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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रो पर विस्‍तार) नियम 2022...

Published 15 November 2022

Department
पंचायत एवं ग्रामीण विकास
Type
Extraordinary
Gazette no.
589
Identifier
in.gazette.madhya.2022-11-15.589.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

मध्यप्रदे प्रशास

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सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

भोपाल , मंगलवार, दिनांक 15 नवम्बर 2022 कार्तिक 24, शक 1944

क्रमांक 589]

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग

मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल , दिनांक 15 नवम्बर 2022

क्रमांक आर नं. 856697/2022/22/पं.-2 मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 (क्रमांक 1 सन् 1994) की धारा 129-क से 129-च सहपठित धारा 95 की उप -धारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, एतद्द‌द्वारा , निम्नलिखित नियम बनाती है जो मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 22 सितम्बर, 2022 में पूर्व प्रकाशित किए जा चुके हैं, अर्थात्ः-

नियम

अध्याय एक

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम , विस्तार तथा प्रारंभ.-

(1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार ) नियम, 2022 है ।

(2) ये मध्यप्रदेश के भीतर सभी अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू होंगे ।

(3) ये मध्यप्रदेश राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होंगे।

2. परिभाषाएं.-

(1) इन नियमों में , जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) "अधिनियम"से अभिप्रेत है, पंचायत उपबन्ध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (1996 का 40) ;

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(ख) "ग्राम सभा" से अभिप्रेत है , ऐसे व्यक्तियों से मिलकर बनने वाला कोई निकाय जिनके नाम ग्राम स्तर पर या उसके ऐसे भाग में. जिसके लिए उसका गठन किया गया है, पंचायत क्षेत्र से संबंधित निर्वाचक नामावलियों में आए हैं;

(ग) "गौण वन उपज' से अभिप्रेत है, अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी ( वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (2007 का 2) की धारा 2(झ) के अधीन परिभाषित गौण वन उपज;

(घ) "पंच"से अभिप्रेत है ग्राम पंचायत का पंच;

(ड.) "अध्यक्ष" से अभिप्रेत है ग्राम सभा के सम्मिलन का अध्यक्ष;

(च) "सरपंच से अभिप्रेत है ग्राम पंचायत का सरपंच;

(छ) "अनुसूचित क्षेत्र" से अभिप्रेत है भारत के संविधान के अनुच्छेद 244 के खण्ड ( 1 ) में विनिर्दिष्ट अनुसूचित क्षेत्र;

(ज) "लघु जलसंभर"से अभिप्रेत है गांव की सीमा के भीतर पड़ने वाले प्राकृतिक व मानवनिर्मित जल निकाय , जलीय संरचना, तटीय क्षेत्र, तालाब, झील , पोखर , डबरी और अन्य किसी नाम से जाने जाने वाली संरचनाएं , जिसका जलभराव क्षेत्रफल 10 हेक्टेयर अथवा सिंचाई क्षमता 40 हेक्टेयर तक हो;

(झ) "ग्राम"से अभिप्रेत है, किसी अनुसूचित क्षेत्र में का कोई ऐसा ग्राम, जो साधारणतया आवास या आवासों का समूह अथवा छोटा ग्राम या छोटे ग्रामों का समूह से मिलकर बना हो , जिसमें एक समुदाय समाविष्ट हो और जो परम्पराओं और रुढियों के अनुसार अपने कार्यकलापों का प्रबन्ध करता हो;

(2) इन नियमों में प्रयुक्त किंतु परिभाषित नहीं किए गए शब्दों तथा अभिव्यक्तियों का वही अर्थ होगा जैसा कि सुसंगत संहिता, अधिनियम एवं नियमों में उनके लिए समनुदेशित किया गया है।

अध्याय-दो

ग्राम सभा एवं पंचायत राज संस्थाएं

3. ग्राम सभा का गठन.-

(1 ) साधारणतया ग्राम के लिए एक ग्राम सभा होगी, जैसा कि इन नियमों के नियम 2 ( 1 ) (ख) में परिभाषित किया गया है:

परन्तु यदि किसी आवास या आवासों का समूह या फलिया या टोला के मतदाताओं की यह इच्छा हो कि निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए एक से अधिक ग्राम सभा का गठन किया जाए जिसमें समुदाय , परम्पराओं और रुढियों के अनुसार अपने कार्यकलापों का प्रबंध करता हो, तो किसी ग्राम में एक से अधिक ग्राम सभा का गठन किया जा सकेगा -

(क) कोई ग्राम या ग्रामों का समूह;

(ख) खेड़ा (हेमलेट) या खेड़ों (हेमलेट्स) के समूह जिसमें फलिया , मजरा , टोला या पारा आदि सम्मिलित हैं;

(ग) आवास या आवासों का समूह।

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

1178(1)

(2) खेड़ा या फलिया या टोला या पारा या इन के समूह के अनुसूचित जनजाति वर्ग के रहवासी मतदाता से प्रस्ताव पारित कर , उपखण्ड अधिकारी (राजस्व) से उप- नियम (1 ) के अधीन विनिर्दिष्ट क्षेत्र के लिए पृथक ग्राम सभा के गठन के लिए आवेदन कर सकेंगे। इस आवेदन में, -

(क) संबंधित फलिया या टोला या गांवों के पचास प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के हस्ताक्षर/अंगूठे के निशान होंगे;

(ख) फलिया या टोला या गांव की पारंपरिक सीमाएं दर्शाता हाथ से बनाया हुआ नक्शा या नजरी नक्शा संलग्न होगा । इन सीमाओं में राजस्व, वन, तथा अन्य सभी वर्ग की भूमि का समावेश होगा।

(3) ग्राम सभा के गठन हेतु प्रस्ताव की प्रक्रिया.-

(क) ऐसे ग्राम या खेड़ा या खेड़ों (हेमलेट्स) , फलिया या मजरा या पारा या टोले के पचास प्रतिशत अधिक की मतदाताओं के द्वारा नयी ग्राम सभा के गठन हेतु एक प्रस्ताव पारित कर उपखण्ड अधिकारी (राजस्व) को भेज सकेंगे। ग्राम पंचायत सचिव प्रस्ताव की एक प्रति कलक्टर को भेजेगा;

(ख) ग्राम पंचायत नयी ग्राम सभा के गठन संबंधी उप-नियम (2) में उल्लिखित प्रस्ताव एक माह की कालावधि के भीतर उस तारीख से जिसको यह पारित किया जाता है उपखण्ड अधिकारी (राजस्व) को प्रेषित करेगी । ग्राम पंचायत द्वारा निर्धारित अवधि में प्रस्ताव उसके पारित नहीं किए जाने की स्थिति में, खेड़ा या फलिया के मतदाताओं के सम्मिलन का अध्यक्ष/सचिव वह प्रस्ताव उपखण्ड अधिकारी राजस्व को सीधे प्रस्तुत करने में समर्थ होगा;

(ग) आवेदन के साथ नियम 3 के उप-नियम (2) में उल्लिखित प्रस्ताव प्राप्त होने पर उपखण्ड अधिकारी (राजस्व) एक माह के भीतर पृथक ग्राम सभा स्थापित करने के आशय से एक सार्वजनिक सूचना मध्यप्रदेश अनुसूचित क्षेत्र की ग्राम सभा ( गठन, सम्मिलन की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन) नियम, 1998 के अंतर्गत प्ररूप-एक में जारी करेगा। यह सूचना ग्राम सभा क्षेत्र में आने वाले शासकीय पाठशालाओं, यात्री प्रतीक्षालय , सामुदायिक भवन, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, आंगनबाडी केंद्रों एवं अन्य शासकीय भवनों आदि पर चिपकाकर तथा डोंडी पिटवाकर एवं स्थानीय समाचार पत्रों में मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

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प्रकाशित की जाएगी और उसकी एक प्रति संबधित जिला कलक्टर , जिला पंचायत , जनपद पंचायत तथा ग्राम पंचायत को भेजी जाएगी। हितबद्ध पक्ष ऐसी सूचना जारी होने की दिनांक से एक माह की समय सीमा के भीतर , आपत्ति या सुझाव प्रस्तुत कर सकेगा।

(घ) उपखण्ड अधिकारी (राजस्व) ऐसे प्रस्ताव पर तीन माह की समय- सीमा के भीतर विनिश्चय करेगा । उपखण्ड अधिकारी (राजस्व) स्वयं अथवा उनके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी प्रस्तावित ग्राम के मतदाताओं का सम्मिलन आयोजित कर, प्रस्ताव का सत्यापन करने के लिए विनिश्चय करेगा । इस सत्यापन में, -

(एक) मतदाताओं की वास्तविक उपस्थिति एवं प्रस्ताव में दर्शित सीमाओं पर निश्चित भूचिह्न का परीक्षण किया जाएगा।

(दो) सीमाओं के सरकारी भूमापन सर्वेक्षण क्रमांक आदि अंकित किए जाएंगे।

(ङ) किन्हीं अपरिहार्य कारणों से यह प्रक्रिया तीन माह में न हो सकने की स्थितिमें, उपखण्ड अधिकारी ( राजस्व) उसके कारण दर्शाते हुए कलक्टर को प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे । कलक्टर, प्रतिवेदन में दर्शाए कारणो से समाधान होने पर उक्त प्रक्रिया के लिए एक माह की अवधि बढ़ा सकेंगे। उक्त बढ़ाई गई समय -सीमा की समाप्ति पर, उपखण्ड अधिकारी (राजस्व) प्ररूप-2 में उस " ग्राम" क्षेत्र में आने वाली ग्राम सभा का गठन अधिसूचित करेगा;

(च) ऐसी अधिसूचना का प्रकाशन संबधित ग्राम पंचायत तथा जनपद पंचायत के उपखण्ड अधिकारी राजस्व के कार्यालय के सूचना पटल पर और ऐसी अधिसूचना से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में सहजदृश्य स्थान जैसे कि ग्राम सभा क्षेत्र में आने वाली शासकीय पाठशाला, यात्री प्रतीक्षालय , सामुदायिक भवन, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, आंगनबाडी केन्द्र एवं अन्य शासकीय भवनों आदि पर चिपकाकर तथा डोंडी पिटवाकर एवं स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित करके किया जाएगा और उसकी एक प्रति संबधित जिला कलक्टर, जिला पंचायत , जनपद पंचायत तथा ग्राम पंचायत को प्रेषित की जाएगी;

(छ) उपखण्ड अधिकारी (राजस्व) नवीन ग्रामसभा के गठन की अधिसूचना , अनुसूचित क्षेत्र की ग्राम सभा (गठन, सम्मिलन की मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

1178(3)

प्रक्रिया तथा कार्य संचालन) नियम, 1998 के अधीन प्ररूप दो में जारी करेगा , जिसमें उस ग्राम क्षेत्र में आने वाली ग्राम सभाओं का क्षेत्रवार विवरण अंतर्विष्ट होगा । पुनर्गठित ग्राम सभाएं आगामी माह के प्रथम दिवस से अस्तित्व में आएंगी।

(ज) उपखण्ड अधिकारी ( राजस्व) द्वारा अधिसूचित प्रत्येक गांव के लिए एक ग्राम सभा होगी;

(झ) प्रत्येक ग्राम सभा स्वशासी निगमित निकाय होगी तथा उसकी एक सामान्य पदमुद्रा होगी और ऐसी ग्राम सभा के कर्तव्य व अधिकार किसी निगमित निकाय के अनुरूप होंगे;

(ञ) प्रत्येक ग्राम सभा का कार्यालय उस ग्राम सभा क्षेत्र में होगा। साधारणतया कार्यालय किसी शासकीय भवन में होगा पंरतु शासकीय भवन की अनुपलब्धता पर यह ग्राम सभा के किसी नागरिक के घर पर हो सकेगा। कार्यालय हेतु किसी भी प्रकार के किराए का भुगतान नहीं किया जाएगा;

(ट) ग्राम सभा की कार्यवाहियां एवं अन्य सभी अभिलेख ग्राम सभा के कार्यालय में संधारित किए जाएंगे। अभिलेखों की एक प्रति ग्राम पंचायत कार्यालय में रखी जा सकेगी।

(ठ) इन नियमों के प्रवृत्त होने की तारीख से एक वर्ष के लिए राज्य सरकार नई ग्राम सभा के गठन की प्रक्रिया को प्रत्येक फलिया या टोले तक पहुंचाने हेतु विशेष जनसंवाद अभियान चलाएगी।

4. ग्राम सभा का अध्यक्ष.-

(1) प्रत्येक ग्राम सभा के सम्मिलन का एक अध्यक्ष होगा।

(2) ग्राम सभा के सम्मिलन की अध्यक्षता ग्राम सभा के अनुसूचित जनजातियों के किसी ऐसे सदस्य द्वारा की जाएगी, जो ग्राम पंचायत का सरपंच या उपसरपंच या पंच न हो, और इस प्रयोजन के लिए सर्वसम्मति से निर्वाचित हुआ हो तथा सर्वसम्मति नहीं बनने की स्थिति में, ग्राम सभा में उपस्थित सदस्यों के बहुमत से निर्वाचित किया गया हो ।

(3) ग्राम सभा के अध्यक्ष का कार्यकाल आगामी ग्राम सभा की तिथि तक रहेगा।

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

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(4) कोई व्यक्ति एक से अधिक बार ग्राम सभा का अध्यक्ष निर्वाचित होने हेतु पात्र होगा किन्तु पंचायत के पूरे कार्यकाल के दौरान यह पात्रता एक वर्ष से अधिक नही होगी ।

5. ग्राम सभा का सचिव.-

(1 ) ग्राम पंचायत का सचिव ग्राम पंचायत क्षेत्र के भीतर गठित समस्त ग्राम सभाओं का भी पदेन सचिव होगा ।

(2) ग्राम सभा के सम्मिलन की कार्यवाहियों के अभिलेख के संधारण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत के सचिव की होगी।

(3) किसी ग्राम सभा के सम्मिलन में अपरिहार्य कारणों से ग्राम पंचायत के सचिव के उपस्थित नहीं हो सकने की दशा में बैठक में ग्राम सभा का अध्यक्ष, सचिव के दायित्व निर्वहन हेतु संबंधित ग्राम के किसी भी शासकीय या अर्धशासकीय कर्मचारी, जैसे कि शिक्षक, पटवारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, आंगनवाडी कार्यकर्ता , आशा कार्यकर्ता, पेसा मोबिलाईजर आदि को ग्राम सभा के सम्मिलन सचिव पद के दायित्व का निर्वहन करने हेतु अधिकृत कर सकेगा।

(4) संबंधित ग्राम में ग्रामसभा के सम्मिलन के लिए उप-नियम (3) में उल्लिखित किसी भी शासकीय सेवक या अर्धशासकीय सेवक के उपलब्ध न होने की दशा में ग्राम सभा का अध्यक्ष ग्राम के किसी भी शिक्षित मतदाता को सचिव के दायित्व के निर्वहन हेतु अधिकृत कर सकेगा।

6. ग्राम सभा के सम्मिलन की तारीख , समय तथा स्थान.-

(1 ) ग्राम सभा का सम्मिलन ग्राम में ही किसी ऐसे सार्वजनिक स्थान पर आयोजित किया जाएगा, जहां ग्राम सभा का प्रत्येक सदस्य बिना किसी रुकावट के उपस्थित हो सके ।

(2) ग्राम सभा के सदस्य अर्थात मतदाताओं के दस प्रतिशत या पच्चीस सदस्य, जो भी कम हो, द्वारा मौखिक या लिखित आवेदन किए जाने पर अध्यक्ष द्वारा सात दिन के भीतर ग्राम सभा का सम्मिलन बुलाया जाना अनिवार्य होगाः

परन्तु यदि इस संबंध में एक से अधिक आवेदन प्राप्त होते है तो उन सभी पर विचार किया जाएगा।

(3) ग्राम सभा नियमित अंतराल पर भी ग्राम सभा का सम्मिलन आयोजित करने हेतु संकल्प पारित कर सकेगी। ऐसे नियमित सम्मिलन की तिथि मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

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(अंग्रेजी तारीख ग्रेगोरियन कलेंडर के सप्ताह का दिन) , समय और स्थान ग्राम सभा द्वारा स्वयं ही स्थाई रूप से तय किया जा सकेगा । ग्रामसभा के स्थाई रूप से तय नियमित सम्मिलन के लिए सूचना की आवश्यकता नही होगी ।

(4) मध्यप्रदेश अनुसूचित क्षेत्र की ग्राम सभा (गठन, सम्मिलन की प्रकिया तथा कार्य संचालन) नियम, 1998 के नियम 6 के अनुसार ग्राम सभा का सम्म्लिनऐसे अंतरालों पर आयोजित किया जाएगा , जैसा कि उसके समक्ष विचारार्थ कार्य-सूची के आधार पर आवश्यक होः

परन्तु ग्राम सभा के दो सम्मिलनों के बीच तीन माह से अधिक का अंतराल नहीं होगा।

7. ग्राम सभा के सम्मिलन की सूचना देने की रीति.-

(1 ) ग्राम सभा के प्रत्येक सम्मिलन की सूचना, सम्मिलन की तारीख से कम से कम सात दिन पूर्व तारीख , समय तथा स्थान और विचार की जाने वाली कार्य- सूची को विनिर्दिष्ट करते हुए, दी जाएगी । किसी आपात स्थिति में, लिखित में अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से, सम्मिलन, तीन पूर्ण दिनों की सूचना देकर बुलाया जा सकेगा।

(2) सम्मिलन की ऐसी सूचना, -

(क) ग्राम सभा क्षेत्र में पड़ने वाले क्षेत्र में सहज -दृश्य स्थानों पर सूचना की एक प्रति चिपकाकर; और

(ख) ग्राम सभा क्षेत्र में डोंडी पिटवाकर घोषणा करते हुए दी जाएगी।

(3) ग्राम सभा का संयुक्त सम्मिलन,-

(क) ऐसे विषय जिनका संबंध एक से अधिक ग्राम सभाओं से हो, उनके लिए ग्राम सभाओं का संयुक्त सम्मिलन बुलाया जा सकेगा।

(ख) संयुक्त सम्मिलन में किया गया विनिश्चय प्रत्येक सहभागी ग्राम सभा द्वारा किया गया विनिश्चिय माना जाएगा ।

(ग) संयुक्त सम्मिलन का अध्यक्ष, एकल ग्राम सभा की तरह सर्वसम्मति से उपस्थित सदस्यों के बहुमत के आधार पर निर्वाचित किया जाएगा ।

(घ) संयुक्त सम्मिलन की गणपूर्ति तब मान्य होगी जब प्रत्येक सहभागी ग्रामसभा की गणपूर्ति हो।

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

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8. ग्राम सभा ‌द्वारा विनिश्चय.-

(1 ) किसी सम्मिलन में ग्राम सभा के समक्ष लाए गए समस्त विषय यथासंभव सर्वसम्मति से विनिश्चित किए जाएगें और जिसमें असफल रहने पर वह उपस्थितसदस्यों के सामान्य मतैक्य से विनिश्चित किए जाएंगे। 'सामान्य मतैक्य' से अभिप्रेत है उपस्थित सभी मतदाता या तो प्रस्ताव के समर्थन में हैं या तटस्थ हैं:

परन्तु जहाँ किसी विवाद्यक पर मतभेद है, वहाँ वह आगामी सम्मिलन के समक्ष लाया जाएगा । यदि दो लगातार स्थगित सम्मिलनों में सर्वसम्मति या सामान्य मतैक्य से विनिश्चय नहीं किया जाता है, तो वह उपस्थित सदस्यों के बहुमत द्वारा विनिश्चित किया जाएगा । मर्तों की संख्या बराबर होने की दशा में सम्मिलन की अध्यक्षता करने वाले व्यक्तिका निर्णायक मत होगा।

(2) यदि इस संबंध में कोई विवाद उद्‌भूत होता है कि क्या कोई व्यक्ति मत देने का हकदार है, तो ऐसा विवाद ग्राम सभा क्षेत्र की मतदाता सूची में उसकी प्रविष्टि को ध्यान में रखते हुए ग्राम सभा के अध्यक्ष द्वारा विनिश्चत किया जाएगा और उसका विनिश्चय अंतिम होगा।

9. ग्राम सभा के संचालन एवं उसके अभिलेखों के संधारण के लिए प्रक्रिया.-

(1 ) ग्राम सभा में लिए गए विनिश्चयों को पंजी में अभिलिखित किया जाएगा और ग्राम सभा के सचिव द्वारा ग्राम सभा की उसी बैठक में सभी सदस्यों के समक्ष पढ़कर सुनाया जाएगा।

(2) कार्यवाही पंजी पर अध्यक्ष एवं सचिव द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगें तथा उपस्थितसदस्यों की संख्या अभिलिखत की जाएगी । उक्त उपस्थित इच्छुक सदस्य चाहेंगे तो कार्यवाही पंजी में हस्ताक्षर कर सकेंगे। उपस्थिति पंजी पृथक् से भी संधारित की जाएगी।

(3) इतिवृत्त या कार्यवाही के विवरण हिन्दी में देवनागरी लिपि में लिखे जाएंगे ।

(4) ग्राम सभा के कार्यवाही विवरण की एक प्रति सचिव द्वारा तीन दिवस के भीतर ग्राम पंचायत को प्रस्तुत की जाएगी ।

(5) ग्राम सभा की सिफारिशों को ग्राम पंचायत कार्यान्वित करेगी अथवा करवाएगी ।

(6) यदि आवश्यक हो तो , किसी विभाग के अधिकारी/ कर्मचारी ग्राम सभा की बैठक में उपस्थित हो सकेंगे ।

1178(7)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

10. ग्राम सभा के विनिश्चय पर आपत्ति.-

(1 ) ग्राम सभा के निर्णय से व्यथित कोई व्यक्ति या शासकीय विभाग ग्राम सभा के विनिश्चय से 15 दिवस के भीतर आपत्ति प्रस्तुत कर सकेगा और उस पर 30 दिवस के भीतर ग्राम सभा के सम्मिलन में पुनर्विचार किया जा सकेगा।

(2) ग्राम सभा में पुनर्विचार नहीं किए जाने या ग्राम सभा के विनिश्चिय से असंतुष्ट होने पर मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 7-ज अनुसार जनपद पंचायत के अध्यक्ष, उस क्षेत्र की जनपद पंचायत के सदस्य तथा उपखण्ड अधिकारी ( राजस्व) से मिल कर बनने वाली समिति को ऐसी रीति में जो विहित की गई है अनुसार अपील की जा सकेगी।

11. ग्राम सभा के सम्मिलन के लिए गणपूर्ति.-

(1 ) ग्राम सभा के किसी सम्मिलन के लिए गणपूर्ति ग्राम सभा के कुल सदस्यों के एक चौथाई या 100 , जो भी कम हो से होगी। जिस में एक तिहाई से अनिम्न महिलाएं होंगीः

परंतु भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, भूमि वापसी तथा सामुदायिक संसाधन के संबंध में किसी भी विनिश्चय हेतु गणपूर्ति कुल सदस्यों के 50 प्रतिशत से होगी, जिसमें से एक तिहाई से अनिम्न महिलाएं होंगी।

(2) यदि ग्राम सभा में कोई गणपूर्ति नहीं है, तो ग्राम सभा का अध्यक्ष ऐसे सम्मिलन को आगामी तारीख या समय के लिए स्थगित कर देगा तथा इस प्रभाव की सूचना विहित रीति में दी जाएगी। (3) दो स्थगित सम्मिलनों में भी गणपूर्ति आवश्यक होगी किंतु तीसरे सम्मिलन स्थगित बैठक में गणपूर्ति आवश्यक नहीं होगीः परंतु भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास , भूमि वापसी तथा सामुदायिक संसाधन के संबंध में किसी भी विनिश्चय हेतु दो स्थगित सम्मिलनो के पश्चात् भी स्थगित बैठक में कम से कम 25 प्रतिशत गणपूर्ति अनिवार्य होगी ।

12. ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत की शक्तियां एवं कृत्य.-

(1) ग्राम सभा की शक्तियां एवं कृत्य. किसी अनुसूचित क्षेत्र में , ग्राम सभा को मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम , 1993 की धारा 7 के अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों तथा कृत्यों के अतिरिक्त निम्नलिखित शक्तियां तथा कृत्य होंगे , अर्थात्: - मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

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(क) व्यक्तियों की परंपराओं तथा रुढियों, उनकी सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक संसाधनों को तथा विवादों के निराकरण के रुदिगत रीतियों को सुरक्षित तथा संरक्षित करना;

(ख) ग्राम के क्षेत्र के भीतर स्थित प्राकृतिक संसाधनों को, जिनके अंतर्गत भूमि, जल तथा वन सम्मिलित हैं, उसकी परंपरा के अनुसार और संविधान के उपबंधों के अनुरूप और तत्समय प्रवृत्त अन्य सुसंगत विधियों का सम्यक् ध्यान रखते हुए, प्रबंधित करना;

(

ग) स्थानीय योजनाओं पर , जिनमें अनुसूचित उपयोजनाएं सम्मिलित हैं, तथा ऐसी योजनाओं के लिए स्रोतों एवं व्ययों पर नियंत्रण रखना; और

(घ) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कृत्यों का निर्वहन करना जिसे कि राज्य सरकार तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन उसे प्रदत्त करे या न्यस्त करे ।

(2) ग्राम पंचायत की शक्तियां एवं कृत्य. अनुसूचित क्षेत्रों में , ग्राम पंचायत को, ग्राम सभा के साधारण अधीक्षण, नियंत्रण तथा निर्देश के अधीन निम्नलिखित शक्तियां भी होंगी, अर्थात्ः-

(क) ग्राम के बाजारों तथा मेलों का, चाहे वे किसी भी नाम से जाने जाएं, जिनमें पशु मेलै सम्मिलित है, प्रबंध करना;

(ख) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग तथा कृत्यों का निर्वहन करना, जैसा कि राज्य सरकार तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन उसे प्रदत्त करे या न्यस्त करे।

13. ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा की निधियां.-

(1 ) पंचायत निधि.- पंचायत निधि मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 66 में उल्लिखित प्रावधानों के अनुसार संचालित होगी ।

(क) मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 तथा उसके अधीन बनाए गये नियमों के उपबंधो के अध्यधीन रहते हुए पंचायत में निहित समस्त संपति और पंचायत निधि का उपयोग, उक्त अधिनियम के प्रयोजनों के लिए या साधारणतः पंचायतों के विकास संबंधी क्रियाकलापों से संबंधित अन्य प्रयोजनों के लिए या ऐसे अन्य व्ययों की पूर्ति के लिए किया जाएगा , जो कि राज्य मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

1178(9)

सरकार, किसी पंचायत के आवेदन पर, या अन्यथा लोकहित में अनुमोदन करे । पंचायत निधि निकटतम शासकीय कोषालय या उप कोषालय या डाकघर या सरकारी बैंक या अधिसूचित बैंक या उसकी शाखा में रखी जाएगी ।

(ख) राज्य सरकार या किसी अन्य व्यक्ति या स्थानीय प्राधिकारीद्वारा किसी विर्निदिष्ट कार्य या प्रयोजन के लिए पंचायत को आवंटित किसी रकम का उपयोग केवल उसी कार्य या प्रयोजन के लिए तथा उन अनुदेशों के अनुसार किया जायेगा जो राज्य सरकार इस बाबत् साधारणतः या विशेषतः जारी करे ।

(ग) ग्राम पंचायत की समस्त रकमें सरपंच तथा सचिव के हस्ताक्षर से आहरित की जाएंगी । पंचायत निधि में की समस्त प्राप्तियों तथा पंचायत निधि में से समस्त आहरण से संबंधित जानकारी ग्रामसभा के समक्ष उसके आगामी सम्मिलन में रखी जाएगी ।

(घ) पंचायत निधि से रकम के आहरण हेतु ग्राम पंचायत के सदस्यों के बहुमत से संकल्प पारित होना आवश्यक होगा।

(ड.) ग्राम पंचायत का बजट ग्राम सभा के समक्ष प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान इसके प्रथम सम्मिलन में प्रस्तुत किया जाएगा व ग्राम सभा की सहमति प्राप्त होने पर या ग्राम सभा द्वारा प्राप्त अनुशंसा का समावेश करने के बाद ही बजट कार्यान्वित किया जाएगा । प्रत्येक तीन महीने में एक बार, प्रत्येक ग्राम की ग्राम सभा में ग्राम पंचायत की पंचायत निधि के आय-व्यय का प्रमाणन ग्रामसभा द्वारा करना अनिवार्य होगा ।

(ख) ग्राम सभा निधि.-

(1 ) प्रत्येक ग्राम सभा की एक " ग्राम सभा निधि" होगी । ग्राम सभा निधि मध्यप्रदेश ग्राम सभा (ग्राम निधि का संधारण) नियम, 2005 के नियम 3 के अधीन उल्लिखित निधि तथा संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा ग्राम सभा को आबंटित निधियों से मिलकर बनेगी।

(ख) प्रत्येक ग्राम सभा की "ग्राम सभा निधि" खाता निकटतम बैंक में खोला जाएगा। ग्राम सभा अपने सदस्यों में से 2 सदस्यों का चयन करेगी , जिसमें कम से कम 1 महिला होगी । इन सदस्यों में कोई भी सदस्य ग्राम पंचायत का सरपंच या उप सरपंच या पंच या मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

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उनके परिवार का सदस्य नहीं होगा । आहरण तथा संवितरण हेतु इस समिति के दोनों सदस्यों के संयुक्त हस्ताक्षर की आवश्यकता होगी ।

(ग) ग्राम सभा निधि के अभिलेख संधारण की जिम्मेदारी सचिव की होगी।

(घ) आहरण तथा संवितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाने पर उसकी संयुक्त जिम्मेदारी हस्ताक्षरकर्ताओं की होगी ।

(ड.) ग्राम सभा निधि से रकम के आहरण हेतु ग्राम सभा से पारित प्रस्ताव आवश्यक होगा ।

अध्याय-तीन

शांति एवं सुरक्षा

शांति एवं विवाद निवारण समिति.- ( 1 ) ग्राम सभा द्वारा ग्राम सभा के सदस्यों 14.

मैं से कम से कम 05 व अधिकतम 07 सदस्यों का चयन कर " शांति एवं विवाद निवारण समिति" का गठन किया जावेगा। उक्त समिति में ग्राम में निवासरत अनुसूचित जनजातियों को जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व प्रदान किया जावेगा तथा इस समिति में कम से कम एक तिहाई प्रतिनिधित्व महिलाओं को दिया जाना अनिवार्य होगा ।

(2) ग्राम सभा के सचिव द्वारा " शांति एवं विवाद निवारण समिति" के गठन की जानकारी स्थानीय पुलिस स्टेशन को प्रेषित की जावेगी।

(3) यह समिति पारम्परिक पद्धति से ग्राम के विवाद निवारण का कार्य करेगी तथा ग्राम में शांति बनाये रखने की दिशा में कार्य करेगी ।

(4) इस समिति के निर्णय के विरुद्ध ग्राम सभा में अपील की जा सकेगी।

(5) प्रत्येक " शांति एवं विवाद निवारण समिति" की बैठक की कार्यवाही का अभिलेख संधारण समिति के सचिव द्वारा किया जायेगा।

(6) स्थानीय पुलिस स्टेशन में ग्राम से संबंधित किसी प्रथम सूचना रिपोर्ट के दर्ज होने पर " शांति एवं विवाद निवारण समिति" को सूचित कराया जावेगा।

15. ग्राम सभा के अधिकारों की सीमाएँ:- ग्राम सभा उसके अधिकारों का प्रयोग निम्नलिखित सीमाओं के अन्तर्गत ही करेगी:-

(1 ) ग्राम सभा ऐसा कोई भी प्रस्ताव पारित नही करेगी जो कि तत्समय प्रवृत्त प्रचलित विधि के विरुद्ध हो ।

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( 2) ग्राम सभा ऐसे किसी भी कृत्य का समर्थन नहीं करेगी जो क्षेत्र में निवास कर रही जनजातियों तथा अन्य स्थानीय समुदायों की रुढियों एवं परम्पराओं को क्षति पहुंचाएं ।

(3) ग्राम सभा ऐसी किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं करेगी जो कि विविध सामाजिक समूहों के बीच द्वेष या शत्रुभाव को बढावा देती हो या जिससे सामाजिक सौहार्द और भाईचारा कम होता हो ।

(4

) ग्राम सभा किसी भी शासकीय प्राधिकारी की विधि सम्मत गतिविधियों मैं किसी भी प्रकार का निषेध या बाधा उत्पन्न नही करेगी।

अध्याय-चार

भूमि प्रबंधन

16. ग्राम सभा द्वारा कृषि की योजना.-

ग्राम सभा किसान की आर्थिक स्थिति के अनुसार कृषि हेतु योजनाएं बनाने में सक्षम होगी । ग्राम सभा के निर्णय में अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित प्रमुख बिंदु सम्मिलित हो सकेंगे:-

(1 ) मिट्टी के कटाव की रोकथाम।

(2) फसलों को बचाने हेतु चराई का विनियमन।

(3) वर्षा जल का संचयन एवं वितरण जिसका उपयोग कृषि हेतु किया जा सके।

(

4) आपसी सहयोग से या अन्यथा, बीज, खाद आदि की व्यवस्था सुनिश्चित् करने के साथ-साथ ज्ञान साझा करना।

) जैविक खाद, उर्वरक और कीटनाशकों को बढ़ावा देना।

(5

(6) कृषि विभाग , ग्राम सभा द्वारा तैयार की गई कृषि की योजना का नियमानुसार क्रियान्वयन करेगा।

17. भू-अभिलेखों का संधारण.-

(1 ) पटवारी एवं बीट गार्ड, विभाग के वित्तीय वर्ष के प्रारंभ के प्रथम सप्ताह में वर्ष में एक बार ग्राम सभा को ग्राम की सीमा के भीतर आने वाले अद्यतन राजस्व और वन अभिलेख अर्थात् नक्शा, खसरा , बी-1 आदि उपलब्ध करवाएंगे ।

(2) पटवारी , ग्राम सभा से प्राप्त निजी भूमि/ शासकीय भूमि के अभिलेखों में त्रुटि सुधार की अनुशंसा 15 दिवस के अंदर सक्षम राजस्व अधिकारी को मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

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या बीट गार्ड को भेजेगा। सक्षम अधिकारी विधिक प्रावधानों के अनुसार तीन माह के भीतर त्रुटि सुधार के प्रकरण का निराकरण करेगा और पटवारी के माध्यम से ग्राम सभा को सूचित करेगा।

(3) शासकीय अथवा सामुदायिक भूमि के उपयोग में व्यपवर्तन से पूर्व ग्राम सभा से परामर्श करना होगा । हस्तांतरण , पट्टा, अनुबंध कृषि, बिक्री, गिरवी अथवा अन्य किसी कारण से निजी भू-स्वामी के परिवर्तित होने की दशा में ग्राम सभा को पूर्व सूचना देना होगा।

(4) ग्राम सभा यह सुनिश्चित करेगी कि अनुसूचित जनजाति की कोई भूमि शासकीय कार्यों के उपयोग, भू-अधिग्रहण, वैध उत्तराधिकार एवं अन्य विधिक प्रावधानों के विपरीत गैर-जनजाति व्यक्ति को हस्तांतरित न हो ।

(5) ग्राम सभा अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति की भूमि की नीलामी की दशा मैं उक्त भूमि को अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति को विक्रय करने की पहल करेगी।

(6) अनुसूचित जनजाति की ऐसी कोई भूमि जो उत्तराधिकार या अन्य विधिक कारणों के बिना गैर अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति को अंतरित की गई हो तो ग्राम सभा ऐसी भूमि को अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति अथवा उसके परिवार को वापस अंतरित करने हेतु पहल करेगी।

(7) यदि ग्राम सभा के मत में कोई भूमि जिस पर कि अनुसूचित जनजाति व्यक्तिका अधिकार है, का गैर जनजाति व्यक्तिके पक्ष में अंतरण करने के प्रयास हो रहें हो तो ऐसी कार्यवाही को रोकने की पहल ग्राम सभा कर सकेगी।

(8) ग्राम सभा भूमि के बंधक रखने से संबंधित मामलों को उसके संज्ञान में आने पर सम्यक प्रक्रिया के अधीन बंधक से निर्मुक्ति की कार्यवाही कर सकेगी।

18. भू-अर्जन के पूर्व परामर्श.-

(1 ) अधिसूचित क्षेत्रों में भू-अर्जन के समस्त मामलो में मध्यप्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार नियम , 2015 के नियम 16 के अनुसार संबंधित ग्राम सभा की पूर्व सहमति प्राप्त की जाएगी।

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(2) अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में मध्यप्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार नियम, 2015 के अंतर्गत की जाने वाली भू- अर्जन की कार्यवाही में उक्त नियमों के नियम 6 के अनुसरण में सामाजिक समाघात निर्धारण के लिये जन सुनवाई के दौरान ग्राम सभाओं के साथ परामर्श किया जाएगा । ग्राम सभा द्वारा प्रदत्त परामर्श को संज्ञान में लेते हुए सामाजिक समाघात का निर्धारण किया जाएगा ।

19. पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन के लिये जन सुनवाई. प्रशासक, जो राजस्व विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ 16-15-(8 )/2014-सात-शा. 2ए दिनांक 29.09.2014 के अनुसार कलक्टर कार्यालय की भू-अर्जन शाखा के प्रभारी अधिकारी, जो डिप्टी कलक्टर से अनिम्न श्रेणी का हो, द्वारा पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन की स्कीम तैयार करने के लिये मध्यप्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार नियम, 2015 के नियम 13 के अनुसार जन सुनवाई सभी ग्राम सभाओं में जहां भूमि के अर्जन द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित सदस्य निवास करते हों , संचालित की जाएगी ।

कपट द्वारा अंतरित आदिम जनजाति की भूमि की वापसी.-

20.

(1) मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 (क्रमांक 20 सन् 1959) की धारा 170-ख की उपधारा (2-क ) के अनुसार यदि कोई ग्राम सभा अपनी अधिकारिता के क्षेत्र में यह पाती है कि किसी आदिम जनजाति के सदस्य से भिन्न कोई व्यक्ति आदिम जनजाति के भूमिस्वामी की भूमि पर बिना किसी विधिपूर्ण अधिकार के कब्जे में है तो वह ऐसी भूमि का कब्जा उस व्यक्तिको वापिस करेगी जिसकी कि वह भूमि मूलतः थी और यदि उस व्यक्तिकी मृत्यु हो चुकी है तो उसके विधिक वारिसों को वापिस करेगीः

परंतु यदि ग्राम सभा ऐसी भूमि का कब्जा प्रत्यावर्तित करने में असफल रहती है , तो वह मामला उपखंड अधिकारी की ओर निर्दिष्ट कर सकेगी, जो मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहित , 1959 (क्रमांक 20 सन् 1959) की धारा 170(ख) की उपधारा (2-क)के अनुसार ऐसी भूमि का कब्जा, निर्देश की प्राप्ति की तारीख से तीन मास के भीतर वापिस करेगा। राज्य शासन द्वारा उपखण्ड अधिकारी के न्यायालय में ग्राम सभा द्वारा प्रेषित किये गये ऐसे प्रकरणों की समय -समय पर समीक्षा की जाएगी।

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अध्याय-पांच

जल संसाधनों एवं लघु जन संभर की योजना और प्रबंधन

21. (1 ) जन संसाधनों एवं लघु जन्न संभर की योजना और प्रबंधन.-

(क) ऐसे जल संसाधन जो एक ग्रामसभा के सीमा क्षेत्र के भीतर हो , उन जल संसाधनों या निकायों के विषय में ग्रामसभा का विनिश्चय सभी स्तर की पंचायतों के लिए बाध्यकारी होगा ।

(ख ) ग्रामसभा के विनिश्चय सिंचाई , मत्स्यपालन, पेयजल आदि हेतु आवंटन व जल स्रोतों की शाश्वतता से संबंधित हो सकते हैं । ग्राम सभा, ग्राम में उपलब्ध पानी के उपयोग में पेयजल , निस्तार , सिंचाई को प्राथमिकता देगी ।

(ग) अनुसूचित क्षेत्रों में मत्स्य पालन एवं पेयजल का प्रबंधन, 0 से 10 हेक्टेयर तक के लघु जलसंभर के लिए ग्राम पंचायत , 10 से अधिक किन्तु 100 हेक्टेयर तक के लघु जलसंभर के लिए जनपद पंचायत तथा 100 से अधिक किन्तु 200 हेक्टेयर तक के लघु जलसंभर के लिए जिला पंचायत द्वारा किया जाएगा । प्रबंधन कार्य खण्ड (क) के अनुसार होगा।

(2) सिंचाई प्रबंधन.-

(क) सिंचाई प्रबंधन के लिए 40 हेक्टेयर तक की सिंचाई क्षमता के प्रबंधन का अधिकार संबंधित स्तर की पंचायत को होगा।

(ख) सिंचाई जल के उपयोग एवं वितरण पर नियंत्रण संबंधित स्तर की पंचायत के परामर्श से किया जाएगा ।

(ग) यदि सिंचाई प्रबंधन में कोई विवाद उत्पन्न होता है तो उसे ग्राम सभा की शांति एवं न्याय समिति के समक्ष रखा जायेगा। ग्राम सभा स्तर पर विवाद का समाधान नहीं होने की स्थिति में प्रकरण को कलक्टर को प्रेषित किया जा सकेगा ।

(3) मत्स्य पालन.-

(क) ग्राम सभा उसके नियंत्रण के क्षेत्र में शासकीय/सामुदायिक लघु जल निकार्यों में मत्स्य पालन का नियंत्रण/नियमन करने के लिये सक्षम होगी।

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(ख ) स्थानीय परम्पराओं के अनुसार मछलियों की उपलब्धता व प्रजातियों की विविधता को बनाये रखने के लिय ग्राम सभा मत्स्य आखेट पर नियंत्रण कर सकेगी ।

(ग) ग्रामीणों के पोषण स्तर को ध्यान में रखते हुए ग्राम सभा मत्स्य उपयोग एवं विक्रय हेतु प्राथमिकता निश्चित कर सकेगी ।

(4) जल संसाधनों में प्रदूषण. ग्राम सभा शासकीय , समुदायिक अथवा निजी जल निकायों में किसी भी प्रकार के प्रदूषण को रोकने हेतु निर्देश जारी कर सकेगी ।

अध्याय-छह

खान और खनिज

22. गौण खनिज.-

(क) मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 के नियम 18 के अंतर्गत अनुसूची- एक एवं अनुसूची-दो में विनिर्दिष्ट गौण खनिजों के लिए अनुसूचित क्षेत्रों मैं खनिज क्षेत्र के प्रारंभिक चयन उपरांत पूर्वेक्षण अनुज्ञप्ति या उत्खन्नपट्टा आवंटन की प्रक्रिया प्रारंभ करने के पूर्व , ग्राम सभा की अनुशंसा प्राप्त करना अनिवार्य होगा ।

(

ख) मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 के नियम 18-क के अंतर्गत अनुसूची-पांच में विनिर्दिष्ट गौण खनिजों के लिए अनुसूचित क्षेत्रों में खनिज क्षेत्र के प्रारंभिक चयन उपरांत, पूर्वेक्षण अनुज्ञप्ति या उत्खनिपट्टा आवंटन की प्रक्रिया प्रारंभ करने के पूर्व, ग्राम सभा की अनुशंसा प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

(ग) मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम , 1996 के नियम 41-क के अंतर्गत अनुसूची-पांच में विनिर्दिष्ट गौण खनिजों के लिए अनुसूचित क्षेत्रों में नीलामी द्वारा गौण खनिजों के समुपयोजन के लिए, खनिज क्षेत्र के प्रारंभिक चयन उपरांत रियायत आवंटन की प्रक्रिया प्रारंभ करने से पूर्व, ग्राम सभा की अनुशंसा प्राप्त किया जाना अनिवार्य होगा।

(घ) मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम , 1996 की अनुसूची-एक के अनुक्रमांक 4 से 7 पर विनिर्दिष्ट खनिजों तथा अनुसूची-दो (अनुक्रमांक 01 को छोडकर) में विनिर्दिष्ट खनिजों का उत्खनिपट्टा स्वीकृति के संबंध में इस नियम के नियम 21 (2) में प्रावधानित संवर्गों के अधिमान अधिकार का उल्लंघन मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

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किये बिना तथा इस नियम की शर्तों के अधीन अनुसूचित जनजाति की सहकारी सोसाईटियों/ सहयोजन, अनुसूचित जनजाति की महिला आवेदक, अनुसूचित जनजाति के पुरुष आवेदक को उनके संवर्ग में प्राथमिकता दी जाएगी।

(ङ) खनिज विभाग , ग्राम सभा को उसके क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत गौण खनिज के सभी उत्खनिपट्टा आवंटन एवं नीलामी की जानकारी प्रदान करेगा। खनिज विभाग ग्राम सभा द्वारा गैर -कानूनी गतिविधियों को रोकने और अन्य विषयों से संबंधित समस्त शिकायतों का संज्ञान लेगा एवं उस पर की गई कार्यवाही का विवरण ग्राम सभा को प्रदान करेगा।

अध्याय-सात

मादक पदार्थ नियंत्रण

23. मादक पदार्थों के निषेध तथा विक्रय/उपभोग पर प्रतिबंध/विनियमनः-

(1 ) अनुसूचित क्षेत्रों में मादक पदार्थों का निषेध.-

(क) राज्य शासन द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों में मादक पदार्थों के संबंध में निषेधाज्ञा जारी करने पर , ग्राम सभा अपनी स्थानीय सीमाओं के भीतर इसे लागू करने के लिये आवश्यक कदम उठाएगी।

(ख) ग्राम सभा उक्त निषेधाज्ञा के उल्लंघन के लिए संबंधित व्यक्ति पर आर्थिक दण्ड लगा सकेगी जो रूपये 1000/- से अधिक नहीं होगा।

(2) अनुसूचित क्षेत्रों में शराब/भांग के विक्रय का प्रतिषेध और विनियमन- ग्राम सभा अपनी स्थानीय सीमाओं के भीतर.-

(क) देशी/विदेशी शराब की नवीन दुकान खोलने का प्रस्ताव विहित अधिकारी से प्राप्त होने पर इसके 45 दिन की कालावधि के भीतर नई दुकान खोलने की अनुमति दे सकेगी। यदि ग्राम सभा 45 दिन के भीतर सर्वसम्मति से किसी निर्णय पर नहीं पहुंचती है तो यह माना जाएगा कि ग्राम सभा की इस पर सहमति नहीं है तथा दुकान नहीं खोली जाएगी ।

(ख) ग्राम के क्षेत्र के अंदर संचालित शराब/ भांग दुकान के स्थल परिवर्तन की अनुशंसा कर सकेगी जिस पर राज्य शासन द्वारा कार्रवाई की जाएगी;

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(ग) किसी स्थानीय त्यौहार के अवसर पर उस दिन की संपूर्ण अथवा आंशिक अवधि के लिए संचालित शराब/ भांग दुकान बंद करने की अनुशंसा कलक्टर को कर सकेगी । कलक्टर स्वविवेक से घोषित 4 शुष्क दिवस के अंतर्गत दुकान को उक्त क्षेत्र के लिए बंद कर सकेगा।

(3) अनुसूचित क्षेत्रों में शराब/भांग के उपभोग पर प्रतिबंध तथा विनियमन.- ग्राम सभा अपने क्षेत्राधिकार के भीतर , -

(क) किसी निर्धारित सार्वजनिक स्थल/परिसर में शराब/ भांग का उपभोग प्रतिबंधित कर सकेगी।

(ख) मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम , 1915 की धारा-16 के अधीन विहित मादक पदार्थों की व्यक्तिगत आधिपत्य की सीमा को कम कर सकेगी।

(ग) अनुसूचित क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों हेतु मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम , 1915 की धारा-61 घ(2)(तीन) में निर्धारित आधिपत्य की अधिकतम सीमा को कम कर सकेगी ।

अध्याय-आठ

24. (1) श्रम शक्ति की योजना.-

(क) ग्राम सभा अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से वार्षिक कार्ययोजना तैयार कर सकेगी।

(ख) ऐसे कार्य जिनमें मस्टर रोल का उपयोग होता है , से संबंधित काम शुरु होने के पहले दिन ऐसे मस्टर रोल की जानकारी ग्राम सभा के अध्यक्ष को प्रस्तुत करेंगे । यदि ग्रामसभा के अध्यक्ष या सदस्य मस्टर में फर्जी नाम या अन्य त्रुटियों पाते हैं, तो ऐसी त्रुटियों को ठीक किया जावेगा ।

(2) गांव के बाहर काम करने वाले श्रमिकों का नियमन.-

(क) गांव से बाहर काम करने वाले सभी व्यक्ति अपने कार्य की प्रकृति एवं शर्तों की संपूर्ण जानकारी ग्राम सभा को उपलब्ध करायेंगे , जिनका संधारण विहित रीति में किया जावेगा ।

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(ख) प्रवासी श्रमिकों की समस्या की सूचना प्राप्त होने पर, शांति एवं न्याय समिति संबंधित विभागों से परामर्श कर उनकी समस्या के समाधान का प्रयास करेगी ।

(

ग) ग्राम सभा यह सुनिशिचत करने का प्रयास करेगी कि शासन द्वारा श्रमिकों के कल्याण के लिए प्रारंभ की गई योजनाओं, कानूनी प्रावधान, विधिक सहायता आदि का अधिकतम लाभ श्रमिकों को प्राप्त हो.-

(3) कार्यानुसार मजदूरी निर्धारण.-

(क

) नियत मजदूरी दर को गांव में सार्वजनिक स्थान पर एक बोर्ड पर प्रदर्शित किया जायेगा;

(ख) यदि किसी संस्था अथवा निजी व्यक्ति द्वारा अनुबंधित मजदूरी दर अथवा व्यक्ति के श्रम क्षमता से कम दर पर अनुबंध किया जाता है या न्यूनतम मजूदरी से कम दर पर भुगतान किया जाता है , तो इसकी शिकायत प्राप्त होने पर शांति एवं न्याय समिति कार्रवाई करेगी ।

अध्याय-नौ

गौण वनोपज

25. गौण वनोपज का परंपरागत प्रबंधन.-

(1 ) अनुसूचित वन क्षेत्रों में शासकीय वनों के संवहनीय एवं परंपरागत प्रबंधन हेतु ग्राम सभा द्वारा अपने सदस्यों में से वन संसाधन योजना एवं नियंत्रण समिति का गठन किया जा सकेगाः

परन्तु इसका आशय यह नहीं होगा कि वनभूमि ग्राम सभा/ ग्राम पंचायत में निहित हो गई है ।

(2) उक्त समिति गौण वनोपज के प्रबंधन हेतु एक सूक्ष्म प्रबंध योजना तैयार कर सकेगी एवं ग्राम सभा ऐसी योजना तैयार करने हेतु वन विभाग से परामर्श ले सकेगी ।

(3) ग्राम सभा सूक्ष्म प्रबंध योजना के जरिए गौण वनोपज का समुचित दोहन तथा जैवविविधता व जैविक स्त्रोतों का रक्षण व संवर्धन कर सकेगी।

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

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(4) गौण वनोपज की मात्रा सीमित होने की स्थिति में/ग्राम सभा परंपरा से गौण वनोपज संग्रहण करने वाले ग्रामीणों से भिन्न अन्य लोगों के लिए वनोपज का संग्रहण प्रतिबंधित अथवा चक्रीय व्यवस्था या आर्थिक रूप से कमजोर और भूमिहीन परिवार को संग्रहण करने के लिए अधिकृत कर सकेगी:

परंतु ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया जायेगा जिसका वनाधिकार धारकों के व्यक्तिगत या सामूहिक अधिकार पर विपरीत प्रभाव पड़े।

(5) गौण वनोपज का निपटान से आशय अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी ( वन अधिकारों की मान्यता) नियम, 2012 के नियम 2(1 ) (घ) में वर्णित अनुसार होगा।

26. गौण वनोपज संबंधित अधिकार.-

(1 ) पारंपरिक रूप से लघु वनोपज का संग्रहण , स्वामित्व तथा प्रबंधन, अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 की धारा 3( 1 )(ग) के अनुसार होगा।

(2) ग्राम सभा अपने क्षेत्र के भीतर स्वयं या नियम 25 के अधीन गठित समिति या शासन द्वारा गठित किसी भी एजेंसी या समूह के माध्यम से गौण वनोपजों का संग्रहण एवं विपणन कर सकेगी।

(3) एक या एक से अधिक ग्राम सभा चाहे तो संयुक्त रूप से वन विभाग के परामर्श से वनोपज की खरीदी एवं बिक्री के लिए न्यूनतम मूल्य तय कर सकेगी। ग्राम सभा ऐसे न्यूनतम मूल्य पर क्रय तथा उसके निपटान की व्यवस्था वन संसाधन योजना एवं नियंत्रण समिति के माध्यम से करेगी ।

(4) तेंदूपत्ते का संग्रहण एवं विपणन मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज ( व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित के माध्यम से कराया जाएगा , तथापि ग्राम सभा चाहे तो तेंदूपत्ते का संग्रहण एवं विपणन स्वयं कर सकेगी बशर्ते ग्राम सभा इस बाबत् संबंधित संग्रहण वर्ष के पूर्व वर्ष में 15 दिसम्बर तक इस हेतु संकल्प पारित कर ग्राम पंचायत के माध्यम से वन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों को अवगत करवाये।

27. ग्राम सभा के कर्तव्य. ग्राम सभा निम्न कर्तव्यों का निर्वहन करेगी- मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

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(1) ग्राम सभा के अधिकार क्षेत्र में स्थित वनों के संरक्षण की जिम्मेदारी अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 की धारा 3( 1 ) (झ) तथा धारा 5 के अनुसार ग्राम सभा की होगी।

(2) ग्राम सभा वन संसाधनों के संरक्षण , संवर्धन और प्रबंधन का कार्य उसके द्वारा गठित वन संसाधन योजना एवं नियंत्रण समिति के माध्यम से करेगी। इस हेतु ग्रामसभा द्वारा आवेदन करने पर शासन के समस्त विभाग सहायता करेंगे ।

(3) ग्राम सभा परिवार और सामुदायिक जरूरतों जैसे निस्तार , चराई, जलावन, कृषि उपकरण बनाने के लिए सूखी और मरी हुई लकड़ी, बांस तथा पारंपरिक संस्कार में लगने वाले पदार्थों के आवश्यकतानुसार वन से निकालने के लिए व्यवस्था करेगी।

(4) प्रत्येक ग्राम सभा अथवा ग्राम सभा समूह अपने-अपने क्षेत्रों में अपने सदस्यों के हितों, वनों के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन, पर्यावरण में सुधार और स्थानीय रोजगार बढ़ाने के उ‌द्देश्य से उपयुक्त कार्यक्रम बनाएगी।

अध्याय-दस

बाजारों तथा मेलो पर नियंत्रण

28. बाजार फीस आदि का ठेके पर दिया जाना.-

(1) मध्यप्रदेश पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 80 के अनुसार पंचायत, अनुसूची-3 में विनिर्दिष्ट किसी फीस के संग्रहण का कार्य सार्वजनिक नीलाम व्दारा तथा तदनुसार विहित रीति में ठेके पर दे सकेगी;

(2) बाजारों या मेलों का विनियमन मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 58 के अध्यधीन रहते हुए म०प्र० पंचायत (ग्राम पंचायत क्षेत्र के भीतर बाजारों तथा मेलों का विनियमन) नियम, 1994 के अनुसार विनियमन किया जायेगा।

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अध्याय- ग्यारह

साहूकारी

29. अनुसूचित क्षेत्रों में धन उधार देने पर नियंत्रण.- ( 1 ) अनुसूचित क्षेत्रों में किसी स्थान पर साहूकारी का कारबार मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति साहूकार विनियम , 1972 ( क्रमांक 2 सन् 1972 ) के प्रावधान के अनुसार लायसेंस प्राप्त कर उक्त विनियम के उपबंधो के अध्यधीन किया जा सकेगा।

(2 ) साहूकारी लायसेंस जारीकर्ता अधिकारी लायसेंस की एक प्रति आवश्यक रूप से ग्राम पंचायत को प्रेषित करेगा । ग्राम पंचायत सचिव के द्वारा ग्राम सभा को उपर्युक्त जानकारी से अवगत कराया जाएगा।

(3 ) साहूकार का यह दायित्व होगा कि वह उसके द्वारा दिये/चुकाये गये ऋण का ग्रामवार विवरण उपखण्ड अधिकारी (राजस्व) को त्रैमासिक रूप से प्रस्तुत करे । उपखण्ड अधिकारी ( राजस्व) द्वारा उक्त जानकारी ग्राम पंचायत के माध्यम से ग्राम सभा को संसूचित की जाएगी।

(4) ग्राम सभा साहूकार के विरुद्ध किसी भी व्यक्ति की शिकायत पर विचार करेगी तथा उपयुक्त पाए जाने पर उपखण्ड अधिकारी को यथोचित जांच एवं कार्रवाई हेतु अनुसंशित करेगी।

(5) उपखण्ड अधिकारी यथोचित जांच एवं कार्रवाई पश्चात् ऐसी अनुशंसा की रिपोर्ट 45 दिवस के भीतर ग्राम सभा को सूचित करेगा ।

अध्याय-बारह

सामाजिक क्षेत्रों की संस्थाओं और कार्यकर्ताओं पर नियंत्रण तथा विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं में हितग्राहियों का चिन्हांकन एवं चयन

30. ( 1 ) विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों की योजनाओं तथा संस्थाओं पर नियंत्रण की शक्ति.-

(क) ग्राम सभा, सामाजिक एवं स्थानीय क्षेत्रों में चल रही सभी वार्षिक, सामाजिक अंकेक्षण योजनाओं जैसे कि शैक्षणिक संस्थाएं , छात्रावास, आंगनवाडी इत्यादि का समय - समय पर निरीक्षण, पुनरीक्षण करने हेतु सक्षम होगीः

परन्तु ग्राम सभा स्वास्थ्य से संबंधित सामयिक निरीक्षण तथा वार्षिक सामाजिक अंकेक्षण करने हेतु सक्षम होगी ।

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(ख) ग्राम सभा सामाजिक क्षेत्रों में चल रही समस्त संस्थाओं योजनाओं के निरीक्षण हेतु समय- समय पर एवं तदर्थ समिति बना सकेगी जो कि निरीक्षण के पश्चात् नियत समय पर ग्राम सभा को उसकी रिपोर्टप्रस्तुत करेगी।

(1) ग्राम सभा अधिनियम की धारा 7क की धारा (1 ) में उल्लिख्ति स्थाई समितियों के अतिरिक्त किसी समयबद्ध कार्य के कार्यान्वयन के लिए शासन या कलक्टर से प्राप्त निर्देशों के अनुरूप तदर्थ समिति का गठन कर सकेगी । तदर्थ समिति में उतनी संख्या में सदस्य हो सकेंगे । जितने कि ग्राम सभा अथवा सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं ।

(2) कारबार के संचालन की प्रक्रिया तथा रचना तथा अन्य सहबद्ध विषय ऐसे होंगे , जैसे कि सरकार द्वारा निर्देशित किए जाएं अथवा ग्राम सभा द्वारा विनिश्चिय किए जाएं ।

(3) प्रत्येक तदर्थ समिति, ग्राम सभा के प्रति उत्तरदायी होगी।

(4) कोई पंच ऐसी तदर्थ समिति का सदस्य हो सकेगा , जो ऐसे पंच के निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित हो।

(5) शालाओं, छात्रावासों तथा आश्रमों के निरीक्षण हेतु तदर्थ समिति में पालक- शिक्षक संघ के दो सदस्य आवश्यक होंगे जिनमें से एक महिला सदस्य होना आवश्यक होगा ।

(ग) जिन हितग्राहीमूलक योजनाओं में निर्धारित पात्रता के मापदंड अनुसार हितग्राहियों को चिन्हांकित कर लाभान्वित किया जाना है उन योजनाओं में चिन्हांकित व लाभान्वित हितग्राहियों का विवरण त्रैमासिक रूप से ग्राम सभा में प्रस्तुत किया जाएगा तथा यदि कोई पात्र हितग्राही लाभान्वित/ चिन्हांकित होने से वंचित पाया जाता है तो ग्राम सभा संबंधित को लाभ देने हेतु निर्देशित करेगी।

(घ) यदि किसी योजना में हितग्राही का चयन किया जाना है तो ऐसी दशा में ग्राम सभा इस संबंध में जारी शासकीय निर्देशों में उल्लेखित मापदण्डों के अनुसार वरीयता क्रम में हितग्राही का चयन करने में सक्षम होगी।

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(इ) संबंधित हितग्राही को ग्राम सभा से चयन के पश्चात् ही योजना का लाभ दिया जा सकेगा।

(च) ग्राम पंचायत द्वारा प्रस्तावित कार्य योजना पर ग्राम सभा से अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक होगा।

(छ) ग्राम सभा क्षेत्र में प्रस्तावित योजनाओं के विवरण ग्राम सभा के समक्ष अनुशंसा हेतु प्रस्तुत किए जाएंगे। सक्षम अधिकारी द्वारा स्वीकृत कार्यों तथा त्रैमासिक भौतिक एवं वित्तीय प्रगति का विवरण ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा ।

(2) महिला एवं बाल विकास विभाग से संबंधित योजनाएं.-

(क) आंगनबाड़ी/उप आंगनवाड़ी केन्द्रों में गठित सहयोगिनी मातृ समिति /उप समिति में नामांकित अध्यक्ष , उपाध्यक्ष एवं सदस्यों का चयन पश्चात्अनुमोदन ग्रामसभा से प्राप्त किया जावेगा;

(ख ) ऐसी समिति में कम से कम 50 प्रतिशत सदस्य अनुसूचित जनजाति वर्ग से नामांकित होंगे;

(ग) समिति के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद पर अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला नामांकित होगी;

(घ) ग्राम सभा सहयोगिनी मातृ समितियों के माध्यम से आंगनवाड़ी एवं उप आंगनबाड़ी केन्द्रों में संचालित समस्त योजनाओं का पर्यवेक्षण , निरीक्षण , त्रैमासिक समीक्षा एवं सामाजिक अंकेक्षण करेगी ।

(3) ग्राम सभा यह सुनिश्चित करेगी कि, -

(क) कार्यस्थल पर कार्य की जानकारी स्थानीय भाषा में प्रदर्शित की गई हो;

(ख) कार्य की प्रगति एंव गुणवत्ता बनी हो;

(ग) मजदूरों को उनकी मजदूरी मौखिक रूप से बताई गई है एवं उन्हें सार्वजनिक स्थल पर प्रदान की गई है ।

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 15 नवम्बर 2022

1178(24)

अध्याय-तेरह

31. अधिनियम/नियमों में संशोधन. पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 ( 1996 का 40) की धारा 4 (क) के अनुरूप इन नियमों के प्रकाशन होने के एक वर्ष के भीतर इन नियमों के विभिन्न प्रावधनों में उल्लेख अनुसार शासन के विभिन्न विभाग आवश्यकतानुसार राज्य अधिनियम/नियमों/ आदेशों/ निर्देशो/परिपत्रों में संशोधन करेंगे तथा यदि भारत सरकार के किसी अधिनियम/नियमों में संशोधन की आवश्यकता हो तो इस हेतु संबंधित विभाग से महामहिम राज्यपाल महोदय को सूचित किया जावेगा।

32. नियमों की प्रभावशीलता. इन नियमों के प्रवृत्त होने पर, इन नियमों के प्रवृत्त होने के ठीक पूर्व मध्यप्रदेश राज्य के प्रवृत्त इन नियमों के तत्स्थानी नियम जो इन नियमों से असंगत हों तो, उस स्थिति में यह नियम प्रभावी होंगेंः

परन्तु इस प्रकार किन्ही भी नियमों के अधीन की गई किसी बात या किसी कार्यवाही के बारे में जब तक ऐसी कोई बात या कार्यवाही इन नियमों के किन्हीं उपबंधों की असंगत न हो यह समझा जावेगा कि वह इन नियमों के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई है ।

अध्याय-चौदह

प्रकीर्ण

33. निर्वचन -

यदि इन नियमों से संबंधित किन्हीं उपबंधों के निर्वचन से संबंधित कोई प्रश्न उद्‌भूत होता है तो मामला राज्य सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा और उस पर राज्य सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा ।

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

प्ररूप-एक

(देखिए नियम 3 का उपनियम (3) का खण्ड (ग))

सूचना

मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 (क्रमांक-1 सन् 1994) की धारा 129-ख की उपधारा (2) के साथ पठित मध्यप्रदेश अनुसूचित क्षेत्र की ग्राम सभा (गठन, सम्मिलन की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन) नियम, 1998 के नियम-4 के उपनियम (3) के खण्ड (क) व्दारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए विहित अधिकारी (उपखण्ड अधिकारी राजस्व) नीचे दी गई सारणी के कालम (2) में वर्णित ग्राम पंचायत की सीमा के भीतर कालम (5) में वर्णित (ग्राम/ ग्रामों के समूह/मजरा /टोल/आदि के लिए ) पृथक ग्राम सभा के गठन के आशय की जानकारी एतद्वद्वारा प्रकाशित करता है ।

उन आपत्तियों या सुझावों पर , जो दिनांक ....तक अधोहस्ताक्षरकर्ता को प्राप्त हो , विचार किया जाएगा और उक्त तारीख के अवसान होने के पूर्व प्राप्त आपतियों, दावों या सुझावों पर दिनांक को कार्यालय में सुनवाई की जाएगी।

सारणी

विकास खण्ड का

ग्राम पंचायत का नाम

प्रस्तावित ग्राम सभा

जनसंख्या

अन्य ब्यौरा

पटवारी हल्का क्रमांक

ग्राम सभा

का

अनुक्रमांक

विद्यमान ग्राम सभा में सम्मिलित क्षेत्र

ग्राम सभा में सम्मिलित क्षेत्र (ग्राम, मजरा , टोला,पारा)

(3)

(4) (2)

(1)

स्थानः

जारी करने का दिनांकः

(8) (5)

(6) (7)

विहित अधिकारी

(उपखण्ड अधिकारी राजस्व) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 नवम्बर 2022

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प्ररूप-दो

(देखिए नियम 3 का उपनियम (3) का खण्ड (छ))

अधिसूचना

मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्रामस्वराज अधिनियम 1993 (क्रमांक-1 सन्1994) की धारा 129-ख की उपधारा (2) के सहपठिंत मध्यप्रदेश अनुसूचित क्षेत्र की ग्राम सभा (गठन, सम्मिलन की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन ) नियम, 1998 के नियम-5 के उपनियम ( 1 ) के व्दारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए विहित अधिकारी (उपखण्ड अधिकारी राजस्व) एतद्वद्वारा नीचे दी गई सारणी के कालम (2) में वर्णित ग्राम पंचायत की सीमा के भीतर कालम (5 ) में वर्णित क्षेत्र के लिए ग्राम सभा (सभाओं) का गठन करते हैं , जो आगामी माह की प्रथम तारीख से अस्तित्व में आएगीः-

सारणी

नवगठित ग्राम सभा

जनसंख्या

पंचायत का नाम

खण्ड का नाम

अन्य ब्यौरे

पटवारी हल्का क्रमांक

ग्राम सभा

का

अनुक्रमांक

विद्यमान ग्राम सभा में सम्मिलित क्षेत्र

ग्राम सभा में सम्मिलित क्षेत्र (बाम, मजरा , टोला,पारा)

(8)

(7)

(6)

(5)

(4)

(3)

(2)

(1)

स्थानः

विहित अधिकारी

जारी करने का दिनांकः

(उपखण्ड अधिकारी राजस्व)

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार ,

मलय श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2022 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 15 November 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2022-11-15.589.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2022-11-15.589.Extraordinary.