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मध्यप्रदेश शासन
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 43]
भोपाल , मंगलवार, दिनांक 13 फरवरी 2024- माघ 24 , शक 1945
विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश
भोपाल , दिनांक 13 फरवरी 2024
क्र. 2571 - मप्रविस- 16- विधान-2024.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय ( संशोधन ) विधेयक 2024 ( क्रमांक 8 सन् 2024 ) जो विधान सभा में दिनांक 13 फरवरी 2024 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह, प्रमुख सचिव.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 फरवरी 2024
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक ८ सन् २०२४
मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय ( संशोधन ) विधेयक, २०२४
मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम , १ ९ ७३ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के पचहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय ( संशोधन ) अधिनियम, २०२४ है.
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
(२ ) यह मध्यप्रदेश राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा.
मूल अधिनियम में सर्वत्र कतिपय शब्दों का स्थापन .
२. मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, १ ९ ७३ ( क्रमांक २२ सन् १ ९७३ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) में सर्वत्र, शब्द " कुलापति " या " कुलपति " जहां कहीं भी वे आए हों, के स्थान पर शब्द " कुलगुरू " स्थापित किए जाएं.
प्रथम अनुसूची का संशोधन.
३. मूल अधिनियम की प्रथम अनुसूची में , अनुक्रमांक ८ के पश्चात्, निम्नलिखित अनुक्रमांक तथा उससे संबंधित प्रविष्टियां जोड़ी जाएं, अर्थात् :-
" ९ . पंडित एस. एन . शुक्ला विश्वविद्यालय अधिनियम, २०१६ ( क्रमांक २८ सन् २०१६ ) .".
४. मूल अधिनियम की द्वितीय अनुसूची में, - द्वितीय अनुसूची का संशोधन.
भाग एक में,-
(१ )
(एक) अनुक्रमांक ५ तथा उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित अनुक्रमांक तथा उससे संबंधित प्रविष्टियां स्थापित की जाएं, अर्थात्ः-
विश्वविद्यालय का नाम
मुख्यालय अनुक्रमांक
(३ )
(२)
(१)
रीवा " ५. अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय , रीवा क्षेत्रीय अधिकारिता ( राजस्व जिलों की सीमाओं के भीतर समाविष्ट क्षेत्र )
(४)
रीवा, सतना , सीधी, सिंगरौली, मैहर तथा मऊगंज.";
(दो ) अनुक्रमांक ६ के पश्चात् , निम्नलिखित अनुक्रमांक तथा उससे संबंधित प्रविष्टियां जोड़ी जाएं, अर्थात्ः-
विश्वविद्यालय का नाम
मुख्यालय अनुक्रमांक
(३)
(२)
(१ )
"७.
शहडोल पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय , शहडोल क्षेत्रीय अधिकारिता ( राजस्व जिलों की सीमाओं के भीतर समाविष्ट क्षेत्र)
(४)
शहडोल, उमरिया और अनूपपुर.".
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मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 13 फरवरी 2024
भाग दो में, -
(२)
(एक) अनुक्रमांक १ तथा उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित अनुक्रमांक तथा उससे संबंधित प्रविष्टियां स्थापित की जाएं, अर्थात्ः-
विश्वविद्यालय का नाम
मुख्यालय अनुक्रमांक
(३) (१)
(२)
"१.
छतरपुर महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय, छतरपुर.
क्षेत्रीय अधिकारिता ( राजस्व जिलों की सीमाओं के भीतर समाविष्ट क्षेत्र )
(४)
छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पन्ना. " ;
(दो) अनुक्रमांक २ के पश्चात्, निम्नलिखित अनुक्रमांक तथा उससे संबंधित प्रविष्टियां जोड़ी जाएं, अर्थात्ः-
विश्वविद्यालय का नाम
मुख्यालय अनुक्रमांक
(२)
(३) (१ )
सागर "३. रानी अवन्तीबाई लोधी विश्वविद्यालय , सागर क्षेत्रीय अधिकारिता ( राजस्व जिलों की सीमाओं के भीतर समाविष्ट क्षेत्र )
(४)
सागर और दमोह .".
उद्देश्यों और कारणों का कथन
मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, १ ९ ७३ ( जो इसमें इसके पश्चात् अधिनियम, १ ९७३ के नाम से निर्दिष्ट है ) के अधीन ८ संबद्ध विश्वविद्यालय तथा ८ अन्य एकात्मक लोक विश्वविद्यालय कार्यशील हैं. अधिनियम १ ९ ७३ के प्रस्तावित संशोधन के उद्देश्य और कारण निम्नानुसार हैं :-
( १ ) शहडोल संभाग एक वन क्षेत्र है. यहां के महाविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थी प्रायः ग्रामीण, पहाड़ी अथवा जंगली इलाकों से आते हैं. इस संभाग के कुछ इलाकों से अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय , रीवा की दूरी ३०० किलोमीटर तक की है, जिसके कारण विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय पहुंचने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, विश्वविद्यालय की आय के स्रोत को बढ़ाना आवश्यक है . यदि शहडोल संभाग के महाविद्यालयों को पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय , शहडोल से सम्बद्ध किया जाता है तो विश्वविद्यालय की आय में वृद्धि होगी. अतः पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय, शहडोल के वर्तमान अधिनियम को निरसित करते हुए इस विश्वविद्यालय को अधिनियम, १ ९ ७३ के अंतर्गत लाया गया है और शहडोल संभाग के जिलों- अनूपपुर, उमरिया , शहडोल को इसके क्षेत्राधिकार में सम्मिलित किया गया है.
(२ ) सागर में अवस्थित राज्य के विश्वविद्यालय डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय , सागर को वर्ष २०० ९ में केन्द्रीय विश्वविद्यालय के रूप में परिवर्तित कर दिया गया. केन्द्रीय विश्वविद्यालय में प्रविष्ट विद्यार्थियों की संख्या सीमित कर दी गई थी, जिसके फलस्वरूप संभागीय मुख्यालयों पर अवस्थित दो शासकीय महाद्यिालयों में प्रविष्ट विद्यार्थियों की संख्या बीस हजार से अधिक हो गई है तथा निर्धन वर्ग के विद्यार्थी को उच्च एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है. सागर संभाग अंतर्गत कुल ०६ जिले यथा सागर, छतपुर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़ एवं निवाड़ी अवस्थित हैं. वर्तमान में उक्त जिलों में अवस्थित समस्त शासकीय तथा अशासकीय महाविद्यालय महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय , छतरपुर से संबद्ध हैं. महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, छतरपुर की सागर से दूरी लगभग १६५ कि.मी. है, इस कारण से विद्यार्थी एवं कर्मचारिवृंद को विश्वविद्यालय से संबंधित परीक्षाओं , शैक्षणिक एवं अन्य प्रशासनिक कार्यों में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. अतः बुन्देलखण्ड क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने तथा विद्यार्थियों को परीक्षाओं, शैक्षणेत्तर गतिविधियों एवं अन्य विश्वविद्यालय संबंधी कार्यों में सुविधा प्रदान करने के लिए सागर में " रानी अवन्तीबाई लोधी विश्वविद्यालय , सागर " स्थापित किया जाना प्रस्तावित है.
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( ३ ) माननीय राज्यपाल की अध्यक्षता में आयोजित विश्वविद्यालय समन्वय समिति की १०० वीं बैठक में " कुलपति " के पदनाम को परिवर्तित कर " कुलगुरू " किए जाने की अनुशंसा की गई है. इसी अनुक्रम में अधिनियम, १ ९७३ के अंग्रेजी संस्करण में शब्द " कुलपति " के स्थान पर, शब्द " वाइस चांसलर " और अधिनियम, १ ९ ७३ के हिन्दी संस्करण में शब्द " कुलपति " के स्थान पर " कुलगुरू " स्थापित किया जाना है.
२. अतएव , अधिनियम , १ ९ ७३ के अधीन पंडित एस. एन. शुक्ला विश्वविद्यालय अधिनियम , २०१६ को निरसित करने तथा पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय , शहडोल को लाने , सागर में एक नवीन विश्वविद्यालय स्थापित करने तथा उपरोक्तानुसार अधिनियम, १ ९७३ के अंग्रेजी तथा हिन्दी संस्करण में " कुलपति " के पदनाम में परिवर्तन करने हेतु यथोचित संशोधन प्रस्तावित हैं.
३. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
इन्दर सिंह परमार भोपाल :
भारसाधक सदस्य.
तारीख : ९ फरवरी , २०२४.
" संविधान के अनुच्छेद २०७ के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित. ".
ए. पी. सिंह
प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
वित्तीय ज्ञापन
प्रस्तावित मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय ( संशोधन ) विधेयक -२०२४ के द्वारा स्थापित की जाने वाले रानी अवन्तीबाई लोधी विश्वविद्यालय, सागर के लिए पदों के सृजन एवं अन्य वित्तीय स्वीकृति संबंधी कार्यवाही वित्त विभाग की सहमति से पृथक से की जाएगी . इस हेतु अनुमानित आवर्ती व्ययभार राशि रुपये २०/ - करोड़ प्रतिवर्ष एवं अनावर्ती व्ययभार राशि रुपये १५० /- करोड़ संभावित है.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2024 .