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मध्य प्रदेश
शासन
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल , सोमवार , दिनांक 1 दिसम्बर 2025-अग्रहायण 10 , शक 1947
क्रमांक 321]
विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश
भोपाल , दिनांक 1 दिसम्बर 2025
क्र. 24020- मप्रविस - 16- विधान- 2025.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में मध्यप्रदेश नगरपालिका (संशोधन ) विधेयक, 2025 (क्रमांक 20 सन् 2025) जो विधान सभा में दिनांक 1 दिसम्बर, 2025 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है .
अरविन्द शर्मा
प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक २० सन् २०२५
मध्यप्रदेश नगरपालिका (संशोधन ) विधेयक, २०२५
विषय - सूची
खण्ड:
१. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
२. धारा १ ९ का संशोधन .
३. धारा २० का संशोधन.
४. धारा ३२ का संशोधन .
५. धारा ३२ - क का स्थापन.
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मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 दिसम्बर 2025
६. धारा ३२ -ख का संशोधन . ७. धारा ३२ - ग का संशोधन . ८. धारा ३३ का संशोधन . ९. धारा ३४ का संशोधन . १०. धारा ३५ का संशोधन. ११. धारा ४३ का संशोधन. १२. धारा ४३-क का संशोधन . १३. धारा ४५ का संशोधन. १४. धारा ४७ का अंतःस्थापन. १५ . धारा ५५ का संशोधन. १६ . धारा ६३ का संशोधन . १७. धारा ३२८ का संशोधन. १८. निरसन तथा व्यावृत्ति.
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक २० सन् २०२५
मध्यप्रदेश नगरपालिका ( संशोधन ) विधेयक , २०२५
मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , १ ९ ६१ को और संशोधित करने हेतु विधेयक .
भारत गणराज्य के छिहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान - मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-
१. (१ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश नगरपालिका (संशोधन ) अधिनियम, २०२५ है.
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
( २) यह " मध्यप्रदेश राजपत्र ' में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा.
धारा १ ९ का संशोधन.
२. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १ ९ ६१ (क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा १ ९ में, उपधारा ( १ ) में , खण्ड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्: -
" (क) नगरपालिका क्षेत्र से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा निर्वाचित अध्यक्ष अर्थात् सभापति (चेयरपर्सन ); " .
धारा २० का संशोधन.
३. मूल अधिनियम की धारा २० में, -
(एक) उपधारा ( २ ) में, खण्ड (ख) में, उपखण्ड (तीन) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्: - " (तीन) अध्यक्ष के निर्वाचन की दशा में, नगरपालिका क्षेत्र के किसी मतदाता द्वारा; " ;
(दो) उपधारा ( ३ ) में, खण्ड (एक) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" (एक) वह उस तारीख से , जिसको कि ऐसे निर्वाचन या नामनिर्देशन का परिणाम राजपत्र में अधिसूचित किया गया है , तीस दिन के भीतर प्रस्तुत न की जाए, और. " .
धारा ३२ का संशोधन,
४. मूल अधिनियम की धारा ३२ में, शब्द "पार्षदों " , जहां कहीं भी वह आया हो, के पूर्व शब्द " अध्यक्ष तथा अंतःस्थापित किए जाएं.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 दिसम्बर 2025
५. मूल अधिनियम की धारा ३२ - क के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-
धारा ३२ - क का स्थापन .
निर्वाचन व्ययों का लेखा.
"३२ - क. (१ ) अध्यक्ष तथा पार्षदों का प्रत्येक अभ्यर्थी निर्वाचन संबंधी उपगत उस सब व्यय का जो, उस तारीख केजिसको वह नामनिर्दिष्ट किया गया है और उस निर्वाचन के परिणामों की घोषणा की तारीख के मध्य जिनके अंतर्गत ये दोनों तारीखें सम्मिलित हैं, स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा उपगत या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया गया है, पृथक् और सही लेखा या तो वह स्वयं रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा.
स्पष्टीकरण-एक.- किसी अध्यक्ष तथा पार्षद के निर्वाचन के संबंध में किसी राजनैतिक दल द्वारा अथवा व्यक्तियों केकिसी अन्य संगम या निकाय द्वारा अथवा अध्यक्ष तथा पार्षद या उसके निर्वाचन अभिकर्ता से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा उपगत या प्राधिकृत किए गए किसी व्यय के बारे में इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए यह नहीं समझा जाएगा कि वह निर्वाचन के संबंध में अध्यक्ष तथा पार्षद या उसके निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा उपगत या प्राधिकृत किया गया व्यय है.
स्पष्टीकरण दो.- शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि सरकार की सेवा में के और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, १ ९ ५१ (१ ९ ५१ का ४३ ) की धारा १२३ के खण्ड (७ ) में वर्णित वर्गों में से किसी व्यक्ति द्वारा या उस खण्ड के परन्तुक में यथा वर्णित अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन या तात्पर्यित निर्वहन में किए गए किसी इंतजाम, दी गई किसी सुविधा या किए गए किसी अन्य कार्य या की गई किसी बात की बावत् उपगत किसी व्यय के बारे में इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए यह नहीं समझा जाएगा कि वह निर्वाचन के संबंध में अध्यक्ष तथा पार्षद या उसके निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा उपगत या प्राधिकृत किया गया व्यय है.
U (२) उक्त व्यय का जोड़ उस रकम से अधिक नहीं होगा जो राज्य सरकार द्वारा निर्वाचन आयोग के परामर्श से विहित कीजाए.
(३ ) व्यय के लेखे में ऐसी विशिष्टियां अन्तर्विष्ट होंगी जैसी राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा विहित की जाएं. " .
६. मूल अधिनियम की धारा ३२ - ख में , शब्द "पार्षद " के पूर्व, शब्द "अध्यक्ष तथा " अंतःस्थापित किए जाएं .
धारा ३२ - ख का संशोधन.
७. मूल अधिनियम की धारा ३२ - ग में , शब्द "पार्षद " के पूर्व, शब्द "या अध्यक्ष " अंतःस्थापित किए जाएं.
धारा ३२ - ग का संशोधन.
धारा ३३ का संशोधन .
८. मूल अधिनियम की धारा ३३ में, शब्द "पार्षदों " या " पार्षद " , जहां कहीं भी वह आया हो, के पूर्व शब्द "अध्यक्ष या' '
अंतःस्थापित किए जाएं.
धारा ३४ का संशोधन.
९. मूल अधिनियम की धारा ३४ में, उपधारा (३ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाए, अर्थात्ः-
" (४ ) यदि कोई व्यक्ति अध्यक्ष और पार्षद दोनों पदों के लिए निर्वाचित हो जाता है, तो उसे निर्वाचित घोषित किए जाने की तारीख से सात दिवस के भीतर किसी एक पद से अपना त्यागपत्र देना होगा. " .
धारा ३५ का संशोधन.
१०. मूल अधिनियम की धारा ३५ में, प्रारंभिक पैरा के स्थान पर , निम्नलिखित पैरा स्थापित किया जाए, अर्थात्: -
"कोई भी व्यक्ति अध्यक्ष या पार्षद के पद के लिए अभ्यर्थी के रूप में निर्वाचित या नामनिर्देशित होने के लिए पात्र नहीं होगा, यदि वह- '" .
धारा ४३ का संशोधन, ११. मूल अधिनियम की धारा ४३ में, -
(एक ) पार्श्व शीर्ष में, शब्द " अध्यक्ष तथा " का लोप किया जाए.
(दो) उपधारा (१ ) में, शब्द " अध्यक्ष तथा " और शब्द " एक अध्यक्ष तथा " का लोप किया जाए.
(तीन) उपधारा (३ ) में, शब्द " अध्यक्ष तथा " का लोप किया जाए.
धारा ४३ - क का १२. मूल अधिनियम की धारा ४३ - क में, -
संशोधन.
(एक ) पार्श्व शीर्ष में , शब्द "अध्यक्ष या " का लोप किया जाए.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 दिसम्बर 2025
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(दो) उपधारा (१ ) में , शब्द " अध्यक्ष या " जहां कहीं भी वे आए हों , का लोप किया जाए.
(तीन) उपधारा ( २) में खण्ड (दो) में, शब्द और अल्प विराम "अध्यक्ष, " का लोप किया जाए.
धारा ४५ का संशोधन.
१३. मूल अधिनियम की धारा ४५ में, पार्श्व शीर्ष में तथा उपबंध में, शब्द "पार्षदों " से पूर्व, शब्द " अध्यक्ष तथा " अंतःस्थापित किए जाएं.
धारा ४७ का अंतःस्थापन .
१४. मूल अधिनियम की धारा ४५ और धारा ४६ , जो कि रिक्त है, के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्: -
अध्यक्ष का वापस बुलाया जाना.
"४७. ( १ ) किसी परिषद् के अध्यक्ष द्वारा अपना पद तत्काल रिक्त कर दिया गया समझा जाएगा यदि उसे ऐसी प्रक्रिया के अनुसार जो कि विहित की जाए, नगरपालिका क्षेत्र के मतदान करने वाले मतदाताओं की कुल संख्या के आधे से अधिक मतदाताओं के बहुमत द्वारा गुप्त मतदान से वापस बुलाया जाए:
परन्तु वापस बुलाने की ऐसी कोई प्रक्रिया तब तक आरंभ नहीं की जाएगी , जब तक कि निर्वाचित पार्षदों की कुल संख्या के कम से कम तीन चौथाई पार्षदों द्वारा प्रस्ताव पर हस्ताक्षर न कर दिए जाएं और उसे कलक्टर को प्रस्तुत न कर दिया जाए:
परन्तु यह और कि, ऐसी कोई प्रक्रिया-
(एक) उस तारीख से जिसको कि ऐसा अध्यक्ष निर्वाचित होता है और अपना पद धारण करता है, तीन वर्ष की कालावधि के भीतर आरंभ नहीं की जाएगी;
(दो) यदि उपचुनाव में निर्वाचित अध्यक्ष की आधी कालावधि का अवसान न हो गया हो , आरंभ नहीं की जाएगी:
परन्तु यह और भी कि अध्यक्ष को वापस बुलाए जाने की प्रक्रिया उसकी संपूर्ण अवधि में एक बार से अधिक बार आरंभ नहीं की जाएगी.
(२) कलक्टर अपना समाधान कर लेने और यह सत्यापन कर लेने के पश्चात् कि उपधारा ( १ ) में विनिर्दिष्ट तीन चौथाई पार्षदों ने वापस बुलाए जाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजेगा और राज्य सरकार उसे राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देशित करेगी;
(३ ) राज्य निर्वाचन आयोग निर्देश प्राप्त होने पर, वापस बुलाए जाने के प्रस्ताव पर, ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, मतदान कराने के लिए व्यवस्था करेगा. " .
धारा ५५ का संशोधन .
१५. मूल अधिनियम की धारा ५५ में, शब्द " अध्यक्ष तथा ' ' का लोप किया जाए.
धारा ६३ का संशोधन, १६. मूल अधिनियम की धारा ६३ में, परन्तुक में , शब्द "किसी समिति के सभापति " से पूर्व , शब्द "उपाध्यक्ष, या " अन्तःस्थापित किया जाए.
धारा ३२८ का संशोधन.
१७. मूल अधिनियम की धारा ३२८ में, उपधारा ( १ ) में, खण्ड ( ख) में, शब्द " अध्यक्ष तथा " जहां कहीं भी वे आए हों , कालोप किया जाए.
निरसन या व्यावृत्ति. १८. (१ ) मध्यप्रदेश नगरपालिका (संशोधन ) अध्यादेश २०२५ ( क्रमांक ०१ सन् २०२५ ) एतद्वारा निरसित किया जाता है.
(२) उक्त अध्यादेश के निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्यवाई, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई बात या की गई कार्यवाही समझी जाएगी.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 दिसम्बर 2025
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उद्देश्यों और कारणों का कथन
मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , १ ९ ६१ (क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) के वर्तमान उपबंधों के अनुसार, नगरपालिका परिषदों/ नगर परिषदों के अध्यक्षों का निर्वाचन, निर्वाचित पार्षदों द्वारा अप्रत्यक्ष रीति से संचालित होते हैं, यदि नगरपालिका परिषदों/ नगर परिषदों के अध्यक्ष नगरीय स्थानीय निकायों के नागरिकों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित किये जाते , तब उन्हें अपनी पसंद के प्रथम नागरिक चुनने का अवसर प्राप्त होता . प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित अध्यक्ष जनता के प्रति जवाबदार होते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित अध्यक्ष पार्षदों के प्रति जवाबदार होते हैं. यह ध्यान देने वाली बात है कि वार्ड पार्षदों का निर्वाचन वार्डों के स्थानीय मुद्दों पर आधारित होता है , जबकि प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित अध्यक्ष सीधे मतदाताओं द्वारा निर्वाचित किए जाते हैं और नगरपालिका परिषदों/ नगर परिषदों के संपूर्ण क्षेत्र के विषयों की जानकारी रखते हैं . इसे ध्यान में रखते हुए नगरपालिका परिषद् तथा नगर परिषद् में आगामी आम निर्वाचन में अध्यक्ष पद का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली के माध्यम से सीधे मतदाताओं द्वारा किया जाना प्रस्तावित है.
२. अतएव उक्त अधिनियम की धारा १ ९ , २०, ३२, ३२ - क, ३२ - ख, ३२ - ग, ३३ , ३४, ३५ , ४३, ४३-क, ४५, ४७ , ५५ , ६३ तथा ३२८ में यथोचित संशोधन किया जाना प्रस्तावित है .
३. चूंकि मामला अत्यावश्यक था तथा विधान सभा सत्र चालू नहीं था, अतएव , मध्यप्रदेश नगरपालिका ( संशोधन ) अध्यादेश, २०२५ (क्रमांक ०१ सन् २०२५) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था . अब उक्त अध्यादेश के स्थान पर, राज्य विधान- मण्डल का अधिनियम बिना किसी उपांतरण के लाया जाना प्रस्तावित है .
४. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है .
भोपाल:
कैलाश विजयवर्गीय दिनांक : २८ नवम्बर , २०२५ .
भारसाधक सदस्य.
प्रत्यायोजित विधि निर्माण संबंधी ज्ञापन
प्रस्तावित विधेयक के जिन खण्डों द्वारा राज्य सरकार को विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन किया जा रहा है , उनका विवरण निम्नानुसार है : -
(१) खण्ड ५ (२) एवं ( ३ ) द्वारा निर्वाचन व्ययों के लेखे के अंतर्गत निर्वाचन संबंधी उपगत व्यय की राशि की सीमा तथा व्यय लेखे की विशिष्टियां विहित किए जाने ; तथा
( २) खण्ड १४ द्वारा अध्यक्ष को वापस बुलाने की रीति एवं प्रस्ताव की प्रक्रिया विहित किए जाने;
के संबंध में नियम बनाएं जाएंगे , जो सामान्य स्वरूप के होंगे .
अध्यादेश के संबंध में विवरण
मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १ ९ ६१ ( क्रमांक ३७ सन १ ९ ६१ ) के वर्तमान उपबंधों के अंतर्गत नगरपालिका परिषदों/ नगर परिषदों के अध्यक्षों के निर्वाचन अप्रत्यक्ष रीति से निर्वाचित पार्षदों द्वारा किये जाने का प्रावधान होने से निर्वाचित अध्यक्ष जनता के प्रति जवाबदेह नहीं होते हैं तथा जनता को भी अपना प्रथम नागरिक चुनने का अवसर प्राप्त नहीं होता है, यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि वार्ड पार्षदों का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली से जनता द्वारा किया जाता है. जबकि अध्यक्ष सीधे जनता द्वारा निर्वाचित न होकर वार्ड पार्षदों द्वारा चुना जाता है . लोकतंत्र में स्थानीय निकायों को सक्षमता और अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह आवश्यक है कि नगरपालिका परिषदों तथा नगर परिषद् के अध्यक्ष पद का निर्वाचन भी प्रत्यक्ष प्रणाली अर्थात सीधे मतदाता द्वारा किया जाये.
चूंकि मामला अत्यावश्यक था तथा विधान सभा का सत्र चालू नहीं था, अतएव, मध्यप्रदेश नगर पालिका ( संशोधन ) अध्यादेश २०२५ (क्रमांक ०१ सन् २०२५ ) प्रख्यापित किया गया था.
अरविन्द शर्मा
प्रमुख सचिव,
मध्यप्रदेश विधान सभा.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2025.