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मध्यप्रदेश शासन
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल , गुरुवार, दिनांक 15 सितम्बर 2022- भाद्र 24, शक 1944
क्रमांक 496]
विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश
भोपाल, दिनांक 15 सितम्बर 2022
क्रमांक 15285 - मप्रविस- 15 - विधान-2022 .- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम -64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) विधेयक, 2022 ( क्रमांक 12 सन् 2022 ) जो विधान सभा में दिनांक 15 सितम्बर, 2022 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
991 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 सितम्बर 2022
992
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक १२ सन् २०२२
मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) विधेयक, २०२२
मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम , १ ९ ५६ तथा मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , १ ९६१ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के तिहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान - मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
१. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) अधिनियम , २०२२ है.
संक्षिप्त नाम.
भाग- एक
मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम , १ ९ ५६ ( क्रमांक २३ सन् १ ९ ५६ ) का संशोधन
२. मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम , १ ९ ५६ ( क्रमांक २३ सन् १ ९ ५६ ) में, -
धारा ९ में, -
(१ )
उपधारा ( १ ) में , खण्ड ( क ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, (क)
अर्थात्:-
(क ) नगरपालिक क्षेत्र से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा निर्वाचित महापौर अर्थात् सभापति; ";
"
उपधारा ( ४ ) के स्थान पर , निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- (ख)
" (४) यदि कोई नगरपालिक क्षेत्र महापौर का निर्वाचन करने में असफल रहता है, या कोई वार्ड पार्षद् का निर्वाचन करने में असफल रहता है , तो यथास्थिति, ऐसे नगरपालिक क्षेत्र या वार्ड के स्थान को भरने के लिए छह माह के भीतर नई निर्वाचन कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी और जब तक उस स्थान को भरा नहीं जाता, उसे आकस्मिक रिक्ति समझा जाएगा:
परंतु अधिनियम के अधीन अध्यक्ष या समितियों में से किसी के निर्वाचन की कार्यवाहियां , ऐसे स्थान का निर्वाचन लंबित रहते स्थगित नहीं की जाएंगी . ".
धारा १० में, उपधारा ( ४ ) में, प्रथम परन्तुक के स्थान पर, निम्नलिखित परन्तुक स्थापित किया (२)
जाए, अर्थात्:-
" परंतु किसी भी नगरपालिक निगम के कार्यकाल की पूर्णता के दो माह पूर्व क्षेत्र के सम्मिलित किए जाने या हटाए जाने अथवा वार्डों के सुधार की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी , जिसमें असफल होने पर राज्य निर्वाचन आयोग प्रचलित परिसीमन के आधार पर निर्वाचन प्रक्रिया प्रारंभ कर सकेगा. ".
(३) धारा १४ में, -
उपधारा ( १ ) में , शब्द " पार्षदों " के पश्चात्, शब्द " तथा महापौर " अंतःस्थापित किये जाएं.
(क)
उपधारा ( २ ) में , शब्द " पार्षदों " के पश्चात्, शब्द " तथा महापौर " अंतःस्थापित किये जाएं.
(ख) 992( 1 )
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 सितम्बर 2022
(४) धारा १४- क में , उपधारा ( १ ) में, शब्द " पार्षद्" के स्थान पर शब्द " महापौर अथवा पार्षद्" स्थापित किए जाएं.
(५) धारा १४ - ख में, शब्द " पार्षद्" के स्थान पर, शब्द " महापौर अथवा पार्षद्" स्थापित किए जाएं.
(६) धारा १४ - ग में , शब्द " पार्षद्" के पश्चात् शब्द " या महापौर " अंतःस्थापित किए जाएं.
(७) धारा १५ में, -
(क) शब्द " पार्षदों " के पश्चात् शब्द " या महापौर " अंतःस्थापित किए जाएं.
(ख) परंतुक के स्थान पर, निम्नलिखित परंतुक स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" परन्तु कोई भी व्यक्ति यथास्थिति, पार्षदों के किसी निर्वाचन में या महापौर के निर्वाचन में, एक से अधिक बार मतदान नहीं करेगा. " .
(८ ) धारा १६ में, उपधारा ( ३ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाए, अर्थात्ः-
" ( ४ ) यदि कोई व्यक्ति महापौर और पार्षद् दोनों पदों के लिए निर्वाचित हो जाता है, तो उसे निर्वाचित घोषित किए जाने की तारीख से सात दिन के भीतर किसी एक पद से अपना त्यागपत्र देना होगा. " .
(९) धारा १७ में, -
(क) पार्श्व शीर्ष में, शब्द " पार्षद्" के पश्चात्, शब्द " या महापौर " जोड़े जाएं.
उपधारा ( १ ) में, -
(ख)
(एक) प्रारंभिक पैरा में, शब्द " पार्षद्" के पश्चात्, शब्द " या महापौर " अन्तःस्थापित किए जाएं;
(दो) खण्ड ( ख ख ) में , शब्द " पार्षद्" के पश्चात्, शब्द " या महापौर " अन्तःस्थापित किये जाएं.
(ग) उपधारा ( २ ) में, -
( एक) शीर्ष में, शब्द " पार्षद्" के पश्चात्, शब्द " या महापौर " जोड़े जाएं ;
(दो) प्रारंभिक पैरा में , शब्द " पार्षद्" के पश्चात्, शब्द " या महापौर " अन्तःस्थापित किए जाएं;
( तीन ) खण्ड (ङ) में, शब्द " पार्षद्" के पश्चात्, शब्द " या महापौर " अन्तःस्थापित किए जाएं;
( घ) उपधारा ( ३ ) में, शब्द " पार्षद " जहां कहीं भी वह आया हो, के स्थान पर, शब्द " पार्षद् या महापौर " स्थापित किए जाएं.
धारा १७ - ख में, -
(१०)
(क) पार्श्व शीर्ष में, शब्द " पार्षद्" के स्थान पर, शब्द " महापौर तथा पार्षद्" स्थापित किए जाएं;
(ख) उपधारा ( १ ) में, प्रारंभिक पैरा में , शब्द " प्रत्येक पार्षद् " के स्थान पर , शब्द " महापौर तथा प्रत्येक पार्षद्" स्थापित किए जाएं;
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 15 सितम्बर 2022
992(2)
उपधारा ( २ ) में, -
(ग)
(एक) प्रारंभिक पैरा में, शब्द " पार्षद्" जहां कहीं भी आया हो , के स्थान पर, शब्द " महापौर तथा पार्षद्" स्थापित किए जाएं;
(दो) परन्तुक के स्थान पर , निम्नलिखित परन्तुक स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" परन्तु संभागीय आयुक्त की अनुमति के सिवाय , यदि कोई महापौर या पार्षद्, यथास्थिति, अपने निर्वाचन या नामनिर्देशन की तारीख से तीन माह के भीतर शपथ नहीं लेता है तो उसका स्थान स्वयंमेव ही रिक्त हुआ समझा जाएगा. ".
(११) धारा १८ में , -
(क) पार्श्व शीर्ष के स्थान पर, निम्नलिखित पार्श्व शीर्ष स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " अध्यक्ष ( स्पीकर ) का निर्वाचन" ;
(ख) उपधारा ( १ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-
" ( १ ) निगम का महापौर तथा निर्वाचित पार्षद, धारा २२ के अधीन निर्वाचन की अधिसूचना की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर, विहित रीति में, सम्मिलन में, निर्वाचित पार्षदों में से अध्यक्ष निर्वाचित करेंगे , जिसे कलक्टर द्वारा बुलाया जाएगा तथा वह उसकी अध्यक्षता करेगा." ;
(ग) उपधारा ( ३ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-
" ( ३ ) उपधारा ( १ ) के अधीन सम्मिलन, कलक्टर द्वारा बुलाया जाएगा और जिसकी अध्यक्षता कलक्टर द्वारा की जाएगी. पीठासीन अधिकारी को मत देने का अधिकार नहीं होगा और मतों के बराबर होने की दशा में, परिणाम का विनिश्चय , ऐसी रीति में, जैसी की विहित की जाए, लॉट द्वारा किया जाएगा . " .
(१२) धारा २० में, स्पष्टीकरण में, शब्द " तथा महापौर " का लोप किया जाए.
(१३) धारा २३ - क में, -
(क) पार्श्व शीर्ष में तथा उपधारा ( १ ) में, शब्द " या महापौर " जहां कहीं भी वे आए हों, का लोप किया जाए;
(ख) उपधारा ( २ ) के खण्ड ( दो ) में, शब्द " अध्यक्ष , महापौर " के स्थान पर, शब्द " महापौर " स्थापित किया जाए.
धारा २३ - क के पश्चात्, निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः- (१४)
" २४. महापौर का वापस बुलाया जाना-
(१) किसी निगम के प्रत्येक महापौर द्वारा अपना पद तत्काल रिक्त कर दिया गया समझा जाएगा यदि उसे ऐसी प्रक्रिया के अनुसार, जो कि विहित की जाए, निगम क्षेत्र के मतदान करने वाले मतदाताओं की कुल संख्या के आधे से अधिक मतदाताओं के बहुमत द्वारा गुप्त मतदान से वापस बुलाया जाएः मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 सितम्बर 2022
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परन्तु वापस बुलाने की ऐसी कोई प्रक्रिया तब तक आरम्भ नहीं की जाएगी जब तक कि निर्वाचित पार्षदों की कुल संख्या के कम से कम तीन चौथाई पार्षदों द्वारा प्रस्ताव पर हस्ताक्षर न कर दिए जाएं और उसे संभागीय आयुक्त को प्रस्तुत न कर दिया जाएः
परन्तु यह और कि ऐसी कोई प्रक्रियाः-
(एक) उस तारीख से, जिसको कि ऐसा महापौर निर्वाचित होता है और अपना पद धारण करता है, दो वर्ष की कालावधि के भीतर ; और
(दो ) यदि महापौर उप चुनाव में निर्वाचित होता है तो उसकी पदावधि की आधी कालावधि का अवसान न हो गया हो,
आरंभ नहीं की जाएगीः
परन्तु यह और भी कि महापौर को वापस बुलाए जाने की प्रक्रिया उसकी संपूर्ण पदावधि में एक बार ही आरम्भ की जाएगी.
(२) संभागीय आयुक्त अपना समाधान कर लेने और यह सत्यापित कर लेने के पश्चात् कि उपधारा (१ ) में विनिर्दिष्ट तीन चौथाई पार्षदों ने वापस बुलाए जाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजेगा और राज्य सरकार उसे राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देशित करेगी.
(३) राज्य निर्वाचन आयोग निर्देश प्राप्त होने पर, वापस बुलाए जाने के प्रस्ताव पर, ऐसी रीति में, जैसी कि विहित की जाए, मतदान कराने की व्यवस्था करेगा. " .
(१५) धारा ४४१ में, उपधारा ( २ ) में, खण्ड ( ख ) में, उपखण्ड ( तीन ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" ( तीन ) महापौर के निर्वाचन की दशा में , नगरपालिक क्षेत्र के किसी मतदाता द्वारा . ".
भाग-दो
मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , १ ९ ६१ ( क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) का संशोधन
९६१ ( क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) में, -
३. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १
( १) धारा २ ९ में उपधारा ( ४ ) में, प्रथम परन्तुक के स्थान पर, निम्नलिखित परन्तुक स्थापित किया जाए, अर्थात्:-
" परन्तु किसी भी नगरपालिक परिषद् के कार्यकाल की पूर्णता के दो माह पूर्व क्षेत्र के सम्मिलित किए जाने या हटाए जाने अथवा वार्डों के सुधार की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी , जिसमें असफल होने पर राज्य निर्वाचन आयोग प्रचलित परिसीमन के आधार पर निर्वाचन प्रक्रिया प्रारंभ कर सकेगाः ".
(२) धारा ३४ में, -
(क) उपधारा ( १ ) में , खण्ड ( क ) में, अंक तथा शब्द " २५ वर्ष " के स्थान पर, अंक तथा शब्द " २१ वर्ष " स्थापित किए जाएं;
(ख) उपधारा ( ४ ) का लोप किया जाए.
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 15 सितम्बर 2022
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(३) धारा ३५ में, खण्ड ( घ घ ) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्:-
" ( घ घ ) अध्यक्ष तथा पार्षद की दशा में आयु २१ वर्ष से कम हो;".
(४) धारा ४३ में , उपधारा ( १ ) में, शब्द " राज्य निर्वाचन आयोग " के स्थान पर, शब्द " कलक्टर " स्थापित किया जाए.
धारा ५५ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-
(५)
आम निर्वाचन के पश्चात् प्रथम सम्मिलन.
" ५५. ( १ ) कलक्टर, धारा ४५ के अधीन पार्षदों के निर्वाचन की अधिसूचना की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर, अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का निर्वाचन करने के प्रयोजन के लिए निर्वाचित पार्षदों का सम्मिलन बुलाएगा.
(२) उपधारा ( १ ) के अधीन बुलाए गए परिषद् के प्रथम सम्मिलन की अध्यक्षता कलक्टर द्वारा नियुक्त किए गए ऐसे अधिकारी द्वारा , जो नगरपालिका परिषद् के मामले में डिप्टी कलक्टर की पद श्रेणी से निम्न पद श्रेणी का न हो तथा नगर परिषद् के मामले में तहसीलदार की पद श्रेणी से निम्न पद श्रेणी का न हो, की जाएगी और इस अध्याय में अंतर्विष्ट वे समस्त उपबंध जो परिषद् के सम्मिलनों के बारे में है , यथाशक्य ऐसे सम्मिलन के संबंध में लागू होंगे:
परन्तु अध्यक्षता करने वाले अधिकारी को ऐसे सम्मिलन में मत देने का अधिकार नहीं होगा और मतों के बराबर होने की दशा में परिणाम का विनिश्चय लॉट द्वारा किया जाएगा. ".
तथा
निरसन व्यावृत्ति.
४. ( १ ) मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) अध्यादेश , २०२२ ( क्रमांक ३ सन् २०२२ ) तथा मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( द्वितीय संशोधन ) अध्यादेश , २०२२ ( क्रमांक ५ सन् २०२२ ) एतद्वारा निरसित किया जाता है.
( २ ) उक्त अध्यादेश के निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई बात या की गई कार्रवाई समझी जाएगी.
उद्देश्यों और कारणों का कथन
मध्यप्रदेश राज्य में, इस समय १६ नगरपालिक निगम एवं ९९ नगरपालिक परिषद् हैं , जिनमें लगभग ७७ प्रतिशत नगरीय जनसंख्या निवास कर रही है. तेजी से नगरीकरण के कारण , नगरपालिक निगम एवं वृहद् नगरपालिकाओं को अवसंरचना विकास , रोजगार और नगरीय गरीबों के कल्याण के क्षेत्र में बहुत काम करना है. पिछले दो वर्षों के दौरान , कोरोना महामारी का बड़ा प्रभाव राज्य के बड़े नगरीय क्षेत्रों में देखा गया है . स्पष्ट रूप से, उपरोक्त चुनौतियों का सामना करने के लिए समर्थ एवं सुदृढ़ राजनैतिक नेतृत्व की जरूरत है. यह ध्यान देने वाली बात है कि देश में जनसंख्या का लगभग ३४ प्रतिशत नगरीय क्षेत्रों में रहता है और ५० लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की संख्या सामान्यतः स्थायी है, लेकिन ५० लाख से कम जनसंख्या वाले छोटे शहरों की संख्या निरन्तर बढ़ रही है. इन शहरों में नए उद्योगों एवं अवसंरचना विकास के काम की निरन्तरता के परिणामस्वरूप आर्थिक क्रियाकलाप एवं रोजगार के अवसर अधिक हैं और इसलिए इन शहरों को सुनियोजित एवं सुसंगठित बनाने के लिए बेहतर पहुंच हेतु नगरपालिक निगमों में महापौर के प्रत्यक्ष निर्वाचन की जरूरत है .
२. यदि नगरपालिक निगमों के महापौर नगरीय स्थानीय निकायों के नागरिकों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित किए जाते हैं, तब उन्हें अपनी पसंद के प्रथम नागरिक चुनने का अवसर मिलेगा . प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित महापौर जनता के प्रति जवाबदार होंगे दूसरी तरफ अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित महापौर पार्षदों के प्रति जवाबदार हैं . यह ध्यान देने वाली बात है कि वार्ड पार्षदों का निर्वाचन वार्डों के स्थानीय मुद्दों पर आधारित होता है , जबकि प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित महापौर सीधे निर्वाचन द्वारा निर्वाचित किए जाते हैं और नगरपालिक निगमों के संपूर्ण क्षेत्र के विषयों की जानकारी रखते हैं .
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मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 15 सितम्बर 2022
३. यह तथ्य ध्यान में आया है कि नगरीय स्थानीय निकायों से लगे हुए क्षेत्र जनसंख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है. नगरीय स्थानीय निकायों की बाहरी सीमाएं जनगणना , २०११ अर्थात् ११ वर्ष पूर्व पर आधारित है लेकिन वर्तमान नगरीय क्षेत्रों की जनसंख्या अत्यधिक बढ़ गई है और यही कारण है कि नगरीय स्थानीय निकायों के चारों ओर के क्षेत्र आवासीय रूप से एवं वाणिज्यिक रूप से विकसित हो रहे हैं, साथ ही नगरीय सीमाओं में जनसंख्या के घनत्व में परिवर्तन के कारण नगरीय स्थानीय निकायों की सीमाओं में विस्तार करने/वार्डों के परिसीमन करने की जरूरत है, उसी प्रकार नए नगरीय स्थानीय निकायों के निर्माण की जरूरत है, पिछले पांच वर्षों में ३५ नगरीय स्थानीय निकायों का निर्माण किया गया है और इसलिए " छह मास " के स्थान पर " दो मास " करना प्रस्तावित किया गया है.
४. वर्तमान में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय स्थानीय निकायों के आम चुनाव के पश्चात् परिषद् की प्रथम बैठक बुलाये जाने का उपबंध सरल एवं व्यवहारिक नहीं है , इसलिए यह प्रस्तावित किया गया है कि जिला कलक्टर को निर्वाचन के पश्चात् नगरपालिक परिषद् की प्रथम बैठक बुलाने और अध्यक्षता करने के लिए प्राधिकृत किया जाना चाहिए.
५. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , १ ९ ६१ ( क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) की धारा ३४ में, उपधारा ( १ ) ( क ) अध्यक्ष या पार्षद के रूप में निर्वाचन के लिए अर्हता उपबंध करती है. अध्यक्ष के लिए आयु पच्चीस वर्ष से कम नहीं होना चाहिए, धारा ३५ के अधीन उम्मीदवारों की अनहर्ताओं के साथ , खण्ड ( धध ) पच्चीस वर्ष से कम आयु तथा पार्षदों के मामले में आयु इक्कीस वर्ष से कम है , उपबंध करती है. वर्तमान नगरपालिक परिषद् के अध्यक्ष का निर्वाचन निर्वाचित पार्षदों द्वारा किया जाना है और पार्षद के रूप में निर्वाचित होने के लिए अर्हता इक्कीस वर्ष है , और इसलिए इस बात को ध्यान में रखते हुए, नगरपालिक परिषद् के अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए आयु संबंधी पात्रता के लिए " इक्कीस वर्ष " आयु किया जाना आवश्यक है.
६. चूंकि मामला अत्यावश्यक था और मध्यप्रदेश विधान सभा का सत्र चालू नहीं था, अतएव मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) अध्यादेश, २०२२ ( क्रमांक ३ सन् २०२२ ) तथा मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( द्वितीय संशोधन ) अध्यादेश , २०२२ ( क्रमांक ५ सन् २०२२ ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किए गए थे. अब उक्त अध्यादेशों के स्थान पर, राज्य विधान- मण्डल का अधिनियम बिना किसी उपांतरण के लाया जाना प्रस्तावित है.
७. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
भोपाल :
भूपेन्द्र सिंह भारसाधक सदस्य.
तारीख ९ सितम्बर , २०२२.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 सितम्बर 2022
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प्रत्यायोजित विधि निर्माण संबंधी ज्ञापन
प्रस्तावित विधेयक के खण्ड २ द्वारा राज्य सरकार को विधायनी शक्तियां प्रत्यायोजित की जा रही हैं , जिनका विवरण निम्नानुसार है:-
खण्ड २ ( ११ ) ( ख ) एवं ( ग ) द्वारा महापौर तथा निर्वाचित पार्षदों का सम्मिलन बुलाने तथा मतों के बराबर होने की दशा में विहित रीति से परिणाम का विनिश्चिय किये जाने;
(१४) ( १ ) महापौर को वापस बुलाने की प्रक्रिया विहित किये जाने;
(१४) ( ३ ) महापौर को वापस बुलाने संबंधी मतदान की रीति विहित किये जाने;
के संबंध में नियम बनाये जाएंगे , जो सामान्य स्वरूप के होंगे.
अध्यादेश के संबंध में विवरण
अधिक जनसंख्या वाले शहरों में नये उद्योगों एवं अवसंरचना विकास के काम की निरंतरता के परिणामस्वरूप आर्थिक क्रियाकलाप एवं रोजगार के अवसर अधिक हैं और इसलिए इन शहरों को सुनियोजित एवं सुसंगठित बनाने के लिए बेहतर पहुंच हेतु नगरपालिक निगमों में महापौर के प्रत्यक्ष निर्वाचन की जरूरत है . नगरपालिक निगमों के महापौर नगरीय स्थानीय निकायों के नागरिकों द्वारा प्रत्यक्ष रुप से निर्वाचित किये जाते हैं तब उन्हें अपने पसंद के प्रथम नागरिक चुनने का अवसर मिलेगा. प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित महापौर जनता के प्रति जबावदार होंगे. दूसरी तरफ अप्रत्यक्ष रुप से निर्वाचित महापौर पार्षदों के प्रति जबावदार हैं. यह ध्यान देने वाली बात है कि वार्ड पार्षदों का निर्वाचन वार्डों के स्थानीय मुद्दों पर आधारित होता है जबकि प्रत्यक्ष रुप से निर्वाचित महापौर सीधे निर्वाचन द्वारा निर्वाचित किये जाते हैं और नगर पालिक निगमों के सम्पूर्ण क्षेत्र के विषयों की जानकारी रखते हैं . यह तथ्य भी ध्यान में आया है कि नगरीय स्थानीय निकायों से लगे हुये क्षेत्र में जनसंख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है . नगरीय स्थानीय निकायों की बाहरी सीमाएं जनगणना २०११ अर्थात ११ वर्ष पूर्व पर आधारित हैं लेकिन वर्तमान नगरीय क्षेत्रों की जनसंख्या अत्यधिक बढ़ गई है . यही कारण है नगरीय स्थानीय निकायों के चारों ओर के क्षेत्र आवासीय रूप से एवं वाणिज्यिक रूप से विकसित हो रहे हैं. साथ ही नगरीय सीमाओं में जनसंख्या के घनत्व में परिवर्तन के कारण नगरीय स्थानीय निकायों की सीमाओं में विस्तार करने/वार्डों के परिसीमन करने की जरूरत है. उसी प्रकार नये नगरीय स्थानीय निकायों के निर्माण की जरुरत है. पिछले पांच वर्षों में ३५ नगरीय स्थानीय निकायों का निर्माण किया गया है.
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय स्थानीय निकायों के आम चुनाव के पश्चात् परिषद् की प्रथम बैठक बुलाये जाने का उपबंध सरल एवं व्यवहारिक नहीं था.
मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम १ ९ ६१ की धारा ३४ में उपधारा १ ( क ) अध्यक्ष या पार्षद के रूप में निर्वाचन के लिये अर्हता उपबंध करती है. अध्यक्ष के लिये आयु पच्चीस वर्ष से कम नहीं होना चाहिये , धारा ३५ के अधीन उम्मीदवारों की अनहर्ताओं के साथ खण्ड ( घघ ) पच्चीस वर्ष से कम आयु तथा पार्षदों के मामले में आयु इक्कीस वर्ष से कम है, उपबंध करती है . वर्तमान नगरपालिका परिषद् के अध्यक्ष के निर्वाचन निर्वाचित पार्षदों द्वारा किया जाना है और पार्षदों के रूप में निर्वाचित होने के लिये अर्हता इक्कीस वर्ष है. और इसलिए इस बात को ध्यान में रखते हुये नगरपालिका परिषद् के अध्यक्ष के निर्वाचन के लिय आयु संबंधी पात्रता के लिए " इक्कीस वर्ष " आयु किया जाना आवश्यक था.
चूंकि मामला अत्यावश्यक था और मध्यप्रदेश विधान सभा का सत्र चालू नहीं था. अतएव मध्यप्रदेश नगर पालिका विधि ( संशोधन ) अध्यादेश २०२२ क्रमांक ३ सन् २०२२ तथा मध्यप्रदेश नगरपालिका विधि ( द्वितीय संशोधन ) अध्यादेश २०२२ ( क्रमांक ५ सन् २०२२ ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किये गये थे.
ए. पी. सिंह
प्रमुख सचिव
मध्यप्रदेश विधान सभा.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल में मुद्रित तथा प्रकाशित- 2022 .