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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश माल एवं सेवा कर (तृतीय संशोधन) विधेयक, 2024

Published 18 December 2024

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
353
Identifier
in.gazette.madhya.2024-12-18.353.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

भोपाल, बुधवार, दिनांक 18 दिसम्बर 2024 -अग्रहायण 27 , शक 1946

क्रमांक 353]

विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश

भोपाल, दिनांक 18 दिसम्बर 2024

क्र. 19479- मप्रविस- 16- विधान-2024. मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों केपालन में, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर (तृतीय संशोधन) विधेयक, 2024 (क्रमांक 29 सन् 2024) जो विधान सभा में दिनांक 18 दिसम्बर 2024 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.

ए . पी . सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा .

मध्यप्रदेश विधेयक

(क्रमांक २६ सन् २०२४)

मध्यप्रदेश माल एवं सेवा कर (तृतीय संशोधन) विधेयक , २०२४

विषय सूची

खण्ड:

१ . संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभ.

२. धारा ६ का संशोधन

३. धारा १० का संशोधन

४. धारा ११ -क का अंतःस्थापन.

५. धारा १३ का संशोधन.

६. धारा १६ का संशोधन.

705 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 18 दिसम्बर 2024

706

 ७.    धारा १७ का संशोधन.
 ८.     धारा २१ का संशोधन.
 ξ.     धारा ३० का संशोधन.
१०.     धारा ३१ का संशोधन.
११ .    धारा ३५ का संशोधन.
१२.     धारा ३६ का संशोधन.
१३.     धारा ४६ का संशोधन.
१४.     धारा ५० का संशोधन.
१५.     धारा ५१ का संशोधन.
१६.     धारा ५४ का संशोधन.
१७ .    धारा ६१ का संशोधन.
१८.     धारा ६२ का संशोधन.
 १६.    धारा ६३ का संशोधन.
२०.     धारा ६४ का संशोधन.
२१ .    धारा ६५ का संशोधन.
२२ .    धारा ६६ का संशोधन.
२३.     धारा ७० का संशोधन.
२४.     धारा ७३ का संशोधन.
२५.     धारा ७४ का संशोधन.
२६.     धारा ७४क का अंतःस्थापन.
२७.     धारा ७५ का संशोधन.
 २८.    धारा १०४ का संशोधन.
 २६.    धारा १०७ का संशोधन .
 ३०.    धारा ११२ का संशोधन.
 ३१.    धारा १२२ का संशोधन .
 ३२.    धारा १२७ का संशोधन.
 ३३.    धारा १२८क का अंतःस्थापन.
 ३४.    धारा १७१ का संशोधन.-
 ३५.    अनुसूची ३ का संशोधन.
३६.      संदत्त करों या प्रतिलोम इनपुट कर प्रत्यय का कोई प्रतिदाय न किया जाना.

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 18 दिसम्बर 2024

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक २६ सन् २०२४

मध्यप्रदेश माल और सेवा कर (तृतीय संशोधन) विधेयक , २०२४

मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.

भारत गणराज्य के पचहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-

१. (१ ) इस विधेयक का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश माल और सेवा कर (तृतीय संशोधन ) अधिनियम, २०२४ है.

प्रारंभ संक्षिप्त नाम तथा

(२) अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय, इस अधिनियम के उपबंध ऐसी तारीख से प्रवृत्त होंगे , जैसा कि राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे :

परन्तु इस अधिनियम के भिन्न - भिन्न उपबंधो के लिए भिन्न - भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और ऐसे किसी उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस उपबंध के प्रवृत्त होने के प्रति निर्देश हैं .

धारा ६ का संशोधन २. मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ (क्रमांक १६ सन् २०१७ ) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है) का धारा ६ में, उपधारा (१ ) में, शब्द " मानवीय उपभोग के लिए मद्यसारिकपान " के पश्चात्, शब्द " और विकृत अतिरिक्त निष्प्रभावी ऐल्कोहल या परिशोधित स्पिरिट, जो मानवीय उपभोग के लिए मद्यसारिकपान के विनिर्माण हेतु प्रयुक्त किया जाता है, " अंतःस्थापित किए जाएं.

धारा १० का संशोधन ३. मूल अधिनियम की धारा १० में, उपधारा ( ५) में, शब्द और अंक " धारा ७३ या धारा ७४ ", के पश्चात, शब्द, अंक और अक्षर " या धारा ७४ क" , अंतःस्थापित किए जाएं.

धारा ११क का मूल अधिनियम की धारा ११ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा अंतः स्थापित की जाए , अर्थात्:-

अंतः स्थापन.

साधारण पद्धति के " ११ क. इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यदि सरकार का यह समाधान हो जाता है कि,

परिणामस्वरूप

उद्ग्रहीत नहीं

किए गए या (क) माल या सेवाओं या दोनों की किसी प्रदाय पर राज्य कर के उद्ग्रहण जिसमें उसकी उद्ग्रहण सम्मिलित है के संबंध में कोई पद्धति साधारणतया प्रचलन में थी या है; और

कम उद्‌ग्रहीत

किए गए माल (ख) ऐसी प्रदाय , जो निम्नलिखित के लिए दायी थी या है -

और सेवा कर

की वसूली न

करने की शक्ति.

(एक) उन मामलों में, जहां उक्त पद्धति के अनुसार, राज्य कर उदग्रहीत नहीं किया गया था या उदग्रहीत नहीं किया जा रहा है, राज्य कर; या

(दो) राज्य कर की ऐसी रकम, जिसे उक्त पद्धति के अनुसार उग्रहीत किया जा रहा था या किया जा रहा है, से उच्चतर रकम है, तो राज्य सरकार , परिषद् की सिफारिश पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , यह निर्देश दे सकेगी कि, यथास्थिति, ऐसी प्रदाय पर संदेय संपूर्ण राज्य कर या ऐसी प्रदाय पर संदेय राज्य कर के आधिक्य में राज्य कर, यदि उक्त पद्धति नहीं होती तो, उन प्रदाय के संबंध में संदत्त किया जाना अपेक्षित नहीं होगा, जिन पर राज्य कर, उक्त पद्धति के अनुसार, उद्ग्रहीत नहीं किया जा रहा था या उदग्रहीत नहीं किया जा रहा है या कम उद्ग्रहीत किया जा रहा था या कम उदग्रहीत किया जा रहा है. " .

धारा १३ का ५. मूल अधिनियम की धारा १३ में, उपधारा (३ ) में,

संशोधन.

(एक) खण्ड (ख) में, शब्द " प्रदायकर्ता द्वारा " के स्थान पर , शब्द " उन मामलों में , जहां बीजक प्रदायकर्ता द्वारा जारी किया जाना अपेक्षित है, प्रदायकर्ता द्वारा", स्थापित किए जाएं तथा शब्द "पश्चातवर्ती तारीख " के पश्चात्, शब्द " या " स्थापित किए जाएं.

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(दो) खण्ड (ख) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाए , अर्थात्:-

(ग) उन मामलों में, जहां बीजक , प्राप्तकर्ता द्वारा जारी किया जाना है, वहां प्राप्तकर्ता द्वारा बीजक जारी किए जाने की तारीखः";

(तीन) पहले परंतुक में, शब्द, कोष्ठक और अक्षर "या खण्ड (ख ) " के पश्चात्, शब्द, कोष्ठक और अक्षर"या खण्ड (ग) " अंतःस्थापित किए जाएं.

६ .

धारा १६ संशोधन. का

मूल अधिनियम की धारा १६ में १ जुलाई, २०१७ से, उपधारा (४ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधाराएं अंतःस्थापित कीजाएं, अर्थात्:-

"(५) उपधारा ( ४) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, वितीय वर्ष २०१७-१८, २०१८-१६, २०१६-२० और २०२०-२१ से संबंधित, माल या सेवाओं या दोनों की प्रदाय के लिए किसी बीजक या नामे नोट के संबंध में, रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, धारा ३६ के अधीन किसी विवरणी में, जिसे ३० नवंबर , २०२१ तक फाइल किया गया है, इनपुट कर प्रत्यय लेने का हकदार होगा.

(६) जहां किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति का रजिस्ट्रीकरण , धारा २६ के अधीन रद्द किया जाता है और तत्पश्चात् या तो धारा ३० के अधीन किसी आदेश द्वारा या अपील प्राधिकारी अथवा अपील अधिकरण या न्यायालय द्वारा किए गए किसी आदेश के अनुसरण में , रजिस्ट्रीकरण का रद्दकरण प्रतिसंहरण किया जाता है और जहां बीजक या नामे नोट के संबंध में , इनपुट कर प्रत्यय का लाभ रजिस्ट्रीकरण के रकरण के आदेश की तारीख को उपधारा (४ ) के अधीन निर्बन्धित नहीं था, वहां उक्त व्यक्ति, धारा ३६ के अधीन ऐसी विवरणी में माल या सेवाओं या दोनों की प्रदाय के लिए ऐसे बीजक या नामे नोट के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय लेने का हकदार होगा , जो-

(एक) उस वित्तीय वर्ष के पश्चात् आने वाले ३० नवंबर, जिससे ऐसा बीजक या नामनोट संबंधित है, सुसंगत वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने तक, इनमें जो भी पूर्वतर हो , फाइल की जाती है; या

(दो) यथास्थिति, रजिस्ट्रीकरण के रकरण की तारीख से या रजिस्ट्रीकरण के रकरण की प्रभावी तारीख से, उस अवधि के लिए, रजिस्ट्रीकरण के रकरण के प्रतिसंहरण के आदेश की तारीख तक, जहां ऐसी विवरणी रजिस्ट्रीकरण के रकरण के प्रतिसंहरण के आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर, इनमें जो भी पश्चातवर्ती हो, फाइल की जाती है." .

धारा संशोधन ,

१७ का ७. मूल अधिनियम की धारा १७ में उपधारा (५ ) में, खण्ड (झ) में, शब्द और अंक "धारा ७४, धारा १२६ और धारा १३० " के स्थान पर, शब्द और अंक "वित्तीय वर्ष २०२३-२४ तक किसी वित्तीय वर्ष के संबंध में धारा ७४० स्थापित किए जाएं,

धारा संशोधन. २१ का ८. मूल अधिनियम की धारा २१ में, शब्द और अंक "धारा ७३ या धारा ७४" , के पश्चात्, शब्द, अंक और अक्षर " या धारा ७४क" अंतःस्थापित किए जाएं.

धारा संशोधन. OÈ का ६. मूल अधिनियम की धारा ३० में, उपधारा (२ ) में परंतुक के पश्चात्, पूर्ण विराम के स्थान पर कोलन स्थापित किया जाए और तत्पश्चात् निम्नलिखित परंतुक् अंतःस्थापित किया जाए , अर्थात्:-

"परंतु यह और कि ऐसे रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण का प्रतिसंहरण , ऐसी शर्तों और निर्बन्धनों के अधीन होगा , जोविहित की जाए. ".

१०. मूल अधिनियम की धारा ३१ में, उपधारा (३) में,-

धारा संशोधन. ३१ का

(क) खण्ड (च ) में, शब्द तथा अंक " कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जो " धारा ६ की उपधारा (३) या उपधारा (४ ) के अधीन कर संदत्त करने के लिए दायी है" , के पश्चात्, शब्द " ऐसी अवधि के भीतर, जो विहित की जाए " अंतःस्थापित किए जाएं. "

(ख) खण्ड (छ) के पश्चात , निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाए , अर्थात्:-

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 18 दिसम्बर 2024

"स्पष्टीकरण- खण्ड (च) के प्रयोजनों के लिए , " ऐसे प्रदाता से, जो रजिस्ट्रीकृत नहीं है" पद के अंतर्गत ऐसा प्रदायकर्ता भी होगा , जो केवल धारा ५१ के अधीन कर की कटौती के प्रयोजन के लिए रजिस्ट्रीकृत है. ".

धारा ३५ का संशोधन .

११. मूल अधिनियम की धारा ३५ में, उपधारा (६) में, शब्द और अंक " धारा ७३ या धारा ७४ " के पश्चात्, शब्द, अंक और अक्षर "या धारा ७४ क", अंतःस्थापित किए जाएं.

का १२. मूल अधिनियम की धारा ३६ की उपधारा (३) के स्थान पर , निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए , अर्थात्:- धारा ३६ संशोधन.

"(३) धारा ५१ के अधीन, स्रोत पर कर कटौती के लिए अपेक्षित प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक कलैंडर मास के लिए , ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में तथा ऐसे समय के भीतर , जो विहित की जाए , मास के दौरान की गई कटौतियों की एक विवरणी इलैक्ट्रानिक रूप से प्रस्तुत करेगा:

परंतु उक्त रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक कलैंडर मास के लिए एक विवरणी प्रस्तुत करेगा, चाहे उक्त मास के दौरान कोई कटौतियां की गई हों अथवा नहीं.".

धारा ४६ का संशोधन .

१३. मूल अधिनियम की धारा ४६ की उपधारा (८) में, खण्ड (ग ) में, शब्द और अंक "धारा ७३ या धारा ७४", के पश्चात्, शब्द, अंक और " अक्षर " या धारा ७४ क ", अंतःस्थापित किए जाएं.

धारा ५० का संशोधन.

१४. मूल अधिनियम की धारा ५० की उपधारा (१ ) के परंतुक में, शब्द और अंक "धारा ७३ या धारा ७४ ", शब्दों और अंकों के पश्चात्, शब्द, अंक और अक्षर " या धारा ७४ क", अंतःस्थापित किए जाएं.

धारा ५१ का संशोधन .

१५. मूल अधिनियम की धारा ५१ में, उपधारा (७ ) में, शब्द और अंक " धारा ७३ या धारा ७४ ", के पश्चात्, शब्द, अंक और अक्षर " या धारा ७४ क " , अंतःस्थापित किए जाएं.

१६. मूल अधिनियम की धारा ५४ में,-

धारा ५४ का संशोधन .

(क) उपधारा (३ ) के दूसरे परंतुक का लोप किया जाए ;

(ख) उपधारा (१४) के पश्चात् और स्पष्टीकरण से पूर्व, निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाए , अर्थात्:-

"(१५ ) इस धारा में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , माल की प्रदाय की शून्य रेटेड के मद्दे अनुपयोजित इनपुट कर प्रत्यय या माल की शून्य रेटेड प्रदाय के मद्दे संदत्त एकीकृत कर का कोई प्रतिदाय अनुज्ञात नहीं किया जाएगा, जहां माल की ऐसी शून्य रेटेड प्रदाय निर्यात शुल्क के अध्यधीन है." .

धारा ६१ का संशोधन.

१७. मूल अधिनियम की धारा ६१ में, उपधारा (३) में, शब्द और अंक "धारा ७३ या धारा ७४" , के पश्चात, शब्द, अंक और अक्षर " या धारा ७४ क", अंतःस्थापित किए जाएं.

धारा ६२ का संशोधन .

१८. मूल अधिनियम की धारा ६२ में उपधारा ( १) में, शब्द और अंक "धारा ७३ या धारा ७४ " के पश्चात, शब्द, अंक और अक्षर "या धारा ७४ क " , अंतःस्थापित किए जाएं.

धारा ६३ का संशोधन.

१६. मूल अधिनियम की धारा ६३ में, शब्द और अंक "धारा ७३ या धारा ७४" , के पश्चात, शब्द, अंक और अक्षर "या धारा ७४क" , अंतःस्थापित किए जाएं.

धारा ६४ का संशोधन.

२०. मूल अधिनियम की धारा ६४ में, उपधारा (२) में, शब्द और अंक "धारा ७३ या धारा ७४०, के पश्चात, शब्द, अंक और अक्षर "या धारा ७४क ", अंतःस्थापित किए जाएं.

धारा ६५ का संशोधन .

२१. मूल अधिनियम की धारा ६५ में, उपधारा (७ ) में, शब्द और अंक " धारा ७३ या धारा ७४०, के पश्चात, शब्द, अंक और अक्षर " या धारा ७४ क ", अंतःस्थापित किए जाएं.

धारा ६६ का संशोधन .

२२. मूल अधिनियम की धारा ६६ में, उपधारा (६ ) में, शब्द और अंक " धारा ७३ या धारा ७४" , के पश्चात, शब्द, अंक और अक्षर " या धारा ७४ क ", अंतःस्थापित किए जाएं.

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706 (4)

७० का २३. मूल अधिनियम की धारा ७० में, उपधारा (१) के पश्चात, निम्नलिखित उपधारा अंतः स्थापित की जाए, अर्थातः- धारा संशोधन .

(१क) " उपधारा (१ ) के अधीन समन किए गए सभी व्यक्ति या तो व्यक्तिगत रूप से या किसी प्राधिकृत प्रतिनिधि द्वारा उपस्थित होने के लिए आबद्धकर होंगे , जैसा ऐसा अधिकारी निर्देश दे और इस प्रकार उपस्थितहोने वाला व्यक्ति परीक्षा के दौरान सत्य बोलेगा या कथन करेगा या ऐसे दस्तावेज और अन्य वस्तुएं , जो अपेक्षित हों, प्रस्तुत करेगा. "

२४. मूल अधिनियम की धारा ७३ में,-

धारा ७३ का संशोधन.

(एक) पार्श्वशीर्ष में , शब्द " इनपुट कर प्रत्यय का अवधारण " के पश्चात्, शब्द और अंक " वित्तीय वर्ष २०२३-२४ तक की अवधि से संबंधित " अंतःस्थापित किए जाएं;

(दो) उपधारा (११ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाए , अर्थात्:-

(१२) इस धारा के उपबंध वित्तीय वर्ष २०२३-२४ तक की अवधि से संबंधित कर के अवधारण को लागू होंगे. ".

२५. मूल अधिनियम की धारा ७४ में,-

धारा ७४ का संशोधन.

(एक) पार्श्वशीर्ष में, शब्द " इनपुट कर प्रत्यय का अवधारण " के पश्चात्, शब्द और अंक " वित्तीय वर्ष २०२३-२४ तक की अवधि से संबंधित" अंतःस्थापित किए जाएं;

(दो) उपधारा (११) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाए , अर्थात्:-

"(१२) इस धारा के उपबंध वित्तीय वर्ष २०२३-२४ तक की अवधि से संबंधित कर के अवधारण को लागू होंगे. ".

(तीन) स्पष्टीकरण २ का लोप किया जाएगा.

२६. मूल अधिनियम की धारा ७४ के पश्चात, निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्:-

धारा ७४ क का अंतस्थापन.

वित्तीय वर्ष

२०२४-२५ से

तथा उससे आगे

किसी कारण से

असंदत्त या कम

संदत्त कर या

त्रुटिवश प्रतिदाय

"७४ क. (१ ) जहां समुचित अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि किसी कर का संदाय नहीं किया गया है या कम संदाय किया गया है या त्रुटिवश प्रतिदाय किया गया है या जहां इनपुट कर प्रत्यय को गलती से लिया गया है या उसका उपयोग किया गया है , तो वह ऐसे कर से प्रभार्य उस व्यक्ति को जिसे इस प्रकार संदाय नहीं किया गया है या त्रुटिवश प्रतिदाय किया गया है या इनपुट कर प्रत्यय को गलती से लिया गया है या उसका उपयोग किया गया है, के साथ हेतुक उपदर्शित करने की अपेक्षा करते हुए सूचना तामील करेगा कि क्यों न वह सूचना में विनिर्दिष्ट रकम के साथ धारा ५० के अधीन उस पर संदेय ब्याज और इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुरूप शास्ति का संदाय करे .

किए गए कर या

गलत तरीके से

लिए गए या

उपयोग किए गए

परंतु यदि वह कर जिसका संदाय नहीं किया गया है या कम संदाय किया गया है या त्रुटिवश प्रतिदाय किया गया है या जहां इनपुट कर प्रत्यय को गलती से लिया गया है या उसका उपयोग किया गया है, एक वित्तीय वर्ष में एक हजार रुपये से कम है, तो सूचना जारी नहीं की जाएगी .

इनपुट कर प्रत्यय

का अवधारण .

(२)समुचित अधिकारी उपधारा (१ ) के अधीन सूचना उस वित्तीय वर्ष के लिए वार्षिक विवरणी दाखिल करने की नियत तारीख , जिसके लिए कर संदत्त नहीं किया गया था या कम संदत्त किया गया था या इनपुट कर प्रत्यय गलत लिया गया था या गलत उपयोग किया गया था, से बयालीस मास के भीतर या त्रुटिवश प्रतिदाय की तारीख से बयालीस मास के भीतर जारी करेगा.

(३ ) जहां उपधारा (१) के अधीन किसी कालावधि के लिए कोई सूचना जारी की गई है, तो समुचित अधिकारी उपधारा (१) के अधीन आने वाली कालावधियों से भिन्न के लिए संदत्त न किए गए कर या कम संदत्त किए गए या त्रुटिवश प्रतिदाय किए गए या गलत तरीके से लिए गए या उपयोग किए गए इनपुट कर प्रत्यय के ब्यौरों को अंतर्विष्ट करते हुए एक विवरण कर से प्रभार्य व्यक्ति पर तामील कर सकेगा.

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(४ ) ऐसे व्यक्ति पर ऐसे विवरण की तामील को उपधारा (१ ) के अधीन सूचना की तामील इस शर्त के अधीन रहते हुए समझा जाएगा कि उपधारा (१ ) से भिन्न ऐसी कर अवधियों के लिए , लिए गए आधार वहीं हैं, जिनका पूर्वसूचना में वर्णन किया गया है.

(५) उस मामले में जहाँ किसी कर का संदाय नहीं किया गया है या कम संदाय किया गया है या त्रुटिवश प्रतिदाय किया गया है या जहां इनपुट कर प्रत्यय को गलती से लिया गया है या उपयोग किया गया है, शास्ति,-

(एक) ऐसे व्यक्ति से देय कर का दस प्रतिशत या दस हजार रुपये, जो भी अधिक हो, के समतुल्य होगा जहाँ कर अपवंचन के लिए कपट या जानबूझकर कोई मिथ्या कथन या तथ्यों को छिपाने जैसे कारण से भिन्न कोई अन्य कारण है;

(दो ) ऐसे व्यक्ति से देय कर के समतुल्य होगा जहाँ कर अपवंचन के लिए कपट या जानबूझकर कोई मिथ्या कथन या तथ्यों को छिपाने जैसे कारण है;

(६) समुचित अधिकारी कर से प्रभार्य व्यक्तियों द्वारा किए गए अभ्यावेदन, यदि कोई हो, पर विचार करने के पश्चात् ऐसे व्यक्ति से देयकर , ब्याज और शास्ति की रकम अवधारित करेगा और एक आदेश जारी करेगा.

(७) समुचित अधिकारी उपधारा (६) के अधीन आदेश उपधारा (२ ) में विनिर्दिष्ट सूचना जारी करने की तारीख से बारह मास के भीतर जारी करेगा.

परंतु जहां समुचित अधिकारी विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर आदेश जारी करने में सक्षम नहीं है, वहां आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी जो समुचित अधिकारी से वरिष्ठ परंतु संयुक्त आयुक्त, राज्य कर के पद से नीचे का न हो, उपधारा (६ ) के अधीन आदेश जारी करने में विलंब के कारणों को ध्यान में रखते हुए, जिसे विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से पूर्व लिखित रूप में दर्ज किया जाएगा , उक्त अवधि को अधिकतम छह माह के लिए आगे बढ़ा सकेगा.

(८) जहाँ कर अपवंचन के लिए कपट या जानबूझकर कोई मिथ्या कथन या तथ्यों को छिपाने जैसे कारण से भिन्न किसी अन्य कारण से किसी कर का संदाय नहीं किया गया है या कम संदाय किया गया है या त्रुटिवश प्रतिदाय किया गया है , या जहां इनपुट कर प्रत्यय को गलती से लिया गया है या उपयोग किया गया है, कर से प्रभार्य व्यक्ति,-

(एक) उपधारा (१ ) के अधीन सूचना की तामील से पूर्व, ऐसे कर की रकम को अपने स्वयं के निर्धारण के आधार पर या समुचित अधिकारी द्वारा निर्धारण किए गए कर के आधार पर धारा ५० के अधीन संदेय ब्याज के साथ संदाय कर सकेगा और ऐसे संदाय की लिखित सूचना समुचित अधिकारी को दे सकेगा और समुचित अधिकारी ऐसी सूचना प्राप्त होने पर, इस प्रकार संदत्त कर के संबंध में या इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अनुरूप देय किसी शास्ति के संबंध में यथास्थिति, उपधारा (१) के अधीन कोई सूचना या उपधारा (३ ) के अधीन कोई विवरण , तामील नहीं करेगा;

(दो) धारा ५० के अधीन संदेय ब्याज के साथ उक्त कर का हेतुक उपदर्शित करने की सूचना जारी करने के साठ दिन के भीतर संदाय कर देता है तो कोई शास्ति संदेय नहीं होगी और ऐसी सूचना के संबंध में सभी कार्यवाहियों को पूरा हुआ समझा जाएगा.

(६) जहाँ कर अपवंचन के लिए कपट या जानबूझकर कोई मिथ्या कथन या तथ्यों को छिपाने जैसे कारण से किसी कर का संदाय नहीं किया गया है या कम संदाय किया गया है या त्रुटिवश प्रतिदाय किया गया है, या जहां इनपुट कर प्रत्यय को गलती से लिया गया है या उपयोग किया गया है , कर से प्रभार्य व्यक्ति,-

(एक) उपधारा (१ ) के अधीन सूचना की तामील के पूर्व, ऐसे कर की रकम को अपने स्वयं के निर्धारण के आधार पर या समुचित अधिकारी द्वारा निर्धारित कर के आधार पर धारा ५० के अधीन संदेय ब्याज और ऐसे कर के पन्द्रह प्रतिशत के समतुल्य शास्ति के साथ संदाय कर सकेगा और ऐसे संदाय की लिखित सूचना मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 18 दिसम्बर 2024

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समुचित अधिकारी को दे सकेगा और समुचित अधिकारी ऐसी सूचना प्राप्त होने पर, इस प्रकार संदत्त कर के संबंध में या इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अनुरूप देय किसी शास्ति के संबंध में उपधारा (१) के अधीन कोई सूचना तामील नहीं करेगा;

(दो) सूचना के जारी करने के साठ दिन के भीतर धारा ५० के अधीन संदेय ब्याज और ऐसे कर के पच्चीस प्रतिशत के समतुल्य शास्ति के साथ उक्त कर का संदाय कर सकेगा और ऐसा करने पर उक्त सूचना के संबंध में सभी कार्यवाहियां समाप्त हुई समझी जाएंगी.

(तीन) आदेश की संसूचना के साठ दिन के भीतर धारा ५० के अधीन उस पर संदेय ब्याज और ऐसे कर के पचास प्रतिशत के समतुल्य शास्ति के साथ कर का संदाय कर सकेगा और ऐसा करने पर, उक्त सूचना के संबंध में सभी कार्यवाहियां समाप्त हुई समझी जाएंगी.

(१०) जहां समुचित अधिकारी का यह मत है कि उपधारा (८) के खंड (एक) या उपधारा (६) के खंड (एक) के अधीन संदत्त रकम वास्तविक रूप से संदेय रकम से कम है तो वह ऐसी रकम के संबंध में, जो वास्तविक रूप से संदेय रकम से कम होती है, के लिए उपधारा ( १ ) में यथा उपबंधित सूचना जारी करने के लिए अग्रसर होगा.

(११) उपधारा (८) के खंड (एक) या खंड (दो) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी उपधारा ( ५) के खंड ( एक) के अधीन शास्ति वहां संदेय होगी जहां स्वतः निर्धारित कर की कोई रकम या कर के रूप में एकत्रित किसी रकम को ऐसे कर के संदाय की तारीख से तीस दिन की कालावधि के भीतर संदत्त नहीं किया गया है .

(१२) इस धारा के उपबंध वित्तीय वर्ष २०२४-२५ से तथा उससे आगे कर के निर्धारण के लिए लागू होंगे .

स्पष्टीकरण १ इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-

(एक) पद " उक्त सूचना के संबंध में सभी कार्यवाहियां" में धारा १३२ के अधीन कार्यवाहियां सम्मिलित नहीं होंगी ;

(दो) जहां उन्हीं कार्यवाहियों के अधीन कर का संदाय करने के लिए दायी मुख्य व्यक्ति और कुछ अन्य व्यक्तियों को सूचना जारी की जाती है, और ऐसी कार्यवाहियों को इस धारा के अधीन मुख्य व्यक्ति के विरुद्ध पूरा कर लिया गया है, तो धारा १२२ और धारा १२५ के अधीन शास्ति का संदाय करने के लिए दायी सभी व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाहियों को पूरा हुआ समझा जाएगा.

स्पष्टीकरण २ - इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, "छिपाना " पद से ऐसे तथ्यों या जानकारी को घोषित नहीं करना जिसे कराधेय व्यक्ति से इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन विवरणी, विवरण, रिपोर्ट या किसी अन्य दस्तावेज में घोषित करने की अपेक्षा है, या लिखित में मांगे जाने पर किसी सूचना को समुचित अधिकारी को प्रस्तुत करने में असफलता अभिप्रेत होगा .

धारा ७५ का २७. मूल अधिनियम की धारा ७५ में, -

संशोधन .

(क) उपधारा ( १ ) में, शब्द, कोष्ठक और अंक " धारा ७४ की उपधारा (२) और उपधारा ( १०) " के पश्चात, शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर " या ७४ क उपधारा (२) और (७) " स्थापित किए जाएं ;

(ख) उपधारा (२) के पश्चात, निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाए , अर्थात्:-

"( २क) जहां किसी अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय का यह निष्कर्ष है कि धारा ७४क की उपधारा ( ५ ) के खंड ( दो) के अधीन शास्ति इस कारण से पोषणीय नहीं है कि कर अपवंचन के लिए कपट या जानबूझकर किए गए किसी मिथ्या कथन या तथ्यों को छिपाने के आरोप उस व्यक्ति के विरुद्ध सिद्ध नहीं किए गए हैं, जिसे सूचना जारी की गई थी , ऐसे व्यक्ति द्वारा शास्ति का संदाय धारा ७४ क की उपधारा ( ५) के खंड (एक) के अधीन होगा. " ;

(ग) उपधारा (१०) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्:-

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 18 दिसम्बर 2024

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" ( १०) न्यायनिर्णयन कार्यवाहियां समाप्त हुई समझी जाएंगी, यदि आदेश धारा ७३ की उपधारा (१०) या धारा ७४ की उपधारा ( १०) या धारा ७४ क की उपधारा (७ ) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर जारी नहीं किया जाता है . ";

(घ) उपधारा ( ११) में , शब्द, कोष्ठक और अंक " धारा ७४ की उपधारा (१०) " के पश्चात्, शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर "या धारा ७४ क की उपधारा (७) " अंतःस्थापित किए जाएं ;

(ङ) उपधारा ( १२ ) में, शब्द और अंक "धारा ७३ या धारा ७४ " के पश्चात्, शब्द, अंक और अक्षर " या धारा ७४क " अंतःस्थापित किए जाएं;

(च) उपधारा ( १३) में, शब्द और अंक "धारा ७३ या धारा ७४ " के पश्चात्, शब्द, अंक और अक्षर "या धारा ७४क " अंतःस्थापित किए जाएं .

धारा १०४ का संशोधन .

२८. मूल अधिनियम की धारा १०४ की उपधारा (१ ) में, शब्द, कोष्ठक और अंक " या धारा ७४ की उपधारा (२) और उपधारा ( १० ) " के पश्चात, शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर " या ७४ क की उपधारा (२ ) और (७)" अंतःस्थापित किए जाएं.

२६. मूल अधिनियम की धारा १०७ में,-

धारा १०७ का संशोधन.

(

क) उपधारा ( ६) में, खंड (ख ) में, शब्द " पच्चीस " के स्थान पर, शब्द " बीस " स्थापित किए जाए ;

(ख) उपधारा ( ११ ) में, दूसरे परंतुक में, शब्द और अंक "धारा ७३ या धारा ७४ " के पश्चात्, शब्द, अंक और अक्षर "या धारा ७४ क " अंतःस्थापित किए जाएं.

३०. मूल अधिनियम की धारा ११२ में, -

धारा ११२ का संशोधन.

(

क) १ अगस्त, २०२४ से , उपधारा ( १) में, शब्द " उस आदेश , जिसके विरुद्ध अपील चाही गई है, अपील करने वाले व्यक्ति को संसूचना की तारीख से" के पश्चात्, शब्द " या वह तारीख , जो इस अधिनियम के अधीन अपील अधिकरण के समक्ष अपील फाइल करने के लिए, परिषद् की सिफारिशों पर, सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए , जो भी पश्चातवर्ती हो " अंतःस्थापित किए जाएं ;

(ख) १ अगस्त, २०२४ से, उपधारा (३ ) में, शब्द " उक्त आदेश पारित किया गया है " के पश्चात्, शब्द " या उस तारीख से , जो इस अधिनियम के अधीन अपील अधिकरण के समक्ष अपील फाइल करने के प्रयोजन के लिए, परिषद् की सिफारिशों पर सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए , जो भी पश्चातवर्ती हो" अंतःस्थापित किए जाएं;

(ग) उपधारा ( ६ ) में, शब्द, कोष्ठक और अंक " उपधारा (१ ) में निर्दिष्ट अवधि के अवसान के पश्चात्" , के पश्चात्, शब्द, कोष्ठक और अंक " या उपधारा ( ३ ) में निर्दिष्ट अवधि के अवसान के पश्चात्" तीन मास के भीतर आवेदन फाइल करना अनुज्ञात कर सकेगा अंतःस्थापित किए जाएं;

(घ) उपधारा ( ८) के खंड (ख) में, -

(एक) शब्द "बीस प्रतिशत " के स्थान पर, शब्द " दस प्रतिशत " स्थापित किए जाएं;

(दो) शब्द " पचास करोड़ रुपए " के स्थान पर, शब्द " बीस करोड़ रुपए" स्थापित किए जाएं .

धारा १२२ का संशोधन .

३१. मूल अधिनियम की धारा १२२ में , उपधारा (१ख) में, १ अक्टूबर, २०२३ से शब्द जो " कोई भी इलैक्ट्रानिक वाणिज्य प्रचालक, " के स्थान पर, शब्द और अंक " कोई इलैक्ट्रानिक वाणिज्य प्रचालक, जो धारा ५२ के अधीन स्त्रोत पर कर संग्रहण के लिए दायी है , " स्थापित किए जाएं.

धारा १२७ का संशोधन .

३२. मूल अधिनियम की धारा १२७ में , शब्द और अंक " धारा ७३ या धारा ७४ " के पश्चात्, शब्द, अंक और अक्षर "या धारा ७४क" अंतःस्थापित किए जाएं.

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३३. मूल अधिनियम की धारा १२८ के पश्चात, निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाए , अर्थात्:-

धारा १२८क का अंतःस्थापन .

"१२८क . (१ ) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, जहां किसी व्यक्ति द्वारा निम्नलिखित के अनुसार कर से प्रभार्य कर की कोई रकम संदेय है, -

(क) धारा ७३ की उपधारा (१) के अधीन जारी सूचना या धारा ७३ की उपधारा (३ ) के अधीन जारी कथन और जहां धारा ७३ की उपधारा (६) के अधीन कोई आदेश जारी नहीं किया गया है ; या

कतिपय कर अवधियों के लिए , धारा ७३ के अधीन की गई मांगों से संबंधित ब्याज या शास्तिया दोनों का अधित्यजन.

(ख) धारा ७३ की उपधारा ( ६) के अधीन पारित आदेश और जहां धारा १०७ की उपधारा (११ ) या धारा १०८ की उपधारा (१ ) के अधीन कोई आदेश पारित नहीं किया गया है; या

(ग) धारा १०७ की उपधारा (११ ) या धारा १०८ की उपधारा (१ ) के अधीन पारित आदेश , और जहां धारा ११३ की उपधारा (१) के अधीन कोई आदेश पारित नहीं किया गया है,

१ जुलाई , २०१७ से ३१ मार्च , २०२० की अवधि या उसके भाग से संबंधित है, और उक्त व्यक्ति, परिषद् की सिफारिशों पर सरकार द्वारा अधिसूचित की जाने वाली तारीख को या उसके पूर्व, यथास्थिति, खंड (क), खंड (ख) या खंड (ग ) में निर्दिष्ट सूचना या कथन या आदेश के अनुसार संदेय कर की पूरी रकम का संदाय करता है , धारा ५० के अधीन कोई ब्याज और इस अधिनियम के अधीन कोई शास्ति संदेय नहीं होगी और, यथास्थिति, उक्त सूचना या आदेश या कथन के संबंध में सभी कार्यवाहियां ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए , जो विहित की जाएं, समाप्त हुई समझी जाएंगी;

परंतु जहां धारा ७४ की उपधारा (१) के अधीन कोई सूचना जारी की गई है और धारा ७५ की उपधारा (२) के उपबंधों के अनुसार अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय के निर्देश के अनुसरण में, समुचित अधिकारी द्वारा कोई आदेश पारित किया जाता है या पारित किया जाना अपेक्षित है, यथास्थिति, उक्त सूचना या आदेश, इस उपधारा के खंड (क ) या खंड (ख) में निर्दिष्ट सूचना या आदेश माना जाएगाः

परंतु यह और कि उन मामलों में, जहां आवेदन धारा १०७ की उपधारा (३ ) या धारा ११२ की उपधारा (३) के अधीन फाइल किया जाता है या धारा ११७ की उपधारा (१ ) के अधीन या धारा ११८ की उपधारा (१ ) के अधीन राज्य कर के किसी अधिकारी द्वारा अपील फाइल की जाती है या जहां खंड (ख ) या खंड (ग) में निर्दिष्ट किसी आदेश के विरुद्ध या पहले परंतुक में निर्दिष्ट अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय के निर्देशों के विरुद्ध धारा १०८ की उपधारा (१ ) के अधीन कोई कार्यवाहियां आरंभ की जाती हैं, वहां इस उपधारा के अधीन कार्यवाहियों की समाप्ति इस शर्त के अधीन होगी कि उक्त व्यक्ति उक्त आदेश कीतारीख से तीन मास के भीतर, यथास्थिति, अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय या पुनरीक्षण प्राधिकारी के आदेश के अनुसार संदेय कर की अतिरिक्त रकम, यदि कोई हो, का संदाय करता है:

परंतु यह भी कि जहां ऐसा ब्याज और शास्ति पहले ही संदत्त कर दी गई है, उसका कोई प्रतिदाय उपलब्ध नहीं होगा.

(२) उपधारा (१) में अंतर्विष्ट कोई बात, त्रुटिवश प्रतिदाय के मद्दे किसी व्यक्ति के द्वारा संदेय किसी रकम के संबंध में लागू नहीं होगी.

(३) उपधारा (१ ) की कोई बात , उन मामलों के संबंध में लागू नहीं होगी, जहां, यथास्थिति, अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय के समक्ष उक्त व्यक्ति द्वारा फाइल की गई कोई अपील या रिट याचिका लंबित है , और उक्त व्यक्ति द्वारा उपधारा (१ ) के अधीन अधिसूचित तारीख को या उसके पूर्व वापस नहीं ली गई है.

(४ ) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां उपधारा (१) के अधीन विनिर्दिष्ट कोई रकम संदत्त की गई है और उक्त उपधारा के अधीन कार्यवाहियां समाप्त हुई समझी जाती हैं, वहां धारा १०७ की उपधारा (१ ) या धारा ११२ की उपधारा (१ ) के अधीन कोई अपील, यथास्थिति, उपधारा (१ ) के खंड (ख) और खंड (ग) में निर्दिष्ट किसी आदेश के विरुद्ध नहीं होगी. " .

706 (9) मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 18 दिसम्बर 2024

३४. मूल अधिनियम की धारा १७१ में,-

धारा १७१ का संशोधन.

(क) उपधारा (२ ) में, पूर्ण विराम के स्थान पर कोलन स्थापित किया जाए और तत्पश्चात्, निम्नलिखित परंतुक और स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएं, अर्थात्ः-

"परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा, उस तारीख को विनिर्दिष्ट कर सकेगी , जिससे उक्त प्राधिकारी इस बारे में परीक्षा के लिए कोई अनुरोध स्वीकार नहीं करेगा कि क्या किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा लिए गए इनपुट कर प्रत्ययों या कर की दर में कमी वास्तव में उसके द्वारा प्रदाय किए गए माल या सेवाओं या दोनों की कीमत में आनुपातिक कमी के समरूप है.

स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए , "परीक्षा के लिए अनुरोध " से इस बारे में कि क्या किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा लिए गए इनपुट कर प्रत्ययों या कर की दर में कमी से वास्तव में उसके द्वारा प्रदाय किए गए माल या सेवाओं या दोनों की कीमत में आनुपातिक कमी हुई है, परीक्षा का अनुरोध करने के लिए आवेदक द्वारा फाइल किया गया लिखित आवेदन अभिप्रेत है." ;

(ख) स्पष्टीकरण को उसके स्पष्टीकरण १ के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाए और इस प्रकार पुनः संख्याकित स्पष्टीकरण १ के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

'स्पष्टीकरण २- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, पद " प्राधिकारी " के अंतर्गत " अपील अधिकरण" सम्मिलित होगा .

अनुसूची ३ का संशोधन .

३५. मूल अधिनियम की अनुसूची ३ में, पैरा ८ के पश्चात् और स्पष्टीकरण १ के पूर्व, निम्नलिखित पैरा अंतःस्थापित किए जाएं, अर्थात

"६. इस शर्त के अधीन रहते हुए कि मुख्य बीमाकर्ता, बीमा किए गए व्यक्ति द्वारा संदत्त प्रीमियम की संपूर्ण रकम पर केंद्रीय कर, राज्य कर, संघ राज्यक्षेत्र कर और एकीकृत कर का संदाय करता है, सह बीमा करारों में बीमा किए गए व्यक्ति को मुख्य बीमाकर्ता और सह- बीमाकर्ता द्वारा संयुक्त रूप से प्रदाय की गई बीमा सेवाओं के लिए मुख्य बीमाकर्ता द्वारा सह- बीमाकर्ता को सह-बीमा प्रीमियम के प्रभाजन का क्रियाकलाप.

१०. इस शर्त के अधीन रहते हुए कि पुनःबीमाकर्ता, बीमाकर्ता द्वारा उक्त अध्यर्पित कमीशन या पुनः बीमा कमीशन सहित संदत्त सकल पुनः बीमा प्रीमियम पर केंद्रीय कर, राज्य कर, संघ राज्यक्षेत्र कर और एकीकृत कर का संदाय करता है, बीमाकर्ता द्वारा पुनः बीमाकर्ता को सेवाएं , जिसके लिए अध्यर्पित कमीशन या पुनः बीमा कमीशन पुनः बीमाकर्ता को बीमाकर्ता द्वारा संदत्त पुनः बीमा प्रीमियम से कटौती किया जाता है.".

संदत्त करों या ३६. उन सभी संदत करों या प्रतिलोम इनपुट कर प्रत्यय का कोई भी प्रतिदाय नहीं किया जाएगा, जिनका इस प्रकार संदाय या प्रतिलोम नहीं गया होता , यदि इस अधिनियम की धारा ६ सभी तात्तिवक समयों पर प्रवृत्त होती.

प्रतिलोम इनपुट कर प्रत्यय का कोई प्रतिदाय न किया जाना.

उद्देश्यों और कारणों का कथन

मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ में निम्नानुसार संशोधन किये गये हैं-

१. विधेयक का खण्ड २, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ६ की उपधारा (१) का संशोधन करने के लिए है , जिससे मानवीय उपभोग के लिए एल्कोहाली लिकर के विनिर्माण के लिए प्रयुक्त अतिरिक्त निष्प्रभावी ऐल्कोहल या परिशोधित स्पिरिट पर राज्य कर का उद्ग्रहण न किया जा सके .

२. विधेयक का खण्ड ३, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा १० की उपधारा (५) में पारिणामिक संशोधन करने के लिए है, जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४ क के प्रति निर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

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३. विधेयक का खण्ड ४ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम में एक नई धारा ११ क अंतःस्थापित करने के लिए है, जिससे सरकार को राज्य कर के गैर- उद्ग्रहण या कम उग्रहण को विनियमित करने के लिए सशक्त किया जा सके, जहां उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसा गैर - उद्ग्रहण या कम उग्रहण साधारण पद्धति का परिणाम था.

४. विधेयक का खण्ड ५, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा १३ की उपधारा ( ३ ) का संशोधन करने के लिए है, जिससे उन मामलों में जहां प्रतिलोम प्रभार पूर्तियों में सेवाओं के प्राप्तिकर्ता द्वारा बीजक जारी किया जाना अपेक्षित है, वहां सेवाओं की प्रदाय के समय को विनिर्दिष्ट किया जा सके.

५. विधेयक का खण्ड ६, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा १६ में एक नई उपधारा ( ५ ) अंतःस्थापित करने के लिए है, जिससे विद्यमान उपधारा (४ ) के अपवाद को अपवर्जित किया जा सके और यह उपबंध किया जा सके कि वित्तीय वर्ष २०१७-१८, २०१८-१६, २०१६-२० और २०२०-२१ के लिए बीजक या नामे नोट के संबंध में रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति धारा ३६ के अधीन किसी विवरणी में, जिसे ३० नवंबर, २०२१ तक फाइल किया जाना है, इनपुट कर प्रत्यय लेने का हकदार होगा.

यह खंड उक्त धारा में एक नई उपधारा (६) अंतःस्थापित करने का भी प्रस्ताव करता है, जिससे, यथास्थिति, रजिस्ट्रीकरण के रकरण की तारीख से या रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण की प्रभावी तारीख से अवधि के लिए फाइल की गई किसी विवरणी में, किसी बीजक या नामे नोट की बाबत इनपुट कर प्रत्यय के लिए जाने को, रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के प्रतिसंहरण के आदेश की तारीख के तीस दिन के भीतर , रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के प्रतिसंहरण के आदेश की तारीख तक, इस शर्त के अधीन रहते हुए अनुज्ञात किया जा सके कि उक्त बीजक या नामे नोट के संबंध में प्रत्यय के लिए जाने के लिए समय - सीमा रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के आदेश की तारीख को उक्त धारा की उपधारा (४) के अधीन पहले ही समाप्त न हो गई हो.

पूर्वोक्त संशोधन १ जुलाई, २०१७ से प्रभावी किए जाने का प्रस्ताव है.

इसके अतिरिक्त यह प्रस्तावित है कि जहां कर का संदाय किया गया है या इनपुट कर प्रत्यय का प्रतिलोम किया गया है, वहां इसका कोई प्रतिदाय अनुज्ञेय नहीं होगा.

६. विधेयक का खण्ड ७ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा १७ की उपधारा (५) का संशोधन करने के लिए है , जिससे उक्त अधिनियम की धारा ७४ के अधीन संदत्त कर के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय की अनुपलब्धता को केवल वित्तीय वर्ष २०२३-२४ तक की मांगों के संबंध में निर्बधित किया जा सके.

यह खंड उक्त, उपधारा में धारा १२६ और धारा १३० के निर्देश को हटाने का भी प्रस्ताव करता है.

७. विधेयक का खण्ड ८ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा २१ में पारिणामिक संशोधन करने के लिए है, जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४क के प्रतिनिर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

८. विधेयक का खण्ड ६ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ३० की उपधारा (२ ) में एक नया परंतुक अंतःस्थापित करने के लिए है , जिससे राज्य सरकार को रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण को प्रतिसंहरण के लिए शर्तों और निबंधनों को विहित करने हेतु नियमों द्वारा सशक्त किया जा सके.

६. विधेयक का खण्ड १० , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ३१ की उपधारा (३ ) के खंड (च ) का संशोधन करने के लिए है, जिससे राज्य सरकार को प्रतिलोम प्रभार तंत्र प्रदाय के मामले में प्राप्तकर्ता द्वारा बीजक जारी किए जाने के लिए अवधि को नियमों द्वारा विहित करने के लिए सशक्त किया जा सके.

उक्त धारा की उपधारा (३) में एक स्पष्टीकरण अंतःस्थाप्रित करने का भी प्रस्ताव है, जिससे यह विनिर्दिष्ट किया जा सके कि उक्त अधिनियम की धारा ५१ के अधीन स्त्रोत पर कर कटौती के प्रयोजनों के लिए एक मात्र रूप से रजिस्ट्रीकृत प्रदायकर्ता उक्त अधिनियम की धारा ३१ की उपधारा (३ ) के खण्ड (च) के प्रयोजनों के लिए रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति नहीं समझा जाएगा.

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706 ( 11 )

१०. विधेयक का खण्ड ११ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ३५ की उपधारा ( ६) का पारिणामिक संशोधन करने के लिए है, जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४ क के प्रति निर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

११. विधेयक का खण्ड १२ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ३६ की उपधारा ( ३) को स्थापित करने के लिए है , जिससे स्त्रोत पर कर कटौती करने के लिए अपेक्षित रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के लिए यह आज्ञापक बनाया जा सके कि वे , इस बात पर ध्यान दिए बिना कि क्या उनके द्वारा उक्त मास में कोई कटौती की गई है या नहीं, प्रत्येक मास के लिए इलैक्ट्रानिक रूप से विवरणी प्रस्तुत करे.

यह सरकार को नियमों द्वारा प्ररूप , रीति और ऐसे समय को विहित करने के लिए भी सशक्त करता है जिसके भीतर ऐसी विवरणी फाइल की जाएगी.

१२. विधेयक का खण्ड १३ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ४६ की उपधारा (८) में पारिणामिक संशोधन करने के लिए है, जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४क के प्रतिनिर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

१३. विधेयक का खण्ड १४, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ५० की उपधारा (१ ) में पारिणामिक संशोधन करने के लिए है, जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४ क के प्रतिनिर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

१४. विधेयक का खण्ड १५ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ५१ की उपधारा (७) में पारिणामिक संशोधन करने के लिए है, जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४ क के प्रतिनिर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

१५. विधेयक का खण्ड १६, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ५४ में एक नई उपधारा ( १५) अंतःस्थापित करने के लिए है, जिससे उपधारा ( ३) के दूसरे परंतुक का लोप किया जा सके और यह उपबंध किया जा सके कि जहां ऐसा माल निर्यात शुल्क के अध्यधीन है, वहां अनुपयोजित इनपुट कर प्रत्यय या एकीकृत कर का कोई प्रतिदाय माल के शून्य रेटेड पूर्ति के मामलों में अनुज्ञात नहीं किया जाएगा.

१६. विधेयक का खण्ड १७ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ६१ की उपधारा (३) में पारिणामिक संशोधन करने के लिए है, जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४ क के प्रतिनिर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

१७. विधेयक का खण्ड १८, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ६२ की उपधारा (१ ) में पारिणामिक संशोधन करने के लिए है, जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४क के प्रतिनिर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

१८. विधेयक के खण्ड १६, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ६३ में पारिणामिक संशोधन करने के लिए है, जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४क के प्रतिनिर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

१६. विधेयक का खण्ड २० , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ६४ की उपधारा (२) में पारिणामिक संशोधन करने के लिए है, जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४ क के प्रतिनिर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

२०. विधेयक का खण्ड २१ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ६५ की उपधारा (७) में पारिणामिक संशोधन करने के लिए है, जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४ क के प्रतिनिर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

२१. विधेयक का खण्ड २२, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ६६ की उपधारा ( ६) में पारिणामिक संशोधन करने के लिए है, जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४ क के प्रतिनिर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

२२. विधेयक का खण्ड २३, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ७० में एक नई उपधारा (१क) अंतःस्थापित करने के लिए है, जिससे समन किए गए व्यक्ति की ओर से प्राधिकृत प्रतिनिधि को समुचित अधिकारी के समक्ष उक्त अधिकारी द्वारा जारी समन के अनुपालन में उपस्थित होने के लिए समर्थ बनाया जा सके.

२३. विधेयक का खण्ड २४, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ७३ में एक नई उपधारा (१२ ) अंतःस्थापित करने के लिए है, जिससे वित्तीय वर्ष २०२३-२४ तक की अवधि से संबंधित कर अवधारण के लिए उक्त धारा के लागू होने को निर्बधित किया जा सके.

यह खंड उक्त धारा के पार्श्वशीर्ष को तदनुसार संशोधित करने का भी प्रस्ताव करता है.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 18 दिसम्बर 2024

706(12)

२४. विधेयक का खण्ड २५, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ७४ में एक नई उपधारा ( १२) अंतःस्थापित करने के लिए है, जिससे वित्तीय वर्ष २०२३-२४ तक की अवधि से संबंधित कर अवधारण के लिए उक्त धारा के लागू होने को निर्बधित किया जा सके.

यह खंड उक्त धारा के पार्श्वशीर्ष को तदनुसार संशोधित करने का भी प्रस्ताव करता है.

२५. विधेयक का खण्ड २६, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम में एक नई धारा ७४ क अंतःस्थापित करने के लिए है , जिससे वित्तीय वर्ष २०२४-२५ से किसी कारणवश असंदत्त या कम संदत्त या त्रुटिवश प्रतिदत्त या गलती से लिए गए या अनुपयोजित इनपुट कर प्रत्यय के अवधारण के लिए उपबंध किया जा सके.

खंड वित्तीय वर्ष २०२४-२५ से कपट, जानबूझकर मिथ्या कथन या तथ्यों को दबाने को अंतर्वलित करने वाले मामलों के लिए , उच्चतर शास्ति रखते हुए , आगे इस बात को ध्यान में न रखते हुए कि क्या कपट, तथ्यों को छिपाने या जानबूझकर मिथ्या कथन करने के आरोप लगाए जाते हैं या नहीं, मांगों के संबंध में मांग सूचनाएं और आदेश जारी करने के लिए समान सीमा अवधि का भी उपबंध करता है.

२६. विधेयक का खण्ड २७ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ७५ में एक नई उपधारा (२ क) अंतःस्थापित करने के लिए है, जिससे उन मामलों में, जहां कपट, जानबूझकर मिथ्या कथन करने या तथ्यों को छिपाने के आरोप सिद्ध नहीं होते हैं , वहां उक्त धारा की उपधारा ( ५ ) के खंड (एक) के अनुसार, शास्ति का पुनः अवधारण करने के लिए उक्त अधिनियम की प्रस्तावित धारा ७४क की उपधारा (५ ) के खंड (दो) के अधीन शास्तिक उपबंध करने वाली सूचना में मांग की गई शास्ति के पुनः अवधारण का उपबंध किया जा सके.

यह खंड उक्त अधिनियम की धारा ७५ में पारिणामिक संशोधन करने के लिए भी है, जिससे प्रस्तावित धारा ७४क या उसकी सुसंगत उपधाराओं के प्रतिनिर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

२७. विधेयक का खण्ड २८ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा १०४ की उपधारा (१ ) में पारिणामिक संशोधन करने के लिए है, जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४ क की उपधारा (२) और उपधारा (७ ) के प्रति निर्देश को सम्मिलित किया जा सके .

२८. विधेयक का खण्ड २६, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा १०७ की उपधारा (६) का संशोधन करने के लिए है, जिससे अपील प्राधिकारी के समक्ष अपील फाइल करने के लिए पूर्व-निक्षेप की अधिकतम रकम को राज्य कर में पच्चीस करोड़ रुपए से घटाकर बीस करोड़ रुपए किया जा सके.

खंड उक्त धारा की उपधारा (११ ) में पारिणामिक संशोधन करने का भी प्रस्ताव करता है , जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४क के प्रतिनिर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

२६. विधेयक का खण्ड ३० , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा ११२ की उपधारा (१ ) और उपधारा (३) का संशोधन करने के लिए है , जिससे सरकार को अपील अधिकरण के समक्ष अपील फाइल करने के लिए तारीख अधिसूचित करने हेतु और अपीलें या आवेदन फाइल करने के लिए पुनरीक्षित समय- सीमा का उपबंध करने के लिए सशक्त किया जा सके.

यह प्रस्ताव है कि उक्त संशोधनों को १ अगस्त, २०२४ से प्रभावी किया जाए.

यह खंड उक्त धारा की उपधारा ( ६) का संशोधन करने के लिए भी है, जिससे उक्त विनिर्दिष्ट छह मास की समय - सीमा के अवसान के पश्चात् तीन मास के भीतर विभाग द्वारा फाइल की गई अपील को ग्रहण करने के लिए अपील अधिकरण को समर्थ बनाया जा सके.

इसके अतिरिक्त , यह खंड उक्त धारा की उपधारा (८) का संशोधन करने के लिए भी है, जिससे अपील अधिकरण के समक्ष अपील फाइल करने के लिए पूर्व- निक्षेप की अधिकतम रकम को विवादग्रस्त कर की विद्यमान बीस प्रतिशत से दस प्रतिशत किया जा सके तथा पूर्व-निक्षेप के रूप में संदेय अधिकतम रकम को भी राज्य कर में पचास करोड़ रुपए से घटाकर बीस करोड़ रुपए किया जा सके.

३०. विधेयक का खण्ड ३१, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा १२२ की उपधारा (१ ख) का संशोधन करने के लिए है, जिससे उक्त उपधारा के लागू होने को इलैक्ट्रानिक वाणिज्यि प्रचालकों तक निर्बधित किया जा सके, जिनसे उक्त अधिनियम की धारा ५२ के अधीन स्त्रोत पर कर संग्रहण करना अपेक्षित है.

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 18 दिसम्बर 2024

उक्त संशोधन को १ अक्टूबर, २०२३ से प्रभावी किए जाने का प्रस्ताव है, जब उक्त उपधारा प्रवृत्त हुई थी.

३१. विधेयक का खण्ड ३२ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा १२७ का पारिणामिक संशोधन करने के लिए है , जिससे प्रस्तावित नई धारा ७४ क के प्रतिनिर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

३२. विधेयक का खण्ड ३३, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम में एक नई धारा १२८क अंतःस्थापित करने के लिए है, जिससे वित्तीय वर्ष २०१७-१८, २०१८-१६ और २०१६-२० के लिए उक्त अधिनियम की धारा ७३ के अधीन जारी त्रुटिवश प्रतिदाय के संबंध में मांग सूचनाओं के सिवाय मांग सूचनाओं के संबंध में ब्याज और शास्ति के सशर्त अधित्यजन के लिए उपबंध किया जा सके.

इसके अतिरिक्त, यह भी प्रस्ताव है कि उन मामलों में, जहां उक्त वित्तीय वर्षों के लिए किसी मांग के संबंध में ब्याज और शास्ति का पहले ही संदाय किया जा चुका है, उनके लिए कोई भी प्रतिदाय अनुज्ञेय नहीं होगा.

३३. विधेयक का खण्ड ३४ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा १७१ की उपधारा (२ ) का संशोधन करने के लिए है , जिससे सरकार को उस तारीख को अधिसूचित करने के लिए सशक्त बनाया जा सके, जिससे उक्त धारा के अधीन प्राधिकारी मुनाफाखोरी निरोधी मामलों के लिए कोई आवेदन स्वीकार नहीं करेगा.

एक स्पष्टीकरण अंतःस्थापित करने का भी प्रस्ताव है, जिससे उक्त धारा के अधीन " प्राधिकारी " पद में "अपील प्राधिकारी " के निर्देश को सम्मिलित किया जा सके.

३४. विधेयक का खण्ड ३५ , मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम की अनुसूची ३ का संशोधन करने के लिए है, जिससे यह उपबंध किया जा सके कि सह- बीमा करारों में बीमा किए गए व्यक्ति को मुख्य बीमाकर्ता और सह- बीमाकर्ता द्वारा संयुक्त रूप से पूर्ति की गई बीमा सेवाओं के लिए मुख्य बीमाकर्ता द्वारा सह- बीमाकर्ता को सह- बीमा प्रीमियम के प्रभाजन का क्रियाकलाप न तो माल का प्रदाय और न ही सेवाओं का प्रदाय मानी जाएगीः

परंतु यह कि मुख्य बीमाकर्ता बीमा किए गए व्यक्ति द्वारा संदत्त संपूर्ण प्रीमियम की रकम पर कर दायित्व का संदाय करे.

खण्ड यह भी उपबंध करने का प्रस्ताव करता है कि बीमाकर्ता द्वारा पुनः बीमाकर्ता को ऐसी सेवाएं , जिनके लिए अध्यर्पित कमीशन या पुनःबीमा कमीशन , पुनःबीमाकर्ता को बीमाकर्ता द्वारा संदत्त पुनःबीमा प्रीमियम से कटौती किया जाता है, न तो माल की प्रदाय और न ही सेवाओं की प्रदाय मानी जाएगी, परंतु यह कि पुनःबीमा कमीशन या अध्यर्पित कमीशन सहित सकल पुनः बीमा प्रीमियम पर कर दायित्व पुनः बीमाकर्ता द्वारा संदत्त किया जाता है.

३५. विधेयक का खण्ड ३६, यह उपबंध करने के लिए है कि ऐसी सभी संदत्त करों या प्रतिलोम इनपुट कर प्रत्यय में से कोई प्रतिदाय नहीं किया जाएगा, जो इस प्रकार संदत्त नहीं किए गए होते या प्रतिलोम नहीं किए होते मानो उक्त धारा ६ सभी तात्विक समयों पर प्रवृत्त हुईहोती.

३६. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.

जगदीश देवड़ा भोपाल:

भारसाधक सदस्य .

दिनांक 16 दिसम्बर , २०२४.

"संविधान के अनुच्छेद २०७ के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित." .

ए. पी. सिंह

प्रमुख सचिव ,

मध्यप्रदेश विधान सभा.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 18 दिसम्बर 2024

706 (14)

प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में व्याख्यात्मक ज्ञापन.

प्रत्यायोजित विधि निर्माण संबंधी ज्ञापन

प्रस्तावित विधेयक के जिन खण्डों द्वारा विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन राज्य सरकार को किया जा रहा है , उनका विवरण निम्नानुसार है:-

खण्ड १

अधिनियम के विभिन्न उपबंधों को विभिन्न तारीखों को अधिसूचना जारी कर लागू करने;

खण्ड ४ :- राज्य कर के गैर- उद्ग्रहण या कम उग्रहण को विनियमित करने के लिए सशक्त करने तथा अधिसूचना के माध्यम से कर से छूट प्रदान किये जाने;

खण्ड ६ :- रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण को प्रतिसंहरण के लिए शर्तों और निबंधनों को विहित किये जाने;

खण्ड १०क:- प्रतिलोम प्रभार तंत्र पूर्तियों के मामले में प्राप्तकर्ता द्वारा बीजक जारी किए जाने की अवधि विहित किये जाने;

खण्ड १२ :- स्रोत पर कर कटौती करने के लिए इलैक्ट्रानिक रूप से विवरणी प्रस्तुत करने का प्ररूप , प्रक्रिया एवं समय सीमा विहित किये जाने;

खण्ड २६ : - धारा ७४ क के अंतर्गत सूचना पत्र जारी करने के पश्चात आदेश जारी करने की समय सीमा को बढाये जाने;

खण्ड ३३ :- वित्तीय वर्ष २०१७-१८, २०१८-१६ और २०१६-२० के लिए उक्त अधिनियम की धारा ७३ के अधीन जारी त्रुटिवश प्रतिदाय के संबंध में मांग सूचनाओं के सिवाय मांग सूचनाओं के संबंध में ब्याज और शास्ति के सशर्त अधित्यजन किये जा सकने के लिए कर राशि जमा करने की तिथि के संबंध अधिसूचना जारी किये जाने तथा समस्त कार्यवाहियों की समाप्ति के लिए शर्ते विहित किये जाने; तथा

खण्ड ३४ :- उस तारीख को जिससे उक्त धारा के अधीन प्राधिकारी मुनाफाखोरी निरोधी मामलों के लिए कोई आवेदन स्वीकार नहीं करेगा, संबंधी अधिसूचना जारी किये जाने;

के संबंध में नियम बनाये जायेगें, जो सामान्य स्वरूप के होंगे.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2024 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 18 December 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2024-12-18.353.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2024-12-18.353.Extraordinary.