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मध्यप्रदे श शासन
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल, शुक्रवार , दिनांक 5 अगस्त 2022- श्रावण 14, शक 1944
क्रमांक 449]
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल, दिनांक 5 अगस्त 2022
क्रमांक: एफ- 12-01 /2022/29-2 इस विभाग की अधिसूचना क्रमांक- एफ- 5-5-2009-उन्तीस-2 दिनांक 19 अगस्त, 2009 से जारी मध्यप्रदेश राज्य उपभोक्ता कल्याण निधि नियम, 2009 राज्य शासन एतद् द्वारा निरसित किया जाता है तथा भारत सरकार के उपभोक्ता कल्याण निधि दिशा निर्देश , 2019 के अनुपालन में राज्य में उपभोक्ता हितों के संरक्षण, संवर्धन तथा जागरूकता के लिए वित्तीय सहायता दिये जाने हेतु मध्यप्रदेश राज्य उपभोक्ता कल्याण निधि के मार्गदर्शक सिद्धांत, 2022 एतद द्वारा निम्नानुसार जारी करता है । यह आदेश मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशन की तिथी से प्रवृत्त होगा।
मध्यप्रदेश राज्य उपभोक्ता कल्याण निधि
के मार्गदर्शक सिद्धांत , 2022
1. परिचयः-
उपभोक्ता हितों के संरक्षण के लिए राज्य द्वारा उपभोक्ता कल्याण निधि गठन किये जाने का प्रावधान है । मध्यप्रदेश में उपभोक्ता कल्याण निधि भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा क्रमशः 75:25 दिए गए अनुदान से निर्मित की गई है । यह राशि मूलधन ( सीड मनी) के रूप में है। इसमें राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग एवं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में दायर
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शिकायतों के शुल्क की राशि एवं ऐसे उपभोक्ताओं जिनका आसानी से अभिनिर्धारण नहीं किया जा सकता, को हुई हानि अथवा क्षति के लिए देय राशि जमा की जाएगी । इसके अतिरिक्त इस मद में ऐसी राशियां भी जमा की जाएगी जो भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस निधि में जमा किए जाने हेतु निर्धारित की जाए । निधि की मूलधन ( सीड मनी) राशि से निर्मित होने वाली ब्याज राशि का उपयोग राज्य में उपभोक्ता हितों के संरक्षण , संवर्धन तथा जागरूकता के लिए वित्तीय सहायता दिये जाने हेतु किया जाना है।
2. उद्देश्य
मध्यप्रदेश उपभोक्ता कल्याण निधि से वित्तीय सहायता का मूल उद्देश्य राज्य में निधि के उपयोग द्वारा उपभोक्ता योजनाओं/परियोजनाओं एवं संगठनों को वित्तीय सहायता दिया जाना है , ताकि प्रदेश में सशक्त उपभोक्ता वातावरण का निर्माण किया जा सके ।
3. वित्तीय सहायता प्रदान किए जाने के सिद्धांत-
1. केन्द्र सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अंतर्गत मध्यप्रदेश उपभोक्ता कल्याण निधि के मार्गदर्शक सिद्धांत, 2022 जारी किये जा रहे हैं । शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिति, जागरूकता एवं संसाधनों में असमानता को दृष्टिगत रखते हुए आदिवासी बाहुल्य जिले एवं ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर वित्तीय सहायता प्रदाय की जावेगी ।
II . मध्यप्रदेश उपभोक्ता कल्याण निधि को कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से भी संवर्धित करने के लिए प्रयास किए जाएंगे ।
III . उपभोक्ता कल्याण निधि के अंतर्गत मॉनिटरिंग एवं संचालन कार्य आयुक्त/ संचालक, खाद्य , नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, संचालनालय , मध्यप्रदेश द्वारा राज्य नोडल अधिकारी के रूप में किया जाएगा ।
4. प्रयोजन
आर्थिक सहायता मुख्य रूप से निम्न प्रयोजनों हेतु दी जाएगी-
1. उपभोक्ता जागरूकता हेतु प्रदेश के शालाओं/महाविद्यालयों / विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों अथवा स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों द्वारा ' उपभोक्ता क्लब' का संचालन ।
II . उपभोक्ताओं की समस्या के निराकरण हेतु ' उपभोक्ता मित्र' के माध्यम से सलाह, मार्गदर्शन एवं कानूनी सहायता प्रदान करना एवं इस हेतु खाद्य कार्यालयों को हार्डवेयर/साफटवेयर/ एलईडी स्मार्ट टी.वी. उपकरण एवं इंटरनेट सुविधा दिया जाना ।
III . 'उपभोक्ता मित्र' अंतर्गत संभागीय स्तर पर विषय विशेषज्ञों को सम्मिलित करते हुए विस्तारीकरण एवं संवर्धन।
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IV. उपभोक्ता हित में जिलों में तकनीकी सहायता तंत्र विकसित करना।
V. ग्रामीण उपभोक्ता सशक्तीकरण संबंधी परियोजना का संचालन।
VI . जिले जहां जागरूकता कम है।उपभोक्ता न्यायालयों में प्रकरण कम दर्ज हैं वहां उपभोक्ता जागरूकता गतिविधियां चलाना।
VII . जनसंपर्क/स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों के माध्यम से उपभोक्ता जागरूकता प्रचार - प्रसार गतिविधियां करना ।
VIII . पात्र स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों/सरकारी उपक्रमों /अर्द्धशासकीय संस्थानों को उपभोक्ता जागरूकता हेतु वित्तीय सहायता।
IX . स्थायी समिति की अनुशंसा पर केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की गई उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम/कार्य-योजनाओं के कार्यान्वयन एवं राज्य सरकार / निकाय द्वारा निर्धारित गतिविधियां ।
の
Χ. आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में भारतीय मानक ब्यूरो एवं नाप- तौल विभाग द्वारा संचालित जागरुकता गतिविधियां।
ΧΙ . जिला एवं राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद द्वारा सिफारिश किए गए किसी अन्य उपभोक्ता संरक्षण प्रयोजनों के लिए (जिसे स्थायी समिति द्वारा समुचित समझा जाए ) अनुदान उपलब्ध कराना तथा स्थायी समिति के अनुमोदन से जिला एवं राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषद की बैठक के आयोजन व्यय तथा सदस्यों को बैठक संबंधी यात्रा एवं अन्य व्यय हेतु राशि प्रदाय किया जाना ।
XII . नियमित बजट अनुपलब्ध होने की दशा में प्रदेश में उपभोक्ता जागरूकता गतिविधियों यथा विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस एवं राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के आयोजन पर आवश्यकतानुसार व्यय । व्यय का अनुमोदन यथासंभव स्थाई समिति द्वारा गतिविधियों के क्रियान्वयन के पूर्व में लिया जावेगा । इस हेतु पूर्व अनुमोदन प्राप्त न हो पाने की स्थिति में गतिविधियां एवं व्यय का स्थाई समिति के अध्यक्ष से अनुमोदन प्राप्त किया जाकर व्यय का स्थाई समिति से कार्योत्तर अनुमोदन प्राप्त किया जायेगा।
XIII . नियमित बजट अनुपलब्ध होने की दशा में आवश्यकतानुसार उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में राज्य एवं संभाग स्तरीय पुरस्कार पर व्यय।
XIV. उपभोक्ता परामर्श/ मार्गदर्शन के लिए राज्य/क्षेत्र स्तर पर उपभोक्ता मार्गदर्शन केंद्र एवं राज्य उपभोक्ता हेल्पलाईन की स्थापना एवं संचालन संबंधी व्यय किया जाना।
XV . उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में किये जाने वाले अध्ययन/अनुसंधान/प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन एवं प्रशिक्षण/सेमिनार किया जाना ।
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XVI . उपभोक्ता जागरूकता बढाने के लिए अभिनव परियोजनाएं और उपभोक्ता शिक्षा के लिए कार्यक्रम ।
XVII . परियोजनाएं/ कार्यक्रम/ गतिविधियां जो उपरोक्त में शामिल नहीं हैं, लेकिन स्थायी समिति की राय में जो सामाजिक समस्याओं को संबोधित करती हैं और अधिकतम उपभोक्ता कल्याण से संबंधित हो, ऐसे मामलों में समिति लिखित में कारण दर्ज करते हुए अनुदान की अनुशंसा कर सकेगी ।
XVIII . नियमित बजट उपलब्ध न होने की दशा में उपभोक्ता संरक्षण के लिए अनुदान आदि के लिए किए जाने वाले विज्ञापन, शपथ- पत्र आदि पर होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति की जाना ।
5. पात्रता
1 . कंपनी अधिनियम, 2013/ सोसायटी पंजीकरण अधिनियम/ सहकारी समिति अधिनियम या उस समय लागू किसी कानून के तहत पंजीकरण के बाद राज्य में कम से कम तीन साल की अवधि के लिए उपभोक्ता कल्याण गतिविधियों में संलग्न कोई एजेंसी/संगठन। जिन जिलों में उपभोक्ता जागरूकता कम है अर्थात जहां उपभोक्ता न्यायालयों में प्रकरण कम दर्ज हैं उन जिलों में स्थायी समिति द्वारा 3 साल की समयावधि में शिथिलता दी जा सकेगी । संस्थायें जोकि आदिवासी बाहुल्य जिलों में शासकीय मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालित करती हैं, उनको उपभोक्ता क्लब अथवा अन्य उपभोक्ता जागरूकता योजनाओं के संचालन किये जाने हेतु 3 साल की समयावधि में शिथिलता दी जा सकेगी । पात्र स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों को उपभोक्ता जागरूकता के प्रचार- प्रसार हेतु वित्तीय सहायता दिया जाना ।
II . एजेंसी/संगठन/संस्था के नियम/ बायलॉज में उपभोक्ता संरक्षण गतिविधियों का उल्लेख हो एवं एनजीओ दर्पण पोर्टल में पंजीकरण हो ।
ग्रामीण क्षेत्र में संचालित संस्था जो कि विशेष रूप से महिला/अनुसूचित जाति/जनजाति के क्षेत्र में कार्य कर रही हो या राज्य/केन्द्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना के संचालन में सम्मिलित हो , ऐसी संस्था को वरीयता दी जावेगी।
IV. वस्तुओं या सेवाओं के प्रदाताओं के खिलाफ उपभोक्ताओं या उपभोक्ताओं के समूह के सामान्य हितों को आगे बढाने के लिए स्थापित क्लास एक्शन सूट लेने के लिए उपभोक्ता संगठन ।
V प्रस्ताव जिनका राज्य स्तर पर पहुंच और प्रभाव है, और उपभोक्ता सशक्तिकरण/ जागरूकता बढाने में अभिनव हैं और अनुकरणीय है ।
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VI . ऐसी संस्था/विभाग/संस्थान / निकाय जो उक्त पात्रता की परिधि में नहीं आती है किन्तु स्थायी समिति की राय में उपभोक्ता संरक्षण कार्यक्रम/ गतिविधियों के लिए उपयुक्त हो सकती है , के संबंध में समिति द्वारा कारण दर्शाते हुए पात्रता में आवश्यक शिथिलताएं दे सकेगी ।
परंतु राज्य सरकार किसी प्रकरण विशेष में स्थायी समिति की अनुशंसा पर पात्रता एवं प्रक्रिया के किन्हीं प्रावधान पर शिथिलता/ छूट प्रदान कर सकेगी।
6. आवेदन का परीक्षण
स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों द्वारा प्रारूप- क में संबंधित जिला कलेक्टर के माध्यम से एवं केन्द्रीय/राज्य सरकार/विभागों/ निकायों द्वारा प्रारूप- ख में आयुक्त/ संचालक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, म.प्र. , विंध्याचल भवन , प्रथम तल, घ-ब्लाक , भोपाल को आवेदन किया जाएगा । अनुदान प्राप्त करने हेतु जिला कलेक्टर द्वारा स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों के आवेदनों का निम्न तथ्यों का परीक्षण कर अनुशंसा/परीक्षण टीप सहित प्रस्ताव आयुक्त/ संचालक , खाद्य को अग्रेषित किया जाएगा: -
।. पंजीयन एवं तीन वर्ष के उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों का सत्यापन ।
1. संगठन के नियम/ बायलॉज में उपभोक्ता संरक्षण गतिविधियों का उल्लेख है । एनजीओ दर्पण पोर्टल पर संगठन का पंजीयन है ।
III . निर्धारित प्रारूप- क में आवेदन प्रस्तुत है ।
IV . विगत तीन वर्षों का अंकेक्षित व्यय प्रतिवेदन।
V. संस्था को शासन द्वारा पूर्व में दिए गए अनुदान का उपयोग ।
VI . संस्था को शासन द्वारा प्रस्तुत की जा रही कार्ययोजना की जिले में आवश्यकता।
VII . संस्था एवं पदाधिकारियों के विरूद्ध कोई आपराधिक प्रकरण की स्थिति।
VIII . किन विशिष्ट कारणों से आवेदन अनुशंसित किया गया है- i) ii )
7. प्रस्तावों का परीक्षण-
आयुक्त/संचालक,खाद्य द्वारा इस दिशा- निर्देश के प्रावधानों के अनुरूप प्राप्त सभी आवेदन प्रस्तावों को परीक्षणोपरांत सूचीबद्ध कर उपयुक्तता संबंधी विवरण के साथ स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जावेगा ।
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8. स्थायी समिति एवं अनुमोदन की प्रक्रिया -
1. राज्य उपभोक्ता कल्याण निधि के उपयोग तथा इन मार्गदर्शक सिध्दांतों को क्रियान्वित करने के लिए निम्नानुसार एक स्थायी समिति होगी -
> अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव, म.प्र.शासन, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग अध्यक्ष
> रजिस्ट्रार , मध्यप्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग - सदस्य
> नियंत्रक, विधिक माप एवं विज्ञान , म.प्र. सदस्य
> वैज्ञानिक- ई एवं प्रमुख , भारतीय मानक ब्यूरो , क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल म.प्र. - सदस्य > वित्त विभाग का प्रतिनिधि जो खाद्य विभाग में अपर/संयुक्त/उप संचालक के रूप में पदस्थ हो सदस्य
> जनसंपर्क विभाग का खाद्य विभाग अंतर्गत संलग्न प्रतिनिधि - सदस्य
> आयुक्त/ संचालक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, म.प्र. - सदस्य सचिव
ii . स्थायी समिति द्वारा मूल्यांकन के दौरान प्राप्त प्रस्ताव को निम्नलिखित आधारों पर अस्वीकार किया जा सकता है-
> पात्रता मानदंड को पूरा न करना।
> किसी भी अपेक्षित दस्तावेज का जमा नहीं करना , अपूर्ण प्रस्तुत करना।
> दिशा- निर्देशों में निर्धारित किसी अन्य आवश्यकता का अनुपालन न करना।
> एक स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन के पास आवेदन की तिथि पर विभाग द्वारा वित्त पोषण के साथ कार्यान्वयन के तहत दो उपभोक्ता जागरूकता संबंधी चालू परियोजनाएं आवंटित होना ।
> संगठन की नियमावली में संगठन का उद्देश्य उपभोक्ता संरक्षण/कल्याण गतिविधियों का उल्लेख नहीं होना।
> कार्ययोजना/परियोजना में नवाचार की कमी है और एक रुढिबद्ध प्रकृति की है ।
> प्रस्ताव केवल दोहराव है ।
> कार्ययोजना/परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाला संगठन परिवार आधारित ।
> किसी भी शिकायत मामले में संगठन के खिलाफ चल रही जांच , जिसकी जांच पूरी होने में समय लगने की संभावना है । ऐसे मामलों में जांच पूरी होने तक निर्णय को टाला जा सकता है।
> कार्ययोजना/परियोजना व्यवहार्य नहीं पाई गई या निर्धारित उददेश्यों को पूरा नहीं कर रही है।
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> जिला मजिस्ट्रेट /राज्य सरकार से प्रतिकूल रिपोर्ट।
> इस विभाग या किसी अन्य विभाग द्वारा वित्त पोषित चल रही परियोजनाओं पर आंतरिक लेखा परीक्षा/लेखा परीक्षा से प्रतिकूल रिपोर्ट।
> संगठन को संबंधित क्षेत्र में कोई अनुभव नहीं हैं और न ही कार्ययोजनाओं/ परियोजनाओं को लागू करने के लिए कोई संसाधन हैं ।
> एक से अधिक सरकारी एजेंसी से एक ही उददेश्य के लिए धन प्राप्त करना अयोग्यता के रूप में माना जाएगा ।
> किसी मौजूदा परियोजना में या सरकार के सुरक्षा नियमों और शर्तों का पालन करने में विफलता।
> कानूनों के उल्लंघन और सरकार को धोखा देने के संबंध में संगठन या उसके पदाधिकारियों के खिलाफ शिकायतें ।
iii. आवश्यकता अनुसार स्थायी समिति की बैठक आहूत की जावेगी।
iv . स्थायी समिति की बैठक तभी वैध होगी जब बैठक में अध्यक्ष के अलावा न्यूनतम दो सदस्य उपस्थितहो।
9. वित्तीय सहायता की प्रक्रिया
1 1. स्वीकृत कार्ययोजना/परियोजना के लिए वित्तीय सहायता कार्य प्रकृति, समयावधि को दृष्टिगत रखकर स्वीकृत वित्तीय सहायता का तीन किश्तों में ( 30 % -30 %-40% ) जारी की जाएगी , परंतु राज्य सरकार के विभाग/निकाय/संस्थान हेतु एवं स्थायी समिति के अनुमोदन की प्रत्याशा में राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट कार्य/ गतिविधि हेतु स्वीकृत वित्तीय सहायता को किश्तों में जारी किया जाना बाध्यकारी नहीं होगा ।
II . तीन वर्ष की अवधि की गणना संस्था को जारी प्रथम किश्त के दिनांक से की जावेगी । संस्था को अनुदान का जिस वर्ष की किश्त जारी हो उसके निर्धारित कार्य संपादित करना होगा। कार्यों का मूल्यांकन तिमाही कार्यों की प्रगति प्रतिवेदन के आधार पर किया जावेगा। जिलों में संस्था को पूर्व में दी गई आर्थिक सहायता से किए गए कार्यों का सत्यापन, उपयोगिता प्रमाण- पत्र, लेखा परीक्षित रिपोर्ट जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी के माध्यम से संस्था द्वारा प्रस्तुत करने पर एवं राज्य सरकार की संस्थाओं/उपक्रमों को प्रदत्त आर्थिक सहायता के संबंध में संयुक्त/उप/सहायक संचालक (उपभोक्ता संरक्षण) से तिमाही प्रदर्शन, उपलब्धि प्रदर्शन (Outcome ) प्रतिवेदन प्राप्त होने एवं कार्य संतोषजनक पाए जाने पर स्वीकृत शेष राशि आयुक्त/संचालक, खाद्य द्वारा मुक्त की जा सकेगी ।
मध्यप्रदेश उपभोक्ता कल्याण निधि के अंतर्गत प्राप्त ब्याज एवं ब्याज राशि से राज्य सरकार द्वारा किए गए व्यय का विस्तृत वार्षिक विवरण केन्द्र सरकार को प्रेषित किया जावेगा ।
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10. वित्तीय सहायता की सीमा
1. आवेदक संस्था को एक वित्तीय वर्ष में कुल राशि दस लाख से अधिक वित्तीय सहायता स्वीकृत नहीं की जाएगी । संस्था अधिकतम 3 वर्ष तक गतिविधियों के संचालन हेतु आवेदन कर सकेगी । इस प्रकार, 3 वर्ष के लिए राशि रु. 30 लाख तक स्वीकृत की जा सकेगी ।
II . स्थायी समिति की अनुशंसा से राज्य सरकार द्वारा संचालित गतिविधियों हेतु यह आर्थिक सीमा बाध्यकारी नहीं होगी ।
राज्य सरकार द्वारा संचालित गतिविधियों को छोडकर अन्य संस्थाओं को वित्तीय सहायता की पूर्ण राशि का भुगतान एकमुश्त नहीं किया जाएगा।
11. बाध्यता एवं शर्ते-
1 . संस्था/संगठन द्वारा आवंटित कार्य के संबंध में शासन पक्ष के साथ अनुबंध किया जावेगा।
11 . संस्था/ संगठन द्वारा सहायता राशि का उपयोग किसी राजनैतिक दल के प्रचार हेतु नहीं किया जाएगा।
संस्था/संगठन द्वारा उपभोक्ता जागरूकता कार्ययोजना की प्रगति/ कार्यान्वयन से संबंधित वार्षिक प्रदर्शन उपलब्धि ( Outcome ) का प्रतिवेदन जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी के माध्यम से संचालक/आयुक्त , खाद्य को वित्तीय वर्ष समाप्ति के उपरांत उपयोगिता प्रमाण- पत्र के साथ नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाएगा।
IV. उपभोक्ता जागरूकता कार्ययोजना के क्रियान्वयन के संबंध में आयोजित की जाने वाली गतिविधियों की पूर्व सूचना संबंधित जिले के जिला आपूर्ति नियंत्रक /जिला आपूर्ति अधिकारी को लिखित में दी जाएगी ।
V. परियोजना/कार्ययोजना अंतर्गत निर्धारित मद अंतर्गत ही व्यय किया जाएगा , विभाग की अनुमति के बिना निर्धारित मद से अन्यत्र व्यय नहीं किया जाएगा।
VI . चयनित संस्था द्वारा ही आवंटित कार्य किया जावेगा , किसी अन्य संस्था एवं एजेंसी को स्थानांतरित नहीं किया जा सकेगा।
VII . अनुदानग्राही शर्तों का पालन करने में विफल रहने या उल्लंघन की स्थिति में 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अनुदान का पूरा या हिस्सा वापस करने के लिए उत्तरदायी होंगे।
VIII . अनुदानग्राही संगठन/एजेंसी द्वारा परियोजना के संबंध में खातों की उचित और अलग लेखा पुस्तिकाएं रखी जाएंगी एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट से वित्त वर्ष की समाप्ति पर प्रतिवर्ष आडिट कराया जावेगा । लेखा परीक्षित रसीद और भुगतान खाते, आय और व्यय खाते और बैलेंस शीट उक्त के लिए लेखापरीक्षक के प्रमाण पत्र सहित रिपोर्ट के साथ उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रारूप- ' ग' /' घ' में प्रत्येक वर्ष 30 जून के पूर्व अनिवार्यतः आयुक्त/संचालक,,खाद्य को प्रस्तुत की जावेगी ।
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IX. स्वैच्छिकउपभोक्ता संगठन के प्रबंधन में किसी भी बदलाव के मामले में , स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन का नया प्रबंधन निकाय भी परियोजना के लिए विभाग के नियमों और शर्तों से बाध्य होगा और स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन से इस आशय की एक वचनबध्दता आवश्यक होगी। प्रस्ताव/आवेदन प्रस्तुत करने के बाद किसी भी स्तर पर प्रबंधन समिति की संरचना में कोई भी परिवर्तन 15 दिनों के भीतर आयुक्त/संचालक, खाद्य को तत्काल सूचित किया जाएगा।
Χ. अनुदानग्राही द्वारा कल्याण निधि के वित्त पोषण से परियोजना के लिए यदि कोई स्थायी/अस्थायी अधोसंरचना/संपत्ति अर्जित की जाती है तो उसकी सूचना एक माह के अंदर आयुक्त/संचालक, खादय , नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण , म.प्र. को प्रदाय की जानी होगी ।
12. फंडिंग प्रतिबंधों और काली सूची में डालना-आगामी सहायता पर रोक की प्रक्रिया
1. यदि अनुदानग्राही परियोजना/ कार्ययोजना के संचालन के लिए सहयोग नहीं करता है ।
II . प्रगति रिपोर्ट , लेखा का लेखा परीक्षित विवरण और उपयोगिता प्रमाण-पत्र निर्धारित अवधि में प्रस्तुत नहीं करता है।
विभाग के अनुमोदन के बिना निधियों को विपथित करता है। लाभार्थियों को बदलता है/कार्ययोजना/परियोजना का स्थान बदलता है ।
विभाग द्वारा लिखित रूप में प्रतिबंधों से संगठन को अवगत कराया जाएगा और इसे तीन माह के भीतर दोषों को सुधारने का अवसर भी दिया जाएगा, ऐसा न करने पर संगठन को काली सूची में डालने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी एवं आगामी सहायता रोकी जा सकेगी ।
12. काली सूची श्रेणी
स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन को निम्न आधारों पर काली सूची में डाला जा सकता है -
1 . अनुदानग्राही ने एक से अधिक स्रोतों से धन प्राप्त किया है या एक ही गतिविधि के लिए किसी अन्य विभागीय/गैर विभागीय, अंतर्राष्ट्रीय या किसी अन्य एजेंसी से पूरी तरह या आंशिक रूप से धन प्राप्त करने के लिए आवेदन किया है ।
11 . मुख्य पदाधिकारी आपराधिक आचरण/सार्वजनिक निधि के दुरूपयोग मे शामिल है।
जाली खातों/ दस्तावेजों को जमा करने के लिए ।
IV . पर्याप्त अवसर देने के बाद भी निर्धारित कार्य को पूरा नहीं करना।
V. परियोजना/कार्ययोजना के तहत उपलब्ध/विस्तारित बचत/अव्ययित शेष/ वापसी योग्य अनुदान वापस करने में विफलता।
VI . यदि संगठन के कार्यकारी/ शासी/प्रबंध निकाय के दो से अधिक सदस्य रिश्तेदार/ परिवार के सदस्य हैं या इनमें से दो बैंक खाते के संचालन में सह -हस्ताक्षरकर्ता हैं और इस तथ्य को संगठन छिपाता है ।
VII . अन्य विभागीय संगठनों आदि द्वारा स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन को काली सूची में डाला गया हो ।
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संगठन को काली सूची में डालने के बाद उसे एक महीने की अवधि के भीतर विचाराधीन निधि की वसूली के लिए नोटिस दिया जाएगा। नोटिस का अनुपालन करने में संगठन की विफलता पर विभाग उपलब्ध वसूली विधियों के माध्यम से उक्त राशि की वसूली के लिए उपयुक्त कार्रवाई शुरू करेगा । संस्था के पास आदेश जारी होने की तिथि से 3 माह के भीतर काली सूची में डालने के आदेश के विरुध्द अपील करने का अवसर होगा । उपभोक्ता कल्याण निधि स्थायी समिति इस अपील पर विचार करेगी। निर्णय की सूचना संबंधित को दी जाएगी ।
प्रारूप - क
प्रति,
आयुक्त/संचालक,
आवेदक / संगठन प्रमुख का स्व-प्रमाणित फोटो
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय , प्रथम तल खण्ड ' घ' विंध्याचल भवन,
भोपाल , म.प्र.।
आवेदक संस्था का नाम 1.
2. सम्पूर्ण डाक का पता(ई - मेल, दूरभाष सहित)- .
3. स्थापना का दिनांक
4. क्या कंपनी अधिनियम, 2013/ सोसायटी पंजीकरण अधिनियम/ सहकारी समिति अधिनियम या लागू किस कानून के तहत या किसी अन्य संबंधित नियमों के अधीन रजिस्ट्रीकृत है-
5. यदि हां तो रजिस्ट्रीकरण क्रमांक तथा वर्ष का वर्णन करें ( रजिस्ट्रीकरण की प्रमाणित प्रति संलग्न करें)
6. संगठन किस स्तर पर रजिस्ट्रीकृत है- राज्य या राष्ट्रीय.
7. प्रबंध समिति के सदस्यों के नाम की सूची उनके डाक के पते, ई- मेल,दूरभाष तथा उनके उपार्जन या उनके जीविका निर्वाहन के तरीके के विवरण सहित संलग्न करें .
8. क्या संगठन की पंजीयन नियमावली में उपभोक्ता संरक्षण कार्य शामिल है( प्रमाण संलग्न करें ) .
9. स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन के एन.जी.ओ. दर्पण पोर्टल पर पंजीयन का विवरण( प्रमाण संलग्न करें) - .
10. पिछले तीन वर्ष के दौरान संगठन उसके उद्देश्य तथा क्रियाकलापों के संक्षिप्त ब्यौरे ( प्रमाण संलग्न करें) - .
11. कार्य-योजना/परियोजना/ गतिविधि/ कार्यक्रम/ विषय का विवरण जिसके अधीन वित्तीय सहायता अपेक्षित
है....
अपेक्षित सहायता तथा राशि जो आवर्ती/अनावर्ती है, शीर्षकवार ब्यौरे दीजिए- 12.
1 .
II .
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13. किए गए कार्यकलापों की अनुक्रमणिका के साथ समयबद्ध कार्यसूची ....
14. विभिन्न एजेंसी के अधीन आवेदक द्वारा ली जाने वाली अनुदान राशि के ब्यौरे प्रस्तुत करें-
*क्याअधिशेष रकम वित्तीय सहायता के रूप में किसी शासकीय या अशासकीय एजेंसी से प्राप्त कर रहे है , यदि हां तो उसके ब्यौरे दें- ( 10 रू. के न्यायिकेत्तर स्टाम्प पेपर पर नियत प्रारूप में टंकित किया जाए और नोटरी पब्लिक द्वारा विधिवत सत्यापित किया जाए)
15. क्या विगत पांच वर्ष के दौरान एजेंसी के विरूद्ध किसी प्रकार का अभियोजन लंबित है यदि हां तो पूर्ण ब्यौरे ( शपथ -पत्र) दें......
16. निम्नलिखित दस्तावेजों की प्रामाणिक प्रतियां प्रस्तुत करें ( जो राज्य स्तर/ केन्द्रीय स्तर के राजपत्रित अधिकारी द्वारा सत्यापित की गई हों) तथा उसके साथ यह भी संलग्न करें- (1) संगठन का गठन तथा उसके नियम और विनियमन
(2 ) विगत तीन वर्ष की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करें (प्रत्येक वर्ष के लिए अलग से वार्षिक रिपोर्ट करें ) .
( 3 ) संपरीक्षक का रजिस्ट्रीकरण क्रमांक , नाम और पूर्ण पता कार्यालयीन मुद्रा सहित संपरीक्षक द्वारा हस्ताक्षरित विगत तीन वर्ष का वार्षिक संपरीक्षित लेखा का विवरण ..
17. यदि पूर्व में इस विभाग द्वारा कोई सहायता दी गई हो तो कृपया उसके ब्यौरें दे...
18. संगठन किसी अन्य शासकीय/ गैर शासकीय स्रोत से कोई वित्तीय सहायता प्राप्त कर रहा है, यदि हां तो ब्यौरा दीजिए कार्य/ उददेश्य सहित.......
आवेदन में संलग्नकों का विवरण ( समस्त आवेदन, दस्तावेज दो प्रतियों में प्रस्तुत किये जाने चाहिए , यह दस्तावेज राज्य/केन्द्रीय सरकार के किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणित होने चाहिए ) मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 5 अगस्त 2022
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घोषणा
(आवेदक या उसके प्राधिकृत अभिकर्ता द्वारा हस्ताक्षर की जाए)
मैं, एतद्वारा , घोषित करता हूं कि मेरे द्वारा जो भी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं, उनमें कोई भी मिथ्या या बनावटी नहीं है । मैं हम एतद्वारा प्रमाणित करता हूं। करते हैं कि मैंने/ हमने राज्य सरकार द्वारा जारी मध्यप्रदेश राज्य उपभोक्ता कल्याण निधि के मार्गदर्शक सिद्धांत, 2022 से अनुदान के मार्गदर्शनों, निबंधनों और शर्तों को पढ़ लिया है तथा मैं/ हम और हमारा संगठन/ संस्थान शासन द्वारा दिए गए आदेशों का पालन करेगा, यदि कोई वित्तीय सहायता हमें मंजूर की जाती है, तो वह राशि उपभोक्ताओं के अधिकारों का संरक्षण तथा उपभोक्ताओं की जागरूकता के लिए स्वीकृत/ नियत/ निर्दिष्ट कार्ययोजना/परियोजना/ गतिविधियों में ही उपयोग की जाएगी.
हस्ताक्षर
नाम
पूरा पता ...
दिनांक
स्थान ..
*( 10 रु. के न्यायिकेत्तर स्टाम्प पेपर पर टंकित किया जाए और नोटरी पब्लिक द्वारा विधिवत सत्यापित संलग्न किया जाए) मैंने वर्तमान में मैसर्स.. सुपुत्र/सुपुत्री/पत्नी/श्री निवासी और के अध्यक्ष सचिव के रूप में कार्यरत एतद् द्वारा शपथपूर्वक घोषणा और अभिपुष्ट करता हूं ने पिछले तीन वर्षों में विभागों/मंत्रालयों/संगठनों से कि मैसर्स (संगठन का नाम और पूरा पता) . निम्नलिखित सहायता अनुदान प्राप्त किए है: -
वर्ष
अनुदान का उद्देश्य
पत्र स्वीकृति की संख्याऔर तारीख
प्राप्त अनुदान की
राशि
धन देने वाले विभाग/ मंत्रालय/ संगठन का नाम
अभिसाक्षी
सत्यापन
यह सत्यापित किया जाता है कि मेरी सर्वोत्तम जानकारी और विश्वास में उक्त सूचना पूर्ण और सत्य है तथा उसमें कुछ भी छिपाया नहीं गया है । इस विभाग या किसी अन्य विभाग द्वारा वित्त पोषित चल रही परियोजनाओं पर संगठन के विरुध्द कोई आंतरिक लेखा परीक्षा/ लेखा परीक्षा से प्रतिकूल रिपोर्ट नहीं है । मैं यह भी स्वीकार करता हूं कि प्रारूप - ग में संगठन द्वारा आवेदित विषय पर खादय, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण या अन्य विभाग में कोई आवेदन नहीं दिया गया है न ही पूर्व से कोई वित्तीय सहायता प्राप्त की गयी है । मैं यह भी स्वीकार करता हूं कि यदि एतद् द्वारा दी गई सूचना अपूर्ण अथवा असत्य पाई जाती है तो उपभोक्ता कल्याण निधि से अनुदान को रद्द/ वैधानिक कार्यवाही की जा सकती है।
वर्ष में आज माह के दिन सत्यापित
गवाह :
अभिसाक्षी
1.
2.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 5 अगस्त 2022
898 ( 11 )
प्रारूप-ख
केन्द्रीय/ राज्य सरकार/विभागों/निकायों के लिए
सेवा में
आयुक्त/संचालक,
आवेदक/ संगठन प्रमुख का स्व- प्रमाणित फोटो खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय , प्रथम तल खण्ड- ' घ' विंध्याचल भवन , भोपाल, म.प्र.।
1. आवेदक का नाम, विवरण और डाक का पूरा पता: ---
2. उद्देश्य जिसके लिए धनराशि अपेक्षित हैः ( विवरण संलग्न करें)
3. अपेक्षित अनुदान की राशि: --
4. चलाई जाने वाली गतिविधियों की समय सारिणी----
5. उपभोक्ता कल्याण निधि /उपभोक्ता मामले विभाग से पूर्व में लिए गए अनुदानों का ब्यौरा , यदि कोई होः.
स्थान
दिनांक........
आवेदक के हस्ताक्षर
(नाम और पद) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 5 अगस्त 2022
898 ( 12)
प्रारूप-ग
फार्म -जीएफआर 12-ए
उपयोगिता प्रमाण पत्र का प्रारूप
आवर्ती/गैर आवर्ती के संबंध में वर्ष के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र
आवर्ती सहायता अनुदान /वेतन /पूंजीगत संपत्ति का निर्माण
1. योजना का नाम
2. अनुदान आवर्ती या अनावर्ती
3. वित्तीय वर्ष की शुरूआत में अनुदान की स्थिति i. हाथ में नकद/बैंक
ii. असमायोजित अग्रिम
कुल
4. प्राप्त अनुदान, किए गए व्यय और अंतिम शेष का विवरणः (वास्तविक)
सरकार वर्ष के
की
अनुदान शेष
उस पर आर्जित ब्याज
प्राप्त अनुदानों अव्ययित राशि
को वापस जमा किए गया ब्याज
1
2
3
दौरान प्राप्त
व्यय हुआ
अंतिम शेष (5- 6)
कुल उपलब्ध फंड (1+2.. 3+4)
4
5
6
7
तिथि (ii)
स्वीकृ ति आदेश संख्या (i)
अनुदानों का घटकवार उपयोगः
राशि (iii)
कल
अनुदान सहायता वेतन
सहायता अनुदान
सामान्य
वर्ष के अंत में अनुदान की स्थिति का विवरण
i . हाथ में नकद /बैंक
ii. असमायोजित अग्रिम
कुल
अनुदान सहायता-
पूंजीगत संपत्ति का
सृजन
898 ( 13)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 5 अगस्त 2022
प्रमाणित किया जाता है कि मैंने स्वयं को संतुष्ट कर लिया है कि जिन शर्तों पर अनुदान स्वीकृत किया गया था, उन्हें विधिवत पूरा किया गया है। पूरा किया जा रहा है और मैंने यह देखने के लिए निम्नलिखित जांचों का प्रयोग किया है कि धन का उपयोग वास्तव में उसी उद्देश्य के लिए किया गया है जिसके इसे स्वीकृत किया गया थाः (i ) मुख्य खातों और अन्य सहायक खातों और रजिस्टरों (संपत्ति रजिस्टरों सहित) को संबंधित अधिनियम/नियमों/स्थायी निर्देशों (अधिनियम/नियमों का उल्लेख करें ) में निर्धारित अनुसार बनाए रखा जाता है और नामित लेखा परीक्षकों द्वारा विधिवत लेखा परीक्षा की जाती है । ऊपर दर्शाए गए आंकडे वित्तीय विवरणों/लेखों में उल्लेखित लेखापरीक्षित आंकडों से मेल खाते हैं । ( ii ) सार्वजनिक निधियों/परिसंपत्ति की सुरक्षा के लिए आंतरिक नियंत्रण मौजूद हैं, वित्तीय निविष्टियों के विरुद्ध भौतिक लक्ष्यों के परिणामों और उपलब्धियों को देखना , परिसंपत्ति निर्माण आदि में गुणवत्ता सुनिश्चित करना और उनकी प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए आंतरिक नियंत्रणों का अवधिक मूल्यांकन किया जाता है । (ii ) हमारे सर्वोत्तम ज्ञान और विश्वास के अनुसार कोई भी लेन देन दर्ज नहीं किया गया है जो प्रासंगिक अधिनियम/नियमों/स्थायी निर्देशों और योजना दिशानिर्देशों का उल्लंघन करता है । ( iv) योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रमुख पदाधिकारियों के बीच उत्तरदायित्व स्पष्ट शब्दों में सौंपे गए है । ( v) लाभ इच्छित लाभार्थियों को दिए गए थे और केवल उन्हीं क्षेत्रों/ जिलों को कवर किया गया था जहां योजना को संचालित करने का इरादा था । ( vi ) योजना के विभिन्न घटकों पर व्यय योजना के दिशा- निर्देशों और सहायता अनुदान के नियमों और शर्तों के अनुसार अधिकृत अनुपात में था। ( vii) यह सुनिश्चित किया गया है कि ( योजना का नाम सरकार द्वारा जारी दिशा- निर्देशों में निर्धारित आवश्यकताओं के अनुसार और वर्ष के लिए प्रदर्शन/लक्ष्य प्राप्त विवरण के अनुसार वास्तविक और वित्तीय प्रदर्शन किया गया है । निधि के उपयोग के परिणामस्वरूप प्रपत्र 1 में दिए गए परिणाम विधिवत संलग्न हैं । ( viii) निधि के उपयोग के परिणामस्वरूप प्रपत्र ।। में दिए गए परिणाम विधिवत संलग्न है (विभाग के विनिर्देशों के अनुसार तैयार किया जाना है। ) ( ix) एक ही मंत्रालय या अन्य मंत्रालयों से प्राप्त सहायता अनुदान के माध्यम से एजेंसी द्वारा निष्पादित विभिन्न योजनाओं का विवरण संलग्न है। (संबंधित मंत्रालय/ विभाग के विनिर्देशों के अनुसार तैयार किया जाएगा )
दिनांकः
स्थान :
हस्ताक्षर
नाम
संगठन के प्रमुख नाम मुख्य वित्त अधिकारी/ पदाधिकारी ( वित्त प्रमुख) 898 ( 14)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 5 अगस्त 2022
प्रारूप-' घ'
फार्म जीएफआर 12-सी
[नियम 239 देखे ]
उपयोगिता प्रमाण पत्र का प्रपत्र(राज्य सरकार के लिए) (जहां केवल सरकारी निकायों द्वारा किया गया व्यय )
क्रं. पत्रसंख्या राशि
और तिथि
प्रमाणित किया जाता है कि मार्जिन में दिए गए मंत्रालय/विभाग के पत्र संख्या से वर्ष........ के दौरान के पक्ष में अनुदान के स्वीकृत रू. और पिछले वर्ष की अव्ययित शेष के कारण रू..... में से , रू .. की राशि का उपयोग, जिस प्रस्ताव के लिए इसे स्वीकृत किया गया था, किया गया है तथा शेष राशि रू.... वर्ष के अंत तक अनुपयोगी रह गए हैं और सरकार को (पत्र संख्या दिनांक........... के अनुसार) सौंप दिए गए हैं / अगले वर्ष के दौरान देय अनुदानों में समायोजित किया जाएगा ।
2. प्रमाणित किया जाता है कि मैंने स्वयं को संतुष्ट कर लिया है कि जिन शर्तों पर सहायता अनुदान स्वीकृत किया गया था, वे पूरी हो गई है।पूरी हो रही हैं और मैंने यह देखने के लिए निम्नलिखित जांचों का प्रयोग किया है कि अनुदान की राशि का वास्तव में उस प्रस्ताव के लिए उपयोग किया गया था जिसके लिए उसे मंजूरी दी गई थी।
प्रयोग किए गए चेक के प्रकार
1..
2.
3.
4..
5.
हस्ताक्षर
पद
दिनांक मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 5 अगस्त 2022
898 ( 15)
अनुबंध पत्र का प्रारूप
प्रथम पक्षकार ..........
द्वितीय पक्षकार- आयुक्त/संचालक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, म.प्र.
प्रथम पक्षकार निम्नानुसार बाध्यताओं एवं शर्तों के अध्यधीन उसे आवंटित उपभोक्ता जागरूकता कार्य योजना/ परियोजना का संचालन करेगा-
1. उपभोक्ता कल्याण निधि से अनुदान हेतु जारी मध्यप्रदेश राज्य उपभोक्ता कल्याण निधि के मार्गदर्शक सिद्धांत के मार्गदर्शनों, निबंधनों और शर्तों एवं शासन द्वारा दिए गए आदेशों का पालन करेगा
2. प्रथम पक्षकार द्वारा सहायता राशि का उपयोग किसी राजनैतिक दल के प्रचार हेतु नहीं किया जाएगा।
3. प्रथम पक्षकार द्वारा उपभोक्ता जागरूकता कार्ययोजना की प्रगति/कार्यान्वयन से संबंधित वार्षिक प्रदर्शन उपलब्धि ( Outcome ) का प्रतिवेदन जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी के माध्यम से आयुक्त/ संचालक , खाद्य को वित्तीय वर्ष समाप्ति के उपरांत उपयोगिता प्रमाण - पत्र के साथ नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाएगा ।
4. उपभोक्ता जागरूकता कार्ययोजना के क्रियान्वयन के संबंध में आयोजित की जाने वाली गतिविधियों की पूर्व सूचना संबंधित जिले के जिला आपूर्ति नियंत्रक /जिला आपूर्ति अधिकारी एवं द्वितीय पक्षकार को लिखित में दी जाएगी ।
5. परियोजना/ कार्ययोजना अंतर्गत निर्धारित मद अंतर्गत ही अनुदान राशि का व्यय किया जाएगा, विभाग की अनुमति के बिना निर्धारित मद से अन्यत्र व्यय नहीं किया जाएगा ।
6. चयनित संस्था द्वारा ही आवंटित कार्य किया जावेगा, किसी अन्य संस्था एवं एजेंसी को स्थानांतरित नहीं किया जा सकेगा ।
7. प्रथम पक्षकार शर्तों का पालन करने में विफल रहने या उल्लंघन की स्थिति में 10 प्रतिशत ब्याज के साथ अनुदान का पूरा या हिस्सा वापस करने के लिए उत्तरदायी होंगे।
8. प्रथम पक्षकार द्वारा परियोजना के संबंध में खातों की उचित और अलग लेखें/पुस्तिका रखी जाएंगी और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हर साल 31 मार्च को समाप्त होने वाली अवधि के लिए इसका आडिट करेंगा । लेखा परीक्षित रसीद और भुगतान खाते, आय और व्यय खाते और बैलेंस शीट उक्त के लिए लेखापरीक्षक के प्रमाण पत्र और रिपोर्ट के साथ उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रारूप -' ग'/' घ' में प्रत्येक वर्ष अधिकतम 30 जून तक आयुक्त/संचालक, खाद्य को भेजी जाएगी ।
9. प्रथम पक्षकार के प्रबंधन में किसी भी बदलाव के मामले में , प्रथम पक्षकार का नया प्रबंधन /निकाय भी परियोजना के लिए विभाग के नियमों और शर्तों से बाध्य होगा और प्रथम पक्षकार को इस आशय की एक वचनबध्दता देना आवश्यक होगी । प्रस्ताव/आवेदन प्रस्तुत करने के बाद मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 5 अगस्त 2022
898 ( 16)
किसी भी स्तर पर प्रबंधन समिति की संरचना में कोई भी परिवर्तन 15 दिनों के भीतर आयुक्त/संचालक,खाद्य को तत्काल सूचिल किया जाएगा।
10. प्रथम पक्षकार द्वारा कल्याण निधि के वित्त पोषण से परियोजना के लिए यदि कोई स्थायी/अस्थायी अधोसंरचना/संपत्ति अर्जित की जाती है तो उसकी सूचना द्वितीय पक्षकार को देना होगा।
11. यदि प्रथम पक्षकार परियोजना/कार्ययोजना के संचालन के लिए सहयोग नहीं करता है , प्रगति रिपोर्ट, लेखा का लेखा परीक्षित विवरण और उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं करता है, विभाग के अनुमोदन के बिना निधियों को विपथित करता है/लाभार्थियों को बदलता है /कार्ययोजना/परियोजना का स्थान बदलता है, एक से अधिक स्रोतों से धन प्राप्त किया है या एक ही गतिविधि के लिए किसी अन्य विभागीय/ गैर विभागीय अंतर्राष्ट्रीय या किसी अन्य एजेंसी से पूरी तरह या आंशिक रूप से धन प्राप्त करने के लिए आवेदन किया है , मुख्य पदाधिकारी आपराधिक आचरण/ सार्वजनिक निधि के दुरुपयोग मे शामिल है, जाली खातों/दस्तावेजों को जमा करता है, पर्याप्त अवसर देने के बाद भी निर्धारित कार्य को पूरा नहीं करता है, परियोजना/ कार्ययोजना के तहत उपलब्ध/विस्तारित बचत/अव्ययित शेष/वापसी योग्य अनुदान वापस करने में विफल रहता है, यदि संगठन के कार्यकारी/ शासी/ प्रबंध निकाय के दो से अधिक सदस्य रिश्तेदार/ परिवार के सदस्य हैं या इनमें से दो बैंक खाते के संचालन में सह- हस्ताक्षरकर्ता हैं और इस तथ्य को छिपाता है, अन्य विभागीय संगठनों आदि द्वारा काली सूची में डाला गया हो, तो ऐसी स्थिति/ स्थितियों में प्रथम पक्षकार को काली सूची में डालने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी एवं आगामी सहायता रोकी जाकर , प्रदत्त अनुदान राशि की वसूली तथा वैधानिक कार्यवाही द्वितीय पक्षकार द्वारा की जावेगी।
हस्ताक्षर
हस्ताक्षर
2. द्वितीय पक्षकार ...
1. प्रथम पक्षकार .
स्थान .
दिनांक.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
बी. के. चन्देल , उपसचिव.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यपदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2022