मध्यप्रदेश शास
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
( असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 45]
भोपाल, शुक्रवार, दिनांक 20 फरवरी 2026-फाल्गुन 1 , शक 1947
वाणिज्यिक कर विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन , भोपाल
भोपाल , दिनांक 20 फरवरी 2026 क्र. 3-3-4-0030-2025-Sec-2-पांच (CT)
(दिनांक 01 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2027 तक हेतु आबकारी व्यवस्था)
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सर्वसाधारण की जानकारी एवं आबकारी के फुटकर ठेकेदारों की विशेष जानकारी के लिए यह सूचना प्रकाशित की जाती है कि वर्ष 2026-27 हेतु आबकारी व्यवस्था निम्नवत रहेगी : -
1. दुकान निष्पादन की प्रक्रिया: -
1.1 वर्ष 2026-27 हेतु प्रदेश की समस्त फुटकर मदिरा दुकानों का निष्पादन वर्ष की सम्पूर्ण अवधि अर्थात् दिनांक 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक की अवधि के लिये ई - टेण्डर (ई - टेण्डर एवं ई- टेण्डर कम ऑक्शन) के माध्यम से किया जाएगा । मदिरा दुकान से आशय कम्पोजिट मदिरा दुकान से है ।
1.2 वर्ष 2026-27 में भी विगत वर्ष 2025-26 में संचालित प्रदेश की सभी 3553 मदिरा दुकानों का निष्पादन मदिरा दुकानों के समूह में किया जाएगा ।
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1.3 वर्तमान में रीवा, सतना एवं छिन्दवाड़ा जिले को विभाजित कर क्रमशः मउगंज , मैहर एवं पाढुर्ना नवीन जिले सृजित किये जा चुके हैं। अतः वर्ष 2026-27 के निष्पादन हेतु उक्त जिलों को सम्मिलित करते हुए प्रदेश के 55 जिलों को निष्पादन इकाई मान्य किया जाएगा ।
1.4 जिलों के समस्त मदिरा दुकानों के समूहों का निष्पादन निर्धारित आरक्षित मूल्य पर ई - टेण्डर (समान समूह पर ई - टेण्डर एवं ई- टेण्डर कम ऑक्शन साथ - साथ भी) आमंत्रित कर किया जाएगा । प्रत्येक समूह हेतु ई - टेण्डर (ई -टेण्डर एवं ई-टेण्डर कम ऑक्शन) की प्रक्रिया समानांतर रूप से साथ - साथ भी सम्पन्न की जा सकेगी ।
1.5 मदिरा दुकानों के समूहों के निष्पादन की प्रक्रिया ई- टेण्डर (ई- टेण्डर एवं ई- टेण्डर कम ऑक्शन) में निम्नलिखित श्रेणी के आवेदक भाग ले सकते हैं :-
1.5.1 व्यक्ति
1.5.2 सोल प्रोपराइटर
1.5.3 कंपनी
1.5.4 फर्म
1.5.5 लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी)
1.5.6 कंसोर्टियम
1.6 आवेदकों को ई- आबकारी पोर्टल पर कॉन्ट्रेक्टर रजिस्ट्रेशन मॉडयूल के अंतर्गत पंजीयन कराना अनिवार्य होगा । उक्त पंजीयन में पैन कार्ड ( PAN ) , GST(जहाँ लागू हो) , समस्त बैंक खाते एवं अन्य पहचान सम्बन्धी जानकारी देना आवश्यक होगा एवं आवेदक की उक्त जानकारी के आधार पर पोर्टल के माध्यम से स्वतः सत्यापन किया जाएगा।
1.7 मदिरा दुकानों के समूहों के निष्पादन के सम्बन्ध में जारी की जाने वाली निविदा (ई - टेण्डर एवं ई - टेण्डर कम ऑक्शन) की प्रक्रिया एवं शर्ते आबकारी आयुक्त द्वारा शासन के अनुमोदन से जारी की जाएंगी ।
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1.8 वर्ष 2026-27 के लिए मदिरा दुकानों के समूहों का निष्पादन आबकारी आयुक्त द्वारा निर्धारित/ अधिसूचित किये गये कार्यक्रम अनुसार एवं नियत स्थलों पर किया जायेगा।
2. मदिरा दुकानों की व्यवस्था : -
2.1 प्रदेश की समस्त मदिरा दुकानें (वाईन शॉप एवं एयरपोर्ट काउंटर कोछोड़कर) कम्पोजिट मदिरा दुकान होंगी, जिनमें देशी एवं विदेशी दोनों प्रकार की मदिरा विक्रय हेतु उपलब्ध रहेगी । समस्त मदिरा दुकानों पर देश के बाहर से आयातित BIO ( Bottled In Origin ) मदिरा का विक्रय भी अनुमत होगा।
2.2 वाईन शॉप पर प्रदेश के उत्पादों से प्रदेश में ही निर्मित वाईन एवं हेरिटेज मदिरा तथा अन्य राज्यों में निर्मित हेरिटेज मदिरा जिसे मध्यप्रदेश शासन मान्य करे, का विक्रय अनुमत रहेगा। इसी प्रकार एयरपोर्ट काउंटर पर भी हेरिटेज मदिरा , प्रदेश के उत्पादों से प्रदेश में ही निर्मित वाईन का भी विक्रय अनुमत रहेगा ।
2.3 वर्ष 2026-27 में कोई नवीन मदिरा दुकान नहीं खोली जायेगी ।
2.4 प्रदेश की किसी भी मदिरा दुकान के परिसर में मदिरा सेवन की अनुमतिनहीं होगी ।
3. जिला निष्पादन समिति के कार्य, मदिरा दुकान के परिक्षेत्र का निर्धारण एवंविस्थापन: -
3.1 प्रत्येक जिले में जिला निष्पादन समिति गठित की जायेगी। जिला निष्पादन समिति मदिरा दुकानों का विस्थापन कर जिले में अन्य स्थान पर विस्थापित दुकान खोलने, मदिरा दुकान का पोटेंशियल क्षेत्र निर्धारित करने , मदिरा दुकानों का आरक्षित मूल्य निर्धारित करने, आबकारी आयुक्त के अनुमोदन उपरांत मदिरा दुकानों के समूहों का गठन/पुनर्गठन करने, मदिरा दुकानों का शासन निर्धारित प्रक्रिया अनुसार निष्पादन करने आदि समस्त कार्य करेगी । इस हेतु आबकारी आयुक्त दिशा-निर्देश जारी कर सकेंगे ।
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3.2 जिला निष्पादन समिति सभी मदिरा दुकानों के अवस्थापन परिक्षेत्र का निर्धारण करेगी तथा जिले की सम्पूर्ण मदिरा दुकानों के अवस्थापन परिक्षेत्र की सूची निष्पादन से पूर्व घोषित करेगी।
3.3 वर्तमान में कई जिलों में समान अथवा भिन्न समूहों की अनेक मदिरा दुकानें बहुत निकट स्थापित एवं पूर्व से संचालित है । वर्ष 2026-27 हेतु 300 मीटर की परिधि में संचालित मदिरा दुकानों को निविदा प्रक्रिया से पूर्व समान निकाय में विस्थापित करना होगा । इस हेतु जिला निष्पादन समिति अधिकृत होगी ।
विस्थापित मदिरा दुकान उस दुकान हेतु घोषित परिक्षेत्र में स्थापित की जायेगी अथवा उक्त विस्थापित की जाने वाली मदिरा दुकान के वर्तमान घोषित परिक्षेत्र में युक्तियुक्त स्थल के अभाव में आवश्यकतानुसार परिक्षेत्र के बाहर भी इस प्रकार विस्थापित की जा सकेंगी कि वह उस क्षेत्र में पूर्व से स्थापित मदिरा दुकान के पोटेंशियल एरिया को गंभीर रूप से प्रभावित न करे एवं किसी भी स्थिति में उस क्षेत्र में पूर्व स्थापित मदिरा दुकान के 300 मीटर की परिधि में न हो ।
निष्पादन के पूर्व अपरिहार्य स्थिति में पर्याप्त कारणों का उल्लेख करते हुए, जिला निष्पादन समिति की अनुशंसा के आधार पर आबकारी आयुक्त मदिरा दुकान को समान स्थान पर संचालन करने की अनुमति दे सकेंगे।
निष्पादन उपरांत विस्थापित मदिरा दुकान को किसी भी स्थिति में पूर्व स्थान पर पुनः स्थापित/संचालित करना अनुमत नहीं होगा ।
विस्थापन सम्बन्धी उक्त प्रकरणों में आबकारी आयुक्त की पूर्व अनुमति आवश्यकता नहीं है, किन्तु निविदा पूर्व जिला समिति का कार्यवाही विवरण व ऐसे विस्थापित दुकान की सूची मय नक्शा के आबकारी आयुक्त को अवलोकन हेतु ई - मेल पर अनिवार्यतः प्रेषित करेंगे ।
ऐसे विस्थापन के उपरांत भी जिले की कुल मदिरा दुकानों की संख्या अपरिवर्तित रहेगी ।
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3.4 कण्डिका 3.3 अनुसार विस्थापित की जाने वाली दुकानों को छोड़कर किसी अन्य मदिरा दुकान को विस्थापित कर जिले में अन्य स्थान पर खोलने का निर्णय जिला निष्पादन समिति द्वारा निष्पादन के पूर्व आबकारी आयुक्त की पूर्व अनुमति के अधीन ही लिया जा सकेगा।
3.5 राजस्व हित में जिले में अन्य स्थान पर विस्थापित की गई मदिरा दुकान अथवा अपरिहार्य कारणों से बन्द की गई मदिरा दुकान की सम्बद्धता ( Correlation ) का निर्धारण, विस्थापित दुकान के पूर्व स्थल की निकटवर्ती दुकानों से समानुपातिक आधार पर किया जाएगा। इसका निर्धारण जिला निष्पादन समिति द्वारा किया जाएगा।
3.6 मदिरा दुकान के अवस्थापन परिक्षेत्र के अंतर्गत भी उसका स्थल परिवर्तन आवश्यकता होने पर, अनुज्ञप्तिधारी द्वारा वित्तीय वर्ष के प्रथम माह अथवा निष्पादन दिनांक के आगामी 01 माह (जो भी अवधि बाद में पूर्ण हो) की अवधि में उस मदिरा दुकान हेतु आवंटित अवस्थापन परिक्षेत्र के अंतर्गत अनुज्ञापन प्राधिकारी को प्रस्तुत पूर्व सूचना के अधीन सामान्य प्रयुक्ति के नियमों की दृष्टि से उपयुक्त स्थल पर दुकान का स्थान परिवर्तन किया जा सकेगा । परन्तु कण्डिका 3.3 अनुसार विस्थापित मदिरा दुकान उसी स्थल पर पूर्ववत स्थापित नहीं की जा सकेगी ।
उक्त अवधि के उपरांत आगामी 02 माह की अवधि तक आवश्यकता होने पर स्थल परिवर्तन जिला निष्पादन समिति द्वारा अनुमत किया जा सकेगा, किन्तु उक्त अवधि के पश्चात् इस प्रकार के परिवर्तन के लिए आबकारी आयुक्त की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी ।
3.7 अपरिहार्य परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए वर्ष 2026-27 में जिला निष्पादन समिति मदिरा दुकान बंद करने हेतु आबकारी आयुक्त को स्पष्ट प्रस्ताव अनुशंसा सहित प्रेषित कर सकेंगी । अंतिम निर्णय आबकारी आयुक्त के माध्यम से शासन स्तर से लिया जाएगा ।
3.8 जिला निष्पादन समिति द्वारा निर्धारित स्थान पर नगर निगम/नगरीय निकाय द्वारा मदिरा दुकान के संचालन हेतु दुकान उपलब्ध करायी मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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जाने पर, उक्त दुकान में मदिरा दुकान खोलने की अनिवार्यता रहेगी । किन्तु यह सुनिश्चित किया जाए की नवीन मदिरा दुकान का क्षेत्रफल पूर्व में संचालित मदिरा दुकान से कम न हो।
4. मदिरा की दुकानों के समूह का गठन/पुनर्गठन: -
4.1 राज्य की समस्त मदिरा दुकानों के निष्पादन हेतु प्रथमतः भौगोलिक निरंतरता एवं राजस्व हित के आधार पर अधिकतम 5 मदिरा दुकानों तक का ही समूह गठित किया जायेगा । मदिरा की दुकानों के समूह के गठन/पुनर्गठन/विघटन करने के संबंध में जिला निष्पादन समिति आबकारी आयुक्त की अनिवार्य अनुमति के अधीन निर्णय ले सकेगी । उक्त हेतु कार्योत्तर प्रस्ताव मान्य नहीं किये जायेंगे ।
4.2 उक्त स्वरूप में निष्पादन न होने की स्थिति में समूह का पुनर्गठनकिया जाना -
किसी जिले में गठित सभी समूहों हेतु ई - टेण्डर (ई - टेण्डर एवं ई- टेण्डर - कम-ऑक्शन ) की प्रथम चरण की कार्यवाही सम्पन्न होने के उपरांत उक्त स्वरूप में निष्पादन न होने की स्थिति में राजस्व हित में समूह/समूहों का पुनर्गठन किया जा सकेगा। जिले का वर्ष 2026- 27 का आरक्षित मूल्य 200 करोड़ से अधिक होने की स्थिति में , किसी भी समूह का आरक्षित मूल्य जिले के आरक्षित मूल्य से 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होने के प्रतिबंध के साथ समूहों का पुनर्गठन किया जा सकेगा । राजस्व के आधार पर ऐसे नवगठित समूहों में मदिरा दुकानों की संख्या का कोई बंधन नहीं होगा । इस पुनर्गठन हेतु समूहों में शामिल दुकानों की भौगोलिक निरंतरता की अनिवार्यता नहीं रहेगी , ऐसा पुनर्गठन जिला निष्पादन समिति द्वारा प्रस्तुत युक्तियुक्त प्रस्ताव के आधार पर आबकारी आयुक्त द्वारा अनुमत किया जाएगा। ऐसे पुनर्गठन की कार्यवाही विभिन्न चरणों में सम्पादित की जा सकेगी ।
4.3 रीवा, सतना एवं छिन्दवाड़ा जिलों को विभाजित कर क्रमशः मउगंज, मैहर एवं पांढुर्ना नवीन जिले गठित किये गये हैं । इन जिलों में वर्तमान में प्रचलित किसी मदिरा समूह में शामिल दुकानें यदि एक से अधिक जिले की राजस्व सीमा में आती हो, तो उन समूहों का मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 फरवरी 2026
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नवगठित जिलों की राजस्व सीमाओं के निर्धारण के अनुरूप पुनर्गठन किया जाये । आशय है कि किसी भी मदिरा समूह में सम्मिलित मदिरा दुकानें एक से अधिक जिले की राजस्व सीमाओं के अंतर्गत नहीं आनी चाहिए ।
5. वार्षिक आधार मूल्य का निर्धारण: -
वर्ष 2025-26 के लिये प्रदेश की समस्त मदिरा दुकानों के वार्षिक आधार मूल्य का निर्धारण निम्नानुसार किया जायेगा:-
5.1 वर्ष 2025-26 में जिन समूहों में सम्मिलित एक मदिरा दुकान से दूसरी मदिरा दुकान में, वार्षिक मूल्य में अन्तरण अनुमत किया गया है, तो ऐसा आदेश लागू होने के दिनांक से 31 मार्च , 2026 तक की अवधि के लिए अन्तरण मानकर (भले ही लायसेंसी द्वारा आदेश जारी किये जाने के उपरान्त अन्तरण योग्य मदिरा का प्रदाय लिया गया हो अथवा नहीं) , एकल समूहों में सम्मिलित मदिरा दुकानों का वर्ष 2025-26 के लिए वार्षिक आधार मूल्य पुनर्गणित किया जायेगा।
5.2 जिन समूहों में वार्षिक मूल्य का ऐसा अन्तरण वर्ष 2025-26 में अनुमत नहीं किया गया है , ऐसे समूह में स्थित प्रत्येक मदिरा दुकान का वर्ष 2025-26 की लायसेंस अवधि के लिये वार्षिक आधार मूल्य , वर्ष 2025-26 के लिये निष्पादित मूल्य के बराबर ही रहेगा ।
5.3 वर्ष 2025-26 के लिये जिले के मदिरा दुकानों के समूह का निष्पादन किये जाने के पश्चात् यदि लायसेंस की अवधि में किसी मदिरा दुकान के समूह/एकल समूह का पुनः निष्पादन किया है तो समूह/एकल समूह में स्थित मदिरा दुकान का, वर्ष 2025-26 हेतु वार्षिक आधार मूल्य का पुनः निर्धारण निम्नानुसार किया जायेगा: -
5.3.1 मूल निष्पादन उपरांत अनुज्ञप्तिधारी द्वारा मदिरा दुकान के संचालन अवधि का समानुपातिक वार्षिक लायसेंस फीस एवं आनुपातिक न्यूनतम प्रत्याभूत राशि का योग,
5.3.2 लायसेंस निरस्तीकरण पश्चात मदिरा दुकानों के विभागीय संचालन की अवधि में प्राप्त शुद्ध आय एवं उसी अवधि के लिए मूल निष्पादन में प्राप्त समानुपातिक वार्षिक लायसेंस 90(6)
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फीस + आनुपातिक न्यूनतम प्रत्याभूत राशि का योग , में से जो अधिक हो,
5.3.3 पुनर्निष्पादन के पश्चात पुनर्निष्पादित अवधि हेतु प्राप्त स्वीकृत ऑफर मूल्य
उपरोक्त बिन्दु क्रमांक 5.3.1 , 5.3.2 एवं 5.3.3 का योग वर्ष 2025-26 के लिए पुनर्गणित वार्षिक आधार मूल्य होगा और यदि पुनर्निष्पादन एक से अधिक बार होता है तो उपरोक्तानुसार पुनः इस प्रक्रिया का पालन कर वर्ष 2025-26 के लिए वार्षिक आधार मूल्य परिगणित किया जायेगा ।
5.4 मदिरा दुकान के विस्थापन उपरांत मदिरा दुकानों के वर्ष 2025-26 हेतु वार्षिक आधार मूल्य की गणना: -
5.4.1 जिले में किसी मदिरा दुकान को विस्थापित कर, अन्य स्थान पर दुकान खोलने की स्थिति में, विस्थापित दुकान के वर्ष 2025-26 हेतु वार्षिक आधार मूल्य का निर्धारण, जिले में जिस परिक्षेत्र /स्थान पर विस्थापित दुकान खोली जानी है, उसके समीपवर्ती दो मदिरा दुकानों के वर्ष 2025-26 के परिगणित वार्षिक आधार मूल्य के औसत के समतुल्य किया जायेगा ।
5.4.2 अन्य स्थान पर विस्थापित दुकान के वर्ष 2025-26 के लिए नवीन स्थल पर परिगणित वार्षिक आधार मूल्य को विस्थापित की जा रही मदिरा दुकान के पूर्व स्थल पर वर्ष 2025-26 हेतु परिगणित वार्षिक आधार मूल्य में से कम कर, शेष रही राशि को विस्थापित मदिरा दुकान के पूर्व पोटेंशियल एरिया से संलग्न संचालित मदिरा दुकानों की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional ) पर विभाजित कर जोड़ा जायेगा ।
5.4.3 कण्डिका 3.3 के अंतर्गत किसी मदिरा दुकान का परिक्षेत्र के बाहर विस्थापन की स्थिति में, उस मदिरा दुकान के वर्ष 2025-26 के सम्पूर्ण वार्षिक मूल्य को 300 मीटर की परिधि में संचालित शेष मदिरा दुकान में जोड़ा जाएगा । 300 मीटर के परिधि में एक से अधिक मदिरा दुकानें शेष संचालित रहने की स्थिति में विस्थापित मदिरा दुकान से मदिरा दुकानों की मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 फरवरी 2026
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दूरी के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional ) आधार पर विभाजित कर सम्पूर्ण वार्षिक मूल्य को जोड़ा जायेगा । ऐसी विस्थापित मदिरा दुकान का नवीन वार्षिक आधार मूल्य कण्डिका 5.4.1 अनुसार ही परिगणित किया जाएगा।
5.5 मदिरा दुकान को बंद करने की स्थिति में बंद मदिरा दुकान का वर्ष 2025-26 हेतु परिगणित वार्षिक आधार मूल्य का विभाजन: -
जिला निष्पादन समिति के प्रस्ताव उपरांत शासन की पूर्व अनुमति से यदि किसी मदिरा दुकान को बंद करने का निर्णय लिया जाता है तो ऐसी स्थिति में बंद की जाने वाली मदिरा दुकान के वर्ष 2025-26 हेतु परिगणित वार्षिक आधार मूल्य को, बंद की जा रही मदिरा दुकान के पोटेंशियल एरिया से संलग्न संचालित मदिरा दुकानों की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional ) आधार पर विभाजित कर जोड़ा जायेगा ।
5.6 किसी मदिरा दुकान को विस्थापित कर जिले में अन्य स्थान पर खोले जाने की स्थिति में यह ध्यान रखा जावेगा कि अन्य स्थान पर विस्थापित दुकान तथा जिले की शेष संचालित मदिरा दुकानों का परिगणित कुल वार्षिक मूल्य जिले के वर्ष 2025-26 के परिगणित वार्षिक मूल्य से कम न हो ।
किसी मदिरा दुकान को विस्थापित कर उपयुक्त स्थल के अभाव में मदिरा दुकान बंद करने की स्थिति में यह ध्यान रखा जावेगा कि जिले की शेष संचालित मदिरा दुकानों का परिगणित कुल वार्षिक मूल्य जिले के वर्ष 2025-26 के परिगणित वार्षिक मूल्य से कम न हो।
6. आरक्षित मूल्य का निर्धारण: -
वर्ष 2025-26 में संचालित मदिरा दुकानों के परिगणित वार्षिक आधार मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि कर, वर्ष 2026-27 का आरक्षित मूल्य निर्धारित किया जाएगा।
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7. वार्षिक मूल्य, वार्षिक लायसेंस फीस एवं न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी राशि कानिर्धारण:-
7.1 ई- टेण्डर (ई - टेण्डर एवं ई - टेण्डर- कम- ऑक्शन) के माध्यम से निष्पादित मदिरा दुकान/मदिरा दुकानों के समूह हेतु ई - टेण्डर में स्वीकृत उच्चतम ऑफर की राशि उस मदिरा दुकान/ समूह का वार्षिक मूल्य होगा ।
7.2 मदिरा दुकान/दुकानों के समूह के लिये प्राप्त वार्षिक मूल्य का 05 प्रतिशत वार्षिक लायसेंस फीस तथा शेष 95 प्रतिशत राशि मदिरा दुकान/दुकानों के समूह के लिये वार्षिक न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी राशि होगी । वार्षिक न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी के विरूद्ध मदिरा प्रदाय अनुमत होगा । वार्षिक लायसेंस फीस के विरूद्ध मदिरा प्रदाय अनुमत नहींहोगा ।
8. धरोहर राशि ( Earnest Money Deposit) , वार्षिक लायसेंस फीस एवं उनको जमा कराया जाना : - धरोहर राशि, वार्षिक लायसेंस फीस व उनको जमा करने की प्रक्रिया निम्नवत रहेगी :-
8.1 ई-टेण्डर (ई - टेण्डर एवं ई - टेण्डर कम ऑक्शन साथ - साथ) के माध्यम से निष्पादित की जाने वाली मदिरा दुकान के समूह के लिए धरोहर राशि ( EMD ) निम्नवत रहेगी :-
क्र.
धरोहर राशि ( EMD) मदिरा दुकान के समूह का आरक्षित मूल्य 1 10 करोड़ तक
10 करोड़ से अधिक 2
आरक्षित मूल्य के 2 प्रतिशत राशि के आगामी 1 लाख के गुणांक में
20 लाख + आरक्षित मूल्य की 10 करोड़ से अधिक शेष राशि के 1 प्रतिशत के आगामी 05 लाख के गुणांक में मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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8.2 ई- टेण्डर (ई - टेण्डर एवं ई - टेण्डर कम ऑक्शन साथ- साथ ) हेतु निर्धारित धरोहर राशि ( EMD) Mptenders पोर्टल (https://mptenders.gov.in) पर ऑनलाईन देय होगी।
8.3 ई - टेण्डर (ई - टेण्डर एवं ई- टेण्डर कम ऑक्शन) के माध्यम से सफल निविदादाता की धरोहर राशि ( EMD ) वार्षिक लायसेंस फीस में समायोजित की जाएगी।
8.4 वार्षिक लायसेंस फीस की शेष राशि निष्पादन की तिथि से 03 दिवस के अंदर अथवा दिनांक 31 मार्च, 2026 जो भी पहले हो तक, ई- आबकारी पोर्टल पर ऑनलाईन जमा करानी होगी । 03 दिवसों की गणना में निष्पादन की कार्यवाही का दिन एवं अवकाश के दिन (बैंक बंदी दिवस अथवा बैंक हड़ताल दिवस सहित, यदि कोई हो) को गणना में नहीं लिया जायेगा ।
8.4.1 ई- टेण्डर (ई - टेण्डर एवं ई - टेण्डर - कम -ऑक्शन) द्वारा मदिरा दुकानों के समूहों का निष्पादन, दिनांक 29 मार्च के उपरान्त होता है , तो ऐसी स्थिति में भी संबंधित मदिरा दुकानों के समूहों की शेष वार्षिक लायसेंस फीस जमा कराये जाने हेतु आबकारी आयुक्त द्वारा 03 बैंक कार्यकारी दिवस का समय दिया जा सकेगा।
8.4.2 यदि 31 मार्च तक स्वीकृत निविदादाता द्वारा अवशेष वार्षिक लायसेंस फीस की राशि दिनांक 31 मार्च के उपरांत जमा करायी जाती है तो भी उस समूह की दुकानों के लायसेंस, वित्तीय वर्ष की सम्पूर्ण अवधि के लिए ही जारी किये जायेंगे और उसकी देयताएं भी वर्ष की सम्पूर्ण अवधि की ही होंगी।
8.5 वार्षिक लाइसेंस फीस की शेष राशि कण्डिका 8.4 में निर्धारित समयावधि में जमा न किये जाने पर पृथक से बिना किसी अन्य सूचना के संबंधित मदिरा दुकानों के समूह का ऑफर निरस्त मान्य किया जाकर, धरोहर राशि एवं यदि आंशिक लायसेंस फीस की कोई राशि जमा की गई हो, तो वह भी जप्त की जाएगी तथा ऐसी मदिरा दुकानों के समूह पुनः निष्पादन पर रखे जावेंगे । उक्त मदिरा दुकानों के समूहों का पुनर्निष्पादन पूर्व निर्धारित आरक्षित मूल्य पर वर्तमान मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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उच्चतम ऑफरदाता के उत्तरदायित्व पर किया जायेगा । इस प्रकार का डिफाल्टर टेण्डरदाता/ लायसेंसी ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और उसे सम्पूर्ण प्रदेश में निष्पादन के आगामी सभी चरणों/ लायसेंस अवधि में किसी भी प्रकार से भाग लेने की अनुमति नहीं होगी ।
8.6 पुनर्निष्पादन हेतु ऐसे मदिरा दुकानों के समूह को आगामी ई - टेण्डर (ई- टेण्डर एवं ई- टेण्डर कम ऑक्शन) कार्यवाही में सम्मिलित किया जाएगा ।
8.7 असफल टेण्डरदाता द्वारा जमा धरोहर राशि ( EMD ) , उसे अधिसूचित व्यवस्था अनुसार वापस की जायेगी।
9. प्रतिभूति राशि ( Security Deposit) एवं उसको जमा कराया जाना:
9.1. लायसेंस अवधि वर्ष 2026-27 के लिये प्रतिभूति राशि का निर्धारण एवं गणना: -
मदिरा दुकानों के समूह के लिए वर्ष 2026-27 के लिये प्राप्त वार्षिक मूल्य के 10 प्रतिशत के समतुल्य राशि प्रतिभूति के रूप में प्रभारित कीजायेगी ।
9.1.1 . प्रतिभूति राशि, ई - आबकारी पोर्टल के माध्यम से जमा ई- चालान के द्वारा अथवा संबंधित जिले के सहायक आबकारी आयुक्त/जिला आबकारी अधिकारी के पक्ष में किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसूचित व्यवसायिक बैंक/निजी क्षेत्र के अनुसूचित व्यवसायिक बैंक/ मध्यप्रदेश राज्य के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के द्वारा जारी ई -बैंक गारंटी ( e - BG ) के रूप में ही स्वीकार की जावेगी । प्रतिभूति राशि के रूप में सावधि जमा ( FDR) स्वीकार नहीं की जाएगी ।
9.1.2. प्रतिभूति के रूप में प्रस्तुत ई- बैंक गारंटी की वैधता अवधि कम से कम 30.04.2027 तक की होगी ।
9.1.3 . राजस्व सुरक्षा की दृष्टि से वर्ष 2026-27 हेतु सभी बैंक गारंटियां अनिवार्यतः ई- बैंक गारंटी के रूप में ही प्राप्त की जाएंगी । किसी अनुमत बैंक का नेशनल ई - गवर्नेस सर्विस लिमिटेड ( NESL ) में पंजीकृत न होना या अन्य किसी कारण से ई - बैंक गारंटी ( e - BG ) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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प्रदाय करने में सक्षम न होना उस बैंक की भौतिक बैंक गारंटी मान्य किये जाने का आधार नहीं होगी ।
9.1.4. ई- टेण्डर (ई - टेण्डर एवं ई - टेण्डर कम ऑक्शन) द्वारा चयनित सफल टेण्डरदाता यथा व्यक्ति/ भागीदारी फर्म/लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी)/कम्पनी/कंसोर्टियम जिसके नाम से लाइसेंस जारी किया जाएगा, उसी व्यक्ति/ भागीदारी फर्म/लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) / कम्पनी/ कंसोर्टियम के नाम से जारी ई - बैंक गारण्टी ही स्वीकार की जायेगी। व्यक्ति/भागीदारी फर्म/लिमिटेड पार्टनरशिप लायबिलिटी (एलएलपी)/कम्पनी/कंसोर्टियम के एवज में किसी अन्य व्यक्ति, भागीदार , डायरेक्टर , पार्टनर कंपनी/ सदस्य इत्यादि के नाम से स्वीकृत ई - बैंक गारण्टी स्वीकार नहीं की जायेगी।
सभी ई - बैंक गारंटियां विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप में जारी होने पर ही स्वीकार की जाएगी । उक्त बैंक गारंटियां किसी भी प्रयोजन के लिए अन्यत्र कहीं भी प्रस्तुत नहीं की जाएगी ।
9.1.5 . वर्ष 2026-27 की लायसेंस अवधि के लिए प्रस्तुत सम्पूर्ण प्रतिभूति की राशि के संबंध में आवेदक लायसेंसी को यह उल्लेखित एवं प्रमाणित करना होगा, कि उसके द्वारा संबंधित मदिरा दुकान के लिए प्रस्तुत प्रतिभूति राशि वर्ष 2026-27 की लायसेंस अवधि के दौरान संबंधित मदिरा दुकान के अतिरिक्त मध्यप्रदेश राज्य के किसी भी जिले में उस आवेदक/लायसेंसी के नाम से अथवा पार्टनरशिप में अथवा जिस कंपनी अथवा कन्सॉर्टियम ( Consortium) में वह डायरेक्टर या बोर्ड ऑफ डायरेक्टर का सदस्य हो, उसे स्वीकृत किसी भी अन्य मदिरा दुकान में गई अनियमितताओं के कारण उद्भूत वसूलियों के संदर्भ में भी बंधनकारी होगी , परन्तु इस प्रतिभूति राशि पर प्रथम भार उस दुकान/समूह के लायसेंस का होगा , जिसके लिए वह प्रस्तुत की गई है ।
9.1.6 . प्रतिभूति की राशि हेतु प्रस्तुत ई- बैंक गारंटी में, बैंक द्वारा बैंक गारण्टी के दस्तावेज में यह उल्लेखित एवं प्रमाणित करना होगा कि उनके द्वारा मदिरा दुकानों के समूह के लिए प्रस्तुत प्रतिभूति राशि मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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लायसेंस अवधि 2026-27 की लायसेंस अवधि के दौरान संबंधित मदिरा दुकानों के समूह के अतिरिक्त मध्य प्रदेश राज्य के किसी भी जिले में उस आवेदक/लायसेंसी के नाम से अथवा पार्टनरशिप में अथवा फर्म अथवा जिस कंपनी अथवा कन्सॉर्टियम ( Consortium ) में वह डायरेक्टर/ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर का सदस्य हो, उसे स्वीकृत किसी भी अन्य मदिरा दुकान/दुकानों में की गई अनियमितताओं के कारण उद्भूत वसूलियों के संदर्भ में भी बंधनकारी होगी । बैंक द्वारा ऐसा पत्र नियत मूल्य के नॉन ज्यूडीशियल स्टाम्प पेपर पर तैयार कर जारी किया जायेगा ।
9.1.7 . प्रतिभूति राशि की ई - बैंक गारंटी अधिकतम 25,000/ - रूपये के अध्यधीन रहते हुए , गारंटी राशि के 0.25 % या भारतीय स्टॉम्प अधिनियम के अंतर्गत तत्समय प्रचलित दर के अनुसार आवश्यक मूल्य के नॉन ज्यूडिशियल स्टॉम्प पर तैयार कराकर प्रस्तुत की जायेगी।
9.1.8 . सफल टेण्डरदाता/लायसेंसी को कण्डिका 9.2 , 9.3 एवं 9.4 में से किसी एक कण्डिका अनुसार प्रतिभूति राशि जमा करने का विकल्प होगा ।
9.2. ई- बैंक गारंटी के माध्यम से निर्धारित प्रतिभूति की राशि जमा कराया जाना -
9.2.1 . जिन मदिरा दुकानों के समूहों का निष्पादन दिनांक 24 मार्च 2026 के पूर्व हो जायेगा, ऐसे सफल टेण्डरदाता द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित सम्पूर्ण प्रतिभूति की राशि , निष्पादन के दिनांक से 10 दिवस की अवधि में अथवा 31 मार्च, 2026 के पूर्व (जो भी पहले आये) प्रस्तुत की जाएगी ।
9.2.2 . जिन मदिरा दुकानों के समूहों का निष्पादन दिनांक 24 मार्च 2026 अथवा उसके पश्चात की किसी तिथि को अंतिम होता है , तो ऐसी स्थिति में प्रतिभूति की राशि निष्पादन तिथि से अधिकतम 10 दिवस की अवधि में अर्थात दिनांक 31 मार्च 2026 तक के बाद भी जमा करायी जा सकेगी , किन्तु 31 मार्च 2026 के पश्चात की अवधि हेतु ऐसी अनुमति आबकारी आयुक्त द्वारा जिले से प्राप्त प्रस्ताव पर दी मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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जायेगी एवं ऐसे प्रस्ताव पर आबकारी आयुक्त विचार कर समग्र निर्णय ले सकेंगे ।
9.2.3 . समूह हेतु सम्पूर्ण प्रतिभूति की राशि एवं सम्पूर्ण वार्षिक लायसेंस फीस जमा हो जाने के उपरांत ही संबंधित मदिरा दुकानों का लायसेंस जारी किया जायेगा ।
9.2.4 . प्रतिभूति की सम्पूर्ण राशि 31 मार्च 2026 के पश्चात जमा होने की स्थिति में भी लायसेंस सम्पूर्ण वित्तीय वर्ष हेतु ही जारी किया जायेगा , किन्तु मदिरा दुकान का संचालन न होने के लिये वह स्वयं उत्तरदायी होगा, इसके लिये उसे किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति की पात्रता नहीं होगी ।
9.2.5 . सफल टेण्डरदाता द्वारा प्रतिभूति की राशि विनिर्दिष्ट अवधि में जमा नहीं कराये जाने पर, उसके द्वारा जमा सम्पूर्ण राशि जप्त कर , उसके उत्तरदायित्व पर सम्बंधित मदिरा दुकान के समूह का पुनर्निष्पादन किया जायेगा। पुनर्निष्पादन के फलस्वरूप जो भी खिसारा आयेगा, उसकी वसूली संबंधित डिफाल्टर से भू- राजस्व के बकाया की भांति की जायेगी ।
9.3 . ई - चालान के माध्यम से निर्धारित प्रतिभूति की राशि जमा कराया जाना-
9.3.1 . जिन मदिरा दुकानों के समूहों का निष्पादन दिनांक 24 मार्च 2026 के पूर्व हो जायेगा, ऐसे सफल टेण्डरदाता द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए सम्पूर्ण प्रतिभूति राशि की न्यूनतम 50 % राशि ई - आबकारी पोर्टल पर ई - चालान के माध्यम से, निष्पादन के दिनांक से 10 दिवस की अवधि में अथवा 31 मार्च, 2026 के पूर्व (जो भी पहले आये) जमा कीजाएगी ।
9.3.2 . जिन मदिरा दुकानों के समूहों का निष्पादन दिनांक 24 मार्च 2026 अथवा उसके पश्चात की किसी तिथि को अंतिम होता है, ऐसे सफल टेण्डरदाता द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए सम्पूर्ण प्रतिभूति राशि की न्यूनतम 50 % राशि ई - आबकारी पोर्टल पर ई - चालान के माध्यम से निष्पादन तिथि से अधिकतम 10 दिवस की अवधि में अर्थात दिनांक 31 मार्च 2026 तक के बाद भी जमा करायी जा सकेगी , किन्तु 31 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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मार्च 2026 के पश्चात की अवधि हेतु ऐसी अनुमति आबकारी आयुक्त द्वारा जिले से प्राप्त प्रस्ताव पर दी जायेगी एवं ऐसे प्रस्ताव पर आबकारी आयुक्त विचार कर समग्र निर्णय ले सकेंगे ।
9.3.3 . सफल टेण्डरदाता द्वारा मदिरा दुकानों की निर्धारित प्रतिभूति राशि की न्यूनतम 50 % राशि ई - आबकारी पोर्टल पर ई - चालान के माध्यम से जमा करने एवं सम्पूर्ण वार्षिक लाइसेंस फीस जमा करने की स्थिति में लाइसेंस सम्पूर्ण वित्तीय वर्ष के लिए लायसेंस जारी किया जायेगा।
9.3.4. प्रतिभूति की निर्धारित राशि 31 मार्च 2026 के पश्चात जमा होने की स्थिति में भी लायसेंस सम्पूर्ण वित्तीय वर्ष हेतु ही जारी किया जायेगा, किन्तु मदिरा दुकान का संचालन न होने के लिये वह स्वयं उत्तरदायी होगा , इसके लिये उसे किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति की पात्रता नहीं होगी ।
9.3.5 . सफल टेण्डरदाता द्वारा शेष प्रतिभूति राशि को दिनांक 30 अप्रैल 2026 तक ई - आबकारी पोर्टल पर ई - चालान अथवा ई - बैंक गारंटी के माध्यम से जमा करना अनिवार्य होगा ।
9.3.6. निर्धारित प्रतिभूति की शेष राशि दिनांक 30 अप्रैल 2026 तक जमा होने की स्थिति में ई- चालान के माध्यम से जमा कुल प्रतिभूति राशि की 50 % राशि का समायोजन माह मार्च 2027 में देय निर्धारित न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी के विरूद्ध आदेशित किया जाएगा अथवा लायसेंस अवधि का सम्पूर्ण वार्षिक मूल्य जमा होने की स्थिति में वापिस की जा सकेगी ।
लाइसेंसी द्वारा ई - चालान के माध्यम से जमा उक्त 50 % राशि से अतिरिक्त , प्रतिभूति की सम्पूर्ण राशि ( अर्थात् 100 प्रतिशत राशि) दिनांक 30 अप्रैल 2026 तक ई - बैंक गांरटी के रूप में प्रस्तुत करता है, तो ई- आबकारी पोर्टल पर ई - चालान के माध्यम से जमा समस्त प्रतिभूति की राशि का समायोजन जिला कार्यालय द्वारा स्वमेव संज्ञान लेकर अधिकतम एक माह में संबंधित अथवा आगामी पक्ष में देय निर्धारित न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी के विरूद्ध किया जाएगा अथवा रिफण्ड की जायेगी ।
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9.3.7 . न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी की राशि के विरूद्ध प्रतिभूति की समायोजित राशि के विरूद्ध मदिरा का प्रदाय अनुमत होगा।
9.3.8 . सफल टेण्डरदाता/लायसेंसी द्वारा उपरोक्तानुसार विनिर्दिष्ट अवधि में निर्धारित प्रतिभूति राशि जमा नहीं करने की स्थिति में , उसे स्वीकृत लायसेंस निरस्त किया जाकर, जमा प्रतिभूति राशि एवं अन्य राशि राजसात की जाएगी और डिफाल्टर टेण्डरदाता/लायसेंसी के उत्तरदायित्व पर मदिरा दुकानों के समूह के पुनर्निष्पादन की नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी। पुनर्निष्पादन के फलस्वरुप जो भी खिसारा आयेगा उसकी वसूली संबंधित डिफाल्टर से भू- राजस्व के बकाया की भांति की जायेगी ।
9.4. ई- बैंक गारंटी एवं ई - चालान के माध्यम से मिश्रित रूप से प्रतिभूति राशिजमा कराया जाना : -
सफल टेण्डरदाता द्वारा निर्धारित प्रतिभूति की राशि ई - बैंक गारंटी एवं ई - चालान के माध्यम से मिश्रित रूप में भी जमा की जा सकेगी परन्तु कुल प्रतिभूति राशि की 50 % राशि से कम राशि ई - चालान के माध्यम से जमा होने की स्थिति में, शेष राशि ई- बैंक गारंटी के रूप से जमा करने हेतु समयावधि एवं अन्य प्रावधान कण्डिका 9.2 अनुसार लागू होगी ।
9.5 . प्रतिभूति राशि के प्रकार में प्रतिस्थापन/परिवर्तन: -
वर्ष 2026-27 के लिए जमा की गई प्रतिभूति की राशि के प्रकार में किसी अनुज्ञप्तिधारी द्वारा कोई परिवर्तन चाहा जाता है , अर्थात् ई -चालान से जमा राशि को ई - बैंक गारंटी ( e - BG ) अथवा ई - बैंक गारंटी को ई- चालान से जमा राशि से प्रतिस्थापन करना चाहता है, तो संबंधित जिले के सहायक आबकारी आयुक्त/जिला आबकारी अधिकारी ऐसा करने के लिए अधिकृत होंगे ।
किसी मदिरा दुकानों के समूह हेतु, प्रतिभूति प्रतिस्थापन की यह अनुमति लायसेंस अवधि में एक बार ही दी जाएगी। ऐसे प्रतिस्थापन में ई - चालान से जमा प्रतिभूति राशि का अनुज्ञप्तिधारी की न्यूनतम प्रत्याभूत डयूटी राशि के विरूद्ध समायोजन भी अनुमत होगा ।
सहायक आबकारी आयुक्त/जिला आबकारी अधिकारी द्वारा ऐसा प्रतिस्थापन अनुमत करने के पूर्व सुसंगत अभिलेखीय प्रमाण के मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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साथ यह सुनिश्चित किया जावेगा कि प्रत्येक समय अनुज्ञप्तिधारी की निर्धारित प्रतिभूति राशि विभाग के पास निरंतर जमा रहे।
10. ई- टेण्डर प्रपत्र का मूल्य:-
10.1 ई - टेण्डर (ई - टेण्डर एवं ई- टेण्डर कम ऑक्शन) प्रक्रिया में भाग लेने हेतु ई - टेण्डर फार्म की कीमत प्रति समूह 30,000 /- रूपये होगी (चाहे समूह में सम्मिलित दुकानों की संख्या एक से अधिक भी हो) ।
10.2 ई- टेण्डर फार्म की राशि वापसी अथवा समायोजन योग्य नहीं होगी ।
11. ई- टेण्डर द्वारा मदिरा दुकानों के निष्पादन की व्यवस्था एवं शर्तें: - 11.1 ई - टेण्डरिंग की प्रक्रिया आवश्यकतानुसार एक से अधिक चरणों में की जा सकेगी । ई- टेण्डरिंग NIC के mptenders पोर्टल (https://mptenders.gov.in ) के माध्यम से की जावेगी ।
11.2 ई- टेंडरिंग की प्रक्रिया के दौरान जिलों की मदिरा दुकानों एवं समूहों का उनके पूर्व वर्षों के डेटा से विभिन्न मापदंडों के आधार पर वर्गीकरण किया जायेगा एवं प्रत्येक जिले के ऐसे वर्गीकृत समूहों का बैच बनाकर विभिन्न चरणों में निष्पादन किया जायेगा। जिले का कोई समूह, किस चरण में निष्पादन की प्रक्रिया में सम्मिलित होगा, यह पूर्व निश्चित नहीं होगा । ई - टेण्डर की प्रक्रिया के दौरान किसी चरण में सम्मिलित होने वाले समूहों का चयन रैंडम आधार पर सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाएगा ।
11.3 ई- टेण्डर से संबंधित जानकारी प्राप्त करने की व्यवस्था, टेण्डर में सम्मिलित होने की प्रक्रिया, प्रावधान, शर्तें तथा निर्बंधन आबकारी आयुक्त द्वारा शासन से अनुमोदन प्राप्त कर जारी किये जाएंगे ।
12. निर्धारित न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी राशि जमा करने एवं पाक्षिक प्रदाय के प्रशासनिक नियंत्रण की दृष्टि से व्यवस्था: -
12.1 . मदिरा दुकान के लिए परिगणित निर्धारित न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी राशि प्रति वर्ष 24 पाक्षिक किश्तों में वसूली योग्य होगी । ये किश्तें समान रूप से विभाजित नहीं होगी । वित्तीय वर्ष के प्रथम त्रैमास में वार्षिक मांग का 30 प्रतिशत , द्वितीय त्रैमास में वार्षिक मांग का 20 प्रतिशत तथा वर्ष के तृतीय एवं चतुर्थ त्रैमासों में वार्षिक मांग का मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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क्रमशः 25 एवं 25 प्रतिशत भाग वसूल किया जायेगा । किसी भी त्रैमास में वसूली योग्य इस राशि को छः समान भागों में बांटा जाएगा। यदि यह राशि छः समान भागों में विभाज्य नहीं है, तो अविभाज्य शेष भाग को संबंधित त्रैमास की प्रथम पाक्षिक किश्त में समायोजित किया जाएगा ।
12.2 . मदिरा दुकानों के अनुज्ञप्तिधारियों को किसी पक्ष की देय निर्धारित प्रत्याभूत राशि, ई - आबकारी (सायबर ट्रेजरी) इन्टीग्रेशन के माध्यम से ई -वालेट में जमा करनी होगी । अनुज्ञप्तिधारियों को ई- वालेट के माध्यम से जमा की गई राशि का न्यूनतम प्रत्याभूत राशि में समायोजन करना होगा। समायोजन की इस दिनांक को ही आगामी संदर्भों के लिए जमा दिनांक मान्य किया जायेगा ।
12.3 . न्यूनतम प्रत्याभूत राशि में समायोजित की गयी राशि पर निर्धारित ड्यूटी राशि के समतुल्य देशी अथवा विदेशी मदिरा का प्रदाय देशी/विदेशी मदिरा भण्डागार से अनुमत होगा।
12.4. मदिरा दुकानों के अनुज्ञप्तिधारियों द्वारा किसी पक्ष की निर्धारित पाक्षिक मांग से अधिक राशि जमा किए जाने पर वह राशि स्वतः ही उस दुकान के आगामी पक्षों में समायोजित होगी ।
12.5. मदिरा दुकानों के समूह की दुकानों का पृथक - पृथक एवं स्वतंत्र अस्तित्व रहेगा, किन्तु मदिरा दुकानों के समूह की किसी भी एक या एक से अधिक दुकानों की पाक्षिक निर्धारित न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी राशि बकाया रहने पर, वह बकाया संपूर्ण मदिरा दुकानों के समूह की बकाया मानी जाएगी ।
12.6 . ई - वालेट व्यवस्था प्रभावी हो जाने के कारण , चालान की भूमिका समाप्त हो जाने से पोर्टल पर उपलब्ध प्रदाय योग्य समस्त राशि में से लायसेंसी द्वारा आवश्यकतानुसार राशि पर प्रदाय लिया जा सकेगा अर्थात एक चालान पर आंशिक प्रदाय अथवा एक से अधिक चालानों पर एक साथ प्रदाय भी लिया जा सकेगा।
12.7 . अनुज्ञप्तिधारी द्वारा पोर्टल पर डिमांड क्रियेट कर सम्बन्धित समस्त भुगतान पूर्ण कर लेने के बाद देशी एवं विदेशी मद्यभाण्डागार से 03 दिवस के अंदर मदिरा का प्रदाय लेना अनिवार्य होगा अन्यथा की मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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स्थिति में अनुज्ञप्तिधारी को उसके द्वारा क्रियेट डिमांड हेतु जमा न्यूनतम प्रत्याभूत डयूटी राशि की 0.5 प्रतिशत राशि डिफाल्टर के रूप में जमा करना अनिवार्य होगा । उक्त अनियमितता 07 दिवस के उपरांत भी जारी रहने की स्थिति में उक्त राशि की 0.1 प्रतिशत डिफाल्टर राशि प्रतिदिन के मान से अतिरिक्त रूप से प्रभारित की जायेगी।
12.8 . किसी समूह में सम्मिलित समस्त दुकानों की उस पक्ष तक की देय प्रगामी सम्पूर्ण राशि उस पक्षान्त तक जमा न किये जाने की स्थिति में, उस समूह की समस्त दुकानों का प्रदाय पक्षान्त के आगामी दिवस से ही पोर्टल द्वारा प्रतिबंधित कर दिया जायेगा किन्तु पोर्टल पर पूर्व से ही बनाई गयी डिमान्ड पर प्रदाय अनुमत होगा।
12.9 . किसी समूह में सम्मिलित समस्त दुकानों की उस पक्ष तक की देय प्रगामी सम्पूर्ण राशि उस पक्षान्त तक जमा न किये जाने की स्थिति में, वह समूह पोर्टल पर डिफाल्टर प्रदर्शित होगा । संबंधित जिले के सहायक आबकारी आयुक्त/जिला आबकारी अधिकारी को पक्ष समाप्ति के आगामी दिवस पर ही संबंधित लायसेंसी को लायसेंस निरस्तीकरण हेतु नोटिस जारी करना होगा ।
12.10 . किसी समूह में सम्मिलित समस्त दुकानों की उस पक्ष तक की देय प्रगामी सम्पूर्ण राशि उस पक्षान्त की समाप्ति के पूर्व या पक्षान्त से 07 दिवस के भीतर भुगतान किये जाने की स्थिति में जमा की गई राशि पर मदिरा का प्रदाय अनुमत होगा एवं प्रदाय हेतु चालान की जमा दिनांक का कोई बंधन नहीं होगा ।
मदिरा दुकान लाइसेंसी द्वारा लाइसेंस अवधि के अंतिम पक्ष में दिनांक 25 मार्च , 2027 तक पोर्टल पर बनाई गई डिमांड के विरुद्ध दिनांक 27 मार्च, 2027 तक (अवकाश के दिनों को छोड़कर) ही प्रदाय दिया जायेगा । दिनांक 25 मार्च, 2027 के उपरांत पोर्टल पर नवीन डिमांड बनाई जाना प्रतिबंधित कर दिया जाएगा ।
आवश्यकता को देखते हुए, उन अनुज्ञप्तिधारियों को जो आगामी वर्ष 2027-28 में भी समान समूह/मदिरा दुकान में निरंतर रहेंगे, सहायक आबकारी आयुक्त/जिला आबकारी अधिकारी द्वारा प्रेषित मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 फरवरी 2026
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प्रस्ताव पर आबकारी आयुक्त केवल ऐसे मदिरा समूह /दुकान हेतु मदिरा का प्रदाय दिनांक 30 मार्च 2027 तक अनुमत कर सकेंगे ।
उन अनुज्ञप्तिधारियों को जो आगामी वर्ष अर्थात वर्ष 2027-28 में समान समूह/मदिरा दुकान में निरंतर नहीं रहेंगे , उन्हें सहायक आबकारी आयुक्त/जिला आबकारी अधिकारी द्वारा प्रेषित प्रस्ताव पर उनके विगत 03 पक्षों की प्रतिदन के औसत उठाव की राशि के आधार पर तत्समय मदिरा दुकान पर उपलब्ध स्कंध की राशि को उसमें से कम कर शेष राशि की डिमांड पर मदिरा का प्रदाय हेतु 30 मार्च तक वृद्धि की अनुमति आबकारी आयुक्त कर सकेंगे ।
12.11 . पक्षांत से 07 दिवस समाप्ति के उपरांत भी न्यूनतम प्रत्याभूत डयूटी राशि अवशेष रहने की स्थिति में, इस प्रकार के प्रथम डिफाल्ट पर तदानुसार अवशेष न्यूनतम प्रत्याभूत डयूटी राशि पर 01 प्रतिशत की राशि के समतुल्य डिफाल्टर राशि प्रभारित होगी । आगामी पक्षों में उक्त समूह के इसी स्वरूप के डिफाल्ट की पुनरावृत्ति होने पर, हर पुनरावृत्ति के साथ डिफाल्टर राशि की दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि होती जाएगी। उक्त डिफाल्टर राशि पर मदिरा का प्रदाय नहीं होगा तथा उक्त राशि न्यूनतम प्रत्याभूत डयूटी राशि में भी समायोजित नहीं होगी । उक्त डिफाल्टर राशि की वसूली उपरांत ही आगामी प्रदाय अनुमत होगा।
वर्ष के अंतिम पक्ष हेतु 31 मार्च की स्थिति में अवशेष न्यूनतम प्रत्याभूत डयूटी राशि पर डिफाल्टर राशि प्रभारित की जाएगी ।
12.12 . किसी मदिरा दुकान की उस पक्ष तक की देय शेष राशि उस पक्षान्त से 07 दिवस उपरान्त भुगतान किये जाने की स्थिति में प्रदाय अनुमत नहीं होगा एवं यह राशि नगद में समायोजित होगी। प्रदाय संबंधी यह प्रतिबंध संबंधित समूह के सम्बंधित वित्तीय वर्ष के प्रथम डिफाल्ट पर लागू नहीं होगा । उपरोक्तानुसार डिफाल्ट एक से अधिक बार होने की स्थिति में नगद में समायोजित राशि के विरूद्ध आबकारी आयुक्त द्वारा मदिरा प्रदाय की अनुमति दी जा सकेगी ।
नगद में समायोजित राशि के विरूद्ध मदिरा प्रदाय की अनुमति हेतु संदर्भित राशि के संबंधित पक्ष की समाप्ति से आगामी 01 माह की मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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अवधि में संबंधित लायसेंसी द्वारा जिला कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत करने पर जिला आबकारी अधिकारी द्वारा परीक्षण कर आवेदन दिनांक से 15 दिवस के अंदर प्रतिवेदन आबकारी आयुक्त, मध्यप्रदेश को अपने स्पष्ट अभिमत सहित अग्रेषित करना होगा । जिले से उक्त प्रतिवेदन प्राप्त होने के दिनांक से 01 माह के अंदर आबकारी आयुक्त द्वारा अनुमति देय या अदेय होने का निर्णय करना होगा । आबकारी आयुक्त द्वारा यह अनुमति सिर्फ तब ही दी जा सकेगी जब सम्बंधित मदिरा दुकान पर पिछले पक्ष तक की मदिरा उठाव हेतु कोई राशि शेष न हो । ऐसी विशेष अनुमत की गई राशि पर गत पक्ष तक सम्पूर्ण राशि जमा होने सम्बन्धी प्रतिबन्ध लागू नहीं होकर मदिरा प्रदाय अनुमत होगा।
12.13 . किसी समूह में सम्मिलित समस्त दुकानों की उस पक्ष तक की देय प्रगामी सम्पूर्ण राशि उस पक्षान्त से 07 दिवस तक आंशिक रूप से जमा किये जाने एवं ठीक आगामी पक्ष की समाप्ति से पूर्व पूर्ण रूप से जमा किये जाने की स्थिति में, पक्षान्त से 07 दिवस की अवधि में जमा की गई राशि प्रदाय योग्य होगी एवं प्रदाय हेतु चालान की जंमा दिनांक का कोई बंधन नही होगा ।
12.14 . किसी समूह में सम्मिलित समस्त दुकानों की उस पक्ष तक की देय प्रगामी सम्पूर्ण राशि उस पक्षान्त से 07 दिवस तक पूर्ण जमा न किये जाने की स्थिति में संबंधित जिले के सहायक आबकारी आयुक्त/जिला आबकारी अधिकारी द्वारा दिये गये नोटिस के अनुक्रम में, उक्त लायसेंसी के उत्तरदायित्व पर नियमानुसार आगामी कार्यवाही करेंगे एवं राशि जमा न होने की स्थिति में आगामी पक्ष के अंत तक लायसेंस निरस्तीकरण किया जा सकेगा। यदि अवशेष न्यूनतम प्रत्याभूत डयूटी राशि लायसेंस निरस्तीकरण के पूर्व सम्पूर्ण जमा हो जाती है तो लायसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही स्वतः समाप्त हो जावेगी।
12.15 . लायसेंस निरस्तीकृत वाले समूह का पुनर्निष्पादन, टेण्डर लाईव होने के पूर्व लायसेंसी द्वारा उसकी सम्पूर्ण अवशेष न्यूनतम प्रत्याभूत डयूटी राशि जमा कराई जाकर एवं शेष सम्पूर्ण वित्तीय वर्ष की अवधि हेतु अवशेष न्यूनतम प्रत्याभूत डयूटी राशि के 01 प्रतिशत राशि के मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 फरवरी 2026
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समतुल्य डिफाल्टर राशि का भुगतान करने पर अनुज्ञापन प्राधिकारी द्वारा उक्त लायसेंस के संचालन को पूर्ववत अनुमत किया जा सकेगा। इस दौरान यदि किसी अवधि के लिए लायसेंसी दुकान के संचालन से वंचित रहता है , तो वह अवधि वार्षिक लायसेंस फीस , न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी की राशि अथवा अन्य किसी भी रूप में छूट हेतु मान्य नहीं होगी ।
12.16 . प्रशासनिक कारणों से एवं भविष्य में मदिरा दुकानों के पुनर्निष्पादन की आशंका कम किये जाने के दृष्टिकोण से, राजस्व हित में मदिरा दुकानों का संचालन वर्तमान लायसेंसी द्वारा किया जा सके, ऐसे प्रकरणों में स्थानीय परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में शासन राजस्व को सुरक्षित रखने हेतु पाक्षिक प्रदाय संबंधी बन्धनों से छूट देने हेतु आबकारी आयुक्त, मध्यप्रदेश अधिकृत होंगे ।
12.17. देशी/विदेशी मदिरा भाण्डागार से एक ही लायसेंसी की समान मार्ग पर स्थित मदिरा दुकानों के एक से अधिक परमिट को एक ही वाहन पर प्रदाय किया जा सकेगा ।
12.18. जनरल क्लाजेज एक्ट (साधारण खण्ड अधिनियम) की धारा 7 के अनुसार, यदि मध्यप्रदेश में लागू किसी अधिनियम के अन्तर्गत किसी कार्य को करने के लिए कोई निश्चित तिथि या अवधि के अन्तिम दिवस में कार्यालय बन्द हो और यदि उसके अगले कार्यकारी दिवस में वह कार्य किया जाता है तो, उस कार्य को समय पर किया जाना माना जाएगा । तदनुसार यदि पक्ष के अन्तिम दिवस /दिवसों में निगोशियेबल इन्स्ट्रूमेन्ट एक्ट के अन्तर्गत घोषित अवकाश में बैंक बन्द रहता है, जिसके कारण पक्ष के अन्तिम कार्यकारी दिवस में न्यूनतम प्रत्याभूत इयूटी की राशि जमा न की जाकर उसके बाद आने वाले कार्यकारी दिवस में जमा की जाती है, तो ऐसी जमा न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी की राशि को पूर्ववर्ती पक्ष में जमा न्यूनतम प्रत्याभूत इयूटी की राशि मानकर कार्यवाही की जायेगी।
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13. मदिरा का उठाव: -
13.1 . मदिरा के फुटकर लायसेंसी को उसकी मदिरा दुकान के लिए प्रत्येक त्रैमास हेतु निर्धारित न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी राशि के विरूद्ध 85 प्रतिशत ड्यूटी राशि ( BIO मदिरा की समायोजन योग्य बोतल फीस की राशि सम्मिलित) की देशी/विदेशी मदिरा का प्रदाय लिया जाना अनिवार्य होगा अर्थात् उसे अधिकतम 15 % की सीमा तक ही ड्यूटी राशि नगद में समायोजन कराने की अनुमति होगी ।
13.2 . प्रत्येक त्रैमास की समाप्ति पर इसका परीक्षण कर निर्धारित 85 प्रतिशत राशि की सीमा से कम राशि की मदिरा का उठाव किये जाने की स्थिति में निम्नानुसार शास्ति की गणना एवं कार्यवाही की जायेगी :-
13.2.1. त्रैमास हेतु निर्धारित से कम उठाव यथा 85 प्रतिशत से कम किन्तु 75 प्रतिशत तक उठाव की स्थिति में 85 % से कम उठाव की परिगणित न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी की राशि पर 2.5 प्रतिशत की शास्तिका भुगतान करना होगा ।
13.2.2. 75 प्रतिशत से कम तथा 65 प्रतिशत तक उठाव की स्थिति में प्रति प्रतिशत कम उठाव पर कण्डिका 13.2.1 अनुसार देय 2.5 प्रतिशत शास्ति के साथ- साथ, 75% से कम उठाव पर परिगणित न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी की राशि पर प्रति 1 % पर 0.1 % की वृद्धि करते हुए अतिरिक्त शास्ति का भुगतान करना होगा। उठाव का प्रतिशत 1 के गुणांक में न होने पर, उसे निम्नोत्तर 1 के गुणांक में मान्य कर, शास्ति की दर निर्धारित की जायेगी ।
उदाहरण : - मदिरा दुकान की त्रैमास हेतु निर्धारित कुल न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी राशि 10 करोड़ होने एवं कुल राशि 6.9 करोड़ (69 % ) ड्यूटी राशि का उठाव किये जाने पर, कण्डिका 13.2.1 अनुसार 85% से कम राशि रूपए 1.6 करोड़ ( 8.5-6.9 ) पर 2.5 % की दर से शास्ति राशि 4 लाख परिगणित होगी , तदुपरांत कण्डिका 13.2.2 अनुसार 75 % से कम राशि रूपए 60 लाख (7.5-6.9 करोड़) पर 6 * 0.1 = 0.6 % ( 75 %-69 % = 6 % ) की दर से दर से अतरिक्त 90(23 )
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शास्ति राशि रूपए 36,000 परिगणित होगी । इस प्रकार कुल शास्ति राशि रूपए 4.36 लाख परिगणित होगी।
13.2.3. इसी प्रकार 65 प्रतिशत से कम उठाव की स्थिति में प्रति प्रतिशत कम उठाव पर कण्डिका 13.2.2 अनुसार देय कुल शास्ति के साथ - साथ , 65 % से कम उठाव पर परिगणित न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी की राशि पर प्रति 1 % पर 0.2 % की वृद्धि करते हुए अतिरिक्त शास्ति का भुगतान करना होगा। उठाव का प्रतिशत 1 के गुणांक में न होने पर, उसे निम्नोत्तर 1 के गुणांक में मान्य कर, शास्ति की दर निर्धारित की जायेगी ।
उदाहरण : - मदिरा दुकान की त्रैमास हेतु निर्धारित कुल न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी राशि 10 करोड़ होने एवं कुल राशि 5.6 करोड़ (56% ) ड्यूटी राशि का उठाव किये जाने पर , कण्डिका 13.2.1 अनुसार 85 % से कम राशि रूपए 2.9 करोड़ ( 8.5-5.6 ) पर 2.5 % की दर से शास्ति राशि 7.25 लाख परिगणित होगी, तदुपरांत कण्डिका 13.2.2 अनुसार 75 % से 65% की राशि रूपए 1 करोड़ (7.5-6.5 करोड़) पर 10 * 0.1 = 1 % ( 75 % -65 % = 10 %) की दर से अतरिक्त शास्ति राशि रूपए 1 लाख परिगणित होगी , तदुपरांत कण्डिका 13.2.3 अनुसार 65 % से कम राशि रूपए 90 लाख ( 6.5- 5.6 करोड़) पर 9 * 0.2 = 1.8 % ( 65 % -56 % = 9 % ) की दर से अतिरिक्त शास्ति राशि रूपए 1.62 लाख परिगणित होगी । इस प्रकार कुल शास्ति राशि रूपए 9.87 लाख (7.25 + 1 + 1.62) परिगणित होगी ।
13.3. प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय त्रैमास से सम्बंधित शास्ति की राशि जिला कार्यालय स्तर से त्रैमास की समाप्ति से अधितकम 15 दिवस में अधिरोपित की जाएगी , जिसे लाइसेंसी द्वारा आगामी 15 दिन के अंदर जमा करना अनिवार्य होगा ।
13.4. वर्ष हेतु निर्धारित सम्पूर्ण न्यूनतम प्रत्याभूत डयूटी राशि के विरूद्ध मदिरा के उठाव का दिनांक 27 मार्च तक अथवा उसके पूर्व परीक्षण किया जाकर उस अवधि में 85 प्रतिशत उठाव किये जाने की स्थिति में पूर्व में जमा शास्ति की राशि अवशेष न्यूनतम प्रत्याभूत राशि की मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 फरवरी 2026
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मांग के विरुद्ध समायोजित की जाएगी । इस प्रकार समायोजित राशि पर मदिरा का प्रदाय अनुमत होगा परन्तु कण्डिका 12.10 के प्रतिबंध के अधीन ही होगा । पूर्व में जमा शास्ति की राशि की वापसी अनुमत नहीं होगी।
14. मदिरा दुकानों से विक्रय योग्य मदिरा का स्वरूप : -
14.1 . मदिरा की फुटकर बिक्री की दुकानों का प्रत्येक अनुज्ञप्तिधारी केवल बोतल बन्द देशी मदिरा , भारत में निर्मित एवं बोतल बंद विदेशी मदिरा (स्पिरिट , वाईन, हेरिटेज मदिरा एवं बीयर) एवं विदेश में निर्मित एवं मूल में बोतल बंद ( Bottled in Origin ) आयातित विदेशी मदिरा (स्पिरिट, वाईन एवं बीयर) का ही संग्रह एवं विक्रय , अनुज्ञप्त दुकान से कर सकेगा ।
14.2 . आबकारी आयुक्त द्वारा किसी क्षेत्र विशेष/मदिरा दुकान/दुकानों हेतु ऐसे विदेशी मदिरा एवं बीयर के ब्राण्ड्स की सूची निर्धारित की जा सकेगी , जिसका स्कंध विक्रय हेतु रखना संबंधित फुटकर विक्रेता को अनिवार्य होगा ।
15. आवेदक जो मादक द्रव्यों की अनुज्ञप्ति हेतु अयोग्य रहेंगे : -
ऐसे आवेदक (आवेदक से तात्पर्य व्यक्ति, सोल प्रोपराइटर, लिमिटेड लायबिलटी पार्टनरशिप, पार्टनरशिप फर्म, कंपनी अथवा कन्सॉर्टियम है) , मादक द्रव्यों की अनुज्ञप्ति हेतु अयोग्य रहेंगे :-
15.1 . कोई भी व्यक्ति, जो 21 वर्ष से कम आयु का हो।
15.2 . कोई भी व्यक्ति/फर्म/ कम्पनी/फर्म का भागीदार/लिमिटेड लायबिलटी पार्टनरशिप का भागीदार/कन्सॉर्टियम का संचालक जो स्वतः अथवा जमानतदार की हैसियत से आबकारी विभाग की किसी राशि का बकायादार हो ।
15.3 . वर्ष 2025-26 का अनुज्ञप्तिधारी जिसके द्वारा उसके लायसेंस की माह जनवरी 2026 के द्वितीय पक्षांत तक की संपूर्ण देय वार्षिक न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी की राशि न चुकाई गई हो।
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15.4. वर्ष 2025-26 का अनुज्ञप्तिधारी, जिसकी निजी स्वामित्व की अथवा फर्म के भागीदार , कंपनी के संचालक/ शेयर होल्डर के रूप में आंशिक स्वामित्व की एक भी मदिरा दुकान/समूह की अनुज्ञप्ति के निरस्तीकरण अथवा पुनर्निष्पादन के आदेश राज्य के किसी भी जिले में किये गये हों, वह मध्यप्रदेश के किसी भी जिले में संचालित मदिरा दुकान/समूह के लिये किसी भी रीति से निष्पादन/पुनर्निष्पादन की कार्यवाही में भाग लेने के लिये अपात्र होगा ।
15.5 . राजस्व संबंधी तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन या Trademarks Act, 1999 या भारतीय न्याय संहिता, 2023 (क्रमांक 45 सन् 2023 ) की धाराओं 345 से 350, एवं 178 से 188 के अधीन या नारकोटिक्स ड्रग्स एण्ड साइकोट्रोपिकसब्सटेंसेस अधिनियम, 1985 अथवा इन अधिनियमों के अन्तर्गत बनाये गये नियमों के गंभीर उल्लंघन करने का दोषी रहा हो और ऐसे अपराधों के लिए किसी दांडिक न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध ठहराया गया हो।
15.6. कोई भी व्यक्ति जो मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 34 (2 ) एवं धारा 49 (क) के तहत दोषी रहा हो तथा उसे न्यूनतम 01 वर्ष की सजा हुई हो।
15.7. यदि निष्पादित मदिरा दुकानों की अनुज्ञप्ति की संचालन अवधि के दौरान कण्डिका 15.5 व 15.6 की अनर्हता पैदा होती है तो वह मदिरा दुकानों के संचालन हेतु पात्र नहीं रहेगा। परन्तु ऐसी स्थिति में संबंधित मदिरा दुकान का अंतरण (हस्तांतरण) नियमों के सुसंगत प्रावधानों के अन्तर्गत किसी पात्र व्यक्ति के पक्ष में निर्धारित अंतरण फीस जमा करायी जाकर किया जा सकेगा ।
16. ड्यूटी दरें : -
वर्ष 2026-27 हेतु देशी/विदेशी मदिरा हेतु ड्यूटी की दरें निम्नानुसार हैं: - 16.1 . देशी मदिरा ड्यूटी दर : -
वर्ष 2025-26 के समान ही वर्ष 2026-27 में समस्त प्रकार की देशी मदिरा पर ड्यूटी दर एक समान रुपये 385/- प्रति प्रूफ लीटर रहेगी ।
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16.2 . विदेशी मदिरा ड्यूटी दरें : -
16.2.1. वर्ष 2026-27 में विदेशी मदिरा की डयूटी दरें EDP
आधारित Ad - Valorem रखी जायेंगी । इस व्यवस्था में विदेशी मदिरा
की घोषित EDP अनुसार स्लैब में EDP के निर्धारित प्रतिशत पर
डयूटी परिगणित की जाएगी । सभी विदेशी मदिराओं पर उसके
पिछले स्लैब की उच्चतम डयूटी + पिछले स्लैब से अंतर की EDP
पर निर्धारित प्रतिशत से डयूटी परिगणित कर प्रभारित की जाएगी ।
अ) विदेशी मदिरा की प्रति पेटी में कुल मदिरा की मात्रा 6.75 प्रूफ
लीटर होने की स्थिति में घोषित EDP अनुसार Ad - valorem
आधारित डयूटी की गणना निम्नानुसार होगी : -
क्र. EDP (प्रतिपेटी) पिछले स्लैब की अधिकतम
ड्यूटी + पिछले स्लैब से अंतर
पर प्रभारित ड्यूटी %
1 900 तक 370%
2 900 से अधिक एवं 1000 तक 360%
3 1000 से अधिक एवं 1100 तक 350%
4 1100 से अधिक एवं 1200 तक 340%
5 1200 से अधिक एवं 1500 तक 310%
6 1500 से अधिक एवं 1800 तक 280%
7 1800 से अधिक एवं 2400 तक 240%
8 2400 से अधिक एवं 3200 तक 200%
9 3200 से अधिक एवं 4500 तक 160%
10 4500 से अधिक एवं 6000 तक 120%
11 6000 से अधिक एवं 8000 तक 80%
12 8000 से अधिक 50%
ब) विदेशी मदिरा की प्रति पेटी में कुल मदिरा की मात्रा 6.75 प्रूफ लीटर से भिन्न होने की स्थिति में घोषित EDP से कण्डिका ( अ) में उल्लेखित तालिका अनुसार Ad- valorem आधारित परिगणित राशि को पेटी में उपलब्ध कुल प्रूफ लीटर अनुसार 6.75 से मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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समानुपातिक रूप से एडजस्ट (समायोजित) किया जाकर, ड्यूटी राशि की गणना की जाएगी ।
उक्त तालिका अनुसार डयूटी की गणना के उदाहरण निम्नानुसार है : -
उदाहरण-1: 850/- रूपये EDP होने की स्थिति में, स्लैब में निर्धारित 370% की दर से कुल डयूटी राशि रूपये 3,145/- ( 850x3.7) परिगणित होगी ।
उदाहरण-2: 960/- रूपये EDP होने की स्थिति में, पिछले स्लैब की निर्धारित 370 % की दर से डयूटी राशि रूपये 3,330/- (900x3.7) एवं पिछले स्लैब से अतिरिक्त राशि रूपये 60/- (960-900 ) पर वर्तमान स्लैब की निर्धारित डयूटी 360 % के आधार पर अतिरिक्त 216/- रूपये (60x3.6) जोड़ा जाकर, इस प्रकार कुल डयूटी राशि रूपये 3,546/- परिगणित होगी ।
उदाहरण-3 : 2,000/- रूपये EDP होने की स्थिति में, पिछले स्लैब तक की अधिकतम डयूटी राशि रूपये 6,150/- (3330 + 360 + 350 + 340 + 930 + 840) एवं पिछले स्लैब से अतिरिक्त राशि रूपये 200/- पर वर्तमान स्लैब की निर्धारित डयूटी 240 % के आधार पर अतिरिक्त 480/- रूपये ( 200x2.4) जोड़ा जाकर, इस प्रकार कुल डयूटी राशि रूपये 6,630/ - परिगणित होगी ।
उदहारण 4 : विदेशी मदिरा की घोषित EDP रूपये 2,000/ - की पेटी में कुल मदिरा की मात्रा 5.91 प्रूफ लीटर होने की स्थिति में उक्त तालिका के स्लैब अनुसार परिगणित ड्यूटी राशि ( रूपये 6,630/- ) को पेटी में उपलब्ध कुल प्रूफ लीटर अनुसार, 6.75 से समानुपातिक रूप ( ( 5.91 /6.75 ) * 6630 ) से एडजस्ट (समायोजित) किया जाकर , ड्यूटी राशि रूपए 5804.9 /- परिगणित होगी ।
16.2.2. वर्ष 2026-27 के लिये मदिरा दुकानों से मानक सीलबन्द बोतल/केन 650 मि.ली. , 500 मि.ली. एवं 330 मि.ली. (समकक्ष) में विक्रय की जाने वाली बीयर एवं ड्राफ्ट बीयर पर ड्यूटी प्रति पेटी घोषित एक्स विदेशी मदिरा भाण्डागार प्रदाय दर का 130 प्रतिशत रहेगी ।
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16.2.3 . कैग में दी जाने वाली ड्राफ्ट बीयर पर ड्यूटी 80 /- रूपये प्रति बल्क लीटर यथावत रहेगी ।
16.2.4. वाईन (विदेशी मदिरा) पर ड्यूटी दर 600/- रूपये प्रति प्रूफ लीटर होगी । मध्यप्रदेश राज्य में कृषकों द्वारा उत्पादित अंगूर का उपयोग कर, मध्यप्रदेश में निर्मित वाईन पर ड्यूटी दर पूर्ववत शून्य रहेगी ।
16.2.5. Low Alcoholic Beverage (रेडी टू ड्रिंक) पेयः- 10 प्रतिशत (V/V) तक एल्कोहल शक्ति वाले ऐसे Low Alcoholic Beverage (रेडी टू ड्रिंक) पेय की EDP (प्रतिकेस अधिकतम 9.0 बल्कलीटर तक) न्यूनतम रूपये 700/- से कम नहीं रखी जाएगी एवं ऐसी रेडी टू ड्रिंक मदिरा पर ड्यूटी 750/- रूपये प्रति प्रूफ लीटर की दर से प्रभारित की जाएगी ।
निर्यात हेतु Low Alcoholic Beverage (रेडी टू ड्रिंक) में एल्कोहल की मात्रा की अधिकतम सीमा को आबकारी आयुक्त द्वारा शिथिल किया जा सकेगा ।
16.2.6. रक्षा सेवाओं को प्रदाय की जाने वाली भारत निर्मित विदेशी मदिरा पर देय ड्यूटी, सिविलियन्स के लिये देय ड्यूटी की, रम के लिये 30 प्रतिशत तथा अन्य विदेशी मदिरा (स्पिरिट , वाईन एवं बीयर) के लिये 45 प्रतिशत रहेगी ।
16.3 . मध्यप्रदेश में विक्रय हेतु 15,000/- रूपये से अधिक EDP ( 12 बोतल हेतु) वाली मदिरा की एक पेटी में 06 बोतल की पैकेजिंग भी अनुमत होगा।
16.4. समस्त प्रकार की विदेशी मदिरा में बोतल की समान धारिता के लिए पेटी में सिर्फ एक ही प्रकार की पैकेजिंग संख्या (एक पेटी में नग की संख्या) अनुमत होगी ।
16.5. मध्यप्रदेश में विक्रय हेतु न्यूनतम 7,000/- रूपये प्रति बोतल एवं उससे अधिक MSP वाली मदिरा के लिए विदेशी मदिरा मद्यभाण्डागार से प्रदाय की इकाई बोतल भी हो सकेगी।
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17. EDP का निर्धारण : -
17.1 . प्रदेश में विदेशी मदिरा की प्रचलित विक्रय दरों को युक्तियुक्त करने के उद्देश्य से विदेशी मदिरा (IMFL ) की समस्त श्रेणियों ( स्पिरिट, बीयर, वाईन एवं रेडी टू ड्रिंक्स) के लिए मदिरा विनिर्माताओं को उस ब्राण्ड/लेबिल हेतु प्रदेश के सभी सीमावर्ती राज्यों में घोषित न्यूनतम EDP से 10 प्रतिशत अधिक की सीमा तक ही EDP घोषित करने की अनुमतिहोगी ।
17.2 . प्रदेश में BIO मदिरा की प्रचलित विक्रय दरों को युक्तियुक्त करने के उद्देश्य से BIO मदिरा की समस्त श्रेणियों ( स्पिरिट, बीयर, वाईन एवं रेडी टू ड्रिंक्स) के लिए मदिरा विनिर्माताओं/ आयातकर्ता ईकाइयों द्वारा उस ब्राण्ड/लेबिल की Assessable Value/CIF ( Cost, Insurance & Freight) दर, कस्टम ड्यूटी एवं कस्टम बांड हैंडलिंग चार्जेज ( आयातकर्ता मार्जिन सम्मिलित) घोषित की जाएँगी, आगामी सन्दर्भों में उक्त दरों के योग को एक्स कस्टम बांड ( ECB ) दर कहा जाएगा। मध्यप्रदेश हेतु एक्स कस्टम बांड दर ( ECB ) प्रदेश के सभी सीमावर्ती राज्यों में घोषित समान घटकों के योग से 10 प्रतिशत अधिक की सीमा तक ही घोषित करने की अनुमति होगी । उक्त एक्स कस्टम बांड ( ECB ) दर में सम्बंधित ब्राण्ड/लेबिल की बोतल फीस (कण्डिका 18 अनुसार) एवं आयात फीस को जोड़कर EDP की गणना होगी ।
17.3 . वर्ष 2026-27 हेतु विनिर्माताओं/आयातकर्ता ईकाइयों द्वारा कण्डिका 17.1 अथवा 17.2 में उल्लेखित बंधनों के अंतर्गत घोषित EDP स्वतः मान्य होगी । ई - आबकारी पोर्टल पर EDP की घोषणा करने हेतु विस्तृत प्रक्रिया एवं निर्देश आबकारी आयुक्त द्वारा जारी किये जायेंगे ।
17.4. किसी विनिर्माता द्वारा विदेशी मदिरा (IMFL/ BIO) की प्रदेश में EDP घोषित करने के उपरांत, किसी निकटवर्ती राज्य में कण्डिका क्रमांक 17.1 एवं 17.2 में उल्लेखित सीमा से कम की EDP तय होती है, तो उस विनिर्माता द्वारा प्रदेश में भी अपनी EDP की पुनः घोषणा करना अनिवार्य होगा । ऐसा न करने पर भी कण्डिका 17.5 अनुसार कार्यवाही की जाएगी ।
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17.5 . EDP घोषणा में किसी विनिर्माता/ आयातकर्ता इकाई द्वारा त्रुटिपूर्ण जानकारी प्रस्तुत किये जाने अथवा जानकारी छुपाने की स्थिति में सम्बंधित लेबल/ब्रांड का पंजीयन निरस्त किया जाएगा एवं ऐसे प्रकरण पर 2 लाख रूपए तक की शास्ति अधिरोपित की जा सकेगी।
17.6. विदेशी मदिरा विनिर्माणी (एफ.एल.-9, एफ.एल.-9 - ए, बी-3 , 9- एऑफ बी-3 ) बाहरी निर्माता केन्द्रीय भाण्डागार (एफ.एल. - 10 - ए) , लायसेंसी एवं मूल में बोतल बन्द आयातित विदेशी मदिरा के लिए केन्द्रीय गोदाम (एफ.एल. - 10 - बी) लायसेंसी के उनके विदेशी मदिरा स्पिरिट यथा व्हिस्की, रम, ब्राण्डी, वोदका, जिन तथा वाईन , रेडी टू ड्रिंक ( Low Alcoholic Beverages ) पेय व बीयर आदि उत्पादों की घोषित की गई प्रतिपेटी एक्स विदेशी मदिरा भाण्डागार प्रदाय दरों की घोषणा से 6 माह की अवधि में परिवर्तन का कोई आवेदन मान्य नहीं होगा।
आवेदक/विनिर्माता ईकाई के आवेदन पत्र में उल्लेखित तथ्यों/ कारणों पर विचारोपरांत आबकारी आयुक्त द्वारा इस अवधि के पूर्व भी EDP परिवर्तन हेतु अनुमति दी जा सकेगी। ऐसे प्रत्येक आवेदन में 10,000/- रूपये प्रति लेबल/ब्राण्ड आवेदन शुल्क प्रभारित किया जाएगा, जो कि किसी भी रूप में वापसी योग्य नहीं होगा।
18. आयातित विदेशी मदिरा ( BIO) पर चुकाई जाने वाली बोतल फीस का निर्धारण एवं उसके समायोजन की व्यवस्था: -
18.1 . वर्ष 2026-27 में BIO स्पिरिट मदिरा पर बोतल फीस की राशि एक्स कस्टम बांड दर ( ECB ) पर Ad - valorem रूप से प्रभारित होगी , जिसमे घोषित एक्स कस्टम बांड ( ECB ) दर अनुसार स्लैब में निर्धारित प्रतिशत पर बोतल फीस परिगणित की जाएगी । स्लैब अनुसार पिछले स्लैब की उच्चतम राशि + स्लैब की न्यूनतम राशि से एक्स कस्टम बांड की अंतर की राशि पर निर्धारित प्रतिशत से बोतल फीस परिगणित की जाएगी । BIO स्पिरिट मदिरा की बोतल फीस हेतु स्लैब एवं Ad - Valorem दर निम्नानुसार होंगी: - मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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एक्स कस्टम बांड दर ( ECB )
क्र .
एक्स कस्टम बांड दर ( ECB ) अनुसार पिछले स्लैब की अधिकतम राशि + पिछले स्लैब से अंतर पर प्रभारित बोतल फीस का %
40%
1 20,000 तक
30%
2 20,001 से 40,000 तक
20%
3 40,001 से 60,000 तक
10%
4 60,000 से अधिक
18.2 . BIO बीयर मदिरा पर बोतल फीस की राशि Ad - valorem आधारित एक्स कस्टम बांड दर ( ECB ) पर 20% की दर से प्रभारित होगी।
18.3. BIO वाईन मदिरा पर बोतल फीस की राशि Ad - valorem आधारित एक्स कस्टम बांड दर ( ECB ) पर 7% की दर से प्रभारित होगी ।
18.4. फुटकर मदिरा दुकान लाइसेंसी द्वारा BIO मदिरा की किसी भी श्रेणी (स्पिरिट, बीयर , वाईन एवं रेडी टू ड्रिंक्स) का उठाव किये जाने पर सम्बंधित लेबल/ब्रांड पर उक्तानुसार कण्डिका 18.1 , 18.2 एवं 18.3 अनुसार परिगणित बोतल फीस की राशि में से 80 % राशि का न्यूनतम प्रत्याभूत डयूटी राशि में समायोजन अनुमत होगा।
19. संचालन एवं व्यवस्थापन व्यय का निर्धारण : -
लायसेंस अवधि वर्ष 2026-27 हेतु देशी मदिरा, विदेशी मदिरा (स्पिरिट, बीयर , वाईन एवं रेडी टू ड्रिंक्स) तथा BIO हेतु व्यवस्थापन एवं संचालन व्यय निम्नानुसार रहेगा: -
19.1 . देशी मदिरा हेतु संचालन एवं व्यवस्थापन व्यय 35 प्रतिशत परिगणित कर निर्धारण किया जायेगा ।
19.2
. विदशी मदिरा (स्पिरिट , वाईन एवं रेडी टू ड्रिंक्स) एवं BIO (बीयर छोड़कर) हेतु संचालन एवं व्यवस्थापन व्यय प्रति पेटी EDP 1500 तक 30 % , 1501 से 8000 तक 25 % एवं 8000 से अधिक पर 22 % परिगणित कर निर्धारण किया जायेगा ।
19.3 . वर्ष 2026-27 में विदेशी मदिरा (बीयर एवं BIO बीयर) हेतु संचालन एवं व्यवस्थापन व्यय 45 % परिगणित कर निर्धारण किया जायेगा।
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20. MSP एवं MRP के निर्धारण की प्रक्रिया एवं मुद्रण/अंकन: -
राज्य शासन द्वारा नापतौल विभाग की अपेक्षाओं के अनुरूप अधिकतम फुटकर विक्रय मूल्य ( MRP) एवं न्यूनतम फुटकर विक्रय मूल्य ( MSP) का निर्धारण निम्नानुसार किया जाएगा : -
20.1 . देशी मदिरा हेतु: -
वर्ष 2026-27 के लिए देशी मदिरा मसाला 25 डिग्री यूपी, 35 डिग्री यूपी , प्लेन 50 डिग्री यूपी एवं 60 डिग्री यूपी मदिरा की न्यूनतम एवं अधिकतम विक्रय दरों का निर्धारण निम्न आधार पर लागत राशियों को जोड़ते हुये किया जायेगा: -
1. घोषित/मान्य प्रति पेटी एक्स डिस्टलरी प्रदाय दर विनिर्माता इकाई द्वारा प्रस्तुत
2. प्रति पेटी निर्धारित आबकारी डयूटी
3. वार्षिक लायसेंस फीस (ड्यूटी की राशि का 5.263 प्रतिशत)
4. व्यवस्थापन/संचालन व्यय (उपरोक्त क्रमांक 1 , 2, 3 के योग का 35%)
उपरोक्तानुसार क्रमांक 1 से 4 तक के योग को पेटी में नगों की संख्या से विभाजित कर आगामी रूपये 1 /- के गुणांक में परिगणित कर देशी मदिरा की प्रत्येक किस्म एवं धारिता की बोतल के न्यूनतम फुटकर विक्रय मूल्य ( MSP ) का निर्धारण किया जायेगा ।
20.2 . विदेशी मदिरा हेतु: -
वर्ष 2026-27 के लिए विदेशी मदिरा (स्पिरिट , वाईन एवं बीयर) की न्यूनतम एवं अधिकतम विक्रय दरों का निर्धारण निम्न आधार पर लागत राशियों को जोड़ते हुये किया जाएगा : -
1. घोषित/मान्य प्रति पेटी एक्स विदेशी मदिरा भाण्डागार प्रदाय दर, विनिर्माता इकाई द्वारा प्रस्तुत ।
2. प्रति पेटी निर्धारित आबकारी डयूटी (Ad - valorem स्लैब अनुसार) 3. वार्षिक लायसेंस फीस (ड्यूटी की राशि का 5.263 प्रतिशत)
4. परिवहन शुल्क (एक्स विदेशी मदिरा गोदाम कीमत का 8 प्रतिशत) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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5. व्यवस्थापन/संचालन व्यय (उपरोक्त क्रमांक 1 से 4 तक के योग पर स्पिरिट, वाईन एवं रेडी टू ड्रिंक्स में प्रति पेटी EDP के आधार पर 30 % से 22 % एवं बीयर में 45% कण्डिका 19.2 एवं 19.3 अनुसार)
उपरोक्तानुसार क्रमांक 1 से 5 तक के योग को पेटी में नगों की संख्या से विभाजित कर आगामी रूपये 1 /- के गुणांक में परिगणित कर विदेशी मदिरा (स्पिरिट , वाईन तथा बीयर ) की प्रत्येक किस्म एवं धारिता की बोतल के न्यूनतम फुटकर विक्रय मूल्य ( MSP ) का निर्धारण किया जायेगा।
20.3 . देशी मदिरा एवं विदेशी मदिरा (स्पिरिट , वाईन तथा बीयर) की प्रत्येक किस्म एवं धारिता की बोतल के परिगणित एवं निर्धारित न्यूनतम फुटकर विक्रय मूल्य ( MSP ) में 15 प्रतिशत की वृद्धि की जाकर उसका अधिकतम विक्रय मूल्य ( MRP ) परिगणित एवं निर्धारित किया जायेगा । MRP को रूपये 1 /- के उच्चतर गुणांक में रखा जायेगा। BIO मदिरा हेतु MRP का निर्धारण 10 / - रूपये के आगामी गुणांक में किया जाएगा । MRP में 10 % वैट शामिल है, यह अंकित किया जायेगा ।
20.4. विदेशी मदिरा (स्पिरिट) की 180 एम.एल. धारिता की बोतल का न्यूनतम फुटकर विक्रय मूल्य ( MSP) तथा देशी मदिरा मसाला ( 25 डिग्री यूपी) की 180 एम.एल. धारिता वाली पैट की बोतल के न्यूनतम फुटकर विक्रय मूल्य ( MSP ) के बीच का अंतर न्यूनतम रूपये 15/- रखा जायेगा ।
21. न्यूनतम एवं अधिकतम विक्रय दरों का पालन : -
21.1 . मदिरा की फुटकर बिक्री की दुकान का लायसेंसी न्यूनतम फुटकर विक्रय मूल्य ( MSP ) एवं अधिकतम फुटकर विक्रय मूल्य ( MRP) अथवा उस के बीच की कोई राशि, विक्रय दर के रूप में उपभोक्ता से वसूल कर सकेगा।
21.2. निर्धारित न्यूनतम विक्रय मूल्य ( MSP) से कम मूल्य पर एवं निर्धारित अधिकतम विक्रय मूल्य ( MRP ) से अधिक मूल्य पर मदिरा का विक्रय मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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किया जाना, गंभीर अनियमितता मानकर निम्नानुसार शास्ति की राशि आरोपित की जायेगी: -
क्र. अनियमितता की आवृति
प्रकरण दिनांक को निम्नानुसार देय न्यूनतम प्रत्याभूत डयूटी राशि के समतुल्य राशि, दण्ड के रूप में आरोपित की जायेगी।
1 प्रथम बार
01 दिवस हेतु देय
द्वितीय बार
2
1.5 दिवस हेतु देय
02दिवस हेतु देय
3 तृतीय बार
2.5 दिवस हेतु देय
चतुर्थबार
4
पंचम बार
5
03 दिवस हेतु देय
21.3 . एक ही दुकान में 05 बार से अधिक उल्लघंन होने पर उसका लायसेंस निरस्त किया जा सकेगा ।
21.4 . वर्ष की शेष अवधि के लिये लायसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही के फलस्वरूप , यदि ऐसी मदिरा दुकान किसी समूह में सम्मिलित है, तो उक्त समूह की समस्त मदिरा दुकानों का लायसेंस भी वर्ष की शेष अवधिके लिये निरस्त किया जायेगा । ऐसी स्थिति में जमा सम्पूर्ण राशि जप्त की जाएगी और डिफाल्टर लाइसेंसी के उत्तरदायित्व पर मदिरा समूह के पुनर्निष्पादन की नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी । पुनर्निष्पादन के फलस्वरुप जो भी खिसारा आयेगा उसकी वसूली संबंधित डिफाल्टर से भू- राजस्व के बकाया की भांति की जायेगी ।
22. देशी मदिरा प्रदाय व्यवस्था: -
22.1 . वर्ष 2026-27 के लिए देशी मदिरा प्रदाय व्यवस्था हेतु 01 वर्ष के लिये निविदा पारदर्शी रूप से प्रदेश के आसवकों के मध्य जिलेवार ई- टेण्डर के माध्यम से बुलाई जाएगी ।
22.2. देशी मदिरा प्रदाय क्षेत्र आवंटन हेतु जिलेवार प्रतिभूति के स्थान पर इकाई को आंवटित क्षेत्रों की कुल राशि की एक समेकित प्रतिभूति भी ली जा सकेगी ।
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देशी मदिरा प्रदाय व्यवस्था हेतु विस्तृत निविदा प्रक्रिया एवं शर्तों कानिर्धारण आबकारी आयुक्त द्वारा शासन अनुमोदन से किया जाएगा।
22.3 . आसवकों को वर्ष 2026-27 हेतु उन्हें आवंटित प्रदाय क्षेत्रों में समान शर्तों एवं दरों पर वर्षांत के उपरांत आगामी 06 माहों के लिए प्रदाय जारी रखने हेतु आदेशित किया जा सकेगा, जिसे पुनः 6 माह बढाया जासकेगा, जो उनके लिए बंधनकारी होगा ।
22.4. वर्ष 2026-27 से देशी मदिरा की दो किस्में मसाला (25 डिग्री यूपी) , प्लेन (50 डिग्री यूपी) एवं 60 डिग्री यूपी तेजी की देशी मदिरा पूर्ववत प्रचलन में रहेंगी।
22.5 . देशी मदिरा में कीमत के मान से प्रत्येक 10-15 रूपये के अंतर पर मदिरा उपलब्ध कराने की दृष्टि से उपरोक्त के अतिरिक्त कम शक्ति की मदिरा के रूप में 35 डिग्री यूपी तेजी की नवीन श्रेणी प्रारंभ की जाएगी ।
22.6 . देशी मदिरा मसाला (25 डिग्री यूपी) "कैरेमल" एवं 35 डिग्री यूपी "लाल " , देशी मदिरा प्लेन (50 डिग्री यूपी) मदिरा "रंगहीन " तथा कम तेजी की 60 डिग्री यूपी वाली देशी मदिरा भी "रंगहीन " होगी ।
22.7. सभी श्रेणियों की देशी मदिरा का प्रदाय 180 एम.एल.एवं 90 एम.एल. की धारिता में ही दिया जाएगा ।
22.8 . देशी मदिरा की भराई, ब्राण्ड नाम सहित पूर्वानुसार शब्द "देशी मदिरा " व "म ० प्र० आबकारी" तथा बोतल की धारिता उत्कीर्ण की हुई कांच एवं पैट की बोतलों में की जायेगी एवं इस हेतु एसेप्टिक पैकेजिंग (टैट्रा पैक) भी अनुमत होगा।
22.9. देशी मदिरा की 180 एम.एल. की धारिता का प्रदाय कांच, पैट बोतल एवं एसेप्टिक पैकेजिंग (टैट्रा पैक) में किया जा सकेगा, परन्तु 90 एम.एल. धारिता का प्रदाय सिर्फ पैट में ही अनुमत होगा।
22.10 . देशी मदिरा के प्रदायकर्ता को अपनी देशी मदिरा बॉटलिंग इकाई सी.एस. - 1 बी में ट्रैक एंड ट्रेस लागू होने की स्थिति में उपयुक्त क्षमता का स्कैनर आवश्यक रूप से स्थापित करना होगा।
22.11 . आसवनी द्वारा स्वयं के आवंटित क्षेत्र के सप्लाई के लिए बॉटलिंग प्लांट अनुमत्य किया जा सकेगा एवं आसवनी द्वारा राज्य के अन्दर मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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स्वयं की देशी मदिरा बॉटलिंग इकाई में स्पिरिट परिवहन करने पर प्रचलित 3/- रूपये प्रति बल्क लीटर की परिवहन फीस को समाप्त किया जाता है ।
22.12 . देशी मदिरा मद्यभाण्डागार में निर्धारित न्यूनतम स्कंध न रखने पर शास्ति अधिरोपण की प्रक्रिया प्रचलन में है । न्यूनतम स्कंध न रखने पर शास्ति की गणना , औसत स्कंध के आधार पर न करते हुए प्रदाय हेतु लंबित राशि/मांग एवं लंबित अवधि के आधार पर किये जाने की व्यवस्था ई- आबकारी पोर्टल के माध्यम से लागू रहेगी।
23. देशी मदिरा भाण्डागार पर वर्षान्त में अवशेष देशी मदिरा स्कंध कानिराकरण: -
23.1 . बहिर्गामी अनुज्ञप्तिधारी , प्रदाय अनुबंध अवधि की समाप्ति उपरांत उसे आवंटित प्रदाय क्षेत्रों के देशी मदिरा भाण्डागारों पर अवशेष अविक्रित मदिरा स्कंध को आबकारी आयुक्त मध्यप्रदेश ग्वालियर की अनुमति के अधीन, स्वंय के उत्तरदायित्व पर अपनी इकाई परिसर में वापिस ले जा सकेगा ।
23.2 . अंतर्गामी अनुज्ञप्तिधारी यदि बहिर्गामी अनुज्ञप्तिधारी से उसे आवंटित प्रदाय क्षेत्रों के भाण्डागारों में अनुबंध अवधि समाप्ति उपरांत अवशेष अविक्रीत मदिरा स्कंध , क्रय करता है तो, अंतर्गामी अनुज्ञप्तिधारी को स्वीकृत प्रदाय दर, बहिर्गामी अनुज्ञप्तिधारी को स्वीकृत प्रदाय दर से कम होने पर, बहिर्गामी अनुज्ञप्तिधारी, अंतर्गामी अनुज्ञप्तिधारी को स्वीकृत प्रदाय दर से ही भुगतान प्राप्त करने का अधिकारी होगा ।
23.3. अंतर्गामी अनुज्ञप्तिधारी यदि बहिर्गामी अनुज्ञप्तिधारी से, उसे आवंटित प्रदाय क्षेत्रों के भाण्डागारों में अनुबंध अवधि समाप्ति उपरांत अवशेष अविक्रित मदिरा स्कंध , क्रय करता है तो, अंतर्गामी अनुज्ञप्तिधारी को स्वीकृत प्रदाय दर, बहिर्गामी अनुज्ञप्तिधारी को स्वीकृत प्रदाय दर से अधिक होने पर उसके द्वारा बहिर्गामी अनुज्ञप्तिधारी को पुरानी दरों से भुगतान किया जायेगा तथा अंतर की राशि, राजस्व शीर्ष में जमा करना अनिवार्य होगी।
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23.4. अंतर्गामी तथा बहिर्गामी अनुज्ञप्तिधारी के बीच स्कंध के अंतरण या भुगतान के संबंध में विवाद का निर्णय आबकारी आयुक्त मध्यप्रदेश या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा किया जाएगा , जो उभयपक्ष पर बंधनकारी होगा ।
24. विदेशी मदिरा का प्रदाय : -
24.1 . विदेशी मदिरा की आपूर्ति इस व्यवस्था के अतिरिक्त किसी अन्य प्रकार से भी की जा सकेगी, जैसा कि इस संबंध में राज्य शासन द्वारा आदेशित किया जाये ।
24.2. वैट (VAT) के भुगतान की व्यवस्था मध्यप्रदेश VAT अधिनियम एवं उसके अंतर्गत बने नियमानुसार होगी।
25. ड्राफ्ट बीयर के विक्रय/प्रदाय के संबंध में : -
लूज अर्थात् गैर बोतल बंद ड्राफ्ट बीयर का प्रदाय , रेस्तरां बार (एफ.एल. - 2) , रेस्तरां बीयर एवं वाईन बार ( Low Alcoholic Beverage Bar ) (एफ.एल. - 2 ए) , होटल बार (एफ.एल. - 3) , रिसोर्टबार (एफ.एल. - 3 क) , सिविलियन क्लब बार (एफ.एल. -4) , सैन्य एवं यूनिफार्म सेवा क्लब बार (एफ.एल. - 8 ) लायसेंसी तथा रूपये 25000/- अथवा उससे अधिक की लायसेंस फीस पर दिये जाने वाले व्यवसायिक किस्म के आयोजनों हेतु प्रासंगिक अनुज्ञप्ति (एफ.एल. - 5 ) को दिया जा सकेगा ।
उक्त प्रदाय नियत ड्यूटी के अग्रिम भुगतान के विरूद्ध जारी किये गये अनापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर, उत्पादन इकाई के भारसाधक अधिकारी द्वारा जारी किये गये परिवहन पारपत्र पर उत्पादन इकाई से सीधे खपत के बिन्दु के लिये किया जायेगा ।
ड्राफ्ट बीयर का प्रदाय 20, 30 , 50 एवं 70 लीटर के कन्टेनर में ही किया जायेगा। कन्टेनर पर विभाग द्वारा निर्धारित Excise Adhesive Label ( EAL ) अनिवार्यतः चस्पा किया जायेगा और उसका हिसाब पृथक से पंजी में संधारित किया जायेगा । सभी प्रकार के लायसेंसियों को ड्राफ्ट बीयर की प्राप्ति पर उसमें लगे Excise Adhesive Label ( EAL ) को निर्धारित मोबाईल एप अथवा ऑनलाईन पद्धति के माध्यम से आमद मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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किया जाना अनिवार्य होगा । इस हेतु विस्तृत प्रक्रियात्मक निर्देश आबकारी आयुक्तद्वारा जारी किये जायेंगे ।
ड्राफ्ट बीयर के निर्माता द्वारा आवश्यकता अनुसार ड्राफ्ट बीयर विक्रय करने वाले अनुज्ञप्तिधारी को कार्बन डाय - ऑक्साइड फिल्टर स्वयं के व्यय पर उपलब्ध कराया जायेगा ।
26. सम्पूर्ण वार्षिक न्यूनतम ड्यूटी राशि जमा होने के बाद मदिरा का प्रदाय:-
मदिरा दुकानों के समूह की निर्धारित वार्षिक न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी की राशि सम्पूर्ण रूप से जमा हो जाने के उपरांत, वर्ष की शेष अवधि में संबंधित दुकान को मदिरा का प्रदाय दिये जाने के लिये अतिरिक्त रूप से वार्षिक लायसेंस फीस जमा कराये जाने की आवश्यकता नहीं होगी । ऐसे लायसेंसी को अतिरिक्त उठाव पर कुल वार्षिक न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी राशि की 25% की सीमा तक की देय ड्यूटी राशि में 50 प्रतिशत की छूट दी जायेगी, किन्तु इस संबंध में सामान्य लायसेंस शर्त के सुसंगत प्रावधान लागू होंगे।
27. मदिरा स्कंध का एक मदिरा दुकान से अन्य मदिरा दुकान में स्थानांतरण:-
2.7.1 . किसी मदिरा दुकान पर अनुज्ञप्धिारी की आवश्यकता से अधिक मदिरा संग्रहित होने पर, उसे उसी जिले की अन्य मदिरा दुकान में स्थानांतरण करने की स्वीकृति जिले के सहायक आबकारी आयुक्त/जिला आबकारी अधिकारी द्वारा दी जाने की व्यवस्था रहेगी, परंतु जिस अनुज्ञप्तिधारी द्वारा जिस पक्ष में किसी अन्य मदिरा दुकान को स्टॉक ट्रांसफर किया जाता है उसे उसी पक्ष में देशी या विदेशी मदिरा गोदाम से उसी लेबल/ब्रांड की मदिरा उठाने की अनुमति नहीं होगी ।
27.2. इस प्रकार के स्थानांतरण से मदिरा स्कंध प्राप्त करने वाली मदिरा दुकान के लिये निर्धारित न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी राशि के विरूद्ध प्रत्येक त्रैमास में कण्डिका 13 में निर्धारित ड्यूटी राशि की मदिरा का मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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प्रदाय लिया जाना अनिवार्य होगा तथा स्थानांतरण से प्राप्त मदिरा स्कंध को इस अनिवार्य प्रदाय के विरूद्ध समायोजित नहीं किया जायेगा ।
27.3 . मदिरा स्कंध का एक मदिरा दुकान से अन्य मदिरा दुकान में स्थानांतरण करने पर , इस तरह का स्थानांतरण किसी एक समूह की ही दो दुकानों के मध्य होने पर देशी मदिरा , विदेशी मदिरा (स्पिरिट एवं वाईन) पर प्रतिपेटी रूपये 30/ - तथा बीयर पर प्रति पेटी रूपये 10/- की दर से तथा ऐसा स्थानांतरण दो भिन्न समूहों की मदिरा दुकानों के मध्य होने पर देशी मदिरा, विदेशी मदिरा (स्पिरिट एवं वाईन) पर प्रतिपेटी रूपये 75/ - तथा बीयर पर प्रतिपेटी रूपये 40/- की दर से परिवहन फीस देय होगी , जो अनुज्ञप्तिधारी से अग्रिम जमा करायी जायेगी ।
28. समूह में सम्मिलित मदिरा दुकानों में परस्पर वार्षिक न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी का अन्तरण: -
समूह में सम्मिलित मदिरा दुकानों के वार्षिक न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी में समूह की एक मदिरा दुकान से समूह की अन्य मदिरा दुकान में अधिकतम 20 प्रतिशत के अन्तरण ( Transfer) की अनुमति लायसेंस अवधि में दी जा सकेगी । इसके अन्तर्गत वार्षिक न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी की जितनी राशि अंतरित की जावेगी , उसकी 01 प्रतिशत राशि का भुगतान अंतरण शुल्क के रूप में पृथक से अनुमति/आदेश प्राप्ति पूर्व अनुज्ञप्तिधारी को जमा करना होगा । वर्ष के दौरान अंतरित की गई न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी राशि वर्ष की समाप्ति तक किसी भी प्रकार से पुनरावर्तित ( reversible ) नहीं की जा सकेगी।
29. मदिरा दुकानों का संचालन : -
29.1 . प्रदेश की मदिरा दुकानों पर Point of Sale ( POS ) मशीनें स्थापित कर उनसे बिलिंग एवं बॉटल लेबल तक ट्रेक एण्ड ट्रेस व्यवस्था को लागू किये जाने की स्थिति में उक्त के सम्बन्ध में पृथक से निर्देश जारी किये जायेंगे ।
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29.2 . किसी अन्य संस्था अथवा एजेंसी द्वारा किसी भी फुटकर मदिरा विक्रय दुकान/बार, थोक मदिरा विक्रय अनुज्ञप्ति अथवा मदिरा विनिर्माणी इकाई का संचालन बिना अनुज्ञापन प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बंद नहीं किया जाएगा अथवा उसे सील नहीं किया जाएगा ।
आबकारी विभाग के अधिकारी अथवा अनुज्ञापन प्राधिकारी द्वारा अधिकृत अधिकारी को छोड़कर अन्य किसी अधिकारी द्वारा अनुज्ञप्त परिसर का निरीक्षण बिना अनुज्ञापन प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के नहीं किया जाएगा एवं ऐसे प्रत्येक निरीक्षण कार्यवाही की अनिवार्यतः वीडियोग्राफी करायी जायेगी ।
30. देशी/विदेशी मद्यभाण्डागार संबंधी प्रावधान : -
30.1 . प्रदेश के सभी देशी एवं विदेशी मद्यभाण्डागारों पर वर्तमान में प्रचलित राजस्व तालों के स्थान पर Biometric e - Lock का उपयोग प्रारंभ किया जाएगा।
30.2 . विदेशी मदिरा मद्यभाण्डागारों पर मदिरा की लोडिंग/अनलोडिंग व्यवस्था हेतु दरों का निर्धारण राज्य स्तर से किया जाएगा ।
निर्धारित दर अनुसार लोडिंग/ अनलोडिंग की पारिश्रमिक राशि का भुगतान प्रदाय प्राप्तकर्ता फुटकर मदिरा विक्रय अनुज्ञप्तिधारी एवं संबंधित विनिर्माता द्वारा ठेकेदार/ श्रमिकों को ऑनलाईन व्यवस्था के द्वारा किया जाएगा ।
30.3 . प्रदेश के विदेशी मदिरा मद्यभाण्डागारों को स्मार्ट वेयरहाउस में परिवर्तित किया जाएगा । इस हेतु Vertical Stacking , Fire- retarding System , Mobile Application Based Vehicle Receipt इत्यादि नवीन तकनीकों का उपयोग किया जाएगा ।
30.4. वर्ष 2025-26 से प्रचलित कांच के लिए 0.1 प्रतिशत एवं कैन/पैट के लिए 0.05 प्रतिशत परिवहन हानि अनुमत रहेगी , जिसके सत्यापन हेतु इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था निर्धारित की जाकर विस्तृत निर्देश आबकारी आयुक्त द्वारा जारी किये जा सकेंगे ।
30.5. बॉटलिंग इकाइयों द्वारा विदेशी मदिरा मद्यभाण्डागारों पर स्कंध भेजने हेतु डिमाण्ड का एवं मदिरा दुकान लायसेंसी द्वारा प्रदाय हेतु मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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आवश्यक डिमाण्ड का स्वतः अनुमोदन (Auto Approval ) किया जाएगा । सुचारू प्रदाय व्यवस्था हेतु पोर्टल पर आवश्यक वेलीडेशन लागूकिये जाएंगे ।
30.6 . विदेशी मदिरा मद्ध भाण्डागारों में वर्तमान में अविक्रीत मदिरा वाईन के संग्रहण हेतु 60 दिवस की अवधि निर्धारित है, इसे वर्ष 2026-27 से बढ़ाकर 90 दिवस की अवधि निर्धारित की जाती है।
30.7 . विभागीय नियंत्रण के अधीन संचालित विदेशी मदिरा भाण्डागारों पर विनिर्माणी इकाइयों तथा बाहरी निर्माता केन्द्रीय भाण्डागार के लायसेंसियों द्वारा निर्मित विदेशी मदिरा (स्पिरिट, वाईन एवं बीयर) के संग्रहण किये जाने पर यदि किसी विदेशी मदिरा भाण्डागार से विक्रय न होने की स्थिति में दूसरे विदेशी मदिरा भाण्डागार पर स्थानांतरण चाहता है , तो स्पिरिट में रूपये 75/ - प्रतिपेटी एवं बीयर में रूपये 40/- प्रतिपेटी परिवहन फीस जमा करने पर ऐसी अनुमति आबकारी आयुक्त, मध्यप्रदेश द्वारा दी जा सकेगी ।
30.8 . नवीन शासकीय विदेशी मदिरा मद्य भाण्डागार खोला जाना: - वर्ष 2026-27 में आवश्यकतानुसार आबकारी आयुक्त के प्रस्ताव पर राज्य शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया अनुसार नवीन विदेशी मदिरा मद्य भाण्डागार खोलने की अनुमति दी जा सकेगी।
31. अवशेष मदिरा स्कंध का निराकरण : -
31.1 . लायसेंस अवधि समाप्त होने पर मदिरा के फुटकर विक्रय की दुकान के लायसेंसी को दुकान पर शेष बचे मदिरा स्कंध को आगामी वर्ष के लायसेंसी को सामान्य लायसेंस शर्त क्रमांक -25 के प्रावधानों के अन्तर्गत अंतरित/निराकृत करना होगा । इस अंतरित/निराकृत मदिरा स्कंध पर वर्ष में भुगतान की गयी ड्यूटी की राशि का समायोजन , आगामी वर्ष की निर्धारित न्यूनतम ड्यूटी राशि में मान्य नहीं होगा । यदि आगामी वर्ष में लायसेंसी को ऐसे अवशेष मदिरा स्कंध पर ड्यूटी के अन्तर की राशि का भुगतान करना पड़ता है, तो केवल ऐसी ड्यूटी के अन्तर की राशि उसकी आगामी वर्ष की देय निर्धारित न्यूनतम मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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ड्यूटी राशि के विरूद्ध समायोजन योग्य होगी । ड्यूटी कम किये जाने पर ड्यूटी के अंतर की राशि वापसी योग्य नहीं होगी ।
ऐसे अवशेष मदिरा स्कंध के लेबल/ ब्रांड के न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP ) में परिवर्तन होने की स्थिति में आगामी वर्ष के लायसेंसी द्वारा VAT के अंतर की राशि का भुगतान शासकीय कोषालय में करना होगा ।
सहायक आबकारी आयुक्त/जिला आबकारी अधिकारी अपने जिले के अंतर्गत इस तरह के मदिरा अंतरण की अनुमति दे सकेंगे।
31.2. यदि लायसेंसी को लायसेंस अवधि की समाप्ति पर उसी जिले में कोई अन्य मदिरा दुकान आवंटित नहीं होती है, लेकिन किसी अन्य जिले में मदिरा दुकान आवंटित होती है, तो उसे अथवा मदिरा दुकान का आवंटन न होने की स्थिति में किसी अन्य अनुज्ञप्तिधारी को, दोनों की सहमति के आधार पर दिनांक 30 अप्रैल तक प्राप्त ऐसे प्रस्ताव पर आबकारी आयुक्त, मध्यप्रदेश द्वारा अंतरण की अनुमति दी जा सकेगी ।
31.3 . मदिरा परिवहन की स्थिति में अवशेष मदिरा स्कंध देशी मदिरा , विदेशी मदिरा ( स्पिरिट एवं वाईन) पर 75/- रूपये प्रतिपेटी तथा बीयर पर 40/ - रूपये प्रतिपेटी की दर से परिवहन फीस प्रभारित की जायेगी ।
32. एयरपोर्ट पर विदेशी मदिरा काउंटर : -
भोपाल, इंदौर, जबलपुर आदि एयरपोर्ट के समान अन्य व्यवसायिक उड़ानें संचालित करने वाले एयरपोर्ट पर भी काउंटर हेतु अनुज्ञप्ति दी जा सकेगी , जहाँ पर विदेशी मदिरा , हेरिटेज मदिरा, प्रदेश के उत्पादों से प्रदेश में ही निर्मित वाईन का विक्रय अनुमत होगा । आगमन एवं प्रस्थान (दोनों द्वार) पर एक- एक काउण्टर खोलने की अनुमति दी जा सकेगी।
33. भाँग दुकानों का निष्पादन: -
33.1 . वर्ष 2026-27 के लिये फुटकर विक्रय की भाँग, भाँगघोटा एंव भाँग मिठाई अनुज्ञप्तियों के निष्पादन हेतु आरक्षित मूल्य वर्ष 2025-26 की मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 फरवरी 2026
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लायसेंस फीस में 10 प्रतिशत की वद्धि की जाकर निर्धारित होगा । भाँग दुकानों के निष्पादन की प्रक्रिया के संबंध में आबकारी आयुक्त मध्य प्रदेश द्वारा पृथक से निर्देश जारी किए जायेंगे ।
33.2. भाँग डयूटी प्रदाय दर भाँग विक्रय अनुज्ञप्तिधारी के लिये 200/- रूपये प्रति किलोग्राम एवं औषधि निर्माणकर्ता अनुज्ञप्तिधारी के लिये 300/- रूपये प्रति किलोग्राम रहेगी।
33.3 . भाँग प्रदाय व्यवस्था में पूर्व प्रचलित व्यवस्था के स्थान पर राज्य में भाँग लाने, गोदाम पर संग्रहित करने, भाँग की सफाई उपरांत 05-05. कि.ग्रा. की थैलियाँ बनाने संबंधी समस्त कार्यों के लिए प्रक्रिया निर्धारित कर इस हेतु दरें टेण्डर के माध्यम से आमंत्रित करने की कार्यवाही की जाएगी ।
उपरोक्तानुसार भाँग की थोक आपूर्ति हेतु आपूर्तकों के चयन एवं प्राप्त दरों का अनुमोदन आबकारी आयुक्त द्वारा किया जाएगा ।
33.4. भाँग की फुटकर प्रदाय व्यवस्था ई- आबकारी पोर्टल के इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन सिस्टम के माध्यम से की जाएगी ।
34. बार लायसेंस के संबंध में व्यवस्था: -
पूर्व प्रचलित व्यवस्था में नवीन संशोधित प्रावधान निम्नानुसार रहेंगे : -
34.1 . वर्तमान में प्रचलित Low Alcoholic Beverage Bar (एफ.एल. - 2 ए) कीप्रावधानित व्यवस्था को वर्ष 2026-27 में भी यथावत रखा जाएगा, इस लायसेंस के अंतर्गत रेस्तरां में सिर्फ बीयर एवं RTD तथा समस्त वाईन ही विक्रय की जा सकेगी और स्पिरिट का विक्रय वर्जित तथा प्रतिबंधित रहेगा ।
इस Low Alcoholic Beverage Bar (एफ.एल. - 2 ए) की वार्षिक लायसेंस फीस उस स्थान हेतु रेस्तरां बार लायसेंस (एफ.एल. - 2) की प्रचलित वार्षिक लायसेंस फीस के समान रहेगी ।
इस लायसेंस को प्राप्त करने हेतु रेस्तरां के पास न्यूनतम एक तल पर 1000 वर्गफीट का एयर कंडीशनर कवर्ड डाइनिंग एरिया होना चाहिए । शेष मापदण्ड एवं अर्हताकारी शर्तें रेस्तरां बार लायसेंस (एफ.एल. - 2) के समकक्ष रहेंगी। यह लायसेंस राजस्व संभागीय मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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मुख्यालय के जिले पर प्रत्येक एक लाख की आबादी पर अधिकतम एक लायसेंस के मान से प्रथम आओ प्रथम पाओ के आधार पर दिया जायेगा।
34.2. एफ.एल.-2, Low Alcoholic Beverage Bar एफ.एल. - 2 ए, एफ.एल. - 2 एए, एफ.एल.- 3 , एफ.एल. - 3 ए, एफ.एल. - 4बार लायसेंसों में बीयर जिसकी EDP प्रति पेटी रूपये 575/-, स्प्रिट (व्हिस्की) जिसकी EDP प्रति पेटी रूपये 1100/ - , स्प्रिट (रम, वोदका, जिन आदि) एवं वाईन जिसकी EDP प्रति पेटी रूपये 500/ - तथा रेडी टू ड्रिन्क (प्रति पेटी अधिकतम 9 बल्क लीटर) जिसकी EDP प्रति पेटी रूपये 700/- से कम न हो, विक्रय/प्रदाय किया जायेगा।
34.3 . सिविलियन क्लब बार लायसेंस हेतु मापदण्डों/शर्तों का निर्धारण कियाजाना:-
सिविलियन क्लब बार लायसेंस को स्तरीय बनाये जाने की दृष्टि से निम्न में से कम से कम 05 विभिन्न सुविधायें उपलब्ध होना आवश्यक होगी, जिनमें न्यूनतम 1000 वर्गफीट का तरणताल एवं व्यायामशाला (जिसमें शारीरिक व्यायाम हेतु कम से कम 12 आईटम हों) का होना आवश्यक होगा ।
(1 ) तरणताल
(2 ) व्यायामशाला , जिसमें शारीरिक व्यायाम हेतु कम से कम 12 आईटम हों
(3) बेडमिन्टन हॉल
(4) बिलीयर्ड्स / पूल टेबल
(5) टेबिल टेनिस हॉल
(6) स्क्वैश कोर्ट
(7 ) कार्डस रूम
(8 ) लॉन टेनिस कोर्ट
34.4 . कार्यपालिक अधिकारियों द्वारा बार के निरीक्षण हेतु GPS आधारित मोबाईल एप्लीकेशन की व्यवस्था प्रारंभ की जाएगी ।
34.5 . वर्ष 2026-27 में सभी श्रेणी के बार लायसेंसियों की e - KYC किया जाना अनिवार्य होगा ।
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34.6. बार लायसेंसों की लायसेंस फीस एवं अन्य संबंधित शर्तें वर्ष 2025-26 के अनुसार यथावत रहेगी।
34.7 . बार लायसेंसों के निरीक्षण की प्रक्रिया में बार अनुज्ञप्ति की किसी शर्त या मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के किसी उपबंध अथवा उसके अधीन बनाये गये किसी नियम अथवा आबकारी आयुक्त द्वारा जारी किये गये किसी आदेश के उल्लंघन होने पर यह अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापन प्राधिकारी द्वारा " अनुज्ञप्ति के निलंबित अथवा रद्द की जा सकेगी । "
इस हेतु अनियमितता की आवृति अनुसार शास्ति निम्नानुसार अधिरोपित की जायेगी: -
अनियमितता का प्रकार
अनियमित्ता की आवृति
प्रथम बार विदेशी मदिरा
द्वितीय बार
तृतीय बार
चतुर्थ बार
पंचम बार नियम, लायसेंस 1996, शर्त, सामान्य अनुज्ञप्ति की शर्तों का उल्लंघन, आबकारी आयुक्त एवं कलेक्टर द्वारा जारी निर्देशों के उल्लंघन
दण्ड के रूप में आरोपित शास्ति
मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 48 (1 ) तथा धारा 48 (क) विशेष उपबंध के अन्तर्गत प्रावधानित शास्ति के तहत एक ही प्रकार की अनियमितता के एक से अधिक बार उल्लंघन पर न्यूनतम रूपये 1000/- की शास्ति से प्रारंभ कर उतरोत्तर वृद्धि कर शास्ति आरोपित की जायेगी ।
34.8 . बार लायसेंस में 05 बार से अधिक समान प्रकार की अनियमितता पाये जाने पर उसका लायसेंस निरस्त किया जा सकेगा ।
34.9. वर्ष 2026-27 में होटल बार लायसेंस (एफ.एल. - 3 ) हेतु इच्छुक होटल में कम से कम 10 कमरे वातानुकूलित तथा सभी कमरे न्यूनतम 150 वर्गफीट क्षेत्रफल के होने की शर्त अनिवार्य होगी।
ऐसे लायसेंस हेतु शेष मापदण्ड एवं वार्षिक लायसेंस फीस प्रचलित होटल बार लायसेंस (एफ.एल. - 3 ) अनुसार रहेंगे।
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34.10 . मध्यप्रदेश विदेशी मदिरा नियम 1996 के नियम 8 के उपनियम ( 1 ) (ज) के अन्तर्गत सैनिक विनोदगृह अनुज्ञप्ति (एफ.एल. - 8 ) के तहत राज्य की यूनिफार्म से संबंधित सेवाओं को भी शामिल किया जायेगा। इस संबंध में वह समस्त नियम/शर्तें/लायसेंस फीस प्रभावी होंगी, जो सैनिक विनोदगृह अनुज्ञप्ति (एफ.एल. - 8 ) के लिये प्रभावी हैं । इसे सैन्य एवं यूनिफार्म सेवा क्लब बार अनुज्ञप्ति (एफ.एल. - 8 ) के नाम से परिभाषित किया जायेगा ।
35. बारों की न्यूनतम गारंटी के संबंध में : -
35.1 . वर्ष 2026-27 हेतु बार लायसेंसों की मिनिमम गारंटी (एम.जी. ) गत वर्ष के भांति यथावत रहेगी ।
35.2 . सभी बार लायसेंसों को हेरिटेज मदिरा की न्यूनतम मात्रा 02 पेटी विक्रय हेतु अनिवार्य रूप से स्टॉक करेगा । उक्त स्टॉक उक्त निर्धारित न्यूनतम मात्रा से कम होना पाये जाने पर कलेक्टर ऐसी कम मात्रा पर अधिकतम रूपये 250/- प्रति प्रूफ लीटर शास्ति अधिरोपित कर सकेंगे ।
35.3 . प्रदेश की किसी भी बार इकाई द्वारा सम्पूर्ण वित्तीय वर्ष की अवधि में निर्धारित मिनिमम गारंटी के समतुल्य विदेशी मदिरा क्रय न किये जाने की स्थिति में उस पर आरोपित की जाने वाली शास्ति उस बार इकाई की संदर्भित वर्ष हेतु निर्धारित वार्षिक लायसेंस फीस से अधिक नहीं हो सकेगी।
35.4. राज्य शासन द्वारा अधिसूचित Force Majeure के कारण बारों का संचालन प्रभावित होने की स्थिति में जिला कलेक्टर से प्राप्त युक्तियुक्त प्रस्ताव के आधार पर राज्य शासन के अनुमोदन के अधीन आबकारी आयुक्त द्वारा बारों हेतु निर्धारित न्यूनतम गारंटी का उठाव न होने पर अधिरोपित होने वाली शास्ति में छूट दी जा सकेगी।
36. प्रासंगिक अनुज्ञप्ति (एफ.एल .5 ) : -
व्यवसायिक किस्म के कार्यक्रमों/आयोजनों अर्थात् है ऐसे कार्यक्रम जिनमें प्रवेश , निर्धारित शुल्क के भुगतान के आधार पर दिया जाता है, मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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के दौरान मदिरा का उपयोग अनुमत करने के लिए प्रासंगिक अनुज्ञप्ति (एफ.एल .5 ) की लायसेंस फीस निम्नवत रहेगी : -
कार्यक्रम में भाग लेने वाले व्यक्तियों की संख्या
क्र.
1 अधिकतम 500 तक 2
लायसेंस फीस 25 हजार 50 हजार 500 से लेकर अधिकतम 01 हजार तक
3
75 हजार 01 हजार से लेकर अधिकतम 02 हजार तक
01 लाख 02 हजार से लेकर अधिकतम 05 हजार तक
4
5 05 हजार से अधिक 02लाख गैर व्यवसायिक किस्म के कार्यक्रमों/ आयोजनों अर्थात् है ऐसे कार्यक्रम के दौरान मदिरा का उपयोग अनुमत करने के लिए प्रासंगिक अनुज्ञप्ति (एफ.एल.5 ) की लायसेंस फीस पूर्ववत रहेगी। प्रासंगिक अनुज्ञप्ति (एफ.एल.5 ) के लाइसेंस जारी करने के लिए Geo-fencing आधारित मोबाईल एप्लीकेशन लागू की जायेगी ।
37. मदिरा दुकानों एवं बार लायसेंसों से बिक्री का समय : -
37.1 . मदिरा की फुटकर बिक्री की दुकानों की साफ - सफाई तथा मदिरा के प्रारंभिक संग्रह , आमद, विक्रय एवं अंतिम संग्रहं के दैनिक लेखे की पंजियों को पूर्ण/संधारित किये जाने के लिये मदिरा दुकानें प्रातः 8:30 बजे से खोली जायेंगी । प्रातः 8:30 बजे से प्रातः 9:30 बजे तक का समय लेखा संधारण के लिए एवं मदिरा विक्रय का समय प्रातः 9:30 बजे से रात्रि में 11:30 बजे तक रहेगा ।
37.2 . रेस्टोरेन्ट, पर्यटन, होटल, रिसोर्ट तथा क्लब बार लायसेंस के अन्तर्गत परिसर में विदेशी मदिरा की बिक्री का समय प्रातः 10:00 बजे से रात्रि 11:30 बजे तक एवं उपभोग का समय रात्रि 12:00 बजे तक रहेगा।
37.3 . रेस्टोरेन्ट, पर्यटन , होटल, रिसोर्ट तथा क्लब बार लायसेंस (एफ.एल. - 2 , एफ.एल. - 2ए, 2 एए, 3 , 3 ए , 3 एए एवं 4) के अनुज्ञप्तिधारी द्वारा निर्धारित समय के उपरान्त बार संचालन हेतु अनुमति चाही जाती है, तो 5,000/ - रूपये प्रतिदिन अतिरिक्त फीस लेकर, लायसेंस के मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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अन्तर्गत परिसर में विदेशी मदिरा की बिक्री एवं उपभोग हेतु 02 घंटे की अतिरिक्त समयावधि दी जायेगी । यह विशिष्ट अनुमति उल्लेखित लायसेंसों हेतु वित्तीय वर्ष में अधिकतम 08 दिवस हेतु दी जा सकेगी । यह अनुमति कलेक्टर के विवेकाधीन रहेगी ।
37.4. राज्य शासन अथवा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुक्रम में दुकानों के निर्धारित खुलने अथवा बंद होने के समय में कोई परिवर्तन किये जाने की स्थिति में अनुज्ञप्तिधारी देय न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी राशि एवं लायसेंस फीस में छूट का पात्र नहीं होगा ।
38. मदिरा दुकानों/ समूहों का पुनर्निष्पादन: -
38.1 . लायसेंस अवधि प्रारंभ होने के पूर्व किसी सफल टेण्डरदाता द्वारा , निर्धारित समय सीमा में आवश्यक राशियां जमा न करने, विहित प्रावधानों का उल्लंघन करने या अन्य किसी कारण से यदि किसी मदिरा दुकान/समूह के पुनर्निष्पादन की स्थिति निर्मित होती है, तो ऐसी स्थिति में जिला निष्पादन समिति द्वारा उसका पुनर्निष्पादन ई- टेण्डर या शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया अनुसार किया जाएगा।
38.2. लायसेंस अवधि के दौरान लायसेंस शर्तों के उल्लंघन, निर्धारित न्यूनतम ड्यूटी राशि जमा न करने अथवा किसी अन्य कारण से , यदि मदिरा दुकान/समूह का लायसेंस निरस्त किए जाने की स्थिति बनती है तो ऐसी स्थिति में मूल अनुज्ञप्तिधारी के उत्तरदायित्व पर, उस मदिरा दुकान/समूह का पुनः निष्पादन , लायसेंस अवधि की शेष रही अवधि के लिए ई - टेण्डर या शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया अनुसार किया जाएगा । उस मदिरा दुकान के समूह को पुनः निष्पादित करने के अधिकार जिला निष्पादन समिति को होंगे ।
38.3 . लायसेंस अवधि में पुनर्निष्पादन की स्थिति निर्मित होने पर मदिरा दुकानों/समूहों के आरक्षित मूल्य का निर्धारण लायसेंस अवधि हेतु प्राप्त/स्वीकृत उच्चतम आँफर में से मदिरा दुकान की संचालन अवधि (अनुज्ञप्तिधारी द्वारा संचालन अवधि + विभागीय संचालन अवधि) की वार्षिक लायसेंस फीस (समानुपातिक रूप से) एवं न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी की राशि को ( आनुपातिक रूप से) घटाकर शेष अवधि का मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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वार्षिक मूल्य परिगणित कर उसे लायसेंस की शेष अवधि हेतु आरक्षित मूल्य निर्धारित किया जायेगा।
38.4 . समूह की किसी एक मदिरा दुकान का लायसेंस निरस्त किये जाने की स्थिति निर्मित होने पर, उक्त समूह की सभी मदिरा दुकानों का लायसेंस निरस्त किया जायेगा । मदिरा दुकान के समूह का पुनः निष्पादन होने तक उसका संचालन विभागीय रूप से अथवा उसके स्थान पर ऐसी रीति से जैसा कि आबकारी आयुक्त निर्धारित करें, किया जा सकेगा ।
38.5. लायसेंस अवधि प्रारंभ होने के पूर्व किसी मदिरा दुकानों के समूह का पुनः निष्पादन किये जाने की स्थिति में आरक्षित मूल्य का निर्धारण निम्नानुसार किया जायेगा : -
(i) मदिरा दुकान/समूह के निष्पादन के उपरांत यदि सफल आवेदक/निविदादाता द्वारा सम्पूर्ण वार्षिक लायसेंस फीस जमा कर दी जाती है, तो ऐसी स्थिति में उसके द्वारा दिया गया एवं स्वीकृत उच्चतम ऑफर, उक्त मदिरा दुकान/समूह का पुनः निष्पादन हेतु आरक्षित मूल्य होगा।
(ii) मदिरा दुकान/समूह के निष्पादन के उपरांत यदि सफल आवेदक/निविदादाता द्वारा सम्पूर्ण वार्षिक लायसेंस फीस जमा नहीं की जाती है , तो ऐसी स्थिति में वर्ष 2026-27 हेतु निर्धारित मूल आरक्षित मूल्य ही पुनः निष्पादन के लिए उक्त मदिरा दुकान /समूह का आरक्षित मूल्य होगा।
38.6. पुनः निष्पादन की कार्यवाही में यदि शासन को कोई हानि होती है अथवा खिसारा परिगणित होता है , तो ऐसी हानि/खिसारे की राशि उच्चतम ऑफरदाता से भू- राजस्व के बकाया की भाँति वसूली योग्य होगी। यदि द्वितीय बार पुनःनिष्पादन की स्थिति निर्मित होती है, तो ऐसी स्थिति में आकलित हानि/खिसारे की राशि के लिए प्रथम निष्पादन के उच्चतम ऑफरदाता का संयुक्त उत्तरदायित्व रहेगा तथा प्रथम पुनःनिष्पादन का उच्चतम ऑफरदाता, इस प्रकार द्वितीय पुनःनिष्पादन के कारण उत्पन्न अंतर की राशि (हानि/खिसारे) हेतु, मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 फरवरी 2026
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संयुक्त रूप से उत्तरदायी होगा। यही सिद्धांत एवं प्रक्रिया आगामी पुनःनिष्पादनों हेतु भी प्रभावी रहेगी ।
38.7 . पुनर्निष्पादन की स्थिति में उक्त मदिरा दुकानों के समूह की शेष अवधि हेतु प्राप्त निविदा मूल्य के 10 प्रतिशत अथवा उस मदिरा दुकानों के समूह की न्यूनतम प्रत्याभूत डयूटी की राशि की एक पक्ष की मांग , दोनों में से जो भी अधिक हो, के समतुल्य प्रतिभूति प्राप्त की जाएगी ।
38.8 . पुनर्निष्पादन की कार्यवाही में टेण्डर में प्रकाशित निविदा अवधि एवं सफल निविदादाता के पक्ष में मदिरा दुकान/समूह स्वीकृत किये जाने की अवधि में भिन्नता होने की स्थिति में, निविदादाता को प्रस्तुत वार्षिक मूल्य में इस अवधि हेतु छूट की पात्रता होगी, जिसकी गणना वार्षिक लायसेंस फीस हेतु समानुपातिक रूप से एवं न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी राशि हेतु आनुपातिक रूप से की जायेगी । स्वीकृति दिनांक के दिवस को वार्षिक मूल्य निर्धारण हेतु गणना में लिया जायेगा । ऐसी अनुमति जिला समिति के प्रस्ताव पर कलेक्टर द्वारा दी जा सकेगी ।
38.9 . पुनर्निष्पादन उपरान्त सम्पूर्ण वार्षिक लाइसेंस फीस जमा किये जाने की स्थिति में राजस्व हित में प्रतिभूति राशि जमा करने हेतु कलेक्टर द्वारा 3 दिवस का समय दिया जा सकेगा, किन्तु सफल टेण्डरदाता द्वारा लाइसेंस फीस एवं निर्धारित प्रतिभूति राशि जमा करने की स्थिति में ही लाइसेंस जारी किया जाएगा ।
38.10 . लायसेंस अवधि हेतु मदिरा की फुटकर बिक्री की दुकानों के निष्पादन की उपरोक्त सभी शर्तें, लायसेंस अवधि के दौरान होने वाले मदिरा दुकानों के पुनर्निष्पादन की कार्यवाही के संबंध में भी यथावत प्रभावशील रहेंगी ।
39. लायसेंस का हस्तांतरण :-
39.1 . लायसेंस अवधि में किसी मदिरा दुकान के लायसेंसी द्वारा निष्पादन उपरांत किसी अपरिहार्य परिस्थिति में उसकी मदिरा दुकान का अन्तरण , लायसेंस की शेष अवधि के लिये किसी अन्य पात्र आवेदक के पक्ष में किया जाता है, तो ऐसा अन्तरणकर्ता (मूल लायसेंसी) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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अंतरण उपरांत भी, उक्त मदिरा दुकान के वार्षिक मूल्य आदि का भुगतान करने के लिए बाध्य रहेगा । साथ ही वह आवेदक जिसके नाम लायसेंस का हस्तांतरण किया जायेगा ( अंतरणग्रहीता) भी उक्त मदिरा दुकान के वार्षिक मूल्य आदि का सम्यक भुगतान करने एवं लायसेंस की शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य रहेंगे ।
39.2 . मदिरा दुकानों/समूहों का अन्तरण अनुमत करने से पूर्व कण्डिका 10 अनुसार प्रतिभूति उस आवेदक से जिसके नाम लायसेंस का हस्तांतरण किया जायेगा ( अंतरणग्रहीता) से अनिवार्य रूप से प्राप्त की जायेगी अर्थात ऐसा अन्तरण अनुमत करने के पूर्व सुसंगत अभिलेखीय प्रमाण के साथ यह सुनिश्चित किया जावेगा कि प्रत्येक समय अनुज्ञप्तिधारी की निर्धारित प्रतिभूति राशि विभाग के पास निरंतर जमा रहे ।
39.3. मदिरा दुकान के लायसेंस के ऐसे हस्तांतरण के लिए उस मदिरा दुकान के वर्ष 2026-27 हेतु वार्षिक मूल्य का 1 प्रतिशत राशि के समतुल्य हस्तांतरण फीस देय होगी, जो हस्तांतरण पूर्व अग्रिम जमा करायी जायेगी ।
39.4 . किसी मदिरा दुकान/ भांग दुकान हेतु सफल टेण्डरदाता/लायसेंसी की मृत्यु की स्थिति में संबंधित मदिरा दुकान का अन्तरण लायसेंसी के वैध वारिस अर्थात उसकी पत्नी अथवा उसके पारिवारिक सदस्य के पक्ष में किया जा सकेगा । ऐसा अंतरण अनुमत करने की स्थिति में अंतरणग्रहीता उक्त मदिरा दुकान के वार्षिक मूल्य आदि का सम्यक भुगतान करने एवं लायसेंस की शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य रहेगा। ऐसी मदिरा दुकान के लायसेंस के हस्तांतरण के लिए किसी भी रूप में कोई हस्तांतरण फीस देय नहीं होगी।
40. मदिरा विनिर्माण इकाईयों से सम्बन्धित प्रावधान : -
40.1 . वर्ष 2026-27 हेतु मदिरा विनिर्माण इकाईयों की वार्षिक लायसेंस फीस वर्ष 2025-26 में प्रचलित अनुसार यथावत रहेगी ।
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40.2 . वर्ष 2026-27 हेतु मदिरा विनिर्माण इकाईयों पर प्रभारित की जाने वाली पर्यवेक्षण प्रभार की राशि वर्ष 2025-26 में प्रचलित अनुसार यथावत रहेगी ।
40.3 . वर्ष 2026-27 हेतु प्रदेश के विदेशी मदिरा विनिर्माताओं/आयातकों (स्पिरिट) हेतु लेबिल पंजीयन संबंधी व्यवस्था एवं फीस वर्ष 2025-26 के अनुरूप यथावत अथवा अनुमोदित व्यवस्था अनुसार रहेगी ।
40.4. देश के बाहर विदेशी मदिरा के निर्यात हेतु 55 हजार प्रति लेबिल के साथ - साथ एक मुश्त 10 लाख लेबिल पंजीयन फीस पर असीमित लेबिल पंजीयन का विकल्प दिया जायेगा।
40.5 . वर्ष 2026-27 हेतु देश के बाहर विदेशी मदिरा निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिये विदेशी मदिरा विनिर्माताओं पर प्रभारित बॉटलिंग फीस एवं निर्यात फीस समाप्त की जाती है ।
40.6 . विदेशी मदिरा में अन्य राज्यों अथवा देशों में ऐसेप्टिक पैकेजिंग जैसे टैट्रा पैक में निर्यात /लेबिल पंजीयन अनुमत होगा ।
40.7. राजस्व सुरक्षा की दृष्टि से प्रदेश की मदिरा विनिर्माणी इकाइयों का आधुनिकीकरण एवं तकनीकी उन्नयन किया जाएगा। सभी विनिर्माणी इकाइयों को पर्याप्त संख्या में डिजीटल एल्कोमीटर रखना अनिवार्य होगा।
40.8 . वर्ष 2026-27 के लिये मध्यप्रदेश में विक्रय हेतु उत्पादित विदेशी मदिरा पर बॉटलिंग फीस निम्नानुसार रहेगी : -
बॉटलिंग फीस क्र.
इकाई का प्रकार
रू. 12 प्रति प्रू.ली.
1 स्थानीय विदेशी मदिरा (स्पिरिट) विनिर्माता ( FL - 9)
रू. 24 प्रति प्रू.ली.
2 फ्रेंचाईजी/सबलीजी विदेशी मदिरा (स्पिरिट) विनिर्माता ( FL - 9A)
रू. 6 प्रति ब.ली.
स्थानीय बीयर विनिर्माता (B - 3 )
3
रू . 12 प्रति ब.ली.
4 फ्रेंचाईजी/सबलीजी बीयर विनिर्माता ( FL9A of B- 3) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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41. विशेष मदिराओं ( Special liquors) के संबंध में: -
वर्तमान में प्रदेश की आसवनियों को विशेष मदिराओं (Special liquors ) के निर्माण, भण्डारण , निर्यात, आयात एवं विक्रय की अनुमति है ।
स्पिरिट/माल्ट के Maturation / Ageing एवं Wooden Cask/ Barrel में भण्डारण संबंधी नियम विभाग द्वारा बनाये जाएंगे ।
42. हेरीटेज मदिरा : -
42.1 . हेरीटेज मदिरा संबंधी नीति एवं व्यवस्था वर्ष 2025-26 में प्रचलित अनुसार यथावत रहेगी । हेरीटेज मदिरा विनिर्माणी इकाइयों द्वारा निर्मित हेरीटेज मदिरा को वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य शासन के वैल्यूएडेड टैक्स (VAT) से मुक्त रखा जाएगा ।
42.2 . मध्यप्रदेश राज्य में महुआ से निर्मित हेरिटेज मदिरा को प्रोत्साहन देने की दृष्टि से प्रावधान : -
ऐसे राज्य जिनमें राज्य में निर्मित किसी विशिष्ट प्रकृति की मदिरा जिसे राज्य में उत्पादित किसी विशेष उत्पाद (जैसे मध्य प्रदेश में महुआ, गोवा में काजू व अन्य) से निर्मित किया गया हो , तथा उक्त मदिरा को उस राज्य में प्रोत्साहन देने की दृष्टि से ड्यूटी मुक्त तथा अन्य कर/शुल्क में छूट दी गई हों, ऐसी विशिष्ट प्रकृति की मदिरा को मध्यप्रदेश राज्य में भी इस शर्त के साथ ड्यूटी मुक्त रखा जा सकेगा कि वह राज्य, मध्यप्रदेश राज्य में निर्मित हेरिटेज मदिरा को भी उस राज्य में प्रोत्साहन देने के लिये ड्यूटी एवं अन्य कर/ शुल्क से मुक्त रखे ।
ऐसे प्रकरणों में प्रकरणवार विचार कर राज्य शासन द्वारा इसका अनुमोदन किया जा सकेगा ।
43. प्रदेश में उत्पादित फलों से प्रदेश में निर्मित वाईन संबंधी : -
43.1 . राज्य शासन द्वारा घोषित अंगूर प्रसंस्करण नीति के अन्तर्गत प्रदेश में फलोद्यान विस्तार एवं फल प्रसंस्करण को बढ़ावा देने एवं किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से प्रदेश में उत्पादित अंगूर एवं जामुन के अतिरिक्त अन्य फलों तथा प्रदेश में उत्पादित एंव संग्रहित शहद मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 फरवरी 2026
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(हनी) से निर्मित वाईन का निर्माण अनुमत रहेगा । इस हेतु नवीन वाईनरी लायसेंस जारी किये जायेंगे ।
43.2 . मध्यप्रदेश में उत्पादित अंगूर से मध्यप्रदेश में निर्मित वाईन को आबकारी शुल्क से वित्तीय वर्ष 2027-28 तक के लिए मुक्त रखा गया है । यह छूट अन्य फलों तथा शहद (हनी) से निर्मित वाईन पर भी लागू होगी ।
43.3 . प्रदेश में उत्पादित फलों/ शहद से प्रदेश में वाईन विनिर्माण करने वाली इकाइयों को उनके परिसर में वाईन के फुटकर विक्रय के लिए एक रिटेल आउटलेट स्वीकृत किया जा सकेगा । आगंतुकों/पर्यटकों हेतु वाईनरी परिसर में वाईन टेवर्न (वाईन टेस्टिंग सुविधा) की अनुमति होगी ।
43.4. उपरोक्त श्रेणी की वाईन विनिर्माण इकाइयां वाईन के विपणन हेतु प्रदेश के समस्त जिला मुख्यालयों, तहसील मुख्यालयों, एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों तथा मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा चयनित/घोषित/पर्यटन क्षेत्र/स्थलों पर ऐसी वाईन के फुटकर विक्रय के लिए एक या अधिक कम्पनी रिटेल आउटलेट पूर्व निर्धारित शर्तों के अधीन संचालित कर सकेगी ।
43.5. वाईन के विपणन हेतु कम्पनी रिटेल आउटलेट की भाँति विनिर्माता वाईनरी द्वारा फ्रेंचाईजी/अधिकृत किये गये व्यक्ति द्वारा भी उक्त स्थलों पर वाईन के रिटेल आउटलेट का संचालन किया जा सकेगा।
43.6. ऐसे सभी वाईन रिटेल आउटलेट की वार्षिक लायसेंस फीस 10,000/ - रूपये रहेगी ।
43.7. इन रिटेल आउटलेट पर वाईन की आपूर्ति विनिर्माणी (वाईनरी) से सीधे की जा सकेगी । जिले की मदिरा की फुटकर बिक्री की दुकान और बार के लायसेंसी को उसी जिले के रिटेल आउटलेट से ऐसी वाईन प्रदाय की जा सकेगी ।
43.8. वाईन के रिटेल आउटलेट से जिले की ही मदिरा दुकान को वाईन प्रदाय करने हेतु, मदिरा स्कंध को एक मदिरा दुकान से अन्य मदिरा दुकान में स्थानांतरण की प्रकिया अनुसार, प्रदाय दिये जाने की अनुमति होगी । इस प्रकार के स्थानांतरण पर कण्डिका 27.3 में मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 फरवरी 2026
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उल्लेखित किसी प्रकार की परिवहन फीस प्रभारित नहीं होगी । इस सम्बन्ध में विस्तृत प्रक्रिया एवं निर्देश आबकारी आयुक्त द्वारा जारी किये जायेंगे ।
43.9 . वाईन महोत्सव हेतु वर्ष में प्रत्येक नगर निगम में अधिकतम 02 दिवस के लिये Occasional License दिया जा सकेगा, जिसकी लायसेंस फीस 1,000/- रूपये प्रतिदिन होगी ।
44. अन्य कर एवं व्यवस्था: -
लायसेंस अवधि में यदि केन्द्र या राज्य सरकार के किसी विभाग द्वारा किसी अधिनियम अथवा नियम के अन्तर्गत मादक पदार्थों पर कोई कर , फीस या चार्ज लगाया गया जिसकी देयता अनुज्ञप्तिधारी पर आती हो तो, अनुज्ञप्तिधारी इस बाबत वार्षिक लायसेंस फीस अथवा निर्धारित न्यूनतम ड्यूटी राशि में किसी छूट अथवा क्षतिपूर्ति का हकदार नहीं होगा और इस संबंध में उसकी कोई आपत्ति मान्य नहीं होगी । परंतु इस अतिरिक्त कर , फीस या चार्ज जिसमें प्रचलित प्रावधान अनुसार स्त्रोत पर आयकर की कटौती शामिल नहीं होगी , की प्रतिपूर्ति के संबंध में राज्य शासन से अनुमति प्राप्त कर आबकारी आयुक्त द्वारा मदिरा की विक्रय दरों ( MSP /MRP ) के पुनर्निर्धारण के संबंध में उचित निर्णय लिया जा सकेगा ।
45. मद्य निषेध की नीति के फलस्वरूप दुकान बन्द करना : -
राज्य में मद्य निषेध की नीति के फलस्वरूप , माननीय न्यायालय के आदेश के पालन में, प्रशासकीय निर्णय होने की स्थिति में एवं फोर्स मेजर आदि के फलस्वरूप यदि कोई मदिरा दुकान/दुकानें बन्द की जाती हैं, तो इसके कारण लायसेंसी शेष अवधि हेतु परिगणित बकाया/खिसारा हेतु उत्तरदायी नहीं होगा तथा लायसेंसी को कोई क्षतिपूर्ति की पात्रता नहीं होगी ।
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46. दैवीय प्रकोप, प्राकृतिक आपदा एवं अन्य कारणों से वार्षिक मूल्य में छूट:-
46.1 . लायसेंस अवधि में दैवीय प्रकोप, प्राकृतिक आपदा एवं अन्य कारणों से वैधानिक प्राधिकारी द्वारा मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम , 1915 की धारा 24 ( 1 ) के अंतर्गत स्थापित मदिरा दुकानें बन्द किये जाने के आदेश के कारण अनुज्ञप्तिधारी को उस मदिरा दुकान के वार्षिक मूल्य (वार्षिक लायसेंस फीस में समानुपातिक + न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी राशि में आनुपातिक) में छूट का पात्र माना जा सकेगा । छूट की गणना हेतु उस त्रैमास में देय वार्षिक मूल्य को ही आधार माना जाएगा ।
46.2 . उपर्युक्त परिस्थितियों में लायसेंस अवधि में भॉग दुकानों को बंद करने के आदेश वैधानिक प्राधिकारी द्वारा दिए जाते है, तो इस प्रकार बंद रखी गई भॉग, भाँग घोटा एंव भॉग मिठाई दुकानों को उनकी वार्षिक लायसेंस फीस में समानुपातिक रूप से छूट की पात्रता रहेगी।
46.3. उपर्युक्त परिस्थितियों में लायसेंस अवधि में बार को बंद करने के आदेश वैधानिक प्राधिकारी द्वारा दिए जाते है , तो इस प्रकार बंद रखी गई अवधि हेतु बार लायसेंसी को वार्षिक लायसेंस फीस में समानुपातिक छूट की पात्रता रहेगी । उपर्युक्त अवधि के लिये उसकी निर्धारित न्यूनतम गारंटी में समानुपातिक रूप से कमी की जायेगी ।
46.4. उपरोक्त सभी छूटों के संबंध में जिला निष्पादन समिति द्वारा भेजे गये युक्तियुक्त एवं तथ्यात्मक प्रस्ताव के आधार पर, आबकारी आयुक्त की अनुशंसा पर राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया जा सकेगा । उपरोक्तानुसार अनुमत छूट की राशि का समायोजन मदिरा दुकानों को उसी अथवा आगामी पक्ष में देय न्यूनतम ड्यूटी राशि के विरूद्ध एवं बार/ भॉग दुकानों को आगामी अवधि में देय वार्षिक लायसेंस फीस के विरूद्ध किया जा सकेगा ।
47. शुष्क दिवस : -
47.1 . लायसेंस अवधि के लिए शासन द्वारा अधिसूचित अनुसार 3 शुष्क दिवस निम्नानुसार रहेंगेः-
15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस)
02 अक्टूबर (महात्मा गांधी जयंती)
26 जनवरी (गणतंत्र दिवस)
इसके अतिरिक्त कलेक्टर को प्रशासकीय तथा लोकहित में यह भी अधिकार होगा कि किन्ही भी अतिरिक्त 4 दिनों के लिए किसी भी स्थान की कोई एक या इससे अधिक मदिरा दुकानें अथवा तहसील या जिले की समस्त मदिरा दुकानें बन्द करने के आदेश प्रसारित कर सकेंगे ।
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47.2. लोक सभा तथा विधान सभा एवं स्थानीय स्वायत्त संस्थाओं के साधारण और जनरल उप निर्वाचन के समय मतदान और मतगणना के संबंध में निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप राज्य शासन द्वारा आदेशित/निर्देशित व्यवस्थाओं के परिपालन में, मतदान क्षेत्र की मदिरा दुकानें अथवा मतगणना क्षेत्र की मदिरा दुकानें कलेक्टर द्वारा बन्द किया जाना आदेशित किया जा सकेगा ।
स्थानीय स्वायत्त संस्थाओं में नगर निगम , नगरपालिका, नगर पंचायत (नगर परिषद) , जनपद पंचायत, जिला पंचायतें और ग्राम पंचायत शामिल है । ऐसे समय पर सिर्फ उन्हीं क्षेत्रों की मदिरा दुकानें बन्द रहेगी, जहाँ निर्वाचन हो,
47.3 . यदि उक्त निर्धारित शुष्क दिवसों के अतिरिक्त किसी अन्य दिवस को कलेक्टर के लिखित आदेश से मदिरा दुकानें बन्द की जाती हैं, तो उन मदिरा दुकानों के बन्द रहने की अवधि में संबंधित दुकान के लायसेंसी को मदिरा दुकान के लिए निर्धारित न्यूनतम प्रत्याभूत ड्यूटी की राशि में आनुपातिक तथा लायसेंस फीस में समानुपातिक छूट की पात्रता होगी ।
48. अन्य व्यवस्थाएँ लागू रहना: -
वर्ष 2025-26 में प्रचलित वे समस्त प्रावधान जिनका समावेश वर्ष 2026- 27 की आबकारी व्यवस्था में पृथक से नहीं किया गया है, यथावत प्रभावी बने रहेगे । राजस्वहित एवं प्रशासनिक आवश्यकता अनुसार आबकारी आयुक्त द्वारा शासन अनुमोदन के अधीन प्रावधानों में आवश्यक परिवर्तन किये जा सकेंगे ।
49. क्षतिपूर्ति के संबंध में राज्य शासन के अधिकार : -
राज्य शासन को यह अधिकार होगा कि अपरिहार्य स्थिति में, औचित्य को समझते हुये किसी भी जिले में या समस्त जिलों में मदिरा दुकानों की निष्पादन की प्रक्रिया को सम्पूर्ण/ आंशिक रूप से समाप्त करते हुए, प्रोसेस फीस/शर्तों के पालन में जमा राशि को वापिस कर किसी भी अन्य प्रक्रिया/व्यवस्था से मदिरा की फुटकर बिक्री की दुकानों के व्यवस्थापन/पुनःव्यवस्थापन की कार्यवाही कर सके। ऐसी स्थिति में कोई भी क्षतिपूर्ति देय नहीं होगी ।
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50. ई - आबकारी व्यवस्था: -
50.1 . विभाग में ई - आबकारी व्यवस्था प्रचलन में रहेगी । यह व्यवस्था MPSEDC द्वारा संधारित एवं विभागीय गतिविधियों के End - to - End Computerization से संबंधित है । इस व्यवस्था को क्रियान्वित करने हेतु सभी संबंधित पक्षों यथा विनिर्माता इकाईयाँ, फुटकर अनुज्ञप्तिधारी आदि को आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था स्वयं के व्यय पर अनिवार्यतः करनी होगी ।
50.2 . ई - आबकारी पोर्टल से जारी विभिन्न परिवहन परमिट ( TP ) के स्थान पर e - TP की व्यवस्था लागू की जा सकेगी ।
51. अन्यबिन्दु: -
51.1 . मदिरा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु, उसके सैम्पल्स के विधिवत रसायनिक परीक्षण की दृष्टि से मुख्यालय ग्वालियर स्थित विभाग की शासकीय रसायनशाला का आधुनिकीकरण एवं उन्नयन किया जाएगा तथा भोपाल, इंदौर एवं जबलपुर के संभागीय कार्यालयों में उन्नत तकनीकों/मशीनों से सुसज्जित रसायनशालाएं स्थापित की जाएगी ।
इन रसायनशालाओं में विभागीय कार्यपालिक स्टॉफ को प्रशिक्षण भी दिया जा सकेगा ।
51.2. अवैध मदिरा के उत्पादन, संग्रहण एवं विक्रय पर प्रभावी नियंत्रण की दृष्टि से वर्ष 2026-27 से 10,000 रूपये से अधिक प्रतिपेटी EDP वाली मदिरा की बॉटल पर उसकी वैधता और प्रमाणिकता को सुनिश्चित करने की दृष्टि से अतिरिक्त सिक्योरिटी फीचर के लेबिल लगाये जायेंगे ।
51.3 . अन्य राज्यों एवं देश के बाहर मदिरा के निर्यात (बिजनिस टू बिजनिस) को बढावा देने/प्रोत्साहन देने की दृष्टि से राज्य में स्थित विदेशी मदिरा /बीयर विनिर्माणी इकाइयों में निर्मित विदेशी मदिरा , बीयर , वाईन , आर.टी.डी. आदि को विदेशी मदिरा को सेम्पल के रूप में राज्य में, राज्य के बाहर एवं देश के बाहर के लिये आयोजित कॉन्फ्रेन्स, पब्लिक डिस्प्ले, ब्राण्ड प्रमोशन, प्रदर्शनी आदि इस हेतु संबंधित आयोजनों में भेजने की अनुमति होगी । इस हेतु विस्तृत प्रक्रिया एवं निर्देश आबकारी आयुक्त द्वारा जारी किये जायेंगे ।
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51.4. मिलेट्री, पैरामिलेट्री एवं अन्य सैन्य संस्थाओं को मदिरा प्रदाय हेतु राज्य के बाहर की ईकाइयों द्वारा लेबिल पंजीयन की प्रक्रिया का पुनः निर्धारण आबकारी आयुक्त प्रशासकीय अनुमोदन उपरांत कर सकेंगे ।
52. अनुज्ञप्ति का अधिनियम, नियम एवं निर्देशों के अध्ययधीन होना : - निष्पादन अवधि में स्वीकृत/जारी किये जाने वाले मदिरा की फुटकर बिक्री के सभी लायसेंस मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 (यथा संशोधित) तथा उसके अन्तर्गत बनाये गये एवं समय - समय पर संशोधित किये गये नियमों और समय - समय पर राज्य शासन, आबकारी आयुक्त व कलेक्टर द्वारा पारित आदेशों/अनुदेशों के अध्यधीन रहेंगे ।
53. आबकारी नीति के अनुरूप अधिनियम/नियम/विनियम आदि में परिवर्तन: -
इस आबकारी नीति में किये गये प्रावधानों, जिनका प्रभाव मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 या आबकारी से संबंधित नियमों/विनियमों पर पड़ता है, के अनुरूप अधिनियम/नियम/ विनियमों में संशोधन कर अधिसूचित किया जाकर राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा । इस नीति में प्रयुक्त शब्दों का अर्थ समस्त प्रयोजनों के लिए वही मान्य होगा, जो मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 एवं उसके अंतर्गत बनाये गये नियमों में परिभाषित हो ।
उपरोक्त आबकारी व्यवस्था के अनुसार सर्वसंबंधित द्वारा कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी ।
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
राजेश ओगरे , अपर सचिव.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2026