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मध्यप्रदेश शास
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
( असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 211 ]
भोपाल, बुधवार, दिनांक 12 जुलाई 2023 - आषाढ़ 21 , शक 1945
विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश
भोपाल, दिनांक 12 जुलाई 2023
क्र. 12987- मप्रविस - 15- विधान-2023 .- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक, 2023 ( क्रमांक 9 सन् 2023 ) जो विधान सभा में दिनांक 12 जुलाई, 2023 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह, प्रमुख सचिव.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 जुलाई 2023
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक ९ सन् २०२३
मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक, २०२३
विषय -सूची
खण्ड:
१. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ. २. धारा १० का संशोधन. ३. धारा १६ का संशोधन. ४. धारा १७ का संशोधन. ५. धारा २३ का संशोधन. ६. धारा ३० का संशोधन. ७. धारा ३७ का संशोधन. ८. धारा ३ ९ का संशोधन . ९. धारा ४४ का संशोधन. १०. धारा ५२ का संशोधन. ११. धारा ५४ का संशोधन. १२. धारा ५६ का संशोधन. १३. धारा ६२ का संशोधन. १४. धारा १० ९ के स्थान पर नई धारा का स्थापन. १५. धारा ११० का लोप. १६. धारा ११४ का लोप. १७. धारा ११७ का संशोधन. १८ . धारा ११८ का संशोधन. १९. धारा ११ ९ का संशोधन. २०. धारा १२२ का संशोधन. २१. धारा १३२ का संशोधन. २२. धारा १३८ का संशोधन. २३ . नई धारा १५८ ए का अंतःस्थापन. २४. अनुसूची-तीन का संशोधन.
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मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 जुलाई 2023
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक ९ सन् २०२३
मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक, २०२३
मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान - मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) अधिनियम, २०२३ है .
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(२ ) यथा उपबंधित के सिवाय इस अधिनियम के उपबंध उस तारीख को प्रवृत्त होंगे जो राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करेः
परन्तु यह कि इस अधिनियम के भिन्न- भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न- भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी.
धारा १० का संशोधन.
२. मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा १० में, -
(क) उप- धारा ( २ ) में, खण्ड ( घ ) में, शब्द " माल या " का लोप किया जाए;
(ख) उप- धारा ( २ क) में, खण्ड ( ग ) में, शब्द " माल या " का लोप किया जाए.
३. मूल अधिनियम की धारा १६ में उप- धारा ( २ ) में, -
धारा १६ का संशोधन.
(एक) दूसरे परन्तुक में, शब्द " उस पर के ब्याज के साथ , ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, उसके आऊटपुट कर दायित्व में जोड़ दिया जाएगा " के स्थान पर , शब्द और अंक, " धारा ५० के अधीन देय ब्याज के साथ , उसके द्वारा भुगतान किया जायेगा " स्थापित किया जाए;
(दो) तीसरे परन्तुक में, शब्द " उसके द्वारा " के पश्चात्, शब्द " प्रदायकर्ता को" जोड़े जाए.
४. मूल अधिनियम की धारा १७ में, -
धारा १७ का संशोधन.
(क) उप- धारा ( ३ ) में, स्पष्टीकरण के स्थान पर, निम्नलिखित स्पष्टीकरण स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" स्पष्टीकरण. - इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति " छूट प्राप्त प्रदाय के मूल्य " में अनुसूची-तीन में विनिर्दिष्ट कार्यकलाप या संव्यवहार का मूल्य सम्मिलित नहीं होगा , सिवाय,-
( एक) उक्त अनुसूची के पैरा ५ में विनिर्दिष्ट क्रियाकलाप या संव्यवहार का मूल्य; और
(दो) उक्त अनुसूची के पैरा ८ के खण्ड ( क) के संबंध में विहित क्रियाकलाप या संव्यवहार का मूल्य. ";
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(ख) उप- धारा ( ५ ) में , खण्ड ( च ) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" ( चक) एक कराधेय व्यक्ति द्वारा प्राप्त माल या सेवाएं या दोनों, जो कंपनी अधिनियम, २०१३ (२०१३ का १८ ) की धारा १३५ में निर्दिष्ट कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के अधीन उसके दायित्वों से संबंधित गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता है या उपयोग किए जाने के लिए आशायित हैं ;" .
धारा संशोधन. २३ का ५. मूल अधिनियम की धारा २३ में , उप - धारा ( २ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उप - धारा स्थापित की जाए और १ जुलाई, २०१७ से स्थापित की गई समझी जाए, अर्थात्ः-
" ( २ ) धारा २२ की उप - धारा ( १ ) या धारा २४ में अन्तर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी , सरकार परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा , ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के अध्यधीन रहते हुए, जो उसमें निर्दिष्ट किए जाएं, उन व्यक्तियों की श्रेणी निर्दिष्ट कर सकती हैं जिन्हें इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने से छूट दी जा सकती है. ".
धारा ३० का
६. मूल अधिनियम की धारा ३० में, उप - धारा ( १ ) में, -
संशोधन.
(क) शब्द " रद्दकरण आदेश की तामील की तारीख से तीस दिन के भीतर ऐसे अधिकारी को विहित रीति से " , के स्थान पर, शब्द " ऐसी रीति, ऐसे समय के भीतर और ऐसी शर्तों एवं निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए, जैसी कि विहित की जाएं, स्थापित किए जाएं.
परन्तुक का लोप किया जाए.
(ख)
धारा ३७ का
७. मूल अधिनियम की धारा ३७ में , उप - धारा ( ४ ) के पश्चात्, निम्नलिखित नई उप - धारा जोड़ी जाए, अर्थात्ः-
संशोधन.
" ( ५) एक पंजीकृत व्यक्ति को उप - धारा ( १ ) के अधीन किसी कर अवधि के लिए, उक्त विवरण प्रस्तुत करने की नियत तिथि से तीन वर्ष की कालावधि की समाप्ति के पश्चात् जावक पूर्ति का विवरण प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी जाएगीः
परन्तु यह कि सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर , अधिसूचना द्वारा , ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, एक पंजीकृत व्यक्ति या पंजीकृत व्यक्तियों के एक वर्ग को उप - धारा ( १ ) के अधीन उक्त विवरण प्रस्तुत करने की देय तिथि से तीन वर्ष की उक्त अवधि की समाप्ति के पश्चात् भी एक कर अवधि के लिए जावकपूर्ति का विवरण प्रस्तुत करने की अनुमति दे सकेगी. ".
धारा ३ ९ का
संशोधन.
८. मूल अधिनियम की धारा ३ ९ में, उप - धारा ( १० ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप- धारा जोडी जाए, अर्थात्ः-
" ( ११ ) एक पंजीकृत व्यक्ति को विवरणी प्रस्तुत करने की देय तिथि से तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् उक्त कर अवधि के लिए विवरणी प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी जाएगीः
परन्तु यह कि सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा , ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं , एक पंजीकृत व्यक्ति या पंजीकृत व्यक्तियों के एक वर्ग को विवरण प्रस्तुत करने की उक्त देय तिथि से तीन वर्ष की अवधि समाप्ति के पश्चात् भी एक कर अवधि के लिए उक्त विवरणी प्रस्तुत करने की अनुमति दे सकती है. ".
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धारा संशोधन. ४४ का ९. मूल अधिनियम की धारा ४४ को उसकी उप- धारा ( १ ) के रूप में पुनर्क्रमांकित किया जाए, और इस प्रकार पुनर्क्रमांकित उप- धारा ( १ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप- धारा जोड़ी जाए, अर्थात्ः-
" ( २ ) एक पंजीकृत व्यक्ति को वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने की देय तिथि से तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् उक्त वित्तीय वर्ष के लिए उप - धारा ( १ ) के अधीन वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी जाएगीः
परन्तु यह कि सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा , ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, एक पंजीकृत व्यक्ति या पंजीकृत व्यक्तियों के एक वर्ग को एक वित्तीय वर्ष के लिए उप- धारा ( १ ) के अंतर्गत वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने के लिए, उक्त वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने की देय तिथि से तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् भी उक्त वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने की अनुमति दे सकेगी. ".
धारा ५२ संशोधन. का १०. मूल अधिनियम की धारा ५२ में, उप - धारा ( १४ ) के पश्चात्, निम्मलिखित उप - धारा जोड़ी जाए, अर्थात्ः-
" ( १५ ) प्रचालक को उप - धारा (४ ) के अधीन एक विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तारीख से तीन साल की अवधि समाप्त होने के पश्चात् उक्त विवरणी प्रस्तुत करने की अनुमदि नहीं दी जाएगीः
परन्तु यह कि सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा , ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए, जैसा कि उसमें निर्दिष्ट किया जाए एक प्रचालक या प्रचालकों के एक वर्ग को उक्त विवरण प्रस्तुत करने की देय तिथि से तीन वर्ष की उक्त अवधि की समाप्ति पर भी उप- धारा (४ ) के अधीन एक विवरण प्रस्तुत करने की अनुमति दे सकेगी. " .
धारा ५४ का संशोधन.
११. मूल अधिनियम की धारा ५४ में, उप - धारा ( ६ ) में शब्द " जिसके अंतर्गत अंतिमतः स्वीकृत इनपुट कर प्रत्यय की रकम नहीं है, " का लोप किया जाए.
धारा ५६ का संशोधन.
१२. मूल अधिनियम की धारा ५६ में, शब्द " उक्त धारा के अधीन आवेदन प्राप्ति की तारीख से साठ दिन के अवसान के पश्चात् की तारीख से ऐसे कर का प्रतिदाय करने की तारीख तक ", के स्थान पर शब्द " इस तरह के आवेदन की प्राप्ति की तारीख से, ऐसे कर का प्रतिदाय करने की तारीख तक साठ दिनों से अधिक विलंब की अवधि के लिये , ऐसी रीति में तथा ऐसी शर्तों एवं निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए, जैसा विहित किया जाये, के अनुसार गणना की जाकर " स्थापित किए जाएं.
१३. मूल अधिनियम की धारा ६२ में, उप - धारा ( २ ) में, -
धारा ६२ का संशोधन.
(क) शब्द " तीस दिन " के स्थान पर, शब्द " साठ दिन " स्थापित किए जाएं.
(ख) पूर्ण विराम के स्थान पर, कॉलन स्थापित किया जाए और उसके पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" परन्तु यह कि जहां पंजीकृत व्यक्ति उप - धारा ( १ ) के अधीन निर्धारण आदेश की तामीली से साठ दिनों के भीतर एक विधिमान्य विवरणी प्रस्तुत करने में विफल रहता है , वह साठ दिनों से अधिक के विलंब के प्रत्येक दिन के लिए एक सौ रुपये अतिरिक्त विलंब शुल्क के भुगतान पर उक्त निर्धारण आदेश की तामीली के साठ दिनों की एक और अवधि के भीतर इसे प्रस्तुत कर सकता है . यदि वह ऐसी विस्तारित अवधि के भीतर विधिमान्य विवरणी प्रस्तुत करता है , तो उक्त निर्धारण आदेश का प्रतिसंहरण किया गया समझा जाएगा , किन्तु धारा ५० की उप- धारा ( १ ) के अधीन व्याज का भुगतान या धारा ४७ के अधीन विलंब शुल्क का भुगतान करने के दायित्वाधीन रहेगा.".
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१४. मूल अधिनियम की धारा १० ९ के स्थान पर निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- धारा १० ९ के स्थान पर नई धारा का स्थापन.
अपील अधिकरण और उसकी न्यायपीठों का गठन.
" १० ९. इस अध्याय के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ के अधीन गठित माल और सेवा कर अधिकरण इस अधिनियम के अधीन अपीलीय प्राधिकरण या पुनरीक्षण प्राधिकारी द्वारा पारित आदेशों के खिलाफ अपील की सुनवाई के लिए अपीलीय अधिकरण होगा. " .
१५. मूल अधिनियम की धारा ११० का लोप किया जाए.
धारा ११० का लोप.
१६. मूल अधिनियम की धारा ११४ का लोप किया जाए.
धारा ११४ का लोप.
१७. मूल अधिनियम की धारा ११७ में,-
धारा ११७ का संशोधन.
(क) उप - धारा ( १ ) में, शब्द " राज्य पीठ या अपील अधिकरण की क्षेत्रीय पीठों " के स्थान पर, शब्द " राज्य पीठ " स्थापित किए जाएं;
( ख) उप- धारा ( ५ ) में, खण्ड ( क) और ( ख ) में, शब्द " राज्य पीठ या क्षेत्रीय पीठ " के स्थान पर, शब्द " राज्य पीठ " स्थापित किए जाएं.
धारा ११८ का संशोधन.
१८. मूल अधिनियम की धारा ११८ में, उप - धारा ( १ ) में, खण्ड ( क ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" (क) अपील अधिकरण की प्रमुख पीठ द्वारा पारित किसी आदेश के विरुद्ध; या".
१९. मूल अधिनियम की धारा ११ ९ में, -
धारा ११ ९ का संशोधन.
(क) शब्द " राष्ट्रीय या प्रांतीय पीठों " के स्थान पर, शब्द " प्रमुख पीठ " स्थापित किए जाएं;
शब्द " राज्य पीठों या क्षेत्रीय पीठों " के स्थान पर, शब्द " राज्य पीठ " स्थापित किए जाएं.
(ख)
धारा १२२ का संशोधन.
२०. मूल अधिनियम की धारा १२२ में, उप - धारा ( १ क ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप- धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः-
" ( १ख ) कोई भी इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य प्रचालक जो, -
(क) ऐसी पूर्ति करने के लिए इस अधिनियम के अधीन जारी अधिसूचना द्वारा रजिस्ट्रीकरण से छूट प्राप्त व्यक्ति के अलावा किसी अपंजीकृत व्यक्ति द्वारा इसके माध्यम से माल या सेवाओं या दोनों की पूर्ति की अनुमति देता है;
(ख) किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की अंतर्राज्यिक पूर्ति की अनुमति देता है जो ऐसी अंतर्राज्यिक पूर्ति करने के लिए पात्र नहीं हैं; या
(ग) इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने से छूट प्राप्त व्यक्ति द्वारा इसके माध्यम से प्रभावित माल की किसी भी जावकपूर्ति का, धारा ५२ की उप - धारा ( ४ ) के अधीन प्रस्तुत किए जाने वाले विवरण में सही विवरण प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो वह 422( 5)
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दस हजार रुपये का जुर्माना , या यदि ऐसी आपूर्ति धारा १० के अधीन कर का भुगतान करने वाले व्यक्ति के अलावा किसी अन्य पंजीकृत व्यक्ति द्वारा की गई हों, में सम्मिलित कर की राशि के बराबर राशि, दोनों में जो भी अधिक हो का भुगतान करने के लिए दायी होगा.".
२१. मूल अधिनियम की धारा १३२ में , उप - धारा ( १ ) में, -
धारा १३२ का संशोधन.
(क) खण्ड ( छ ) , ( ञ ) और ( ट) का लोप किया जाए;
(ख) उपखण्ड (ठ ) में, ( एक) शब्द, कोष्ठक और अक्षर " खण्ड ( क ) से ( ट ) ", के स्थान पर, शब्द, कोष्ठक और अक्षर " खण्ड ( क ) से ( च ) और खण्ड ( ज ) और ( झ ) " स्थापित किए जाएं;
(दो) उपखण्ड ( तीन ) में, शब्द " जहां " के पश्चात्, शब्द, कोष्ठक और अक्षर " खण्ड ( ख ) में निर्दिष्ट अपराध में " स्थापित किए जाएं ;
(तीन) उपखण्ड ( चार ) में , शब्द, कोष्ठक और अक्षर " या खण्ड ( छ ) या खण्ड ( ज ) " का लोप किया जाए.
२२. मूल अधिनियम की धारा १३८ में, -
धारा १३८ का संशोधन.
उप - धारा ( १ ) में, पहले परंतुक में, -
(क)
खण्ड (क) के स्थान पर, निम्मलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
(एक)
" ( क) एक व्यक्ति जिसे धारा १३२ की उप- धारा ( १ ) के खण्ड (क ) से ( च) , ( ज) , ( झ ) और ( ठ) में विनिर्दिष्ट किसी अपराध के संबंध में एक बार प्रशमित होने के लिए अनुज्ञात किया गया था; ";
(दो) खण्ड (ख ) का लोप किया जाए.
( तीन ) खण्ड ( ग ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" ( ग ) व्यक्ति जो धारा १३२ की उप - धारा ( १ ) के खण्ड ( ख ) के अधीन अपराध कारित करने का अभियुक्त है;
(चार) खण्ड (ङ) का लोप किया जाए;
(ख) उप - धारा ( २ ) में, शब्द " दस हजार रुपये या अंतर्वलित कर के पचास प्रतिशत, इनमें से जो भी अधिक हो, से कम नहीं होने और अधिकतम रकम तीस हजार रुपये या कर के एक सौ पचास प्रतिशत , इनमें से जो भी अधिक हो, से कम नहीं होने ", के स्थान पर, " शब्द अंतर्वलित कर का पच्चीस प्रतिशत और अधिकतम राशि अंतर्वलित कर के एक सौ प्रतिशत से अधिक नहीं होने " स्थापित किए जाएं.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 जुलाई 2023
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२३. मूल अधिनियम की धारा १५८ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः- नई धारा १५८ए का अंतःस्थापन.
कराधेय व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत जानकारी का सहमति आधारित साझा करना.
" १५८ए ( १ ) धारा १३३, १५२ और १५८ में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, परिषद् की सिफारिशों और उप- धारा ( २ ) के उपबंधों के अधीन एक पंजीकृत व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत निम्नलिखित विवरण सामान्य पोर्टल द्वारा ऐसी अन्य प्रणालियों के साथ, जो सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए, ऐसी रीति में और ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, जो विहित की जाएं, साझा किया जा सकता है, अर्थात्:-
( क) धारा २५ के अधीन पंजीकरण के लिए आवेदन में या धारा ३ ९ या धारा ४४ के अधीन दाखिल विवरणी में प्रस्तुत विवरण;
(ख) बीजक तैयार करने के लिए सामान्य पोर्टल पर अपलोड किए गए विवरण , धारा ३७ के अधीन प्रस्तुत जावकपूर्ति का विवरण और धारा ६८ के अधीन दस्तावेजों के निर्माण के लिए सामान्य पोर्टल पर अपलोड किए गए विवरण;
ऐसे अन्य विवरण जो विहित किये जाएं. (ग)
(२) उप- धारा ( १ ) के अधीन विवरण साझा करने के प्रयोजनों के लिए, सहमति प्राप्त की जाएगी, -
(क) उप - धारा ( १ ) के खण्ड ( क ) , ( ख ) और ( ग ) के अधीन प्रस्तुत विवरण के संबंध में पूर्तिकार की; और
(ख) उप - धारा ( १ ) के खण्ड ( ख ) के अधीन प्रस्तुत विवरण और उप - धारा ( १ ) के खण्ड (ग ) के अधीन जहां इस तरह के विवरण में प्राप्तकर्ता की पहचान की जानकारी शामिल है के संबंध में, प्राप्तकर्ता की-
ऐसे प्रपत्र और रीति में सहमति प्राप्त की जाएगी जैसी कि विहित की जाए.
(३) तत्समय प्रवृत किसी विधि में अन्तर्विष्ट किसी अन्य बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन साझा की गई जानकारी के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली किसी भी देयता के संबंध में सरकार या सामान्य पोर्टल के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जायेगी और प्रासंगिक पूर्ति पर या संबंधित विवरणी के अनुसार कर का भुगतान करने की देयता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. ".
अनुसूची-तीन में संशोधन.
२४. मूल अधिनियम की अनुसूची- तीन में , पैराग्राफ ७ और ८ और उसके स्पष्टीकरण २ ( २०१ ९ के अधिनियम २ की धारा ३८ द्वारा जोड़े गए के अनुसार ) को जुलाई, २०१७ के पहले दिन से वहां जोड़ा गया माना जाएगा.
(२ ) एकत्र किए गए सभी करों का, जो इस तरह एकत्र नहीं किया गया होता , यदि उप- धारा ( १ ) सभी भौतिक समयों पर लागू होती , कोई रिफंड नहीं किया जाएगा.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 जुलाई 2023
उद्देश्यों और कारणों का कथन
करदाताओं को सुविधा प्रदान करने हेतु मध्यप्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम, २०१७ ( क्रमांक १ ९ सन् २०१७ ) इनपुट टैक्स क्रेडिट, पंजीयन, पंजीयन का प्रतिसंहरण , जीएसटीआर १ फाइलिंग , जीएसटीआर ३ बी फाइलिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेना , डीसीएस वापसी , विलंब से वापसी पर ब्याज , फाइन न करने वालों का निर्धारण , शास्ति अभियोजन, अभियोजन के विरूद्ध प्रशमन से संबंधित उपबंधों तथा अनुसूची-३ को संशोधित किए जाने की अत्यावश्यकता है.
२. मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ के संशोधन के उद्देश्य निम्नानुसार हैं, अर्थात्:-
(एक) इलेक्ट्रानिक वाणिज्य प्रचालक के माध्यम से माल प्रदाय करने पर भी कंपोजिशन की सुविधा प्रदान करना.
(दो) आईटीसी से संबंधित उपबंधों को संशोधित करना.
(तीन) सीएसआर से संबंधित गतिविधियों पर आईटीसी प्रतिबंधित करना.
(चार) पंजीयन तथा प्रतिसंहरण से संबंधित उपबंधों को संशोधित करना.
( पाँच ) उक्त विवरणी प्रस्तुत करने की नियम तारीख से तीन वर्ष की कालावधि की समाप्ति के पश्चात् जीएसटीआर १ , जीएसटीआर ३ बी, जीएसटीआर ८ तथा जीएसटीआर ९ की फाइलिंग को प्रतिबंधित करना.
(छह ) वापसी / दाय से संबंधित उपबंधों को संशोधित करना.
(सात ) विलंब वापसी पर ब्याज की गणना से करदाताओं के कारण होने वाली विलंब अवधि को हटाना.
(आठ) फाइलन करने वालों का निर्धारण के ६० दिवस के भीतर और अतिरिक्त विलंब शुल्क के साथ १२० दिवस के भीतर यदि जीएसटीआर ३ बी फाइल किया जाता है तो आदेश को वापस लेकर करदाता को सुविधा देना.
(नौ) राष्ट्रीय अपील अधिकरण से संबंधित उपबंधों को संशोधित करना.
(दस) इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य प्रचालन पर शास्ति के लिए उप- खण्ड अंतःस्थापित कर, शास्ति से संबंधित उपबंधों को संशोधित करना.
(ग्यारह ) अभियोजन से संबंधित उपबंधों को अपराध मुक्त करना.
(बारह ) अभियोजन के विरूद्ध प्रशमन ( कम्पोजीशन ) की राशि को कम कर करदाताओं को सुविधा देना.
(तेरह ) अन्य व्यवस्थाओं के साथ जानकारी साझा करने के लिए धारा १५८ को अंतःस्थापित करना.
(चौदह ) सूची ३ के पैरा ७ और पैरा ८ को भूतलक्षी प्रभाव देना.
३. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
जगदीश देवड़ा भोपाल :
भारसाधक सदस्य .
तारीख ९ जुलाई , २०२३ .
" संविधान के अनुच्छेद २०७ के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित.".
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 जुलाई 2023
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प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन
प्रस्तावित विधेयक के जिन खण्डों में प्रत्यायोजन संबंधी स्थापनाएं हैं, उनका विवरण निम्नानुसार है :-
खण्ड क्रमांक १ अधिनियम के विभिन्न उपबंधों को विभिन्न तारीखों में अधिसूचित किए जाने;
खण्ड क्रमांक ४ ( क ) -अनुसूची- तीन के पैरा ८ के खण्ड ( क) के संबंध में आने वाली गतिविधियों तथा संव्यवहारों का निर्धारण किये जाने;
खण्ड क्रमांक ५ धारा २३ के अंतर्गत अधिसूचना के माध्यम से कतिपय करदाताओं को पंजीयन की अनिर्वायता से छूट प्रदान किये जाने;
खण्ड क्रमांक ६ - पंजीयन निरस्तीकरण के पश्चात् रिवोकेशन के आवेदन की प्रक्रिया तथा समय - सीमा विहित किये जाने;
खण्ड क्रमांक - ७ किसी कर अवधि के लिये जीएसटीआर -१ प्रस्तुत करने की देय तिथि के ३ वर्ष की समाप्ति के पश्चात् उक्त विवरणियां प्रस्तुत किये जाने;
खण्ड क्रमांक ८- किसी कर अवधि के लिये जीएसटीआर -३ बी प्रस्तुत करने की देय तिथि से ३ वर्ष की समाप्ति के पश्चात् उक्त विवरणियां प्रस्तुत किये जाने;
खण्ड क्रमांक ९- किसी कर अवधि के लिये जीएसटीआर - ९ प्रस्तुत करने की देय तिथि के ३ वर्ष की समाप्ति के पश्चात् उक्त विवरणियां प्रस्तुत किये जाने;
खण्ड क्रमांक १०- किसी कर अवधि के लिये जीएसटीआर-८ प्रस्तुत करने की देय तिथि के ३ वर्ष की समाप्ति के पश्चात् उक्त विवरणियां प्रस्तुत किये जाने;
खण्ड क्रमांक १२ - करदाता द्वारा किये गये विलंब के कारण वापसी में हुए विलंब के समय को ब्याज की गणना में से हटाये जाने संबंधी प्रक्रिया तथा शर्तों का निर्धारण किये जाने; तथा
खण्ड क्रमांक २३ - पंजीकृत व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत विवरणों तथा अन्य जानकारियों को साझा करने के लिये प्रणालियों को अधिसूचित किये जाने , करदाता से संबंधित अन्य जानकारी का निर्धारण , जानकारी की शैयरिंग हेतु करदाता से सहमति लिये जाने के लिए प्रारूप तथा प्रक्रिया का निर्धारण किये जाने के संबंध में नियम बनाये जायेंगे , जो सामान्य स्वरूप के होंगे .
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव,
मध्यप्रदेश विधान सभा.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2023 .