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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्‍यप्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2022..

Published 15 September 2022

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
502
Identifier
in.gazette.madhya.2022-09-15.502.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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वध्यप्रदे श शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 502]

भोपाल , गुरुवार, दिनांक 15 सितम्बर 2022- भाद्र 24, शक 1944

विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश

भोपाल , दिनांक 15 सितम्बर 2022

क्रमांक 15270 - मप्रविस - 15- विधान- 2022.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक, 2022 ( क्रमांक 19 सन् 2022 ) जो विधान सभा में दिनांक 15 सितम्बर, 2022 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

1003 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 सितम्बर 2022

1004

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक १ ९ सन् २०२२

मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक, २०२२

विषय-सूची.

खण्ड:

१. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.

२. धारा १६ का संशोधन.

३. धारा २ ९ का संशोधन.

४. धारा ३४ का संशोधन.

५. धारा ३७ का संशोधन.

६. धारा ३८ का स्थापन.

७. धारा ३ ९ का संशोधन.

८ . धारा ४१ का स्थापन.

९. धारा ४२ , ४३ और ४३ क का लोप.

१०. धारा ४७ का संशोधन.

११. धारा ४८ का संशोधन.

१२. धारा ४९ का संशोधन.

१३. धारा ५० का संशोधन

१४. धारा ५२ का संशोधन.

१५. धारा ५४ का संशोधन.

१६. धारा १४६ के अधीन जारी अधिसूचना का भूतलक्षी संशोधन.

१७. धारा ५० की उपधारा ( १ ) एवं ( ३ ) , धारा ५४ की उपधारा ( १२ ) तथा ५६ के अधीन जारी अधिसूचना का भूतलक्षी संशोधन.

१८ . कतिपय मामलों में राज्य कर के उद्ग्रहण या संग्रहण से भूतलक्षी छूट.

१९ . धारा ७ की उपधारा ( २ ) के अधीन जारी अधिसूचना का भूतलक्षी प्रभाव होना.

२० . कतिपय मामलों में राज्य कर के उद्ग्रहण या संग्रहण से भूतलक्षी छूट.

1004 ( 1)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 सितम्बर 2022

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक १ ९ सन् २०२२

मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक , २०२२

मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ को और संशोधित करने हेतु विधेयक

भारत गणराज्य के तिहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान - मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) अधिनियम , २०२२ है.

संक्षिप्त नाम और प्रारंभ

(२ ) अन्यथा उपबंधित के सिवाय , इस अधिनियम की धारा २ से १५ तथा धारा २० उस तारीख से प्रवृत्त होगी, जैसी कि राज्य सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा , नियत करेः

परंतु इस अधिनियम के भिन्न - भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न- भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी.

धारा १६ का संशोधन.

२. मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा १६ में, -

उपधारा ( २ ) में, -

(क)

(एक) खण्ड ( ख ) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" ( खक ) धारा ३८ के अधीन ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को संसूचित उक्त आपूर्ति के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय के ब्यौरे निर्बधित नहीं किए गए हों; " ;

(दो) खण्ड ( ग ) में, शब्द, अंक और अक्षर " या धारा ४३ क " का लोप किया जाए;

(ख) उपधारा ( ४ ) में, शब्द और अंक " सितम्बर मास के लिए धारा ३ ९ के अधीन विवरणी के दिए जाने की देय तारीख " के स्थान पर, शब्द और अंक " तीस नवम्बर " स्थापित किए जाएं.

३. मूल. अधिनियम की धारा २ ९ में , उपधारा ( २ ) में, -

धारा २९ का संशोधन.

(क) खण्ड ( ख ) में, शब्द " तीन क्रमवर्ती कर अवधियों के लिए विवरणी " के स्थान पर शब्द " उक्त विवरणी प्रस्तुत करने के लिए नियत तारीख से तीन मास से परे किसी वित्तीय वर्ष के लिए विवरणी " स्थापित किए जाएं ;

(ख) खण्ड ( ग ) में, शब्द " लगातार छह मास की अवधि तक " के स्थान पर, शब्द " ऐसी निरंतर कर अवधि जैसी कि विहित की जाए ", स्थापित किए जाएं.

धारा ३४ का संशोधन.

४. मूल अधिनियम की धारा ३४ में, उपधारा ( २ ) में, शब्द " सितम्बर मास " के स्थान पर, शब्द" तीस नवम्बर " स्थापित किए जाएं.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 सितम्बर 2022

1004 (2)

धारा ३७ का

५. मूल अधिनियम की धारा ३७ में, -

संशोधन.

उपधारा ( १ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- (क)

" ( १ ) किसी इनपुट सेवा वितरक, किसी अनिवासी कर योग्य व्यक्ति और धारा १० या धारा ५१ या धारा ५२ के उपबंधों के अधीन कर संदत्त करने वाले किसी व्यक्ति से भिन्न प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, इलेक्ट्रानिक रूप में, ऐसी शर्तों तथा निबन्धनों के अध्यधीन तथा ऐसे प्ररूप और रीति में जो विहित की जाए, माल या सेवाओं या दोनों की, की गई जावक पूर्तियों के ब्यौरे कर अवधि के दौरान उक्त कर अवधि के मास के उत्तरवर्ती १० वें दिन से पूर्व या को देगा और ऐसे ब्यौरे , उक्त पूर्तियों के प्राप्तिकर्ता को ऐसी शर्तों तथा निबंधनों के अध्यधीन ऐसी समयावधि के भीतर और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, संसूचित किए जाएंगेः

परन्तु, आयुक्त, कारणों को लिखित में अभिलिखित करते हुए, अधिसूचना द्वारा कर योग्य व्यक्तियों के जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के ऐसे वर्ग के लिए ऐसे ब्यौरे देने के लिये समय - सीमा को विस्तारित कर सकेगाः

परन्तु, यह और कि केन्द्रीय कर आयुक्त द्वारा अधिसूचित समय - सीमा का कोई विस्तार आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जाएगा ,

उपधारा ( २ ) का लोप किया जाए;

(ख)

(ग) उपधारा ( ३ ) में,-

( एक) शब्द और अंक " और जो धारा ४२ या धारा ४३ के अधीन बे- मिलान रह गए हैं " , का लोप किया जाए ;

(दो) प्रथम परंतुक में, शब्द और अंक " सितम्बर मास के लिए धारा ३ ९ के अधीन विवरणी देने " के स्थान पर, शब्द " तीस नवम्बर " स्थापित किए जाएं;

(घ) उपधारा ( ३ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा अतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" ( ४ ) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को उपधारा ( १ ) के अधीन किसी कर अवधि के लिए जावक पूर्तियों के ब्यौरे प्रस्तुत करना अनुज्ञात नहीं किया जाएगा, यदि उसके द्वारा किन्हीं पूर्ववर्ती कर अवधियों के लिए जावक पूर्तियों के ब्यौरे प्रस्तुत नहीं किए गए हैं:

परन्तु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर , अधिसूचना द्वारा ऐसी शर्तों और निबंधनों के अधीन रहते हुए, जो कि उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति या रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के किसी वर्ग को उपधारा ( १ ) के अधीन , जावक पूर्तियों के ब्यौरे प्रस्तुत करना तब भी अनुज्ञात कर सकेगी जब उसने एक या अधिक पूर्ववर्ती कर अवधियों के लिए जावक पूर्तियों के ब्यौरे प्रस्तुत नहीं किए हैं. ".

1004 ( 3 )

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 सितम्बर 2022

६. मूल अधिनियम की धारा ३८ के स्थान पर , निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

धारा ३८ का स्थापन .

आवक पूर्तियों तथा इनपुट कर प्रत्यय के ब्यौरों की संसूचना.

"३८. (१ ) धारा ३७ की उपधारा ( १ ) के अधीन रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों द्वारा प्रस्तुत जावक पूर्तियों तथा ऐसी अन्य पूर्तियों, जो कि विहित किए जाएं, के ब्यौरे तथा स्वतः जनित विवरण, जिसमें इनपुट कर प्रत्यय के ब्यौरे अंतर्विष्ट हों, ऐसे प्ररूप और रीति में, ऐसे समय के भीतर और ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं, ऐसी पूर्तियों के प्राप्तकर्ताओं को, इलैक्ट्रानिक रूप से उपलब्ध करवाए जाएंगे.

उपधारा ( १ ) के अधीन स्वतः जनित विवरण निम्नलिखित से मिलकर बनेगा:-

(२)

(क) आवक पूर्तियों के ब्यौरे, जिनके संबंध में इनपुट कर प्रत्यय प्राप्तकर्ता को उपलब्ध हो सके; और

(ख ) पूर्तियों के ब्यौरे , जिनके संबंध में ऐसे प्रत्यय का लाभ , प्राप्तकर्ता द्वारा , धारा ३७ की उपधारा ( १ ) के अधीन उक्त पूर्तियों के ब्यौरे प्रस्तुत किए जाने के कारण , चाहे पूर्ण रूप से या भाग रूप से , निम्नलिखित द्वारा नहीं उठाया जा सकता, -

(एक ) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रीकरण लेने की ऐसी अवधि के भीतर , जो विहित की जाए; या

( दो ) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा , जो कर के संदाय में व्यतिक्रमी रहा है और ऐसा व्यतिक्रम ऐसी अवधि के लिए, जो विहित की जाए, निरंतर रहा है; या

(तीन ) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा , जिसके द्वारा संदेय आउटपुट कर ऐसी अवधि के दौरान , जो विहित की जाए, उक्त उपधारा के अधीन उसके द्वारा प्रस्तुत जावक पूर्तियों के विवरण के अनुसार, ऐसी सीमा द्वारा , जो विहित की जाए, उक्त अवधि के दौरान उसके द्वारा संदत्त आउटपुट कर से अधिक है; या

(चार ) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा , जिसने ऐसी अवधि के दौरान , जो विहित की जाए, उस रकम के इनपुट कर के प्रत्यय का लाभ लिया है , जो उस प्रत्यय से, खण्ड ( क ) के अनुसार ऐसी सीमा तक अधिक है, जो विहित की जाए, जिसका कि उसके द्वारा लाभ लिया जा सकता है ; या

(पांच ) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा , जिसने ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं, धारा ४ ९ की उपधारा ( १२ ) के उपबंधों के अनुसार अपने कर दायित्व के निर्वहन में व्यतिक्रम किया है ; या

(छह ) व्यक्तियों के ऐसे अन्य वर्ग द्वारा, जो विहित किए जाएं. ".

धारा ३ ९ का ७. मूल अधिनियम की धारा ३ ९ में, -

संशोधन.

(क) उपधारा ( ५ ) में, शब्द " बीस " के स्थान पर, शब्द " तेरह " स्थापित किया जाए;

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 15 सितम्बर 2022

1004 (4)

(ख) उपधारा ( ७ ) में, प्रथम परंतुक के स्थान पर, निम्नलिखित परंतुक स्थापित किया जाए, अर्थात्:-

" परंतु उपधारा ( १ ) के परंतुक के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने वाला प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, सरकार को ऐसे प्ररूप और रीति में और ऐसे समय के भीतर, जैसा कि विहित किया जाये, -

(क) माल या सेवाओं या दोनों की आवक और जावक पूर्तियों को गणना में लेते हुए लाभ लिए गए इनपुट कर प्रत्यय , संदेय कर और मास के दौरान ऐसी अन्य विशिष्टियों के समतुल्य कर की रकम , या

(ख) खण्ड ( क ) में निर्दिष्ट रकम के स्थान पर , ऐसी रीति में और ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए, जो विहित किए जाए, अवधारित रकम,

का भुगतान करेगा. " ;

(ग) उपधारा ( ९ ) में, -

( एक ) शब्द और अंक " धारा ३७ और धारा ३८ के उपबंधों के अध्यधीन यदि, " के स्थान पर, शब्द " जहां " स्थापित किया जाए;

( दो) परंतुक में, शब्द " सितम्बर मास के लिए या दूसरी तिमाही के लिए वार्षिक विवरणी देने की नियत तारीख , " के स्थान पर , शब्द " तीस नवंबर " स्थापित किए जाएं;

(घ) उपधारा ( १० ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" ( १० ) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को किसी कर अवधि के लिए कोई विवरणी देने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगा, यदि उसके द्वारा किसी पूर्ववर्ती कर अवधि या उक्त कर अवधि के लिए धारा ३७ की उपधारा ( १ ) के अधीन जावक पूर्तियों के ब्यौरे नहीं दिए गए हैं:

परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिश पर, अधिसूचना द्वारा ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति या रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के किसी वर्ग को विवरणी प्रस्तुत करने के लिए अनुज्ञात कर सकेगी , यद्यपि उसने एक या अधिक पूर्व कर अवधियों के लिए विवरणियां प्रस्तुत नहीं की हों या उक्त कर अवधि के लिए धारा ३७ की उपधारा ( १ ) के अधीन जावक पूर्ति के ब्यौरे प्रस्तुत नहीं किए हों. ".

८. मूल अधिनियम की धारा ४१ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्: -

धारा स्थापन. ४१ का

इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग.

"४१. (१ ) प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए, जो विहित किए जाएं, अपनी विवरणी में स्वनिर्धारित रूप में, पात्र इनपुट कर के प्रत्यय का उपभोग करने का हकदार होगा और ऐसी रकम उसके इलैक्ट्रानिक जमा खाते में जमा की जाएगी.

1004(5)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 15 सितम्बर 2022

(२) माल या सेवाओं या दोनों की ऐसी पूर्ति के संबंध में उपधारा ( १ ) के अधीन रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा उपभोग किया गया इनपुट कर प्रत्यय , उस पर संदेय कर , पूर्तिकर्ता द्वारा संदत्त नहीं किया गया है , वह उक्त व्यक्ति द्वारा , ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, लागू ब्याज के साथ वापस किया जाएगा:

परंतु जहां ऐसा पूर्तिकर्ता पूर्वोक्त पूर्ति के संबंध में संदेय कर का भुगतान करता है, वहां उक्त रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति उसके द्वारा वापस की गई प्रत्यय की रकम ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, पुनः प्राप्त कर सकेगा. " .

९ . मूल अधिनियम की धारा ४२ , ४३ और ४३ ( क) का लोप किया जाए.

धारा ४२, ४३ और ४३ ( क ) कालोप.

१०. मूल अधिनियम की धारा ४७ में, उपधारा ( १ ) में, -

धारा ४७ का संशोधन.

(क) शब्द " या अंतर्गामी " का लोप किया जाए;

(ख) शब्द और अंक " या धारा ३८ " का लोप किया जाए;

(ग) शब्द और अंक " धारा ३ ९ या धारा ४५ " के पश्चात्, शब्द और अंक " या धारा ५२ " अंतःस्थापित किए जाएं.

धारा ४८ का संशोधन.

११. मूल अधिनियम की धारा ४८ में, उपधारा ( २ ) में, शब्द और अंक " धारा ३८ के अधीन अंतर्गामी प्रदायों के ब्यौरे. " कालोप किया जाए.

१२. मूल अधिनियम की धारा ४९ में,-

धारा ४९ का संशोधन.

(क) उपधारा ( २ ) में, शब्द, अंक और अक्षर " या धारा ४३ क " का लोप किया जाए;

(ख) उपधारा ( ४ ) में, शब्द " ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए " के स्थान पर, शब्द " ऐसी शर्तों तथा निर्बंधनों के अध्ययीन रहते हुए " स्थापित किए जाएं;

(ग) उपधारा ( ११ ) के पश्चात्, निम्नलिखित नई उपधारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" ( १२ ) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, इस अधिनियम के अधीन , ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए, जैसा कि विहित किया जाए, जावक कर दायित्व के ऐसे अधिकतम भाग को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जिसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति या रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के किसी वर्ग द्वारा , इलैक्ट्रानिक जमा खाते के माध्यम से चुकाया जा सकेगा. " .

धारा ५० संशोधन. का १३. मूल अधिनियम की धारा ५० में , उपधारा ( ३ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए और १ जुलाई, २०१७ से स्थापित की गई समझी जाए, अर्थात्ः-

" ( ३ ) जहां इनपुट कर प्रत्यय का गलत उपभोग और उपयोग किया गया है , रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, ऐसे गलत उपभोग और उपयोग किए गए ऐसे इनपुट कर प्रत्यय पर, सरकार द्वारा , परिषद् की सिफारिशों पर यथा अधिसूचित चौबीस प्रतिशत से अनधिक की ऐसी दर पर ब्याज का संदाय करेगा और ब्याज की गणना ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, की जाएगी . " .

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 15 सितम्बर 2022

1004 ( 6)

धारा ५२ का संशोधन.

१४. मूल अधिनियम की धारा ५२ में, उपधारा ( ६ ) में, परंतुक में, शब्द " सितंबर मास का विवरण प्रस्तुत करने के लिए सम्यक् तारीख " के स्थान पर , शब्द " तीस नवंबर " स्थापित किए जाएं.

धारा ५४ का

१५. मूल अधिनियम की धारा ५४ में, -

संशोधन.

(क) उपधारा ( १ ) में, परंतुक में, शब्दों और अंकों " धारा ३ ९ के अधीन प्रस्तुत विवरणी में ऐसे प्रतिदाय का ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, दावा कर सकेगा " के स्थान पर, शब्द " ऐसे प्रतिदाय का ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में , जो विहित की जाए, दावा कर सकेगा " स्थापित किए जाएं;

(ख) उपधारा ( २ ) में, शब्द " छह मास " के स्थान पर , शब्द " दो वर्ष " स्थापित किए जाएं;

(ग) उपधारा ( १० ) में, शब्द, कोष्ठक और अंक " उपधारा ( ३ ) के अधीन " का लोप किया जाए;

(घ) स्पष्टीकरण में, खंड ( २ ) में , उपखंड ( ख ) के पश्चात्, निम्नलिखित उपखण्ड अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" ( खक ) किसी विशेष आर्थिक जोन विकासकर्ता या विशेष आर्थिक जोन इकाई को शून्य दर पर माल या सेवाओं अथवा दोनों की पूर्ति की दशा में , जहां , यथास्थिति, उन्हें ऐसी पूर्ति या ऐसी पूर्ति में प्रयुक्त इनपुट या इनपुट सेवाओं के संबंध में संदत्त कर का प्रतिदाय उपलब्ध है , ऐसी पूर्तियों के संबंध में धारा ३ ९ के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने के लिए नियत तारीख;

१६. (१)

धारा १४६ के अधीन जारी अधिसूचना का भूतलक्षी संशोधन

मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम २०१७ की धारा १४६ के अधीन परिषद् की सिफारिशों पर, राज्य सरकार द्वारा जारी , मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) में सरल क्रमांक ४७ पर दिनांक २३ जनवरी, २०१८ में प्रकाशित अधिसूचना क्रमांक एफ- ए- ३-०७-२०१८-१- पांच( ८ ) दिनांक २३ जनवरी, २०१८ में संशोधन किए जाएंगे और नीचे दी गई तालिका के स्तम्भ ( २ ) में विनिर्दिष्ट रीति से उस तालिका के स्तंभ ( ३ ) में विनिर्दिष्ट तारीख से, भूतलक्षी रूप से संशोधित किया गया समझा जाएगा .

संशोधन की प्रभावी तारीख (३)

अधिसूचना क्रमांक औरतारीख (१ )

संशोधन (२)

२२ जून , २०१७

अधिसूचना क्रमांक एफ- ए-

३-०७-२०१८-१ - पांच( ८ )

दिनांक २३ जनवरी , २०१८

पांच ( ०७ ) दिनांक १४-०२-२०२०

उक्त अधिसूचना में पैरा १ में , शब्द " विवरणियां प्रस्तुत करने और एकीकृत कर की संगणना तथा परिनिर्धारण " के स्थान पर, निम्नलिखित स्थापित किया जाए, अर्थात्:- " विवरणियां प्रस्तुत करने और एकीकृत कर की संगणना तथा परिनिर्धारण और अधिसूचना क्रमांक एफ- ए- ३-५०-२०१९ -१- में अन्यथा उपबंधित के सिवाय मध्यपदेश माल और सेवा कर नियम , २०१७ के अधीन उपबंधित सभी कृत्य. ".

1004 (7)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 सितम्बर 2022

(२) उपधारा ( १ ) में प्रयोजनों के लिए, राज्य सरकार को उक्त उपधारा में निर्दिष्ट अधिसूचनाओं को संशोधित करने की शक्ति होगी और भूतलक्षी प्रभाव के साथ संशोधित करने की शक्ति समझी जाएगी मानों कि राज्य सरकार को मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ की धारा १४६ के अधीन सभी तात्विक समय पर भूतलक्षी प्रभाव से उक्त अधिसूचना को संशोधित करने की शक्ति थी.

१७. (१ ) मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ की धारा ५० की उपधारा ( १ ) और उपधारा ( ३ ) , धारा ५४ की उपधारा ( १२ ) तथा धारा ५६ के अधीन , परिषद् की सिफारिशों पर, राज्य सरकार द्वारा जारी, मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) में सरल क्रमांक ३०७ पर प्रकाशित अधिसूचना क्रमांक एफ- ए-३-२७-२०१७ - पांच( ५४ ) , दिनांक ३० जून २०१७ में संशोधन किए जाएंगे और नीचे दी गई तालिका के स्तंभ ( २ ) में विनिर्दिष्ट रीति में उक्त तालिका के स्तंभ ( ३ ) में विनिर्दिष्ट रीति में, भूतलक्षी रूप से किए गए समझे जाएंगे .

धारा ५० की उपधारा ( १ ) एवं (३ ), धारा ५४ की उपधारा ( १२ ) तथा धारा ५६ के अधीन जारी अधिसूचना का भूतलक्षी संशोधन.

संशोधन

संशोधन की तारीख

(३)

(२)

अधिसूचना क्रमांक औरतारीख (१)

अधिसूचना क्रमांक एफ- ए- ३- २७-२०१७-१ - पांच(५४) दिनांक ३० जून २०१७

उक्त अधिसूचना की सारणी में क्रम संख्या २ के सामने , स्तंभ ( ३ ) में, " २४" अंकों के स्थान पर, " १८ " अंक रखे जाएंगे. १ जुलाई २०१७

(२) उपधारा ( १ ) के प्रयोजनों के लिए, राज्य सरकार को उक्त उपधारा में निर्दिष्ट अधिसूचनाओं को संशोधित करने की शक्ति होगी और भूतलक्षी प्रभाव के साथ संशोधित करने की शक्ति समझी जाएगी मानों कि राज्य सरकार को मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ की धारा ५० की उपधारा ( १ ) और उपधारा ( ३ ) , धारा ५४ की उपधारा ( १२ ) तथा धारा ५६ के अधीन सभी तात्विक समय पर भूतलक्षी प्रभाव से उक्त अधिसूचना को संशोधित करने की शक्ति थी.

कतिपय मामलों में राज्य कर के उद्‌ग्रहण से या संग्रहण से छूट को भूतलक्षी प्रभाव से लागू करना.

१८. (१ ) मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ की धारा ९ की उपधारा ( १ ) के अधीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए, परिषद् की सिफारिशों पर, राज्य सरकार द्वारा जारी , मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण ) में सरल क्रमांक ४३३ पर प्रकाशित अधिसूचना क्रमांक एफ-ए-३/३३/२०१७/१ / पांच (४२ ) , दिनांक ५ अगस्त २०१७ में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, मत्स्य आहार ( शीर्ष २३०१ केअधीन आने वाला ) के, सिवाय मत्स्य तेल के, उत्पादन के दौरान सृजित अनआशयित अपशिष्ट की पूर्ति के संबंध में, १ जुलाई २०१७ से प्रारंभ होकर, ३० सितंबर, २०१ ९ ( दोनों दिन सम्मिलित ) को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान, कोई राज्य कर उद्‌गृहीत या संगृहीत नहीं किया जाएगा.

(२) ऐसे सभी राज्य कर का प्रतिदाय नहीं किया जाएगा, जिसका संग्रहण किया गया है , किन्तु उसका इस प्रकार संग्रहण नहीं किया जाता, यदि उपधारा ( १ ) सभी तात्विक समय पर प्रवृत्त होती.

धारा ७ की उपधारा ( २ ) के अधीन जारी अधिसूचना को भूतलक्षी प्रभाव से लागू करना.

१९. (१ ) उपधारा ( २ ) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, मध्यप्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम , २०१७ की धारा ७ की उपधारा ( २ ) के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, परिषद् की सिफारिशों पर, राज्यसरकार द्वारा जारी, मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) में सरल क्रमांक ४६४ पर प्रकाशित अधिसूचना क्रमांक एफ - ए - ३-३९ /२०१७/ १ / पांच ( ८३ ) , दिनांक २२ नवम्बर, २०१ ९ , सभी प्रयोजनों के लिए १ जुलाई , २०१७ से प्रवृत्त हुई समझी जाएगी .

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 सितम्बर 2022

1004 ( 8 )

(२) ऐसे सभी राज्य कर का प्रतिदाय नहीं किया जाएगा,जाए जिसका संग्रहण किया गया है , किन्तु उसका इस प्रकार संग्रहण नहीं किया जाता, यदि उपधारा ( १ ) में निर्दिष्ट अधिसूचना , सभी तात्विक समय पर प्रवृत्त होती.

२०. ( १) मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ की धारा ९ की उपधारा ( १ ) के अधीन , शक्तियों का प्रयोग करते हुए, परिषद् की सिफारिशों पर, राज्य सरकार द्वारा जारी , मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण ) में सरल क्रमांक ४३३ पर प्रकाशित अधिसूचना क्रमांक एफ- ए-३/३३/ २०१७ / १/पांच (४२ ) , दिनांक ५ अगस्त , २०१७ में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भीः- कतिपय मामलों में राज्य कर के उद्ग्रहण या संग्रहण से छूट को भूतलक्षी प्रभाव से लागू करना.

(एक) मत्स्य आहार ( शीर्ष २३०१ के अधीन आने वाला ) की प्रदाय के संबंध में, १ जुलाई, २०१७ से प्रारंभ होकर, ३० सितंबर, २०१ ९ ( दोनों दिन सम्मिलित ) को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान, कोई राज्य कर उद्‌गृहीत या संग्रहीत नहीं किया जाएगा.

( दो) पूली , व्हील्स और अन्य भाग ( शीर्ष ८४८३ के अधीन आने वाला ) और कृषि उपकरण के भाग के रूप में प्रयुक्त ( शीर्ष ८४३२ , ८४३३ एवं ८४३६ के अधीन आने वाला ) के प्रदाय के संबंध में, १ जुलाई, २०१७ से प्रारंभ होकर, ३१ दिसंबर , २०१८ (दोनों दिन सम्मिलित ) को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान, छह प्रतिशत की दर से राज्य कर उद्गृहीत या संग्रहीत किया जाएगा.

( २) ऐसे सभी कर का प्रतिदाय नहीं किया जाएगा, जिसका संग्रहण किया गया है, किन्तु उसका इस प्रकार संग्रहण नहीं किया जाता, यदि उपधारा ( १ ) में निर्दिष्ट अधिसूचना, सभी तात्विक समय पर प्रवृत्त होती .

उद्देश्यों एवं कारणों का कथन

करदाता को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ (क्रमांक १९ सन् २०१७ ) में इनपुट कर प्रत्यय, पंजीयन निरस्तीकरण, क्रेडिट नोट जारी करने, जी.एस.टी. विवरणी फाइल करने , स्वजनित विवरण , इनपुट कर प्रत्यय का उपभोग, विलंब शुल्क, कर का भुगतान , ब्याज, स्त्रोत से संग्रहीत कर और प्रतिदाय से संबंधित कतिपय उपबंधों को संशोधित करने और कुछ अधिसूचनाओं से संबंधित उपबंधों को भूतलक्षी प्रभाव दिया जाना अनिवार्य हो गया है.

२. संशोधन के उद्देश्य निम्नानुसार हैं:-

एक ) करदाताओं द्वारा इनपुट कर प्रत्यय प्राप्त करने के लिए एक और शर्त जोड़ना.

(

(दो) केवल वार्षिक विवरणी दाखिल न करने के लिए निरस्तीकरण का उपबंध करके संयुक्त करदाताओं को सुविधा प्रदान करना.

तीन ) आगामी वित्तीय वर्ष के नवम्बर माह के ३०वें दिन तक क्रेडिट नोट जारी करने की सुविधा प्रदान करना.

(

(चार) जावक पूर्ति प्रस्तुत करने से संबंधित उपबंध में संशोधन करना तथा वर्तमान अवधि से संबंधित विवरण प्रस्तुत करने से पहले पूर्व की अवधि की जावक आपूर्ति के विवरण आवश्यक रूप से प्रस्तुत करने के लिए भी उपबंध जोड़ना.

(पांच) स्वः जनित आवक पूर्ति का उपबंध जोड़कर करदाताओं को सुविधा देना.

(छह ) तिमाही विवरणी प्रस्तुत करने वाले व्यक्तियों द्वारा मासिक भुगतान के लिए प्ररूप , रीति तथा समय- सीमा में परिवर्तन करना.

(सात ) इनपुट कर प्रत्यय का दावा करने तथा प्रव्यावर्तित करने की रीति विनिश्चित करना.

1004 (9)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 15 सितम्बर 2022

(आठ) धारा ४२ , ४३ और ४३ - क का लोप करना.

(नौ) आउटपुट कर दायित्व का समायोजन करने के लिए जमा खाता उपयोग का उपबंध अंतःस्थापित करना.

(दस) गलत प्रकार से उपभोग और उपयोग किए गए इनपुट कर पर ब्याज उद्गृहीत करने का उपबंध करना तथा इसे भूतलक्षी प्रभाव देना.

(ग्यारह ) ई - कामर्स ऑपरेटर को आगामी वित्तीय वर्ष के ३० नवम्बर तक सुधार करने की सुविधा का उपबंध करना.

(बारह ) विशेष आर्थिक जोन और विशेष आर्थिक जोन विकासकर्ता से संबंधित प्रतिदाय प्रकरणों में समय- सीमा की गणना के लिए सुसंगत तारीख स्पष्ट करना.

(तेरह ) कुछ अधिसूचनाओं को भूतलक्षी प्रभाव से उपबंधित करना.

३. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.

जगदीश देवड़ा भोपालः

भारसाधक सदस्य.

तारीख १२ सितम्बर २०२२

" संविधान के अनुच्छेद २०७ के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित." .

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 सितम्बर 2022

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प्रत्यायोजित विधि निर्माण संबंधी ज्ञापन

प्रस्तावित विधेयक के जिन खण्डों द्वारा विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन राज्य सरकार को किया जा रहा है, उनका विवरण निम्नानुसार है :-

१. खण्ड-१ द्वारा विधेयक के उपबन्धों को लागू करने के लिए विभिन्न तारीखें अधिसूचित किए जाने;

२. खण्ड-३ द्वारा मूल अधिनियम की धारा २९ की उपधारा ( २ ) के खण्ड ( ग ) के अंतर्गत राज्य सरकार को विवरणी प्रस्तुत नहीं करने पर पंजीयन निरस्तीकरण के लिए कर अवधि के संबंध में;

३. खण्ड-५ द्वारा मूल अधिनियम की धारा ३७ की उपधारा ( ४ ) के अंतर्गत किसी पंजीयत व्यक्ति या पंजीयत व्यक्ति के वर्ग द्वारा जावक पूर्ति के ब्यौरे प्रस्तुत नहीं किए जाने पर आगामी अवधि के जावक पूर्ति के ब्यौरे प्रस्तुत कर सकने हेतु पंजीयत व्यक्ति या पंजीयत व्यक्तियों के वर्ग को अधिसूचित किए जाने;

४. खण्ड-६ द्वारा मूल अधिनियम की धारा ३८ की उपधारा ( १ ) के अंतर्गत इनपुट कर प्रत्यय के ब्यौरे उपलब्ध कराने हेतु प्रारूप रीति तथा समय सीमा के साथ शर्तों एवं निबन्धनों के संबंध में ;

५. खण्ड-७ ( ख ) द्वारा मूल अधिनियम की धारा ३ ९ की उपधारा ( ७ ) के परन्तुक के तहत् त्रैमासिक विवरणी प्रस्तुत करने वाले प्रत्येक व्यक्ति द्वारा कर के भुगतान की रीति एवं समय सीमा विहित किए जाने;

६. खण्ड-७ ( घ ) द्वारा मूल अधिनियम की धारा ३ ९ की उपधारा १० के अंतर्गत किसी पंजीयत व्यक्ति या पंजीयत व्यक्तियों के वर्ग द्वारा पूर्व कर अवधि की विवरणियां या जावक पूर्ति के ब्यौरे प्रस्तुत नहीं किए जाने पर भी आगामी अवधि की विवरणियां प्रस्तुत करने हेतु पंजीयत व्यक्ति या पंजीयत व्यक्तियों के वर्ग को अधिसूचित किए जाने ;

७. खण्ड-८ द्वारा मूल अधिनियम की धारा ४१ की उपधारा ( २ ) के अंतर्गत इनपुट कर प्रत्येक के गलत दावे को ब्याज सहित वापस किए जाने;

८. खण्ड-१२ द्वारा मूल अधिनियम की धारा ४९ की उपधारा १२ के अंतर्गत जावक कर दायित्व के अधिकतम भाग जो इलेक्ट्रॉनिक जमा खाते से चुकाया जा सकेगा , को निर्धारित किए जाने;

९. खण्ड-१३ द्वारा मूल अधिनियम की धारा ५० की उपधारा ३ के अंतर्गत इनपुट कर प्रत्यय के गलत दावे तथा उपयोग पर ब्याज की गणना करने हेतु रीति विहित किए जाने;

१०. खण्ड-१६ द्वारा अधिसूचना क्रमांक ८/१८ राज्य कर दिनांक २३-०१-२०१८ में भूतलक्षीय प्रभाव से संशोधन अधिसूचित किए जाने; तथा

११. खण्ड-१७ द्वारा अधिसूचना क्रमांक ५४/१७ राज्य कर दिनांक ३०-०६-२०१७ में भूतलक्षीय प्रभाव से संशोधन हेतु अधिसूचित किए जाने , के संबंध में नियम बनाये जायेंगे , जो सामान्य स्वरूप के होंगे .

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव , मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2022.

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 15 September 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2022-09-15.502.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2022-09-15.502.Extraordinary.