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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2025....

Published 21 March 2025

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
97
Identifier
in.gazette.madhya.2025-03-21.97.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
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मध्यप्रदेश शासन

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सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

भोपाल , शुक्रवार, दिनांक 21 मार्च 2025- फाल्गुन 30, शक 1946

क्रमांक 97]

विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश

भोपाल , दिनांक 21 मार्च 2025

क्र. 5780- मप्रविस - 16- विधान-2025. मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक , 2025 (क्रमांक 4 सन् 2025) जो विधान सभा में दिनांक 21 मार्च 2025 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.

ए. पी . सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा .

193 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025

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मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक ४ सन् २०२५

मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक , २०२५

विषय- सूची

खण्ड:

१. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ .

२. धारा २ का संशोधन .

३. धारा ७ का संशोधन.

४. धारा ६ का संशोधन .

५. धारा ११ का संशोधन .

६. धारा १४ का संशोधन.

७. धारा १६ - ग का अंतःस्थापन .

८. धारा २४ का स्थापन .

६. धारा ४६ का संशोधन .

१०. धारा ५३ का संशोधन .

११. धारा ७० का संशोधन .

१२. धारा ७७ का संशोधन .

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025

194 (1)

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक ४ सन् २०२५

मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी ( संशोधन) विधेयक , २०२५ मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम , १६६० को और संशोधित करने हेतु विधेयक .

भारत गणराज्य के छिहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान - मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

१. (१ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी ( संशोधन) अधिनियम , २०२५ है .

संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.

(२) यह मध्यप्रदेश राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा .

धारा २ का संशोधन .

२. मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम , १६६० ( क्रमांक १७ सन् १६६१) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा २ में , -

(एक) खण्ड ( क-दो) में , शब्द " सोसाइटी के उसी वर्ग " के पश्चात्, शब्द " या सोसाइटी से संबंधित वित्तीय बैंक का कोई अधिकारी " अतःस्थापित किए जाएं .

(दो) खण्ड ( ग - चार) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाए , अर्थात्ः-

" ( ग - पांच) " सहकारी सार्वजनिक निजी भागीदारी " से अभिप्रेत है , धारा १६ - सी के अधीन सहकारी समिति या समितियों के समूह द्वारा सार्वजनिक और निजी संगठनों के साथ की गई भागीदारी व्यवस्था; " .

(तीन) खण्ड ( ढ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए , अर्थात्ः-

" (ढ) 'गृह निर्माण सोसाइटी' से अभिप्रेत है , ऐसी सोसाइटी जिसका उद्देश्य उसके सदस्यों को गृह निर्माण के लिये भूखण्ड उपलब्ध कराना है और इसमें सम्मिलित है निम्न सघनता का गृह निर्माण, निवास स्थान या प्रकोष्ठ और /या यदि भू- खण्ड, निवास स्थान या प्रकोष्ठ ( फ्लेट) पूर्व में ही अर्जित कर लिए हों तो सहकारी सिद्धांतों के अनुसार पारस्परिक सहायता से उसके सदस्यों को सामान्य सुख - सुविधाएं और यदि आवश्यक हो , गृह निर्माण वित्त पोषण उपलब्ध कराना .

स्पष्टीकरणः- गृह निर्माण सोसाइटी के सदस्य को सामान्य क्षेत्र की व्यवस्था और सुविधाएं और सेवाएं उपलब्ध कराने का कार्य मध्यप्रदेश प्रकोष्ठ स्वामित्व अधिनियम , २००० (क्रमांक १५ सन् २००१) के अधीन गठित संगठन द्वारा किया जाएगा . " .

धारा ७ का संशोधन.

३. मूल अधिनियम की धारा ७ में , उपधारा ( २) में, खण्ड (क) में, शब्द "दस " के स्थान पर, शब्द " बीस " स्थापित किया जाए .

४. मूल अधिनियम की धारा ६ में, उपधारा ( ३) के स्थान पर , निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए , अर्थात्ः- धारा ६ का संशोधन .

" ( ३) रजिस्ट्रार किसी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन प्राप्त होने की तारीख से , प्राथमिक सोसाइटी की दशा में तीस दिन तथा समस्त अन्य सोसाइटियों की दशा में पैंतालीस दिन के भीतर, विनिश्चय करेगा तथा ऐसे प्ररूप में , जैसा कि विहित किया जाए , रजिस्ट्रीकरण का प्रमाण-पत्र जारी करेगाः

परन्तु जहां रजिस्ट्रार , नियत की गई कालावधि के भीतर ऐसे आवेदन का निपटारा करने में असफल रहता है तो सोसाइटी और उसकी उपविधियां रजिस्ट्रीकृत कर दी गई समझी जाएंगी , रजिस्ट्रार ऐसे मामलों में , सोसाइटी के डीम्ड रजिस्ट्रेशन के पन्द्रह दिन के भीतर रजिस्ट्रीकरण का प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए आबद्ध होगा . " .

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025

194(2)

धारा ११ का संशोधन .

५. मूल अधिनियम की धारा ११ में , उपधारा ( ३ ) में , विद्यमान परंतुक के स्थान पर , निम्नलिखित परंतुक स्थापित किया जाए , अर्थात्ः-

"परन्तु जहां रजिस्ट्रार , पूर्वोक्त कालावधि के भीतर ऐसे आवेदन का निपटारा करने में असफल रहता है तो उपविधियों का संशोधन रजिस्ट्रीकृत कर दिया गया समझा जाएगा. " .

६. मूल अधिनियम की धारा १४ में , उपधारा ( १) के स्थान पर , निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए , अर्थात्ः- धारा १४ का संशोधन .

"( १) जहां किसी सोसाइटी को धारा ६ के अधीन रजिस्ट्रीकरण का कोई प्रमाण - पत्र दिया गया है वहां ऐसा प्रमाण -पत्र इस बात का कि उसमें वर्णित सोसाइटी सम्यक् रूपेण रजिस्ट्रीकृत है, निश्चायक साक्ष्य होगा जब तक कि यह साबित न कर दिया जाए कि उस सोसाइटी का रजिस्ट्रीकरण बाद में रद्द कर दिया गया है. " .

७. मूल अधिनियम की धारा १६ - बी के पश्चात्, निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः- धारा १६ - सी का अंतःस्थापन .

" १६ -सी. समितियों द्वारा भागीदारी . कोई भी सहकारी समिति या समितियों का समूह रजिस्ट्रार की अनुज्ञा से साधारण सम्मिलन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा समिति की उपविधियों के अधीन अनुज्ञेय किसी विशिष्टि व्यवसाय या सेवाओं को चलाने के लिए सार्वजनिक और निजी व्यवसाय संगठनों के साथ ऐसे निबंधन और शर्तों पर जैसी कि सहकारी सार्वजनिक निजी भागीदारी के रूप में परस्पर सहमत हो, करार कर सकेंगी . " .

८. मूल अधिनियम की धारा २४ के स्थान पर , निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए , अर्थात्: -

धारा २४ का स्थापन .

" २४. किसी सदस्य द्वारा अंश- पूंजी धारण करने पर निर्बन्धन. किसी भी सोसाइटी में , राज्य सरकार या किसी अन्य सोसाइटी से भिन्न कोई भी सदस्य सोसाइटी की कुल अंश-पूंजी के एक पंचमांश से अनधिक, उसके ऐसे भाग से अधिक धारण नहीं करेगा , जैसा कि विहित किया जाएः

परन्तु राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा , सोसाइटियों के किसी वर्ग की बावत् ऐसा अधिकतम परिमाण विनिर्दिष्ट कर सकेगी जो यथास्थिति अंश-पूंजी के एक पंचमांश से अधिक होगा . " .

६. मूल अधिनियम की धारा ४६ में , -

धारा ४६ का संशोधन.

मूल अधिनियम की धारा ४६ में , उपधारा (७ -ए) में, खण्ड (ग) के स्थान पर , निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

"(ग) विशेष परिस्थितियों में , राज्य सरकार, लिखित में कारणों को अभिलिखित करते हुए , किसी सोसाइटी का निर्वाचन कराए जाने की अवधि को आगे बढ़ा सकेगी . " .

१०. मूल अधिनियम की धारा ५३ में, -

धारा ५३ का संशोधन .

(एक) उपधारा ( १ ) में , विद्यमान प्रथम परंतुक के स्थान पर , निम्नलिखित परंतुक स्थापित किया जाए , अर्थात्ः-

"परंतु विशेष परिस्थितियों में, राज्य सरकार, लिखित में कारणों को अभिलिखित करते हुए , प्रशासक की पदावधि को अतिरिक्त कालावधि के लिए आगे बढ़ा सकेगी ." .

( दो) उपधारा ( १२) में , विद्यमान तृतीय परंतुक के स्थान पर , निम्नलिखित परंतुक स्थापित किया जाए , अर्थात्ः-

"परंतु यह और कि विशेष परिस्थितियों में , राज्य सरकार, लिखित में कारणों को अभिलिखित करते हुए , सोसाइटी के चुनाव करवाने के लिए कालावधि को आगे बढ़ा सकेगी; " .

194(3)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 21 मार्च 2025

(तीन) उपधारा ( १३) में , खण्ड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए , अर्थात्ः

"(क) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , किसी सहकारी बैंक की दशा में , यदि रिजर्व बैंक द्वारा , जनहित में या निक्षेपकर्ताओं के हितों के विपरीत रीति में किए जा रहे सहकारी बैंकों के मामलों को रोकने या सहकारी बैंक का उचित प्रबंध सुनिश्चित करने के लिए , वैसी अपेक्षा की जाए तो रजिस्ट्रार द्वारा , संचालक मंडल को हटाने के लिए तथा सहकारी बैंक के कामकाज का प्रबंध करने के लिए उतनी कालावधि या कालावधियों के लिए प्रशासक नियुक्त करने के लिए जितनी कि रिजर्व बैंक द्वारा समय - समय पर विनिर्दिष्ट की जाए , आदेश किया जाएगा और इस प्रकार नियुक्त किया गया प्रशासक नई गठित संचालक मंडल का प्रथम सम्मिलन आयोजित होने के दिन से अव्यवहित पूर्व की तारीख तक पद पर बना रहेगा . " .

११. मूल अधिनियम की धारा ७० में , उपधारा (२ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः थारा ७० का संशोधन.

"(३) परिसमापन के आदेश की तारीख से सामान्यतया एक वर्ष की कालावधि के भीतर परिसमापन की कार्यवाही पूर्ण कर दी जाएगी और उक्त एक वर्ष की कालावधि की समाप्ति के पश्चात्, रजिस्ट्रार कारणों को अभिलिखित करते हुए कालावधि को आगे बढ़ा सकेगा. " .

१२. मूल अधिनियम की धारा ७७ में, -

धारा ७७ का संशोधन .

उपधारा ( २ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए , अर्थात्ः-

(एक)

(२ ) अधिकरण में अध्यक्ष तथा दो सदस्य होंगे जिन्हें राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा. " .

(दो) उपधारा ( ३ ) के खण्ड ( बी ) में , प्रारंभिक पैरा के स्थान पर , निम्नलिखित पैरा स्थापित किया जाए , अर्थात्ः-

"(बी) अन्य दो सदस्यों में से एक सदस्य ऐसा अधिकारी होगा जो सहकारिता विभाग में संयुक्त रजिस्ट्रार या उससे उच्च पद पर हो या रह चुका हो . दूसरा सदस्य कोई ऐसा अशासकीय व्यक्ति होगा जो सहकारी आंदोलन से घनिष्ठतः सम्बद्ध हो या कोई ऐसा अधिवक्ता या प्लीडर होगा जिसे सहकारी आंदोलन के क्षेत्र में कम से कम पन्द्रह वर्ष का व्यावहारिक अनुभव हो." .

(तीन) उपधारा ( ५) में, खण्ड (क) में, पूर्ण विराम के स्थान पर , कॉलन स्थापित किया जाए और उसके पश्चात् निम्नलिखित परंतुक जोड़ा जाए , अर्थात्ः-

"परंतु अध्यक्ष अथवा सदस्य पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने के पश्चात् पद धारण नहीं करेगा. " .

उद्देश्यों एवं कारणों का कथन

राज्य में सहकारी आंदोलन को सुदृढ़ और विकसित करने , राज्य में सहकारी सोसाइटियों को कारबार के नए अवसर उपलब्ध कराने , समिति की उपविधियों के अधीन अनुज्ञेय विशिष्ट कारबार करने या सेवाओं के लिए सहकारी सार्वजनिक निजी भागीदारी ( सीपीपीपी ) व्यवस्था के रूप में निजी इकाइयों के साथ भागीदारी अनुबंध करना तथा मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, १६६० ( क्रमांक १७ सन् १६६१ ) के कतिपय उपबंधों के क्रियान्वयन में अनुभव की गई व्यावहारिक तथा विधिक कठिनाइयों को कम करने के लिए , यह विनिश्चित किया गया है कि अधिनियम को यथोचितरूप से संशोधित किया जाए .

२. यह प्रस्तावित है कि " प्रशासक " की विद्यमान परिभाषा के क्षेत्र का विस्तार किया जाए और " सहकारी सार्वजनिक निजी भागीदारी " (सीपीपीपी) की नई परिभाषा पुरःस्थापित की जाए . रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन देते समय सदस्यों की अधिक भागीदारी को सुनिश्चित करने 194(4)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 21 मार्च 2025

हेतु उपबंध प्रस्तावित किया गया है . सहकारी सोसाइटियों के रजिस्ट्रीकरण और उनकी उपविधियों के संशोधन को सरल बनाने तथा समयबद्ध रीति में किए जाने हेतु उपबंध प्रस्तावित किए गए हैं . समितियों को वित्तीय रूप से सशक्त करने हेतु सदस्य द्वारा अंश पूंजी में अंशदान बढ़ाने हेतु भी उपबंध किया जा रहा है .

३. रजिस्ट्रार या प्रशासक द्वारा सोसाइटी का प्रभार लेने में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने हेतु उपबंध प्रस्तावित किया गया है . समयबद्ध रीति में समापन कार्यवाहियों को पूरा करना भी प्रस्तावित है. न्यायालयीन प्रकरणों के निराकरण में विभाग के अनुभवी अधिकारियों की सेवाएं प्राप्त करना भी प्रस्तावित है .

४. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है .

भोपाल:

विश्वास कैलाश सारंग तारीख : १६ मार्च, २०२५ .

भारसाधक सदस्य .

प्रत्यायोजित विधि निर्माण संबंधी ज्ञापन

प्रस्तावित विधेयक के जिन खण्डों द्वारा राज्य शासन को विधायनी शक्तियां प्रत्यायोजित की जा रही हैं , उनका विवरण निम्नानुसार है: -

खण्ड ४ के द्वारा सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण का प्रमाण पत्र जारी करने के प्रारूप विहित किये जाने,

खण्ड ८ के द्वारा किसी सोसाइटी में सदस्य द्वारा सोसाइटी की कुल अंशपूंजी के एक पंचमांश से अधिक अंश धारण नहीं किये जाने की सीमा निर्धारण किये जाने ,

खण्ड ६ के द्वारा विशेष परिस्थितियों में किसी सोसाइटी का निर्वाचन कराये जाने की अवधि को बढ़ाये जाने,

खण्ड १० के द्वारा विशेष परिस्थितियों में सोसाइटी के प्रशासक की पदावधि को बढ़ाये जाने एवं सोसाइटी के चुनाव करवाने की कालावधि को आगे बढ़ाये जाने ,

बढ़ाने , एवं खण्ड ११ के द्वारा किसी सोसाइटी के परिसमापन की कार्यवाही नियत समय - सीमा में पूर्ण न होने पर उसकी कालावधि को आगे

खण्ड १२ के द्वारा राज्य सहकारी अधिकरण में सदस्य के रूप में सहकारिता विभाग में संयुक्त रजिस्ट्रार या उससे उच्च पद पर कार्य कर चुके अधिकारी को सदस्य बनाये जाने,

के संबंध में नियम बनाये जायेंगे जो सामान्य स्वरूप के होंगे .

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित -2025.

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 21 March 2025. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2025-03-21.97.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2025-03-21.97.Extraordinary.