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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025...

Published 19 June 2025

Department
सामान्य प्रशासन
Type
Extraordinary
Gazette no.
155
Identifier
in.gazette.madhya.2025-06-19.155.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

ध्य

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सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

भोपाल, गुरुवार, दिनांक 19 जून 2025 ज्येष्ठ 29, शक 1947

क्रमांक 155]

सामान्य प्रशासन विभाग

मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल, दिनांक 19 जून 2025

मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025

प्रस्तावना

क्र. 1-1-3-0005-2025-GAD- 3- एक-(GAD).- (1 ) यह कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा आर.बी. राय बनाम मध्यप्रदेश राज्य (रिट याचिका संख्या 1942/2011 ) आदेश दिनांक 30 अप्रैल 2016 को मध्यप्रदेश लोक सेवा (पदोन्नति) नियम , 2002 के सम्बन्ध में निम्नानुसार आदेश पारित किया हैः-

"Thus , taking overall view of the matter , the existing provision relating to reservation, backlog vacancies , carry -forward ofbacklog vacancies and the operation ofroster, contained in the Rules of 2002 runs contrary to the constitutional provisions contained in clause (4A) and (4B) ofArticle 16 and Article 335 ofthe Consti- tution and the law predicated in M. Nagaraj ( supra), are declared ultra vires and non- est in law.

Consequently, various promotions of SCs /STs category made on the basis of these Rules of 2002 are held to be non- est in the eyes of law and the persons be placed in the position as if the said Rules (i.e. the Rules which are declared ultra vires ) never existed and all actions taken in furtherance thereof must be reverted to status quo ante . "

(2) यह कि उपरोक्त आदेश के परिप्रेक्ष्य में राज्य शासन द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में एस.एल.पी. क्रमांक 13954/2016 दायर की गई जिसमें दिनांक 12 मई 2016 को निम्नानुसार अंतरिम आदेश पारित हुआ है:- "Until further orders , status quo , obtaining as on that day, shall be maintained. "

(3 ) यह कि, प्रकरण में विगत 9 वर्ष से यथास्थिति विद्यमान है जिससे प्रदेश में लोकसेवकों की पदोन्नति प्रक्रिया बाधित है और बड़ी संख्या में अधिकारी- कर्मचारी अहर्ताओं को धारण करने के उपरान्त भी पदोन्नति प्राप्त किये बिना सेवानिवृत्त हो रहे हैं. ऐसी स्थिति में जहां एक ओर राज्य शासन की कार्यक्षमता विपरीत रूप से प्रभावित हो रही है वहीं लोकसेवकों का मनोबल घट रहा है. '

309 310

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 19 जून 2025

(4) यह कि, मान. उच्च न्यायालय द्वारा कंडिका 1 में उल्लेखित निर्णय में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16 की उपधारा 4 ( अ) तथा श्री एम. नागराज एवं अन्य प्रकरणों के निर्णयों को उद्धत करते हुये पदोन्नति में आरक्षण पर विचार करते समय निम्न अवधारणाओं को चिन्हांकित एवं परिगणित करने की अनिवार्यता प्रतिपादित की है: - (अ) आरक्षित वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व,

(ब) प्रशासनिक दक्षता/योग्यता ।

(5 ) यह कि मध्य प्रदेश लोक सेवा ( अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिये आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा 4 के अनुसार सीधी भरती में अनुसूचित जाति को 16% एवं अनुसूचित जनजाति को 20% आरक्षण दिये जाने का प्रावधान है ।

(6) यह कि राज्य शासन, अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों को भारत के संविधान के अनुच्छेद 16 (4A) के अनुसार शासकीय सेवाओं में सभी स्तरों पर समान अवसर प्रदान किये जाने एवं योग्यता के आधार पर शासकीय सेवाओं में पदोन्नति प्राप्त कर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है ।

अतः उपरोक्तानुसार कंडिका ( 1 ) से (6 ) में वर्णित स्थिति एवं माननीय न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों के परिप्रेक्ष्य में भारत के संविधान के अनुच्छेद 16 और 335 के साथ पठित 'अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुये , मध्यप्रदेश के राज्यपाल, एतद्द्वारा, शासकीय सेवकों को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित विशेष अनुमति याचिका क्रमांक 13954/2016 के अध्यधीन पदोन्नति देने के लिये एवं अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के शासकीय सेवकों को समान अवसर प्रदान करने हेतु निम्नलिखित नियम बनाते हैं: -

नियम

संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभ, - ( 1 ) इन नियमों का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम , 2025 है ।

(2) ये नियम मध्यप्रदेश राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होंगे ।

परिभाषा, - इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, - 310(1)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

(क) किसी स्थापन में सेवा या पद के संबंध में " नियुक्ति प्राधिकारी " से अभिप्रेत है, ऐसी सेवा में या पद पर नियुक्ति करने के लिये सक्षम प्राधिकारी;

(ख) "विभागीय पदोन्नति समिति" से अभिप्रेत है, सम्बंधित विभागीय भरती नियमों के अनुसार विभागीय पदोन्नति समिति;

(ग) " संवर्ग " से अभिप्रेत है, सेवा का वह भाग , जिसके लिये संबंधित भरती नियमों के अनुसार एक पृथक पदक्रम सूची तैयार की जाना अपेक्षित है । जिसमें अस्थायी तथा स्थायी दोनों प्रकार के पद सम्मिलित है:

परन्तु इसमें आकस्मिक श्रमिक , स्थायी कर्मी, कार्यभारित एवं आकस्मिकता निधि से भुगतान पाने वाले, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी एवं संविदा कर्मी सम्मिलित नहीं है;

(घ) " आयोग " से अभिप्रेत है , मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ;

(ड. ) " स्थापन" से अभिप्रेत है, राज्य सरकार का स्थापन या तत्समय प्रवृत्त राज्य के किसी अधिनियम के अधीन गठित किसी स्थानीय प्राधिकरण या कानूनी प्राधिकरण या किसी विश्वविद्यालय या किसी ऐसी कंपनी, निगम या किसी सहकारी सोसाइटी का स्थापन जिसमें समादत्त अंशपूजी का कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा धारित है;

(च) " सरकार " से अभिप्रेत है, मध्यप्रदेश सरकार;

(छ) " लोक सेवा और पद " से अभिप्रेत है, स्थापन के किसी कार्यालय की सेवायें एवं पद;

(ज) " आरक्षण" से अभिप्रेत है, अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के लिये लोक सेवाओं में पदोन्नति हेतु पदों का आरक्षण;

(झ ) " अनुसूचित जाति " से अभिप्रेत है, कोई जाति, मूलवंश या जनजाति अथवा जाति, मूलवंश या जनजाति का भाग या उसमें का कोई समूह , जिसे संविधान के अनुच्छेद 341 के अधीन मध्यप्रदेश राज्य के संबंध में अनुसूचित जातियों के रूप मेंविनिर्दिष्ट किया गया है;

(ञ) " अनुसूचित जनजाति" से अभिप्रेत है, कोई जनजाति प्रवर्ग या जनजाति समुदाय अथवा ऐसी जनजाति या जनजाति समुदाय का भाग या उसमें का कोई समूह, मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 19 जून 2025

310(2)

जिसे संविधान के अनुच्छेद 342 के अधीन मध्यप्रदेश राज्य के संबंध में अनुसूचित जनजातियों के रूप में विनिर्दिष्ट किया गया है;

(ट) " आरक्षित प्रवर्ग " से अभिप्रेत है अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग एवं अनुसूचित जाति प्रवर्ग;

(ठ) " चयन सूची " से अभिप्रेत है, ऐसे लोक सेवकों की सूची, जो संबंधित भरती नियमों में उपबंधित किये गये अनुसार अगले वेतनमान या उच्च श्रेणी के पद के लिये चयनित किये जायें;

(ड) " सेवा " से अभिप्रेत है, भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय वन सेवा, उच्च न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा एवं राज्य वित्त सेवा से भिन्न राज्य के कार्यकलाप से संबंधित पदों के समूह की सेवा, जो सरकार द्वारा उस रूप में संगठित तथा पदाभिहित हो;

(ढ) "राज्य' " से अभिप्रेत है, मध्यप्रदेश राज्य ।

(ण) " चयन वर्ष" से अभिप्रेत है, जनवरी के प्रथम दिन से प्रारंभ होकर दिसम्बर के इकतीसवें दिन को समाप्त होने वाली अवधि जिसके लिये उसके पूर्ववर्ती वर्ष में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक की जाना अपेक्षित है;

(त ) " विचारण तिथि " से अभिप्रेत है, चयन वर्ष से ठीक पूर्ववर्ती वर्ष की 31 दिसम्बर की तिथि;

3. विस्तार और लागू होना, मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 में अन्तर्विष्ट उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना तथा किन्हीं सेवा नियमों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुये भी ये नियम, इन नियमों में यथा परिभाषित स्थापन को लागू होंगे, किन्तु मध्यप्रदेश लोक सेवा ( अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षण) अधिनियम, 1994 (क्रमांक 21 सन् 1994) की धारा 3 के खण्ड ( 1 ) , ( 3 ) एवं ( 5 ) में विनिर्दिष्ट नियोजनों को लागू नहीं होंगे।

4. पदोन्नति हेतु आधार का विनिश्चयन, -

( 1 ) प्रथम श्रेणी से प्रथम श्रेणी के उच्च वेतनमान के पदों पर पदोन्नति " योग्यता - सह- वरिष्ठता " के आधार पर की जायेगी ।

(2 ) शेष सभी पदों पर पदोन्नति " वरिष्ठता- सह - उपयुक्तता" के आधार पर की जायेगी ।

310(3)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

(3 ) " वरिष्ठता- सह- उपयुक्तता" के सम्बन्ध में नियम 11 के उपबंध लागू होंगे एवं "योग्यता- सह - वरिष्ठता " के सम्बन्ध में नियम 12 के उपबंध लागू होंगे । शेष सभी नियम सभी पदोन्नतियों हेतु समान रूप से लागू होंगे ।

5. अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के लिये आरक्षित रखे जाने वाले पदों की गणना, विभाग के संवर्ग विशेष में आरक्षित प्रवर्ग के पर्याप्त प्रतिनिधित्व एवं संवर्ग में प्रशासनिक दक्षता को ध्यान में रखते हुये आरक्षित प्रवर्गों के लिये आरक्षित रखे जाने वाले पदों की गणना निम्नानुसार होगी: -

( 1 ) अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के लिये आरक्षित पदों की संख्या , संवर्ग में पदोन्नति से भरे जाने वाले पदों की कुल संख्या का ' 20 ' * (गुणित) ' Y ' प्रतिशत होगी।

(2 ) अनुसूचित जाति प्रवर्ग के लिये आरक्षित पदों की संख्या , संवर्ग में पदोन्नति से भरे जाने वाले पदों की कुल संख्या का ' 16' * (गुणित) ' X' प्रतिशत होगी।

( 3 ) ' X ' एवं ' Y ' की गणना संवर्ग द्वारा सम्पादित कार्यों में प्रशासनिक दक्षता तथा आरक्षित प्रवर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदान करने को ध्यान में रखते हुये एक संख्या होगी जिसका मान 0 से 1 तक हो सकेगा ।

(4) राज्य शासन के विभागों द्वारा प्रत्येक संवर्ग जिनमें पदोन्नति की जाना है , ' X ' एवं ' Y' को पृथक - पृथक निर्धारित किया जायेगा। यह निर्धारण निम्नलिखित समिति द्वारा किया जायेगा: -

(एक) संबंधित विभाग का भारसाधक सचिव - अध्यक्ष

(दो) संबंधित विभाग का विभागाध्यक्ष- सचिव

(तीन) सामान्य प्रशासन विभाग का एक प्रतिनिधि जो उप सचिव से अनिम्न स्तर का हो- सदस्य

(चार) उपरोक्त खण्ड (एक) , ( दो) एवं (तीन) में से कोई सदस्य अनुसूचित जाति प्रवर्ग का नहीं होने की स्थिति में अनुसूचित जाति प्रवर्ग का एक लोक सेवक जो द्वितीय श्रेणी से अनिम्न स्तर का न हो - सदस्य (पांच) उपरोक्त खण्ड (एक) , (दो) एवं (तीन) में से कोई सदस्य अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग का नहीं होने की स्थिति में अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग का एक लोक सेवक जो द्वितीय श्रेणी से अनिम्न स्तर का न हो - सदस्य मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

310(4)

( 5 ) विभागों द्वारा किसी संवर्ग विशेष में आरक्षित प्रवर्गों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व तथा प्रशासनिक दक्षता के संबंध में कोई विशिष्ट परिस्थितियां नहीं होने पर सामान्यतः ' X' = 1 तथा ' Y' = 1 निर्धारित किया जायेगा। यदि कोई विभाग किसी संवर्ग हेतु पर्याप्त प्रतिनिधित्व तथा प्रशासनिक दक्षता के दृष्टिगत ' X' या ' Y' संख्या का निर्धारण 1 से भिन्न करने का निर्णय लेता है तो ऐसा निर्धारण निम्न समिति के अनुमोदन उपरान्त ही किया जायेगा: -

(एक) मुख्य सचिव - अध्यक्ष

(दो) संबंधित विभाग का भारसाधक सचिव- सचिव

(तीन) सामान्य प्रशासन विभाग के भारसाधक सचिव- सदस्य

(6) ' X ' एवं ' Y ' का निर्धारण पांच वर्षों की कालावधि के लिये किया जायेगा। यह निर्धारण वर्ष 2024 से वर्ष 2028 तक की विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक हेतु लागू होगा । प्रत्येक पांच वर्षों के उपरान्त ' X ' एवं ' Y' की संख्या प्राप्त करने हेतु पर्याप्त प्रतिनिधित्व तथा प्रशासनिक दक्षता का आकलन करते हुये इन्हें पुनः निर्धारित किया जाना आवश्यक होगा।

6. विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक, -

( 1 ) विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक प्रत्येक चयन वर्ष हेतु एक बार आयोजित की जायेगी ।

( 2 ) 31 दिसम्बर, 2025 के पूर्वान्ह तक की रिक्तियों के लिये एक विशेष विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक इस नियम के प्रवृत्त होने के उपरांत की जायेगी , तत्पश्चात् प्रत्येक चयन वर्ष हेतु विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक उसके पूर्ववर्ती वर्ष में सामान्यतः माह सितम्बर से माह नवम्बर के मध्य आयोजित की जायेगी जिसमें चयन वर्ष की 31 दिसम्बर के पूर्वान्ह तक की स्थिति में उपलब्ध होने वाली समस्त रिक्तियों हेतु पदोन्नति के लिये लोक सेवकों की उपयुक्तता पर विचार किया जायेगा।

उदाहरण.- प्रत्येक विभाग द्वारा इस नियम के प्रवृत्त होने के उपरान्त नियम 5 के अनुसार ' X' एवं ' Y' का निर्धारण करने के बाद 31.12.2025 के पूर्वान्ह तक की स्थिति में रिक्त पदों के लिये विशेष विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक की 310(5)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

जायेगी । वर्ष 2025 में पुनः माह सितम्बर से माह नवम्बर के मध्य इस वर्ष में उत्पन्न हुई कोई अप्रत्याशित रिक्ति जो प्रतीक्षा सूची से भी नहीं भरी जा सकौ हो एवं चयन वर्ष ( अर्थात 31.12.2026 के पूर्वान्ह तक) की प्रत्याशित रिक्तियों को भरने के लिये विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक की जायेगी, तत्पश्चात् वर्ष 2026 में माह सितम्बर से माह नवम्बर के मध्य वर्ष 2026 में उत्पन्न हुई कोई अप्रत्याशित रिक्ति जो प्रतीक्षा सूची से भी नहीं भरी जा सकी हो एवं चयन वर्ष ( अर्थात 31.12.2027 के पूर्वान्ह तक) की प्रत्याशित रिक्तियों को भरने के लिये विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक की जायेगी ।

(3 ) यदि किसी चयन वर्ष की विभागीय पदोन्नति समिति की कोई बैठक उपनियम (2 ) में वर्णित अवधि में आयोजित नहीं हो पाती है तो विभागीय पदोन्नति समिति की अगली बैठक में सबसे पहले पूर्व में आयोजित नहीं हो सकी बैठक के सन्दर्भ में पृथक से पदोन्नति के लिये लोक सेवकों की उपयुक्तता पर विचार कर चयन सूची तैयार की जायेगी , तत्पश्चात् वर्तमान की रिक्तियों एवं आगामी वर्ष में उन्द्भूत होने वाली रिक्तियों को भरने के लिये पदोन्नति हेतु लोक सेवकों की उपयुक्तता पर विचार कर चालू चयन वर्ष की चयन सूची तैयार निर्धारित की जायेगी ।

(4 ) विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक हेतु प्रतिनियुक्ति अथवा अन्य कारणों से जिन लोक सेवकों के सम्बन्ध में ज्ञात हो कि वो चयन वर्ष के 31 दिसम्बर के पूर्वान्ह तक उपलब्ध नहीं हो सकेंगे को रिक्त मानते हुये चयन वर्ष की रिक्ति में सम्मिलित किया जा सकेगा ।

7. अर्हकारी सेवा की अवधि की गणना, पदोन्नति के लिये पात्रता हेतु अर्हकारी सेवा की अवधि की गणना , संबंधित चयन वर्ष, जिस चयन वर्ष की पदोन्नति हेतु समिति की बैठक आयोजित की जा रही है, की विचारण तिथि के पूर्वान्ह तक उस वर्ष से की जायेगी, जिसमें लोक सेवक फीडर संवर्ग/सेवा के भाग /पद में आया है ।

स्पष्टीकरण. - लोक सेवक द्वारा पूर्व पदोन्नति का कार्यभार ग्रहण जिस कैलेंडर वर्ष में किया गया है, अर्हकारी सेवा की गणना के लिये उस कैलेंडर वर्ष को एक वर्ष माना जायेगा ।

उदाहरण. - यदि कोई लोक सेवक दिसम्बर 2021 में फीडर संवर्ग/सेवा के भाग /पद में आया है तो 31 दिसम्बर 2025 को उसकी पांच वर्ष की अर्हकारी सेवा पूर्ण हो जायेगी ।

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 19 जून 2025

310(6)

8. वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदनों द्वारा उपयुक्तता का निर्धारण, - (1 ) विभागीय पदोन्नति समिति, लोक सेवकों की पदोन्नति के लिये उनके सेवा अभिलेख के आधार पर एवं जिस चयन वर्ष की पदोन्नति हेतु समिति की बैठक आयोजित की जा रही है, उससे ठीक पूर्ववर्ती 5 वित्तीय वर्षों के वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदनों के संदर्भ में उनकी उपयुक्तता का निर्धारण करेगी। यदि उपर्युक्त 5 वर्षों के प्रतिवेदनों में से अधिकतम दो गोपनीय प्रतिवेदन किसी कारण से उपलब्ध नहीं हों तो विभागीय पदोन्नति समिति ठीक 2 पूर्ववर्ती वर्षों अर्थात कुल 7 पूर्ववर्ती वर्षों तक के गोपनीय प्रतिवेदनों को विचारण में ले सकेगी।

उदाहरण. - वर्ष 2026 में आयोजित होने वाली विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक (जिसमें 31 दिसम्बर , 2027 तक के पद सम्मिलित है) के लिये वित्तीय वर्ष 2024-2025 , 2023-2024 , 2022-2023 , 2021-2022 , 2020-2021 के वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन के सन्दर्भ में उपयुक्तता का निर्धारण किया जायेगा। यदि किसी कारणवश इन वर्षों में से कोई भी दो वर्षों का गोपनीय प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं है तो ऐसी स्थिति में वित्तीय वर्ष 2019-2020 एवं वर्ष 2018-2019 के गोपनीय प्रतिवेदनों पर विचार किया जा सकेगा ।

(2 ) उपनियम ( 1 ) के अतिरिक्त अंतिम दो वर्षों में से कम से कम एक वर्ष का गोपनीय प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से उपलब्ध होना आवश्यक है ।

(3 ) किसी वर्ष वर्ष के भाग के गोपनीय प्रतिवेदन की अवधि एन.आर.सी (नो रिपोर्ट सर्टिफिकेट) है तो ऐसी अवधि को उपनियम -1 के अनुसार मूल्यांकन में विचार में नहीं लिया जायेगा ।

(4) अधिकतम एक वर्ष के गोपनीय प्रतिवेदन परं निर्धारित समय पर स्वमूल्यांकन के साक्ष्य उपलब्ध होने परन्तु प्रतिवेदक, समीक्षक एवं स्वीकारकर्ता अधिकारी का मतांकन नहीं होने की स्थिति में उक्त वर्ष का मूल्यांकन उपलब्ध वर्षों के मूल्यांकन का औसत होगा ।

(5) किसी वर्ष में एक से अधिक गोपनीय प्रतिवेदनों के उपलब्ध होने की स्थिति में उपलब्ध सभी प्रतिवेदनों के मूल्यांकन का भारित औसत (weighted average ) किया जायेगा ।

(6) किसी वर्ष के कम से कम 6 माह की अवधि के गोपनीय प्रतिवेदन के मूल्यांकन उपलब्ध होने पर ही , उसे वर्ष का मूल्यांकन माना जायेगा:

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

परंतु एन.आर.सी (नो रिपोर्ट सर्टिफिकेट) की अवधि 6 माह से अधिक होने पर, 6 माह से कम के लिए उपलब्ध गोपनीय प्रतिवेदन को वर्ष का मूल्यांकन माना जा सकेगा ।

9. गोपनीय प्रतिवेदनों की अनुपलब्धता, नियम 8 से अनुसार गोपनीय प्रतिवेदनों के अनुपलब्ध रहने की दशा में सम्बंधित प्रकरणों को परिभ्रमण में नहीं रखा जायेगा एवं ऐसे पदों के विरुद्ध अन्य पात्र लोक सेवक को पदोन्नत कर दिया जायेगा । ऐसे प्रकरणों को गोपनीय प्रतिवेदन की उपलब्धता के पश्चात आयोजित होने वाली विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में पदोन्नति के विचारण हेतु रखा जायेगा । आगामी विभागीय पदोन्नति समिति में पात्र पाये जाने पर उस लोक सेवक की वरिष्ठता पात्रता अनुसार पूर्ववत यथास्थान पुनस्र्थापित की जायेगी ।

स्पष्टीकरण. - यदि किसी लोक सेवक की पदोन्नति पर गोपनीय प्रतिवेदनों के अनुपलब्ध रहने के कारण चयन वर्ष 2026 की विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में विचार नहीं किया जाता है एवं चयन वर्ष 2027 की विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में उसके चयन वर्ष 2026 की स्थिति में गोपनीय प्रतिवेदन उपलब्ध हो जाते हैं एवं विचारण उपरांत लोक सेवक पदोन्नति हेतु उपयुक्त पाया जाता है तो ऐसी स्थिति में उसको पदोन्नत करते हुये उसकी वरिष्ठता पूर्ववत यथास्थान पुनर्स्थापित की जायेगी अर्थात विचारण वर्ष 2026 की चयन सूची के अनुसार ही वरिष्ठता निर्धारित की जायेगी ।

10. पदोन्नति हेतु अनुपयुक्तता, यदि संबंधित लोक सेवक के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही के फलस्वरूप मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 10 के अंतर्गत शास्ति अधिरोपित की गई हो तथा वह शास्ति विचारण तिथि पर प्रभावशील हो तब लोक सेवक को पदोन्नति के लिये उपयुक्त नहीं माना जायेगा। शास्ति का प्रभाव निम्न तालिका अनुसार होगा: -

10 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक19 जून 2025

310(8)

प्रभाव की अवधि शास्तिका स्वरूप

क्रमांक

परिनिन्दा

1.

जिस दिनांक को शास्ति अधिरोपित की गई है उस तिथि से एक वर्ष तक

2.

आदेशित की गई वसूली योग्य राशि की पूर्ण वसूली होने की तिथि के एक वर्ष बाद तक उपेक्षा से या आदेशों के द्वारा शासन को पहुँचाई गई किसी आर्थिक हानि की पूर्ण रूप से या उसके किसी भाग की उसके वेतन से वसूली

3. वेतन वृद्धियों का या गतिरोध भत्ते का रोका जाना

अधिरोपित शास्ति में रोकी गई वेतन वृद्धि/ वेतन वृद्धियों के पश्चात प्राप्त हुई प्रथम वेतन वृद्धि होने तक

4.

अधिरोपित शास्ति में अवनत अवधि पूर्ण होने के उपरांत, प्राप्त हुई प्रथम वेतन वृद्धि होने किसी उल्लेखित कालावधि के लिये अवनत करके वेतन के समयमान के निरंतर प्रक्रम में, ऐसे और निर्देशों के साथ लाया जाना कि क्या लोक सेवक ऐसे अवनति की तक कालावधि के दौरान, यथास्थिति, वेतन वृद्धियाँ या गतिरोध भत्ता उपार्जित करेगा या नहीं और क्या ऐसी कालावधि के समाप्त हो जाने पर ऐसी अवनति उसकी भावी वेतन वृद्धियों को या गतिरोध भत्ते को स्थगित करने का प्रभाव रखेगी या नहीं

5.

अधिरोपित शास्ति में अवनत अवधि पूर्ण होने के उपरांत प्राप्त हुई प्रथम वेतन वृद्धि होने तक, परन्तु अधिरोपित शास्ति में भविष्य में कोई भी पदोन्नति नहीं दिये जाने के आदेश की स्थिति अवनत करके वेतन के निम्नतर समयमान में, निम्नतर ग्रेड में निम्नतर पद पर निम्नतर सेवा में लाया जाना जो उस लोक सेवक को पदोन्नत करके उस समयमान में, उस ग्रेड में या उस सेवा में जिससे की वह अवनत किया गया था लाये जाने की साधारणतः 310(9)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

में लोक सेवक पदोन्नति के लिये उपयुक्त नहीं होगा । "

रोक करेगा, उस ग्रेड या पद या सेवा पर जिससे कि लोक सेवक अवनत किया गया था, पुनः स्थापित किये जाने की शर्तों के संबंध में तथा उस ग्रेड, पद या सेवा पर इस प्रकार से पुनः स्थापित हो जाने पर उसकी ज्येष्ठता तथा वेतन के संबंध में और निर्देशों के सहित या रहित ।

11. वरिष्ठता - सह - उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति, -

( 1 ) अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग की रिक्तियों की गणना: अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के लिये उपलब्ध रिक्तियां , नियम 5 के उपनियम ( 1 ) के अनुसार अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के लिये आरक्षित रखी जाने वाली पद संख्या में से जितने पद उस संवर्ग में पूर्व से अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के लोक सेवकों से पदोन्नति द्वारा भरे गये हैं, को घटाकर प्राप्त पद संख्या होगी ।

(2) अनुसूचित जाति प्रवर्ग की रिक्तियों की गणनाः अनुसूचित जाति प्रवर्ग के लिये उपलब्ध रिक्तियां, नियम 5 के उपनियम (2 ) के अनुसार अनुसूचित जाति प्रवर्ग के लिये आरक्षित रखी जाने वाली पद संख्या में से जितने पद उस संवर्ग में पूर्व से अनुसूचित जाति प्रवर्ग के लोक सेवकों से पदोन्नति द्वारा भरे गये हैं, को घटाकर प्राप्त पद संख्या होगी ।

(3 ) अनारक्षित रिक्तियों की गणना: अनारक्षित रिक्तियों की संख्या , संवर्ग में पदोन्नति से भरे जाने वाली कुल रिक्तियों में से नियम 11 के उपनियम ( 1 ) एवं (2 ) में गणना किये गये पदों की संख्या को घटाकर प्राप्त शेष पद संख्या होगी ।

उदाहरण. - मान लीजिये किसी संवर्ग में कुल पद संख्या 50 है जिसमें नियम 5 अनुसार अनुसूचित जनजाति वर्ग के 10 पद आरक्षित है एवं अनुसूचित जाति वर्ग के 8 पद आरक्षित है । उस संवर्ग में पूर्व से अनुसूचित जनजाति वर्ग के 6 लोक सेवक एवं अनुसूचित जाति वर्ग के 3 लोक सेवक कार्यरत है । उस संवर्ग में कुल 20 पद रिक्त है तो ऐसी स्थिति में अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के लिये आरक्षित रिक्तियों की संख्या 10 – 6 = 4 होगी एवं अनुसूचित जाति वर्ग के लिये आरक्षित रिक्तियों की संख्या 8 – 3 = 5 होगी । अनारक्षित रिक्तियों की संख्या 20 - 4 - 5 = 11 होगी।

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

310(10)

(4) विचारण सूची: ऐसे लोक सेवक जिन्होंने भरती नियमों के अनुसार फीडर संवर्ग/सेवा के भाग/पद के वेतनमान में विहित अर्हकारी सेवा एवं भरती नियमों में उल्लेखित अन्य अर्हतायें पूरी कर ली हो की वरिष्ठता क्रम में संयुक्त विचारण सूची बनायीं जायेगी। विचारण क्षेत्र वर्ष की कुल उपलब्ध रिक्तियों का दो गुना + चार (4 ) होगा। उदाहरण.- यदि पदोन्नत किये जाने वाले संवर्ग में कुल रिक्तियां 8 हैं तो जिस संवर्ग से पदोन्नति की जाना है, उस संवर्ग की सभी लोक सेवकों की वरिष्ठता पदक्रम सूची में से अधिकतम (2 * 8 ) + 4 = 20 लोक सेवक विचारण सूची में सम्मिलित होंगे ।

(5) (एक) चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी के पदों पर एवं चतुर्थ श्रेणी से चतुर्थ श्रेणी के उच्च वेतनमान में पदोन्नति गोपनीय प्रतिवेदनों में निर्धारित उपयुक्तता के आधार पर किया जायेगा ।

(दो) शेष सभी लोक सेवकों के विचाराधीन अवधि के गोपनीय प्रतिवेदनों के वर्गीकरण को अंको में निर्धारित किया जायेगा । इसके लिये ' उत्कृष्ट ' (क + ) श्रेणी हेतु 4 अंक, 'बहुत अच्छा' (क) श्रेणी हेतु 3 अंक, ' अच्छा ' (ख) श्रेणी हेतु 2 अंक , ' औसत' (ग) श्रेणी हेतु 1 अंक एवं ' घटिया' (घ) श्रेणी हेतु 0 अंक निर्धारित किये जायेंगे ।

(6) (एक) लोक सेवक के पांच वर्षों के गोपनीय प्रतिवेदनों के समग्र मूल्यांकन के आधार पर पदोन्नति की उपयुक्तता के लिये श्रेणी वार न्यूनतम अर्हकारी अंक निम्नानुसार होंगे: -

क्र.

पदोन्नति का स्वरूप

समग्र मूल्यांकन के न्यूनतम अर्हकारी अंक

13

द्वितीय श्रेणी से प्रथम श्रेणी के पदों पर

1.

12

2. द्वितीय श्रेणी से द्वितीय श्रेणी के उच्च वेतनमान में एवं तृतीय श्रेणी से द्वितीय श्रेणी के पदों पर एवं तृतीय श्रेणी से तृतीय श्रेणी के उच्च वेतनमान में

उपयुक्त होने पर

3. चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी के पदों पर एवं चतुर्थ श्रेणी से चतुर्थ श्रेणी के उच्च वेतनमान में 310(11)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 19 जून 2025

(दो) यदि विचारण क्षेत्र में उपलब्ध लोक सेवकों में से न्यूनतम अर्हकारी अंकों की गणना के उपरान्त भी पदोन्नति हेतु पर्याप्त संख्या में लोक सेवक पात्र नहीं हो रहे है तो ऐसी स्थिति में मानक को 1 अंक तक शिथिल किया जा सकेगा ।

(तीन) यदि किसी विभाग में नियम 11 के उपनियम (6) के खण्ड (दो) के अनुसार मानक शिथिल करने के उपरांत भी पर्याप्त संख्या में लोक सेवक उपलब्ध नहीं हो रहे हैं तो वह उस चयन वर्ष के लिये मानक शिथिल करने के सम्बन्ध में सामान्य प्रशासन विभाग से छूट प्राप्त कर सकेगा ।

(चार) यदि आरक्षित प्रवर्ग के अपेक्षित लोक सेवक उपलब्ध नहीं हैं तो ऐसी स्थिति में नियम 11 के उपनियम ( 6) के खण्ड (एक) , (दो) एवं ( तीन) के अनुसार निर्धारित मानक को आरक्षित प्रवर्ग के लोक सेवकों के लिये अतिरिक्त एक अंक तक शिथिल किया जा सकेगाः

परन्तुनियम 11 के उपनियम (6 ) खण्ड (चार) के अंतर्गत मानक शिथिल कर पदोन्नत किये जाने वाले लोक सेवकों को आरक्षित प्रवर्ग की रिक्तियों के विरुद्ध ही पदोन्नति की पात्रता होगी , उन्हें अनारक्षित रिक्तियों के विरुद्ध पदोन्नत नहीं किया जायेगा ।

(7) यदि संबंधित लोक सेवक के विचारण में लिये गये पांच वर्षों के गोपनीय प्रतिवेदनों के अंकों का समग्र योग, विहित न्यूनतम अर्हकारी अंकों से कम हो तौ विचारण सूची में सम्मिलित लोक सेवक पदोन्नति के लिये उपयुक्त नहीं होगा।

(8 ) इस पद्धति से पदों के भरने के लिये, विभागीय पदोन्नति समिति, प्रत्येक लोक सेवक के मामले में उसकी योग्यता के आधार पर पृथक - पृथक विचार करेगी, अर्थात् लोक सेवकों की योग्यताओं का कोई तुलनात्मक निर्धारण करना आवश्यक नहीं होगा । पदोन्नति समिति प्रत्येक लोक सेवक के अभिलेखों पर पृथक - पृथक विचारं करेगी तथा उन्हें " उपयुक्त" अथवा " अनुपयुक्त " के रूप में वर्गीकृत करेगी।

(9) विभागीय पदोन्नति समिति द्वारा विचारण सूची में सम्मिलित लोक सेवकों में से, नियम 14 के अनुसार जिन लोक सेवकों के संबंध में विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा सीलबंद लिफाफे में रखी गयी है, को छोड़कर, पदोन्नति हेतु उपयुक्त पाये गये लोक सेवकों की चयन सूची निम्न मापदण्डों के अनुसार तैयार की जायेगी: - मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

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(एक) अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग, अनुसूचित जाति प्रवर्ग तथा अनारक्षित लोक सेवकों की, उस संवर्ग/सेवा के भाग/उस पद के, जिस पर पदोन्नति की जाना है, वेतनमान में पारस्परिक वरिष्ठता अवधारित करने के लिये, समस्त पात्र लोक सेवकों की एक संयुक्त सूची उसी क्रम में तैयार की जायेगी, जिस क्रम में उनके नाम, उस संवर्ग/सेवा के भाग/उस पद के, जिससे कि पदोन्नति की जा रही हो की पदक्रम सूची में स्थापित है अर्थात वर्तमान पद की वरिष्ठता सूची के क्रम में रहेंगे ।

(दो) संयुक्त विचारण सूची में से सर्वप्रथम नियम 11 के उपनियम ( 1 ) के अनुसार उपलब्ध अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के रिक्त पदों के विरूद्ध उपयुक्त पाये गये अनुसूचित जनजाति के लोक सेवकों के नाम वरिष्ठता क्रम में अंकित किये जायेंगे । यह सूची अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग की चयन सूची होगी ।

(तीन) उपनियम (9 ) के खण्ड (दो) की कार्यवाही के पश्चात् संयुक्त सूची में से नियम 11 के उपनियम (2 ) के अनुसार उपलब्ध अनुसूचित जाति प्रवर्ग के रिक्त पदों के विरुद्ध उपयुक्त पाये गये अनुसूचित जाति के लोक सेवकों के नाम वरिष्ठता क्रम में अंकित किये जायेंगे । यह सूची अनुसूचित जाति प्रवर्ग की चयन सूची होगी ।

(चार) उपनियम (9 ) के खण्ड (दो) एवं (तीन) की कार्यवाही के पश्चात् संयुक्त सूची में से अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग की चयन सूची एवं अनुसूचित जाति प्रवर्ग की चयन सूची में उल्लेखित लोक सेवकों के नाम हटाकर, शेष बचे लोक सेवकों में से नियम 11 के उपनियम (3 ) के अनुसार गणना किये गये रिक्त पदों को वरिष्ठता क्रम में अंकित किया जायेगा । यह सूची अनारक्षित चयन सूची होगी।

(पांच) प्रतीक्षा सूची: - (क) प्रत्येक प्रवर्ग के लिये चयन वर्ष की अवधि में उद्भूत होने वाली रिक्तियों को भरने के लिये, 02 लोक सेवकों अथवा सम्बंधित प्रवर्ग की चयन सूची में सम्मिलित लोक सेवकों की संख्या का 10 प्रतिशत जो भी अधिक हो की वरिष्ठता क्रम में प्रतीक्षा सूची बनाई जायेगी।

(ख ) यदि चयन वर्ष की अवधि में उद्भूत होने वाली रिक्ति नियम 11 के उपनियम ( 1 ) अथवा ( 2 ) की गणना के अनुसार आरक्षित रिक्ति है तो उसे सम्बंधित प्रवर्ग की प्रतीक्षा सूची से ही भरा जायेगा:

परन्तु नियम 11 के उपनियम ( 1 ) एवं (2 ) की गणना अनुसार पद उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उपरोक्त रिक्ति को अनारक्षित प्रतीक्षा सूची से भरा जायेंगा ।

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

(ग) यदि कोई आरक्षित प्रवर्ग का लोक सेवक वरिष्ठता के आधार पर आरक्षित प्रवर्ग एवं अनारक्षित दोनों प्रतीक्षा सूचियों में पात्रता रखता है तो उसे दोनों प्रतीक्षा सूचियों में स्थान दिया जायेगा ।

(छः ) यदि किसी चयन वर्ष में ऐसी स्थिति निर्मित होती है कि आरक्षित प्रवर्ग के पर्याप्त प्रतिनिधित्व के लिये अवधारित आवश्यक संख्या में किसी आरक्षित प्रवर्ग के उपयुक्त लोक सेवक उपलब्ध नहीं होते हैं तो भरने से शेष रहे उतने पद तब तक रिक्त रखे जायेंगे , जब तक कि आरक्षित प्रवर्ग के पर्याप्त प्रतिनिधित्व के लिये किसी चयन वर्ष में अवधारित न्यूनतम संख्या (नियम 5 तथा इस नियम के उपनियम ( 9 ) के खण्ड (एक) एवं (दो) के अनुसार) की पूर्ति न हो जाये।

( 10 ) उपनियम (9 ) के खण्ड (दो) , (तीन) एवं (चार) के आधार पर तैयार की गयी चयन सूची में सम्मिलित लोक सेवकों के पदोन्नति आदेश सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किये जायेंगे । 1 जनवरी को उपलब्ध रिक्त पदों के सम्बन्ध में आदेश 1 जनवरी से पूर्व जारी किया जायेगा जो 1 जनवरी से प्रभावशील होगा । 1 जनवरी के उपरांत जिस- जिस समय रिक्तियां उद्भूत होंगी उस तिथि से अधिकतम 1 माह पूर्व पदोन्नति आदेश जारी किया जा सकेगा जो वास्तविक रिक्ति की तिथि से प्रभावशील होगा। सभी पदोन्नति आदेशों में आदेश के प्रभावशील होने की तिथि एवं पदभार ग्रहण करने से पूर्व नियम 14 के उपनियम ( 1 ) के खण्ड (एक ) , (दो) अथवा ( तीन) में उल्लेखित कार्यवाही की स्थिति में आदेश स्थगित माना जायेगा का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाना आबश्यक होगा ।

12. योग्यता - सह - वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति.-

(1 ) अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग की रिक्तियों की गणनाः अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के लिये उपलब्ध रिक्तियां, नियम 5 के उपनियम ( 1 ) के अनुसार अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के लिये आरक्षित रखी जाने वाली पद संख्या में से जितने पद उस संवर्ग में पूर्व से अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के लोक सेवकों से पदोन्नति द्वारा भरे हैं, को घटाकर प्राप्त पद संख्या होगी ।

(2) अनुसूचित जाति प्रवर्ग की रिक्तियों की गणनाः अनुसूचित जाति प्रवर्ग के लिये उपलब्ध रिक्तियां, नियम 5 के उपनियम ( 2 ) के अनुसार अनुसूचित जाति प्रवर्ग के लिये आरक्षित रखी जाने वाली पद संख्या में से जितने पद उस संवर्ग में पूर्व से मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

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अनुसूचित जाति प्रवर्ग के लोक सेवकों से पदोन्नति द्वारा भरे हैं, को घटाकर प्राप्त पद संख्या होगी ।

(3 ) अनारक्षित रिक्तियों की गणनाः अनारक्षित रिक्तियां, संवर्ग में पदोन्नति से भरे जाने वाली कुल रिक्तियों में से नियम 11 के उपनियम ( 1 ) एवं ( 2) में गणना किये गये पदों की संख्या को घटाकर प्राप्त शेष पद संख्या होगी ।

उदाहरण. - मान लीजिये किसी संवर्ग में कुल पद संख्या 25 है. जिसमें नियम 5 अनुसार अनुसूचित जनजाति वर्ग के 5 पद आरक्षित है एवं अनुसूचित जाति वर्ग के 4 पद आरक्षित है । उस संवर्ग में पूर्व से अनुसूचित जनजाति वर्ग के 2 लोक सेवक एवं अनुसूचित जाति वर्ग के 2 लोक सेवक कार्यरत है । उस संवर्ग में कुल 11 पद रिक्त है तो ऐसी स्थिति में अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के लिये आरक्षित रिक्तियों की संख्या 5 - 2 = 3 होगी एवं अनुसूचित जाति वर्ग के लिये आरक्षित रिक्तियों की संख्या 4 - 2 = 2 होगी । अनारक्षित रिक्तियों की संख्या 11- 3 - 2 = 6 होगी ।

(4) विचारण सूचीः ऐसे लोक सेवक जिन्होंने भरती नियमों के अनुसार फीडर संवर्ग/सेवा के भाग/पद के वेतनमान में विहित अर्हकारी सेवा एवं भरती नियमों में उल्लेखित अन्य अर्हतायें पूरी कर ली हो की वरिष्ठता क्रम में संयुक्त विचारण सूची बनायीं जायेगी । विचारण क्षेत्र वर्ष की कुल उपलब्ध रिक्तियों का दो गुना + चार (4 ) होगा।

उदाहरण: यदि पदोन्नत किये जाने वाले संवर्ग में कुल रिक्तियां 5 हैं तो जिस संवर्ग से पदोन्नति की जाना है , उस संवर्ग की सभी लोक सेवकों की वरिष्ठता पदक्रम सूची मेंसे अधिकतम (2* 5 ) + 4 = 14 लोक सेवक विचारण सूची में सम्मिलित होंगे ।

(5) लोक सेवकों के विचाराधीन अवधि के गोपनीय प्रतिवेदनों के वर्गीकरण को नियम 11 के उपनियम ( 5) के अनुसार अंको में निर्धारित किया जायेगा । लोक सेवक के 05 वर्षों के गोपनीय प्रतिवेदनों के समग्र मूल्यांकन के आधार पर प्रथम श्रेणी से प्रथम श्रेणी के पदों पर पदोन्नति की उपयुक्तता के लिये न्यूनतम अर्हकारी अंक 15 होंगे। यदि संबंधित लोक सेवक के विचारण में लिये 05 वर्षों के गोपनीय प्रतिवेदनों के अंकों का समग्र योग , विहित न्यूनतम अर्हकारी अंकों से कम हो तो विचारण सूची में सम्मिलित लोक सेवक चयन वर्ष में पदोन्नति के लिये उपयुक्त नहीं होगा।

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

यदि आरक्षित प्रवर्ग के अपेक्षित लोक सेवक उपलब्ध नहीं है तो ऐसी स्थिति में आरक्षित प्रवर्ग के न्यूनतम अर्हकारी अंक 14 किया जा सकेगा:

परन्तु मानक शिथिल कर पदोन्नत किये जाने वाले लोक सेवकों को आरक्षित वर्ग की रिक्तियों के विरुद्ध ही पदोन्नति की पात्रता होगी, उन्हें अनारक्षित रिक्तियों के विरुद्ध पदोन्नत नहीं किया जायेगा।

(6) विभागीय पदोन्नति समिति, विचारण सूची में सम्मिलित उपयुक्त लोक सेवकों की प्रशासनिक दक्षता का परस्पर तुलनात्मक मूल्यांकन करेगी । समिति उनके वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदनों में प्राप्त अंको के आधार पर उपयुक्त लोक सेवकों को 02 श्रेणियों में विभाजित करेगी: -

(एक) श्रेणी 1 में ऐसे लोक सेवक रखे जायेंगे जिन्हें 05 पूर्ववर्ती वर्षों के गोपनीय प्रतिवेदन में प्राप्त ग्रेडिंग अनुसार 20 अंक प्राप्त हों ।

(दो) श्रेणी 2 में ऐसे लोक सेवक रखे जायेंगे जिन्हें 05 पूर्ववर्ती वर्षों के गोपनीय प्रतिवेदन में प्राप्त ग्रेडिंग अनुसार 15 से 19 अंक प्राप्त हों ।

(तीन) लोक सेवकों को पारस्परिक वरिष्ठता अवधारित करने के लिये श्रेणी 1 एवं श्रेणी 2 के लोक सेवकों की एक संयुक्त सूची तैयार की जायेगी जिसमें श्रेणी 1 के लोक सेवकों को सबसे ऊपर रखा जायेगा तत्पश्चात् उसके नीचे श्रेणी 2 के लोक सेवकों को रखा जायेगा ।

(चार) यदि एक से अधिक लोक सेवक किसी श्रेणी में वर्गीकृत किये गये हों तो उन्हें उनके फीडर संवर्ग/सेवा के भाग/पद के वेतनमान की पारस्परिक वरिष्ठता बनाये रखते हुये संयुक्त सूची में सम्मिलित किया जायेगा ।

(7) विभागीय पदोन्नति समिति द्वारा उपनियम ( 6) के अनुसार निर्मित संयुक्त सूची में से चयन सूची निम्नलिखित मापदंडों के अनुसार तैयार की जायेगी: -

(एक) संयुक्त विचारण सूची में से सर्वप्रथम नियम 12 के उपनियम ( 1 ) के अनुसार उपलब्ध अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के रिक्त पदों के विरूद्ध उपयुक्त पाये गये अनुसूचित जनजाति के लोक सेवकों के नाम वरिष्ठता क्रम में अंकित किये जायेंगे । यह सूची अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग की चयन सूची होगी ।

(दो) नियम 12 के उपनियम ( 1 ) की कार्यवाही के पश्चात् संयुक्त सूची में से नियम 12 के उपनियम ( 2 ) के अनुसार उपलब्ध अनुसूचित जाति प्रवर्ग के रिक्त पदों के मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

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विरुद्ध उपयुक्त पाये गये अनुसूचित जाति के लोक सेवकों के नाम वरिष्ठता क्रम में अंकित किये जायेंगे । यह सूची अनुसूचित जाति प्रवर्ग की चयन सूची होगी ।

(तीन) खण्ड (एक) एवं (दो) की कार्यवाही के पश्चात् संयुक्त सूची में से अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग की चयन सूची एवं अनुसूचित जाति प्रवर्ग की चयन सूची में उल्लेखित लोक सेवकों के नामों को हटाकर शेष बचे लोक सेवकों में से नियम 12 के उपनियम (3 ) के अनुसार उपलब्ध रिक्त पदों को वरिष्ठता क्रम में अंकित किया जायेगा । यह सूची अनारक्षित चयन सूची होगी।

(चार) प्रतीक्षा सूचीः- (क) प्रत्येक प्रवर्ग के लिये चयन वर्ष की अवधि में उद्भूत होने वाली रिक्तियों को भरने के लिये, 02 लोक सेवकों अथवा सम्बंधित प्रवर्ग की चयन सूची में सम्मिलित लोक सेवकों की संख्या का 10 प्रतिशत (जो भी अधिक हो) की वरिष्ठता क्रम में प्रतीक्षा सूची बनाई जायेगी ।

(ख ) यदि चयन वर्ष की अवधि में उद्भूत होने वाली रिक्ति नियम 12 के उपनियम ( 1 ) अथवा ( 2 ) की गणना के अनुसार आरक्षित रिक्ति है तो उसे सम्बंधित प्रवर्ग की प्रतीक्षा सूची से ही भरा जायेगा: परन्तु नियम 12 के उपनियम ( 1 ) एवं (2) की गणना के अनुसार पद उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उपरोक्त रिक्ति को अनारक्षित प्रतीक्षा सूची से ही भरा जायेगा।

(ग) यदि कोई आरक्षित प्रवर्ग का लोक सेवक वरिष्ठता के आधार पर आरक्षित प्रवर्ग एवं अनारक्षित दोनों प्रतीक्षा सूचियों में पात्रता रखता है तो उसे दोनों प्रतीक्षा सूचियों में स्थान दिया जायेगा।

(पांच) यदि किसी चयन वर्ष में ऐसी स्थिति निर्मित होती है कि आरक्षित प्रवर्ग के पर्याप्त प्रतिनिधित्व के लिये अवधारित आवश्यक संख्या में किसी आरक्षित प्रवर्ग के उपयुक्त लोक सेवक उपलब्ध नहीं होते हैं तो भरने से शेष रहे उतने पद तब तक रिक्त रखे जायेंगे , जब तक कि आरक्षित प्रवर्ग के पर्याप्त प्रतिनिधित्व के लिये किसी चयन वर्ष में अवधारित न्यूनतम संख्या (नियम 5 तथा नियम 12 के उपनियम ( 1 ) एवं (2) के अनुसार उक्त चयन वर्ष के लिये) की पूर्ति न हो जाये ।

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

(8) उपनियम (7) के खण्ड (एक) , (दो) एवं (तीन) के आधार पर तैयार की गयी चयन सूची में सम्मिलित लोक सेवकों के पदोन्नति आदेश सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किये जायेंगे ।

1 जनवरी को उपलब्ध रिक्त पदों के सम्बन्ध में आदेश 1 जनवरी से पूर्व जारी किया जायेगा जो 1 जनवरी से प्रभावशील होगा । 1 जनवरी के उपरान्त जिस - जिस समय रिक्तियां उद्भूत होंगी उस तिथि से अधिकतम 1 माह पूर्व पदोन्नति आदेश जारी किया जा सकेगा जो वास्तविक रिक्ति की तिथि से प्रभावशील होगा । सभी पदोन्नति आदेशों में आदेश के प्रभावशील होने की तिथि एवं पदभार ग्रहण करने से पूर्व नियम 14 के उपनियम ( 1 ) के खण्ड (एक) , (दो) अथवा (तीन) में उल्लेखित कार्यवाही की स्थिति में आदेश स्थगित माना जायेगा का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाना आवश्यक होगा।

13. पदोन्नति के फलस्वरूप वेतन का निर्धारण, शासकीय सेवक की पदोन्नति होने पर पदोन्नत पद का कार्यभार ग्रहण करने की तिथि को पदोन्नत पद के वेतनमान में वेतन निर्धारण किया जायेगाः

परन्तु, पदोन्नत शासकीय सेवक यह विकल्प दे सकता है कि वह उच्च पद की पदोन्नति की तिथि से वेतन निर्धारण कराये अथवा उस शासकीय सेवक को प्राप्त होने वाली आगामी वार्षिक वेतन वृद्धि की तिथि से वेतन निर्धारण कराये ।

14. सीलबंद लिफाफे की स्थिति में प्रक्रिया, - ( 1 ) विचारण सूची में सम्मिलित लोक सेवकों के संबंध में निम्न स्थितियों में समिति की अनुशंसा सीलबंद लिफाफे में रखी जायेगी: -

(एक) यदि लोक सेवक निलंबित हो,

(दो) यदि लोक सेवक के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण , नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 14 के अंतर्गत आरोप पत्र अथवा नियम 16 के अंतर्गत आरोप ज्ञापन/पत्र जारी कर दिया गया हो और ऐसी कार्यवाही लंबित हो,

(तीन) यदि लोक सेवक पर किसी आपराधिक आरोप के आधार पर प्रचलित अभियोजन प्रकरण में विभाग द्वारा सक्षम न्यायालय के समक्ष अभियोग पत्र प्रस्तुत करने हेतु अभियोजन स्वीकृति जारी कर दी गई हो अथवा सक्षम न्यायालय के समक्ष अभियोग - पत्र प्रस्तुत कर दिया गया हो।

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मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 19 जून 2025

(2 ) जिन लोक सेवकों के संबंध में समिति की अनुशंसा सीलबंद लिफाफे में रखी गयी है तो उस रिक्ति को प्राविधिक आधार पर स्थानापन्न रूप से भरा जायेगा ।

(3) जिन लोक सेवकों के संबंध में विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा सीलबंद लिफाफे में रखी गयी है , उनमें से ऐसे मामलों में, जिनमें लोक सेवक को पूर्णतः दोषमुक्त कर दिया जाता है तो सीलबंद अनुशंसा को खोला जायेगा तथा पात्र होने पर उस लोक सेवक की पदोन्नति की तिथि, जिस दिनांक की स्थिति में विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा सीलबंद लिफाफे में रखी गयी थी, के सन्दर्भ में उससे ठीक नीचे के कनिष्ठ लोक सेवक की पदोन्नति की तिथि से निर्धारित की जायेगी । ऐसे मामलों में लोक सेवक को संवर्ग के रिक्त पद के विरुद्ध समायोजित किया जायेगा। यदि कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं हो तो प्राविधिक आधार पर स्थानापन्न रूप से कार्य करने वाले सब से बाद में पदोन्नत किये गये व्यक्ति को पदावनत कर, उस पद के विरुद्ध पदोन्नत किया जा सकेगा ।

(4) जिन लोक सेवकों के संबंध में विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा सीलबंद लिफाफे में रखी गयी है , उनमें से ऐसे मामलों में जिनमें अनुशासनिक कार्यवाही के परिणामस्वरूप किसी लोक सेवक पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा ( वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम , 1966 के नियम 10 में उल्लेखित कोई शास्ति अधिरोपित की जाती है तो उस स्थिति में सीलबंद लिफाफे को नहीं खोला जायेगा । ऐसी स्थिति में उस पर अधिरोपित शास्ति का प्रभाव समाप्त होने के उपरांत, अगली विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में उसके नाम पर विचार किया जायेगा ।

15. श्रेणी उन्नयन की स्थिति में प्रक्रिया, यदि किसी लोक सेवक के गोपनीय प्रतिवेदन में सक्षम प्राधिकारी द्वारा श्रेणी उन्नयन का निर्णय लिया जाता है तो पदोन्नति के लिये इसका लाभ, श्रेणी उन्नयन संबंधी आदेश जारी होने के पूर्व में संपन्न हो चुकी विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक के सन्दर्भ में प्राप्त नहीं होगा अर्थात् ऐसे प्रकरणों के लिये पुनरीक्षण विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित नहीं की जायेगी । श्रेणी उन्नयन का लाभ ऐसे उन्नयन के पश्चात आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में पदोन्नति हेतु विचारण में लिये जाने पर ही प्राप्त होगा । श्रेणी उन्नयन के फलस्वरूप आगामी विभागीय पदोन्नति समिति में पात्र पाये जाने पर उस शासकीय सेवक की वरिष्ठता प्रभावित नहीं होगी ।

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

16. पदोन्नत पद पर पदग्रहण, पदोन्नति आदेश के प्रभावशील होने के दिनांक से पदोन्नत शासकीय सेवक द्वारा पदभार ग्रहण किया जायेगा । ऐसे मामलों में, जहां किसी लोक सेवक द्वारा पदोन्नत पद पर 2 माह की अवधि में पदभार ग्रहण नहीं किया जाता है तो उसके विरुद्ध मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम , 1966 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी एवं उसको आगामी 5 वर्षों के लिये पदोन्नति से वंचित किया जा सकेगाः

परन्तु विशेष परिस्थितियों में नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा पर्याप्त कारणों के आधार पर पद ग्रहण अवधि के सम्बन्ध में छूट दी जा सकेगी ।

17. पदभार ग्रहण करने की कार्यवाही की स्थिति में प्रक्रिया, विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में उपयुक्त पाये जाने के पश्चात् परन्तु पदभार ग्रहण करने के पूर्व यदि किसी लोक सेवक के विरूद्ध नियम 14 के उपनियम ( 1 ) के खण्ड (एक) , (दो) अथवा (तीन) में उल्लेखित कार्यवाही की जाती है तो ऐसी स्थिति में उस लोक सेवक का पदोन्नति आदेश जारी नहीं करते हुये अथवा यदि आदेश जारी कर दिया गया है तो उसे स्थगित करते हुये ऐसे प्रकरणों में नियम 14 के उपनियम ( 3 ) एवं (4 ) के अनुरूप ही कार्यवाही की जायेगी ।

स्पष्टीकरण: - पदोन्नति हेतु उपयुक्तता का निर्धारण किये जाने के उपरान्त परन्तु पदभार ग्रहण करने से पूर्व यदि नियम 14 के उपनियम ( 1 ) के खण्ड (एक) , ( दो) अथवा (तीन ) में उल्लेखित कार्यवाही की जाती है तो ऐसी स्थिति में पदोन्नति आदेश को स्थगित किया जाना इस कारण आवश्यक है क्योंकि वास्तविक पदोन्नति की पात्रता से पूर्व ही विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक कर पदोन्नति हेतु उपयुक्तता का निर्धारण किया गया है एवं ऐसी स्थिति में पदोन्नति आदेश प्रभावशील किया जाना उचित नहीं है ।

18. पदोन्नति के लिये विचार नहीं किये जाने हेतु विकल्प, कोई लोक सेवक उच्चतर संवर्ग/सेवा के भाग/पद पर पदोन्नति के लिये विचार नहीं किये जाने के संबंध में सम्बंधित चयन वर्ष की 31 अगस्त तक यह विकल्प दे सकेगा कि वह पदोन्नति नहीं चाहता है। ऐसे लोक सेवक का नाम, अगर उपरोक्तानुसार किसी चयन वर्ष की विचारण सूची में शामिल है तो उसे विकल्प के कारण, विचारण सूची से हटाया जायेगाः 310(20)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 जून 2025

परन्तु ऐसे लोक सेवक को आगामी पदोन्नति तक समयमान वेतन की पात्रता नहीं होगी ।

19. प्रतीक्षा सूची से रिक्तियों का भरा जाना, - चयन वर्ष की अवधि में उद्भूत होने वाली रिक्तियों को प्रतीक्षा सूची से भरा जायेगा । ऐसी रिक्तियों के उत्पन्न होने के दिनांक को पदोन्नति आदेश जारी किया जायेगा ।

20. पूर्णांक की गणना, - इन नियमों के अंतर्गत संपादित की जाने वाली कार्यवाहियों के दौरान किसी भी प्रकार का मूल्यांकन करते समय यदि कुल अंक, पूर्णांक में नहीं हैं तो गणना में 0.5 अथवा उससे अधिक अंक होने पर उसे आगामी पूर्णांक माना जायेगा और गणना में 0.5 से कम अंक होने पर ऐसे अंश की उपेक्षा की जायेगी अर्थात् शून्यांक माना जायेगा ।

21. विभागीय पदोन्नति समिति की पुनर्विलोकन बैठक, - ( 1 ) किसी भी विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक के सन्दर्भ में पुनर्विलोकन विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक निम्न परिस्थितियों में हो सकेगी: -

(एक) माननीय न्यायालय के आदेश के परिपालन में (विधिक उपचार उपलब्ध न होने की स्थिति में) ,

(दो) रिकॉर्ड पर गंभीर त्रुटि के स्पष्ट होने की स्थिति में: विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में रिकॉर्ड पर गंभीर त्रुटि के स्पष्ट होने की स्थिति में * ( error is apparent on the face of record ) यह आवश्यक होगा कि ऐसी परिस्थिति में नियुक्तिकर्ता अधिकारी द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर से पुनर्विलोकन विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित किये जाने हेतु कारण सहित आदेश जारी किया जायेगा जिसमें त्रुटि एवं इस सन्दर्भ में सही जानकारी का स्पष्ट लेख होगा ।

(2 ) विभागीय पदोन्नति समिति की पुनर्विलोकन बैठक की अनुशंसाओं में निर्मित पुनरीक्षित चयन सूची के सन्दर्भ में यथास्थिति नियम 11 अथवा नियम 12 के उपबंध लागू होंगे । पुनरीक्षित चयन सूची के आधार पर जारी पदोन्नति आदेश में, अगर आवश्यक हो तो , पूर्व में मूल विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक की अनुशंसाओं मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 19 जून 2025

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के आधार पर पदोन्नत लोक सेवक को पदावनत किया जा सकेगा । ऐसे प्रकरणों में सान्ख्येत्तर पदों का निर्माण नहीं किया जायेगा।

(3 ) इन नियमों के अधिसूचित होने के पूर्व की विभागीय पदोन्नति समितियों के पुनर्विलोकन बैठकों के सम्बन्ध में यह नियम लागू नहीं होंगे अर्थात तत्- समय लागू नियमों के अनुसार ही कार्यवाही की जायेगी ।

22. नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा प्रमाणीकरण, प्रत्येक नियुक्ति प्राधिकारी, उसके द्वारा जारी किये जाने वाले पदोन्नति आदेश पर इस आशय का एक प्रमाण पत्र पृष्ठांकित करेगा कि उसने इन नियमों के उपबंधों एवं इन नियमों के प्रकाश में राज्य सरकार द्वारा समय- समय पर जारी किये गये अनुदेशों का अनुपालन किया है ।

23. आयोग से परामर्श, विभागीय पदोन्नति समिति को, जिसकी अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष या किसी सदस्य द्वारा की गई हो, सिफारिश के संबंध में यह समझा जायेगा कि संविधान के अनुच्छेद 320 के खंड ( 3 ) के उपखंड (ख ) के अधीन आयोग से परामर्श करने संबंधी अपेक्षा का अनुपालन किया गया है ।

24. निर्वचन संबंधी कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति, यदि इन नियमों के प्रवर्तन के संबंध में कोई कठिनाई उद्भूत हो तो उसे राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग को निर्दिष्ट किया जायेगा , जिसका उस पर उसका विनिश्चय अंतिम होगा ।

25. एकल प्रद के विषय में प्रावधान, एकल पद वह होगा जो किसी संवर्ग/सेवा के भाग / श्रेणी में विशिष्ट वेतनमान या ग्रेड में केवल एक पद है, चाहे उसका पदनाम कुछ भी हो । किसी संवर्ग/सेवा का भाग/ श्रेणी के वेतनमान के पद में एक से अधिक पद स्वीकृत है और नियुक्ति/ पदोन्नति हेतु किसी वर्ष केवल एक पद ही उपलब्ध है तो वह एकल पद की परिभाषा में नहीं आयेगा क्योंकि उस संवर्ग में और भी पद पिछले वर्षों में रिक्त हुये हैं तथा अंगले वर्षों में रिक्त होंगे । यदि किसी राज्य/संभागीय /जिला स्तरीय संवर्ग/सेवा के भाग/ ग्रेड एवं पद के वेतनमान में एक से अधिक पद स्वीकृत हैं और अधीनस्थ कार्यालयों/संस्थाओं/स्थापनाओं के लिये प्रत्येक कार्यालय / संस्था/स्थापना में एक- एक पद के मान से पद आवंटित किये गये है तो ये एकल पद की श्रेणी में नहीं आयेंगे । एकल पद पर आरक्षित प्रवर्ग के लिये पर्याप्त प्रतिनिधित्व का सिद्धांत अर्थात् एकल पद पर पदोन्नति के लिये आरक्षण लागू नहीं होगा । एकल पद पर पदोन्नति के लिये विचारण क्षेत्र के अनुसार ही कार्यवाही की जायेगी ।

26. भरती नियमों में संशोधनः- राज्य लोक सेवाओं एवं पदों के लिये भरती को विनियमित करने वाले सभी नियम, इन नियमों में यथा- उपबंधित सीमा तक संशोधित किये गये समझे जायेंगे ।

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,

अजय कटेसरिया, उपसचिव.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2025

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 19 June 2025. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2025-06-19.155.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2025-06-19.155.Extraordinary.