प्रशास
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
( असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल , सोमवार , दिनांक 24 नवम्बर 2025- अग्रहायण 3 , शक 1947
क्रमांक 315]
वित्त विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल, दिनांक 24 नवम्बर 2025
क्र. - एफ.6-1-2025- नियम- चार. भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश ) नियम, 1977 को अतिष्ठित करते हुए , मध्यप्रदेश के राज्यपाल , एतद्वारा , निम्नलिखित नियम बनाते हैं , अर्थात्:-
अध्याय एक
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभ.-
(1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम " मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2025 " है.
(2) यह नियम दिनांक 01 जनवरी, 2026 से प्रवृत्त होंगे.
2. प्रयुक्ति का क्षेत्र.-
(1 ) इन नियमों में अन्यथा उपबंधित के सिवाय , ये नियम उन सभी शासकीय सेवकों पर लागू होंगे , जो इन नियमों के लागू होने की दिनांक को सेवा में हैं तथा जो राज्य के कामकाज से संबंधित सिविल सेवाओं तथा पदों पर नियुक्त हुए हैं , किन्तु ये नियम निम्नलिखित पर लागू नहीं होंगे :-
(क) आकस्मिक या दैनिक दर पर या अंशकालीन नियोजन में नियुक्त व्यक्ति;
(ख) आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले व्यक्ति;
;
(ग) कार्यभारित स्थापना में नियुक्त व्यक्ति
(घ) जहां संविदा में अन्यथा उपबंधित हो , को छोड़कर, संविदा पर नियुक्त व्यक्ति;
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(ङ) ऐसे व्यक्ति, जिनके लिए संविधान के उपबंधो अथवा तत्समय प्रभावशील किसी अन्य नियम के अधीन अथवा द्वारा विशेष उपबंधों का निर्माण किया गया हैं;
(च ) केन्द्रीय सरकार अथवा अन्य स्त्रोत से राज्य सरकार के विभाग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत व्यक्ति;
(छ) अखिल भारतीय सेवा के सदस्य।
3. परिभाषाएं.-
( 1 ) इन नियमों में , जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
( क) " सेवा का पूर्ण वर्ष या एक वर्ष की निरंतर सेवा " से अभिप्रेत है वह निरंतर सेवा जो मध्यप्रदेश शासन के अधीन निरंतर की गई हो तथा इसमें कार्य पर व्यतीत अवधि तथा अवकाश अथवा असाधारण अवकाश पर बिताई गई अवधि भी सम्मिलित है ;
(ख ) शासकीय सेवा के संबंध में " सेवानिवृत्ति की तिथि" अथवा " उसके सेवानिवृत्त होने की तिथि " से अभिप्रेत है उस महीने के अंतिम दिन का अपरान्ह , जिसमें शासकीय सेवक अपनी सेवा शर्तों के अधीन सेवानिवृत्ति हेतु निर्धारित आयु पूर्ण करता है;
(ग) " बाह्य सेवा" से अभिप्रेत है वह सेवा , जिसमें शासकीय सेवक , शासन की स्वीकृति से अपना वेतन , राज्य की संचित निधि के अलावा किसी अन्य स्रोत से प्राप्त करता हो ;
(घ) " प्रपत्र" से अभिप्रेत इन नियमों के साथ संलग्न प्रपत्र;
( ड. ) "अकार्य दिवस " से अभिप्रेत है वह दिवस या अवधि, जिसमें शासकीय सेवक कर्तव्य से जानबूझकर अनुपस्थित रहा हो तथा उस दिवस या अवधिहेतु अवकाश स्वीकृत न किया गया हो । यह अवधि सेवा के किसी भी प्रयोजन के लिए अर्हक मान्य नहीं होगी;
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(च) "शासकीय सेवक " से अभिप्रेत है ऐसा शासकीय सेवक जो राज्य शासन में किसी नियमित स्थापना के पद को धारण करता हो अथवा मध्यप्रदेश राज्य शासन के किसी नियमित स्थापना के पद पर धारणाधिकार रखता हो अथवा यदि उसका धारणाधिकार निलंबित नहीं किया गया होता तो उसका किसी नियमित स्थापना के पद पर धारणाधिकार होता;
(छ) "अवकाश विभाग " से अभिप्रेत है ऐसा विभाग अथवा विभाग का भाग , जिसमें विशिष्ट संवर्ग के शासकीय सेवकों को नियमित विश्रामावकाश कीअनुमति, उस अवधि में दी जाती है, जब विभाग में कार्यरत शासकीय सेवक को अनुपस्थित रहने की अनुमति दी गई हो;
(ज) अवकाश स्वीकृत करने हेतु सक्षम अधिकारी से अभिप्रेत है वह अधिकारी है , जिसका उल्लेख इन नियमों से संलग्न प्रथम अनुसूची के कॉलम -3 में किया गया है तथा जो कॉलम -2 में वर्णित अवकाश के प्रकार को स्वीकृत करने हेतु सक्षम है ।
(2 ) इन नियमों में प्रयुक्त किन्तु परिभाषित नहीं किए गए शब्दों तथा अभिव्यक्तियों के क्रमशः वही अर्थ होंगे, जैसे कि मूलभूत नियमों में उनके लिए समनुदेशित किए गए है ।
4. अस्थायी स्थानान्तरण पर या बाह्य सेवा पर शासकीय सेवक.-
( 1 ) ऐसे शासकीय सेवक , जिन पर ये नियम लागू होते हैं, जब उनका केन्द्रीय शासन अथवा अन्य राज्य शासन में अस्थायी स्थानान्तरण हो या वे भारत के बाहर बाह्य सेवा पर हों, तो वे इन्हीं नियमों द्वारा निरन्तर शासित होंगे ।
(2) उन शासकीय सेवकों के मामलों में , जो भारत के बाहर बाह्य सेवा में हैं ( भारत या भारत के बाहर यू.एन. एजेन्सीज की सेवा को सम्मिलित करते हुए ) या केन्द्रीय सशस्त्र बल में अस्थायी स्थानान्तरण पर हों, ये नियम, यथास्थिति, बाह्य सेवा अथवा अस्थायी स्थानान्तरण में के केवल दिए गए निबन्धनों और शर्तों की सीमा तक ही लागू होंगे ।
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5. अन्य अवकाश नियमों द्वारा शासित सेवाओं अथवा पदों से स्थानान्तरण. जब तक कि इन नियमों से अन्यथा उपबंधित न हो, किसी शासकीय सेवक को ये नियम लागू नहीं होंगे, -
(क) जब वह किसी ऐसी सेवा या पद पर अस्थायी रूप से स्थानान्तरित हो , जहां ये नियम लागू होते हैं , वहां वह उन अवकाश नियमों के अधीन बने रहेंगे जो उन्हें ऐसे स्थानान्तरण के पूर्व लागू थे; तथा
(ख ) जब वह किसी ऐसी नियमित स्थापना के पद पर नियुक्त हो, जहां ये नियम लागू होते हैं, तो ऐसी नियुक्ति की दिनांक से वह इन नियमों के अधीन उस दशा में पूर्व में उसे लागू नियमों के अर्न्तगत उसके लेखे में जमा अवकाश नियम 25 एवं 28 में दी गई संचयन की अधिकतम सीमा तक आगे ले जाया जाएगा । इन नियमों के अन्तर्गत अर्जित किए गए अवकाश को उपभोग में लेने के पूर्व इस प्रकार ले जाए गए अवकाश को सर्वप्रथम उपभोग कर समाप्त किया जाएगा । आगे ले जाए गए अवकाश के संबंध में अवकाश वेतन , उस विभाग या शासन को वहन करना होगा जहां से उसका स्थानान्तरण हुआ है ।
अध्याय दो- सामान्य शर्ते
6. अवकाश का अधिकार .-
(1 ) अवकाश की मांग अधिकार के रूप में नहीं की जा सकेगी ।
(2) जब लोक सेवा में ऐसा किया जाना आवश्यक प्रतीत हो, किसी भी प्रकार का अवकाश , स्वीकृतकर्ता सक्षम प्राधिकारी द्वारा अमान्य या निरस्त किया जा सकेगा , किन्तु शासकीय सेवक के लिखित अनुरोध के सिवाय , उस प्राधिकारी को यह छूट नहीं होगी कि वह किसी प्रकार के देय तथा आवेदित अवकाश को परिवर्तित कर सकेः
परन्तु, इसका उद्देश्य यह नहीं है कि शासकीय सेवकों के अवकाश के अधिकार को कम किया जाए । अवकाश स्वीकृतकर्ता अधिकारी को अवकाश स्वीकृत करने का ऐसा रोस्टर बनाना चाहिए जिससे आवश्यकतानुसार समस्त शासकीय सेवक अवकाश का लाभ ले सकें और शासकीय कार्य भी सुचारू रूप से चलेः मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
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परन्तु यह और कि शासकीय सेवक की सेवानिवृत्ति के पूर्व के 10 वर्ष के कार्यकाल में सामान्यतः अवकाश देने से इंकार नहीं करना चाहिए ।
7. अवकाश के दावे का नियमन. शासकीय सेवकों के अवकाश का दावा तत्समय प्रवृत्त उन नियमों से , जो अवकाश स्वीकृत करने के समय लागू थे । तथा तत्समय अवकाश लेखे में शेष अवकाश से विनियमित होगा ।
8. पदच्युति, निष्कासन या त्याग पत्र से जमा अवकाश पर प्रभाव .-
( 1 ) जहां शासकीय सेवक , पदच्युत या निष्कासित किया जाता है या शासकीय सेवा से त्याग पत्र दे देता है , तो ऐसी पदच्युति , निष्कासन या त्याग पत्र की दिनांक से जमा अवकाश का दावा स्वतः समाप्त हो जाएगा ।
(2 ) जहां शासकीय सेवक अपने पैतृक कार्यालय अथवा विभाग के बाहर राज्य शासन के ही अधीन किसी अन्य पद के लिए आवेदन करे और यदि ऐसा आवेदन उचित माध्यम से अग्रेषित किया जाए तथा नया पद ग्रहण करने के पूर्व आवेदक से अपना पद त्याग करने को कहा जाए , तो ऐसे त्याग पत्र के कारण उसके लेखे मे जमा अवकाश स्वतः समाप्त नहीं होगा ।
( 3 ) जहां शासकीय सेवक सेवा से पदच्युत अथवा निष्कासित किया जाता है और फिर अपील या पुनरीक्षण पर पुनःस्थापित किया जाता है तो उसे , यथास्थिति, पदच्युति या निष्कासन के पूर्व की सेवा के अवकाश को गणना में लेने की पात्रता होगी तथा सेवा में व्यवधान की अवधि को सक्षम आदेश द्वारा विनियमित किया जा सकेगा ।
(4 ) शासकीय सेवा जो क्षतिपूरक , असमर्थता पेंशन या उपदान पर सेवानिवृत्त होकर पुनर्नियुक्त किया जाता है तथा उसकी पूर्व की सेवा पेंशन हेतु गणना में लेने की अनुमति दी जाती है , तो उसे अवकाश हेतु, उसकी पूर्व की सेवा को गणना में लेने की पात्रता होगी ।
इसी प्रकार यदि शासकीय सेवक छंटनी के कारण राज्य शासन के ही एक विभाग से दूसरे विभाग में पदस्थ होता है एवं पिछली सेवा को मान्य मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
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किया जाता है , तब पिछली सेवा के अवकाश की भी आगे की सेवा में गणना होगी ।
9. एक प्रकार के अवकाश का दूसरे प्रकार के अवकाश में परिवर्तन - .
(1 ) शासकीय सेवक के लिखित निवेदन पर, जिस प्राधिकारी ने उसे अवकाश स्वीकृत किया है, वह, भूतलक्षी प्रभाव से, उसे भिन्न प्रकार के अवकाश में, जो उसे अवकाश स्वीकृति के समय देय तथा स्वीकार्य था, परिवर्तित कर सकेगा, लेकिन ऐसे परिवर्तन हेतु शासकीय सेवक अधिकार के रूप में दावा नहीं कर सकेगाः
परन्तु ऐसा आवेदन , संबंधित शासकीय सेवक द्वारा, अवकाश का लाभ लेने के पश्चात कर्तव्य पर उपस्थित होने के 15 दिवस के भीतर अवकाश स्वीकृतकर्ता अधिकारी को प्रस्तुत करना होगाः
परन्तु यह और कि शासकीय सेवक के सेवानिवृत्त अथवा सेवामुक्त होने के पश्चात पूर्व स्वीकृत अवकाश को अन्य प्रकार के अवकाश में परिवर्तित नहीं किया जा सकेगा।
(2) शासकीय सेवक को अंतिम रूप से स्वीकृत किए गए अवकाश के आधार पर एक प्रकार के अवकाश का दूसरे में परिवर्तन , वेतन के समायोजन के अधीन होगा, अर्थात उससे अधिक भुगतान की गई राशि वसूल की जाएगी या उसे देय बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा।
टिप्पणी- नियम के 31 उपबंधों के अधीन चिकित्सीय प्रमाणपत्र के आधार पर या अन्यथा प्रदान किया गया असाधारण अवकाश, पूर्वप्रभाव से नियम के 30 प्रावधानों के अंर्तगत अदेय अवकाश ( Leave Not Due ) में परिवर्तित किया जा सकेगा।
10. भिन्न प्रकार के अवकाश का संयोजन. इन नियमों में अन्यथा उपबन्धित के सिवाय , इन नियमों के अधीन किसी भिन्न प्रकार का अवकाश किसी दूसरे प्रकार के अवकाश के संयोजन में अथवा उसके तारतम्य में स्वीकृत किया जा सकेगा; स्पष्टीकरण आकस्मिक अवकाश- . , जिसे इन नियमों के अधीन अवकाश मान्य नहीं किया गया हो, को इन नियमों के अधीन स्वीकार्य किसी प्रकार के अवकाश के साथ जोड़ा नहीं जा सकेगाः मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
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परन्तु यदि शासकीय सेवक द्वारा किसी कार्य दिवस को दोपहर बाद के लिए आधे दिवस का आकस्मिक अवकाश का उपभोग किया है एवं वह अगले दिन अस्वस्थता के कारण कार्य में उपस्थित न हो सका हो एवं अस्वस्थता पर आधारित अन्य प्रकार का अवकाश लेना पड़ा हो , तब आधे दिवस के आकस्मिक अवकाश को अस्वस्थता पर आधारित अन्य प्रकार के अवकाश के साथ जोड़ा जा सकेगा ।
11. निरन्तर अवकाश की अधिकतम अवधि.-
(1 ) शासकीय सेवक को पांच वर्षों से अधिक निरन्तर अवधि का किसी प्रकार का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
(2 ) जब तक कि राज्यपाल , विशेष परिस्थितियों में अन्यथा विनिश्चय न करें, कोई शासकीय सेवक , जो पांच वर्ष से अधिक की अवधि तक, बाह्य सेवा को छोड़कर , कर्त्तव्य से अनुपस्थित रहता है , चाहे वह अवकाश पर हो या न हो , उसके बारे में यह माना जाएगा कि उसने शासकीय सेवा से त्यागपत्र दे दिया है:
परन्तु उप - नियम ( 2 ) के उपबंध को लागू किए जाने से पूर्व शासकीय सेवक को अनुपस्थिति के कारणों को स्पष्ट करने के लिए उचित अवसर प्रदान किया जाएगा:
परन्तु यह और कि यह नियम उस स्थिति पर लागू नहीं होगा , जिसमें अवकाश चिकित्सीय प्रमाण- पत्र पर , किसी विकलांगता के संबंध में लिया गया हो ।
12. अवकाश पर रहते हुए सेवा या नियोजन स्वीकार करना.-
( 1 ) कोई भी शासकीय सेवक ( उस शासकीय सेवक के अलावा , जिसे सीमित निजी व्यवसाय करने की अनुमति दी गई है अथवा जिसे सामयिक साहित्यिक कार्य या परीक्षक के रूप में सेवा अथवा ऐसे ही अन्य कार्य करने की अनुमति दी गई है ) अवकाश पर रहते हुए , अन्य कहीं कोई सेवा अथवा नियोजन स्वीकार या निजी व्यवसाय स्थापित, जिसमें सनदी लेखाकार , विधिक या मेडिकल प्रेक्टिशनर के रूप में परामर्शदाता भी सम्मिलित है , बिना निम्नांकित की पूर्व स्वीकृति प्राप्त किए, नहीं करेगा.- मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
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(क) राज्यपाल की , यदि प्रस्तावित सेवा अथवा नियोजन भारत के बाहर अन्य कहीं है , अथवा
( ख ) राज्य शासन की , यदि प्रस्तावित सेवा अथवा नियोजन भारत में है ।
(2 ) अवकाश पर रहते हुए किसी शासकीय सेवक को साधारणतः अन्य कोई सेवा या नियोजन ग्रहण करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अध्याय-तीन
अवकाश की स्वीकृति एवं अवकाश से वापसी
13. अवकाश के लिए आवेदन.-
( 1 ) अवकाश अथवा अवकाश में वृद्धि हेतु आवेदन , प्रपत्र 1 में ऐसे अवकाश की स्वीकृति अथवा वृद्धि स्वीकृत करने वाले सक्षम प्राधिकारी को नियत समय- सीमा में प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
( 2 ) अस्वस्थता के अलावा अन्य किसी आधार पर अवकाश हेतु आवेदन कम से कम अवकाश तिथि से तीन सप्ताह पूर्व प्रस्तुत किया जाना चाहिए। अवकाश स्वीकृत करने वाला सक्षम प्राधिकारी स्व - विवेक से विलम्ब से प्राप्त आवेदन- पत्र को स्वीकार कर सकेगाः
परन्तु जहां कोई शासकीय सेवक किसी विकलांगता अथवा अन्य परिस्थिति के कारण आवेदन या चिकित्सा प्रमाण - पत्र प्रस्तुत करने में असमर्थ है , वहां ऐसा आवेदन या चिकित्सा प्रमाण- पत्र , शासकीय सेवक की ओर से निम्नांकित के द्वारा प्रस्तुत किया जा सकेगा , -
(अ) शासकीय सेवक का जीवनसाथी; या
(ब) अविवाहित शासकीय सेवक के मामले में माता - पिता; या
(स ) शासकीय सेवक की संतान या भाई या बहन, जिसने वयस्कता की आयु प्राप्त कर ली है ;या 630
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(द) कोई भी व्यक्ति, जिसे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (2016 का 49 ) की धारा 14 के अनुसार शासकीय सेवक का सीमित संरक्षकत्व सौंपा गया है ,
और इस प्रकार प्रस्तुत आवेदन शासकीय सेवक द्वारा स्वयं बनाया और प्रस्तुत किया गया माना जाएगा।
14. अवकाश लेखा . प्रत्येक शासकीय सेवक के लिए कार्यालय प्रमुख ( जिस कार्यालय में शासकीय सेवक की सेवा पुस्तिका संधारित की जाती है) द्वारा प्रपत्र 2 में अवकाश लेखा रखा जाएगा ।
15. अवकाश की पात्रता का सत्यापन. शासकीय सेवक को तब तक कोई अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा जब तक कि अवकाश लेखा रखने वाले प्राधिकारी से उसकी पात्रता के संबंध में सत्यापन नहीं हो जाए ।
16. कुछ निश्चित परिस्थितियों में अवकाश स्वीकृत न किया जाना.- उस शासकीय सेवक को अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा, जिसे दण्ड देने वाले सक्षम प्राधिकारी ने शासकीय सेवा से पदच्युत करने , हटाने अथवा अनिवार्य सेवानिवृत्त करने का विनिश्चय कर लिया है । शासकीय सेवक को निलंबन काल में कोई भी अवकाश देय नहीं होगा ।
17. चिकित्सा प्रमाण - पत्र पर शासकीय सेवक को अवकाश की स्वीकृति-
( 1 ) शासकीय सेवक द्वारा अथवा नियम 13 के अनुसार प्रस्तुत चिकित्सा प्रमाण - पत्र के आधार पर लिए गए अवकाश हेतु आवेदन - पत्र के साथ पंजीकृत चिकित्सक ( मेडिकल प्रेक्टिशनर ) द्वारा प्रपत्र 3 में दिए गए चिकित्सा प्रमाण - पत्र को संलग्न किया जाएगा। उसमें बीमारी की प्रकृति तथा संभावित अवधि का, जहां तक संभव हो सके , स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए । ऐसा प्रार्थना - पत्र जहां तक संभव हो , अवकाश के पहले अथवा अवकाश अवधि के प्रारंभ होने के साथ , जिसके लिए अवकाश आवेदित है , प्रस्तुत करना चाहिए:
परन्तु आपवादिक परिस्थितियों में जहां शासकीय सेवक के लिए उस समय सीमा के भीतर यथोचित आवेदन पत्र प्रस्तुत करना संभव न हो , वहाँ मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
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आवेदन आवेदित अवकाश के प्रारंभ होने के 7 दिवस के भीतर प्रस्तुत करना चाहिए:
परन्तु यह और कि आपवादिक मामलों में, जहां अवकाश स्वीकृत करने वाले सक्षम प्राधिकारी का समाधान हो जाए कि शासकीय सेवक का समय सीमा के अन्दर यथोचित रूप से प्रार्थना - पत्र प्रस्तुत करना संभव नहीं था, वह स्व-विवेक से आवेदित अवकाश की अवधि प्रारंभ होने की दिनांक से ऐसे शासकीय सेवक द्वारा चिकित्सा प्रमाण - पत्र प्रस्तुतिकरण में 7 दिवस से अनधिक समय तक के विलम्ब को क्षमा कर सकेगा ।
(2 ) चिकित्सा अधिकारी ऐसे किसी प्रकरण में अवकाश स्वीकृत करने की अनुशंसा नहीं करेगा , जिसमें यथोचित प्रत्याशा प्रकट नहीं होती हो , कि संबंधित शासकीय सेवक अपना कार्य ग्रहण करने हेतु कभी भी कार्य करने योग्य ( fit ) होगा और ऐसे प्रकरण में चिकित्सा प्रमाण - पत्र में यह भी अंकित किया जाना चाहिए कि शासकीय सेवक शासकीय सेवा हेतु स्थाई रूप से अयोग्य है ।
(3 ) अवकाश स्वीकृत करने वाला सक्षम प्राधिकारी स्व - विवेक से शासकीय चिकित्सक , जो सिविल सर्जन के पद से कम का न हो , से अनुरोध करके आवेदक का यथासंभव शीघ्र स्वास्थ्य परीक्षा करवाकर दूसरा चिकित्सा अभिमत प्राप्त कर सकेगा ।
(4) उपनियम ( 3 ) में सन्दर्भित शासकीय चिकित्सा अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह बीमारी के तथ्यों और अनुशंसा की गई अवकाश की अवधि की आवश्यकता के संबंध में अपना स्पष्ट अभिमत व्यक्त करे और इस प्रयोजन हेतु चाहे तो वह आवेदक से उसके समक्ष अथवा उसके द्वारा नामांकित चिकित्सा पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित होने की अपेक्षा कर सकेगा ।
(5 ) इस नियम के अधीन स्वीकृत चिकित्सा प्रमाण - पत्र संबंधित शासकीय सेवक को अवकाश का कोई अधिकार प्रदान नहीं करता है । चिकित्सा प्रमाण - पत्र अवकाश स्वीकृत करने वाले सक्षम प्राधिकारी की ओर अग्रेषित किया जाना चाहिए तथा उस प्राधिकारी के आदेश की प्रतीक्षा की जानी चाहिए ।
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(6) अवकाश स्वीकृतकर्ता सक्षम प्राधिकारी स्व- विवेक से , अवकाश हेतु प्रार्थना- पत्र , जो एक समय में 7 दिन से अधिक का नहीं हैं, के मामले में चिकित्सा प्रमाण - पत्र प्रस्तुत करने से छूट प्रदान कर सकता है , तथापि ऐसा अवकाश चिकित्सा प्रमाण - पत्र पर नहीं माना जाएगा तथा चिकित्सा आधार के अलावा अन्य अवकाश के विरुद्ध विकलित किया जाएगा ।
18. उस शासकीय सेवक को अवकाश , जिसके कार्य पर स्वस्थ होकर वापिस आने की कोई संभावना न हो-
(1 ) (क) जब कोई चिकित्सा प्राधिकारी यह राय प्रकट करे कि इसकी कोई संभावना नहीं है कि शासकीय सेवक कभी भी अपना कार्य ग्रहण करने के योग्य होगा , तो ऐसे शासकीय सेवक को सामान्य रूप से अवकाश अमान्य नहीं किया जाएगा ।
( ख ) यदि अवकाश की पात्रता हो , तो निम्नांकित शर्तों पर अवकाश स्वीकृत करने वाले सक्षम प्राधिकारी द्वारा अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है.-
(एक) यदि चिकित्सा प्राधिकारी निश्चित रूप से यह कहने में असमर्थ हो कि शासकीय सेवक फिर कभी भी सेवा हेतु योग्य नहीं होगा, तो कुल बारह महीनों से अनधिक अवधि का अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा और बिना किसी चिकित्सा अधिकारी के पुनःसंदर्भित किए ऐसे अवकाश को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
(दो) यदि शासकीय सेवक को कोई चिकित्सा अधिकारी आगे सेवा के लिए पूर्णतः और स्थायी तौर पर अनुपयुक्त घोषित करे , तो चिकित्सा प्राधिकारी से प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद ही उसे अवकाश अथवा अवकाश में वृद्धि स्वीकृत की जाएगी , परन्तु चिकित्सा प्राधिकारी की सूचना की दिनांक से आगे कार्य की किसी अवधि के साथ अवकाश लेखे में विकलित अवकाश की अवधि छह महीने से अधिक नहीं होगी ।
(2 ) शासकीय सेवक , जिसे चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा आगे की सेवा हेतु पूर्णतः तथा स्थायी रूप से अनुपयुक्त घोषित किया गया है- मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 नवम्बर 2025
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(क) यदि वह कर्तव्य पर है , तो उसके कर्तव्यों से कार्यमुक्त होने की दिनांक से सेवा से अनुपयुक्त माना जाएगा , जिसकी व्यवस्था चिकित्सा प्राधिकारी की रिपोर्ट की प्राप्ति पर अविलम्ब की जानी चहिए । यदि उसे उपनियम ( 1 ) के अधीन अवकाश स्वीकृत किया गया है , तो ऐसे अवकाश की समाप्ति पर अनुपयुक्त माना जाएगा।
(ख ) यदि वह पहले से अवकाश पर है और यदि उसे उपनियम ( 1 ) के अधीन कोई अवकाश अथवा अवकाश में वृद्धि स्वीकृत की गई है , तो उसे उसकी समाप्ति पर सेवा से अनुपयुक्त माना जाएगा ।
19. अवकाश का प्रारंभ और अंत. नियम 20 में यथा उपबन्धित के सिवाय, साधारणतः अवकाश उस दिन से प्रारंभ होगा, जिस दिन कार्यभार सौंपा जाए तथा उस दिन के पहले समाप्त होगा , जब कार्यभार ग्रहण किया जाए ।
20. अवकाश के साथ सार्वजनिक अवकाश का संयोजन.-
( 1 ) उन प्रकरणों को छोडकर , जहां प्रशासनिक कारणों से अवकाश स्वीकृत करने वाले प्राधिकारी ने विशेष रूप से अवकाश के पूर्व और/ या बाद में अवकाश (अवकाशों ) को जोड़ने की अनुमति नहीं दी है, जिस दिन शासकीय सेवक का अवकाश प्रारंभ होता है उस दिन के ठीक पहले दिन अथवा जिस दिन अवकाश समाप्त होता है उसके ठीक दूसरे दिन सार्वजनिक अवकाश है या सार्वजनिक अवकाशों की श्रृंखला है, तो शासकीय सेवक अवकाश के पूर्व के दिन अपना मुख्यालय छोड़ सकता है अथवा अपने मुख्यालय पर ऐसी सार्वजनिक अवकाश या अवकाशों की श्रृंखला के बाद वाले दिन वापस लौट सकता है।
(2 ) जब किसी शासकीय सेवक को बीमार प्रमाणित किया जाता है , तो जिस दिन से बीमार प्रमाणित किया गया है उसके पूर्व का दिन यदि सार्वजनिक अवकाश है, तो वह अवकाश के साथ जोडा (prefix ) जाएगा तथा उसके बाद के दिन अवकाश आता है , तो वह अवकाश का भाग माना जाएगा।
(3) जब कोई शासकीय सेवक कार्य करने योग्य ( fit) प्रमाणित किया जाता है, जिस दिन से वह कार्य करने योग्य ( fit) हुआ है उसके पश्चात पड़ने वाला अवकाश मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
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के साथ जोड़ा ( suffix ) जाएगा तथा कार्य करने योग्य ( fit ) होने के दिन के पूर्व के अवकाश के साथ जोड़ा जाएगा ।
(4) यदि अवकाश के पूर्व सार्वजनिक अवकाश जोड़े जाते हैं, तो अवकाश तथा तत्संबंधी वेतन व भत्तों की पुनर्व्यवस्था का प्रभाव सार्वजनिक अवकाशों के बाद के दिन से होगा ।
(5) यदि अवकाश के बाद सार्वजनिक अवकाश जोडे जाते हैं , तो अवकाश की समाप्ति तथा तत्संबंधी वेतन एवं भत्तों की पुनर्व्यवस्था का प्रभाव उस दिन से होगा जिस दिन सार्वजनिक अवकाश न जोडे जाते तो अवकाश समाप्त हो जाता ।
21. लेखे में शेष बचे अवकाश की सूचना. शासकीय सेवक के अर्जित अवकाश/अर्ध वेतन अवकाश स्वीकृति आदेश में उसके लेखे में शेष बचे हुए अवकाश का उल्लेख होना चाहिए ।
22. अवकाश समाप्ति के पूर्व कार्य पर वापस बुलाना.- अवकाश पर रहते हुए यदि किसी शासकीय सेवक को अवकाश समाप्ति के पूर्व कार्य पर वापस बुलाया जाता है , तो उसे निम्नांकित की पात्रता होगी-
(क) यदि अवकाश, जिससे वह वापस बुलाया जा रहा है , भारत में व्यतीत कर रहा है , तो जिस तिथि को वह कर्तव्य स्थल के लिए रवाना होता है , उसी तिथि से उसे कर्तव्य पर माना जाएगा, तथा वह-
(एक) उस यात्रा के लिए यात्रा भत्ता सुसंगत नियमों के अन्तर्गत प्राप्त करेगा; तथा
(दो) जब तक वह अपना पद ग्रहण नहीं करता है, अवकाश वेतन उसी दर से प्राप्त करेगा , जिस दर से वह प्राप्त करता , यदि उसे अवकाश से वापस नहीं बुलाया जाता ।
( ख ) यदि अवकाश , जिससे उसे वापस बुलाया जा रहा है , भारत के बाहर व्यतीत कर रहा है , तो भारत तक की यात्रा में व्यतीत समय को अवकाश की गणना के लिए कर्तव्य अवधि माना जाएगा और वह प्राप्त करेगा: -
(एक) भारत में पहुंचने तक की यात्रा में व्यतीत अवधि का तथा भारत आने पर अपना पद ग्रहण करने की तिथि तक का अवकाश वेतन , उस दर मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
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से, जिस दर से वह प्राप्त करता , यदि उसे अवकाश से वापस न बुलाया जाता तो वह प्राप्त करता;
(दो) भारत पहुंचने तक की यात्रा पर सुसंगत नियमों के अन्तर्गत व्यय की प्रतिपूर्ति की सुविधा;
(तीन) यदि उसने भारत में वापसी पर प्रस्थान की दिनांक तक अपने अवकाश का आधा समय अथवा तीन मास , जो भी कम हो , व्यतीत नहीं किया है तो भारत से जाने में किए गए यात्रा व्यय को भी वापस पाने का पात्र होगा;
(चार ) भारत में उतरने के स्थान से कर्तव्य स्थल तक की यात्रा हेतु उस समय प्रचलित नियमों के अधीन यात्रा भत्ता ।
23. अवकाश से वापसी.-
( 1 ) कोई भी शासकीय सेवक स्वीकृत अवकाश समाप्त होने के पूर्व तब तक अपने कार्य पर वापस नहीं आ सकेगा जब तक कि उसे ऐसा करने की अनुमति उस प्राधिकारी द्वारा नहीं दी जाती है जिसने उसे अवकाश स्वीकृत किया था ।
(2) जो शासकीय सेवक चिकित्सा प्रमाण - पत्र के आधार पर अवकाश पर है , अपने कार्य पर वापस नहीं आ सकता जब तक कि वह प्रपत्र -4 में फिटनेस (स्वस्थ होने विषयक) प्रमाण- पत्र प्रस्तुत नहीं करे।
(3) (क) इस आशय के विशिष्ट आदेशों के अभाव में, अवकाश से वापस लौटने वाला शासकीय सेवक उस पद पर पुनः कार्य ग्रहण की पात्रता नहीं रखता है , जिस पद पर वह अवकाश पर जाने के पूर्व पदस्थ था ।
(ख ) ऐसा शासकीय सेवक अपने कार्य पर उपस्थित होने की सूचना उस प्राधिकारी को, जिसने उसे अवकाश स्वीकृत किया था अथवा उस प्राधिकारी को, जैसा अवकाश स्वीकृति आदेश में निर्दिष्ट है , देगा और उसके आदेश की प्रतीक्षा करेगा ।
24. अवकाश समाप्ति के पश्चात अनुपस्थिति.-
( 1 ) जब तक अवकाश स्वीकृत करने वाला सक्षम प्राधिकारी अवकाश में वृद्धि स्वीकार नहीं करे , शासकीय सेवक , जो अवकाश समाप्त होने के पश्चात 630(13)
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अनुपस्थितरहता है , की ऐसी अनुपस्थिति अवधि को अकार्य दिवस ( Dies- non ) माना जाएगा तद्नुसार प्रशासकीय विभाग द्वारा आदेश जारी किए जाएंगे ।
(2 ) अवकाश समाप्ति के बाद स्वेच्छा से कार्य से अनुपस्थित रहने वाला शासकीय सेवक अनुशासनिक कार्यवाही का भागी होगा ।
अध्याय-चार
देय एवं ग्राह्य अवकाशों के प्रकार
25. अवकाश विभागों के अलावा अन्य विभागों में सेवारत शासकीय सेवकों को अर्जित अवकाश.-
(1 ) (क) शासकीय सेवक, जो अवकाश विभागों के अलावा अन्य विभाग में कार्यरत है, को प्रत्येक कैलेण्डर वर्ष में 30 दिनों के अर्जित अवकाश की पात्रता होगी;
(ख ) प्रत्येक वर्ष पहली जनवरी तथा पहली जुलाई को प्रत्येक शासकीय सेवक के अवकाश लेखे में 15-15 दिनों का दो किश्तों में अग्रिम में अर्जित अवकाश जमा किया जाएगा;
(ग) पिछली छह माही की समाप्ति पर शासकीय सेवक के लेखे में जमा अवकाश को इस शर्त के अधीन आगे बढ़ाया जाएगा कि इस तरह बढ़ाए गए अवकाश तथा छह माही में जमा होने वाले अवकाश का योग 300 दिन की सीमा से अधिक न होः
परन्तु जहां दिसंबर अथवा जून के अंतिम दिन को शासकीय सेवक के लेखे में अर्जित अवकाश 300 दिन अथवा उससे कम, किन्तु 285 दिन से अधिक शेष है , तो जनवरी या जुलाई के प्रथम दिन , 15 दिन का अर्जित अवकाश अग्रिम में चरण ( ख ) में उल्लिखित विधि के अनुसार जमा करने के बजाय अवकाश लेखा में पृथक से रखा जाएगा तथा शासकीय सेवक द्वारा उस अर्ध वार्षिक अवधि के दौरान लिए गए अर्जित अवकाश के विरुद्ध पहले समायोजित होगा, तथा शेष, यदि कोई मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
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बचे, अर्ध वर्ष की समाप्ति पर अवकाश लेखा में , इस शर्त के अध्यधीन रहते हुए कि ऐसे अर्जित अवकाश का शेष 300 दिन, पूर्व से जमा शेष 300 दिन की अधिकतम सीमा से अधिक नहीं हो , जमा किया जाएगा ।
जब कोई शासकीय सेवक पात्र पदग्रहण काल का लाभ लिए बिना नए पद पर कार्य ग्रहण करता है , तब पद ग्रहण काल नियम के सुसंगत नियम के अनुसार उपभोग नहीं की गई कार्य ग्रहण काल की अवधि अर्जित अवकाश में जोड़ी जाएगी, परन्तु अवकाश लेखे में शेष अवकाश तथा पद ग्रहण काल की उपभोग नहीं की गई अवधि का योग 300 दिन से अधिक नहीं होगा ।
(
2 ) उपनियम (3 ) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए , अधिकतम अर्जित अवकाश, जो एक समय में किसी शासकीय सेवक को स्वीकृत किया जाएगा, वह 180 दिनों से अधिक नहीं होगाः
परन्तु विशेष स्थिति , जिसे अभिलिखित किया जाए , में शासकीय सेवक को उनके लेखे में शेष अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है ।
(3 ) किसी शासकीय सेवक को 180 दिनों से अधिक परन्तु 300 दिनों से अनधिक अर्जित अवकाश तभी स्वीकृत किया जाएगा , यदि वह इस प्रकार स्वीकृत सम्पूर्ण अवकाश अथवा उसका कोई भाग भारत से बाहर व्यतीत करता है:
परन्तु जहां अर्जित अवकाश इस उपनियम के अधीन 180 दिन से अधिक स्वीकृत किया जाता है , तो भारत में व्यतीत ऐसे अवकाश की अवधि कुल मिलाकर 180 दिन की उपरोक्त सीमा से अधिक नहीं होगी।
26. नवनियुक्त शासकीय सेवक के संबंध में अर्जित अवकाश की गणना.-
( 1 ) नवनियुक्त शासकीय सेवक के अवकाश लेखे में , जिसे कैलेण्डर वर्ष की किसी छह माही में नियुक्त किया गया है और उसके छह माही में कार्य पर रहने की संभावना है , सेवा के प्रत्येक पूर्ण कैलेण्डर माह हेतु 2 दिन के मान से अर्जित अवकाश लेखे में जमा किया जाएगा ।
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( 2 ) ( क) जिस छह माही में शासकीय सेवक सेवानिवृत्त होने वाला है अथवा सेवा से त्याग - पत्र दे देता है , उसके लेखे में उस छह माही में सेवानिवृत्ति अथवा त्याग - पत्र की तिथि तक प्रत्येक पूर्ण कैलेण्डर माह हेतु 2 दिन की दर से अर्जित अवकाश जमा किया जाएगा ।
( ख ) जब किसी शासकीय सेवक को सेवा से हटाया अथवा पदच्युत किया जाता है अथवा सेवा में रहते हुए उसकी मृत्यु हो जाती है , तो प्रत्येक पूर्ण कैलेण्डर माह के लिए , जिसमें उसे हटाया अथवा पदच्युत किया गया है अथवा सेवा में रहते हुए उसकी मृत्यु हो जाती है, 2 दिन की दर से अर्जित अवकाश जमा करने की अनुमति दी जाएगी ।
( 3 ) यदि किसी शासकीय सेवक को किसी छह माही में असाधारण अवकाश तथा/ या कुछ अवधि की अनुपस्थिति को अकार्य दिवस माना गया है , तो आगामी छह माही के प्रारंभ पर उसके अवकाश लेखे में किए जाने वाले जमा में से ऐसे अवकाश तथा/ या अकार्य दिवस की अवधि का 1 / 10वां भाग कम कर दिया जाएगा , किन्तु इसकी अधिकतम सीमा 15 दिन की होगी ।
(4) अर्जित अवकाश को जमा करते समय एक दिन के अपूर्णांक को निकटतम दिन में पूर्णांकित किया जाएगा अर्थात आधे से कम अपूर्णांक को छोड़ दिया जाएगा और आधे या उससे अधिक को एक दिन माना जाएगा ।
27. अवकाश विभागों में सेवा करने वाले शैक्षणिक शासकीय सेवक के लिए अर्जित अवकाश.-
( 1 ) ( क) प्रत्येक शैक्षणिक शासकीय सेवक, जो अवकाश विभाग में कार्य कर रहे हैं , के अवकाश लेखे में प्रत्येक कलैंडर वर्ष के जनवरी और जुलाई के प्रथम दिन, पांच दिनों की दो किश्तों में अर्जित अवकाश अग्रिम में जमा किया जाएगा;
( ख ) किसी ऐसे वर्ष के संबंध में जिसके लिए कोई शासकीय सेवक अवकाश के एक भाग का उपभोग कर लेता है तो वह पूर्ण अवकाश दिनों में से उपभोग नहीं किए गए अवकाश दिनों के बीस दिन के अनुपात में अतिरिक्त अर्जित अवकाश का पात्र होगाः मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
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परन्तु एक कलैंडर वर्ष में जमा किया गया कुल अर्जित अवकाश, तीस दिन से अधिक नहीं होगाः
परन्तु यह औ कि उपर्युक्त हेतु विश्रामावकाश की अवधि में से न्यूनतम 10 दिवस कार्य करना आवश्यक है ।
उदाहरण- अवकाश दिवस में सेवा करने वाले शैक्षणिक संवर्ग के शासकीय सेवक के पूर्ण अवकाश के दिनों की संख्या यदि 45 दिवस है एवं उपभोग नहीं किए गए दिवस की संख्या 15 है , तो ऐसी स्थिति में अवकाश दिनों के 20 दिन (अन्य शासकीय सेवकों को पात्र अर्जित अवकाश ( 30 ) एवं विश्रामावकाश विभाग के शैक्षणिक संवर्ग को पात्र अर्जित अवकाश ( 10 ) का अन्तर) , के अनुपात में 7 दिवस के अतिरिक्त अर्जित अवकाश की पात्रता होगी , जो उस वर्ष के कुल अर्जित अवकाश 30 दिनों तक सीमित होगी ।
= 45दिन
(एक) पूर्ण अवकाश के दिनों की संख्या
(दो) उपभोग नहीं किए गए दिनों की संख्या 15दिन =
(तीन) अर्जित अवकाश (20 दिन) के अनुपात में पात्रता { × 20 } = 7 दिन ( पूर्णांकित) ( ग) यदि, किसी वर्ष में किसी शैक्षणिक शासकीय सेवक ने अवकाश का उपभोग नहीं किया है , तो अर्जित अवकाश खंड ( क) और (ख ) के बजाए
नियम 25 के अनुसार होगी ।
स्पष्टीकरण- इस नियम के प्रयोजन हेतु 'वर्ष' का अभिप्राय उस कैलेण्डर वर्ष से नहीं लगाया जाएगा जिसमें ड्यूटी की जाती है , बल्कि विश्रामावकाश विभाग में 12 महिनों की वास्तविक ड्यूटी से लगाया जाएगा ।
टिप्पणी ( 1 ) जब तक कि उच्च अधिकारी के सामान्य या विशेष आदेश द्वारा किसी शासकीय सेवक को विश्रामावकाश या उसके भाग का लाभ उठाने से वंचित नहीं किया जाता है, तब तक यह माना जाएगा कि विश्रामावकाश के पात्र शासकीय सेवक ने विश्रामावकाश या उसके भाग का लाभ उठाया है ।
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टिप्पणी ( 2) जब विश्रामावकाश विभाग में सेवारत कोई शैक्षणिक शासकीय सेवक, सेवा का एक वर्ष पूरा करने के पहले ही अवकाश पर जाता है , तो उसको स्वीकार्य अर्जित अवकाश की गणना उस विश्रामावकाश से नहीं की जाएगी जो अवकाश पर जाने के पूर्व उपलब्ध थी, बल्कि उस विश्रामावकाश से की जाएगी जो वास्तविक कर्तव्य अवधि में पड़ती है ।
(2) विश्रामावकाश को इन नियमों में वर्णित किसी अवकाश के साथ जोड़कर लिया जासकेगाः
परन्तु विश्रामावकाश तथा अर्जित अवकाश का योग, चाहे अर्जित अवकाश को किसी अवकाश के संलग्न या अन्य अवकाश से जोड़कर लिया हो, नियम 25 के अन्तर्गत एक समय में अधिकतम देय अवकाश की सीमा से अधिक नहीं होगा ।
(3 ) शासकीय सेवक के पिछली छह माही के अन्त में अवशेष अर्जित अवकाश को अगली छह माही के लिए देय अर्जित अवकाश में जोड़ा जाएगा , लेकिन इस प्रकार आगे दी गई तथा अगली छह माही के अवकाश का योग , उन अर्जित अवकाश के दिनों को जोड़कर , अधिकतम सीमा 300 दिन से अधिक नहीं होगा ।.
नोट- विश्रामावकाश विभाग में कार्यरत शैक्षणिक शासकीय सेवक को, शेष पदग्रहण काल को अर्जित अवकाश में जोड़ने का लाभ नियम 25 के अनुसार मिलेगा ।
28. अर्ध वेतन अवकाश.-
( 1 ) प्रत्येक शासकीय सेवक के अर्धवेतन अवकाश लेखे में प्रत्येक वर्ष पहली जनवरी तथा पहली जुलाई को 10-10 दिन अर्धवेतन अवकाश , दो किश्तों में अग्रिम में जमा किया जाएगा ।
(2) (क) नवनियुक्त शासकीय सेवक के मामले में , अर्धवेतन अवकाश लेखे में प्रति पूरे माह पर 5/3 दिन के मान से छह माही पूरी होने तक के माहों के लिए अर्धवेतन अवकाश जमा किया जाएगा ।
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(ख) जिस छह माही में शासकीय सेवक सेवानिवृत्त होने वाला है अथवा सेवा से त्याग पत्र दे देता है, के लेखे में उस छह माही में सेवानिवृति अथवा त्यागपत्र की तिथि तक प्रत्येक पूर्ण कैलेण्डर माह हेतु 5/3 दिन की दर से अर्ध वेतन अवकाश जमा किया जाएगा ।
(ग) जब किसी शासकीय सेवक को सेवा से हटाया अथवा पदच्युत किया जाता है अथवा सेवा में रहते हुए उसकी मृत्यु हो जाती है , तो प्रत्येक पूर्ण कैलेण्डर माह के लिए, जिसमें उसे हटाया अथवा पदच्युत किया गया है अथवा सेवा में रहते हुए मृत्यु हो जाती है , 5/3 दिन की दर से अर्धवेतन अवकाश जमा करने की अनुमति दी जाएगी ।
(घ) जब किसी शासकीय सेवक की अनुपस्थिति अवधि या निलम्बन काल को किसी छह माही में "अकार्य दिवस " ( Dies - non ) घोषित किया जाता है तो अगले छ: माह में जब उसके लेखे में अर्धवैतनिक अवकाश जमा किया जाएगा उसमें से'अकार्य दिवस' की अवधि का 1/18 भाग (अधिकतम 10 दिन तक) कम किया जाएगा ।
(3 ) इस नियम के अन्तर्गत अवकाश , ' चिकित्सीय आधार'या व्यक्तिगत कार्य के आधार पर स्वीकृत किया जा सकेगा ।
(4 ) चिकित्सा प्रमाण - पत्र पर ऐसा अवकाश , ऐसे चिकित्सा प्राधिकारी से चिकित्सा प्रमाण - पत्र प्रस्तुत करने पर दिया जाएगा, जैसा कि नियम 17 में उल्लिखित है ।
(5 ) अर्धवेतन अवकाश को जमा करते समय एक दिन के अपूर्णांक को निकटतम दिन में पूर्णांकित किया जाएगा अर्थात् आधे से कम अपूर्णांक छोड़ दिया जाएगा और आधे या उससे अधिक को एक दिन माना जाएगा।
29. लघुकृत अवकाश.-
( 1 ) किसी शासकीय सेवक को आगे नियमों में दी गई आपवादिक स्थितियों को छोड़कर अन्य प्रकरणों में निम्न शर्तों के अधीन केवल चिकित्सा प्रमाण - पत्र के आधार पर देय अर्ध वेतन अवकाश के आधे से अनधिक लघुकृत अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
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(एक) जब लघुकृत अवकाश स्वीकृत किया जाए तो ऐसे अवकाश का दुगुना, देय अर्ध वेतन अवकाश लेखे में विकलित किया जाएगा ।
(दो) जब तक कि अवकाश को स्वीकृत करने वाले सक्षम प्राधिकारी को विश्वास करने का कारण न हो कि शासकीय सेवक अवकाश की समाप्ति पर अपने कर्तव्य पर वापिस लौट आएगा, लघुकृत अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा ।
( 2 ) सम्पूर्ण सेवाकाल में अधिकतम 180 दिनों के अर्ध वेतन अवकाश ( बिना चिकित्सा प्रमाण - पत्र प्रस्तुत किए ) को लघुकृत अवकाश में परिवर्तित करने की अनुमति दी जा सकती है , जहां ऐसे अवकाश का उपभोग अनुमोदित पाठ्यक्रम हेतु सक्षम प्राधिकारी द्वारा लोकहित में प्रमाणित किया गया हो ।
(3 ) जिस शासकीय सेवक को उक्त अवकाश स्वीकृत किया गया है , यदि वह सेवा से त्याग पत्र दे देता है अथवा कर्तव्य पर बिना वापस लौटे उसकी प्रार्थना पर स्वैच्छिक सेवानिवृत्त होने की अनुमति दी जाती है , तो लघुकृत अवकाश को अर्धवेतन अवकाश के समान समझा जाएगा तथा लघुकृतं अवकाश और अर्ध वेतन अवकाश के संबंध में अवकाश वेतन के मध्य अंतर की राशि को वसूल किया जाएगा:
परन्तु यदि शासकीय सेवक की सेवानिवृत्ति अस्वस्थता के कारण से है जिससे वह आगे सेवा के लिए अनुपयुक्त हो गया है अथवा उसकी मृत्यु होने की स्थिति में , इस प्रकार की कोई वसूली नहीं की जाएगी ।
30. अदेय अवकाश.-
( 1 ) किसी शासकीय सेवक को अदेय अवकाश निम्नांकित शर्तों के अधीन स्वीकृत किया जा सकेगा
(क) अवकाश स्वीकृत करने वाले सक्षम प्राधिकारी को विश्वास हो कि अवकाश की समाप्ति पर शासकीय सेवक अपने कार्य पर वापस लौट आएगा;
(ख) अदेय अवकाश उतने अद्ध वेतन अवकाश तक सीमित किया जाएगा, जितने उसके बाद में अर्जित करने की संभावना हो;
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(ग) संपूर्ण सेवाकाल में अधिकतम अदेय अवकाश 360 दिनों तक सीमित होगा, जिसमें से एक समय में 90 दिन से अधिक स्वीकृत नहीं किया जा सकेगा; तथा कुल 180 दिनों तक चिकित्सा प्रमाण पत्र के बिना स्वीकृत किया जा सकता है ।
(घ) अदेय अवकाश, उस अर्द्ध वेतन अवकाश के विरूद्ध विकलित किया जाएगा, जिसे शासकीय सेवक भविष्य में अर्जित करेगा ।
(2) (क) जिस शासकीय सेवक को अदेय अवकाश स्वीकृत किया गया है, यदि वह सेवा से त्याग पत्र दे देता है या बिना कर्तव्य पर वापस लौटे उसके निवेदन पर उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत होने की अनुमति दी जाती है, तब अदेय अवकाश निरस्त कर दिया जाएगा तथा त्याग पत्र अथवा सेवानिवृत्ति उस तिथि से प्रभावशील मानी जाएगी , जिस तिथि से ऐसा अवकाश प्रारंभ हुआ था तथा उससे अवकाश वेतन वापस ले लिया जाएगा;
(ख ) जब कोई शासकीय सेवक अदेय अवकाश का उपभोग कर अपने कर्तव्य पर वापस आता है, परन्तु ऐसा अर्धवेतन अवकाश अर्जित करने के पूर्व ही वह सेवा से त्याग पत्र दे देता है अथवा सेवानिवृत्त हो जाता है, तो वह उस सीमा तक अवकाश वेतन वापस करने का भागी होगा , जितना अर्धवेतन अवकाश बाद में अर्जित नहीं किया गया है:
परन्तु उपरोक्त (क) या ( ख) के अन्तर्गत अवकाश वेतन की वसूली नहीं होगी यदि सेवानिवृत्ति ऐसी बीमारी के कारण हो, जिससे वह कार्य करने में अक्षम तथा अयोग्य घोषित हुआ हो या उसकी मृत्यु हो गई हो।
31. असाधारण अवकाश.-
( 1 ) नियम 11 के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, शासकीय सेवक को असाधारण अवकाश निम्नलिखित परिस्थितियों में स्वीकृत किया जा सकेगा
(क) जब किसी अन्य प्रकार का अवकाश देय नहीं हो; अथवा
(ख) जब किसी अन्य प्रकार का अवकाश देय तो है, किन्तु शासकीय सेवक स्वयं लिखित में असाधारण अवकाश स्वीकृत करने के लिए निवेदन करे।
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(2 ) अवकाश स्वीकृत करने वाला सक्षम प्राधिकारी , कभी भी , जब अन्य किसी प्रकार का अवकाश देय था , उस समय, जब बिना अवकाश अनुपस्थिति प्रारंभ हुई, बिना अवकाश अनुपस्थिति अवधि को असाधारण अवकाश में भूतलक्षी प्रभाव से रूपान्तरित कर सकेगा ।
(3) असाधारण अवकाश, अवकाश लेखा में विकलित नहीं किया जाएगा ।
32. परिवीक्षाधीन, तथा प्रशिक्षु को अवकाश.-
( 1 ) ( क) किसी परिवीक्षाधीन व्यक्ति को , यदि वह अपने पद को परिवीक्षा के अलावा मौलिक रूप से धारण करता है , तो उसे इन नियमों के अधीन स्वीकार्य अवकाश की पात्रता होगी;
(ख ) यदि, किसी कारण से , किसी परिवीक्षाधीन व्यक्ति की सेवाएं समाप्त करना प्रस्तावित हो , तो कोई अवकाश, जो उसे स्वीकृत किया जा सकता है , निम्नांकित अवधि से आगे स्वीकृत नहीं होगा-
( एक) उस तिथि के बाद जिस तिथि तक परिवीक्षाधीन अवधि पहले से स्वीकृत है अथवा बढ़ाई गई अवधि समाप्त होती है; या (दो) उस पूर्व तिथि के बाद , जिस तिथि को उसकी सेवाएं उसको नियुक्त करने वाले सक्षम प्राधिकारी के आदेश से समाप्त की जाती हैं ।
(2) प्रशिक्षु को पात्रता होगी -
( क) चिकित्सा प्रमाण- पत्र पर अवकाश , अर्धवेतन के बराबर अवकाश वेतन , उस अवधि के लिए , जो उसकी प्रशिक्षुता के किसी वर्ष में एक माह से अधिक न हो;
(ख) नियम 31 के अधीन असाधारण अवकाश ।
33. उस शासकीय सेवक को अवकाश अथवा अवकाश में वृद्धि, जो चिकित्सा प्रमाण- पत्र के आधार पर आगे सेवा के लिए पूर्णतः तथा स्थायी रूप से अक्षम घोषित किया गया है.- नियम 18 द्वारा आच्छादित मामलों के सिवाय , किसी भी शासकीय सेवक को चिकित्सा प्रमाण - पत्र के आधार पर अवकाश अथवा अवकाश में वृद्धि उस दिनांक के बाद स्वीकृत नहीं की जाएगी जिस दिनांक मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
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से चिकित्सा बोर्ड द्वारा उसे आगे सेवा हेतु पूर्णतः तथा स्थायी रूप से अक्षम घोषित किया गया है ।
34. अवकाश वेतन.-
( 1 ) शासकीय सेवक, जो अवकाश पर प्रस्थान करता है, को उसके अवकाश पर जाने के तुरन्त पूर्व प्राप्त वेतन के बराबर अवकाश वेतन की पात्रता होगी:
परन्तु यदि कोई शासकीय सेवक भारत में बाह्य सेवा में प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए या किसी उच्च पद पर स्थानापन्न रहते हुए अपने मूल पद/संवर्ग में पदावनत होने पर बिना प्रत्यावर्तित पद पर कार्यभार ग्रहण किए , अर्जित अवकाश पर प्रस्थान करता है , तो उसे उस वेतन के बराबर अवकाश वेतन आहरण करने की पात्रता होगी , जो यदि उसकी उच्च पद पर नियुक्ति नहीं हुई होती, तो अर्जित अवकाश पर प्रस्थान करने के तत्काल पूर्व उसने आहरित किया होता ।
(2) अर्ध वेतन अवकाश अथवा अदेय अवकाश पर रहने पर शासकीय सेवक को उपनियम ( 1 ) में निर्दिष्ट राशि के आधे के बराबर अवकाश वेतन की पात्रता होगी ।
(3) लघुकृत अवकाश पर रहने पर शासकीय सेवक को उपनियम ( 1 ) के अन्तर्गत स्वीकार्य राशि के बराबर अवकाश वेतन की पात्रता होगी ।
(4) असाधारण अवकाश पर रहने पर शासकीय सेवक को किसी प्रकार के अवकाश वेतन की पात्रता नहीं होगी ।
(5 ) ( क ) ऐसा शासकीय सेवक जो सेवानिवृत्त हो रहा है अथवा सेवा से त्याग पत्र दे देता है , के प्रकरण में, यदि पूर्व में उपभोग किया गया अवकाश उसके लेखे में जमा अवकाश से अधिक होता है , और अवकाश वेतन का अधिक भुगतान किया गया है तो उसका आवश्यक समायोजन किया जाएगा ।
(ख) जिस शासकीय सेवक को सेवा से पदच्युत किया जाता है या पृथक किया जाता है या जिसकी सेवा में रहते हुए मृत्यु हो जाती है, यदि उसके द्वारा पूर्व में उपभोग किए गए अवकाश की अवधि नियम 26 के उपनियम 2 630( 23 )
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(ख) के अधीन जमा हुए अवकाश से अधिक होती है, तो ऐसे प्रकरणों में अवकाश वेतन के अधिक भुगतान की वसूली की जाएगी ।
35. अवकाश वेतन का आहरण.- इन नियमों के अधीन देय अवकाश वेतन का आहरण , भारत में रुपयों में किया जाएगा ।
अध्याय-5
अध्ययन अवकाश के अलावा विशेष प्रकार के अवकाश
36. प्रसूति ( मातृत्व) अवकाश.-
( 1 ) महिला शासकीय सेवक, जिसकी दो से कम जीवित संतान हैं , को 180 दिन की अवधि तक प्रसूति अवकाश , प्रसूति के प्रारंभ होने की दिनांक से स्वीकृत किया जा सकेगा । ऐसी अवधि में वह उस वेतन के बराबर अवकाश वेतन की पात्र होगी , जो उसने अवकाश पर प्रस्थान करने के तुरन्त पूर्व प्राप्त किया है ।
(2) यह अवकाश लेखा में विकलित नहीं होगा ।
(3 ) प्रसूति अवकाश किसी अन्य प्रकार के अवकाश के साथ संयोजित किया जा सकेगा ।
(4) यह अवकाश विभाजित कर नहीं लिया जा सकेगा ।
( 5 ) महिला शासकीय सेवक को पूरे सेवाकाल में गर्भपात सहित गर्भस्त्राव के मामले में अधिकतम 45 दिनों तक का प्रसूति अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा । यह अवकाश चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा अनुशंसित अवधि तक सीमित होगा ।
टिप्पणी- मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रिगनेन्सी एक्ट , 1971 के अधीन उत्प्रेरित गर्भपात भी , इस नियम के प्रयोजनार्थ " गर्भपात " समझा जाएगा ।
(6 ) चिकित्सा प्रमाण - पत्र प्रस्तुत किए बिना, प्रसूति अवकाश के साथ 60 दिन तक का लघुकृत अवकाश एवं अदेय अवकाश , यदि आवेदित किया जाए , तो स्वीकृत किया जा सकेगा ।
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(7) सरोगेसी के मामले में, सरोगेट माँ के साथ - साथ दो से कम जीवित संतानों वाली कमीशनिंग मां को 180 दिनों का मातृत्व अवकाश निम्नांकित प्रतिबंध के अधीन दिया जा सकेगा -
(एक) यदि उनमें से कोई एक या दोनों शासकीय सेवक हैं।
(दो) कमीशनिंग माँ , को प्रसूति अवकाश की पात्रता, संतान के उत्पन्न होने की तिथि से होगी ।
नोट - ' सरोगेट मां' से अभिप्रेत है वह महिला , जो कमीशनिंग मां की ओर से संतान को जन्म देती है ।
37. पितृत्व अवकाश.-
( 1 ) पुरुष शासकीय सेवक को, जिसकी दो से कम जीवित संतान हैं, उसकी पत्नी के प्रसव होने की संभावित तिथि के 15 दिन पूर्व या प्रसव की तारीख से 6 मास तक की अवधि में 15 दिनों का पितृत्व अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा ।
(2) इस अवकाश की स्वीकृति के लिए शासकीय सेवक से चिकित्सा प्रमाण - पत्र प्रस्तुत करने की अपेक्षा नहीं की जाएगी ।
(3) पितृत्व अवकाश आकस्मिक अवकाश के अलावा , किसी अन्य अवकाश के साथ जोड़ा जा सकेगा ।
(4) अवकाश काल में शासकीय सेवक को अवकाश पर जाने के पूर्व प्राप्त वेतन के बराबर अवकाश वेतन देय होगा ।
(5) इस अवकाश को अवकाश लेखे में विकलित नहीं किया जाएगा।
(6) उप नियम ( 1 ) में वर्णित अवधि में अवकाश न लेने पर अवकाश का अधिकार राजसात हो जाएगा ।
(7) सरोगेसी के द्वारा जन्मे संतान के कमीशनिंग पिता , जो शासकीय सेवक हो तथा जिसकी दो से कम जीवित संतान हो , को भी छह महीने के भीतर 15 दिनों का पितृत्व अवकाश दिया जाएगा ।
(8) पितृत्व अवकाश सामान्यतः अस्वीकार नहीं किया जाएगा ।
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( 9 ) कमीशनिंग फादर' से अभिप्रेत है वह पुरुष जो सरोगेसी के माध्यम से संतान का पिता होता है ।
38. दत्तक संतान ग्रहण करने के लिए पितृत्व अवकाश. - पुरुष शासकीय सेवक को दो से कम जीवित संतान होने तथा 1 वर्ष से कम आयु की संतान गोद लेने पर गोद लेने की अवधि से 6 माह की अवधि के भीतर 15 दिवस का पितृत्व अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा । विहित अवधि में अवकाश का लाभ नहीं लिए जाने पर यह अवकाश व्यपगत माना जाएगा ।
यदि पालन पोषण संबंधी देखरेख (फोस्टर केयर) के बाद गोद लेना वैध रूप से न हो , तो लिया गया पितृत्व अवकाश अन्य उपलब्ध अवकाश से समायोजित कर लिया जाएगा ।
39. दत्तक संतान ग्रहण अवकाश. महिला शासकीय सेवकों को संतान दत्तक लेने पर "दत्तक संतान ग्रहण अवकाश " निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन प्रदान किया जाएगा-
( एक) दत्तक संतान ग्रहण अवकाश ऐसी दत्तकग्राही माता को अनुज्ञेय नहीं होगा , जिसके दत्तक लेते समय पहले से ही एक से अधिक जीवित संतान हों;
( दो) यह सुविधा दो संतानों के दत्तक ग्रहण करने तक ही अनुज्ञेय होगी;
( तीन ) दत्तक संतान ग्रहण अवकाश , दत्तक लिए गए संतान की आयु एक वर्ष की होने तक प्रदान किया जाएगा;
(चार) दत्तक संतान ग्रहण अवकाश अधिकतम 70 दिवस की सीमा के अध्यधीन दिया जाएगा ,
(पांच) " दत्तक संतान ग्रहण अवकाश " की निरंतरता में दत्तकग्राही माता को दत्तक लिए संतान की एक वर्ष की आयु सीमा के अध्यधीन एक वर्ष की कालावधि तक के लिए अन्य प्रकार का देय और अनुज्ञेय अवकाश, यदि आवेदन किया है (अदेय अवकाश तथा चिकित्सा प्रमाण - पत्र प्रस्तुत किए बिना 60 दिनों से अनधिक के लघुकृत अवकाश को सम्मिलित करते हुए ) प्रदान किया जा सकेगा ,
(छह) दत्तक संतान ग्रहण अवकाश की कालावधि के दौरान उसे अवकाश में प्रस्थान करने के ठीक पूर्व प्राप्त होने वाले वेतन के समान अवकाश वेतन देय होगा;
(सात) दत्तक संतान ग्रहण अवकाश, अवकाश लेखे में विकलित नहीं किया जाएगा।
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40. संतान पालन अवकाश.-
( 1 ) इस नियम के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, महिला शासकीय सेवक अथवा एकल पुरुष शासकीय सेवक को सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसके सम्पूर्ण सेवाकाल के दौरान उसकी दो ज्येष्ठ जीवित संतानों की देखभाल , चाहे वह पालन पोषण के लिए हो अथवा उनकी किसी भी जरूरत , जैसे कि शिक्षा, बीमारी और ऐसी ही अन्य जरूरत के लिए, अधिकतम 730 दिन की कालावधि का संतान पालन अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा;
2) अवकाश का अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकेगा;
(
(3 ) उपनियम ( 1 ) के प्रयोजनों के लिए, संतान से अभिप्रेत है-
(क) अठारह वर्ष की आयु से कम की संतान ( विधिक रूप से दत्तक संतान को सम्मिलित करते हुए) ; या
(ख ) सामाजिक न्याय तथा सशक्तिकरण मंत्रालय , भारत सरकार की अधिसूचना क्रमांक 16-18 / 97 - एन 1.1 , दिनांक 1 जून 2001 में यथाविनिर्दिष्ट कम से कम चालीस प्रतिशत निःशक्तता वाली बाईस वर्ष से कम आयु की संतान;
(4 ) उपनियम ( 1 ) के अधीन किसी महिला शासकीय सेवक अथवा एकल पुरुष शासकीय सेवक को संतान पालन अवकाश की स्वीकृति निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन होगी, अर्थात्ः-
(क) यह एक कैलेंडर वर्ष में 3 बार से अधिक के लिए स्वीकृत नहीं किया जाएगा । एकल महिला शासकीय सेवक को एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 6 बार स्वीकृत किया जा सकेगा । एक बार में 5 दिवस से कम के लिए देय नहीं होगा, यदि स्वीकृत किए गए अवकाश की कालावधि आगामी कैलेंडर वर्ष में भी जारी रहती है तब बारी की गणना ऐसे निकटवर्ती कैलेंडर वर्ष में की जाएगी जिसमें कि अवकाश का आवेदन किया गया अथवा जिसमें आवेदन किए गए अवकाश का अधिक भाग जाता है ।
कैलेंडर वर्ष से अभिप्रेत है 1 जनवरी से प्रारंभ होकर 31 दिसम्बर तक की कालावधि ;
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( ख ) यह सामान्य रूप से परिवीक्षा कालावधि के दौरान स्वीकृत नहीं किया जाएगा तथापि, विशेष परिस्थितियों में , यदि परिवीक्षा कालावधि के दौरान अवकाश स्वीकृत किया जाता है, तो परिवीक्षा की अवधि स्वीकृत अवकाश की उस कालावधि के बराबर अवधि तक के लिए बढ़ा दी जाएगी, जिसके लिए अवकाश स्वीकृत किया गया है ।
(5) संतान पालन अवकाश की कालावधि के दौरान, प्रथम 365 दिवस के लिए , अवकाश वाले मास के ठीक पूर्ववर्ती मास में आहरित वेतन का 100 प्रतिशत तथा अगले 365 दिवस के लिए 80 प्रतिशत, अवकाश वेतन का भुगतान किया जाएगा ;
(6) संतान पालन अवकाश, किसी अन्य प्रकार के अवकाश के साथ संयोजित किया जा सकेगा;
( 7 ) इस अवकाश का लेखा प्रपत्र -5 अनुसार पृथक से संधारित किया जाएगा तथा संबंधित शासकीय सेवक की सेवा पुस्तिका में इसकी प्रविष्टि की जाएगी ;
(8 ) संबंधित शासकीय सेवक को प्रपत्र -5 , में अवकाश हेतु सामान्यतः 3 सप्ताह पूर्व आवेदन देना होगा ।
स्पष्टीकरण- ( एक ) एकल पुरुष शासकीय सेवक से अभिप्रेत है अविवाहित या विधुर या परित्यक्त शासकीय सेवक से है ।
(दो) सरोगेसी के मामले में , दो से कम जीवित संतान वाली कमीशनिंग मां को संतान पालन अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा ।
(तीन) ' कमीशनिंग मां' से अभिप्रेत है सरोगेसी के माध्यम से पैदा हुई संतान की मां ।
1. जानबूझकर पहुँचाई गई क्षति हेतु विशेष निर्योग्यता अवकाश.-
( 1 ) अवकाश स्वीकृतकर्ता सक्षम प्राधिकारी , किसी शासकीय सेवक को, जो जानबूझकर पहुँचाई गई चोट के द्वारा अथवा उसके कारण से अथवा उससे अपेक्षित शासकीय कर्तव्यों के निष्पादन के दौरान या उसकी शासकीय स्थिति के परिणामस्वरूप निर्योग्य हुआ है, विशेष निर्योग्यता अवकाश स्वीकृत कर सकेगा ;
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(2 ) यह अवकाश तब तक स्वीकृत नहीं किया जाएगा जब तक कि जिसके साथ ऐसी घटना घटित हुई है , उसे घटना के तीन माह के भीतर निर्योग्यता प्रकट न हुई हो तथा निर्योग्य व्यक्ति ने इसे जानकारी में लाने का भरसक प्रयास शीघ्रता से न किया होः
परन्तु यदि अवकाश स्वीकृत करने वाला सक्षम प्राधिकारी निर्योग्यता के कारणों से संतुष्ट है , तो उन कारणों के आधार पर अवकाश उपभोग करने की अनुमति दे सकेगा, जहां घटना के तीन माह बाद निर्योग्यता प्रकट हुई है;
(3 ) अवकाश उतनी ही अवधि का स्वीकृत किया जाएगा जितना अधिकृत चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा अनुशंसित किया जाए, किन्तु किसी भी दशा में 24 माह से अधिक नहीं ;
(4) विशेष निर्योग्यता अवकाश किसी अन्य प्रकार के अवकाश के साथ संयोजित किया जा सकेगा;
(5 ) यदि बाद में निर्योग्यता उन्हीं परिस्थितियों में पुनः प्रकट हो जाए अथवा बढ जाए तो विशेष निर्योग्यता अवकाश एक बार से अधिक भी स्वीकृत किया जा सकेगा , किन्तु किसी एक निर्योग्यता के परिणामस्वरूप ऐसा अवकाश 24 माह से अधिक स्वीकृत नहीं किया जाएगा;
(6 ) पेंशन हेतु सेवा की गणना करते समय विशेष निर्योग्यता अवकाश को कर्तव्य के रूप में संगणित किया जाएगा तथा इसे अवकाश लेखे में विकलित नहीं किया जाएगा;
(7) ऐसे अवकाश काल में अवकाश वेतन-
( क) उपनियम ( 5 ) के अधीन स्वीकृत अवकाश की अवधि को शामिल करते हुए , ऐसे अवकाश की किसी कालावधि के प्रथम 180 दिन तक अर्जित अवकाश काल में देय अवकाश वेतन के बराबर वेतन , तथा
(ख ) अवकाश की बकाया अवधि के लिए अर्ध वेतन अवकाश के बराबर अवकाश वेतन ।
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42. आकस्मिकक्षति के लिए विशेष निर्योग्यता अवकाश.-
( 1 ) शासकीय सेवक को, जो कि अचानक चोट लगने के कारण अथवा अपने कर्तव्यों के निर्वहन के फलस्वरूप निर्योग्य हुआ है अथवा अपनी कार्यालयीन स्थिति के परिणामी किसी विशिष्ट कर्तव्य के निर्वहन से बीमारी से निर्योग्य हो गया है , जो कि उसके सिविल पद की जिम्मेदारी से ज्यादा जोखिम का कार्य था , जिससे बीमारी या दुर्घटना हुई , नियम 41 के उपबंध लागू होंगे।
(2 ) ऐसे मामले में विशेष निर्योग्यता अवकाश की स्वीकृति हेतु निम्नलिखित अतिरिक्त शर्ते लागू होंगी-
( एक ) निर्योग्यता का कारण कोई बीमारी है , तो प्राधिकृत चिकित्सा अधिकारी को यह प्रमाणित करना चाहिए कि उसे ऐसी निर्योग्यता कौन सा विशेष कर्तव्य वहन करने के परिणामस्वरूप हुई है ;
(दो ) सेना बल के अतिरिक्त अन्य सेवा में रहते हुए किसी शासकीय सेवक को ऐसी निर्योग्यता हुई है तो अवकाश स्वीकृतकर्ता प्राधिकारी के अनुसार वह निर्योग्यता असाधारण प्रकृति की होना चाहिए ;
(तीन) प्राधिकृत चिकित्सा अधिकारी द्वारा अनुशंसा की गई अनुपस्थिति की अवधि, अंशतः इस नियम के अधीन अवकाश द्वारा आच्छादित हो तथा अंशतः अन्य प्रकार के अवकाश द्वारा तथा अर्जित अवकाश की तरह अवकाश वेतन के बराबर अवकाश वेतन पर स्वीकार्य विशेष निर्योग्यता अवकाश की अवधि 180 दिनों से अधिक नहीं होगा ।
43. विशेष निर्योग्यता अवकाश स्वीकृति के अधिकार.- नियम 41 तथा 42 के अधीन विशेष निर्योग्यता अवकाश की स्वीकृति से संबंधित सभी मामले , संबंधित प्रशासकीय विभाग को सहमति हेतु प्रस्तुत किए जाएंगे ।
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अध्याय-6
अध्ययन अवकाश
44. अध्ययन अवकाश के लिए स्वीकृति की शर्तें.-
( 1 ) इन नियमों में वर्णित शर्तों के अधीन , भारत में या भारत के बाहर किसी विशिष्ट पाठ्यक्रम , जिसमें उच्च शिक्षा या किसी व्यवसाय में विशेष प्रशिक्षण या उसके कार्य क्षेत्र से सीधा संबंध रखने वाले तकनीकी विषय के अध्ययन हेतु, लोकहित की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए , किसी शासकीय सेवक को अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है ।
( 2 ) निम्नांकित हेतु भी अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है - (एक ) किसी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम या अध्ययन यात्रा हेतु , यदि ऐसा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम या अध्ययन यात्रा लोकहित की दृष्टि से शासन को निश्चित लाभ के लिए प्रमाणित की गई हो तथा शासकीय सेवक के कार्य क्षेत्र से संबंधित हो , जिसमें शासकीय सेवक नियमित शैक्षणिक या अर्ध शैक्षणिक कोर्स में उपस्थित भी न हो; तथा
(दो) लोक प्रशासन की कार्य रचना या पृष्ठभूमि से संबंधित अध्ययन हेतु निम्न शर्तों के अधीन कि-
(क) उक्त अध्ययन या अध्ययन यात्रा , अध्ययन अवकाश स्वीकृतकर्ता सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित होना चाहिए ; तथा
(ख ) शासकीय सेवक से यह अपेक्षा की जानी चाहिए कि वापसी पर अध्ययन अवकाश के दौरान उसके द्वारा किए गए कार्यो का पूर्ण प्रतिवेदन प्रस्तुत करे ;
(तीन ) ऐसे अध्ययन हेतु, जिसका शासकीय सेवक के कार्यों से सीधा संपर्क या निकट का संबंध नहीं है , किन्तु जिससे उसका ज्ञान इस प्रकार विस्तीर्ण हो कि एक लोक सेवक के नाते उसकी योग्यता बढाने में सहायक हो और वह लोक सेवा की अन्य शाखाओं में कार्यरत कर्मचारियों को सहयोग देने में अपने को अधिक कार्य करने योग्य ( fit) महसूस कर सके ।
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नोट- ऐसे अध्ययन , जिसका लोक सेवक के कार्य से सीधा संबंध न हो , के अधीन आने वाले अध्ययन अवकाश आवेदन के प्रकरणों पर , प्रत्येक प्रकरण के गुणदोष के आधार पर , वित्त विभाग की राय लेकर विचार किया जाएगा ।
(3 ) अध्ययन अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा , जब तक कि-
(एक) प्रशासकीय विभाग द्वारा यह प्रमाणित न किया जाए कि चाहा गया अध्ययन पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण , लोकहित की दृष्टि से निश्चित लाभ का है;
(दो) वह शैक्षणिक अथवा साहित्यिक विषयों के अतिरिक्त अभियोजना विषय के अध्ययन के लिए न हो; तथा
(तीन) यदि ऐसा अवकाश भारत के बाहर है , तो भारत शासन , वित्त मंत्रालय का आर्थिक मामलों का विभाग , अध्ययन अवकाश में अन्तर्विष्ट विदेशी मुद्रा जारी करने के लिए सहमत न हो
(4) अध्ययन अवकाश साधारणतः उस शासकीय सेवक को स्वीकृत नहीं किया जाएगा:-
(एक) जो नियमित शासकीय सेवा में नहीं है;
(दो) जिसकी शासन के अधीन पांच वर्ष से कम की सेवा है ;
(तीन) जो सेवानिवृत्त होने वाला है या जिस तारीख को वह अवकाश समाप्तिपर अपने कार्य पर वापस लौटने वाला है उससे पांच वर्ष के अन्दर जिसने शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने का चयन किया है ।
(5 ) अध्ययन अवकाश इस आवृत्ति के साथ स्वीकृत नहीं किया जाएगा जिससे उसका नियमित कार्य से संपर्क समाप्त हो जाए या उसकी अनुपस्थिति संवर्गीय कठिनाइयों का कारण बन जाए ।
45. अध्ययन अवकाश स्वीकृत करने हेतु सक्षम प्राधिकारी.-
( 1 ) शासकीय सेवक को अध्ययन अवकाश , प्रशासकीय विभाग के द्वारा स्वीकृत किया जाएगा ।
(2) जहां कोई शासकीय सेवक एक विभाग अथवा स्थापना के संवर्ग में किसी दूसरे विभाग या स्थापना में सेवा कर रहा है , तो उसे अध्ययन अवकाश की मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
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स्वीकृति इस शर्त के अधीन होगी कि अवकाश स्वीकृत करने के पूर्व जिस विभाग अथवा स्थापना में वह संबद्ध है , उसकी सहमति प्राप्त कर ली जाए ।
46. अध्ययन अवकाश की अधिकतम अवधि , जो एक समय में तथा पूरे सेवाकाल में स्वीकृत की जा सकती है . अध्ययन अवकाश की अधिकतम अवधि , जो किसी शासकीय सेवक को स्वीकृत की जाएगी , वह होगी -
( एक ) साधारणतः किसी एक समय में 12 महीने , जिसमें विशेष कारणों को छोडकर वृद्धि नहीं की जाएगी; तथा
(दो) कुल मिलाकर सम्पूर्ण सेवाकाल में 24 महीने ( अन्य नियमों के अन्तर्गत स्वीकृत किए गए अध्ययन अवकाश को सम्मिलित करते हुए ) ;
(तीन) लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के अन्तर्गत आने वाले चिकित्सकों/चिकित्सा शिक्षकों को स्नातकोत्तर योग्यता प्राप्त करने हेतु 36 माह तक का अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा ।
47. अन्य प्रकार के अवकाश के साथ अध्ययन अवकाश का संयोजन.-
( 1 ) अध्ययन अवकाश किसी दूसरे प्रकार के अवकाश के साथ संयोजित किया जा सकेगा , किन्तु किसी भी दशा में असाधारण अवकाश के अतिरिक्त दूसरे अवकाश के साथ शासकीय सेवक की नियमित कर्तव्य से निरंतर अनुपस्थिति 28 महीने से अधिक नहीं होगी ।
(2 ) शासकीय सेवक, जिसे अध्ययन अवकाश के संयोजन के साथ किसी अन्य प्रकार का अवकाश स्वीकृत किया गया है , यदि चाहे तो अन्य प्रकार के अवकाश की समाप्ति के पूर्व अपना अध्ययन प्रारंभ कर सकता है , किन्तु ऐसे अवकाश की अवधि को अध्ययन कार्य के साथ मिलने पर उसे अध्ययन अवकाश के रूप में संगणित नहीं किया जाएगा ।
48. अध्ययन पाठ्यक्रम के आगे बढ जाने पर अध्ययन अवकाश का नियमन.- पाठ्यक्रम स्वीकृत किए गए अध्ययन अवकाश से कम पड़ जाए , तो जब तक कि अवकाश स्वीकृत करने वाले सक्षम प्राधिकारी की कम पड़ रही अवधि को साधारण अवकाश की भांति मानने की पूर्व सहमति प्राप्त न हो जाए , शासकीय सेवक अध्ययन पाठ्यक्रम की समाप्ति पर कर्तव्य ग्रहण करेगा ।
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49. अध्ययन के लिए शुल्क का भुगतान. शासकीय सेवक, जिसे अध्ययन अवकाश स्वीकृत हुआ है, उसे अपने अध्ययन का शुल्क, स्वयं भुगतान करना होगा । अपवाद स्वरूप , राज्यपाल ऐसे शुल्क के भुगतान की स्वीकृति दे सकते हैं:
परन्तु किसी भी स्थिति में उस शासकीय सेवक को , जिसे स्कॉलरशिप या स्टायपेन्ड किसी भी स्त्रोत से मिलता है या अवकाश वेतन के अतिरिक्त अंशकालिक कार्य के पारिश्रमिक रखने की अनुमति दी जाती है , शुल्क का भुगतान नहीं किया जाएगा।
50. यात्रा भत्ते की स्वीकृति - शासकीय सेवक को साधारणतः यात्रा भत्ते की पात्रता नहीं होगी , किन्तु विशिष्ट परिस्थितियों में राज्यपाल भुगतान की स्वीकृति दे सकेंगे ।
51. बन्ध- पत्र (बॉण्ड) का निष्पादन.- प्रत्येक शासकीय सेवक , जिसे अध्ययन अवकाश या उसमें वृद्धि की स्वीकृति दी गई है , से अपेक्षा की जाती है , कि वह ऐसे स्वीकृत अध्ययन अवकाश या अवकाश में वृद्धि प्रारंभ होने के पूर्व प्रपत्र -6 में, यथास्थिति, बॉण्ड (बन्ध पत्र) का निष्पादन करे । यदि अध्ययन अवकाश में वृद्धि दी गई है , तो यथास्थिति, ऐसा बन्ध पत्र प्रपत्र -7 में निष्पादित किया जाएगा ।
52. त्याग पत्र तथा सेवानिवृत्ति.-
( 1 ) यदि कोई शासकीय सेवक अध्ययन अवकाश अवधि की समाप्ति के पश्चात बिना कर्तव्य पर वापस लौटे अथवा ऐसे कर्तव्य पर वापस लौटने के बाद पांच वर्ष की अवधि के भीतर सेवा से त्याग - पत्र दे देता है अथवा सेवानिवृत्त होता है , तो उससे अपेक्षा होगी कि वह अवकाश वेतन , शुल्क का मूल्य, यात्रा भत्ता तथा राज्य सरकार द्वारा किए गए अथवा अध्ययन अवकाश के दौरान उसके द्वारा आहरित अन्य व्यय, यदि कोई हो , मांग के दिनांक से शासकीय ऋण पर , तत्समय प्रचलित दरों पर ब्याज के साथ उसका त्याग - पत्र स्वीकृत करने के पूर्व अथवा सेवानिवृत्त होने की अनुमति देने के पूर्व दोगुनी राशि लौटाएगा- मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
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(क) शासकीय सेवक जिसे अध्ययन अवकाश से वापस कर्तव्य पर लौटने पर चिकित्सा प्रमाण- पत्र के आधार पर सेवानिवृत्त होने की अनुमति दी गई है , उसे इस नियम के कोई उपबंध लागू नहीं होंगे;
(ख ) शासकीय सेवक जिसे अध्ययन अवकाश से वापस कर्तव्य पर लौटने पर सेवा से त्यागपत्र देने तथा शासन के नियंत्रणाधीन किसी स्वायत्त या विधिक निकाय या संस्था में नौकरी करने की अनुमति दी गई है , तो इस नियम के अनुसार वापस की जाने वाली राशि जो शासन द्वारा अवकाश वेतन , अध्ययन भत्ता , फीस, यात्रा भत्ता तथा अन्य व्यय के रूप में उस पर अध्ययन अवकाश के दौरान व्यय की गई थी, ब्याज सहित माफ की जा सकेगी ।
(2) ऐसे शासकीय सेवक द्वारा उपभोग किया गया अध्ययन अवकाश, अध्ययन अवकाश प्रारंभ होने के दिनांक को उसके लेखे में जमा नियमित अवकाश में परिवर्तित किया जाएगा तथा अध्ययन अवकाश के साथ लिया गया कोई नियमित अवकाश इस प्रयोजन हेतु उपयुक्त तरीके से समायोजित किया जाएगा अध्ययन अवकाश की शेष रही कोई अवधि, यदि कोई हो, जिसे इस प्रकार परिवर्तित नहीं किया जा सकता है , असाधारण अवकाश की भांति समझी जाएगी। उपनियम ( 1 ) के अधीन शासकीय सेवक द्वारा वापस लौटाई जाने वाली राशि के अलावा , उससे अपेक्षा होगी कि वह अध्ययन अवकाश के परिवर्तन के फलस्वरूप स्वीकार्य अवकाश वेतन से अधिक वास्तविक रूप से आहरित अवकाश वेतन का कोई आधिक्य वापस लौटाए ।
(3) इन नियमों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी राज्यपाल या तो शासन के हित में अथवा प्रकरण अथवा प्रकरणों के वर्गो की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखकर, यदि ऐसा किया जाना आवश्यक अथवा उचित प्रतीत हो , तो आदेश द्वारा , संबंधित शासकीय सेवक या शासकीय सेवकों के वर्गों द्वारा उपनियम ( 1 ) के अध्यधीन लौटाई जाने वाली अपेक्षित राशि का अधित्याग अथवा उसमें कमी कर सकते हैं ।
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53. अध्ययन अवकाश के दौरान अवकाश वेतन.-
(1 ) अध्ययन अवकाश के दौरान शासकीय सेवक उस वेतन , महंगाई भत्ता तथा मकान किराया भत्ता (जहां से वह अध्ययन अवकाश पर गया है, उस स्थान के लिए स्वीकृत दर से) के बराबर अवकाश वेतन का आहरण करेगा , जो वह ऐसे अवकाश पर प्रस्थान करने के तुरन्त पूर्व शासकीय कर्तव्य पर रहते आहरित करता।
(2) कण्डिका (1 ) के अधीन पूर्ण दर पर अवकाश वेतन का भुगतान , शासकीय सेवक द्वारा इस आशय का एक प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने की शर्त पर देय होगा, कि उसे कोई छात्रवृत्ति, शिष्यवृत्ति अथवा पारिश्रमिक, किसी अंशकालीन रोजगार के संबंध में , प्राप्त नहीं हुआ है।
(3) शासकीय सेवक द्वारा अध्ययन अवकाश के दौरान, किसी अंशकालीन रोजगार के लिए , यदि कोई राशि, छात्रवृत्ति , शिष्यवृत्ति या पारिश्रमिक के रूप में प्राप्त की जाती है , तो इस शर्त के अध्यधीन रहते हुए , कि अवकाश वेतन उस राशि से कम नहीं होगा जो अर्द्ध वेतन अवकाश के दौरान अवकाश वेतन मिलता, इस उपनियम के अधीन देय अवकाश वेतन से समायोजित की जाएगी।
54. पदोन्नति, पेंशन, वरिष्ठता, अवकाश तथा वेतनवृद्धि हेतु अध्ययन अवकाश की गणना.- अध्ययन अवकाश को पदोन्नति, पेंशन तथा वरिष्ठता के लिए सेवा के रूप में गणना में लिया जाएगा। उसे मूलभूत नियमों के नियम 26 के उपबंध अनुसार वेतनवृद्धि के लिए भी सेवा के रूप में गणना में लिया जाएगा।
55. अवकाश लेखे में अध्ययन अवकाश का विकलन. अध्ययन अवकाश को संबंधित शासकीय सेवक के अवकाश लेखा में विकलित नहीं किया जाएगा।
56. अध्ययन अवकाश के लिए आवेदन.-
(1 ) (क) अध्ययन अवकाश का आवेदन उचित माध्यम से अवकाश स्वीकृतकर्ता प्राधिकारी को प्रस्तुत किया जाएगा;
(ख) ऐसे आवेदन में उस अध्ययन पाठ्यक्रम अथवा पाठ्यक्रम , जो शासकीय सेवक द्वारा अपेक्षित है अथवा कोई परीक्षा, जिसे वह देना चाहता है, का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा।
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(2 ) जहां शासकीय सेवक के लिए यह संभव नहीं है कि वह आवेदन में पूर्ण विवरण दे सके अथवा यदि भारत छोड़ने के पश्चात वह कार्यक्रम में कोई परिवर्तन करना चाहता है , जो कि भारत में अनुमोदित हो चुका है , वह यथा संभव अवकाश स्वीकार करने वाले सक्षम प्राधिकारी को विवरण प्रस्तुत करेगा तथा जब तक कि वह अपनी जोखिम पर ऐसा करने को तैयार नहीं हो जाता है, अध्ययन पाठ्यक्रम प्रारंभ नहीं करेगा अथवा जब तक कि वह पाठ्यक्रम हेतु अध्ययन अवकाश को स्वीकार करने वाले सक्षम प्राधिकारी का अनुमोदन प्राप्त नहीं कर लेता है , उसके संबंध में कोई व्यय नहीं करेगा ।
(3 ) पाठयक्रम समापन प्रमाण- पत्र जिस अध्ययन के लिए शासकीय सेवक अवकाश पर है , उस अध्ययन के पूर्ण होने पर विभाग को पाठ्यक्रम पूर्णता प्रमाण - पत्र जमा करने के लिए वह नैतिक दायित्व से बाध्य है ।
अध्याय-सात
सेवानिवृत्ति पर अवकाश का नकदीकरण
57. सेवानिवृत्ति, अनिवार्य सेवानिवृत्ति, असमर्थता पेंशन पर या सेवा में रहते मृत्यु होने पर बकाया अवकाश का नकदीकरण.-
( 1 ) ( क ) जब शासकीय सेवक की उसकी सेवा शर्तों के अनुसार सेवानिवृत्ति हेतु निर्धारित आयु पूर्ण करने पर अथवा अनिवार्य सेवानिवृत्ति , स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति, असमर्थता पेंशन पर सेवानिवृत्त अथवा सेवा में रहते हुए मृत्युहोती है, तो अवकाश स्वीकृत करने वाला सक्षम प्राधिकारी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति की तिथि को उसके लेखे में शेष अर्जित अवकाश एवं अर्धवेतन अवकाश , यदि कोई हो (दोनों अवकाश के योग का अधिकतम 300 दिन ) , के लिए आदेश पारित करेगा , कि उक्त अवधि हेतु उसे अवकाश वेतन की राशि दी जाए ।
(ख ) उपरोक्त ( क) में अवकाश नगदीकरण की राशि की गणना निम्नानुसार होगी , जो उसे एकमुश्त देय होगी- 630(37)
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गणना का सूत्र
अर्जित अवकाश हेतु देय राशि
(सेवानिवृत्ति दिनांक को वेतन + महंगाई भत्ता) × अनुपभोगित अर्जित अवकाश ( अधिकतम 300 दिन)
=
30
अर्धवेतन अवकाश के समतुल्य देय राशि
(सेवानिवृत्ति दिनांक को देय अर्ध वेतन अवकाश वेतन एवं उस पर देय महंगाई भत्ता)
*अर्धवेतन
अवकाश की पात्रता जो अर्जित अवकाश के अवशेष सहित 300 दिवस से अनधिक हो ।
30
नोट 1- अर्जित अवकाश एवं अर्धवेतन अवकाश के समर्पण हेतु अधिकतम पात्रता 300 दिवस है ।
नोट 2 - अर्जित अवकाश की संख्या से कमी के लिए अर्धवेतन अवकाश के दिनों का सारांशीकरण मान्य नहीं है ।
नोट 3 - उपनियम ( 1 ) के उपबंध दिनांक 31 दिसम्बर , 2025 के पश्चात् सेवानिवृत्त या मृत शासकीय सेवकों पर प्रभावशील होंगे ।
(2) यदि सेवानिवृत्ति हेतु निर्धारित आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने वाला शासकीय सेवक, सेवानिवृत्ति के समय निलंबित हो या उसके विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक या आपराधिक काईवाई चालू हो , जिसका निर्णय शेष हो तथा यह संभावना हो कि ऐसी कार्यवाही पूर्ण होने पर कुछ राशि वसूली योग्य हो सकती है, तो अवकाश स्वीकृत करने हेतु सक्षम प्राधिकारी यह राशि पूर्णतः या अंशतः रोक सकेगा , जो उसके विरुद्ध प्रकरणों के निराकरण पश्चात शासकीय राशि के समायोजन पश्चात ( यदि कोई देय हो ) उसे भुगतान की जा सकेगी।
( 3 ) अवकाश वेतन के बराबर राशि का भुगतान - यदि शासकीय सेवक की मृत्यु उसकी सेवानिवृति पश्चात या सेवा समाप्ति उपरांत होती है तथा अवकाश वेतन का भुगतान नहीं हो पाता तो उसका भुगतान निम्नांकित क्रम से देय होगा-
(एक) मृत शासकीय सेवक की पत्नी/पति (जैसी भी स्थिति हो ) ;
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(दो) उपरोक्त ( एक ) न होने पर समस्त जीवित संतानों ( गोद ली हुई संतान सम्मिलित) को समान रूप से;
(तीन) उपरोक्त ( एक) एवं ( दो) न होने पर माता को;
(चार) उपरोक्त ( एक ) से ( तीन) न होने पर पिता को;
(पांच ) उपरोक्त एक ( एक ) से ( चार ) न होने पर जीवित भाईयों एवं बहनों को समान रूप से;
(छह) उपरोक्त ( एक ) से ( पांच ) न होने पर सबसे बड़े मृत पुत्र की जीवित संतानों को समान रूप से ।
अध्याय-आठ
विविध
58. निर्वचन.- इन नियमों के निर्वचन के संबंध में जहां कोई कठिनाई उद्भूत हो तो उसे निर्णय हेतु शासन के वित्त विभाग को निर्दिष्ट किया जाएगा।
59. निरसन और व्यावृत्ति.- ( 1 ) इन नियमों के प्रारंभ होने पर , मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश ) नियम , 1977 एवं इसके अधीन समय - समय पर जारी निर्देश निरसित हो जाएंगे ।
(2) मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम , 1977 के निरसित होने पर भी उन नियमों के अधीन किसी शासकीय सेवक के संबंध में की गई कार्यवाही या कोई अवकाश , जो अर्जित किया या स्वीकृत किया या लेखे में जमा किया गया है , निरस्त नही होगा ।
( 3 ) इन नियमों के अधीन अवकाश स्वीकृत करने के उद्देश्यों के लिए नियमों में प्रत्यायोजित शक्तियां ही लागू होंगी ।
60. शिथिल करने की शक्ति. किसी विशिष्ट प्रकरण में इन नियमों के क्रियान्वयन में कठिनाई उद्भूत होने पर , कारण का उल्लेख करते हुए , नियमों को शिथिल किया जासकेगाः
सकेगा। परंतु ऐसा कोई भी शिथिलीकरण वित्त विभाग की अनुमति से ही किया जा 630(39 )
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प्रथम अनुसूची
(नियम 3 (ज) देखें)
अवकाश का प्रकार
स्वीकृति हेतु सक्षम प्राधिकारी अनुक्रमांक
(3)
(2)
(1)
1. अर्जित अवकाश, अर्धवेतन अवकाश, लघुकृत अवकाश, अदेय अवकाश,
(क) प्रशासकीय विभाग/विभागाध्यक्ष ( ख ) अन्य प्राधिकारी, जिसे उपर्युक्त (अ ) द्वारा अधिकार प्रत्यायोजित किए गए हों (यदि किसी शर्त के साथ प्रत्यायोजन है तब उसका स्पष्ट उल्लेख प्रत्यायोजन में किया जाए ।
2.
उपरोक्तानुसार
प्रसूति अवकाश, पितृत्व अवकाश, दत्तक ग्रहण अवकाश , संतान पालन अवकाश
असाधारण अवकाश
3.
(अ) वर्ग -1 एवं 2 के शासकीय सेवक के लिए प्रशासकीय विभाग ( ब ) वर्ग -3 एवं 4 के शासकीय सेवक के लिए विभागाध्यक्ष
प्रशासकीय विभाग
4. विशेष निर्योग्यता अवकाश, अध्ययन अवकाश
नोट- ( 1 ) प्रतिनियुक्त शासकीय सेवक के प्रकरणों में उपर्युक्त अनुक्रमांक 3 एवं 4 में वर्णित अवकाश की स्वीकृति के अधिकार पैतृक विभाग को रहेंगे । अनुक्रमांक 1 एवं 2 में वर्णित अवकाश की स्वीकृति के अधिकार वर्तमान पदस्थापना वाले विभाग/ कार्यालय को रहेंगे ।
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(2 ) भारत के बाहर यात्रा/ प्रवास के लिए अवकाश स्वीकृति के अधिकार वर्ग 1 एवं 2 के लिए प्रशासकीय विभाग तथा वर्ग 3 एवं 4 के लिए विभागाध्यक्ष को रहेंगे ।
(3 ) समस्त प्रकार के अवकाश को संयोजित कर (असाधारण अवकाश सहित ) अवकाश स्वीकृति की अवधि की अधिकतम सीमा 5 वर्ष रहेगी ।
(4 ) संविदा पर नियोजित कार्मिक को पात्र अवकाश की स्वीकृति के अधिकार , विभाग में उनकी समकक्षता के आधार पर उपर्युक्तानुसार रहेंगे ।
(5 ) " मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश ) नियम , 2025. " के लागू होने पर सभी विभाग , उपर्युक्तानुसार अवकाश स्वीकृति के अधिकारों का प्रत्यायोजन किए जाने की कार्यवाही सुनिश्चित करेंगें ।
मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव.
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630(41)
प्रपत्र 1
[नियम 13 देखें] शासकीय सेवक द्वारा अवकाश अथवा अवकाश वृद्धि के लिए आवेदन
1. शासकीय सेवक का नाम एवं एम्प्लाई कोड
2. धारित पद
3. अनुभाग, कार्यालय और विभाग
4. मूल वेतन
5. (एक) अवकाश की प्रकृति
(दो) अवधिदिनांक. से दिनांक .... तक
6. अवकाश से पहले/बाद में ( Prefix/Suffix ) जोड़े जाने के लिए प्रस्तावित सार्वजनिक अवकाश, यदि कोई हों
7. अवकाश का कारण
8. अवकाश अवधि के दौरान पता एवं मोबाईल नं.
शासकीय सेवक के हस्ताक्षर
(दिनांक सहित) *
अवकाश की स्वीकार्यता के संबंध में प्रमाण -पत्र
से तक की अवधि के लिए 9. प्रमाणित किया जाता है कि (अवकाश की प्रकृति) मध्यप्रदेश सिविल सेवा ( अवकाश) नियम 2025 के नियम के अधीन स्वीकार योग्य है ।
हस्ताक्षर तथा पदनाम (दिनांक सहित) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
630(42)
10. नियंत्रण अधिकारी की टिप्पणी और/ या संस्तुति
हस्ताक्षर ( स्थापना प्रभारी)
पदनाम
** 11 . अवकाश देने के लिए सक्षम प्राधिकारी
हस्ताक्षर (स्वीकृतकर्ता ) पदनाम
* शासकीय सेवक के किसी विकलांगता अथवा अन्य परिस्थिति के कारण अवकाश आवेदन प्रस्तुत करने में असमर्थता की स्थिति में नियम 13 ( 1 ) के परन्तुक अनुसार शासकीय सेवक की और से परिवार के सदस्य के द्वारा हस्ताक्षर किए जा सकेगें।
** यदि आवेदक के कोई प्रतिपूरक भत्ता ले रहा है , तो अवकाश की समाप्ति पर उसे भी आदेशों में दर्शाया जाना चाहिए , कि आवेदक के उसी पद पर या समान भत्ते वाले किसी अन्य पद पर वापस लौटने की संभावना है ।
24 नवम्बर 2025
so!-2
Khildlarkhaat
Form-2
प्रपत्र2
630(43)
11 अवकाशसेवापसआनेकेबादशेषकुल अवकाश(कॉलम7-10) balanceofE.L.onreturnfromleave (col.7-10)
[SeeRule14][नियम14देखें)
days दिनों की संख्या No.of 10
9 To तक
लियागयाअवकाश
Leavetaken
Dateofretirement/resignation:
सेवानिवृत्ति/त्यागपत्रदेनेकीदिनांक......
8 से From
7
क्रेडिटमेंकुलअर्जितअवकाश(दिनोंमें) (कॉलम4+11-6) TotalE.L.atcreditindays(col.4+11-6)
9
घटायाजानेवालाअर्जितअवकाश(कालम5 कीअवधिका1/10) E.L.tobededucted(1/10thoftheperiodin col.5)
No.ofdaysofPeriodforwhichnosalary wasadmissible(Col.36)Availedofduring thepreviouscalendarhalf-year
Dateofappointmentinregularservice:
अवकाशलेखाLeaveAccount
अर्जितअवकाशEARNEDLEAVE
नियमितसेवामेंनियुक्तिकीदिनांक...
5
पिछलीछहमाहीकेदौरानबिनावेतनकेलिए गएअवकाशकेदिनोंकीसंख्या(जोसेवाके लिएग्राहयनहींहै।(कालम36)
4
छःमाहीकेआरंभमेंक्रेडिटकियागयाअर्जित अवकाश E.L.creditedatthebeginningofhalf-year
3
एककलेण्डरवर्षकीछहमाहीमेंसेवांकेपूरे माह Completedmonthsofserviceinthehalf- yearofacalendaryear
2 तक To
Particularsofservice
inthehalf-yearofa
calendaryear
विवरण
शासकीयसेवककानाम:-
छःमाहीमेंसेवाका
NameoftheGovernmentServant:
1 से From
एककलेण्डरवर्षकी
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्ब
म्बर 2025
630 (44)
26 ( wefela 146 SZ lhak 77 telugu ) 18ubble Bibak Prath te lokoble operate Commutedleaveconvertedintohalfpayleave(TwiceofCol.22&25)
No.of
संख्या days
25
दिनोंकी
24 तक To
23 From
से
CommutedleaveW/OM.C.for
studiescertifiedtobeinpublic
interestlimitedto180days
(H.P.Lconvertedinto90days
commutedleaveinentire
service)
180दिनोंतकसीमितचिकित्सा प्रमाण-पत्रकेबिनालोकहितमें प्रमाणितअध्ययनकेलिएलिया गयालघुकृतअवकाश(90दिनों मेंपरिणतअर्धवेतनअवकाशपूरे सेवाकालमें)
चिकित्साप्रमाण-पत्रपरपूरे
वेतनकालघुकृतअवकाश Commutedleaveon medicalcertificateonfull pay
Againstearningsonhalf- pay
अर्धवेतनअवकाशकेअर्जन केआधारपर
privateAffiaris&M.C.includingCommutedleave&leavenotdue)
संख्या
22
No.of
days
दिनोंकी
क
21 त To
20 From
से
संख्या
19
No.of
days
दिनोंकी
18 तक
FromTo
17 से
16 (ST-ET+SE reque ) 181PPLE HARIRE His le 25tue TotalH.P.Latcreditindays(co.35+13-15)
15 ( 81/1 LLE BURIE şle 13 te th terbur ) lalable Hpp - BIE PIR Hits 12B H.P.Ltobededucted(1/18thoftheperiodincol.14)
14 That le lozz ale felte ( tele şls) HOY 23 12 & 14:55 195 No.ofthedaystreatedas'dienon'duringtheprevioushalf-year
13 Jolybble Eppate tale lages 25146 te to lLE & Riteis H.P.L..creditedatthebeginningofhalf-year
Completedmonthsofserviceinthehalfyearofacalendaryear
अर्धवेतनअवकाश(निजीमामलोंऔरचिकित्सकप्रमाण-पत्रकेआधारपरलघुकृतऔरअदेयअवकाशसहितHALF-PAYLEAVE(On
12
give the lost be plein le job asokout ba 630(45)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
36
अवकाश Otherkind ofLeave Taken
अन्यप्रकार लियागया
35
Lepp late old 21s & felle thik & lalable (DE - 91) eque lalable BalanceofHalf-payleaveonreturn fromleave(col16_34)
34
लियागयाकुल अर्धवेतनअवकाश (कॉलम19+26+33) TotalHalfpay leavetaken (col.19+26+33)
33
अदेयअवकाश
काजोड़
(कॉलम
29+32)
Totalleave
notdue
(col29+32)
32
days
दिनोंकी संख्या No.of
31
लियागयाअवकाशLeaveTaken
तक To
30
से From
चिकित्साप्रमाण-पत्रसेअन्यथा आधारपर180दिनोंतकसीमित OtherwisethanonM.C. limitedto180days
29
दिनोंकी संख्या No.of days
28
तक To
चिकित्साप्रमाण-पत्रकेआधारपर OnMedicalcertificate
27
से From
अदेयअवकाशपूरीसेवामें360दिनोंतकलियाजासकताहै।LNDLimitedTo360daysinentireservice मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
630(46)
प्रपत्र 3
[नियम 17 देखें]
शासकीय सेवकों के लिए चिकित्सीय प्रमाण - पत्र द्वारा अवकाश या अवकाश वृद्धि के लिए अनुशंसा
शासकीय सेवक के हस्ताक्षर एम्प्लाई कोड.
मैं. श्री / श्रीमती / कु. जिनके ऊपर हस्ताक्षर हैं , का उचित चिकित्सीय परीक्षण कर यह प्रमाणित करता हूँ कि वह रोग से पीड़ित हैं और मैं उचित समझता हूँ कि वह अपने कार्य से दिनांक........ से लाभ हो । तक की अवधि में अवकाश लेकर आराम करें जिससे उनको स्वास्थ्य
प्राधिकृत चिकित्सक दिनांक
(नाम..
पंजीयन संख्या
टिप्पणी 1- चिकित्सा अधिकारी द्वारा, रोग का स्वरूप और उसके ठीक होने की संभावित अवधि का स्पष्ट उल्लेख किया जाए।
टिप्पणी 2- चिकित्सा अधिकारी द्वारा , शासकीय सेवक के हस्ताक्षर लेने के बाद इसे भरना चाहिए , परन्तु उसे यह अनुशांसा नहीं करना चाहिए कि शासकीय सेवक को, किसी विशेष स्थान से या वहां जाने की आवश्यकता है या किसी विशेष स्थान में जाने के लिए योग्य नहीं है ।
टिप्पणी 3- अवकाश स्वीकृत करने वाला सक्षम प्राधिकारी , यदि वह उपयुक्त समझे, तो द्वितीय चिकित्सक, जो सिविल सर्जन या उसके समकक्ष प्राधिकार रखता हो, से इस प्रमाण - पत्र पर उनकी अनुशांसा प्राप्त कर सकेगा, जिनकी अनुशांसा अन्तिम होगी ।
630(47)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
प्रपत्र 4
[नियम 23 (2)
देखें] कर्तव्य पर उपस्थित होने के समय पूर्ण स्वस्थ होने का चिकित्सीय प्रमाण-
पत्र
एम्प्लाई शासकीय सेवक के हस्ताक्षर
कोड.
मैं, मैंने,श्री/श्रीमती/कु. जो.. पंजीकृत चिकित्सक यह प्रमाणित करता हूँ, कि जिनके हस्ताक्षर ऊपर दिए गए हैं, ..रोग से पीड़ित थे/ थी तथा जिन की मैंने सावधानी से जांच की और अब वे उस रोगावस्था से मुक्त हैं तथा शासकीय सेवा में उपस्थित होने योग्य हैं ।
मैं साथ ही यह भी प्रमाणित करता हूँ कि इस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इनके रोग के लिए संबंधित चिकित्सक की राय और मूलं चिकित्सा प्रमाण - पत्र का सम्यक् परीक्षण , मेरे द्वारा किया गया ।
प्राधिकृत चिकित्सक
(नाम.
दिनांक
पंजीयन संख्या मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
630(48)
प्रपत्र- 5 संतान पालन अवकाश के लिए आवेदन
[नियम 40 देखे ] 1. आवेदक का नाम एवं यूनिक कोड
2.
पदनाम
3. विभाग/कार्यालय/अनुभाग
4. नियमित सेवा में उपस्थिति दिनांक
5. परिवीक्षा अवधि पूर्ण होने का दिनांक
6. संतान का नाम, जिसके लिये संतान पालन अवकाश हेतु आवेदन किया गया है
7. संतान की जन्म तिथि
8. संतान की 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने की दिनांक
9. क्यासंतान दो सबसे बड़ों में से है? विवरण दें
10.
जन्मतिथि
संतान का नाम पुत्र/पुत्री
18 वर्ष की आयु पूर्ण होने की दिनांक क्र. (एक)
(दो)
आवेदन दिनांक को संतान पालन अवकाश की उपलब्धता
11.
दिनांक से तक 12. अवकाश की अवधि
कुल दिवस
13. अवकाश की अवधि में पहिले/बाद में ( Prefix/ Suffix ) यदि कोई हो तो विवरण
14. आवेदित अवकाश का कारण
( क) क्या मुख्यालय से बाहर जाने की अनुमति वांछित है ? (हां/नहीं)
(ख) यदि हां, तो अवकाश के दौरान पता
15. पूर्व में लिए गए संतान पालन अवकाश (CCL ) से वापसी की तिथि
16. 18 वर्ष से कम आयु की दो ज्येष्ठ जीवित संतानों का विवरण (जन्म प्रमाण पत्र की स्वप्रमाणित प्रति संलग्न करें )
संतान पालन अवकाश की आवश्यकता के अनुक्रम में
17.
630(49)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
स्वप्रमाणित अभिलेख (चिकित्सा/शैक्षणिक रिपोर्टकार्ड/विद्यालय -संस्थान का परीक्षा कार्यक्रम/अन्य विवरण/ की प्रति संलग्न करें ।
आवेदक का नाम एवं हस्ताक्षर दिनांक
पदनाम
कार्यालय
संतान पालन अवकाश के लिए अनुशंसा
नियंत्रणकर्ता अधिकारी की टिप्पणियां
अवकाश अनुशंसित/अनुशंसित नहीं
हस्ताक्षर
दिनांक
पदनाम
कार्यालय मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
630(50)
प्रपत्र- 5 ख
संतान पालन अवकाश लेखा विवरण
1. शासकीय सेवक का नाम...
2. पदनाम
3. शासकीय सेवा में कार्यग्रहण का दिनांक..
4. संतानों का विवरण: -
संतान का नाम अनुक्रमांक
(एक)
(दो )
5. अवकाश लेखा
पुत्र/पुत्री जन्मतिथि 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने की दिनांक
अवकाश की अवधि
अनुक्रमांक अवकाश की पात्रता
दिनांक से
3
2
1
केलेण्डर वर्ष में आवृत्ति
शेष अवकाश अवधि (2-5)
कुल अवकाश अवधि (4-3 )
दिनां क तक
7
6
5
4
(कार्यालय प्रमुख के हस्ताक्षर एवं पदमुद्रा) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
630(51)
प्रपत्र - 6
[ नियम 51 के अंतर्गत]
अध्ययन अवकाश पर जाने वाले सेवा सदस्य द्वारा निष्पादिन किया जाने वाला
बंध-पत्र
सभी को ज्ञात हो कि मैं निवासी जो वर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार के (रुपये जिला विभाग में के पद पर कार्यरत हूं, स्वयं को आबद्ध करता/ करती हूं कि मैं, मेरे उत्तराधिकारीगण , निष्पादकगण एवं प्रबंधकगण , मध्यप्रदेश के राज्यपाल ( जिसे आगे "सरकार " कहा गया है) को मांग करने पर रुपये. मात्र ) तथा उस पर मांग की तिथि से तत्समय सरकारी ऋणों पर लागू वर्तमान सरकारी ब्याज दर के अनुसार ब्याज सहित भुगतान करूंगा/करूंगी और यदि भुगतान भारत के अलावा किसी अन्य देश में किया जाता है , तो उस देश की मुद्रा में उक्त राशि के समतुल्य राशि , उस देश और भारत के बीच की आधिकारिक विनिमय दर के अनुसार परिवर्तित करके चुकाई जाएगी तथा साथ ही सरकार द्वारा वहन किए गए या किए जाने वाले वकील और ग्राहक के बीच की समस्त लागतें , शुल्क और व्यय भी अदा करूंगा/करूंगी ।
यतः मुझ किया गया हैं । को सरकार द्वारा अध्ययन अवकाश स्वीकृत
और यतः सरकार के बेहतर संरक्षण हेतु, मैंने यह बंध- पत्र नीचे लिखी शर्तों सहित निष्पादित करने पर सहमति व्यक्त की है ।
अब इस बंध- पत्र की शर्त यह है कि यदि मैं अध्ययन अवकाश की अवधि की समाप्ति या समापन के पश्चात ड्यूटी फिर से प्रारंभ करने में असफल रहता/रहती हूं या सेवा से त्यागपत्र देता/देती हूं या सेवा निवृत्त होता/ होती हूं या अन्यथा सेवा का त्याग करता/ करती हूं अथवा अध्ययन पाठ्यक्रम को पूर्ण करने में विफल रहता/ रहती हूं या ड्यूटी पर पुनः उपस्थित होनें के पश्चात् पांच वर्ष की अवधि के भीतर किसी भी समय ऐसा करता/करती हूं, तो मैं सरकार को या सरकार द्वारा निर्दिष्ट किए उक्त रुपये.......... (रुपये. पर अनुसार मांग करनेगए मात्र) तथा उस पर मांग की तिथि से लागू सरकारी ऋणों की वर्तमान ब्याज दर पर ब्याज तत्काल अदा करूंगा/करूंगी ।
अब ऊपर लिखित इस बंध- पत्र की एक और शर्त यह है अध्ययन अवकाश समाप्त होने के पश्चात् मेरी सेवा में वापसी पर , बंध- पत्र की अनिवार्य सेवा अवधि , मेरे द्वारा बंध- पत्र की अवधि, के दौरान लिए गए सभी प्रकार के अवकाश की कुल अवधि के बराबर अवधि तक बढ़ा दी जाएगी ।
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
630(52)
और मेरे द्वारा ऐसा भुगतान कर दिए जाने पर तब यह बंध - पत्र शून्य और अप्रभावी हो जाएगा , अन्यथा यह पूर्ण रूप से प्रभावी और वैध बना रहेगा ।
मैं यह समझता/समझती हूं कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 मुझ पर अक्षरशः लागू हैं । मैं पूर्ण रूप से अवगत हूं कि यदि मैं अध्ययन अवकाश के दौरान आचरण नियमों अथवा निर्धारित दिशा- निर्देशों का उल्लंघन करता/करती हूं, तो मेरे विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की जा सकेगी ।
यह बंध - पत्र भारत के वर्तमान प्रचलित विधियों द्वारा सभी प्रकार से शासित रहेगा और इसके अंतर्गत अधिकार एवं दायित्व , जहाँ आवश्यक हो , भारत के उपयुक्त न्यायालयों द्वारा निर्धारित किए जाएंगे ।
दिनांक को , सन दो हजार .
हस्ताक्षरित एवं दिनांकित इस ...
साक्षी की उपस्थितिमें हस्ताक्षरित एवं प्रदत्तः
साक्षीगणः
1
2
स्वीकृत
राज्यपाल की ओर से
स्पष्टीकरण
: " बंध - पत्र की मुद्रा " से अभिप्रेत है वह अवधि, जिसके दौरान सेवा सदस्य की देयता सक्रिय रहती है और सरकार का पूर्वनिर्धारित तथा निर्धारित राशि की मांग करने का अधिकार जीवित रहता है , यदि सेवा सदस्य अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने में विफल रहता है ।
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
630(53)
प्रपत्र - 7
[नियम 51 के अंतर्गत]
अध्ययन अवकाश की अवधि बढ़ाए जाने पर सेवा सदस्य द्वारा निष्पादित किया जाने वाला बंध-पत्र
जिला में सभी को ज्ञात हो कि मैं निवासी जो वर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार के विभाग के पद पर कार्यरत हूं, स्वयं को आबद्ध करता/करती हूं कि मैं, मेरे उत्तराधिकारीगण, निष्पादकगण तथा प्रबंधकगण , मध्यप्रदेश के राज्यपाल ( जिसे आगे " सरकार " कहा गया है ) को मांग करने पर रुपये . (रुपये मात्र) तथा उस पर मांग की तिथि से तत्समय सरकारी ऋणों पर लागू दर के अनुसार ब्याज सहित भुगतान करूंगा/करूंगी । और यदि भुगतान भारत के अलावा किसी अन्य देश में किया जाता है , तो उस देश की मुद्रा में उक्त राशि के समतुल्य राशि , उस देश और भारत के बीच की आधिकारिक विनिमय दर के अनुसार परिवर्तित करके अदा की जाएगी तथा साथ ही , मैं सरकार द्वारा वहन की गई या वहन की जा सकने वाली वकील और ग्राहक के बीच की सभी लागतें, शुल्क एवं व्यय भी अदा करूंगा/करूंगी ।
यतः मुझ , है। को सरकार द्वारा अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया गया
और यतः , सरकार के बेहतर संरक्षण हेतु, मैंने नीचे लिखी शर्तों सहित यह बंध- पत्र निष्पादित करने पर सहमति व्यक्त की है ।
अब इस बंध- पत्र की शर्त यह है कि यदि मैं अध्ययन अवकाश की अवधि की समाप्ति होने या उसके समाप्त किए जाने के पश्चात ड्यूटी फिर से प्रारंभ करने में असफल रहता/रहती हूं या सेवा से त्यागपत्र देता/ देती हूं या निवृत्त होता/होती हूं या अन्यथा सेवा का त्याग करता/करती हूं अथवा अध्ययन का पाठ्यक्रम पूरा करने में असफल रहता /रहती हूं या ड्यूटी पर पुनः उपस्थित होने के पश्चात् पांच वर्ष की अवधि के भीतर किसी भी समय ऐसा करता/करती हूं, तो मैं सरकार को या सरकार द्वारा निर्देशित किए जाने पर मांग करने पर उक्त रुपये .. (रुपये. मात्र) तथा उस पर मांग की तिथि से लागू सरकारी ऋणों पर उस समय प्रभावी ब्याज दर के अनुसार ब्याज सहित तत्काल भुगतान करूंगा/करूंगी।
अब ऊपर लिखित इस बंध- पत्र की एक और शर्त यह है कि मेरे द्वारा प्राप्त अध्ययन अवकाश की समाप्ति के पश्चात् निर्धारित सेवा अवधि के अनुसार जो सेवा अनिवार्य है, उसकी अवधि में मेरे द्वारा बंध- पत्र की अवधि के दौरान लिए गए किसी भी प्रकार के अवकाश की कुल अवधि के बराबर अवधि की वृद्धि की जाएगी ।
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 नवम्बर 2025
630(54)
मेरी द्वारा ऐसा भुगतान कर दिए जाने पर यह बंध - पत्र शून्य और अप्रभावी हो जाएगा, अन्यथा यह पूर्ण रूप से प्रभावी और वैध बना रहेगा।
मैं यह समझता/ समझती हूं कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम , 1965 मुझ पर अक्षरशः लागू हैं । मैं पूर्ण रूप से अवगत हूं कि यदि मैं अध्ययन अवकाश के दौरान आचरण नियमों अथवा निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता/ करती हूं, तो मेरे विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की जा सकेगी।
यह बंध -पत्र भारत के वर्तमान प्रचलित विधियों द्वारा सभी प्रकार से शासित रहेगा और इसके अंतर्गत अधिकार एवं दायित्व, जहाँ आवश्यक हो , भारत के उपयुक्त न्यायालयों द्वारा निर्धारित किए जाएंगे ।
हस्ताक्षरित एवं दिनांकित इस .. दिनांक को, सन दो हजार .
साक्षी की उपस्थिति में हस्ताक्षरित एवं प्रदत्तः
साक्षीगणः
1
2
स्वीकृत
राज्यपाल की ओर से
स्पष्टीकणः "बंध-पत्र की मुद्रा" से अभिप्रेत है वह अवधि, जिसके दौरान सेवा सदस्य की देयता सक्रिय रहती है और सरकार का पूर्वनिर्धारित तथा निर्धारित राशि की मांग करने का अधिकार जीवित रहता है , यदि सेवा सदस्य अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने में विफल रहता है ।
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित -2025.