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मध्य प्रदेश शासन
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 42]
भोपाल , मंगलवार, दिनांक 13 फरवरी 2024- माघ 24, शक 1945
विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश
भोपाल , दिनांक 13 फरवरी 2024
क्र. 2567- मप्रविस - 16- विधान-2024.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 64 के उपबंधों के पालन में, प्रान्तीय लघुवाद न्यायालय ( निरसन ) विधेयक 2024 ( क्रमांक 2 सन् 2024 ) जो विधान सभा में दिनांक 13 फरवरी 2024 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह, प्रमुख सचिव.
83 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 फरवरी 2024
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मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक २ सन् २०२४
प्रान्तीय लघुवाद न्यायालय ( निरसन ) विधेयक , २०२४
प्रान्तीय लघुवाद न्यायालय अधिनियम , १८८७ का निरसन करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के पचहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
१. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम प्रान्तीय लघुवाद न्यायालय ( निरसन ) अधिनियम, २०२४ है.
संक्षिप्त नाम.
२. ( १ ) प्रान्तीय लघुवाद न्यायालय अधिनियम, १८८७ ( १८८७ का ९ ) एतद्वारा निरसित किया जाता है.
निरसन व्यावृत्ति. तथा
( २ ) इस अधिनियम द्वारा किसी अधिनियमिति के निरसन से, किसी अन्य अधिनियमिति पर, जिसमें निरसित अधिनियमिति लागू की गई है, सम्मिलित अथवा निर्दिष्ट की गई है, प्रभाव नहीं पड़ेगा;
और यह अधिनियम, पूर्व में की गई या भुगती गई किसी बात की विधिमान्यता, अविधिमान्यता , प्रभाव या परिणाम या पूर्व में ही अर्जित, प्रोद्भूत या उपगत किसी अधिकार, हक, बाध्यता या दायित्व या उसके संबंध में किसी उपचार या कार्यवाही या किसी ऋण , शास्ति, बाध्यता, दायित्व , दावे या मांग या उससे किसी निर्मुक्ति या उन्मोचन या पूर्व में ही अनुदत्त किसी क्षतिपूर्ति या भूतकाल में किए गए किसी कार्य या बात के सबूत पर, प्रभाव नहीं डालेगा;
और यह अधिनियम विधि के किसी सिद्धांत या नियम या स्थापित अधिकारिता, अभिवचन के रूप में या अनुक्रम पर, पद्धति या प्रक्रिया या विद्यमान प्रथा , रूढ़ि , विशेषाधिकार, निर्बन्धन , छूट, पद या नियुक्ति पर इस बात के होते हुए भी प्रभाव नहीं डालेगा कि वह क्रमशः किसी ऐसी अधिनियमिति द्वारा , जो कि एतद्वारा , निरसित की गई है, उसमें या उससे किसी रीति में अभिपुष्ट किया गया है या मान्यताप्राप्त है या व्युत्पन्न है ;
और इस अधिनियम द्वारा किसी अधिनियमिति के निरसन से किसी अधिकारिता, पद, रूढ़ि, दायित्व, अधिकार, हक, विशेषाधिकार, निर्बन्धन, छूट, प्रथा, पद्धति, प्रक्रिया या अन्य विषय या बात का, जो अब विद्यमान या प्रवृत्त नहीं है, पुनः प्रवर्तन या प्रत्यावर्तन नहीं होगा.
उद्देश्यों और कारणों का कथन
राज्य सरकार कानूनी पुस्तक में की अनुपयोगी और प्रभावहीन विधियों ( मध्यप्रदेश अधिनियमों ) के निरसन के लिए प्रतिबद्ध है , जो कि अप्रचलित हैं , अनावश्यक हैं या महत्वहीन हो चुकी हैं. मध्यप्रदेश शासन ने प्रान्तीय लघुवाद न्यायालय अधिनियम, १८८७ (१८८७ का ९ ) को चिन्हांकित किया है , जिसे मध्यप्रदेश विधान सभा द्वारा निरसित किया जाना है, जिसके लिए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की सहमति प्राप्त की जा चुकी है.
२. राज्य सरकार द्वारा की गई पहल के ही एक भाग के रूप में, राज्य विधान सभा द्वारा अनुपयोगी और प्रभावहीन विधि प्रान्तीय लघुवाद न्यायालय अधिनियम , १८८७ को निरसित किए जाने का राज्य सरकार का प्रस्ताव है. विधेयक में एक समुचित व्यावृत्ति खण्ड सम्मिलित किया गया है . अधिनियमित हो जाने पर यह अनुपयोगी एवं प्रभावहीन विधियों को कम करेगा और उन लोगों के लिए स्पष्टता लाएगा जिनकी प्रसुविधा के लिए विधियां अधिनियमित की गई हैं.
३. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
गौतम टेटवाल भोपालः
भारसाधक सदस्य.
तारीख ७ फरवरी, २०२४.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2024.