ध्यप्रदेश शास
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 350]
भोपाल , मंगलवार, दिनांक 17 दिसम्बर 2024-अग्रहायण 26, शक 1946
विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश
भोपाल, दिनांक 17 दिसम्बर 2024
क्र. 19300- मप्रविस-16- विधान-2024.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश जन विश्वास (उपबंधों में संशोधन) विधेयक, 2024 (क्रमांक 25 सन् 2024) जो विधान सभा में दिनांक 17 दिसम्बर 2024 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए . पी . सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा .
699 700
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक २५ सन् २०२४
मध्यप्रदेश जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, २०२४
मध्यप्रदेश में ईज ऑफ लिविंग और डूइंग बिजनेस के लिए विश्वास आधारित शासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अपराधों के अपराधमुक्तकरण और तर्कसंगतिकरण के लिए कतिपय अधिनियमितियों को संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के पचहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम तथा १. (१) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, २०२४ है.
प्रारंभ.
(२) यह ऐसी तारीख से प्रवृत्त होगा जिसे मध्यप्रदेश सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे और अनुसूची में उल्लिखित विभिन्न अधिनियमों से संबंधित संशोधनों के लिए अलग-अलग तारीखें नियत की जा सकेंगी.
२. अनुसूची के कॉलम ( ४) में उल्लिखित उपबंधों को, कॉलम ( ५ ) में वर्णित सीमा तक और वर्णित रीति में, एतद्वारा संशोधित किया जाता है,
कतिपय अधिनियमितियों का संशोधन.
व्यावृत्ति.
३. इस अधिनियम द्वारा किसी अधिनियमिति के निरसन से, किसी अन्य अधिनियमिति पर, जिसमें निरसित अधिनियमिति लागू की गई है , सम्मिलित अथवा निर्दिष्ट की गई है, प्रभाव नहीं पड़ेगा;
और यह अधिनियम, पूर्व में की गई या भुगती गई किसी बात की विधिमान्यता , अविधिमान्यता, प्रभाव या परिणाम या पूर्व में ही अर्जित, प्रोद्भूत या उपगत किसी अधिकार , हक, बाध्यता या दायित्व या उसके संबंध में किसी उपचार या कार्यवाही या किसी ऋण , शास्ति, बाध्यता, दायित्व, दावे या मांग या उससे किसी निर्मुक्ति या उन्मोचन या पूर्व में ही अनुदत्त किसी क्षतिपूर्ति या भूतकाल में किए गए किसी कार्य या बात के सबूत पर , प्रभाव नहीं डालेगा; और यह अधिनियम विधि के किसी सिद्धांत या नियम या स्थापित अधिकारिता, अभिवचन के रूप में या अनुक्रम पर , पद्धति या प्रक्रिया या विद्यमान प्रथा, रूढ़ि , विशेषाधिकार, निर्बन्धन, छूट, पद या नियुक्ति पर इस बात के होते हुए भी प्रभाव नहीं डालेगा कि वह क्रमशः किसी ऐसी अधिनियमिति द्वारा , जो कि एतदद्वारा , निरसित की गई है, उसमें या उससे किसी रीति में अभिपुष्ट किया गया है या मान्यताप्राप्त है या व्युत्पन्न है;
और इस अधिनियम द्वारा किसी अधिनियमिति के निरसन से किसी अधिकारिता , पद, रूढ़ि, दायित्व, अधिकार, हक, विशेषाधिकार , निर्बन्धन, छूट, प्रथा, पद्धति, प्रक्रिया या अन्य विषय या बात का, जो अब विद्यमान या प्रवृत्त नहीं है, पुनः प्रवर्तन या प्रत्यावर्तन नहीं होगा.
अनुसूची (धारा २ देखिए)
क्रमांक वर्ष क्रमांक संक्षिप्त नाम
संशोधन
(9)
(५)
(२) (३)
(४)
१.
१७
२०१२
मध्यप्रदेश विद्युत् शुल्क अधिनियम, २०१२
धारा ११ में , शब्द "तो वह जुर्माने से, जो पांच हजार रूपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा " , के स्थान पर, शब्द "तो उस पर पांच हजार रूपए की शास्ति अधिरोपित की जाएगी" , स्थापित किए जाएं.
२.
२००३
(१) अध्याय सात में, धारा ३६ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएं, अर्थात्:-
मध्यप्रदेश असंगठित कर्मकार कल्याण अधिनियम , २००३
" ३६- क. अपराध का शमन.-
(१ ) कोई अधिकारी , जो श्रम पदाधिकारी से निम्न श्रेणी का न हो, यदि ऐसा श्रम आयुक्त द्वारा अधिसूचना द्वारा प्राधिकृत किया जाए , इस अधिनियम के अधीन प्रक्रियाओं के स्थापन के पूर्व या पश्चात् इस अधिनियम की धारा ३५ तथा ३६ के भंग करने के अपराध से आरोपित व्यक्ति को ऐसी राशि के संदाय पर जैसी कि उक्त अधिसूचना द्वारा विहित की जाए , प्रशमन के लिए अनुज्ञप्त कर सकेगा.
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700 ( 1
क्रमांक वर्ष क्रमांक संक्षिप्त नाम
संशोधन
(9) (२) (३)
(५)
(४)
(२) इस अधिनियम के अधीन कर्मचारी की ओर से किसी अंशदान, शुल्क, कर एवं उपकर और विधिक देय की राशि के संदाय पर, यदि कोई हो, और प्राधिकृ त अधिकारी द्वारा उप- नियम के अधीन यथा उपबंधित, शमन की ऐसी राशि के संदाय पर-
(क) अपराधी किसी ऐसे अभियोजन के लिए दायी नहीं होगा ; और
(ख) यदि कोई ऐसी कार्यवाही यथा पूर्वोक्त किसी व्यक्ति के विरूद्ध पहले से ही संस्थित की जा चुकी है , तो ऐसा व्यक्ति ऐसी कार्यवाही से उन्मोचित किया जाएगा." .
१७
३.
मध्यप्रदेश सहकारी
१६६१
(१) धारा ५६- क में, उपधारा ( २) के स्थान पर , निम्नलिखित उपधारा स्थापित
सोसाइटी अधिनियम, १६६० की जाए , अर्थात्:-
" (२) यदि ऐसा व्यक्ति रजिस्ट्रार के समक्ष या किसी ऐसे व्यक्ति के समक्ष जो कि रजिस्ट्रार द्वारा प्राधिकृत किया गया हो, धारा ५६ की उपधारा (१ ) के अधीन कोई ऐसी पुस्तक या कोई ऐसे कागज पत्र, जिन्हें प्रस्तुत करना उपधारा (१ ) के अधीन उस व्यक्ति का कर्तव्य हो , प्रस्तुत करने से इन्कार करे या किसी ऐसे प्रश्न का जो कि उससे उपधारा ( १) के अनुसरण में रजिस्ट्रार या रजिस्ट्रार द्वारा प्राधिकृत किये गये व्यक्ति द्वारा किया जाय, उत्तर देने से इन्कार करे, तो रजिस्ट्रार या रजिस्ट्रार द्वारा प्राधिकृत किया गया व्यक्ति उस इन्कार को प्रमाणित कर सकेगा और रजिस्ट्रार कोई ऐसा कथन, जो कि प्रतिवाद में दिया जाय, सुनने के पश्चात् व्यतिक्रमी को ऐसी शास्ति से , जो पचास हजार रूपये से अधिक नहीं होगी, अधिरोपित कर सकेगा." .
(२) धारा ७२ - ख में, उपधारा (२) का लोप किया जाए .
(३) अध्याय नवां में, विद्यमान अध्याय के शीर्षक के स्थान पर, निम्नलिखित अध्याय का शीर्षक स्थापित किया जाए , अर्थात्:-
"अपराध , अनियमितताएं, दण्ड एवं शास्तियां ". "
(४) धारा ७४ के स्थान पर , निम्नलिखित धारा स्थापित की जाएं , अर्थात्:- "७४. अपराध.- इस अधिनियम के अधीन अपराध होगा, यदि-
(क) कोई संचालक मंडल या उसका कोई अधिकारी या सदस्य जानबूझकर कोई मिथ्या रिपोर्ट करता है या मिथ्या जानकारी देता है या लेखे रखने में बेईमानी से चूक करता है या मिथ्या लेखे बेईमानी से रखता है; या
(ख) किसी सोसाइटी का कोई अधिकारी अपने स्वयं के उपयोग या फायदे के लिये या किसी ऐसे व्यक्ति के, जिसमें की वह हितबद्ध है , उपयोग या फायदे के लिए , किसी अन्य व्यक्ति के नाम उधार की जानबूझकर सिफारिश करता है या उसे उधार मंजूर करता है; या
(ग) कोई अधिकारी या कोई सदस्य किन्हीं पुस्तकों, कागज पत्रों या प्रतिभूतियों को नष्ट करता है , विकृत करता है, परिवर्तित करता है , उनका मिथ्याकरण करता है या उनको गुप्त रखता है या उनको नष्ट किए जाने, विकृत किए जाने , परिवर्तित किये जाने , उनका मिथ्याकरण किये जाने या उनके गुप्त रखे जाने में संसर्गी है या सोसाइटी के किसी रजिस्ट्रार, लेखा पुस्तक या दस्तावेज में कोई मिथ्या या कपटपूर्ण प्रविष्ट करता है या ऐसा किये जाने में संसर्गी है; या 700 (2)
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क्रमांक वर्ष क्रमांक संक्षिप्त नाम
संशोधन
(१) (२) (३)
(४)
(५)
(घ) कोई सदस्य ऐसी सम्पत्ति का, जिस पर कि सोसाइटी का पूर्विक दावा है, कपटपूर्ण व्ययन करता है या कोई सदस्य या अधिकारी या कर्मचारी या कोई व्यक्ति विक्रय, अन्तरण , बन्धक , दान द्वारा या अन्यथा अपनी सम्पत्ति का व्ययन सोसाइटी के शोध्यों का अपवंचन करने के कपटपूर्ण आशय से करता है; या
(ङ) जो कोई सचांलक मण्डल अथवा पदाधिकारियों के निर्वाचन के पूर्व, दौरान या उसके पश्चात् कोई भ्रष्ट आचरण अपनाता है; या
(च) कोई अधिकारी उस सोसाइटी की , जिसका कि वह अधिकारी है, पुस्तकों, अभिलेखों, नगदी, प्रतिभूति तथा अन्य सम्पत्ति का अभिरक्षण धारा ५३ या ७० के अधीन नियुक्त किये गये किसी व्यक्ति को जानबूझकर नहीं सौंपता है.
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजन के लिए, ऐसे अधिकारी या सदस्य के, जो की इस धारा में निर्दिष्ट किया गया है , अंतर्गत यथास्थिति भूतपूर्व अधिकारी या भूतपूर्व सदस्य भी आएगा. ".
(५) धारा ७४ के पश्चात्, निम्नलिखित नई धारा अंतःस्थापित की जाए , अर्थात्:-
"७४- क. अनियमितताएं.-
इस अधिनियम के अधीन अनियमितता होगी , यदि-
(क) किसी निर्माणाधीन सोसाइटी के लिये अंशदान संग्रह करने वाला कोई व्यक्ति उस अंशदान को , उसकी प्राप्ति से चौदह दिन के भीतर मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक मर्यादित, केन्द्रीय सहकारी बैंक, किसी नगरीय सहकारी बैंक या किसी डाकघर बचत बैंक में जमा नहीं करता है; या
(ख) किसी निर्माणाधीन सोसाइटी के लिये अंशदान संग्रह करने वाला कोई व्यक्ति इस प्रकार एकत्रित की गईं निधियों का उपयोग , रजिस्ट्रीकृत की जाने वाली किसी सासाइटी के नाम से करता है या अथवा कोई कारोबार करने में या व्यापार करने में करता है; या
(ग) कोई अधिकारी या कोई सदस्य, जिसके पास जानकारी , पुस्तकें तथा अभिलेख हो, ऐसी जानकारी जानबूझकर नहीं देता या ऐसी पुस्तकें तथा कागज पत्र पेश नहीं करता है या रजिस्ट्रार द्वारा धारा ५३, ५८ , ५६, ६०, ६७ तथा ७० के अधीन नियुक्त या प्राधिकृत किये गए किसी व्यक्ति की सहायता नहीं करता है; या
(घ) कोई नियोजक तथा ऐसे नियोजक की ओर से कार्य करने वाला अन्य निदेशक, प्रबंधक , सचिव या अन्य अधिकारी या अभिकर्ता धारा ४२ की उपधारा (२) के उपबंधों का अनुपालन करने में पर्याप्त कारण के बिना चूक करता है; या
(ङ) कोई व्यक्ति किसी ऐसी सम्पत्ति का, जो धारा ४० की उपधारा (१) के अधीन भार के अध्यधीन है, अर्जन करता है या उसके अर्जन में दुष्प्रेरणा करता है; या
(च) किसी सोसाइटी का कोई अधिकारी या सदस्य या कोई व्यक्ति कोई ऐसा कार्य नियमों के उल्लंघन में करता है ; या
(छ) कोई व्यक्ति जानबूझकर या बिना किसी युक्तियुक्त कारण के किसी समन , अध्यपेक्षा या इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन जारी किए गए विधिपूर्ण लिखित आदेश की अवज्ञा करता है; या मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024
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क्रमांक वर्ष क्रमांक संक्षिप्त नाम
संशोधन
( 9) (२) (३)
(४)
(५)
(ज) कोई नियोजक जो बिना किसी पर्याप्त कारण से , उसके द्वारा उसके कर्मचारी से काटी गई रकम का उस तारीख से, जिसको कि ऐसी कटौती की गई हो चौदह दिन की कालावधि के भीतर किसी सहकारी सोसाइटी को भुगतान करने में असफल रहता है.
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजन के लिए , ऐसे अधिकारी या सदस्य के, जो कि इस धारा में निर्दिष्ट किया गया है, अंतर्गत यथास्थिति भूतपूर्व अधिकारी या भूतपूर्व सदस्य भी आएगा.".
(६) धारा ७५ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए , अर्थात्:-
"७५, अपराधों के लिए दण्ड.-
किसी सोसाइटी की प्रत्येक संचालक मंडल , उसका प्रत्येक अधिकारी या भूतपूर्व अधिकारी या सदस्य या भूतपूर्व सदस्य या कोई कर्मचारी या भूतपूर्व कर्मचारी या कोई अन्य व्यक्ति, किसी ऐसी कार्यवाही पर, जो कि तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन उसके विरूद्ध की जा सकती हो , प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना धारा ७४ में उल्लिखित किसी अपराध के लिए दोषी पाए जाने पर ऐसे जुर्माने से जो रूपये ५०,००० /- से अधिक का नही होगा , दण्डित किया जा सकेगा.".
(७) धारा ७५ के पश्चात् , निम्नलिखित नई धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात् :-
"७५- क. अनियमितताओं के लिए शास्ति.-
किसी सोसाइटी की प्रत्येक संचालक मंडल , उसका प्रत्येक अधिकारी या भूतपूर्वअधिकारी या सदस्य या भूतपूर्व सदस्य या कोई कर्मचारी या भूतपूर्व कर्मचारी या कोई अन्य व्यक्ति, किसी ऐसी कार्यवाही पर, जो कि तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन उसके विरूद्ध की जा सकती हो , प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना धारा ७४ - क मे उल्लिखित अनियमितता के लिए रजिस्ट्रार द्वारा ऐसी शास्तिसे दण्डित किए जाने का दायी होगा जो रूपये २५,००० /- से अधिक की नहीं होगी.".
४. १६६० २७ मध्यप्रदेश औद्योगिक
संबंध अधिनियम , १६६०
(१) धारा ६३ के पश्चात्, अध्याय चौदह में निम्नलिखित धारा जोड़ी जाए , अर्थात:-
" ६३ - क. अपराध का शमन.-
कोई अधिकारी जो श्रम पदाधिकारी से निम्न श्रेणी का न हो, यदि ऐसा श्रम आयुक्त द्वारा अधिसूचना द्वारा प्राधिकृत किया जाए , इस अधिनियम के अधीन प्रक्रियाओं के स्थापन के पूर्व या पश्चात् इस अधिनियम की धारा ८६ , ८७ , ८८, ८६, ६०, ६१ , ६२ एवं ६३ के भंग करने के अपराध से आरोपित व्यक्ति को ऐसी राशि के संदाय पर जैसी कि उक्त अधिसूचना द्वारा विहित की जाए, प्रशमन के लिए अनुज्ञप्त कर सकेगा .
(२) इस अधिनियम के अधीन कर्मचारी की ओर से किसी विधिक देय की राशि के संदाय पर, यदि कोई हो, और प्राधिकृत अधिकारी द्वारा उप- नियम (१ ) के अधीन यथा उपबंधित, शमन की ऐसी राशि के संदाय पर,-
(क) अपराधी किसी ऐसे अभियोजन के लिए दायी नहीं होगा; और 700 (4)
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क्रमांक वर्ष क्रमांक संक्षिप्त नाम
संशोधन
(9) (२) (३)
(४)
(५)
(ख) यदि कोई ऐसी कार्यवाही यथा पूर्वोक्त किसी व्यक्ति के विरूद्ध पहले ही संस्थित की जा चुकी है तो ऐसा व्यक्ति ऐसी कार्यवाही से उन्मोचित किया जाएगा. ".
५.
१६५६ २३ मध्यप्रदेश नगरपालिक
निगम अधिनियम , १६५६
(१) धारा १६५, १६६, ३०२, ३३२, ३४४, ३४५, ३४६, ३४६-क में शब्द "अर्थदण्ड" के स्थान पर , शब्द "शास्ति" स्थापित किए जाएं.
(२) धारा १७० और १७१ का लोप किया जाए.
(३) धारा २०० में शब्द "अर्थदण्ड" के स्थान पर, "शास्ति" और शब्द " पांच सौ" के स्थान पर शब्द "पांच हजार " स्थापित किए जाएं .
(४) धारा २०१ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए , अर्थात्:-
" २०१. प्राधिकरण के बिना जल निकासों का निर्माण या परिवर्तन करना.- जो कोई आयुक्त की अनुमति के बिना निगम में निहित किसी भी नाले में जाने वाली नाली बनाता है या बनवाता है , या उसमें परिवर्तन करता है या परिवर्तन करवाता है, तो उसे पांच हजार रुपए तक की "शास्ति' से दण्डित किया जाएगा तथा ऐसा कोई भी व्यय वहन करना होगा, जो उसे पुर्नस्थापित करने में कारित हुआ हो.".
(५) धारा २३६ में उपधारा (२) में शब्द "अर्थदण्ड" के स्थान पर , "शास्ति" और शब्द " पांच सौ " के स्थान पर शब्द "पांच हजार" स्थापित किए जाएं.
(६) धारा ३३४ में शब्द " अर्थदण्ड" के स्थान पर , " शास्ति" और शब्द " पांच सौ" के स्थान पर शब्द " पांच हजार " स्थापित किए जाएं.
(७) धारा ३३५ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए , अर्थात्:-
"३३५. अनुज्ञा के बिना पर्चों का चिपकाया जाना.-
(१) कोई भी जो, स्वामी या अधिवासी या उस समय किसी सम्पत्ति की देख- रेख रखने वाले किसी अन्य व्यक्ति की सहमति के बिना कोई भित्त-पत्र, पर्चा, सूचना- पत्र, भित्तिचित्र या अन्य कागज या विज्ञापन का साधन किसी सड़क, भवन, दीवार, पेड़, तख्ते , अहाते या घेरे के सहारे या उस पर लगाएगा अथवा लगवाएगा अथवा किसी भी ऐसे भवन, दीवार, पेड़, तख्ते, अहाते या घेरे पर खड़िया या रंग से या किसी भी अन्य रीति में लिखेगा , या उसे गंदा , विरूपित या चिह्नित करेगा , ऐसी शास्ति से दण्डनीय होगा, जो दो हजार रुपये, तक हो सकती है.
(२) उपधारा (१) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी आयुक्त उसकी अनुज्ञा के बिना सार्वजनिक सूचना- पत्र द्वारा किसी भी निर्दिष्ट बस्ती या सड़क पर किसी भी भवन या भवन के भाग, दीवार, वृक्ष, तख्ते , अहाते या घेरे का उपयोग निषिद्ध कर सकेगा ऐसे सार्वजनिक सूचना-पत्र के पश्चात् कोई भी व्यक्ति, उसकी अनुज्ञा के बिना, या
ऐसी अनुज्ञा के उल्लंघन में किसी भी भवन , दीवार, वृक्ष, तख्ते , अहाते या घेरे का उपयोग नहीं करेगा. कोई भी , बिना अनुमति और आयुक्त के आदेश के उल्लंघन में किसी भी भवन, दीवार, वृक्ष, तख्ते , अहाते या घेरे का उपयोग करता है, तो ऐसी शास्ति जो दो हजार रुपये, तक हो सकती है या दूसरी बार लगातार उल्लंघन की दशा में पांच हजार रुपये, से दण्डनीय होगा. "
(८) धारा ३४३ में, शब्द " अर्थदण्ड" के स्थान पर, " शास्ति' , शब्द "पांच सौ" के स्थान पर शब्द " पांच हजार " और शब्द " पचास " के स्थान पर, शब्द "सौ" स्थापित किया जाए.
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क्रमांक वर्ष क्रमांक संक्षिप्त नाम
संशोधन
(9) (२) (३)
(४)
(५)
(६) धारा ४२८ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए , अर्थात्:-
" ४२८. उपविधियों के भंग के लिए शास्तियां.-
(१) धारा ४२७ के अधीन उप - विधि बनाते समय निगम इस बात की व्यवस्था कर सकेगा कि उसका कोई उल्लंघन या उल्लंघन के लिए प्रोत्साहन-
(क) ऐसी शास्ति से जो पाँच हजार रुपये , तक की हो सकेगा तथा चालू रहने वाले भंग की दशा में ऐसी शास्ति से, जो प्रथम भंग के लिए दोषसिद्धि के पश्चात् प्रत्येक ऐसे दिन के लिए जिसके दौरान भंग चालू रहे, एक सौ रुपये, तक की हो सकेगी; या
(ख) ऐसी शास्ति से. जो प्रत्येक ऐसे दिन के लिए , जिसको आयुक्त की ओर से उल्लंघन को चालू न रखने की लिखित सूचना प्राप्त होने के पश्चात् उल्लंघन चालू रहे, दस रूपए तक हो सकती है, दण्डनीय होगा.
(२) ऐसी शास्ति के बदले में या उसके अतिरिक्त, आयुक्त, उल्लंघन करने वाले को, जहाँ तक उसकी शक्ति में हो, रिष्टि का परिमार्जन करने का आदेश दे सकेगा.
(१०) धारा ४३४ में, शब्द "अर्थदण्ड" के स्थान पर , शब्द " शास्ति" स्थापित किया जाए तथा उपधारा (२) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए , अर्थात: -
(२) कोई भी जो उपधारा ( १) के खण्ड (अ) या ( आ) के अधीन किसी भी अपराध का सिद्धदोष ठहराए जाने के पश्चात ऐसा अपराध करता रहेगा , प्रथम दिन के पश्चात् ऐसे प्रत्येक दिन के लिए , जिसमें वह ऐसा अपराध करना चालू रखे, ऐसी शास्ति से दंडित होगा जो उक्त सारणी के चौथे कॉलम में उल्लिखित राशि तक हो सकेगी. ".
६ . १६६१ ३७ मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १६६१
(१) धारा १४५ तथा २२८ में, शब्द "जुर्माना" के स्थान पर, शब्द "शास्ति" स्थापित किए जाएं .
(२) धारा १७६ में, शब्द "जुर्माना" के स्थान पर " शास्ति" , शब्द " पांच सौ" के स्थान पर शब्द " पांच हजार " स्थापित किए जाएं.
(३) धारा १८२ में, शब्द "जुर्माना " के स्थान पर, शब्द " शास्ति" शब्द "पांच सौ" के स्थान पर शब्द " पांच हजार " स्थापित किए जाएं.
(४) धारा १८५ में, शब्द " जुर्माना " के स्थान पर, शब्द "शास्ति", शब्द " पच्चीस " के स्थान पर, शब्द " पांच सौ" तथा शब्द " दस " के स्थान पर, शब्द " पचास " स्थापित किए जाएं.
(५) धारा १८७ में, शब्द " जुर्माना " के स्थान पर, शब्द ' शास्ति" तथा शब्द " एक हजार" के स्थान पर, शब्द " पांच हजार " स्थापित किए जाएं.
(६) धारा १६४ में, शब्द " जुर्माना " के स्थान पर, शब्द "शास्ति", शब्द " दो सौ तथा पचास" के स्थान पर , शब्द "दो हजार " तथा शब्द " पांच" के स्थान पर, शब्द "पचास " स्थापित किए जाएं.
(७) धारा १६८ में , शब्द " जुर्माना" के स्थान पर, शब्द " शास्ति" , तथा शब्द "पच्चीस" के स्थान पर, शब्द " दो सौ तथा पचास" स्थापित किए जाएं.
(८) धारा २१२ में, शब्द " जुर्माना " के स्थान पर, शब्द " शास्ति" , तथा शब्द "पच्चीस " के स्थान पर, शब्द " दो सौ तथा पचास" स्थापित किए जाएं.
(६) धारा २२२ में, शब्द "जुर्माना " के स्थान पर , शब्द "शास्ति' , तथा शब्द "सौ" के स्थान पर , शब्द " एक हजार " स्थापित किए जाएं.
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क्रमांक वर्ष क्रमांक संक्षिप्त नाम
संशोधन
(9) (२) (३)
(४)
(५)
(१०) धारा २२४ में, शब्द " जुर्माना" के स्थान पर, शब्द "शास्ति" , शब्द "पचास " के स्थान पर , शब्द " पाँच सौ " तथा शब्द " दस " के स्थान पर, शब्द " पचास " स्थापित किए जाएं.
(११) धारा २२५ में, शब्द "जुर्माना" के स्थान पर, शब्द " शास्ति', तथा शब्द "पचास" के स्थान पर , शब्द " पाँच सौ" स्थापित किए जाएं.
(१२) धारा २२६ में, शब्द 'जुर्माना" के स्थान पर , शब्द "शास्ति" , शब्द " पच्चीस" के स्थान पर, शब्द " दो सौ तथा पचास " तथा शब्द "दस " के स्थान पर , शब्द "पचास " स्थापित किए जाएं.
(१३ ) धारा २३६ में, शब्द "जुर्माना" के स्थान पर , शब्द " शास्ति" , शब्द " पच्चीस " के स्थान पर , शब्द "दो सौ तथा पचास " स्थापित किए जाएं.
(१४) धारा २४० में, शब्द "जुर्माना" के स्थान पर, शब्द " शास्ति" , शब्द "पचास" के स्थान पर, शब्द " पांच सौ" तथा शब्द "पांच " के स्थान पर, शब्द "पचास " स्थापित किए जाएं.
(१५) धारा २४२ में, शब्द "जुर्माना " के स्थान पर, शब्द "शास्ति" , शब्द " पच्चीस" के स्थान पर , शब्द "दो सौ तथा पचास " तथा शब्द " पांच " के स्थान पर, शब्द "पच्चीस " स्थापित किए जाएं.
(१६) धारा २५५ में, शब्द "जुर्माना" के स्थान पर, शब्द " शास्ति", शब्द "पचास " के स्थान पर , शब्द " पांच सौ" तथा शब्द "पांच सौ" के स्थान पर , शब्द "दो हजार " स्थापित किए जाएं.
(१७) धारा २६० की उपधारा ( २) में, शब्द जुर्माना " के स्थान पर , शब्द "शास्ति" , तथा शब्द " पचास " के स्थान पर , शब्द "पांच सौ " स्थापित किए जाएं .
(१८) धारा २६० की उपधारा (३) के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्:-
" (३) किसी स्थान के संबंध में उपधारा (२ ) के अधीन दोषसिद्धि स्थापित हो जाने पर मुख्य नगरपालिका अधिकारी या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी, किन्तु अन्यथा नहीं, ऐसे स्थान को बंद करने का आदेश देगा और तदुपरि ऐसे स्थान का इस प्रकार उपयोग रोकने के लिए व्यक्तियों को नियुक्त करेगा या अन्य उपाय करेगा और ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जो किसी स्थान को बंद कर देने का इस प्रकार आदेश दिए जाने के पश्चात् उसका इस प्रकार उपयोग करेगा या करने की अनुज्ञा देगा, वह शास्ति से, जो उस स्थान को बन्द करने के उस प्रकार आदेश हो चुकने के पश्चात्, के ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान वह उस स्थान का इस प्रकार उपयोग करना जारी रखे या ऐसा उपयोग करने की अनुज्ञा दे, पचास रुपए तक हो सकेगा , दण्डित किया जाएगा. " .
(१६) धारा २६८ की उपधारा (५) में , शब्द "जुर्माना" के स्थान पर, शब्द "शास्ति", तथा शब्द "पचास " के स्थान पर, शब्द "पांच सौ " स्थापित किए जाएं.
(२०) धारा २६८ की उपधारा (६) के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्:-
"(६) किसी स्थान के संबंध में उपधारा ( ५) के अधीन दोषसिद्धि स्थापित हो जाने पर मुख्य नगरपालिका अधिकारी या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी , किन्तु अन्यथा नहीं ऐसे स्थान को, बन्द करने का आदेश देगा और तदुपरि ऐसे स्थान का लिए व्यक्तियों को नियुक्त करेगा या अन्य उपाय करेगा और ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो ऐसे स्थान को बन्द कर देने का इस प्रकार आदेश दिए जाने के पश्चात् उसका उस इस प्रकार से उपयोग करेगा या करने की अनुज्ञा देगा , मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024
700 (7)
वर्ष
संक्षिप्त नाम
क्रमांक
क्रमांक
संशोधन
(9) (२) (३)
(४)
(५)
वह शास्ति से , जो उस स्थान को , बन्द करने के उस प्रकार आदेश हो चुकने के पश्चात् के ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान वह उसका इस प्रकार उपयोग करना जारी रखे या ऐसा उपयोग करने की अनुज्ञा दे, पचास रुपए तक हो सकेगी दण्डनीय होगा. ".
(२१) धारा २७२ में , शब्द " जुर्माना " के स्थान पर, शब्द " शास्ति", शब्द "पचास " के स्थान पर, शब्द "पांच सौ " तथा शब्द "दस " के स्थान पर, शब्द " पचास" स्थापित किए जाएं.
(२२) धारा २७२ की उपधारा (४ ) के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए , अर्थात्:-
"(४) उपधारा ( ३ ) के अधीन किसी स्थान के संबंध में उल्लंघन करने वाले पर मुख्य नगरपालिका अधिकारी या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी , किन्तु अन्यथा नहीं ऐसे स्थान को बन्द कर देने का आदेश देगा और तदुपरि ऐसे स्थान का उस प्रकार उपयोग रोकने के लिए व्यक्तियों को नियुक्त करेगा या अन्य उपाय करेगा. ".
(२३) धारा २८३ की उपधारा ( २ ) के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्:-
"(२) जो कोई उपधारा (१ ) के अधीन सूचना दिए जाने के पश्चात् किसी भवन या स्थान का ऐसी रीति में उपयोग करने की अनुज्ञा देगा जो पड़ोस के लिए न्यूसेंस है या जो जीवन , स्वास्थ्य या संपत्ति के लिए खतरनाक है , शास्ति से जो दो सौ रुपए तक का हो सकेगी, तथा ऐसी और शास्ति से, जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसकी प्रथम दोषसिद्धि की तारीख के पश्चात् ऐसा उपयोग तथा उपयोग करने की अनुज्ञा चालू रही है, पचास रुपए तक का हो सकेगी , दंडित किया जाएगा.".
(२४) धारा २८३ की उपधारा ( ४) के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए , अर्थात्:-
" (४ ) जो कोई अनुज्ञप्ति के बिना या अनुज्ञप्ति के निलंबित रहने के दौरान या अनुज्ञप्ति के प्रत्याहृत कर लिए जाने के पश्चात् किसी ऐसी नगरपालिका में , जिनमें ऐसी उपविधियां तत्समय प्रवृत्त हैं, जो ऐसी शर्तें , जिन पर जिनके अध्यधीन , ऐसी परिस्थितियां जिनमें और ऐसे क्षेत्र या परिक्षेत्र, जिनके संबंध में, ऐसे उपयोग के लिए अनुज्ञप्तियां प्रदान की जा सकती हैं, उन्हें प्रदान करने से इंकार किया जा सकता है , उन्हें निलंबित किया जा सकता है या उन्हें प्रत्याहत किया जा सकता है, विहित करती है, उपधारा (१) में वर्णित किसी भी प्रयोजन के लिए किसी स्थान का उपयोग करेगा, वह शास्ति से जो पांच सौ रुपये तक की हो सकेगी , तथा ऐसी और शास्ति से, जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए , जिसमें प्रथम दोषसिद्धि के पश्चात् ऐसा उपयोग चालू रहे, पचास रुपए तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा.".
(२५) धारा २८५ में, शब्द " जुर्माना" के स्थान पर, शब्द "शास्ति' , तथा शब्द "पचास" के स्थान पर, शब्द " पांच सौ " स्थापित किए जाएं.
(२६) धारा ३०० में , शब्द "मजिस्ट्रेट" के स्थान पर , शब्द " मुख्य नगरपालिका अधिकारी", शब्द जुर्माना" के स्थान पर, शब्द " शास्ति", तथा शब्द " पचास " के स्थान पर, शब्द " पांच सौ" स्थापित किए जाएं.
७.
मध्यप्रदेश नगर तथा
१६७३ २३
धारा ७७ की उपधारा (२) का लोप किया जाये.
तथा ग्राम निवेश
अधिनियम, १६७३ 700 (8 )
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024
क्रमांक वर्ष क्रमांक संक्षिप्त नाम
संशोधन
( 9) (२) (३)
(४)
(५)
४४
८.
१६७३
मध्यप्रदेश सोसाइटी
रजिस्ट्रीकरण
धारा ३६ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएं, अर्थात्:-
अधिनियम, १६७३
" ३६- क . अपराध का शमन-
(१ ) इस अधिनियम की धारा १६ की उपधारा ( ४ ) , धारा ३८ तथा धारा ३६ का उल्लंघन होने पर रजिस्ट्रार, व्यत्तिक्रम करने वाली समिति / पदाधिकारी / व्यक्ति द्वारा रूपए दो हजार पांच सौ की राशि के भुगतान करने पर, उपरोक्त उल्लिखित धारा के अधीन उक्त उल्लंघन के शमन को अनुज्ञप्त कर सकेगा. ".
(२) उपधारा (१ ) के अधीन यथा विनिर्दिष्ट शमनीय राशि के भुगतान पर , व्यतिक्रम करने वाली समिति/ पदाधिकारी / व्यक्ति को उपरोक्त उल्लिखित धाराओं के अधीन उक्त उल्लंघन से विमुक्त कर दिया जाएगा तथा अभियोजन का दायी नहीं होगा." .
उद्देश्यों और कारणों का विवरण
सरकार का उद्देश्य विश्वास आधारित शासन को बढ़ावा देना , अनुपालन के भार को कम करना तथा राज्य के अधिनियमों में अपराधों के अपराधमुक्तकरण और तर्कसंगतिकरण के लिए विभिन्न उपबंधों में संशोधन करते हुए ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ाना है. इस संदर्भ में, गौण अपराधों को अपराधमुक्त करने और दंड राशि को युक्तिसंगत बनाने के लिए निम्नलिखित अधिनियमों के कुछ प्रावधानों में संशोधन प्रस्तावित किए जा रहे हैं.
२. उक्त उपबंधों में किए जा रहे संशोधनों को संकलित करने के लिए " मध्यप्रदेश जन विश्वास (उपबंधों में संशोधन) विधेयक , २०२४" प्रस्तावित किया जा रहा है.
३. यह विधेयक विनियमनों को सुव्यवस्थित कर निवेश आकर्षित करने , प्रशासनिक दक्षता सुधारने और शास्तियों के लिए एक न्यायपूर्ण एवं पारदर्शी ढांचा सुनिश्चित करने का प्रयास करता है, जो मध्यप्रदेश में सतत् विकास , उद्यमिता और व्यवसाय- अनुकूल वातावरण को प्रोत्साहित करेगा.
४. इज ऑफ लिविंग और डूइंग बिजनेस के लिए गौण अपराधों को अपराध मुक्त करने के लिए निम्नलिखित अधिनियमों में समुचित संशोधन प्रस्तावित किए जा रहे हैं :-
(१ ) मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम , १ ९५६ (क्रमांक २३ सन् १६५६)
(२) मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १६६१ (क्रमांक ३७ सन् १६६१)
(३ ) मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, १९७३ (क्रमांक २३ सन् १६७३)
(४) मध्यप्रदेश विद्युत शुल्क अधिनियम , २०१२ (क्रमांक १७ सन् २०१२)
(५) मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम १६६० (क्रमांक १७ सन् १६६१)
(६) मध्यप्रदेश असंगठित कर्मकार कल्याण अधिनियम , २००३ (क्रमांक ०६ सन् २००३)
(७) मध्यप्रदेश औद्यौगिक संबंध अधिनियम , १६६० (क्रमांक २७ सन् १६६० )
(८) मध्यप्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम , १६७३ (क्रमांक ४४ सन् १६७३)
५. अतएव मध्यप्रदेश जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, २०२४ प्रस्तावित किया जा रहा है.
६. अतएव यह विधेयक प्रस्तुत है.
भोपाल :
दिलीप अहिरवार दिनांक : १२ दिसम्बर २०२४.
भारसधक सदस्य.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2024 .