक्रियता के साथ सभी बच्चों को शाला पूर्व शिक्षाका अधिकार सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है।

भिन्न-भिन्न सामाजिक एवं पारिवारिक विविधताओं को उपयुक्त प्रावधानों के द्वारा एवं माता- पिता और देखभालकर्ता के द्वारा बच्चों का संतुलित रूप से सर्वांगीण विकास किये जाने की आवश्यकता है।

2.2 नीति संदर्भ ( Policy Context)

2.2.1 संवैधानिक प्रावधान

1. भारतीय संविधान के संशोधित अनुच्छेद 45- में उल्लेखित प्रावधान के अनुक्रम में राज्य शासन को पूर्व प्राथमिक शिक्षा के महत्व के दृष्टिगत छः वर्ष तक की आयु के सभी बच्चो की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख एवं शिक्षा (Early Childhood Çare and Education ) प्रदान हेतु प्रयत्न करना होगा।

2. अनुच्छेद 21 क के माध्यम से 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिये निःशुल्क और अनविार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान किया गया ।

3. अनुच्छेद 51 ए में संशोधन करके (J) के बाद नया अनुच्छेद ( K) जोड़ा गया जिसमें 6 से 14 साल तक के बच्चों के माता पिता या अभिभावक अथवा संरक्षक को अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए अवसर उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

4. राईट टू एजूकेशन एक्ट 2009 कीधारा 11 के अनुसार 'प्रारंभिक शिक्षा के लिये बच्चों को तैयार करने के उद्देश्य से शिशु देखभाल एवं शिक्षा सुविधा 3 वर्ष से अधिक उम्र के सभी मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 18 अप्रैल 2022

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बच्चों को उनकी 06 वर्ष तक की आयु पूर्ण होने तक उपलब्ध कराई जायेगी तथा शाला पूर्व शिक्षा हेतु आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध करवाने का दायित्व संबंधित राज्य का होगा । " 5. राष्ट्रीय शिक्षा नीति ( 1986) एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2020) में ' शाला पूर्व शिक्षा' को मानव विकास के लिये एक महत्वूपर्ण निवेश माना गया है।

6. राष्ट्रीय ई.सी.सी.ई. ( Early Childhood Care and Education ) पॉलिसी 2013 में प्रारंभिक शिक्षा हेतु गुणवत्ता मानकों पर आधारित ' शाला पूर्व शिक्षा' कार्यक्रम को लागू करने पर जोर दिया गया है।

7. मध्यप्रदेश असाधारण राजपत्र क्रमांक 331 , दिनांक 6 अगस्त 2016 में प्रकाशित अधिसूचना अनुरूप प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (Early Childhood Care and Education ) का क्रियान्वयन किया जाएगा।

2.2.2 राष्टीय ई.सी.सी.ई. नीति

भारत सरकार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आदेश क्रमांक 6-3/2009 नई दिल्ली दिनांक 23 सितंबर 2013 के द्वारा ई.सी.सीई. की राष्ट्रीय नीति जारी की गई ।

2.2.2.1 राष्ट्रीय ई.सी.सी.ई. पाठ्यचर्चा तथा गुणवत्ता मानक

भारत सरकार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आदेश क्रमांक 6-3/2009 , नई दिल्ली दिनांक 23 जनवरी 2014 के द्वारा ई.सी.सी.ई. की राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा का फ्रेमवर्क बनाया गया तथा गुणवत्तायुक्त ई.सी.सी.ई. के लिये निम्नानुसार गुणवत्ता मानक एवं 11 नॉन निगोशिएबल संकेतक निर्धारित किये गये -

अ. गुणवत्ता मानकः-

1. शिक्षक/शिक्षिका, देखभालकर्ता , तथा बच्चों के बीच बेहतर समन्वय तथा ऐसा वातावरण जहां बच्चा अपने को सहज महसूस कर सके।

2. साफ-सफाई, संतुलित और पौष्टिक आहार के साथ अच्छी आदतों को दैनिक व्यवहार में लाया जाना ।

3. शारीरिक , सामाजिक एवं भावनात्मक सुरक्षा सहित बच्चों की सुरक्षा तथा देखभाल के लिए अनिवार्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाना।

4. साफ- सुथरा हरित क्षेत्र जो बच्चो की सुरक्षा के साथ सहज पहुंच में हो , कक्ष के अंदर तथा बाहर निर्धारित मापदण्डों के अनुसार पेयजल और शौचालय सहित स्थान की उपलब्धता।

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5. राष्ट्रीय ई.सी.सी.ई. नीति, करीकुलम फ्रेमवर्क के सिद्धांतो और दिशा निर्देशों के अनुरूप पाठ्यक्रम तथा कार्ययोजना , व्यवस्थित अभिलेखीकरण, वित्तीय प्रबंधन, पर्याप्त अमला तथा अभिभावकों की सहभागिता ।

6. बच्चों को रचनात्मक वातावरण में सीखने और सौंदर्य अनुभूति के लिए अवसरों की उपलब्धता । भाषा एवं साक्षरता , शारीरिक क्षमताओं को बढ़ावा , समस्याओं के सामाधान ढूंढने, अंको की पहचान, साथियों से समन्वय , स्वयं की भावनाओं को व्यक्त करने के अवसर आदि की उपलब्धता ।

7. बच्चों के सीखने को बेहतर बनाने के लिए बच्चों के आकलन की पद्धति, आकलन रिर्पोट के माध्यम से बच्चों के विकास की पहचान की जाना।

8. शिक्षकों और देखभालकर्ताओं की क्षमताओं का आंकलन , उनका क्षमता संवर्धन एवं कार्यक्रम के आकलन के माध्यम से आवश्यक सुधार किया जाना।

9. शिक्षक/शिक्षिकाओं तथा देखभालकर्ताओं के कार्यों की सहयोगात्मक मॉनिटरिंग और सुपरविजन के माध्यम से शैक्षणिक स्तर में गुणवत्ता तथा क्षमता संवर्धन के साथ ही अनुसंधान के माध्यम से बच्चों के विकास और सीखने में आने वाली व्यक्तिगत और सामूहिक कमियों को पहचान कर उन्हें दूर करने के निरंतर प्रयास किया जाना ।

10. माता- पिता तथा अभिभावकों को बच्चों के सर्वांगीण विकास के बारे में जागरूक किया जाना।

ब. नॉन निगोशिएबल ( Non - Nigotiable) संकेतक : -

ईसीसीई गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित 11 आधारभूत मानकों से समझौता नहीं किया जायेगा और ये संकेतक किसी भी प्रकार की शाला पूर्व शिक्षा प्रदान करने वाले सेवा प्रदाताओं के लिए अनिवार्य होंगे -

1. ईसीसीई के तहत बच्चों की देखभाल के साथ उनकी आयु अनुरूप तीन- चार घंटे की अवधि का शाला पूर्व शिक्षा का कार्यक्रम। अधिकतम 4 घंटे से अधिक बच्चों को शाला में नहीं रखा जायेगा।

2. 25 बच्चों के एक समूह के लिये कम से कम 35 वर्गमीटर माप का एक अध्ययन कक्ष और 30 वर्गमीटर (कम से कम) खुले स्थान की उपलब्धता ।

3. पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित स्टाफ।

4. मातृभाषा/स्थानीय, देशी भाषा/ बहुभाषा में संपादित विकासानुकूल , बाल केंन्द्रित पाठ्यक्रम।

5. पर्याप्त विकासानुकूल खिलौने और शिक्षण सामग्री।

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6. एक सुरक्षित भवन जिस तक पंहुच सरल हो। भवन साफ होना चाहिए और इसके आसपास हरित क्षेत्र होना चाहिए ।

7. पर्याप्त एवं स्वच्छ पेयजल की सुविधा। रनिंग वाटर की सुविधा।

8. लेड़कियों तथा लड़को के लिए पर्याप्त तथा अलग - अलग बाल अनुकूल शौचालय तथा हाथ धोने की सुविधाएं ।

9. संतुलित पोषण आहार बनाने के लिए और बच्चों के लिए सोने/ आराम के लिये अलग स्थान की उपलब्धता ।

10. केन्द्र पर तत्काल स्वास्थ्य सेवाओं के लिये प्राथमिक उपचार/मेडिकल चिकित्सा किट की उपलब्धता।

11. वयस्क/देखभालकर्ता की उपब्धता 3-6 वर्ष आयु के बच्चों के 1:20 अनुपात में।

आंगनवाड़ी केन्द्रों पर ई.सी.सी.ई. स्कूल किट , नीति के मापदण्डों/उद्देश्यों के अनुरूप हाई स्पेसिफिकेशन डिजाईन/निर्मित गुणवत्तापूर्ण होंगे। इसके अतिरिक्त स्थानीय स्व- सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को भी ई.सी.सी.ई. किट में सम्मिलित किया जा सकेगा । ई.सी.सी.ई. किट तीन वर्ष में एक बार क्रय किया जायेगा।

2.2.3 राष्ट्रीय ई.सी.सी.ई. परिषद की स्थापना

भारत सरकार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आदेश क्रमांक 1-1 /2013 नई दिल्ली दिनांक 03 मार्च 2014 के द्वारा राष्ट्रीय ई.सी.सी.ई. परिषद की स्थापना की गई ।

प्रदेश ई.सी.सी.ई. परिषद का गठन

भारत सरकार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आदेश क्रमांक 2013/1-1 , नई दिल्ली दिनांक 29 अप्रैल 2015 के द्वारा राज्य स्तर पर द्विस्तरीय 'ई.सी.सी.ई. परिषद ' का गठन किया गया ।

ई.सी.सी.ई. सामान्य परिषदः अध्यक्ष , मंत्री महिला एवं बाल विकास विभाग , मध्यप्रदेश शासन

ई.सी.सी.ई. कार्यकारी परिषदः अध्यक्ष, प्रमुख सचिव , महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन

परिषद प्रदेश स्तर पर ई.सी.सी.ई. से संबंधित समस्त गतिविधियों के लिये नियमों का निर्धारण तथा क्रियान्वयन के लिये निर्णय लेने हेतु अधिकृत है।

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2.2.4 मध्यप्रदेश कार्य आवंटन नियमों में संशोधन

मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण) क्र. 331 दिनांक 6 अगस्त 2016 के द्वारा पूर्व प्राथमिक शिक्षा को महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यावंटन नियमों में सम्मिलित किया गया है।

3. कार्यक्रम संदर्भ (Programme Context)

शाला पूर्व शिक्षा सार्वजनिक निजी तथा अशासकीय सेवाप्रदाताओं के द्वारा प्रदान की जाती है। प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत एकीकृत बाल विकास योजना के तहत 3-6 वर्ष के सर्वाधिक बच्चे आंगनवाड़ी केन्द्रों में दर्ज होते हैं । आंगनवाड़ी केन्द्रों पर 3-6 वर्ष के बच्चों के लिये नियमित रूप से प्रतिदिन दो सेवाओं का प्रावधान है -

1. 3-4 घंटे की शाला पूर्व शिक्षा

2. पूरक पोषण आहार का वितरण

संगठित , असंगठित तथा अशासकीय माध्यम से दी जाने वाली शाला पूर्व शिक्षा संस्थाओं को शाला पूर्व शिक्षा संबंधी मानकों , मानदंडों और विनियमों के अनुसार सभी कार्यकलापों में समन्वय लाने की आवश्यकता है।

इसका दायित्व प्रदेश स्तर पर प्रदेश स्तरीय ई.सी.सी.ई. काउंसिल का हैं।

4. कार्यक्षेत्र (Work Area)

संपूर्ण मध्यप्रदेश के अंतर्गत शाला पूर्व शिक्षा हेतु संचालित समस्त शासकीय , अशासकीय एवं निज़ी संस्थायें ।

5. नीति ( The Policy)

शाला पूर्व शिक्षा नीति बच्चों के चहुँमुखी तथा सर्वांगीण विकास में सहायता देने के लिए विकासात्मक निरंतरता की प्रत्येक उप -अवस्था की देखभाल और शाला पूर्व शिक्षा पर बल देते हुए बच्चे के संपूर्ण और समेकित विकास की धारणा को पुष्ट करती है। यह दायित्व देखभाल प्रदाताओं जैसे बच्चों के माता- पिता, अभिभावक, परिवारों, समुदायों और अन्य संस्थागत तंत्रों जैसे सार्वजनिक, निजी और गैर सरकारी सेवा प्रदाताओं के द्वारा निभाया जाएगा।

समुचित तकनीकी मानकों और स्तरों के अनुसार शाला पूर्व शिक्षा सेवाएं प्रदान करने के लिए बच्चों की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति राष्ट्रीय ई.सी.सी.ई. नीति 2013 एवं नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शाला पूर्व शिक्षा के साथ अन्य क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, पोषण , मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 18 अप्रैल 2022

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अभिभावकीय शिक्षा(Parenting Education ) , सामुदायिक उन्मुखीकरण (Community Oriention) तथा शाला पूर्व शिक्षा नीति आदि से तालमेल स्थापित किया जाएगा।

निजी, सार्वजनिक और परोपकारी क्षेत्र में गुणवत्ता मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिये शिक्षा के सभी चरणों के लिये एक प्रभावी गुणवत्ता विनियमन या मान्यता प्रणाली स्थापित की जायेगी।

आंगनवाड़ी केंद्र , शिशुगृह , प्ले स्कूल , शाला पूर्व शिक्षा केंद्र , नर्सरी स्कूल, किंडर गार्टन , प्रारंभिक स्कूल, बालवाड़ी और गृह आधारित देख रेख इत्यादि ऐसे केंद्र जहां 3-6 वर्ष के बच्चों को दर्ज किया जाता है पर यह नीति लागू होगी ।

6. नीति की अवधारणा (Vision of the Policy)

सामान्यतः शाला पूर्व शिक्षा के बारे में अनेक अवधारणाएं हैं। माता- पिता (अभिभावक) प्रायः इसे औपचारिक शिक्षा का पर्याय मानते हैं साथ ही दूसरा पक्ष आंगनवाड़ी के शाला पूर्व शिक्षा कार्यक्रम को मात्र पोषण आहार कार्यक्रम के रूप में देखता है। ई.सी.सी.ई. न तो औपचारिक है और न ही मात्र पोषण आहार कार्यक्रम। यह एक समग्र विकास की अवधारणा है। जिसमें बच्चे की उत्तरजीविता , वृद्धि और उसके सर्वांगीण विकास ( शारीरिक, भाषाई, संज्ञानात्मक , सामाजिक, संवेगात्मक एवं रचनात्मक तथा सौंदर्यानुभूति) की आवश्यकताओं की पूर्ति को उपयुक्त रणनीतियों का निर्धारण कर सुनिश्चित करना है। ई.सी.सी.ई. के अंतर्गत गर्भावस्था में बच्चे का विकास , जन्म के बाद 0-3 वर्ष तक देखरेख एवं शिक्षा, 3-6 वर्ष तक देखरेख के साथ अनौपचारिक शाला पूर्व शिक्षा तथा 6-8 वर्ष तक यानि कक्षा 1 से 2 तक पूर्व प्राथमिक शिक्षाकी प्रविधियों (खेल विधि) का विस्तार एवं प्राथमिक शिक्षा से जुड़ाव है।

इस अवधारणा में देखभाल , पोषण स्वास्थ्य, शिक्षा सभी का समावेश सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। शाला पूर्व शिक्षा ( Pre School Education ) से अभिप्राय अनौपचारिक शिक्षा है न कि औपचारिक शिक्षा। अतः ईसीसीई में मुख्य रूप से लचीली, बहुआयामी, बहुस्तरीय , खेल आधारित , गतिविधि आधारित एवं खोज आधारित शिक्षा को शामिल किया गया है, जैसे अक्षर ज्ञान , भाषा , संख्या, गिनती, रंग, आकार, इंडोर एवं आउटडोर खेल, पहेलियां और तार्किक सोच , समस्या सुलझाने की कला, चित्रकला, पेंटिंग , अन्य दृश्य कला , शिल्प , नाटक, कठपुतली, संगीत तथा अन्य गतिविधियों को शामिल करते हुए इसके साथ अन्य कार्य जैसे सामाजिक कार्य , मानवीय संवेदना , अच्छे व्यवहार, शिष्टाचार , नैतिकता , व्यक्तिगत स्वच्छता , समूह में कार्य करना और आपसी सहयोग को विकसित करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।

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ई.सी.सी.ई. (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा) के समग्र अवधारणा के साथ आई.सी.डी.एस. (एकीकृत बाल विकास सेवा) 1975 से बाल विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है, परंतु पहुंच और गुणवत्ता के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ किये जाने की आवश्यकता है ताकि रिक्तता की पूर्ति की जा सके। शाला पूर्व शिक्षा में गुणवत्ता वृद्धि की जरूरत विशेष रूप से ध्यानाकर्षित करती है।

शाला पूर्व शिक्षा नीति की अवधारणा 3-6 वर्ष के सभी बच्चों की क्षमता के पूर्ण विकास * की नींव डालने हेतु निःशुल्क, व्यापक , समावेशी , समतापूर्ण , आनन्ददायी और प्रासंगिक अवसरों के माध्यम से उनका सर्वांगीण विकास करने और सक्रिय अधिगम क्षमता को विकसित करते हुए उन्हें प्राथमिक शाला में नियमित छात्र के रूप उपस्थित रहने के लिए तैयार करने हेतु कृतसंकल्पित है।

ईसीसीई में दिव्यांग बच्चों को शामिल करना और उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करना भी इस नीति की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। विशिष्ट दिव्यांगता वाले बच्चों को (सीखने से संबंधित अक्षमताओं के साथ) कैसे पढ़ाया जाये, इससे संबंधित जागरूकता और ज्ञान को सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/शिक्षक प्रशिक्षणों का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिये । साथ ही लैंगिक संवेदनशीलता एवं अल्प प्रतिनिधित्व वाले समूहों के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जानी चाहिये। सामाजिक आर्थिक रूप से वंचित समूहों पर विशेष जोर देते हुए सभी छात्रों को सीखने में मदद करने के लिये शिक्षा के दायरे को व्यापक बनाया जायेगा।

प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) की सार्वभौमिक पहुँच के लिये , आंगनवाड़ी केन्द्रों को उच्चतर गुणवत्ता के बुनियादी ढांचे , खेलने के उपकरण और पूर्ण रूप से प्रशिक्षत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं/शिक्षकों के साथ सशक्त बनाया जायेगा। प्रत्येक आंगनवाड़ी में समृद्ध शिक्षा के वातावरण के साथ अच्छी तरह से डिजाइन किया हुआ हवादार, बाल - सुलभ भवन होगा। आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चे गतिविधियों से परिपूर्ण अध्ययन करेंगे और अपने स्थानीय प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों और छात्रों से मिलेंगे ताकि आंगनवाड़ी केन्द्रों से प्राथमिक स्कूलों में अंतरण को सुचारू बनाया जा सके। आँगनवाडियों को स्कूल परिसरों/ समूहों में पूरी तरह से एकीकृत किया जायेगा और आंगनवाड़ी बच्चों , माता- पिता और शिक्षकों को स्कूल/स्कूल के विभिन्न कार्यक्रमों में परस्पर भाग लेने के लिये आमंत्रित किया जायेगा।

** आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं / शिक्षकों के ईसीसीई प्रशिक्षण को शिक्षा विभाग के क्लस्टर रिसोर्स सेंटर द्वारा मेंटर किया जायेगा और निरंतर मूल्यांकन के लिये कम से कम एक मासिक कक्षा भी चलायेगा।

जब बच्चे कुपोषित या अस्वस्थ होते हैं तो वे बेहतर रूप से सीखने में असमर्थ हो जाते हैं। इसलिये बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य (मानसिक स्वास्थ्य सहित ) पर ध्यान दिया जायेगा, पुष्टिकर भोजन और अच्छी तरह से प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं, काउंसलरऔर स्कूली शिक्षा मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 18 अप्रैल 2022

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प्रणाली में समुदाय की भागीदारी के साथ- साथ शिक्षा प्रणाली के अलावा विभिन्न सतत उपायों केमाध्यम से कार्य किया जायेगा। सभी विद्यालय के बच्चे स्कूलों द्वारा आयोजितनियमित स्वास्थ्य जांच में भाग लेंगे और इसके लिये बच्चों को स्वास्थ्य कार्ड जारी किये जायेंगे । इसके अलावा, कई सारे अध्ययन से यह पता चलता है कि सुबह के पौष्टिक नाश्ते के बाद के कुछ घंटों में कई सारे मुश्किल विषयों का अध्ययन अधिक प्रभावी होता है, इस उत्पादक और प्रभावी समय का लाभ उठाया जा सकता है, यदि सुबह और दोपहर में बच्चों को क्रमशः पौष्टिक नाश्ता और भोजन दिया जाये। जहाँ पके हुए गर्म भोजन की व्यवस्था करना संभव नहीं होगा, वहाँ सादा लेकिन पौष्टिक विकल्प, जैसे गुड़ के साथ मूंगफली/गुड़मिश्रित चना और/ या स्थानीय स्तर पर उपलब्ध फल उपलब्ध कराया जा सकता है। सभी स्कूली बच्चों की विशेष रूप से 100प्रतिशत टीकाकरण के लिये स्कूलों में नियमित स्वास्थ्य जाँच कराई जायेगी और इसकी निगरानी के लिये हेल्थ कार्ड जारी किये जायेंगे। (सब्ट्रीय शिक्षा नीति का बिंदुर

यह नीति ई.सी.सी.ई. काउंसिल के तहत उपयुक्त प्रावधानों द्वारा समुचित वातावरण बनाते हुए शाला पूर्व शिक्षा केंद्र आधारित गतिविधियों के साथ बच्चों को शाला जाने के लिए तैयार करते हुए उनकी आयु एवं आवश्यकता अनुरूप बोझ रहित मार्ग प्रशस्त करती है।

6.1 शाला पूर्व शिक्षा नीति के उद्देश्य

Π शाला पूर्व शिक्षा 03 से 06 वर्ष के प्रत्येक बच्चे का अधिकार होगा।

शाला पूर्व शिक्षा की व्यापक एवं सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करना।

पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना ।

न्याय संगत गुणवत्तायुक्त शाला पूर्व शिक्षा हर बच्चे के लिये जो उसे शाला जाने के लिये तैयार कर सके।

समुदाय के हर वर्ग को गुणवत्ता युक्त शाला पूर्व शिक्षा के प्रति जागरूक बनाना तथा उनकी सहमति प्राप्त करना।

बच्चों में जीवन मूल्यों का विकास।

बच्चों के पोषण स्तर में सुधार।

सर्व संबंधितों का क्षमता संवर्धन (Capacity Building ) किया जाना।

3-6 वर्ष से संबंधित सभी विभागों , स्वायत्तशासी संस्थाओं अर्थात् स्थानीय निकायों में समन्वय, विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के बीच नेटवर्किंग स्थापित करना।

शाला पूर्व शिक्षा के विकास के लिये लगातार अनुसंधान को प्रोत्साहित करते हुए राष्ट्रीय तकनीकों पर आधारित विधियों के प्रयोग को बढ़ावा देना।

शाला पूर्व शिक्षा केंद्र से प्राथमिक शाला में बच्चों का सुगम अंतरण (Transition ) सुनिश्चित करना।

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6.2 उद्देश्यों की पूर्ति हेतु प्रावधान

हर बच्चे की पहुँच में गुणवत्ता युक्त शाला पूर्व शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी।

ईसीसीई की व्यापक पहुंच के लिये आगंनवाड़ी केंद्रों को उच्चतर गुणवत्ता के बुनियादी ढांचे, खेलने के उपकरण और प्रशिक्षित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से सशक्त बनाया जायेगा।

बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु शाला पूर्व शिक्षा के साथ ही न्यूट्रीशन , हेल्थ सर्विस एवं ग्रोथ मॉनिटरिंग की सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी।

बच्चों के बहुआयामी विकास हेतु प्रत्येक बच्चे का मूल्यांकन किया जाना इसके लिये पैरामीटर्स इस प्रकार तैयार किया जाना कि बच्चों के मनोविज्ञान पर इसका नकारात्मक प्रभाव भी न पड़े एवं बच्चों का मूल्यांकन उनके विकास के लिये किया जा सके । इस हेतु बच्चों की डेव्हलपमेंट चैकलिस्ट, पोर्टफोलियो तैयार किया जायेगा और इसे बच्चों के पालकों के साथ साझा किया जायेगा एवं मूल्यांकन रिपोर्ट का प्रदर्शन अन्य बच्चों एवं अन्य बच्चों के माता-पिता के समक्ष सार्वजनिक रूप से कदापि नहीं जायेगा।

आंगनवाड़ी केन्द्रों/ समस्त अशासकीय शाला पूर्व शिक्षा केंद्रों को अब ई.सी.सी.ई. केन्द्र/ बाल संस्कार केन्द्र/शिशु विकास केंद्र/नर्सरी केंद्र आदि के नाम से जाना जा सकेगा।

बच्चों को प्राथमिक शाला में प्रवेश के लिये तैयार करने हेतु योग्य तथा अनुभवी शिक्षकों का प्रावधान किया जायेगा।

शाला पूर्व शिक्षा से वंचित रहे बच्चों के लिये एनसीईआरटी द्वारा कक्षा 1 के विद्यार्थियों के लिये अल्पकालीन 03 महीने का प्ले आधारित स्कूल रेडीनेस मॉड्यूल बनाया जायेगा ।

ईसीसीई को चरणबद्ध तरीके से आदिवासी बहुल क्षेत्रों की आश्रमशालाओं में भी शुरू किया जायेगा।

बच्चों के लिये ऐसे खेल संसाधन उपलब्ध कराना जो उसकी शारीरिक, सामाजिक, संवेदनशील , पारस्परिक दृष्टिकोण तथा भाषा विकास में सहयोगी हो।

B बच्चों को भयमुक्त एवं उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के लिये शारीरिक और मानसिक दण्ड पर प्रतिबंध का प्रावधान।

अधोसंरचना - मापदण्डों का निर्धारण।

शाला पूर्व शिक्षा केंद्रों के संचालन के लिये मान्यता।

शिक्षक/शिक्षिकाओं तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के शाला पूर्व शिक्षा से संबंधित दायित्वों का निर्धारण।

स्थानीय निकायों के दायित्वों का निर्धारण ।

जिला स्तरीय दायित्वों का निर्धारण ।.

राज्य स्तरीय दायित्वों का निर्धारण ।

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6.2.1 भयमुक्त शाला पूर्व शिक्षा

बच्चों को शारीरिक दण्ड देने एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित करना प्रतिबंधित रहेगा।

समस्त बच्चों के लिये उनके निर्धारित पड़ोस (Neighbourhood ) में शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने की शासन की बाध्यता होगी।

3 से 6 वर्ष तक के बच्चों की किसी भी प्रकार की परीक्षा नहीं ली जायेगी।

बच्चों के अभिभावकों के लिये बच्चों के साथ घर में किये जाने वाले व्यवहार, उनकी मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं इत्यादि को समझने हेतु विशेषज्ञों से जागरूकता शिविर (वर्कशॉप) आयोजित कराये जायेंगे ।

6.2.2 शिक्षक/देखभालकर्ता

निर्धारित योग्यता के अनुरूप समस्त रिक्त शाला पूर्व शिक्षा केन्द्रों/ आंगनवाड़ी केन्द्रों में शिक्षकों/कार्यकर्ताओं की नियुक्ति निर्धारित समय सीमा में करना ।

अप्रशिक्षित शाला पूर्व शिक्षकों/आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण किए जाना ।

शाला पूर्व शिक्षकों/आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा शर्तों का निर्धारण किया जाना।

6.2.3 शालापूर्व शिक्षा केंद्र का संचालन हेतु मान्यता

प्रदेश के समस्त ( निजी/ शासकीय ) शाला पूर्व शिक्षा केंद्रों यथा प्ले स्कूल्स, प्री प्राइमरी स्कूल , प्रीपेरेट्री क्लासेस, नर्सरी स्कूल इत्यादि को मान्यता प्रदान करने हेतु महिला एवं बाल विकास विभाग नोडल विभाग होगा । इस हेतु महिला एवं बाल विकास मान्यता प्रदान करने हेतु नियम/ शर्तें आदि निर्धारित कर सकेगा।

सभी निजी/ शासकीय शाला पूर्व शिक्षा केंद्रों का संचालन शासन द्वारा निर्धारित मानदण्डों के आधार पर किया जा सकेगा।

बिना मान्यता के अथवा मान्यता निरस्त होने के बाद संचालन पर दण्ड का प्रावधान किया जायेगा।

मापदण्ड - शिक्षक छात्र अनुपात का निर्धारण-

> 20 बच्चों तक 1 शिक्षक

> 21 से 40 बच्चों पर 2 शिक्षक

> 41 से 60 बच्चों तक 3 शिक्षक

> 60 से अधिक बच्चों की स्थिति में 1:20 अनुपात होगा।

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6.2.4 अधोसंरचना मापदण्ड

शाला पूर्व शिक्षा हेतु बिंदु क्रमांक 2.2.2 के नॉन-निगोशिएबल इंडीकेटर के अनुसार अधोसंरचना निर्धारित होगी।

समस्त आंगनवाड़ी केन्द्रों को शासकीय/विभागीय अधोसंरचना क्रमबद्ध चरणों में तथा यथासंभव प्राथमिक विद्धालय परिसर में उपलब्ध कराई जायेगी।

शाला पूर्व शिक्षा केंद्र का स्थल सीधा मुख्य सड़क पर न खुलता हो, खतरनाक क्षेत्र जैसे खदान , कारखाने , प्रदूषित इलाकों में न हो।

Π जितनी संख्या में एक क्लासरूम में बच्चे होंगे उसी अनुपात में क्लासरूम में पर्याप्त स्थान उपलब्धहोना।

बाधा रहित शाला पूर्व शिक्षा की व्यवस्था हो। बच्चों की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए यथासंभव भूतल (ग्राउण्ड फ्लोर) पर शाला पूर्व शिक्षा संचालित की जाए।

لو सभी मौसमों के लिये अनुकूल भवन।

बालक बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय।

Π सभी बच्चों के लिये स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल व्यवस्था।

भवन में किचन शेड , भण्डार कक्ष की उपलब्धता।.

मैदानी गतिविधियों (आउटडोर एक्टिविटीज) के लिये समतल मैदान/खुला स्थान हो ।

सुरक्षा के लिये भवन के परिसर की बाउण्ड्रीवॉल अथवा फेंसिंग की व्यवस्था।

खेल सामग्री एवं उपकरण केन्द्र के अनुरूप हों ।

केंद्र पर पिक्चर बुक तथा कहानियों की किताबें, कैलेण्डर , चार्ट, पोस्टर, पुराने समाचार पत्र , पुरानी पत्रिकाओं की उपलब्धता।

खेलकूद सामग्री , खेलकूद उपकरण की उपलब्धता।

6.2.5 शाला पूर्व शिक्षा केंद्र से प्राथमिक शाला में बच्चों का अंतरण (Transition )

इसके लिये निम्नलिखित कार्यवाहियां की जायेंगी-

आंगनवाड़ी केंद्र के बच्चों को प्राथमिक शाला के बच्चों से मिलवाना ।

आंगनवाड़ी केंद्र को शाला परिसरों/ समूहों में पूरी तरह से एकीकृत किया जायेगा।

• आंगनवाड़ी केंद्र के बच्चों एवं माता - पिता एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को प्राथमिक शाला के विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के लिये आमंत्रित किया जायेगा।

बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी , जांच परीक्षण को अन्य पूर्व प्राथमिक शालाओ में भी उपलब्ध कराया जाये ।

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7. नीति के मुख्य क्षेत्र ( Key area of the policy)

7.1 समतापूर्ण और समावेशन सहित व्यापक पहुंच ( Universal Access with Equity & Inclusion)

समस्त बच्चों की पहुंच में शाला पूर्व शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित करना शासन का दायित्व 'होगा। किसी भी स्थान पर जहां 150 की जनसंख्या तथा 3-6 वर्ष के 10 या उससे अधिक बच्चे होंगें , वहां पर शाला पूर्व शिक्षा सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी।

यदि कोई बच्चा अपने अभिभावकों के साथ 150 से कम आबादी वाले अथवा 3-6 वर्ष के बच्चों की 10 से कम संख्या वाले क्षेत्र में निवास करता है तो उसकी पहुंच में शाला पूर्व शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु व्यवस्था की जा सकेगी। यह दूरी अधिकतम 500-750 मीटर अर्थात् आधा से एक तिहाई किलो मीटर से अधिक नहीं होगी । यह सुविधा उन्हीं क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जायेगी जहाँ अभिभावक के निवास तथा शाला पूर्व शिक्षा केन्द्र के मध्य दुर्गम रास्ते जिसमें नदी, नाले एवं पहाड़ आदि नहीं आते हों।

इस नीति के अनुसार ईसीसीई हेतु सार्वभौमिक पहुंच बनाना महत्वपूर्ण लक्ष्य है । ऐसे क्षेत्र एवं जिले जो कि सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े हैं, उन पर विशेष ध्यान एवं प्राथमिकता देनी होगी।

ईसीसीई की व्यापक पहुंच के लिये आगंनवाड़ी केंद्रों को उच्चतर गुणवत्ता के बुनियादी ढांचे , खेलने के उपकरण और प्रशिक्षित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से सशक्त बनाया जायेगा।

दिव्यांग (विशेष आवश्यकता वाले) बच्चों को शाला पूर्व शिक्षा केंद्र में प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

शाला पूर्व शिक्षा की समतापूर्ण पहुंच (Access with Equity) को सुनिश्चित किया जायेगा।

7.2 गुणवत्ता सुनिश्चित करना ( Ensuring Quality)

7.2.1 पाठ्यक्रम

बच्चों की आयु एवं आवश्यकतानुसार रोचक पाठ्यक्रम का निर्माण किया जावेगा , जो उसकी क्षमताओं में वृद्धि कर सके। शाला पूर्व शिक्षा के लिए तैयार किए गए पाठ्यक्रम अनुसार बच्चों को शाला पूर्व शिक्षा दी जावेगी । एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा तैयार फ्रेमवर्क के अनुसार राज्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किया जायेगा जिसे महिला एवं बाल विकास विभागं की सहमति पश्चात लागू किया जायेगा। यह पाठ्यक्रम इस तरह तैयार किया जायेगा, जो कि बच्चों को स्कूल जाने के लिये तैयार करता हो।

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ई.सी.सी.ई. के तहत 3 से 6 वर्ष के बच्चों की कोई प्रतियोगिता/प्रतिस्पर्धाएं आयोजित नहीं की जायेगी। इसके स्थान पर स्पोर्ट मेला, रचनात्मक मेला आयोजित किया जा सकता है।

Π पाठ्यक्रम बालकेंद्रित गतिविधि आधारित होगा , जिससे बच्चों को खेल - खेल में शिक्षा दी जा सके।

पाठ्यक्रम का माध्यम मातृभाषा/स्थानीय भाषा/ बहुभाषा में सहज एवं सरल होना चाहिए।

पाठ्यचर्या और शिक्षण शास्त्र को एक मजबूत भारतीय और स्थानीय संदर्भ देने की दृष्टि से पुनर्गठित किया जायेगा।

पाठ्यक्रम लेखन पूर्व अभ्यास ( Pre righting Skill) एवं पढ़ने से पूर्व का अभ्यास (Pre reading Skill ) पर आधारित हो।

बच्चों के सीखने की गति पर सतत् एवं सघन निगरानी रखी जायेगी ।

बच्चों की आयु एवं आवश्यकतानुसार रोचक पाठ्यक्रम का निर्माण करना जो उसकी क्षमताओं में वृद्धि कर सके।

प्रशिक्षित शिक्षकों की देखरेख एवं सुरक्षा पहलुओं का उचित ध्यान रखकर साथी छात्रों के लिये पियर ट्यूटरिंग को एक स्वैच्छिक और आनंदपूर्ण गतिविधि के रूप में लिया जा सकता है। (राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का बिंदु क्र. 2.7)

पाठ्यक्रम सर्वांगीण विकास पर आधारित हो इससे बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमता को विकसित किया जा सके एवं बच्चों के लिये शारीरिक तथा मानसिक रूप से बोझिल न हो। 3-6 वर्ष के बच्चों के लिये राष्ट्रीय तथा अंर्तराष्ट्रीय मानकों के आधार पर पाठ्यक्रम तैयार किया जा सकता है, किन्तु इसमें आयु के अनुसार बच्चे सीखने/ विकास स्तर के परिणाम परिभाषित होने चाहिए। निर्धारित अधिकतम दक्षता से अधिक पाठ्यक्रम बच्चों के कोर्स में सम्मिलित नहीं किया जा सकता ।

निर्धारित पाठ्यचर्या (Curriculam) का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं के विरूद्ध बाल संरक्षण अधिकार अधिनियम 2005 (Child Protection right Act 2005) के तहत दण्डात्मक कार्यवाही की जा सकेगी।

शाला पूर्व शिक्षा माह जुलाई से माह मार्च तक 09 माह आयोजित की जाएगी।

माह मई एवं जून में निम्नानुसार गतिविधियां आयोजित की जा सकेगी-

> समर कैंप आयोजित किए जा सकेंगे । ( बच्चों के लिये स्वैच्छिक)

> बच्चों को पूरक पोषण आहार का वितरण किया जावेगा।

> 5-6 वर्ष के बच्चों के लिए शाला जाने की तैयारी संबंधी गतिविधियाँ की जावेगी ।

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> 3-6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल गतिविधियाँ आयोजित की जा सकेंगी जिसमें आंगनवाड़ी केंद्रों एवं सेक्टर स्तर पर खेलकूद प्रतियोगिताओं आदि का आयोजन किया जा सकेगा।

> आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण का आयोजन।

>...स्कूल चलें हम की तरह 'आंगनवाड़ी चलें हम' अभियान का आयोजन ।

> बच्चों को शिशु विकास कार्ड एवं प्रमाण -पत्र का वितरण ।

7.2.2 बच्चों को प्राथमिक शाला में प्रवेश के लिये तैयार करने हेतु योग्य तथा अनुभवी शिक्षाकों का प्रावधान

बच्चों को गुणवत्ता युक्त शाला पूर्व शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु शिक्षक/शिक्षिकाओं की योग्यता का निर्धारण किया जायेगा ।

बच्चों को गुणवत्तायुक्त शाला पूर्व शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश के समस्त शाला पूर्व शिक्षा केन्द्रों पर निर्धारित योग्यता के अनुरूप शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी ।

आंगनवाड़ी केन्द्रों में ईसीसीई के लिये आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं/ शिक्षकों को व्यावसायिक योग्यता विकसित किये जाने हेतु एनसीईआरटी द्वारा विकसित पाठ्यक्रम अनुसार प्रशिक्षण दिया जाये। 10+ 2 और उससे अधिक योग्यता वाले आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ईसीसीई में 06 महीने का प्रमाणपत्र कार्यक्रम कराया जायेगा, और कम शैक्षणिक योग्यता रखने वालों को एक वर्ष का डिप्लोमा कार्यक्रम कराया जायेगा। इन कार्यक्रमों को डिजिटल/ दूरस्थ माध्यम से डी.टी.एच. चैनलों के साथ- साथ स्मार्ट फोन के माध्यम से चलाया जा सकता है।

7.2.3 गुणवत्ता युक्त शाला पूर्व शिक्षा का निर्धारण

जन्म प्रमाण पत्र एवं स्थानांतरण प्रमाण आदि के आधार पर केंद्रों में प्रवेश दिया जाएगा , किंतु उक्त प्रमाण पत्रों के अभाव में किसी भी बच्चे को शाला पूर्व शिक्षा केंद्र में प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

शाला पूर्व शिक्षा प्रतिदिन 3-4 घंटे , माह में 21 दिन एवं वर्ष में 210 दिवस निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार आयोजित की जाएगी । किसी भी स्थिति में प्रतिदिन 4 घंटे से अधिक बच्चे को शाला में नहीं रखा जायेगा।

शिक्षक/शिक्षिकाओं एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए प्रतिदिन न्यूनतम 4 घंटे शाला पूर्व शिक्षा के लिए तथा एक घंटा शाला पूर्व शिक्षा की तैयारियों के लिए अनिवार्य होगा।

खेल सामग्री एवं उपकरण तथा प्री स्कूल किट की उपलब्धता अनिवार्य होगी।

केंद्रों पर पिक्चर बुक तथा कहानियों की किताबें, कैलेण्डर , चार्ट , पोस्टर, पुराने समाचार पत्र, पुरानी पत्रिकाओं आदि की उपलब्धता होगी।

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खेलकूद सामग्री एवं खेलकूद उपकरण बच्चों की आवष्यकताओं के अनुरूप हों । बच्चों के लिये ऐसे खेल संसाधन उपलब्ध कराना जो उनके शारीरिक, सामाजिक, संवेदनशील , पारस्परिक दृष्टिकोण तथा भाषा विकास ( सर्वांगीण विकास) में सहयोगी हो।

बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेंगी।

स्वास्थ्यके विकास की निगरानी और जांच- निरीक्षण जो आंगनवाड़ी व्यवस्था में उपलब्ध हैं, उसे शाला पूर्व शिक्षण संस्थाओं के बच्चों को भी उपलब्ध कराया जायेगा।

बच्चों को किसी भी प्रकार का गृह कार्य नहीं दिया जायेगा। किसी भी रूप में कोई प्रोजेक्ट वर्क अथवा प्रैक्टिस वर्कबुक इत्यादि गृह कार्य नहीं दिया जायेगा। बच्चों की व्यक्तिगत अभिरूचि के अनुसार ही गतिविधियां शाला में ही कराई जाएं।

7.2.4 बच्चों को शारीरिक और मानसिक दण्ड पर प्रतिबंध

शाला पूर्व शिक्षा के द्वारा बच्चों को शाला जाने के लिये मानसिक रूप से तैयार किया जायेगा । इसके लिये बच्चों को भयमुक्त, स्वछंद वातावरण उपलब्ध कराया जायेगा, ताकि वे आगे जाकर अपनी प्रारंभिक शिक्षा बिना किसी भय अथवा दबाव के सफलता पूर्वक पूर्ण कर सकें । प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष किसी भी रूप में बच्चों को शारीरिक अथवा मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं किया जाएगा। इसके अंतर्गत कार्यकर्ता , शिक्षक , आंगनवाड़ी केन्द्र अथवा शाला पूर्व शिक्षा केंद्र में उपस्थित होने वाले विजिटर्स, माता -पिता सभी सम्मिलित होंगे ।

बच्चे के शारीरिक मानसिक या किसी भी अन्य तरह का उत्पीड़न पाये जाने पर जे.जे. एक्ट की धारा 75 तथा धारा 82-( 1 ) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 14 एवं 15 के अनुसार कार्यवाही की जाएगी।

7.2.5 शाला पूर्व शिक्षा केंद्रों के संचालन के लिये मान्यता

कोई भी व्यक्ति अथवा संस्था किसी भी तरह के शाला पूर्व शिक्षा से संबंधित स्कूलों को संचालन करने से पूर्व नोडल विभाग से मान्यता/ अनुमति प्राप्त करेगा।

निर्धारित मापदण्डों की पूर्ति किये बिना किसी भी शाला पूर्व शिक्षा से संबंधित स्कूल का संचालन मान्य नहीं किया जाएगा ।

यदि शाला पूर्व शिक्षा से संबंधित कोई भी स्कूल बिना मान्यता के अथवा मान्यता निरस्त होने के बाद संचालित करते पाया जाता है तो उस पर नियमानुसार निर्धारित दण्ड अधिरोपित किया जा सकेगा ।

गैर सरकारी क्षेत्र के पूर्व प्राथमिक स्कूलों को अनुमति संबंधी नियमों को सरल बनाया जायेगा।

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8. मॉनिटरिंग एवं समर्थित निरीक्षण ( Monitoring & Supportive Supervision)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार ईसीसीई पाठ्यक्रम और शिक्षण विधि की जिम्मेदारी मानव संसाधन विकास मंत्रालय की होगी ताकि प्राथमिक विद्यालय के माध्यम से पूर्व प्राथमिक विद्यालय तक इसकी निरंतरता सुनिश्चित की जा सके और शिक्षा के मूलभूत पहलुओं पर ध्यान केन्द्रित किया जा सके। प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा पाठ्यक्रम की आयोजना और क्रियान्वयन मानव संसाधन विकास मंत्रालय , महिला और बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) , स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमएचएफडब्ल्यू) और जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा। स्कूल शिक्षा में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा के सुचारू एकीकरण एवं सतत् मार्गदर्शन के लिये एक विशेष संयुक्त कार्य बल (टास्क फोर्स) का गठन किया जायेगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की उपर्युक्त कण्डिका 1.9 के परिप्रेक्ष्य में ई.सी.सी.ई. कार्यक्रम के क्रियान्वयन की सतत् मॉनीटरिंग एवं पर्यवेक्षण हेतु राज्य स्तर पर राज्य शिक्षा केन्द्र, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं आदिम जाति कल्याण विभाग के संयुक्त टास्क फोर्स द्वारा एवं जिला स्तर से लेकर विकासखण्ड स्तर एवं फील्ड स्तर तक शिक्षा विभाग , महिला एवं बाल विकास विभाग एवं आदिम जाति कल्याण विभाग के अमले के द्वारा किया जा सकेगा।

ई.सी.सी.ई. कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिये विभिन्न स्तरों पर तंत्र और आपस में सहभागिता के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर सकारात्मक मॉनिटरिंग निगरानी तथा आपसी समन्वय का भी ध्यान रखा जाना आवश्यक है । ई.सी.सी.ई. कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिये विभिन्न स्तरों पर निम्नानुसार व्यवस्था की जायेगी।

8.1 राज्य स्तर से की जाने वाली कार्यवाही

नीति के तहत कार्यवाही सुनिश्चित करना।

शाला पूर्व शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्य स्तर पर एक सेल का गठन किया जाना।

नीति के प्रावधानों को क्रियान्वित करने हेतु प्रशासकीय अमले में वृद्धि करना/आंगनवाड़ी केन्द्र से लेकर राज्य स्तर तक अलग से शाला पूर्व शिक्षा विंग की स्थापना करना।

शाला पूर्व शिक्षा हेतु अभिलेखों के संधारण एवं मॉनिटरिंग हेतु नोडल विभाग द्वारा निर्धारित प्रपत्र तैयार कर नमूने संबंधित सभी संस्थाओं को उपलब्ध कराना।

अशासकीय शालाओं को मान्यता प्रदान करने हेतु प्राधिकृत अधिकारी तथा प्रक्रिया तय करना।

शिक्षक/शिक्षिकाओं एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा शर्तों का निर्धारण ।

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3-6 वर्ष के प्रत्येक बच्चे की शाला पूर्व शिक्षासुनिश्चित करना।

प्रशासकीय अमले की क्षमताओं के सुदृढ़ीकरण की व्यवस्था करना।

शाला पूर्व शिक्षा की सतत् मॉनिटरिंग हेतु राज्य स्तर पर पृथक सॉफ्टवेयर विकसित किया जाकर निगरानी की जा सकेगी।

8.2 जिला स्तर से कार्यवाही

समाचार पत्रों, रेडियो तथा दूरदर्शन तथा विषय से संबंधित ब्रोशर आदि के माध्यम से शाला पूर्व शिक्षा की जानकारी जनसमुदाय को प्रदान करना ।

जिला स्तर पर जन प्रतिनिधियों , गैर शासकीय संस्थाओं के साथ कार्यशाला का आयोजन, शाला पूर्व शिक्षा की गतिविधियों को बढ़ावा देना।

जिला एवं विकास खण्ड के समस्त संबंधित विभागों के अधिकारियों का शाला पूर्व शिक्षा के अधिकार पर उन्मुखीकरण ।

शाला पूर्व शिक्षा हेतु गैर अनुदान प्राप्त/ अनुदान प्राप्त तथा निजी शाला पूर्व शिक्षा शालाओं के प्रबंधकों तथा पर्यवेक्षकों की बैठक एवं उन्मुखीकरण करना।

पर्यवेक्षक सेक्टर स्तर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का उन्मुखीकरण करना । शाला पूर्व शिक्षा से वंचित बच्चों के माता-पिता अथवा अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें बच्चों की शाला पूर्व शिक्षा हेतु प्रेरित करना।

शाला पूर्व शिक्षाकेन्द्र/आंगनवाड़ी केन्द्रवार बच्चों के नामांकन की पुष्टि करना।

अशासकीय/शासकीय संस्थाओं एवं आंगनवाड़ी केन्द्रों में शिक्षकों/कार्यकर्ताओं की उपलब्धता।

उपलब्ध अधोसंरचना (अनुपलब्धता की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था। )

नीति में निहित मापदण्डों के अनुरूप प्रत्येक शासकीय/अशासकीय पूर्व प्राथमिक शालाओं तथा आंगनवाड़ी केन्द्र में वर्तमान स्थिति का आंकलन करना।

शाला पूर्व शिक्षा केंद्रों के बच्चों तथा आंगनवाड़ी के बच्चों के रिपोर्ट कार्ड जारी करना। ऐसी बसाहटों की पहचान (मैपिंग ) करना जहां निर्धारित मापदण्डों की पूर्ति होने के बावजूद शाला पूर्व शिक्षा केंद्र , आंगनवाड़ी या उप आंगनवाड़ी की सुविधा उपलब्ध न हो।

नीति निर्धारण उपरांत प्रत्येक शासकीय/अशासकीय/ आंगनवाड़ी केन्द्र के लिये नेबरहुड एरिया का आंकलन करना ।

Π यदि किसी बच्चे का विकास अवरूद्ध हो रहा है, तो उसकी पहचान कर विषय विशेषज्ञों तथा विभाग को अवगत कराना ।

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3-6 वर्ष के ऐसे बच्चे जो अभी तक आंगनवाड़ी केंद्र या अन्य समकक्ष अर्थात् शाला पूर्व शिक्षा से सबंधित किसी भी शाला में दर्ज नहीं हैं, की पहचान करना ताकि कोई भी बच्चा शाला पूर्व शिक्षा से वंचित न रहे ।

ऐसी आंगनवाड़ियों में जहां बच्चों के शाला पूर्व शिक्षा का स्तर ठीक नहीं है उनका तथा अन्य संस्थाओं का प्रशिक्षण कराना ।

8.3 स्थानीय निकायों के दायित्व

ग्रामीण/ शहरी स्थानीय निकायों का दायित्व होगा कि अपने क्षेत्रान्तर्गत निवासरत् सभी 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए पड़ोस (Neighborhood) में शाला पूर्व शिक्षा केंद्र संचालन हेतु यथा आवश्यक व्यवस्थात्मक(यथा- भवन निर्माण , भूमि आवंटन , रखरखाव आदि) एवं पर्यवेक्षण (यथा-बच्चों का नामांकन , पालक परामर्श , गतिविधि संचालन आदि) में सहयोग प्रदाय करेंगे। इस हेतु सुसंगत प्रावधान संबंधित विभागों द्वारा जारी किये जा सकेंगे।

9. शोध मूल्यांकन एवं प्रलेखीकरण (Research , Evaluation & Documention )

ईसीसीई अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय नवाचारों के साथ भारत में कई शताब्दियों से बाल्यावस्था शिक्षा के विकास के लिये प्रचलित प्रथाओं पर राष्ट्रीयतम शोध को शामिल किया जायेगा। स्थानीय परंपराओं में प्रचलित कला , कहानियां, कविता, खेल , गीत और बहुत कुछ शोधकार्य में शामिल होगा ।

शाला पूर्व शिक्षा के शोध , कार्यान्वयन एवं मॉनिटरिंग का साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए बाह्य संस्थाओं से शोध एवं मूल्यांकन करवाया जाएगा। प्रारंभिक वर्षों से ही बच्चों के सर्वांगीण विकास को ट्रैक करने के लिए मौलिक शोध हेतु अध्ययन तथा मौलिक शोध हेतु निधियों का आवंटन किया जाएगा।

10. जागरूकता और हिमायत (Advocacy)

समुदाय तथा अभिभावकों को शाला पूर्व शिक्षा के लिए जागरूक तथा संवेदनशील बनाने के लिए जनसंचार के माध्यम से दीर्घकालिक अभियान बनाए जा कर प्रचार प्रसार किया जाएगा। कार्यक्रम को रोचक तथा मनोरंजक बनाया जाएगा। प्रतिवर्ष आंगनवाड़ी चलो अभियान चलाकर समुदाय को अधिक से अधिक जागरूक बनाने का प्रयास किया जाएगा ।

11. संस्थागत और कार्यान्वयन प्रबंध (Institutional & Implementation Arrangements) 11.1 प्रशिक्षण व्यवस्था

विभाग के द्वारा विभिन्न स्तर पर प्रशिक्षणों की व्यवस्था की जा सकेगी ।

शिक्षकों के मिनिमम लेबल ऑफ लर्निंग तथा मेक्जिमम लेबल ऑफ लर्निंग का निर्धारण।

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आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं/शिक्षकों की कार्य/ भूमिका के अनुरूप क्षमता के आंकलन हेतु मॉड्यूल विकसित करना , प्रशिक्षण कोर्स अनिवार्य एवं अभिरूचि पर आधारित होना चाहिए ।

महिला एवं बाल विकास द्वारा शासकीय/ अशासकीय ईसीसीई संस्थाओं की मॉनिटरिंग की जायेगी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/शिक्षकों का प्रशिक्षण/डिप्लोमा/सर्टिफिकेशन इत्यादि कार्य न राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा महिला एवं बाल विकास के समन्वय से किया जायेगा।

सांकेतिक आधारित प्रगति रिपोर्ट आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/शिक्षकों की होना चाहिये।

11.2 उन्मुखीकरण

अभिभावकों तथा जनप्रतिनिधियों का उन्मुखीकरण।

विभागीय अधिकारियों के साथ साथ अन्य विभागीय अधिकारियों का उन्मुखीकरण (जिनके द्वारा केन्द्रों की मॉनीटरिंग की जाती है। )

मीडिया कर्मियों का उन्मुखीकरण।

12. भागीदारियां, समाभिरूपता और समन्वयन ( Partnerships , Convergence & Coordination )

ई.सी.सी.ई. कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिये विभिन्न स्तरों पर तंत्र और आपस में सहभागिता के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर सकारात्मक मॉनीटरिंग निगरानी तथा आपसी समन्वय का भी ध्यान रखा जाना आवश्यक है। ई.सी.सी.ई कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए विभिन्न स्तरों पर निम्नानुसार व्यवस्था की जायेगी-

विभागीय समन्वय राज्यशिक्षा केन्द्र, आदिम जाति कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग , निःशक्त जन कल्याण विभाग , पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग, नगरीय प्रशासन विभागों के साथ समन्वय किया जाएगा।

जिसे राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा कोर्स डिजायन , करीकुलम इत्यादिः तैयार किया जायेगा, जिसे महिला एवं बाल विकास विभाग की सहमति से लागू किया जायेगा।

रिसोर्स ग्रुप, विशेषज्ञ, पेशेवर, उच्च शिक्षण संस्थाओं, अशासकीय संस्थाओं तथा व्यक्तियों में से स्वैच्छिक कार्य करने वाली संस्थाओं एवं समूहों की राज्य जिला और उप जिला स्तरों पर पहचान की जाकर मॉनिटरिंग की जाएगी ।

पर्यवेक्षण और क्षमता निर्माण के सरकारी प्रयासों में क्रमिक और प्रभावी तरीके से सहायता करने लिए सहयोग लिया जाएगा।

नीतिगत लक्ष्यों को प्राप्त करने और प्रयासों में सहायता लेने के लिए शासन निश्चित समयावधि के लिए समुदाय , गैर सरकारी सेवा प्रदाताओं और निजी सेवा प्रदाताओं सहित मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 18 अप्रैल 2022

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बहुमुखी स्टेक होल्डरों के साथ समयबद्ध भागीदारी के माध्यम से निश्चित दिशा निर्देशों और मानकों का पालन सुनिश्चित हो सकेगा।

13. शाला पूर्व शिक्षा के लिए निवेश में वृद्धि ( Increase Investmen towards PSE) सर्व विदित है कि बाल्यावस्था में शुरूआती वर्षों में बच्चों की सेहत में सुधार लाने के लिए किए गए निवेश पर लाभ की दर उच्चतम रही है। शासन बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ उनकी गुणवत्ता युक्त शाला पूर्व शिक्षा के लिए वचनबद्ध है । बच्चों की शाला पूर्व शिक्षा के लिए संसाधन निवेशऔर उपयोग में अंतर को पहचानने के लिए शाला पूर्व शिक्षा हेतु प्रतिवर्ष विकेंद्रीकृत बजटिंग की प्रक्रिया नियमित रूप से की जाएगी। इससे शाला पूर्व शिक्षा के परिणामों का मूल्यांकन भी होगा। यह नीति एक शिक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए वित्त पोषण हेतु ईसीसीई की दीर्घकालिक क्षेत्र के रूप में पहचान करती है, जिस पर जोर दिया जाना चाहिए।

14. समीक्षा ( Review )

नीति अनुसार कार्यान्वित की जा रही गतिविधियों की समीक्षा नियमित रूप से की जाएगी। आंगनवाड़ी केंद्रों तथा शाला पूर्व शिक्षा केंद्रों पर पाठ्यचर्या तथा पाठ्यक्रम लागू होने के पश्चात् निर्धारित समयावधि में मूल्यांकन कर आवश्यकतानुसार सुधार किए जाएंगे एवं निर्धारित कार्यक्रम अनुसार समय - समय पर इसकी विस्तृत समीक्षा की जायेगी।

अजय कटेसारिया, उपसचिव,

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2022 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 18 April 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2022-04-18.176.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2022-04-18.176.Extraordinary.