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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन) नियम, 2026

Published 24 February 2026

Department
वित्त विभाग
Type
Extraordinary
Gazette no.
48
Identifier
in.gazette.madhya.2026-02-24.48.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

शास

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मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 48]

भोपाल , मंगलवार, दिनांक 24 फरवरी 2026- फाल्गुन 5, शक 1947

वित्त विभाग

मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल

क्र. - एफ 9--1-2026- नियम - चार

भोपाल, दिनांक 24 फरवरी 2026

भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , मध्यप्रदेश के राज्यपाल , एतद्वारा , राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के कार्यान्वयन के संबंध में निम्नलिखित नियम बनाते हैं, अर्थात्ः-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.-

( 1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन) नियम, 2026 है ।

(2) ये नियम दिनांक 01 अप्रैल , 2026 से प्रवृत्त होंगे ।

2. परिभाषाएँ.- इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) "संचित पेंशन धन " से अभिप्रेत है , राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अधीन किसी अभिदाता के व्यक्तिगत पेंशन खाते में संचित पेंशन निवेशों का मौद्रिक मूल्य;

(ख) "वार्षिकी" से अभिप्रेत है , संचित पेंशन धन से वार्षिकी क्रय करने पर , वार्षिकी सेवा प्रदाता द्वारा अभिदाता को किया जाने वाला आवधिक भुगतान;

95 96

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

(ग) "वार्षिकी सेवा प्रदाता " से अभिप्रेत है , ऐसी जीवन बीमा कंपनी , जो बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा रजिस्ट्रीकृत और विनियमित है तथा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अभिदाताओं को वार्षिकी सेवाएं प्रदान करने के लिए प्राधिकरण द्वारा सूचीबद्ध है;

( घ) " प्राधिकरण " से अभिप्रेत है , पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम , 2013 की धारा 3 की उप- धारा ( 1 ) के अधीन स्थापित पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण और इसमें संकल्पों के माध्यम से केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित अंतरिम पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण सम्मिलित है ;

(ङ) "केंद्रीय अभिलेख अभिरक्षण अभिकरण " (सी.आर.ए) से अभिप्रेत है, पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम , 2013 की धारा 27 के अधीन रजिस्ट्रीकृत ऐसा अभिकरण , जो अभिदाताओं के लिए योजनाओं का अभिलेख रखने , लेखा , प्रशासन और ग्राहक सेवा के कार्य करता है;

(च) "आहरण एवं संवितरण अधिकारी " से अभिप्रेत है, कार्यालय प्रमुख अथवा अन्य राजपत्रित अधिकारी , जिसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा आहरण एवं संवितरण अधिकारी घोषित किया गया हो;

(छ) " राज्य " से अभिप्रेत है , मध्यप्रदेश राज्य;

( ज) " परिलब्धियाँ " से अभिप्रेत है , नियम 5 में परिभाषित परिलब्धियाँ;

(झ ) "बाह्य सेवा " से अभिप्रेत है, वह सेवा , जिसमें शासकीय सेवक अपना वेतन राज्य की संचित निधि से न लेकर शासन की स्वीकृति से किसी अन्य स्त्रोत से प्राप्त करता है;

( ञ) "शासन" से अभिप्रेत है , मध्यप्रदेश शासन;

(ट) "विभागाध्यक्ष" में सम्मिलित है-

(एक) वे अधिकारी , जो राज्य शासन द्वारा विभागाध्यक्ष घोषित किए गए हैं,

(दो) अन्य कोई प्राधिकारी , जिसे राज्य शासन , विभागाध्यक्ष ,की शक्तियाँ प्रत्यायोजित करे ;

(ठ) " कार्यालय प्रमुख " से अभिप्रेत है-

(एक) ऐसा अधिकारी , जिसे मध्यप्रदेश वित्तीय शक्तियों की पुस्तिका- 2025 के खंड 1 के सरल क्रमांक 1.2 के अधीन कार्यालय प्रमुख घोषित किया गया हो अथवा ऐसे कार्यालय का प्रमुख , जहां शासकीय सेवकों के सेवा अभिलेख , सेवानिवृत्ति के समय संधारित हो रहे हैं,

(दो) यदि शासकीय सेवक स्वयं कार्यालय प्रमुख है , तब उसके लिए कार्यालय प्रमुख , विभागाध्यक्ष अथवा विभागाध्यक्ष द्वारा अधिकृत किया गया वह अधिकारी होगा , जो संबंधित शासकीय सेवक से उच्च पद धारित करता हो;

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 फरवरी 2026

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(ड) "व्यक्तिगत पेंशन खाता " से अभिप्रेत है, किसी अभिदाता का खाता , जिसे राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अधीन निबंधन और शर्तों को स्थापित करने वाली संविदा द्वारा निष्पादित किया जाता है;

(ढ) "शासन द्वारा नियंत्रित स्थानीय निधि" से अभिप्रेत है, विधि अथवा विधि का प्रभाव रखने वाले नियम के द्वारा शासन के नियंत्रणाधीन ऐसे किसी संकाय की स्थानीय निधि , जिसके व्यय पर शासन का पूर्ण और सीधा नियंत्रण हो;

( ण) " राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली" से अभिप्रेत है , पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम , 2013 की धारा 20 में निर्दिष्ट अंशदायी पेंशन प्रणाली जिसमें पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण के विनियमों द्वारा यथाविनिर्दिष्ट पॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस ( PoP ) पद्धति, केंद्रीय अभिलेख अभिरक्षण अभिकरण और पेंशन निधियों का उपयोग करके किसी अभिदाता के अंशदानों को व्यक्तिगत पेंशन खाते में संग्रहित और संचित किया जाता है;

(त) "कोषालय अधिकारी " से अभिप्रेत है, कोषालय का भारसाधक अधिकारी;

( थ) "पेंशन निधि प्रबंधक से अभिप्रेत है , ऐसा मध्यस्थ जिसे पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम , 2013 की धारा 27 की उप- धारा (3 ) के अधीन, विनियमों द्वारा , यथाविनिर्दिष्ट रीति से, अंशदान प्राप्त करने , उन्हें जमा करने और अभिदाता को भुगतान करने के लिए पेंशन निधि प्रबंधक के रूप में प्राधिकरण द्वारा रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है ;

(द) "व्यक्तिगत पेंशन खाता संख्या" से अभिप्रेत है , केंद्रीय अभिलेख अभिरक्षण अधिकरण द्वारा प्रत्येक अभिदाता को आबंटित विशिष्ट पहचान संख्या जिसे आगे "प्रान " कहा जाएगा;

(ध) "अभिदाता " से अभिप्रेत है , ऐसा शासकीय सेवक जो पेंशन निधि की योजना के लिए अभिदाय करता है;

(न) "न्यासी बैंक " से अभिप्रेत है, बैंककारी विनियमन अधिनियम , 1949 में परिभाषित बैंककारी कंपनी;

(2) उन शब्दों और अभिव्यक्तियों के जो इन नियमों में प्रयुक्त हुए हैं परंतु परिभाषित नहीं किए गए हैं, किन्तु मध्यप्रदेश मूलभूत नियम , मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

96(2)

सिविल सेवा (पेंशन) नियम , 2026 , पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2013 या पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण विनियमों में परिभाषित किए गए हैं, क्रमशः वही अर्थ होंगे जो उक्त अधिनियमों या नियमों या विनियमों में उनके लिए समनुदेशित किए गए हैं ।

3. प्रयुक्ति (Application ) .- इन नियमों में अन्यथा उपबंधित के सिवाय , ये नियम निम्नलिखित को लागू होंगे: -

(

एक) 1 जनवरी, 2005 को या उसके पश्चात्, शासन से संबंधित सिविल सेवाओं के पदों पर नियुक्त शासकीय सेवकों पर,

(दो) शासन द्वारा समय - समय पर जारी आदेशों के द्वारा सम्मिलित कार्मिको परः

परन्तु, यह ऐसे व्यक्तियों पर लागू नहीं होंगे , जिनकी सेवा के निबंधन और शर्तें तत्समय प्रवृत्त किन्हीं अन्य नियमों द्वारा विनियमित होती हैं ।

4. राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में रजिस्ट्रीकरण.-

(1 ) ऐसे शासकीय सेवक, जिसे ये नियम लागू होते हैं, सेवा में कार्यग्रहण करते समय राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में ऑनलाईन रजिस्ट्रीकरण के लिए सामान्य अभिदाता रजिस्ट्रीकरण प्ररूप ( सी.एस.आर.एफ -1) में या प्राधिकरण द्वारा विनिर्दिष्ट किसी अन्य प्ररूप में , जानकारी आहरण एवं संवितरण अधिकारी को प्रस्तुत करेगा ।

(2) आहरण एवं संवितरण अधिकारी शासकीय सेवक से प्राप्त जानकारी की प्रविष्टि कोषालयीन कम्प्यूटर प्रणाली में करेगा तथा जिला कोषालय को ऑनलाईन प्रेषित करेगा तथा उप - नियम ( 1 ) के अधीन प्रस्तुत सीएसआरएफ -1 या विनिर्दिष्ट अन्य प्ररूप को शासकीय सेवक के सेवा अभिलेख में रखेगा ।

(3 ) कोषालय अधिकारी , उप- नियम (2 ) अनुसार प्राप्त प्ररूप कोषालय कम्प्यूटर प्रणाली में अनुमोदित करेगा एवं केन्द्रीय अभिलेख अभिरक्षण अभिकरण को आनॅलाइन प्रेषित करेगा ।

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

96(3)

(4) केन्द्रीय अभिलेख अभिरक्षण अभिकरण द्वारा व्यक्तिगत सेवानिवृत्ति पेंशन खाता संख्या आबंटित की जाएगी तथा शासकीय सेवक को व्यक्तिगत सेवानिवृत्ति पेंशन खाता संख्या किट एवं जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

(5) ऐसे शासकीय सेवक , जो पूर्व में केंद्र सरकार, अन्य राज्य सरकार अथवा राज्य शासन में किसी पद पर अथवा स्वशासी संस्था के किसी पद पर नियुक्त रहा हो एवं जिसे पूर्व में व्यक्तिगत सेवानिवृत्ति पेंशन खाता संख्या आबंटित हुआ हो, उसे पुनः पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी

5. परिलब्धियां.-

(1 ) राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अधीन अनिवार्य अंशदान की राशि अवधारित करने के प्रयोजनार्थ अभिव्यक्त ' परिलब्धियां' में मध्यप्रदेश मूलभूत नियम के नियम 9 (21 ) में यथा परिभाषित मासिक वेतन , जैसा कि शासनद्वारा समय - समय पर पारित आदेश के द्वारा अवधारित किया जाए, स्वीकार्य महँगाई भत्ता एवं अव्यवसायिक भत्ता, यदि देय हो, सम्मिलित है ।

(2) कोई अभिदाता जो ऐसे अवकाश पर था जिसके लिए अवकाश वेतन देय है उसकी "परिलब्धियां ", अवकाश के दौरान वास्तव में आहरित परिलब्धियां होगी ।

(3) कोई अभिदाता किसी कैलेंडर माह के पूरे या किसी भाग के दौरान कर्तव्य से अनुपस्थितया असाधारण अवकाश पर था, तो माह के उस भाग के लिए वास्तव में आहरित वेतन एवं महँगाई भत्ता परिलब्धियां होंगी ।

6. सेवानिवृत्ति के पश्चात् अनुशासनिक कार्यवाही.-

(1) जब किसी विभागीय या न्यायिक कार्यवाही में सेवानिवृत्त अभिदाता के बारे में यह पाया जाए कि वह अपने सेवाकाल में गंभीर अवचार का दोषी रहा है, ऐसे मामलों में अनुशासनिक कार्यवाही निम्नांकित अनुसार की जासकेगी:-

(क) राज्यपाल द्वारा , किसी ऐसे सेवानिवृत्त अभिदाता के मामले में, जो उस पद से सेवानिवृत्त हुआ जिसके लिए राज्यपाल, नियुक्ति प्राधिकारी है , मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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(ख ) प्रशासनिक विभाग के भारसाधक सचिव द्वारा , किसी ऐसे सेवानिवृत्त अभिदाता के मामले में , जो उस पद से सेवानिवृत्त हुआ जिसके लिए राज्यपाल के अधीनस्थ प्राधिकारी , नियुक्ति प्राधिकारी हैं:

परंतु उप - नियम ( 1 ) के खण्ड (क) के अधीन राज्यपाल द्वारा कोई भी अंतिम आदेश पारित करने से पूर्व लोक सेवा आयोग से परामर्श किया जाएगा ।

(2) (क) यदि उप - नियम ( 1 ) में निर्दिष्ट विभागीय कार्यवाही , उस समय , जब अभिदाता, सेवा में रहा हो, चाहे उसकी सेवानिवृत्ति से पूर्व , संस्थित की गई हो, तो उस कार्यवाही के बारे में , अभिदाता के अंतिम रूप से सेवानिवृत्त हो जाने के पश्चात्, यह समझा जाएगा कि वह मध्यप्रदेश सिविल सेवा ( वर्गीकरण नियंत्रण और अपील) नियम , 1966 के अधीन की गई कार्यवाही है और वह उस प्राधिकारी द्वारा , जिसके द्वारा वह प्रारंभ की गई थी, उसी रीति से जारी रखी जाएगी और उन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा , मानो वह अभिदाता सेवा में बना रहा होः

परंतु, जहाँ कि विभागीय कार्यवाही उप - नियम ( 1 ) के अधीन आदेश पारित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी के किसी अधीनस्थ प्राधिकारी द्वारा संस्थित की जाए , वहां वह प्राधिकारी अपने निष्कर्षों को अभिलिखित करते हुए एक प्रतिवेदन उक्त सक्षम प्राधिकारी को देगा और उक्त सक्षम प्राधिकारी उप - नियम ( 1 ) के प्रावधानों के अनुरूप उस पर अंतिम निर्णय लेगा ।

( ख) उप - नियम ( 1 ) और उप - नियम (2) के खंड (क) में वर्णित किसी बात के होते हुए भी, यदि विभागीय कार्यवाही , मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण , नियंत्रण और अपील) नियम , 1966 के नियम -16 के अधीन तब संस्थित की गई , जब शासकीय सेवक, सेवा में था और सेवानिवृत्ति के पश्चात् भी जारी रही, तो सेवानिवृत्त अभिदाता की वार्षिकी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा;

( ग) विभागीय कार्यवाही, उस समय , जब अभिदाता , सेवा में था, चाहे उसकी सेवानिवृत्ति से पूर्व, संस्थित न की गई हो, तो वह, मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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(एक) उप- नियम (1 ) के अधीन आदेश पारित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना संस्थित नहीं की जाएगी;

(दो) ऐसी किसी घटना की बाबत नहीं होगी , जो उक्त संस्थिति से चार वर्ष से अधिक पहले घटी हो, और

(तीन) ऐसे प्राधिकारी द्वारा और ऐसे स्थान में, जिनके बारे में उप- नियम ( 1 ) के अधीन आदेश पारित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी निर्देश दे और ऐसी प्रक्रिया के अनुसार संचालित की जाए , जो ऐसी विभागीय कार्यवाही पर लागू होती हो, जिसमें अभिदाता के संबंध में सेवा से पदच्युति का आदेश उसकी सेवा के दौरान दिया जा सकता होः

परंतु इस उप - नियम के अधीन विभागीय कार्यवाही संस्थित करने के प्रयोजन से संबंधित सेवानिवृत्त अभिदाता को आरोपों का ज्ञापन भेजा जाएगा ।

(घ) जहां मध्यप्रदेश सिविल सेवा ( वर्गीकरण , नियंत्रण और अपील) नियम , 1966 के अनुसार कार्यवाही के दौरान सेवानिवृत्त अभिदाता को पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर देते हुए जांच की जाती है, तो उप- नियम ( 1 ) के अधीन कार्यवाही करने से पूर्व उसे अपना पक्ष पुनः प्रस्तुत करने का अवसर देना आवश्यक नहीं होगा ।

(3) (क) जहां कि उप - नियम ( 1 ) के अधीन आदेश पारित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी धन संबंधी हानि की वसूली के आदेश दे , वहां वह वसूली अभिदाता से की जाएगी ।

(ख) इस नियम के अधीन राज्यपाल द्वारा किए गए किसी भी आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं की जाएगी ।

(ग) राज्यपाल से भिन्न किसी प्राधिकारी द्वारा उप - नियम ( 1 ) के अधीन पारित किसी आदेश के विरुद्ध अपील , राज्यपाल को की जाएगी और राज्यपाल अपील पर ऐसे आदेश पारित करेंगे , जो वह उपयुक्त समझे ।

(4) ( क) राज्यपाल , किसी भी समय , स्वप्रेरणा से या अन्यथा , किसी जांच के अभिलेखों को मांग सकते हैं और लोक सेवा आयोग से परामर्श मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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करके इन नियमों के अधीन किए गए किसी भी आदेश का पुनरीक्षण कर सकते हैं और आदेश की पुष्टि, उपांतरण या उसे अपास्त कर सकते हैं या मामले को किसी प्राधिकारी को यह निर्देश देते हुए वापस कर सकते हैं, कि वह आगे ऐसी जांच करे , जो वह मामले की परिस्थितियों में उपयुक्त समझे या ऐसे अन्य आदेश पारित कर सकते हैं , जैसे वह ठीक समझें:

परंतु शास्ति में वृद्धि करने वाला कोई आदेश राज्यपाल द्वारा तब तक नही दिया जाएगा , जब तक कि संबंधित अभिदाता को प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध अभ्यावेदन करने का उचित अवसर नहीं दिया जाता है ।

स्पष्टीकरण- इस नियम के प्रयोजन के लिए (1 ) (क) विभागीय कार्यवाही, उस दिनांक को, जिस दिनांक को आरोप पत्र /आरोप ज्ञाप मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण , नियंत्रण एवं अपील) नियम , 1966 के नियम-14 अथवा 16 के अतंर्गत अभिदाता या सेवानिवृत्त अभिदाता को जारी किया गया है अथवा यदि अभिदाता किसी पूर्वत्तर दिनांक से निलंबित कर दिया गया है, तो ऐसी दिनांक को संस्थितसमझी जाएगी;

(ख) न्यायिक कार्यवाही-

(

एक) दांडिक कार्यवाही, उस दिनांक को संस्थित हुई समझी जाएगी जिस दिनांक को किसी पुलिस अधिकारी को शिकायत या रिपोर्ट , जिसका कि मजिस्ट्रेट संज्ञान करता है, की गई हो । "दाण्डिक कार्यवाही " से अभिप्रेत है, अभिदाता के कर्तव्य निष्पादन के दौरान घटित आपराधिक कृत्यों के लिए शासन द्वारा दायर दाण्डिक वाद, और

(दो) सिविल कार्यवाही, उस दिनांक को संस्थित हुई समझी जाएगी जिस दिनांक को वादपत्र न्यायालय में पेश किया जाता है । "सिविल कार्यवाही " से केवल ऐसी कार्यवाही अभिप्रेत है , जो शासन द्वारा दायर सिविल वाद की बाबत हो ।

(5 ) इस नियम में, गंभीर " अवचार " से अभिप्रेत है, सेवानिवृत्त अभिदाता द्वारा सेवा की अवधि के दौरान , किया गया कोई ऐसा कृत्य , जो मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण ) नियम , 1965 के उपबंधों का उल्लंघन था और जिसके लिए सेवा की अवधि के दौरान मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम , 1966 के अधीन कार्यवाही की जासकती है ।

(6) अभिदाता द्वारा , अपने व्यक्तिगत दावों के लिए दायर किए गए वादों को न्यायिक कार्यवाही नहीं माना जाएगा ।

7. सेवा के दौरान संस्थापित विभागीय/न्यायिक कार्यवाहियों में वार्षिकी का भुगतान.-

( 1 ) राज्य शासन , शासन को कारित संपूर्ण धन की हानि या उसके किसी भाग की वसूली के प्रयोजन के लिए अभिदाता के राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली खाते के टीयर -1 खाते में नियोजक के रूप में राज्य शासन द्वारा किए गए सह अभिदाय के माध्यम से संचित पेंशन धन का भाग तथा उस पर उपार्जित प्रतिलाभ को रोकने का अधिकार रखता है , परन्तु ऐसी हानि शासन द्वारा ऐसे अभिदाता के विरुद्ध आरंभ की गई किसी विभागीय या न्यायिक कार्यवाहियों में सिद्ध होनी चाहिए ।

राज्य शासनद्वारा , अभिदाता के संचित पेंशन धन से शासन को कारित धन की हानि की वसूली के उद्देश्य से, संचित पेंशन धन का भुगतान रोके जाने की सूचना, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली न्यास या किसी ऐसी इकाई को, जिसे ऐसा प्राधिकार दिया गया है , को दी जाएगी । शासनद्वारा ऐसे अधिकार का प्रयोग अभिदाता की अधिवर्षिता की दिनांक से पहले किया जाएगा। रोकने के ऐसे अधिकार का विधिमान्यतः प्रयोग किए जाने पर:-

(एक) ऐसा पेंशन धन , जो राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अधीन भुगतान योग्य है, अभिदाता को तब तक भुगतान नहीं किया जाएगा, जब तक, यथास्थिति, विभागीय या न्यायिक कार्यवाहियों के संबंध में अंतिम आदेश पारित नहीं कर दिया जाता;

(दो) उपखंड (एक) में यथाविनिर्दिष्ट रोकी गई राशि, स्कीम में, ऐसी पद्धति और रीति में अभिदाय के रूप में बनी रहेगी , जिसमें शासन द्वारा ऐसी कार्रवाई को अपनाकर रखा गया था।

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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(तीन) रोकी गई रकम में से, वसूली जाने वाली राशि के अंतिम निर्धारण के आदेश प्राप्त होने पर, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली न्यास या प्राधिकरण द्वारा इस प्रयोजन के लिए प्राधिकृत किसी मध्यवर्ती या अन्य इकाई द्वारा वसूली योग्य राशि का भुगतान शासन के खाते में किया जाएगा तथा शेष पेंशन धन का, आदेश प्राप्त होने के 90 दिवस की समय सीमा में अभिदाता को भुगतान किया जाएगा।

8. राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में अभिदाता द्वारा अंशदान.-

( 1 ) ( एक) राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली परिभाषित अंशदान के आधार पर कार्य करेगी । राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के लिए अभिदाता प्रतिमाह अपनी परिलब्धियों का दस प्रतिशत या समय - समय पर राज्य शासन द्वारा यथा अधिसूचित प्रतिशत के आधार पर अंशदान करेगा। देय अंशदान की राशि को रुपये के अगले उच्च पूर्ण रूपये तक पूर्णांकित किया जाएगा ।

(दो) अंशदान अभिदाता के कार्यभार ग्रहण तिथि से देय होगा ।

(2) निलंबन की अवधि के दौरान , अभिदाता द्वारा अंशदान वैकल्पिक होगा , जो निलंबन अवधि की परिलब्धियों पर संगणित होगा:

परंतु जहां , जाँच के निष्कर्ष पर नियुक्तिकर्ता दंडादेश पारित करने के लिए सक्षम अधिकारी द्वारा अंतिम आदेश में , निलंबन के अधीन व्यतीत की गई अवधि को, कर्तव्य के रूप में या अवकाश पर , जिसके लिए अवकाश वेतन देय है, माना गया हो, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में अंशदान का निर्धारण उन परिलब्धियों पर आधारित होगा , जिनके लिए अभिदाता हकदार हो जाता है । अंशदान की जमा की जाने वाली राशि और निलंबन की अवधि के दौरान पहले से जमा की गई राशि के अंतर को अभिदाता के व्यक्तिगत पेंशन खाते में जमा किया जाएगा ।

(3) कर्तव्य से अनुपस्थिति की अवधि के दौरान, जिसके लिए कोई वेतन देय नहीं है, अभिदाता द्वारा कोई अंशदान नहीं किया जा सकेगा ।

(4) पूर्वव्यापी वृद्धि के कारण अभिदाता द्वारा अभिप्राप्त वेतन के किसी भी बकायों के संबंध में किया गया अंशदान उस माह के अंशदान के रूप में माना जाएगा, जिसमें उसका भुगतान किया जाता है ।

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 फरवरी 2026

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(

5) कोई अभिदाता उप - नियम (1 ) में विनिर्दिष्ट अंशदान से अधिक अंशदान नहीं कर सकेगा ।

(6) अभिदाता अंशदान का कटौत्रा अभिदाता की अधिवार्षिकी के तीन माह पूर्वसे बंद कर दिया जाएगा।

9. नियोक्ता द्वारा अंशदान.-

( 1 ) प्रत्येक माह अभिदाता के व्यक्तिगत पेंशन खाते में , अभिदाता की परिलब्धियों का चौदह प्रतिशत या समय - समय पर राज्य शासन द्वारा अधिसूचित दर से, अंशदान किया जाएगा । अंशदान की देय राशि को रुपये के अगले पूर्ण रूपये में पूर्णांकित किया जाएगा;

(2) अभिदाता के निलंबन के अधीन होने की दशा में शासन द्वारा ऐसे निलंबन की अवधि के दौरान अभिदाता को दिए जाने वाले निर्वहन भत्ते को ध्यान में रखते हुए अवधारित की गई परिलब्धियों के आधार पर अंशदान किया जाएगा:

परंतु निलंबन की अवधि के दौरान शासन द्वारा कोई अंशदान नहीं किया जाएगा , जहां अभिदाता ने निलंबन की अवधि के दौरान अपने अंशदान का भुगतान नहीं करने का विकल्प चुना थाः

परंतु जहां जाँच के निष्कर्ष पर शासन द्वारा पारित अंतिम आदेशों में निलंबन के दौरान अवधि को कर्तव्य के रूप में या अवकाश माना जाता है , जिसके लिए अवकाश वेतन देय है, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के लिए शासन द्वारा अंशदान का निर्धारण उन परिलब्धियों के आधार पर किया जाएगा , जिसके लिए अभिदाता निलंबन की अवधि के लिए हकदार हो जाता है ।

(3) बाह्य सेवा में पदस्थ अभिदाता का नियोक्ता अंशदान, उस नियोजक द्वारा , जहां पर अभिदाता बाह्य सेवा में पदस्थ किया गया है, उस दर पर दिया जाएगा , जो उसे उस समय देय होता यदि उसे बाह्य सेवा में पदस्थ नहीं किया जाता ।

10. अंशदान के विलंब से जमा होने पर ब्याज.-

( 1 ) राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में अभिदाता के रजिस्ट्रीकरण में विलंब होने के कारण शासकीय अंशदान विलंब से जमा होने की दशा में , उन प्रकरणों को मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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छोड़कर , जिसमें अभिदाता विलंब के लिए जिम्मेदार है , अभिदाता को सामान्य भविष्य निधि निक्षेपों के लिए शासन द्वारा समय - समय पर यथा विनिश्चित ब्याज की दर से शासन द्वारा देय अंशदान पर ब्याज देय होगा;

(2) (एक) ब्याज का निर्धारण एवं भुगतान की स्वीकृति अभिदाता के विभाग के विभागाध्यक्ष द्वारा दी जाएगी;

(दो) विभागाध्यक्ष द्वारा ऐसे प्रत्येक मामले में , जहां ब्याज का भुगतान देय हुआ है , यह जांच की जाएगी , कि विलंब प्रशासकीय चूक के कारण तो नहीं हुआ है;

(

तीन) यदि विभागाध्यक्ष का यह समाधान हो जाता है कि प्रशासनिक चूक के कारण विलंब हुआ है , तो ब्याज के भुगतान के कारण शासन को हुए आर्थिक नुकसान की राशि अथवा उसके कुछ अंश की वसूली विलंब के लिए दोषी शासकीय सेवकों से की जाएगी ।

11. संचित पेंशन धन का निवेश. किसी अभिदाता के संबंध में संचित पेंशन धन को, ऐसी पेंशन निधि या निधियों द्वारा और ऐसी रीति से निवेश किया जा सकेगा, जो शासन द्वारा अधिसूचित किया जाए ।

12. सेवा के दौरान अभिदाता की मृत्यु होने पर हितलाभ.-

( 1 ) राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अधीन आने वाले ऐसे अभिदाता , जिसके द्वारा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत 10 वर्ष से अनधिक अवधि के लिए अंशदान जमा किया गया है, की सेवा में रहते हुये मृत्यु होने की दशा में उसके परिवार के पात्र सदस्यों को परिवार पेंशन की पात्रता होगी:

परन्तु, अभिदाता के राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत संचित धन में शासकीय अंशदान और उस पर देय प्रतिलाभ शासन के खाते में अंतरित हो जाएगा तथा अभिदाता का स्वयं का अंशदान एवं उस पर देय प्रतिलाभ का भुगतान उस व्यक्ति को किया जाएगा , जिसके पक्ष में नाम निर्देशन किया गया है । यदि ऐसा कोई नाम निर्देशन नहीं है या यदि किया गया नाम निर्देशन अस्तिव में नहीं है, तो भुगतान विधिक उत्तराधिकारी को किया जाएगा ।

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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(2) उप - नियम ( 1 ) के अधीन परिवार पेंशन मृत अभिदाता के परिवार को यथास्थिति, अभिदाता की मृत्यु की दिनांक के अगले दिन से देय होगी, बशर्ते कि नियुक्ति के समय उसका चिकित्सीय परीक्षण हुआ था तथा शासन के अधीन नियुक्ति के लिए उपयुक्त पाया गया था ।

(3) (एक) उप- नियम ( 1 ) के अधीन , परिवार पेंशन की न्यूनतम और अधिकतम राशि वह होगी, जो शासन समय समय पर निर्धारित करे ।

(दो) जहां किसी अभिदाता की उप - नियम ( 1 ) अनुसार सेवा में रहते हुए मृत्यु हो जाती है अथवा सेवानिवृत्ति के पश्चात् होती है , उसके परिवार को संदेय परिवार पेंशन की दर , अंतिम परिलब्धियों (नियम -5 में यथापरिभाषित) के पचास प्रतिशत के बराबर होगी और ऐसी अनुज्ञेय रकम अभिदाता की मृत्यु की दिनांक के ठीक अगली दिनांक से सात साल की अवधि के लिए संदेय होगी ।

(तीन) उपखण्ड- (दो) की स्थिति छोड़कर परिवार पेंशन की संगणना अंतिम परिलब्धियों (नियम -5 में यथा परिभाषित ) के 30 प्रतिशत की दर से की जाएगीः

परन्तु यह राशि न्यूनतम परिवार पेंशन, जैसा शासन समय -समय पर निर्धारित करे , से कम नहीं होगी ।

(4) इन नियमों के लागू होने की तिथि या उसके पश्चात् परिवार पेंशन के लिए परिवार के पात्र सदस्यों को परिवार पेंशन की पात्रता उप - नियम 6 से उप - नियम 10 के उपबन्धों के अधीन होगी ।

(5) उप - नियम (2) के अधीन अनुज्ञेय परिवार पेंशन मासिक दरों पर निर्धारित की जाएगी और पूरे - पूरे रुपए में अभिव्यक्त की जाएगी । जहां परिवार पेंशन में राशि का कोई भाग हो , उसे अगले उच्चतर राशि में पूर्णांकित कर दिया जाएगा:

परंतु किसी भी दशा में उप - नियम (2 ) के अधीन अनुज्ञेय परिवार पेंशन , इन नियमों के अधीन विहित अधिकतम राशि से अधिक नहीं होगी ।

(6) उस अभिदाता का परिवार , जिसकी मृत्यु " कार्यालय की जोखिम " अथवा कार्यालय की विशेष जोखिम के परिणामस्वरूप हुई है, जैसा कि मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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मध्यप्रदेश सिविल सेवा (असाधारण पेंशन) नियम , 1963 में परिभाषित है, इस नियम के अधीन परिवार पेंशन के लाभों का हकदार नहीं होगा। इसी प्रकार अभिदाता, जो मध्यप्रदेश पुलिस शासकीय सेवक वर्ग (असाधारण परिवार पेंशन) नियम , 1965 के अधीन असाधारण पेंशन लाभों का हकदार है, इस नियम के अधीन परिवार पेंशन के लाभों का हकदार नहीं होगा ।

(7) (क) मृत अभिदाता के परिवार के सदस्यों को परिवार पेंशन निम्नानुसार क्रम में संदेय होगी, अर्थात्ः-

(एक) उप - नियम (8 ) के उपबंधों के अधीन , पति या पत्नी , (दो) उप- नियम (9 ) के उपबंधों के अधीन , संतान (दत्तक संतान और सौतेले संतान भी सम्मिलित हैं) ,

(तीन) उप - नियम ( 10 ) के उपबंधों के अधीन , मृत अभिदाता के क्रमशः आश्रित माता , पिता,

(चार) उप - नियम ( 11 ) के उपबंधों के अधीन, मृत अभिदाता के आश्रित सहोदर (अर्थात् भाई या बहन) , जो किसी मानसिक या शारीरिक निःशक्तता से ग्रस्त हों ।

(ख

) जहां , किसी महिला अभिदाता द्वारा पति के विरुद्ध तलाक की कार्यवाही सक्षम न्यायालय में लंबित है या महिला अभिदाता ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम या दहेज प्रतिषेध अधिनियम या भारतीय न्याय संहिता के अधीन अपने पति के विरुद्ध मामला दायर किया है, तो उक्त महिला अभिदाता, संबंधित पेंशन प्रस्तावक अधिकारी को लिखित रूप में इस आशय का अनुरोध कर सकती है कि , उपरोक्त किसी भी कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान उसकी मृत्यु होने की स्थिति में , परिवार पेंशन उसके पति से पूर्व , उसकी पात्र संतान को स्वीकृत की जाए तथा पात्र संतान के नहीं रहने पर पात्रता क्रम निम्नानुसार होगा: - (एक) जहां मृत महिला अभिदाता का उत्तरजीवी विधुर हो और महिला अभिदाता की मृत्यु होने की दिनांक पर कोई संतान/संतानें परिवार पेंशन के लिए पात्र नहीं है , तो विधुर को परिवार पेंशन देय होगी ।

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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(दो) जहां मृत महिला अभिदाता का उत्तरजीवी विधुर हो और उसके साथ अवयस्क संतान हो या मानसिक मंदता सहित किसी मानसिक विकार या निःशक्तता से ग्रस्त कोई संतान हो , तो मृत महिला अभिदाता की परिवार पेंशन विधुर को देय होगी , बशर्ते वह ऐसी संतान का संरक्षक हो और यदि विधुर ऐसी संतान का संरक्षक नहीं बना रहता , तो ऐसी परिवार पेंशन उस संतान को, उस व्यक्ति के माध्यम से देय होगी , जो ऐसी संतान का वस्तुतः संरक्षक हो । जहां अवयस्क संतान वयस्कता की आयु प्राप्त करने के पश्चात् परिवार पेंशन के लिए पात्र रहती है, ऐसी संतान को उसके वयस्कता की आयु प्राप्त करने की दिनांक से परिवार पेंशन देय हो जाएगी ।

(तीन) परिवार पेंशन के लिए सभी संतानों की पात्रता समाप्त होने के पश्चात्, ऐसी परिवार पेंशन विधुर को, उसकी मृत्यु या पुनर्विवाह होने तक, जो भी पहले हो , देय होगी ।

(8) (एक) इस उप - नियम के खंड (दो) तथा (चार) के अध्यधीन परिवार पेंशन एक ही समय में मृत अभिदाता के परिवार के एक से अधिक सदस्य को संदेय नहीं होगी ।

(दो) जहां परिवार पेंशन परिवार के एक से अधिक सदस्य को एक ही समय में देय होगी , यह बराबर अंशों में दी जाएगी और यदि परिवार पेंशन के अंश में राशि का कोई भाग हो, तो उसे अगले उच्चतर राशि में पूर्णांकित कर दिया जाएगा ।

(तीन) यदि मृत अभिदाता, अपने पीछे पति अथवा पत्नी को छोड़ जाए , तो परिवार पेंशन उप - नियम (2) में विनिर्दिष्ट दर पर , ऐसे पति अथवा पत्नी की मृत्यु की दिनांक तक या पुनर्विवाह होने तक, जो भी पहले हो , देय होगी और परिवार पेंशन के लिए पति अथवा पत्नी की पात्रता उसकी अन्य स्रोत से आय की राशि से प्रभावित नहीं होगी ।

(चार) जहां किसी मृत अभिदाता की परिवार के लिए किसी पात्र संतान के बिना कोई उत्तरजीवी विधवा हो, किंतु उसके किसी पूर्व पत्नी से, जो जीवित नहीं है, पात्र संताने हैं, तो उप - नियम (9 ) में उल्लिखित मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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पात्रता शर्तों को पूरा करने वाली संतानें जन्म के क्रम में परिवार पेंशन के 50 % अंश की हकदार होंगी, जो उनकी माता को उस दशा में मिलता, जब वह उस अभिदाता की मृत्यु के समय जीवित होती । ऐसी संतान को या विधवा को देय परिवार पेंशन का अंश का संदाय बंद होने पर , ऐसे अंश समाप्त नहीं होंगे , अपितु उप- नियम (9 ) के अनुसार इसके पात्र परिवार पेंशनभोगी को शत प्रतिशत अंश देय होगा:

परंतु यदि मृत अभिदाता परिवार पेंशन के लिए पात्र संतान सहित विधवा को छोड़ जाता है , तो विधवा की मृत्यु होने पर उसको देय परिवार पेंशन के अंश उप- नियम (9 ) के अनुसार उसकी संतानों को जन्म क्रम में देय होंगे;

(पांच) जहां मृत अभिदाता परिवार पेंशन के लिए किसी पात्र संतान के बिना ही विधवा छोड़ जाता है, किंतु उसके किसी अन्य पत्नी से, जो जीवित नहीं है या जिससे तलाक हो चुका हो या अमान्य या अमान्यकरणीय विवाह से जन्मी पात्र संतान उप- नियम ( 9 ) में उल्लिखित पात्रता शर्तों को पूरा करती है , तब परिवार पेंशन के अंश के लिए वह पात्र होगी;

(छह) जहां कोई मृत अभिदाता, विधिक रूप से पृथक्कृत पति अथवा पत्नी के साथ किसी अवयस्क संतान या मानसिक मंदता सहित किसी भी मानसिक विकार या निःशक्तता से ग्रस्त संतान को अपने पीछे छोड़ जाता है, तब पेंशन विधिक रूप से पृथक्कृत पति अथवा पत्नी को देय होगी , बशर्ते वह ऐसी संतान का संरक्षक हो और ऐसी संतान के लिए उत्तरजीवी व्यक्तिके संरक्षक न बने रहने पर , ऐसी परिवार पेंशन उस व्यक्ति को संदेय होगी , जो ऐसी संतान का संरक्षक हो;

(सात) जहां कोई मृत अभिदाता विधिक रूप से पृथक्कृत पति अथवा पत्नी के साथ किसी ऐसे संतान को अपने पीछे छोड़ जाता है , जो वयस्कता की आयु प्राप्त कर चुका है, किंतु परिवार पेंशन के लिए पात्र है, तो अभिदाता के मृत्यु के पश्चात् परिवार पेंशन , ऐसी संतान को देय होगी ।

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(9) (क) यदि मृत अभिदाता की कोई उत्तरजीवी विधवा या विधुर नही है अथवा यदि विधवा या विधुर की मृत्यु हो जाती है अथवा परिवार पेंशन के लिए पात्रता समाप्त हो जाती है, तो उप- नियम (2) में विनिर्दिष्ट दर पर परिवार पेंशन ऐसी संतान या संतानों को देय होगी, जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा करते हों: -

(एक) पुत्र (मानसिक या शारीरिक निःशक्तता से ग्रस्त पुत्र के अलावा) (दत्तक पुत्र, सौतेला पुत्र , सेवानिवृत्ति के पश्चात् जन्मा पुत्र सम्मिलित है) की दशा में - अविवाहित, पच्चीस वर्ष से कम आयु और अपनी आजीविका का उपार्जन नहीं करता हो,

(दो) पुत्री (मानसिक या शारीरिक निःशक्तता से ग्रस्त पुत्री के अलावा) (दत्तक पुत्री, सौतेली पुत्री की सेवानिवृत्ति के पश्चात् जन्मी पुत्री सम्मिलित है) की दशा में, अविवाहित या विधवा या तलाकशुदा और जो अपनी आजीविका का उपार्जन नहीं करती हो ,

(तीन) मानसिक या शारीरिक निःशक्तता से ग्रस्त पुत्र या पुत्री (दत्तक पुत्री या पुत्री, सौतेला पुत्र या पुत्री की सेवानिवृत्ति के पश्चात् जन्मे पुत्र या पुत्री सम्मिलित है) की दशा में अपनी आजीविका का उपार्जन नहीं करता/करती हो।

(ख ) पुत्र या पुत्री ( मानसिक या शारीरिक निःशक्तता से ग्रस्त पुत्र या पुत्री के अलावा ) , द्वारा अपनी आजीविका का उपार्जन करना समझा जाएगा, यदि अन्य स्त्रोतों से उसकी आय इस नियम के उप - नियम (2) के अधीन न्यूनतम परिवार पेंशन और उस पर अनुज्ञेय महंगाई राहत के बराबर या उससे अधिक है ।

(ग) मानसिक या शारीरिक निःशक्तता से ग्रस्त संतान द्वारा अपनी आजीविका का उपार्जन करना समझा जाएगा यदि परिवार पेंशन के अलावा अन्य स्त्रोतों से उसकी कुल आय इस नियम के उप - नियम (3 ) के उप - खंड (एक) के अधीन पात्र परिवार पेंशन और उस पर अनुज्ञेय महंगाई राहत से कम है ।

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(घ) जहां कोई मृत अभिदाता एक से अधिक संतानों को अपने पीछे छोड़ जाता है , तो परिवार पेंशन सर्वप्रथम पच्चीस वर्ष से कम आयु वाली संतानों को उनके जन्म के क्रम में , देय होगी , जो इस उप - नियम के अधीन परिवार पेंशन के लिए पात्रता की सभी शर्तों को पूरा करते हो ।

( ड. ) ज्येष्ठ संतान तब तक परिवार पेंशन का हकदार होगी जब तक कि वह पच्चीस वर्ष का नहीं हो जाता/ जाती या विवाह/पुनर्विवाह नहीं हो जाता या अपनी आजीविका का उपार्जन प्रारंभ नहीं कर देता/देती, जो भी पहले हो और ज्येष्ठ के पच्चीस वर्ष का हो जाने या विवाह/ पुनर्विवाह हो जाने या अपनी आजीविका का उपार्जन प्रारंभ करने या उसकी मृत्यु हो जाने पर , उससे अगली संतान परिवार पेंशन पाने का पात्र हो जाएगी ।

(च) जहां कि इस नियम के अधीन परिवार पेंशन किसी अवयस्क को स्वीकृत की जाए , उस अवयस्क की ओर से संरक्षक को संदेय होगी ।

(छ) जहां परिवार पेंशन जुड़वा संतानों को देय हो, यह ऐसी संतानों को बराबर अंशों में संदेय होगी और जब उनमें से एक की पात्रता समाप्त हो जाए , तो उसका अंश दूसरी संतान को देय होगा और जब दोनों की पात्रता समाप्त हो जाए है तो परिवार पेंशन अगले पात्र एकल संतान या जुड़वा संतानों को देय होगी ।

(ज) जहां किसी मृत अभिदाता के पच्चीस वर्ष के कम आयु के और परिवार पेंशन के लिए पात्र उत्तरजीवी पुत्र या पुत्री न हों अथवा ऐसे पुत्र या पुत्री की मृत्यु हो गई हो या परिवार पेंशन के लिए पात्रता समाप्त हो गई हो , तो ऐसे पुत्र या पुत्री को, जो मानसिक मंदता सहित किसी भी मानसिक विकार या निःशक्तता से ग्रस्त हो , जिसके कारण पच्चीस वर्ष की आयु का हो जाने पर भी वह अपनी आजीविका उपार्जन करने में असमर्थ हो , को निम्न शर्तों के अध्यधीन परिवार पेंशन जीवनपर्यन्त देय होगी , अर्थात्ः-

(एक) अभिदाता उसके पति या पत्नी की मृत्यु से पहले निःशक्तता मौजूद हो,

(दो) यदि ऐसा पुत्र या पुत्री अभिदाता के दो या दो से अधिक संतानों में से एक हो , तो प्रारंभ में परिवार पेंशन खंड (घ) में उपवर्णित क्रम में पच्चीस वर्ष से कम आयु वाली संतानों को देय होगी , जब तक कि मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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अंतिम संतान पच्चीस वर्ष की नहीं हो जाती और तत्पश्चात् परिवार पेंशन खंड (ज) में निर्दिष्ट किसी निःशक्तता से ग्रस्त पुत्र या पुत्री के पक्ष में पुनः आरंभ होगी और उसे जीवन पर्यन्त देय होगी,

(तीन) यदि एक से अधिक संतान खंड (ड.) में निर्दिष्ट निःशक्तता से ग्रस्त हो, तो परिवार पेंशन का संदाय उनके जन्म के क्रम में होगा और उनमें से कनिष्ठ को, उससे ज्येष्ठ की पात्रता समाप्त होने या उसकी मृत्यु होने के पश्चात् परिवार पेंशन मिलेगीः

परंतु जहां परिवार पेंशन ऐसे जुड़वा बच्चों को देय हो, यह खंड (घ) में उपवर्णित रीति से संदत्त की जाएगी;

(चार) ऐसे पुत्र या पुत्री को, जो मानसिक मंदता सहित किसी भी मानसिक विकार या निःशक्तता से ग्रस्त हो , परिवार पेंशन का भुगतान , संरक्षक के माध्यम से किया जाएगा , जैसे वह अवयस्क हो, सिवाय शारीरिक रूप से निःशक्त पुत्र या पुत्री के मामले के, जिसने वयस्कता की आयु प्राप्त कर ली हो;

(पांच) ऐसे किसी भी पुत्र को परिवार पेंशन की आजीवन अनुज्ञा देने से पूर्व, नियुक्ति प्राधिकारी यह समाधान करेगा कि निःशक्तता ऐसी प्रकृति की है, जिसके कारण वह अपनी आजीविका उपार्जन करने में असमर्थ है और इसे निम्न द्वारा प्रमाणपत्र से साक्ष्यित किया जाएगाः-

(क) दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 या दिव्यांगजन अधिकार नियमावली , 2017 द्वारा जारी दिशा - निर्देशों और अधिसूचनाओं के अनुसार निःशक्तता प्रमाणपत्र जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी , या

(ख) एक मेडिकल बोर्ड, जिसमें एक चिकित्सा अधीक्षक या एक प्रधानाचार्य या एक निदेशक या संस्था के प्रमुख या अध्यक्ष के रूप में उनकी नामिनी और दो अन्य सदस्य सम्मिलित हों , जिसमें से कम से कम एक व्यक्ति निःशक्तता के विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञ होगा , जहां तक 96(18)

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संभव हो , बालक की मानसिक या शारीरिक स्थिति को यथावत उपवर्णित करेगा ।

(छह) ऐसे पुत्र या पुत्री के संरक्षक के रूप में परिवार पेंशन प्राप्त करने वाला व्यक्ति या ऐसे पुत्र या पुत्री, जिन्हें संरक्षक के माध्यम से परिवार पेंशन प्राप्त नहीं हो रही है , वह निम्न में से एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेगा: -

(क) दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम , 2016 या दिव्यांगजन अधिकार नियमावली, 2017 द्वारा जारी दिशा- निर्देशों और अधिसूचनाओं के अनुसार निःशक्तता प्रमाणपत्र जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी , या

(ख) एक मेडिकल बोर्ड , जिसमें एक चिकित्सा अधीक्षक या एक प्रधानाचार्य या एक निदेशक या संस्था के प्रमुख या अध्यक्ष के रूप में उनके नामिती और दो अन्य सदस्य सम्मिलित हों , जिसमें से कम से कम एक व्यक्ति मानसिक मंदता सहित निःशक्तता के विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञ होगा , यदि निःशक्तता स्थायी है तो एक बार , और यदि निःशक्तता अस्थायी है , तो हर पांच वर्ष में एक बार इस आशय का प्रमाण -पत्र , कि वह अभी खंड (ज) में निर्दिष्ट निःशक्तता से ग्रस्त है ।

(सात) मानसिक रूप से मंद पुत्र या पुत्री की दशा में परिवार पेंशन , यथास्थिति, अभिदाता द्वारा नामित व्यक्ति को देय होगी और यदि ऐसे अभिदाता द्वारा उसके जीवनकाल के दौरान कार्यालय प्रमुख को ऐसा कोई भी नामांकन प्रस्तुत नहीं किया गया हो , तो यथास्थिति, ऐसे अभिदाता के पति/पत्नी द्वारा नामित व्यक्ति को संदेय होगी और बाद में उक्त अधिनियम में यथा उपदर्शित स्वरपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु- निःशक्तता ग्रस्त व्यक्ति की बाबत परिवार पेंशन के लिए संरक्षक के नामांकन या उसकी नियुक्ति के लिए , स्थानीय स्तर की समिति द्वारा राष्ट्रीय न्यास अधिनियम , 1999 की धारा 14 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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के अधीन जारी किया गया संरक्षकता प्रमाणपत्र भी स्वीकार किया जाएगा;

(झ) खंड (ज) में निर्दिष्ट निःशक्तता से ग्रस्त संतान विवाह करने पर इस उप- नियम के अधीन परिवार पेंशन के लिए अपात्र नहीं होगी;

(ञ) जहां खंड (घ) या खंड (ज ) के अधीन परिवार पेंशन के लिए, किसी मृत अभिदाता का पात्र पुत्र या पुत्री उत्तरजीवी नहीं हो अथवा यदि खंड (घ ) या खंड (ज) के अधीन परिवार पेंशन के लिए पात्र पुत्र या पुत्री की मृत्यु हो जाए अथवा वह उन खंडो में विहित परिवार पेंशन के लिए पात्रता की शर्तें पूरी न करे , तो पच्चीस वर्ष की आयु से अधिक किसी अविवाहित या विधवा या तलाकशुदा पुत्री को आजीवन अथवा उसका विवाह या पुनर्विवाह होने तक, या उसका आजीविका उपार्जन प्रारंभ करने तक, जो भी पहले हो , निम्नलिखित शर्तों के अधीन परिवार पेंशन अनुज्ञात होगी या परिवार पेंशन का संदाय जारी रहेगा , अर्थात्: -

(एक) खंड (घ) में उपवर्णित क्रम को कुटुंब पेंशन प्रारंभ में देय होगी , जब तक अंतिम संतान पच्चीस वर्ष की आयु प्राप्त नहीं कर लेती;

(दो) खंड (ड. ) के अनुसार परिवार पेंशन प्राप्त करने के लिए कोई निःशक्त संतान नहीं है;

(तीन) अविवाहित या विधवा या तलाकशुदा पुत्री अपने पिता/माता अथवा माता- पिता पर आश्रित थी , जब वह जीवित था/ थी वे जीवित थे;

(चार) जहां कोई मृत अभिदाता अपने पीछे पच्चीस वर्ष की आयु से अधिक की एक से अधिक अविवाहित या विधवा या तलाकशुदा पुत्री को छोड़ जाता है, तो परिवार पेंशन उनके जन्म के क्रम में , प्रथमतः ऐसी पुत्री को देय होगी जो इस उप - नियम के अधीन परिवार पेंशन की अनुज्ञा के लिए पात्रता की सभी शर्तों को पूरा करती हो;

(पांच) ज्येष्ठ पुत्री अपना विवाह या पुनर्विवाह होने तक अथवा अपनी आजीविका उपार्जन प्रारंभ करने तक, जो भी पहले हो, परिवार पेंशन के लिए हकदार होगी और ज्येष्ठ के विवाह या पुनर्विवाह , होने पर या अपनी आजीविका उपार्जन प्रारंभ करने पर या उसकी मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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मृत्यु होने पर , अगली कनिष्ठ पुत्री परिवार पेंशन के लिए पात्र होगी;

(छह) विधवा पुत्री की दशा में , उसके पति की मृत्यु और तलाकशुदा पुत्री की दशा में, उसका तलाक, अभिदाता या उसके/ उसकी पति/पत्नी के जीवित रहते हुए हुआ होः

परंतु परिवार पेंशन तलाकशुदा पुत्री को उसके तलाक की दिनांक से तब देय होगी, यदि सेवक या उसके/उसकी पति/पत्नी के जीवित रहते हुए सक्षम न्यायालय में तलाक की कार्यवाही दायर की गई थी, किंतु तलाक उनकी मृत्यु के पश्चात् हुआ:

परंतु यह और कि, अभिदाता और उसके या उसकी पति की मृत्यु होने पर , परिवार के किसी अन्य पात्र सदस्य को, पुत्री के तलाक की तारीख से पूर्व परिवार पेंशन संदेय हो गई हो, तो ऐसी तलाकशुदा पुत्री को परिवार पेंशन तब तक शुरू नहीं की जाएगी जब तक कि उपरोक्त सदस्य परिवार पेंशन के लिए अपात्र न हो जाए या उसकी मृत्यु न हो जाए ;

(ट) जहां कोई मृत अभिदाता एक से अधिक विधवाओं या एक विधवा या तलाकशुदा पत्नी से या एक विधवा या तलाकशुदा पत्नी से जन्मी संतानों को अपने पीछे छोड़ जाता है, तो इस उप- नियम में उल्लिखित पात्रता की शर्तों को पूरा करने वाली संतान या संतानें परिवार पेंशन के अंश के हकदार होगी/होंगे , जो अभिदाता की मृत्यु होने के समय उनकी माता को मिलता यदि यथास्थिति, वह जीवित होती या उसका तलाक नहीं हुआ होता;

(ठ) जहां विधवा या तलाकशुदा पत्नी से जन्मी , एक से अधिक संतानें हैं, तो ऐसी संतानों को इस उप - नियम में विनिर्दिष्ट रीति से परिवार पेंशन का अंश देय होगा;

(ड) ऐसी संतान या संतानों के लिए देय परिवार पेंशन के अंश या अंशों का संदाय बंद होने पर , परिवार पेंशन का ऐसा अंश या ऐसे सभी अंश समाप्त नहीं होंगे , किंतु अन्य विधवा या तलाकशुदा पत्नी से जन्मे अन्यथा पात्र , संतान या संतानों को बराबर अंशों में देय होगा , अथवा यदि केवल एक ही संतान है , तो पूर्ण रूप से ऐसी संतान को देय होगा;

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स्पष्टीकरण - 'पुत्र' या 'पुत्री' अभिव्यक्ति में क्रमशः मरणोत्तर पुत्र या मरणोत्तर पुत्री सम्मिलित होगी ।

(ढ) अविवाहित पुत्र अथवा अविवाहित या विधवा या तलाकशुदा पुत्री , निःशक्त पुत्र या पुत्री को छोड़कर, अपना विवाह या पुनर्विवाह होने की तारीख से, परिवार पेंशन के लिए अपात्र हो जाएगा/जाएगी ।

(ण) ऐसे किसी पुत्र अथवा पुत्री को देय परिवार पेंशन बंद कर दी जाएगी, जो अपनी आजीविका का उपार्जन प्रारंभ कर देता / देती है ।

(त) ऐसे पुत्र या पुत्री अथवा संरक्षक का यह कर्तव्य होगा कि वह वर्ष में एक बार पेंशन संवितरण प्राधिकारी को प्रमाणपत्र प्रस्तुत करे किः-

(एक) उसने अपनी आजीविका का उपार्जन प्रारंभ नहीं किया है, और

(दो) उसका अभी तक विवाह या पुनर्विवाह नहीं हुआ है और इसी प्रकार का प्रमाणपत्र मानसिक और शारीरिक निःशक्तता से ग्रस्त पुत्र या पुत्री द्वारा पेंशन संवितरण प्राधिकारी को वर्ष में एक बार प्रस्तुत किया जाएगा , कि उसने अपनी आजीविका का उपार्जन प्रारंभ नहीं किया है ।

( 10 ) जहां किसी मृत अभिदाता की परिवार पेंशन के लिए पति अथवा पत्नी अथवा पात्र संतान उत्तरजीवी नहीं है या यदि पति अथवा पत्नी और सभी संतानों की परिवार पेंशन के लिए पात्रता समाप्त हो गई है, तो उप - नियम (2) में विनिर्दिष्ट दर पर परिवार पेंशन क्रमशः माता, पिता को आजीवन देय होगी , यदि क्रमशः माता, पिता अभिदाता की मृत्यु से ठीक पूर्व उस पर आश्रित थे ।

स्पष्टीकरण- माता, पिता अभिदाता पर आश्रित समझे जाएंगे, यदि उनकी संयुक्त आय उप - नियम ( 2) के अधीन न्यूनतम पेंशन और उस पर अनुज्ञेय महंगाई राहत के योग से कम है ।

माता , पिता का यह कर्तव्य होगा कि वे वर्ष में एक बार पेंशन संवितरण प्राधिकारी को इस आशय का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करें , कि उन्होंने अपनी आजीविका का उपार्जन प्रारंभ नहीं किया है । माता , पिता को देय परिवार पेंशन उनकी आजीविका का उपार्जन प्रारंभ करने पर बंद कर दी जाएगी ।

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

( 11 ) (क) जहां किसी मृत अभिदाता की परिवार पेंशन के लिए पात्र विधवा/विधुर अथवा संतान अथवा माता, पिता उत्तरजीवी न हो या यदि परिवार पेंशन के लिए अभिदाता की विधवा या विधुर , संतान और माता, पिता की पात्रता समाप्त हो गई हो , तो उप - नियम (2) में विनिर्दिष्ट दर पर परिवार पेंशन अभिदाता के आश्रित मानसिक और शारीरिक निःशक्तता से ग्रस्त सहोदरों को आजीवन देय होगी , यदि सहोदर अभिदाता की मृत्यु से ठीक पूर्व उस पर पूर्णतः आश्रित थे ।

(ख) ऐसा सहोदर उसी रीति से और पात्रता की उन्हीं शर्तों के अधीन और उसी निःशक्तता मानक का अनुसरण करते हुए , परिवार पेंशन के लिए आजीवन पात्र होगा, जैसा कि, अभिदाता के संतान की दशा में उप- नियम (8 ) में यथा अधिकथित है:

परंतु परिवार पेंशन ऐसे सहोदर को तब देय होगी जब निःशक्तता अभिदाता की मृत्यु से पूर्व मौजूद हो ।

स्पष्टीकरण- मानसिक और शारीरिक निःशक्तता से ग्रस्त सहोदर अभिदाता पर आश्रित समझा जाएगा, यदि परिवार पेंशन के अलावा अन्य स्त्रोतों से उसकी कुल आय इस नियम के उप- नियम (2 ) के अधीन संबंधित अभिदाता की मृत्यु पर देय , अनुज्ञेय परिवार पेंशन और उस पर अनुज्ञेय महंगाई राहत के योग से कम है।

(ग) ऐसे सहोदर का यह कर्तव्य होगा कि वह वर्ष में एक बार पेंशन संवितरण प्राधिकारी को इस आशय का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करे , कि उसने अपनी आजीविका का उपार्जन प्रारंभ नहीं किया है और ऐसे सहोदर को देय परिवार पेंशन उनकी आजीविका का उपार्जन प्रारंभ करने पर बंद कर दी जाएगी ।

स्पष्टीकरण- इस नियम के प्रयोजन के लिए , मानसिक और शारीरिक निःशक्तता से ग्रस्त संतान या सहोदर के अलावा परिवार के अन्य सदस्य द्वारा अपनी आजीविका का उपार्जन करना समझा जाएगा , यदि अन्य स्त्रोतों से उसकी आय , इस मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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नियम के उप - नियम (2) अधीन न्यूनतम परिवार पेंशन और उस पर अनुज्ञेय महंगाई राहत के समतुल्य या अधिक है ।

(12) (क) अभिदाता की मृत्यु होने पर किसी व्यक्ति के लिए अनुज्ञेय परिवार पेंशन को, अन्य अभिदाता की मृत्यु होने पर , इस नियम के अधीन परिवार पेंशन की पात्रता के अवधारण के प्रयोजन के लिए आय के रूप में नहीं माना जाएगा , इस शर्त के अध्यधीन , कि दोनों परिवारं पेंशनों का योग उप - नियम ( 13 ) में विनिर्दिष्ट सीमाओं से अधिक नहीं होगा ।

(ख ) (एक) इस नियम के अधीन परिवार पेंशन के लिए पात्रता तय करने के लिए , मृत अभिदाता की विधवा या विधुर के अलावा, परिवार के अन्य सदस्य द्वारा दाखिल अंतिम आयकर विवरणी की एक प्रति प्रस्तुत करनी अपेक्षित होगी ।

(दो) यदि उक्त परिवार सदस्य सूचित करता है कि उसने आयकर विभाग के पास अंतिम आयकर विवरणी दाखिल नहीं की है, तो उसे सक्षम प्राधिकारी से आय प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा ।

(ग) किसी अभिदाता या किसी की मृत्यु होने पर परिवार पेंशन का दावा करते समय संबंधित व्यक्ति स्पष्ट करेगा , कि क्या उसे अन्य अभिदाता की बाबत पहले से परिवार पेंशन प्राप्त हो रही है या नहीं और यदि ऐसा है , तो वह उसे मिलने वाली परिवार पेंशन रकम उपदर्शित करेगा ।

(घ) पेंशन प्राधिकृतकर्ता अधिकारी , ऐसे व्यक्ति को देय परिवार पेंशन की रकम अवधारित करते समय , इस विषय में दावेदार द्वारा प्रस्तुत सूचना को ध्यान में रखेगा और सुनिश्चित करेगा , कि उस व्यक्ति को देय पेंशन की रकम उप - नियम ( 13 ) में विनिर्दिष्ट परिसीमा से अधिक न हो ।

( 13 ) यदि पत्नी और पति दोनों ही अभिदाता हों और इस नियम के उपबंधों द्वारा शासित होते हों और उनमें से एक की मृत्यु सेवा में रहते हुए या सेवानिवृत्ति के पश्चात् हो जाए , तो मृत की बाबत परिवार पेंशन मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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उत्तरजीवी पति या पत्नी को संदेय हो जाएगी तथा उस पति और पत्नी की मृत्यु की दशा में मृतक माता - पिता की बाबत उत्तरजीवी संतानों को दो परिवार पेशनें , नीचे विनिर्दिष्ट परिसीमाओं के अधीन रहते हुए , स्वीकृत की जाएगी, अर्थात्-

(एक) यदि उत्तरजीवी संतान उप- नियम (2) में वर्णित दर से दो परिवार पेंशन पाने की पात्र है या पाने के पात्र है, तो दोनों परिवार पेंशनों की रकम का योग तत्समय प्रचलित वेतनमानों के अधिकतम वेतनमान के अंतिम प्रक्रम के 50 प्रतिशत , प्रतिमाह तक सीमित रहेगा;

(दो) यदि परिवार पेंशनों में से एक उप - नियम (2 ) में वर्णित दरों में संदेय नहीं रह जाती और उसके बदले में उप- नियम (2) के खंड (चार) में वर्णित दर से पेंशन संदेय हो जाती है , तो दोनों पेशनों की रकम का योग तत्समय प्रचलित वेतनमानों के अधिकतम वेतनमान के अंतिम प्रक्रम के 50 प्रतिशत राशि प्रतिमाह तक सीमित रहेगी;

(तीन) यदि दोनों ही परिवार पेंशनें उप- नियम (2) में वर्णित दरों से संदेय है, तो दो परिवार पेंशनों की राशि का योग तत्समय प्रचलित न्यूनतम पेंशन की दोगुनी, प्रतिमाह तक सीमित रहेगा ।

( 14) (क) किसी अभिदाता की संतान , उक्त अभिदाता की मृत्यु होने पर परिवार पेंशन का दावा करते समय स्पष्ट करेगी कि क्या वह इस नियम के अधीन माता/पिता के लिए परिवार पेंशन पाने का पात्र है या नहीं ।

(ख) पेंशन प्राधिकृतकर्ता अधिकारी ऐसे व्यक्ति को देय परिवार पेंशन की रकम अवधारित करते समय , इस विषय में दावेदार द्वारा प्रस्तुत सूचना को ध्यान में रखेगा और सुनिश्चित करेगा कि उस व्यक्ति को माता पिता दोनों की बाबत देय परिवार पेंशनों की राशि उप - नियम ( 12 ) में विनिर्दिष्ट सीमा से अधिक न हो ।

( ग) यदि , कोई व्यक्ति , जो सेवाकाल में अभिदाता की मृत्यु की दशा में , इस नियम के अधीन परिवार पेंशन प्राप्त करने कि लिए पात्र है, अभिदाता की हत्या के अपराध या ऐसे किसी अपराध को करने मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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के दुष्प्रेरण के लिए आरोपित किया गया है , तो ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध संस्थित दांडिक कार्यवाहियों की समाप्ति तक उसे परिवार पेंशन का संदाय नहीं किया जाएगा ।

(घ) खंड (ग) के अधीन जिस अवधि के दौरान व्यक्ति को परिवार पेंशन का संदाय नहीं किया जाता है , अभिदाता की मृत्यु की दिनांक के बाद की दिनांक से परिवार पेंशन के अन्य सदस्य, यदि कोई हो, को परिवार पेंशन का संदाय किया जाएगा:

परंतु यदि अभिदाता के पति या पत्नी को अभिदाता की हत्या के अपराध या ऐसे किसी अपराध को करने के दुष्प्रेरण के लिए आरोपित किया गया है और परिवार का अन्य सदस्य मृत अभिदाता की अवयस्क संतान है , तो ऐसी अवयस्क संतान को परिवार पेंशन विधिवत नियोजित संरक्षक के माध्यम से देय होगी , और अवयस्क संतान के माता या पिता परिवार पेंशन के आहरण के प्रयोजन के लिए संरक्षक नहीं बन सकेंगे ।

(ड ) यदि खंड (ग) में निर्दिष्ट कार्यवाहियों की समाप्ति पर संबद्ध व्यक्ति, -

(एक) अभिदाता की हत्या के लिए अथवा हत्या करने के दुष्प्रेरण के लिए सिद्धदोष ठहराया जाता है , तो ऐसा व्यक्ति परिवार पेंशन प्राप्त करने से विवर्जित कर दिया जाएगा , जिसका संदाय परिवार पेंशन के अन्य पात्र सदस्य को, यदि कोई हो, जारी रहेगा;

(दो) अभिदाता की हत्या करने के अथवा हत्या करने के दुष्प्रेरणा के आरोप से दोषमुक्त कर दिया जाता है, तो ऐसे व्यक्तिको दोषमुक्ति की दिनांक से परिवार पेंशन देय होगी और उस दिनांक से परिवार पेंशन के अन्य सदस्य को परिवार पेंशन बंद कर दी जाएगीः

परंतु यदि परिवार का कोई अन्य पात्र सदस्य नहीं था या परिवार पेंशन संबंधित व्यक्ति के दोषमुक्त होने की दिनांक से पूर्व परिवार के अन्य पात्र सदस्य को मिलनी बंद हो गई , तो ऐसे व्यक्ति को परिवार पेंशन मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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यथास्थिति , अभिदाता की मृत्यु की दिनांक के पश्चात् की दिनांक से या उस दिनांक से जिस दिनांक से परिवार के अन्य पात्र सदस्य को परिवार पेंशन मिलनी बंद हो गई थी, संदेय होगी ।

(च) खंड ( ग ) से खंड (ङ ) के उपबंध अभिदाता की सेवानिवृत्ति के पश्चात् उसकी मृत्यु होने पर देय होने वाली परिवार पेंशन को भी लागू होंगे ।

स्पष्टीकरणः- इस उप - नियम के प्रयोजनार्थ, अभिदाता की हत्या करने या हत्या का दुष्प्रेरण करने के आरोप में आत्महत्या द्वारा मृत्यु के लिए दुष्प्रेरण करने का आरोप सम्मिलित होगा ।

( 15) (क) (एक) अभिदाता अपने परिवार के विवरण , कार्यालय प्रमुख के माध्यम से, पेंशन सॉफ्टवेयर में दर्ज करेगा, जिसमें पति/पत्नी , संतान , माता, पिता, और निःशक्त सहोदर से संबंधित सभी सुसंगत विवरण सम्मिलित होगें ,

(दो) यदि अभिदाता का कोई परिवार नहीं है, तो जैसे ही उसका कोई परिवार हो जाए वैसे ही वह, विवरण दर्ज करायेगा ।

(ख) अभिदाता अपने परिवार की सदस्य संख्या में हुए किसी भी पश्चात्वर्ती परिवर्तन जिसके अंतर्गत उसकी संतान का विवाह संबंधी तथ्य भी है का विवरण दर्ज करायेगा ।

(ग) जब और जैसे ही कोई संतान या आश्रित सहोदर उप- नियम (8 ) एवं ( 10) में निर्दिष्ट निःशक्तता से ग्रस्त हो जाए , जिसके कारण वह अपनी आजीविका उपार्जन करने में असमर्थ हो जाए , तो इस तथ्य को उप नियम ( क) (एक) के अनुसार (चिकित्सा प्रमाण पत्र द्वारा विधिवत समर्थित) पेंशन सॉफटवेयर में अघतन किया जाएगा ।

(घ) मृत अभिदाता के परिवार के सदस्य के दावे को इस आधार पर निरस्त नहीं किया जाएगा , कि परिवार के ऐसे सदस्य का विवरण कार्यालय के अभिलेख में उपलब्ध नहीं है । यदि , इन नियमों के अधीन परिवार पेंशन की स्वीकृति के लिए परिवार के सदस्य की पात्रता के संबंध में पेंशन प्राधिकृतकर्ता अधिकारी का अन्यथा मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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समाधान हो जाए , वह तब दावे को स्वीकार करेगा एवं विवरण पेंशन सॉफ्टवेयर में दर्ज करेगा ।

13. अधिवर्षिता पर सेवानिवृत्ति.- ऐसा अभिदाता, जो अधिवर्षिता की आयु प्राप्त होने पर सेवानिवृत्त होता है , वह पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरणः (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत निकास और प्रत्याहरण) विनियम , 2015 एवं समय - समय पर जारी संशोधित प्रावधानों के अनुसार सेवानिवृत्ति हितलाभों का हकदार होगा ।

14. 20/25 वर्ष की अर्हता सेवा के पूर्ण होने पर सेवानिवृत्ति (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति).- ( 1 ) (क) अभिदाता 20 वर्ष की अर्हता सेवा पूर्ण करने के पश्चात् किसी भी समय नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी को उस तारीख से, जिसको कि वह सेवानिवृत्त होना चाहता है , कम से कम एक माह पूर्व, सूचना देकर , या उसके द्वारा एक माह की कालावधि की सूचना के लिए या उस कालावधि के लिए , जिसके लिए उसके द्वारा वास्तविक रूप से दी गई सूचना एक माह से कम होती हो , वेतन तथा भत्तों का भुगतान कर सेवानिवृत्त हो सकेगाः

परंतु जहां नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी कथित सूचना पत्र में विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से पूर्व सेवानिवृत्ति अनुज्ञा प्रदान करने से इंकार नहीं करता है, सेवानिवृत्ति कथित अवधि की समाप्ति की दिनांक से प्रभावी हो जाएगीः

परंतु यह भी कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के सूचना पत्र को स्वीकृत करने और इस संबंध में आदेश पारित करने से पूर्व , नियुक्तिकर्ता अधिकारी यह समाधान कर लेगा कि अभिदाता ने बीस वर्ष की अर्हक सेवा पूरी कर ली है:

परन्तु यह और भी कि उप -नियम ( 1 ) (क) निम्नलिखित संवर्गों के अभिदाताओं के लिए लागू नहीं होगा, जब तक कि उन्होने 25 वर्ष की अर्हता सेवा पूर्ण न कर ली हो ।

(एक) लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग का अध्यापन स्टॉफ, चिकित्सा, सह- चिकित्सा (पैरा मेडिकल) और तकनीकी स्टॉफ मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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(दो) श्रम विभाग , राज्य बीमा सेवाओं का चिकित्सा, सह - चिकित्सा (पैरा-मेडिकल) और तकनीकी स्टॉफ

(तीन) आयुष विभाग , का अध्यापन स्टॉफ चिकित्सा, सह - चिकित्सा (पैरा-मेडिकल) और तकनीकी स्टॉफ

(चार) पशुपालन विभाग , का अध्यापन स्टॉफ चिकित्सा, सह - चिकित्सा (पैरा-मेडिकल) और तकनीकी स्टॉफः

परन्तु यह और भी कि, ऐसा अभिदाता, नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी की लिखित में पूर्व अनुज्ञा के बिना, जहां अभिदाता निलंबन के अधीन हों , सेवानिवृत्त होने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगा ।

(ख ) नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी , राज्य शासन के अनुमोदन से, लोकहित में , किसी अभिदाता को, उसकी 20 वर्ष की अर्हता सेवा पूर्ण करने के पश्चात् या उसके द्वारा 50 वर्ष की आयु प्राप्त करने के पश्चात्, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, किसी भी समय , निर्धारित एक माह की सूचना देकर सेवानिवृत्त कर सकेगाः

परन्तु नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी द्वारा ऐसे अभिदाता को निर्धारित एक माह की सूचना के पूर्व भी सेवानिवृत्त किया जा सकेगा और ऐसी सेवानिवृत्ति पर अभिदाता को ऐसी राशि का , जो उसके वेतन तथा भत्तों की राशि के बराबर हो, यथास्थिति, सूचना की कालावधि के लिए उसी दर पर, जिस पर वह , सेवानिवृत्ति से ठीक पूर्व आहरित कर रहा था या उस कालावधि के लिए , जिस तक ऐसी सूचना पत्र एक माह से कम होती हो, भुगतान किया जाएगा ।

टिप्पणी-1 उपरोक्त खंड के अधीन किसी अभिदाता के द्वारा सेवानिवृत्ति की नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी को सूचना देने के पूर्व यह समाधान करना चाहिए कि उसने पेंशन के लिए, यथास्थिति, 20 अथवा 25 वर्ष की अर्हता सेवा वास्तव में पूर्ण कर ली है । इसी प्रकार, नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी द्वारा , किसी अभिदाता को, उपरोक्त खंड के अधीन सेवानिवृत्ति की सूचना देते समय यह समाधान करना चाहिए , कि अभिदाता ने वास्तव में 20 अथवा 25 वर्ष की अर्हता सेवा पूर्ण कर ली है या उसने 50 वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है ।

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टिप्पणी- 2 यथास्थिति, सूचना की कालावधि, जो एक माह या एक माह से कम हो , जैसी भी स्थिति हो , की संगणना उस तारीख से की जाएगी, जिसको वह हस्ताक्षरित की जाकर रजिस्ट्रीकृत डाक अथवा अन्य संचार माध्यम से संसूचित की गई हो । जहां सूचना व्यक्तिगत तामील की गई हो, वहां कालावधि की संगणना, उसकी प्राप्ति की तारीख से की जाएगी ।

टिप्पणी- 3 अभिदाता को , आवेदन प्रस्तुत करने पर सूचना की कालावधि के दौरान ऐसा अवकाश स्वीकृत किया जाएगा , जिसके लिए वह नियमों के अधीन हकदार है; परन्तु सूचना की कालावधि की समाप्ति के पश्चात् कोई अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा ।

(2) जहां सेवानिवृत्ति की सूचना , नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी द्वारा , अभिदाता पर तामील की गई हो , वह सूचना वापस ली जा सकेगी , यदि पर्याप्त कारणों से ऐसा वांछित हो , बशर्ते कि संबंधित अभिदाता सहमत हो।

(3 ) यदि कोई अभिदाता ऐसी निःशक्तता होने पर, जहां दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम , 2016 के उपबंध लागू होते हैं, इस नियम के अधीन स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की सूचना देता है, अभिदाता को यह सलाह दी जाएगी , कि उसके पास उसी वेतन मैट्रिक्स और सेवा हितलाभों, जिनका वह अन्यथा हकदार है, के साथ सेवा जारी रखने का विकल्प है और यदि अभिदाता स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए अपनी सूचना वापस नहीं लेता है, तो स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए उसके अनुरोध पर इस नियम के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी।

(4) ऐसा अभिदाता, जो इस नियम के अधीन सेवानिवृत्त होने के विकल्प का चयन करता है और इस आशय का सूचना पत्र नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी को प्रस्तुत करता है एवं उसकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति स्वीकृत की जा चुकी है, तब वह नियुक्ति प्राधिकारी के अनुमोदन के बिना अपना सूचना पत्र वापस नहीं ले सकेगाः

परंतु सूचना पत्र वापस लेने का अनुरोध स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की आशयित तारीख से कम से कम पंद्रह दिन पूर्व किया जा सकेगा ।

(5) यह नियम किसी ऐसे अभिदाता को लागू नहीं होगा , जो अतिशेष कर्मचारियों की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से संबंधित विशेष स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के अधीन सेवानिवृत्त होता है ।

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स्पष्टीकरण: - इस नियम के प्रयोजन के लिए नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी पद से अभिप्रेत है , ऐसा प्राधिकारी, जो उस सेवा के पद पर नियुक्ति करने के लिए सक्षम है , जिससे अभिदाता सेवानिवृत्त होना चाहता है ।

(6) अभिदाता, सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर , पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत निकास और प्रत्याहरण) विनियम , 2015 एवं समय- समय पर जारी संशोधित प्रावधानों के अंतर्गत सेवानिवृत्त होने वाले अभिदाता को स्वीकार्य हितलाभों का हकदार होगा ।

(7 ) यदि अभिदाता सेवानिवृत्ति की तारीख के पश्चात् राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत अपने व्यक्तिगत पेंशन खाते को जारी रखने या हितलाभों के भुगतान को आस्थगित करने का इच्छुक है, तो वह पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण ( राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत निकास और प्रत्याहरण ) विनियम , 2015 के अनुसार इस संबंध में एक विकल्प का प्रयोग करेगा ।

15. किसी निगम , कंपनी या निकाय में या उसके अधीन संविलयन.-

(1) किसी अभिदाता को केंद्रीय शासन या अन्य राज्य शासन या राज्य शासन के पूर्णतः या आंशिक स्वामित्व या नियंत्रित निगम या कंपनी या केंद्रीय शासन या राज्य शासन द्वारा नियंत्रित या वित्त पोषित किसी निकाय में या उसके अधीन किसी सेवा या पद में संविलयन होने के लिए अनुज्ञा प्रदान की गई है, तो उसे ऐसे संविलयन की तारीख से सेवा से सेवानिवृत्त माना जाएगा और वह नियम 11 ( 1 ) के अधीन अधिवर्षिता पर अभिदाता की निकासी के मामले में यथा स्वीकार्य हितलाभ प्राप्त करने का पात्र होगा:

परंतु यदि नए संगठन में समान प्रणाली विद्यमान है , तो अभिदाता नए संगठन में उसी स्थायी व्यक्तिगत पेंशन खाता संख्या के साथ राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में अभिदाय करना जारी रख सकेगा और उस स्थिति में ऐसे संविलयन के समय उसे राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अधीन कोई हितलाभ प्राप्त नहीं होगा किंतु नए निकाय या संगठन आदि, जहां अभिदाता को संविलयन किया गया है , से निकासी के पश्चात् हितलाभ प्राप्तहोगाः मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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परंतु यह और कि जहां ऐसे स्वायत्त या सांविधिक निकाय या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के कर्मचारी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत आच्छादित नहीं किए गए हैं, ऐसा अभिदाता , अपने विकल्प पर , प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित विनियमों के अनुसार , गैर - शासकीय अभिदाता के रूप में उसी स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या के साथ राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में अभिदाय करना जारी रख सकेगा;

स्पष्टीकरण- ( 1 ) संविलयन की दिनांक वह होगी , जब अभिदाता किसी निगम या कंपनी या निकाय में तत्काल संविलयन होने के आधार पर कार्यग्रहण करता है, जिस दिनांक को वह वस्तुतः उस निगम या कंपनी या निकाय में कार्यग्रहण करता है ;

प्रारम्भ में बाह्य सेवा शर्तों पर किसी निगम या कंपनी या निकाय में कार्यग्रहण करता है , जिस दिनांक से शासन द्वारा उसका बिना शर्त त्यागपत्र स्वीकृत किया जाता है और;

किसी शासकीय विभाग के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या स्वायत्त निकाय में संपरिवर्तित होने पर किसी निगम या कंपनी या निकाय में कार्यग्रहण करता है, जिस तारीख से उस निगम या कंपनी या निकाय में संविलयित किए जाने का उसका विकल्प शासन द्वारा स्वीकृत किया जाता है ।

स्पष्टीकरण - (2) - इस नियम के प्रयोजनों के लिए निकाय से स्वायत्त निकाय या कानूनी निकाय अभिप्रेत है ।

16. निःशक्तता के कारण सेवा से कार्यमुक्त किए जाने पर पात्रता. - जहां अभिदाता निःशक्तता के कारण सेवानिवृत्त होता है, तब वह पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण ( राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत निकास और प्रत्याहरण) विनियम, 2015 एवं समय - समय पर जारी संशोधित प्रावधानों के अनुसार भुगतान पाने का पात्र होगा ।

17 . अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रभाव.-

(1 ) जहां अभिदाता, शासकीय सेवा से शास्ति स्वरूप अनिवार्य सेवानिवृत्त होता है, तो उसे नियम -13 में यथा स्वीकार्य संचित पेंशन धन से एकमुश्तऔर वार्षिकी राशि संदेय होगी:

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परंतु प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित विनियमों के अनुसरण में अभिदाता, अपने विकल्प पर, एक गैर शासकीय अभिदाता के रूप में उसी व्यक्तिगत पेंशन खाता संख्या के साथ राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में अभिदाय करना जारी रख सकेगा ।

(2) इन नियमों द्वारा आच्छादन नहीं किए गए उपदान और अन्य सेवानिवृत्ति हितलाभों के संबंध में ऐसे मामलों में की गई किसी भी कार्यवाही पर उप - नियम ( 1 ) प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा और वे हितलाभ, ऐसे नियमों के अनुसरण में विनियमित किए जा सकेंगे , जो ऐसे हितलाभों पर लागू होते हैं ।

18. पदच्युति या शासकीय सेवा से हटाए जाने का प्रभाव.- जहां अभिदाता, शासकीय सेवा से शास्ति स्वरूप पदच्युति या शासकीय सेवा से हटाया जाता है, तो अभिदाता के राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत संचित धन में शासकीय अंशदान और उस पर देय प्रतिलाभ शासन के खाते में अंतरित हो जाएगा तथा अभिदाता का स्वयं का अंशदान एवं उस पर देय प्रतिलाभ का भुगतान अभिदाता को किया जाएगा ।

19. अधिवर्षिता /सेवात्याग /मृत्यु पर राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत हितलाभों के लिए दावा प्रस्तुत करना.- अधिवर्षिता /सेवात्याग /मृत्यु पर राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत हितलाभों के लिए दावा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया वह होगी , जो पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा समय - समय पर जारी की जाए ।

20. आंशिक प्रत्याहरण. अभिदाता को पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत निकास और प्रत्याहरण) विनियम, 2015 एवं समय - समय पर जारी संशोधित प्रावधानों के अनुसार आंशिक प्रत्याहरण की पात्रता होगी तथा आंशिक प्रत्याहरण के लिए प्रक्रिया वह होगी , जो समय- समय पर पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा जारी की जाए ।

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21. परिपत्र जारी करना. पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा समय - समय पर जारी नियम/निर्देश/अधिसूचना/आदेश पर आधारित एकजाई परिपत्र, प्रत्येक वर्ष 01 अप्रैल एवं 01 अक्टूबर को मध्यप्रदेश शासन वित्त विभाग द्वारा जारी किए जाएंगे , ऐसे परिपत्र पूर्व के परिपत्रों को अधिक्रमित करते हुए जारी किए जाएंगे ।

22. निर्वचन.- जहां नियमों के निर्वचन के संबंध में कोई विवाद उत्पन्न हो, तो उसे विनिश्चित करने के लिए वित्त विभाग को संदर्भित किया जाएगा ।

23 . शिथिल करने की शक्ति. जहां वित्त विभाग का समाधान हो जाए कि इन नियमों के किसी नियम के क्रियान्वयन से किसी विशेष प्रकरण में अनावश्यक अवरोध उत्पन्न हो रहा है, तो वह ऐसे कारणों को लेखबद्ध करेगा । ऐसे प्रकरणों को न्याय संगत और साम्यपूर्ण रीति से उस सीमा तक, जैसा भी आवश्यक समझा जाए , मंत्रिपरिषद के आदेश से उस नियम की अपेक्षाओं को शिथिल किया जा सकता है ।

अवशिष्ट मामलों के लिए राज्य सरकार की शक्ति.- 24.

(1) कोई ऐसा बिन्दु, जो विनिर्दिष्ट रूप से इन नियमों के अंतर्गत नहीं आता है, मध्यप्रदेश राज्य सिविल सेवा (पेंशन) नियम , मूलभूत नियम , अनुपूरक नियम या शासन द्वारा जारी किए गए अन्य साधारण या विशेष आदेश में निहित इस संबंध में अंतर्विष्ट सुसंगत उपबंधों के निबंधनों के अनुसार विनिश्चित किए जाएंगे , परन्तु ये इन नियमों के उपबंधों के विरुद्ध या उससे असंगत नहीं होंगे ।

(2) राज्य शासन किसी ऐसे मामले को विनियमित करने के लिए आदेश या अनुदेश जारी कर सकेगा , जिसके लिए बनाए गए नियमों में कोई उपबंध नहीं किया गया है या इन नियमों के अधीन किया गया नहीं समझा गया है और जब तक ऐसे नियम नहीं बनाए जाते हैं, तब तक ऐसे मामलों को समय - समय पर जारी आदेशों या अनुदेशों के अनुसार विनियमित किया जाएगा ।

25 . निरसन और व्यावृत्ति.- इन नियमों के प्रारंभ होने पर, पूर्व प्रभावशील प्रत्येक नियम , कार्यालयीन ज्ञापन या आदेश को सम्मिलित करते हुए , जहां तक कि वह इन नियमों में अन्तर्विष्ट किसी भी विषय का प्रावधान करते हैं, प्रवृत्त नही रहे जाएंगेः

परन्तु इस प्रकार निरसित नियमों के अधीन दिया गया कोई आदेश या की गई कोई कार्यवाही इन नियमों के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन दिया गया आदेश या की गई कार्यवाही समझी जाएगी ।

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,

मनीष रस्तोगी , अपर मुख्य सचिव.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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वित्त विभाग

मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल , दिनांक 24 फरवरी 2026 क्र. -एफ 9-1-2026- नियम-चार

भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , मध्यप्रदेश के राज्यपाल, एतद्वारा , मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अधीन उपदान का संदाय) नियम, बनाते हैं, अर्थात्ः-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.-

(1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अधीन उपदान का संदाय) नियम , 2026 है ।

(2 ) ये नियम दिनांक 1 अप्रैल, 2026 से प्रवृत्त होंगे ।

2. परिभाषाएं.- इन नियमों में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) " लोक सेवा आयोग " से अभिप्रेत है, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग;

(ख) " संतान " से अभिप्रेत है, शासकीय सेवक का पुत्र अथवा पुत्री ( दत्तक संतानों सहित);

(ग) " परिलब्धियां " से अभिप्रेत है, नियम-6 में परिभाषित परिलब्धियां;

(घ) " बाह्य सेवा " से अभिप्रेत है, वह सेवा जिसमें शासकीय सेवक अपना वेतन राज्य की संचित निधि से न लेकर, शासन की स्वीकृति से किसी अन्य स्रोत से, प्राप्त करता है;

(ड. ) " शासन " से अभिप्रेत है, मध्यप्रदेश शासन;

(च) " उपदान " में सम्मिलित है, -

(एक) " सेवानिवृत्ति उपदान " जो नियम -23 के उपनियम ( 1 ) के अधीन भुगतान योग्य है,

(दो) " मृत्यु उपदान " जो नियम 23 के उपनियम ( 2 ) के अधीन भुगतान योग्य है , और

(तीन) " अवशिष्ट उपदान " जो नियम 23 के उपनियम ( 3 ) अधीन भुगतान योग्य है;

(छ) " विभागाध्यक्ष' ' में सम्मिलित हैं- 96(35)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

(1) वे अधिकारी , जो राज्य शासन द्वारा विभागाध्यक्ष घोषित किए गए हैं,

(2) अन्य कोई प्राधिकारी, जिसे राज्य शासन , विभागाध्यक्ष की शक्तियां प्रत्यायोजित करे ,

(ज) " कार्यालय प्रमुख " से अभिप्रेत है-

(एक) ऐसा अधिकारी , जिसे वित्तीय शक्तियों की पुस्तिका 2025 के खण्ड -1 के सरल क्रमांक 1.2 के अधीन कार्यालय प्रमुख घोषित किया गया हो , तथा जहां सेवानिवृत्ति के समय शासकीय सेवकों का सेवा अभिलेख , संधारित हो रहा हो ,

(दो) यदि शासकीय सेवक, स्वयं कार्यालय प्रमुख है, तब उसके लिए कार्यालय प्रमुख , विभागाध्यक्ष अथवा विभागाध्यक्ष द्वारा अधिकृत किया गया वह अधिकारी होगा, जो संबंधित शासकीय सेवक से उच्च पद धारित करता हो ।

(झ) "शासन द्वारा नियंत्रित स्थानीय निधि " से अभिप्रेत है, विधि अथवा विधि का प्रभाव रखने वाले नियम द्वारा शासन के नियंत्रणाधीन ऐसे किसी संकाय की स्थानीय निधि जिसके व्यय पर शासन का पूर्ण और सीधा नियंत्रण हो ,

(

ञ) " अवयस्क " से अभिप्रेत है, ऐसा व्यक्ति जिसने अठारह वर्ष की आयु पूर्ण नहीं की है;

(ट) "उपदान प्राधिकृतकर्ता अधिकारी '' से अभिप्रेत है , संचालक, पेंशन , बीमा एवं भविष्य निधि मध्यप्रदेश के अधीनस्थ पेंशन अधिकारी , और ऐसे अधिकारी जिन्हें शासन के सामान्य अथवा विशेष आदेश द्वारा शासकीय सेवकों के उपदान अदायगी आदेश जारी करने हेतु प्राधिकृत किया गया हो;

(ठ) "अर्हतादायी सेवा '' से अभिप्रेत है , राज्य शासन के अधीन किसी नियमित पद पर सेवा में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि और उसके सेवानिवृत्ति/मृत्यु की तिथि के बीच की कालावधि (जिसमें कार्यग्रहण एवं सेवानिवृत्ति/मृत्यु की तिथि सम्मिलित है) जो इन नियमों के अधीन उपदान के उद्देश्यों के लिए संगणना में ली जाती है और उसमें तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य आदेश अथवा नियम के अधीन अर्हतादायी सेवा सम्मिलित है;

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(ड) " कोषालय " से अभिप्रेत है, शासन का कोषालय ;

(ढ) " आवास अधिपति " से अभिप्रेत है, वह विभाग, जिसकी पुस्तिका में शासकीय आवास अंकित है या जिसके प्रशासकीय नियंत्रण में है;

(ण) " वित्त विभाग " से अभिप्रेत है , शासन का वित्त विभाग;

(त) "नियुक्तिकर्ता अधिकारी " से अभिप्रेत है, सेवानिवृत्ति के समय शासकीय सेवक द्वारा धारित पद पर नियुक्ति करने के लिए सक्षम अधिकारी;

(थ) " पेंशन सॉफ्टवेयर " से अभिप्रेत है, राज्य शासन द्वारा उपदान प्रकरणों में कार्यवाही हेतु लागू सॉफ्टवेयर ;

(द) " आवंटिति " से अभिप्रेत है , ऐसा शासकीय सेवक जिसे शासकीय आवास आवंटित किया गया है;

(ध) " अधिवार्षिकी आयु " से अभिप्रेत है, शासकीय सेवक (अधिवार्षिकी-आयु) अधिनियम, 1967 की धारा 2 में निर्धारित आयु;

(न) " उपदान प्रस्तावक अधिकारी " से अभिप्रेत है, कार्यालय- प्रमुख , जिसके द्वारा शासकीय सेवक/दिवंगत शासकीय सेवक का उपदान प्रकरण तैयार कर उपदान प्राधिकृतकर्ता अधिकारी को प्रेषित किया जाना है;

"उपदान प्राधिकृतकर्ता अधिकारी" से अभिप्रेत है , पेंशन नियम में यथा परिभाषित उपदान प्राधिकृत करता अधिकारी । (प)

(2) इन नियमों में प्रयोग किए गए ऐसे शब्दों और अभिव्यक्तियों, जो परिभाषित नहीं है, का अर्थ वही होगा जो कि मध्यप्रदेश मूलभूत नियमों अथवा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2026 में उनके लिए समुनुदेशित हैं।

3. लागू होना (Application ) .- इन नियमों में अन्यथा उपबंधित के सिवाय , ये नियम निम्नलिखित को लागू होंगे: -

(एक) 1 जनवरी , 2005 को या उसके पश्चात, शासन से संबंधित सिविल सेवाओं के पदों पर नियुक्त शासकीय सेवकों पर,

(दो) शासन द्वारा समय - समय पर जारी आदेशों के द्वारा सम्मिलित कार्मिकः परंतु , ऐसे व्यक्तियों पर लागू नहीं होंगे , जिनकी सेवा के निबंधन और शर्तें तत्समय प्रवृत्त किन्ही अन्य नियमों द्वारा विनियमित होती हैं ।

4. उपदान के दावों का विनियमन.-

( 1 ) शासकीय सेवक के सेवानिवृत्त होने/कर दिए जाने अथवा त्याग पत्र स्वीकृत होने पर अथवा मृत्यु होने पर, जैसी भी स्थिति हो, के समय मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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प्रभावशील इन नियमों के उपबंधों द्वारा उपदान के दावों का विनियमन किया जाएगा ।

(2 ) जिस दिन , शासकीय सेवक यथा स्थिति सेवानिवृत्त होता है अथवा सेवानिवृत्त कर दिया जाता है, अथवा सेवामुक्त कर दिया जाता है अथवा उसकी मृत्यु हो जाती है, को कार्य का दिन माना जाएगा ।

5. उपदान वापस लेने का अधिकार.-

(1 ) जब किसी विभागीय या न्यायिक कार्यवाही में सेवानिवृत्त शासकीय सेवक के बारे में यह पाया जाए कि वह अपने सेवाकाल में गंभीर अवचार का दोषी रहा है , ऐसे मामलों में उपदान को वापिस लेने की कार्यवाही निम्नलिखित प्राधिकारी द्वारा की जाएगी, -

(क) राज्यपाल द्वारा , किसी ऐसे सेवानिवृत्त शासकीय सेवक के मामले में जो उस पद से सेवानिवृत्त हुआ जिसके लिए राज्यपाल , नियुक्ति प्राधिकारी है,

(

ख) प्रशासनिक विभाग के भारसाधक सचिव द्वारा , किसी ऐसे सेवानिवृत्त शासकीय सेवक के मामले में जो उस पद से सेवानिवृत्त हुआ जिसके लिए राज्यपाल के अधीनस्थ प्राधिकारी , नियुक्ति प्राधिकारी है:

परंतु खण्ड (क) के अधीन राज्यपाल द्वारा कोई भी अंतिम आदेश पारित करने से पूर्व लोक सेवा आयोग से परामर्श किया जाएगा ।

(2) (क) यदि उपनियम ( 1 ) में निर्दिष्ट विभागीय कार्यवाही, उस समय जब शासकीय सेवक सेवा में रहा हो, उसकी सेवानिवृत्ति से पूर्व संस्थित की गई हो तो उस कार्यवाही के बारे में शासकीय सेवक के सेवानिवृत्त हो जाने के पश्चात्, यह समझा जाएगा कि वे मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण , नियंत्रण और अपील) नियम , 1966 के अधीन की गई कार्यवाही है, और वह उस प्राधिकारी द्वारा , जिसकेद्वारा वह प्रारंभ की गई थी, उसी रीति से जारी रखी जाएगी और उसे अंतिम रूप दिया जाएगा , मानो वह शासकीय सेवक सेवा में बना रहा होः

परंतु, जहाँ कि विभागीय कार्यवाही उपनियम ( 1 ) के अधीन आदेश पारित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी के किसी अधीनस्थ मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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प्राधिकारी द्वारा संस्थित की जाए, वहां वह प्राधिकारी अपने निष्कर्षों को अभिलिखित करते हुए एक प्रतिवेदन उक्त सक्षम प्राधिकारी को देगा और उक्त सक्षम प्राधिकारी उपनियम ( 1 ) के प्रावधानों के अनुरूप उस पर अंतिम निर्णय लेगा ।

) उपनियम ( 1 )और उपनियम (2) के खंड (क) में वर्णित किसी बात के (ख

होते हुए भी, यदि विभागीय कार्यवाही मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण , नियंत्रण और अपील ) नियम , 1966 के नियम -16 के अधीन तब संस्थित की गई जब शासकीय सेवक सेवा में था और सेवानिवृत्ति के पश्चात् भी जारी रही, तो सेवानिवृत्त शासकीय सेवक के उपदान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा;

(ग) विभागीय कार्यवाही उस समय जब शासकीय सेवक सेवा में था , संस्थित न की गई हो, वह , -

( एक) उपनियम ( 1 ) के अधीन आदेश पारित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना संस्थित नहीं की जाएगी , (दो) ऐसी किसी घटना की बाबत् नहीं होगी , जो उक्त संस्थिति से चार वर्ष से अधिक पहले घटी हो , और

(तीन) ऐसे प्राधिकारी द्वारा और ऐसे स्थान में जिनके बारे में उपनियम ( 1 ) के अधीन आदेश पारित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी निर्देश दे और ऐसी प्रक्रिया के अनुसार संचालित की जाए , जो ऐसी विभागीय कार्यवाही पर लागू होती हो जिसमें शासकीय सेवक के संबंध में सेवा से पदच्युति का आदेश उसकी सेवा के दौरान किया जा सकता होः

परंतु इस उपनियम के अधीन विभागीय कार्यवाही संस्थित करने के प्रयोजन से, संबंधित सेवानिवृत्त शासकीय सेवक को आरोपों का ज्ञापन भेजा जाएगा;

(घ) जहां मध्यप्रदेश सिविल सेवा ( वर्गीकरण , नियंत्रण और अपील) नियम , 1966 के अनुसार कार्रवाई के दौरान सेवानिवृत्त शासकीय सेवक को पक्ष रखने के पर्याप्त अवसर देते हुए जांच की जाती है , तो उपनियम ( 1 ) के अधीन कार्यवाही करने से पूर्व अपना पक्ष पुनः प्रस्तुत करने का अवसर देना आवश्यक नहीं होगा ।

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(3 ) सेवानिवृत्त शासकीय सेवक को तब तक उपदान नहीं दिया जाएगा जब तक कि विभागीय या न्यायिक कार्यवाही समाप्त नहीं हो जाती और उस पर अंतिम आदेश नहीं कर दिया जाताः

परंतु यदि ऐसी कार्यवाही सेवानिवृत्ति के तीन साल पश्चात् भी जारी रहती है और उसमें अंतिम आदेश पारित नहीं होता है, तो सेवानिवृत्त शासकीय सेवक के आवेदन एवं नियुक्तिकर्ता अधिकारी की अनुशंसा पर उपदान प्राधिकृतकर्ता अधिकारी ऐसी राशि को छोड़कर , जिसकी वसूली उक्त सेवानिवृत्त शासकीय सेवक से विभागीय या न्यायिक कार्यवाही के अधीन संभावित है , उपदान की राशि का भुगतान का आदेश कर सकेगा ।

(4) (क) जहां कि उपनियम ( 1 ) के अधीन आदेश पारित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी यह विनिश्चय करे कि उपदान की राशि वापिस न ली जाए , किन्तु धन संबंधी हानि की उपदान से वसूली के आदेश दे, वहां वह वसूली शासकीय सेवक को अनुज्ञेय उपदान से की जाएगी;

(ख ) इस नियम के अधीन राज्यपाल द्वारा किए गए किसी भी आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं की जाएगी;

(ग) राज्यपाल से भिन्न किसी प्राधिकारी द्वारा उपनियम ( 1 ) के अधीन पारित किसी आदेश के विरुद्ध अपील, राज्यपाल को की जाएगी और राज्यपाल , अपील पर ऐसा आदेश पारित करेगा , जो वह उपयुक्त समझे ।

(5 ) राज्यपाल , किसी भी समय स्वप्रेरणा से या अन्यथा किसी जांच के अभिलेखों को मांग सकेंगे और लोक सेवा आयोग से परामर्श करके इन नियमों के अधीन किए गए किसी भी आदेश का पुनरीक्षण कर सकेंगे और आदेश की पुष्टि, उपांतरण या अपास्त कर सकेंगे, या मामले को किसी प्राधिकारी को यह निर्देश देते हुए वापिस कर सकेंगे कि वह आगे ऐसी जांच करे जो वह मामले की परिस्थितियों में उपयुक्त समझे या ऐसे अन्य आदेश पारित कर सकेंगे जैसे वह ठीक समझें:

परंतु उपदान की राशि से वसूल की जाने वाली राशि में वृद्धि करने वाला कोई आदेश राज्यपाल द्वारा तब तक नहीं दिया जाएगा , जब तक कि संबंधित शासकीय सेवक को प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध अभ्यावेदन करने का उचित अवसर नहीं दे दिया जाता है ।

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स्पष्टीकरण- इस नियम के प्रयोजन के लिए, -

(1 ) (क) विभागीय कार्यवाही, उस दिनांक को, जिस दिनांक को आरोप पत्र /आरोप ज्ञापन मध्यप्रदेश सिविल सेवा ( वर्गीकरण , नियंत्रण एवं अपील) नियम , 1966 के नियम 14 के अधीन शासकीय सेवक को जारी किया गया है , अथवा यदि शासकीय सेवक किसी पूर्वत्तर दिनांक से निलंबित कर दिया गया है, तो ऐसी दिनांक को संस्थित की गई समझी जाएगी;

(ख) न्यायिक कार्यवाही-

(एक) दांडिक कार्यवाही, उस दिनांक को संस्थित हुई समझी जाएगी जिस दिनांक को किसी पुलिस अधिकारी को शिकायत या रिपोर्ट, जिसका कि मजिस्ट्रेट संज्ञान करता है, की गई हो । "दाण्डिक कार्यवाही " से अभिप्रेत है, शासकीय सेवक के कर्तव्य निष्पादन के दौरान घटित आपराधिक कृत्यों के लिए

शासन द्वारा दायर दाण्डिक वाद, और

(दो) सिविल कार्यवाही, उस दिनांक को संस्थित हुई समझी जाएगी जिस दिनांक को वादपत्र न्यायालय में पेश किया जाता है।

"सिविल कार्यवाही " से केवल ऐसी कार्यवाही अभिप्रेत है, जो शासनद्वारा दायर सिविल वाद की बाबत हो ।

(2 ) इस नियम में, गंभीर " अवचार " से अभिप्रेत है, सेवानिवृत्त शासकीय सेवक द्वारा सेवा की अवधि के दौरान, किया गया कोई ऐसा कृत्य, जो मध्यप्रदेश सिविल सेवा(आचरण) नियम , 1965 के उपबंधों का उल्लंघन था और जिसके लिए सेवा की अवधि के दौरान मध्यप्रदेश सिविल सेवा(वर्गीकरण , नियंत्रण और अपील) नियम, 1966 के अधीन कार्यवाही की जा सकती है ।

(3) शासकीय सेवक द्वारा , अपने व्यक्तिगत दावों के लिए दायर किए गए वादों को न्यायिक कार्यवाही नहीं माना जाएगा ।

6. परिलब्धियां.-

(1 ) इन नियमों के अधीन संदेय उपदान की रकम के अवधारण के प्रयोजन के लिए , ' परिलब्धियां' से अभिप्रेत है, मूलभूत नियम के नियम 9 के उप- मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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नियम (21 ) में यथा परिभाषित मासिक वेतन जैसा कि शासन द्वारा समय - समय पर पारित आदेश के द्वारा अवधारित किया जाए, जो शासकीय सेवक सेवानिवृत्ति से ठीक पूर्व अथवा उसकी मृत्यु के दिनांक को, जैसा भी स्थिति हो , प्राप्त कर रहा था । इसमें सम्मिलित , चिकित्सा अधिकारियों/चिकित्सा शिक्षकों को स्वीकृत अव्यवसायिक भत्ता , निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन होगा: -

(क) सेवानिवृत्ति/मृत्यु के दिनांक के ठीक पूर्व के अंतिम 120 मास के दौरान आहरित अव्यवसायिक भत्ता का औसत ।

(ख) सेवानिवृत्ति/मृत्यु के दिनांक के ठीक पूर्व के ऐसे मामलों में जहां सेवानिवृत्ति अथवा मृत्यु पूर्व के 120 मास के दौरान यदि अव्यवसायिक भत्ता भिन्न - भिन्न समयावधि पर आहरित किया गया है एवं इस प्रकार की समयावधियों का कुल योग 120 माह से कम है तब कुल प्राप्त किया गया अव्यवसायिक भत्ते का 120 वां भाग । जैसे , यदि अव्यवसायिक भत्ता रुपए 2000 प्रतिमाह की दर से 90 माह लिया गया है तब गणना 2000 × 90 / 120 = 1500 होगी , तदनुसार रु. 1500 जोड़े जाएंगे ।

(2) यदि कोई शासकीय सेवक , अपनी सेवानिवृत्ति अथवा मृत्यु के तत्काल पूर्व सेवा के दौरान अवकाश पर कर्तव्य से अनुपस्थित रहा है जिसके लिए अवकाश वेतन देय है अथवा निलंबित होने के उपरांत (बिना सेवा अवधि के राजसात किए) बहाल किया गया है , तो परिलब्धियां, जो वह आहरित करता यदि वह अवकाश पर नहीं रहता अथवा निलंबित नहीं होता ।

(3 ) यदि कोई शासकीय सेवक , सेवानिवृत्ति अथवा मृत्यु के तत्काल पूर्व असाधारण अवकाश पर रहा है अथवा निलंबित रहा है , जिसकी अवधि अर्हकारी नहीं मानी गई है , की परिलब्धियां वह है जो उसने ऐसे अवकाश पर प्रस्थान करने के तत्काल पूर्व अथवा निलंबित करने के पूर्व आहरित कीहै ।

(4) यदि कोई शासकीय सेवक, सेवानिवृत्ति अथवा मृत्यु के तत्काल पूर्व, अर्जित अवकाश पर था तथा वेतनवृद्धि जिसे रोका नहीं गया था, अर्जित की है , ऐसी वेतनवृद्धि, यद्यपि वास्तविक रूप से आहरित नहीं की है , उसकी परिलब्धियों का हिस्सा होगी ।

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(5) बाह्य सेवा में रहते हुए शासकीय सेवक द्वारा आहरित वेतन, परिलब्धियों के रूप में नहीं माना जाएगा, अपितु यदि वह बाह्य सेवा में नहीं गया होता तो शासन के अधीन उसके द्वारा जो वेतन आहरित किया जाता, केवल वही वेतन परिलब्धियों के रूप में माना जाएगा ।

(6) ऐसे शासकीय सेवक के मामले में, जिसका वेतन प्रोफार्मा पदोन्नति के कारण या न्यायिक निर्णय या अन्य किसी कारण से काल्पनिक रूप से नियत किया गया, उसकी वेतन परिलब्धियों के रूप में माना जाएगा ।

(7) जहां किसी शासकीय सेवक की मृत्यु/सेवानिवृत्ति, दंड की अवधि के दौरान हो जाती है, जिसका प्रभाव केवल उस दंड की अवधि के दौरान उसके वेतन को कम करने का है और जिसके समाप्त होने पर उक्त दंड के किसी भी प्रभाव के बिना उसे अनुज्ञेय वेतन वापस मिल जाता , तो इस तरह के दंड के प्रभाव की उपेक्षा करते हुए उसकी मृत्यु या सेवानिवृत्ति दिनांक को काल्पनिक वेतन परिलब्धियां के रूप में माना जाएगा।

(8) किसी शासकीय सेवक का, उसकी सेवा के अंतिम माह के दौरान वेतन परिवर्तित होता है , तब सेवा के अंतिम माह के दौरान आहरण योग्य परिलब्धियों का औसत , परिलब्धियां होगी ।

7. अर्हतादायी सेवा का प्रारम्भ.-

( 1 ) किसी शासकीय सेवक की सेवा , जब तक वह 18 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं करता अर्हतादायी सेवा का प्रारंभ नहीं माना जाएगा।

(2) इन नियमों के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए , किसी शासकीय सेवक की अर्हतादायी सेवा उस दिनांक से प्रारंभ होगी जिस दिनांक को वह शासन की किसी सेवा के पद पर पहली बार नियोजित होकर कार्यभार ग्रहण करता है ।

8. शर्तें जिनके अधीन सेवा, अर्हता प्राप्त करती है.-

(1 ) किसी शासकीय सेवक की सेवा तब तक अर्हता प्राप्त नहीं करेगी जब तक उसका कार्य और वेतन , शासन द्वारा विनियमित अथवा शासन द्वारा विहित शर्तों के अधीन नहीं हो ।

(2) इस नियम के प्रयोजनों के लिए, " सेवा " से अभिप्रेत है , ऐसी सेवा जिसके लिए शासन द्वारा राज्य की संचित निधि से भुगतान किया जाता है, परन्तु यदि शासकीय सेवक द्वारा शासन के आदेशों के पालन में राज्य के संस्थानों अथवा केन्द्र शासन के अधीन सेवा की है एवं जिसके लिए 96(43)

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मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन) नियम , 2026 के नियम 8 के अनुसार नियोक्ता का अंशदान प्राप्त हो कर जमा किया गया हो, तब वह सेवा उपदान प्रयोजन के लिए अर्हक होंगी ।

स्पष्टीकरणः - किसी शासकीय सेवक को शासन में उचित अनुज्ञा के साथ नियुक्त किया गया समझा जाएगा, यदि उसने सक्षम स्तर से पूर्व अनुज्ञा प्राप्त कर शासन में किसी दूसरी सेवा के पद के लिए आवेदन किया था ।

9.परिवीक्षा सेवा की गणना.- किसी पद के विरुद्ध परिवीक्षा पर की गई सेवा अर्हतादायी होगी ।

10. सेवा की गणना.-

(1) (क) केन्द्रीय शासन में सेवा.- किसी ऐसे शासकीय सेवक की दशा में, जिसकी 01 जनवरी , 2004 को या उसके पश्चात् केन्द्रीय शासन की स्थापना में प्रथम नियुक्ति हुई हो और जिसका राज्य शासन की किसी ऐसी सेवा के पद पर , जिसे ये नियम लागू होते हैं, उचित अनुज्ञा के साथ संविलयन अथवा नियोजन किया जाता है, केन्द्रीय शासन के अधीन की गई वह सेवा अर्हक होगी;

(ख ) राज्य शासन की अन्य सेवा में नियुक्तिः- राज्य शासन के किसी ऐसे शासकीय सेवक की, जिसकी किसी ऐसी सेवा के पद में, जिसे ये नियम लागू होते हैं, राज्य शासन की अन्य सेवा के पद से कार्यमुक्ति अथवा तकनीकी त्यागपत्र की स्वीकृति के पश्चात , उचित अनुज्ञा से नियुक्ति हुई हो , तब राज्य शासन के अधीन पूर्व पद पर की गई लगातार सेवा अर्हक होगी ।

स्पष्टीकरणः - किसी शासकीय सेवक को शासन में उचित अनुज्ञा के साथ नियोजित किया गया समझा जाएगा , यदि उसने सक्षम स्तर की पूर्व अनुज्ञा के साथ शासन की अन्य सेवा के पद के लिए आवेदन किया था और नवीन पद पर कार्यग्रहण हेतु सक्षम स्तर से जारी आदेश, स्पष्ट रूप से उपदर्शित करता है , कि शासकीय सेवक, सक्षम स्तर से अनुज्ञा लेकर शासन के अधीन पद में कार्यग्रहण करने के लिए त्यागपत्र दे रहा है ।

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(2 ) केन्द्र शासन या राज्य शासन की पूर्व सेवा/सेवाओं को वर्तमान सेवा में जोड़ने की स्वीकृति एवं आदेश वर्तमान सेवा के प्रशासकीय विभाग द्वारा जारी किए जा सकेंगे ।

11. पुनर्नियोजित शासकीय सेवक के प्रकरण में सेवानिवृत्ति पूर्व सिविल सेवा की गणना.-

( 1 ) ऐसा शासकीय सेवक, जो अशक्त पेंशन पर सेवानिवृत्त होने के पश्चात पुनर्नियोजित किया जाता है और किसी ऐसी सेवा के पद में, जिस पर ये नियम लागू होते हैं, 31 दिसंबर, 2004 के पश्चात् नियोजित किया गया है और जो ऐसे पुनर्नियोजन या नियुक्ति होने पर , प्रयोग किए गए विकल्प के अनुसार , सेवा उपदान की राशि, जिसके अधीन सेवानिवृत्ति उपदान , यदि कोई हो , भी है, वापस कर देता है अथवा वापस करने के लिए सहमत है, उसकी पहले की सेवा की गणना, अर्हक सेवा के रूप में की जाएगी ।

(2) ऐसे शासकीय सेवक से, जो अपनी पूर्व सेवा की गणना के लिए सहमति देता है, यह अपेक्षा की जाएगी कि, वह अपनी पूर्व सेवा की बाबत प्राप्त उपदान, छत्तीस से अनधिक मासिक किस्तों में, जिनमें से पहली किश्त उस माह के, जिसमें उसने सहमति दी थी , ठीक बाद के माह से आरंभ होगी , वापस दे । ऐसी दशा में , पहले की सेवा का अर्हक सेवा के रूप में गणना कराने का अधिकार, तब तक पुनः प्रवर्तित नहीं होगा जब तक कि पूरी राशि वापस नहीं दी गई हो ।

(3 ) ऐसे शासकीय सेवक की दशा में , जिसकी उपदान वापस करने की सहमति दिए जाने तथा यह राशि वापस करने से पहले ही मृत्यु हो जाए , उपदान की वह राशि, जो वापस नहीं की गई, मृत्यु सह सेवा उपदान के मद में समायोजित कर दी जाएगी ।

12. सिविल रोजगार के पूर्व की गई सैन्य सेवा की गणना.- ( 1 ) ऐसा शासकीय सेवक, जिसे सैन्य सेवा करने के पश्चात , किसी सिविल सेवा के पद में 31 दिसंबर , 2004 के पश्चात पुनर्नियोजित किया जाता है और ऐसे पुनर्नियोजित होने पर वह सेवानिवृत्ति उपदान की राशि वापस कर देता है या वापस करने के लिए सहमत है , अपनी पिछली सैन्य सेवा की गणना अर्हक सेवा के रूप में कर सकेगा ।

(2) ऐसा शासकीय सेवक जो उप - नियम ( 1 ) के अधीन उपदान वापस करने के लिए सहमत है , तो उससे यह अपेक्षा की जाएगी कि वह अपनी पहले की सैन्य सेवा की बावत् प्राप्त उपदान, छत्तीस से अनधिक मासिक किस्तों में , मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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जिसमें से पहली किस्त, उस माह के, जिसमें उसने सहमति प्रदान की थी, ठीक बाद के माह से आरंभ होगी , वापस दे । पहले की सेवा की अर्हक सेवा के रूप में गणना कराने का अधिकार तब तक पुनः प्रवर्तित नहीं होगा , जब तक कि पूरी राशि वापस न दी गई हो ।

(3) ऐसे शासकीय सेवक की दशा में, जिसने उपदान को वापस करने की सहमति प्रदान की थी तथा यह राशि वापस करने से पहले ही उसकी मृत्यु हो जाए , ऐसी स्थिति में उपदान की वह राशि, जो वापस नहीं की गई, उसे मृत्यु उपदान के विरुद्ध समायोजित कर दिया जाएगा।

(4) ऐसा कोई आदेश पारित किया गया हो, जिसमें पहले की गई सैन्य सेवा की गणना उपदान के लिए अर्हक सेवा के एक भाग के रूप में किया जाना मान्य किया गया हो, तब उस आदेश के बारे में यह समझा जाएगा कि उसमें सैन्य तथा सिविल सेवा के बीच सेवा में व्यवधान, यदि कोई हो, को माफ किया गया है:

परन्तु व्यवधान की अवधि को उपदान के लिए अर्हकारी सेवा की गणना में नहीं लिया जाएगा ।

13. अवकाश पर व्यतीत की गई अवधियों की गणना.-

(1) सेवाकाल में लिए गए तथा सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत सभी प्रकार के अवकाश , जिसमें असाधारण अवकाश भी सम्मिलित है, अर्हतादायी सेवा के रूप में जोड़े जाएंगे । किसी भी प्रकार की अनुपस्थिति, जिसके लिए अवकाश सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत नहीं किया गया है, अनधिकृत अनुपस्थिति माना जाएगा ।

(2) निरंतरता में 5 वर्ष से अधिक अवधि की अवकाश अवधि की स्थिति में 5 वर्ष से जितनी अवधि अधिक है , वह अवधि अर्हतादायी सेवा नहीं होगी ।

14. अकार्य दिवस (Dies - non) .- अकार्य दिवस (Dies -non) की अवधि उपदान के लिए अर्हतादायी नहीं होगी ।

15. प्रशिक्षण पर व्यतीत समयावधि की गणना. शासन, आदेश द्वारा, विनिश्चित कर सकता है , कि शासकीय सेवा में नियुक्ति के तत्काल पूर्व किसी शासकीय सेवक द्वारा नियुक्तिके लिए अनिवार्य प्रशिक्षण में व्यतीत किया गया समय अर्हतादायी सेवा के रूप में जोड़ा जाए ।

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16. निलंबन काल की गणना.-

(1 ) शासकीय सेवक ने जो अवधि कदाचरण की जांच होने तक निलंबन में व्यतीत की है, उसकी गणना , जहां कि ऐसी जांच समाप्त हो जाने पर उसे पूरी तरह से दोषमुक्त कर दिया गया है अथवा लघु शास्ति अधिरोपित की गई है अथवा निलंबन के पश्चात विभागीय जांच किए बिना ही बहाल कर दिया गया है , वहां ऐसी निलंबन अवधि, अर्हक सेवा के रूप में मानी जाएगी ।

(2

) उप - नियम ( 1 ) के अधीन समावेश न होने की दशा में , निलंबन अवधि की गणना अर्हकारी सेवा के रूप में तब तक मान्य नहीं की जाएगी , जब तक कि ऐसे मामलों को शासित करने वाले नियम के अधीन आदेश पारित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी स्पष्ट रूप से यह घोषित न करे ।

(3

) उपनियम (2) के अनुसार स्पष्ट आदेश के अभाव में अथवा सेवा अभिलेख में निलम्बन अवधि को सेवाकाल माने जाने अथवा नहीं माने जाने की स्पष्टता न होने पर , निलंबन अवधि को कर्तव्य न मानते हुए, उपदान प्रकरण निराकृत किया जाएगा ।

17. पदच्युति अथवा हटाए जाने पर सेवा का हरण.- शासकीय सेवक को सेवा के पद से पदच्युति अथवा हटाए जाने पर उसकी पूर्व सेवा का स्वतः ही हरण हो जाएगा अर्थात् नियम-23 के अनुसार उसे उपदान का लाभ देय नहीं होगा।

18. बहाल होने पर पूर्व सेवा की गणना.-

(1 ) शासकीय सेवक, जिसे सेवा से पदच्युत (Dismiss ) , हटाया ( Remove ) , या अनिवार्य सेवानिवृत्त (Compulsory Retirement) कर दिया गया है, परन्तु बाद में अपील अथवा पुनर्विलोकन के अधीन पुनर्स्थापित कर दिया जाता है , तो पूर्व में की गयी सेवा अर्हतादायी सेवा मान्य होगी एवं तदनुसार उपदान कीपात्रता होगी ।

(2) यथास्थिति, पदच्युति, हटाए जाने या अनिवार्य सेवानिवृत्ति की दिनांक तथा बहाली की दिनांक के बीच सेवा में जितनी अवधि का व्यवधान हुआ है, उतनी अवधि यदि कोई हो, की गणना तब तक अर्हक सेवा के रूप में नहीं की जाएगी, जब तक उसे उस प्राधिकारी के, जिसने बहाली का आदेश पारित किया था , किसी विनिर्दिष्ट आदेश द्वारा कर्तव्य अथवा अवकाश के रूप में विनियमित नहीं कर दिया गया हो ।

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19. पदत्याग (Resignation ) पर सेवा का हरण.-

(1 ) शासन की किसी सेवा के पद से पदत्याग करने पर, तब के सिवाय , जबकि नियुक्तिप्राधिकारी द्वारा लोकहित में ऐसा पदत्याग वापस लेने की अनुज्ञा दी गई है , विगत सेवा का हरण हो जाएगा ।

(2) पदत्याग से विगत सेवा का हरण नहीं होगा यदि ऐसा पदत्याग, सक्षम अनुज्ञा से, ऐसे शासन के अधीन, वहां जहां सेवा अर्हक होती है, कोई नियुक्ति ग्रहण करने के लिए किया गया हो, ऐसा पदत्याग तकनीकी पदत्याग माना जाएगा । पदत्याग स्वीकार करने वाले आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाएगा कि शासकीय सेवक ने समुचित अनुज्ञा से अन्य नियुक्ति ग्रहण करने के लिए पदत्याग किया है और शासकीय सेवक के सेवा अभिलेख में इस आशय की विशिष्ट प्रविष्टि कार्यालय प्रमुख द्वारा की जाएगी ।

(3) उपनियम (2) के अधीन आने वाले मामले में सेवा का व्यवधान , जो दो विभिन्न स्थानों पर दो नियुक्तियों के कारण हो गया हो और जो स्थानांतरण के नियमों के अधीन अनुज्ञेय कार्यभार ग्रहण करने की अवधि से अधिक हो, शासकीय सेवक को उसके कार्यमुक्त होने की दिनांक को, पात्र किसी भी प्रकार का अवकाश स्वीकृत करके अथवा उस सीमा तक, जिस तक वह अवधि उसके पात्र अवकाश से पूरी न होती है , उसे औपचारिक रूप से असाधारण अवकाश स्वीकृत कर निराकृत किया जाएगा ।

(4) नियुक्ति अधिकारी , किसी शासकीय सेवक को उसका पदत्याग लोकहित में वापस लेने की अनुज्ञा निम्नलिखित शर्तों पर दे सकेगा, अर्थात्: -

(एक) यह कि शासकीय सेवक ने पदत्याग ऐसी विवशता के कारणों से किया था , जिसका संबंध उसकी ईमानदारी , दक्षता या आचरण की बाबत् किसी लांछन से नहीं है और पदत्याग को वापस लेने का अनुरोध उन परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन आ जाने के कारण किया गया है, जिन परिस्थितियों में शासकीय सेवक मूलतः पदत्याग करने के लिए विवश हुआ था;

(दो) यह कि पदत्याग के प्रभावी होने की दिनांक और पदत्याग वापस लेने का अनुरोध करने की दिनांक के बीच की अवधि में संबंधित व्यक्ति का आचरण किसी भी तरह से अनुचित नहीं था;

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(तीन) यह कि पदत्याग प्रभावी होने की दिनांक और व्यक्ति द्वारा पदत्याग वापस लेने की अनुज्ञा देने का अनुरोध करने की दिनांक के बीच कर्तव्य से अनुपस्थिति की अवधि, नब्बे दिन से अधिक नहीं है;

(चार) यह कि वह पद , जो शासकीय सेवक का पदत्याग स्वीकार करने पर रिक्त हुआ, उपलब्ध है ।

(5) नियुक्तिकर्ता अधिकारी द्वारा पदत्याग को वापिस लेने का अनुरोध, उस दशा में स्वीकार नहीं किया जाएगा, जबकि शासकीय सेवक ने सेवा के पद से पदत्याग किसी वाणिज्यिक कंपनी में या उसके अधीन अथवा शासन के पूर्णतः या सारतः स्वामित्वाधीन या नियंत्रण के अधीन किसी निगम या किसी संस्थान में नियुक्ति ग्रहण करने के उद्देश्य से किया था ।

(6) जहां नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा किसी व्यक्तिको अपना पदत्याग वापस लेने और पुनः कार्यग्रहण करने का आदेश पारित किया जाता है , वहां यह समझा जाएगा कि ऐसे आदेश में सेवा में व्यवधान की अवधि को अकार्य दिवस माने जाने का आदेश भी अन्तर्निहित है ।

(7 ) स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति अथवा अनिवार्य सेवानिवृत्ति के प्रकरणों में शासन के अधीन की गई विगत सेवा का हरण नहीं होगा ।

(8 ) यदि कोई शासकीय सेवक अनाधिकृत रूप से 5 वर्ष अथवा उससे अधिक अवधि के लिए निरंतर शासकीय सेवा से अनुपस्थित रहता है , तब उसे उसकी अनुपस्थिति दिनांक से, सेवा से त्याग पत्र दिया हुआ माना जाएगा।

20. सेवा में व्यवधान का प्रभाव.-

( 1 ) निम्न प्रकरणों को छोड़कर , शासकीय सेवक के सेवा में व्यवधान से उसकी पूर्व सेवा का हरण हो जाएगा, -

(क) अधिकृत अवकाश के कारण अनुपस्थिति;

(ख) निलम्बन , जहां बाद में चाहे उसी अथवा किसी भिन्न पद पर पुनःस्थापना कर दी जाती है अथवा निलंबनाधीन रहते हुए जहां शासकीय सेवक की मृत्यु हो जाती है अथवा सेवानिवृत्ति की अनुमति दे दी जाती है अथवा सेवानिवृत्ति कर दी जाती है;

(ग) सेवा से पदच्युति, हटाए जाने अथवा अनिवार्य सेवानिवृत्ति के पश्चात् सेवा में पुनःस्थापन;

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(घ) किसी एक पद से दूसरे पद पर स्थानान्तरण के दौरान कार्यभार ग्रहण करने का समय;

(2 ) उपनियम ( 1 ) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, नियुक्तिकर्ता अधिकारी बिना अवकाश अनुपस्थिति काल को , आदेश द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से, असाधारण अवकाश में परिवर्तित कर सकता है । ऐसी असाधारण अवकाश की अवधि उपदान के लिए अर्हतादायी होगी ।

21. सेवा में व्यवधान का दोषमार्जन.- सेवा अभिलेख में प्रतिकूल विनिर्दिष्ट उपदर्शन के अभाव में , शासन के अधीन किसी शासकीय सेवक द्वारा दो बार की गई सिविल सेवा के बीच में व्यवधान स्वमेव दोषमार्जित माना जाएगा तथा व्यवधान पूर्व सेवा अर्हतादायी सेवा मानी जाएगी ।

22. प्रतिनियुक्ति की अवधि.- प्रतिनियुक्ति पर अथवा बाह्य सेवा में रहते हुए सेवानिवृत्त होने वाले शासकीय सेवक के प्रकरण में इस अध्याय के प्रावधानों के अनुसार उपदान स्वीकृत करने की कार्यवाही उस उपदान प्रस्तावक प्राधिकारी के द्वारा की जावेगी , जिसके कार्यालय में शासकीय सेवक का सेवा अभिलेख संधारित है।

23. सेवानिवृत्ति उपदान, मृत्यु सेवानिवृत्ति उपदान एवं अवशिष्ट उपदान.-

(1 ) सेवानिवृत्ति उपदान: - ऐसे शासकीय सेवक को, जिसने पांच वर्ष की अर्हक सेवा पूरी कर ली है, और जो, -

(एक) अधिवार्षिकी की आयु प्राप्त होने पर , या अशक्तता होने पर या अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त होता है , अथवा

(दो) मध्यप्रदेश मूलभूत नियम के नियम -56 के अनुसार अधिवार्षिकी की आयु से पूर्व सेवानिवृत्त होने वाला है या सेवानिवृत्त हो गया है, अथवा

(तीन) जिस प्रतिष्ठान में वह सेवा कर रहा था, उसमें अधिशेष घोषित किए जाने पर अधिशेष कर्मचारियों की स्वैच्छिक सेवानिवृति से संबंधित विशेष स्वैच्छिक सेवानिवृति योजना का विकल्प देता है;

उसकी सेवानिवृत्ति पर सेवानिवृति उपदान मंजूर किया जाएगा, जो अर्हक सेवा की प्रत्येक संपूरित षट्‌मासिक अवधि के लिए उसकी परिलब्धियों के एक- चौथाई के बराबर परिलब्धियों के 16-1 /2 गुना अधिकतम के अध्यधीन रहते हुए, होगा:

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परन्तु इस नियम के अधीन देय सेवानिवृत्ति उपदान की धनराशि की अधिकतम सीमा वह होगी , जैसा कि समय - समय पर शासन द्वारा विनिश्चित किया जाए;

(2) मृत्यु उपदानः- यदि किसी शासकीय सेवक की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को नियम-24 के प्रावधानों में उपदर्शित रीति से मृत्यु उपदान नीचे दी गई सारणी में दी गई दरों के अनुसार दिया जाएगा , अर्थातः-

अर्हक सेवा की अवधि

अनु. क्र.

मृत्यु उपदान की दर

(एक)

परिलब्धियों के दो गुने

एक वर्ष से न्यून

(दो)

परिलब्धियों के छह गुने

एक वर्ष या अधिक किन्तु पांच वर्ष से न्यून

(तीन) पांच वर्ष से अधिक किन्तु परिलब्धियों के बारह गुने

24 वर्ष से न्यून

24 वर्ष से अधिक

(चार)

अर्हक सेवा की पूरी की गई प्रत्येक षट्‌मासिक अवधि के लिए परिलब्धियों का आधा , किन्तु अधिकतम 16½ गुना

(3 ) अवशिष्ट उपदान: - यदि कोई शासकीय सेवक, जो सेवानिवृत्त होने पर मृत्यु- सह सेवानिवृत्ति उपदान का पात्र है, जिसके अधीन शास्ति स्वरूप अनिवार्य सेवानिवृत्ति भी सम्मिलित है, की सेवानिवृत्ति की दिनांक से पांच वर्ष के भीतर मृत्यु हो जाती है और उसकी मृत्यु के समय उसके द्वारा वास्तव में प्राप्त उपदान की राशि उसकी मासिक परिलब्धियों की बारह गुना राशि से कम है तो जितनी राशि कम होगी उसके बराबर अवशिष्ट उपदान उपनियम (5 ) में उपदर्शित रीति से उसके परिवार को दिया जाएगा एवं 3 माह से कम की अवधि को गणना में नहीं लिया जाएगा।

(4) इस नियम के अधीन अर्हक सेवाकाल की गणना करने में वर्ष का ऐसा भाग , जो तीन मास के बराबर या उससे अधिक हो , को संपूरित षट्‌मासिक अवधि माना जाएगा और उसकी गणना अर्हक सेवा के रूप में की जाएगी ।

(5 ) इस नियम के अधीन अनुज्ञेय उपदान के प्रयोजन के लिए परिलब्धियां नियम- 6 के अनुसार संगणित की जाएगीः मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 फरवरी 2026

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परंतु यह और कि यथास्थिति, सेवानिवृत्ति या मृत्यु की दिनांक को अनुज्ञेय महंगाई भत्ता इस नियम के प्रयोजनार्थ परिलब्धियाँ माना जाएगा;

टिप्पणी- उपदान की रकम पूर्ण रूपयें में अभिव्यक्त की जाएगी और जहाँ उपदान में रुपए का भाग अन्तर्विष्ट है वहां उसे रुपए के निकटतम उच्चतर रुपए तक पूर्णांकित किया जाएगा।

स्पष्टीकरणः- इन नियमों के प्रयोजनों के लिए, शासकीय सेवक के संबंध में

" परिवार " से अभिप्रेत है.-

(एक) पुरुष शासकीय सेवक की दशा में, पत्नी;

(दो) महिला शासकीय सेवक की दशा में , पति;

(iii ) पुत्र, जिनके अधीन सौतेले पुत्र और दत्तकगृहीत पुत्र भी हैं;

( iv) अविवाहित पुत्रियां, जिनके अधीन सौतेली पुत्रियां और दत्तकगृहीत पुत्रियां भी है;

(v) विधवा या विवाह विछिन्न पुत्रियां, जिनके अधीन सौतेली पुत्रियां और दत्तकगृहीत पुत्रियां भी हैं;

(vi) माता एवं पिता;

(vii) बिना किसी आयु सीमा के ऐसे भाई , जिसमें सौतेले भाई भी सम्मिलित हैं, जो मानसिक मंदता सहित किसी मानसिक विकार या निःशक्तता से ग्रस्त हैं अथवा शारीरिक रूप से अपंग या निःशक्त हैं और अन्य मामलों में , अठारह वर्ष से कम आयु के भाई , जिसमें सौतेले भाई भी सम्मिलित हैं;

(viii ) अविवाहित बहनें , विधवा बहनें और विवाह विछिन्न बहनें जिसके अधीन सौतेली बहनें सम्मिलित हैं;

( ix) विवाहित पुत्रियां;

(x) मृत पुत्र या पुत्रियों की संतानें।

24. व्यक्ति जिन्हें उपदान देय है.-

( 1 ) (क) नियम 23 के अधीन देय उपदान का भुगतान सेवानिवृत्त शासकीय सेवक या उसके मृत होने की स्थिति में ऐसे व्यक्ति अथवा व्यक्तियों को होगा जिन्हें नियम 26 के अधीन नामांकन के माध्यम से उपदान प्राप्त करने का अधिकार प्रदत्त किया गया है ।

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(ख ) यदि ऐसा कोई नामांकन नहीं है या किया गया नामांकन अस्तित्व में नहीं है तो उपदान नीचे उपदर्शित किए अनुसार संदत्त किया जाएगा-

(एक) यदि नियम -23 के उपनियम (5 ) के खंड (एक) , (दो) , (तीन) , (चार) और (पांच) के अनुसार परिवार के एक या अधिक उत्तरजीवी सदस्य हों , तो समस्त ऐसे सदस्यों को समान अंशोंमें;

(दो) यदि ऊपर दिए गए उप खंड के अनुसार परिवार में ऐसे कोई उत्तरजीवी सदस्य नहीं हो, किन्तु नियम 23 उपनियम (5 ) के खंड (चार) से (दस) के अनुसार एक या अधिक सदस्य हों तो समस्त ऐसे सदस्यों को समान अंशों में ।

(2) यदि किसी नामनिर्देशिती की मृत्यु शासकीय सेवक की मृत्यु से पूर्व हो जाती है और नियम 23 के उपनियम (5 ) के अधीन उस नामनिर्देशिती को प्रदत्त अधिकार किसी अन्य व्यक्ति को नहीं दिया गया है, या अन्य व्यक्ति के संबंध में किया गया नामनिर्देशन अस्तित्व में नहीं है या इसमें उल्लिखित किसी भी आकस्मिकता के घटित होने पर नामनिर्देशन अविधिमान्य हो गया है , तो ऐसे नामनिर्देशिती के संबंध में उपदान का हिस्सा परिवार के अन्य सभी सदस्यों को समान रूप से संवितरित किया जाएगा , जो शासकीय सेवक की मृत्यु की दिनांक पर पात्र और जीवित थे ।

(3 ) यदि शासकीय सेवक की मृत्यु नियम 23 के उपनियम ( 1 ) के अधीन अनुज्ञेय उपदान प्राप्त किए बिना ही सेवानिवृत्ति के पश्चात हो जाती है तो उपदान का संदाय इस नियम के उपनियम (1 ) में उपदर्शित रीति से परिवार को संवितरित कर दिया जाएगा ।

(4 ) ऐसे शासकीय सेवक के, जिसकी मृत्यु सेवा में रहते हुए या सेवानिवृत्ति के पश्चात हो जाती है , परिवार की किसी महिला सदस्य अथवा उस शासकीय सेवक के किसी भाई के उपदान के किसी अंश को पाने के अधिकार पर उस दशा में प्रभाव नहीं पड़ेगा जब शासकीय सेवक की मृत्यु के पश्चात और उपदान के अपने अंश को प्राप्त करने से पूर्व वह महिला सदस्य विवाह कर लेती है अथवा पुनर्विवाह कर लेती है अथवा भाई अठारह वर्ष की आयु प्राप्त कर लेता है ।

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(5 ) जहां कि नियम 23 के अधीन मृत शासकीय सेवक के परिवार के किसी अवयस्क सदस्य को कोई उपदान स्वीकृत किया जाए वहां वह उस अवयस्ककी ओर से संरक्षक को संदेय होगा ।

( 6) किसी नैसर्गिक संरक्षक की अनुपस्थिति में अवयस्क के उपदान के हिस्से के बीस प्रतिशत का संदाय संरक्षकता प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए बिना, किन्तु क्षतिपूर्ति बंधपत्र ( Indemnity Bond) प्रस्तुत करने पर संरक्षक को किया जाएगा और अवयस्क के उपदान की शेष राशि संरक्षकता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर संरक्षक को संदेय होगी ।

(7) यदि इस नियम के अधीन उपदान प्राप्त करने के लिए परिवार के एक से अधिक सदस्य पात्र हैं और यदि परिवार के किसी सदस्य ने उपदान के लिए अपना दावा प्रस्तुत नहीं किया है, तो उपदान की स्वीकृति के लिए मामले पर उसका दावा प्राप्त होने के बाद कार्यवाही की जाएगी और उपदान की स्वीकृति के लिए परिवार के अन्य पात्र सदस्यों के मामले पर परिवार के उस सदस्य के मामले से जोड़े बिना कार्यवाही की जाएगी जिसने दावा प्रस्तुत नहीं किया है:

परन्तु ऐसे सदस्य द्वारा तत्पश्चात दावा प्रस्तुत करने पर उस सदस्य को उपदान के देय अंश के भुगतान की स्वीकृति दी जाएगी ।

(8 ) यदि सेवानिवृत्त या मृत शासकीय सेवक ने कोई नामनिर्देशन नहीं किया है, या उसके द्वारा किया गया नामनिर्देशन अस्तित्व में नहीं है, वहां ऐसे शासकीय सेवक के बावत , नियम 23 के अधीन संदेय सेवानिवृत्ति उपदान या मृत्यु उपदान की रकम उस व्यक्ति को संदेय होगी जिसके पक्ष में न्यायालय द्वारा विचाराधीन उपदान के संबंध में उत्तराधिकार प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है ।

25. किसी व्यक्तिका उपदान प्राप्त करने का विवर्जन .-

( 1 ) यदि कोई व्यक्ति जो शासकीय सेवक की सेवाकाल दौरान हुई मृत्यु की दशा में , नियम 23 के प्रावधानों के अनुसार उपदान प्राप्त करने के लिए पात्र है, उस शासकीय सेवक की हत्या के अपराध अथवा ऐसे किसी अपराध को करने के दुष्प्रेरण के लिए आरोपित किया गया है उसके विरुद्ध संस्थितदाण्डिक कार्यवाही की समाप्ति तक उपदान के उसके हिस्से को प्राप्त करने का उसका दावा निलम्बित रहेगा ।

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यदि संबंधित व्यक्ति, उपनियम ( 1 ) में संदर्भित दाण्डिक कार्यवाही की (2)

समाप्तिपर-

(क) शासकीय सेवक की हत्या अथवा हत्या के दुष्प्रेरण करने के लिए सिद्धदोष ठहराया जाता है तो उपदान का उसका हिस्सा प्राप्त करने से विवर्जित कर दिया जाएगा जो कि परिवार के अन्य पात्र सदस्यों को भुगतान योग्य होगा ।

(ख) शासकीय सेवक की हत्या अथवा हत्या के दुष्प्रेरणा करने के आरोप से दोषमुक्त कर दिया जाता है तो उपदान का उसका हिस्सा उसे भुगतान हो जाएगा ।

26. नामांकन.-

(1 ) ( क) शासकीय सेवक प्रथम नियुक्ति पर एक अथवा एक से अधिक व्यक्तियों को उपदान प्राप्त करने हेतु पेंशन सॉफ्टवेयर में नामांकन प्रस्तुत करेगा;

(ख) नामांकन करते समय-

(एक) शासकीय सेवक का परिवार है तो उसके परिवार के सदस्यों के अतिरिक्त अन्य किसी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के पक्ष में नामांकन नहीं होगा ,

(दो) शासकीय सेवक का परिवार नहीं है, तो किसी अन्य व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के पक्ष में नामांकन किया जाएगा ।

(2) यदि शासकीय सेवक उपनियम ( 1 ) के अधीन एक से अधिक व्यक्तियों को नामांकित करता है तो नामित व्यक्ति को देय राशि का हिस्सा वह नामांकन में इस प्रकार निर्दिष्ट करेगा कि उपदान की संपूर्ण राशि का भुगतान हो जाए ।

(3) शासकीय सेवक नामांकन में निम्नलिखित व्यवस्था करेगा , -

(एक) किसी निर्दिष्ट नामांकित व्यक्ति के संबंध में जिसकी मृत्यु उस शासकीय सेवक से पूर्व हो जाए अथवा जिसकी मृत्यु शासकीय सेवक की मृत्यु के बाद परन्तु उपदान का भुगतान प्राप्त करने के पूर्व हो जाए तो उस नाम निर्देशित को प्रदत्त अधिकार ऐसे अन्य व्यक्ति को अंतरित हो जाएगा जैसा कि नामांकन में निर्दिष्ट किया गया है:

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परन्तु यदि नामांकन करते समय शासकीय सेवक के परिवार में एक से अधिक सदस्य हैं तो इस प्रकार निर्दिष्ट व्यक्ति उसके परिवार के सदस्य के अतिरिक्त कोई दूसरा व्यक्ति नहीं होगाः

परन्तु यह भी कि जहां शासकीय सेवक के परिवार में केवल एक ही सदस्य हो , और उसके पक्ष में नामांकन किया गया है, तब किसी भी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के पक्ष में वैकल्पिक नाम निर्देशिती अथवा निर्देशितियों का नामांकन करने का शासकीय सेवक को अधिकार होगा ।

(दो) नामांकन, उसमें उपबन्धित आकस्मिकता के घटित हो जाने की दशा में अविधिमान्य हो जाएगा ।

(4) नामांकन करते समय जहां शासकीय सेवक का कोई परिवार नहीं है अथवा जहां उसके परिवार में केवल एक ही सदस्य है, उपनियम , (3 ) के खंड (एक) के द्वितीय परन्तुक के अधीन उस शासकीय सेवक द्वारा किया गया नामांकन, शासकीय सेवक के द्वारा पश्चातवर्ती परिवार अथवा परिवार में एक अतिरिक्त सदस्य अर्जित कर लेने की दशा में , अविधिमान्य हो जाएगा ।

(5) शासकीय सेवक किसी भी समय , पेंशन सॉफ्टवेयर में, नामांकन निरस्त/परिवर्तन कर सकता है , परन्तु इस क्रय में वह , इस नियम के अनुसार एक नया नामांकन करेगा ।

(6) उपनियम (3 ) के खंड (एक) अधीन नामनिर्देशन जिसके पक्ष में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है, की मृत्यु हो जाने की दशा में अथवा कोई घटना घटित हो जाने पर जिसके कारण इस उपनियम -1 के खंड (ख) के अनुसरण में नामनिर्देशन विधि मान्य नही है , तो शासकीय सेवक पेंशन सॉफ्टवेयर में तदनुसार नया नाम निर्दिष्ट करेगा ।

(7) शासकीय सेवक द्वारा किया गया प्रत्येक नामांकन तथा निरसन हेतु दी गई प्रत्येक जानकारी जिस दिनांक को पेंशन सॉफ्टवेयर में अंकित होगी उस दिनांक से वह प्रभावशील मानी जाएगी ।

27. लापता शासकीय सेवक की दशा में उपदान का संदाय , -

( 1 ) जहां कि, कोई शासकीय सेवक लापता हो जाता है तो परिवार संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करेगा और पुलिस से यह रिपोर्ट प्राप्त करेगा कि पुलिस मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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द्वारा किए गए सभी प्रयासों के बावजूद शासकीय सेवक का पता नहीं लगाया जासका है ।

(2) पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के छह मास के पश्चात परिवार, उपदान की स्वीकृति के लिए जहां शासकीय सेवक ने अंतिम रूप से सेवा की थी, के कार्यालय प्रमुख को आवेदन करेगा ।

(3 ) निम्नलिखित औपचारिकताओं का पालन करने के बाद उपदान प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के प्रस्ताव पर उपदान प्राधिकृतकर्ता द्वारा उपदान स्वीकृत किया जाएगा,

(एक) यह अभिनिश्चित करे कि शासकीय सेवक के संबंध में पुलिस में दर्ज की गई शिकायत और पुलिस द्वारा , "पता नहीं लगाया जा सका " रिपोर्ट उपलब्ध है;

(

दो) शासकीय सेवक के नाम निर्देशिती या आश्रितों से आवेदन तथा क्षतिपूर्ति बंधपत्र लिया जाएगा ।

(4) शासकीय सेवक के लापता होने की दशा में , उपदान के लिए परिलब्धियां , उसके लापता होने से पहले कर्तव्य पर रहने की अंतिम दिनांक अथवा यदि वह अवकाश पर था , तो जिस दिनांक को उसे स्वीकृत अवकाश समाप्त हो गया है , पर प्राप्त परिलब्धियों के आधार पर निर्धारित होगी ।

(5) (क) आवेदन की दिनांक से तीन मास के भीतर परिवार को उपदान का संदाय किया जाएगा ।

(ख) अवशिष्ट उपदान और मृत्यु - सह सेवानिवृत्ति उपदान के बीच के अंतर का संदाय शासकीय सेवक की मृत्यु के निर्णायक रूप से पुष्टि होने के पश्चात व पुलिस रिपोर्ट की दिनांक में सात वर्ष की अवधि की समाप्ति पर होगा ।

(6) उपदान प्रस्तावक अधिकारी शासकीय सेवक के सभी बकाया शासकीय शोध्यों का निर्धारण करेगा और उपदान के संदाय की संस्वीकृति के पूर्व उनकी वसूली करेगा ।

(7 ) इस नियम की कोई भी बात ऐसे शासकीय सेवक की दशा में लागू नहीं होगी जो गायब हो गया हो और जिसके विरुद्ध विभागीय जाँच या धोखाधड़ी या गबन या किसी अन्य अपराध के आरोप की जांच चल रही हो या जिस पर ऐसे अपराधों का आरोप लगा हो या सिद्धदोष हो ।

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28. शासकीय आवास होने के मामले में कार्यवाही.-

(1 ) सेवानिवृत्त होने वाले शासकीय सेवकों की सूची के आधार पर उपदान प्रस्तावक अधिकारी यह जांच करेगा कि शासकीय आवास का शुल्क नियमित रूप से जमा किया जा रहा है , उपदान प्रस्तावक अधिकारी का दायित्व होगा कि सेवानिवृत्ति की तिथि तक का आवास शुल्क संबंधित शासकीय सेवक से नियमित रूप से वसूल किया जाए । सेवानिवृत्ति के पश्चात यदि शासकीय सेवकद्वारा शासकीय आवास रिक्त नहीं किया जाता है , तो संबंधित आवास शुल्क नियमित रूप से प्राप्त करने का दायित्व आवास के अधिपति विभाग , तथा जिसके द्वारा सेवानिवृत्ति के उपरांत अथवा पुनर्नियोजन अवधि में आवास धारण करने की अनुमति दी गई है , की होगी।

(2) आवास शुल्क के संबंध में पृथक से अदेय प्रमाण - पत्र प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होगी ।

(3 ) जलकर एवं विद्युत शुल्क का भुगतान शासकीय सेवक द्वारा स्थानीय निकाय /विद्युत कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए देयकों के आधार पर इन संस्थानों को किया जाता है । अतः जलकर/विद्युत शुल्क के अंतिम देयक की राशि जमा करने की तिथि को ही अमांग प्रमाण-पत्र मान्य किया जाएगा । अंतिम देयक से आशय शासकीय सेवक द्वारा शासकीय आवास के आधिपत्य की तिथि तक है ।

29. उपदान के विलंबित संदाय पर ब्याज.-

( 1 ) ऐसे सभी मामलों में जहां इन नियमों के अनुसार उपदान संदाय सेवानिवृत्ति/मृत्यु के तीन माह के पश्चात प्राधिकृत किया गया हो, जिसमें अधिवार्षिकी से अन्यथा सेवानिवृत्ति के मामले भी सम्मिलित हैं, और यह स्पष्ट रूप से स्थापित हो जाता है कि संदाय में विलंब के लिए संबंधित सेवानिवृत्त शासकीय सेवक जिम्मेदार नहीं हैं, तो उपदान के बकाया पर ब्याज , तत्समय प्रचलित सामान्य भविष्य निधि पर देय ब्याज दर के अनुसार ब्याज का भुगतान किया जाएगाः

परंतु इस उपनियम के अधीन कोई ब्याज संदेय नहीं होगा यदि संदाय में विलंब , शासकीय सेवक या सेवानिवृत्त शासकीय सेवक या शासकीय सेवक के परिवार के सदस्य द्वारा उपदान स्वीकृति पर कार्यवाही करने के लिए शासन 96(58)

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द्वारा अधिकथित प्रक्रिया के अनुपालन में असफलता अथवा विलम्ब के कारण हुआ है ।

(2) ब्याज के भुगतान की स्वीकृति, संबंधित प्रशासकीय विभाग द्वारा दी जाएगी तथा प्रशासकीय विभाग विलंब के लिए जिम्मेदारी का निर्धारण करते हुए दोषी शासकीय सेवकों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही अथवा ब्याज के लिए स्वीकृत राशि की पूर्णतः/अंशतः वसूली के आदेश भी करेगा ।

30. शासकीय आवास से संबंधित शोध्यों से भिन्न शोध्यों का समायोजन और वसूली.- ( 1 ) शासकीय आवास के अधिभोग से भिन्न शोध्यों के लिए, उपदान प्रस्तावक अधिकारी अधिवार्षिता पर सेवानिवृत्त शासकीय सेवक की दशा में, सेवानिवृत्ति की दिनांक से एक वर्ष पूर्व तथा अधिवर्षिता से अन्यथा सेवानिवृत्ति होने की दशा में , सेवानिवृत्ति पर तत्काल या जैसे ही सेवानिवृत्ति का तथ्य उपदान प्रस्तावक अधिकारी को ज्ञात हो, जो भी पहले हो , शोध्य अवधारित कर वसूली कीकार्यवाही करेगा ।

(2) उपनियम ( 1 ) के अधीन यथानिर्धारित शोध्यों का, जिसके अधीन वे शोध्य भी हैं जो तदुपरांत जानकारी में आते हैं और निर्धारण उपंरात शासकीय सेवक की सेवानिवृत्ति की दिनांक तक बकाया रहते हैं, का समायोजन शासकीय सेवक को उसकी सेवानिवृत्ति पर नियम 23 में संदेय उपदान से किया जाएगा।

31. उपदान के संदाय के लिए कागजातों की तैयारी.-

( 1 ) जब तक कि संचालक पेंशन के सामान्य या विशेष आदेश द्वारा अन्यथा छूट न दी गई हो , शासकीय सेवकों के उपदान की स्वीकृति एवं भुगतान हेतु कार्यवाही "पेंशन सॉफ्टवेयर" के माध्यम से की जाएगी ।

(2) उपदान प्रपत्रों की तैयारी , उपदान भुगतान आदेश जारी करने तथा भुगतान की प्रक्रिया वित्तविभाग द्वारा समय - समय पर जारी आदेश/दिशा-निर्देश अनुसार होगी ।

32. जारी किए गए उपदान भुगतान आदेश निरस्त करने की प्रक्रिया.- न्यायालयीन निर्णय के पालन के परिणामस्वरूप सेवानिवृत्त शासकीय सेवक के सेवा में पुनर्स्थापन अथवा सेवानिवृत्ति तिथि में परिवर्तन की स्थिति में: -

(1 ) (एक) प्रशासकीय विभाग द्वारा , सकारण आदेश जारी किया जाएगाः मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2026

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परन्तु ऐसा करने के पूर्व प्रकरण का परीक्षण कर विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आवश्यकता अनुसार समस्त विधिक विकल्प का उपयोग किया जा चुका है ।

(दो) प्रशासकीय विभाग द्वारा उपनियम ( 1 ) ( एक) के अधीन आदेश जारी होने के पश्चात, शासकीय सेवक द्वारा , उसे भुगतान किए जा चुके उपदान तथा अन्य सेवानिवृत्ति स्वत्वों की एकमुश्त राशि शासन के मर्दों में जमा की जाएगी तथा जमा की गई राशि के चालान की प्रति उपदान प्रस्तावक अधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी। उपदान प्रस्तावक अधिकारी द्वारा चालान की प्रति तथा प्रशासकीय विभाग का आदेश पेंशन सॉफ्टवेयर में अपलोड करते हुए उपदान भुगतान आदेश निरस्त करने कीअनुमति संचालक पेंशन से प्राप्त की जाएगी ।

(

2) उपनियम ( 1 ) (दो) के अनुसार निरस्त करने की अनुमति प्राप्त होने पर , उपदान प्राधिकृतकर्ता अधिकारी द्वारा उपदान भुगतान आदेश निरस्त किया जाएगा , और यह सुनिश्चित करेगा कि निरस्त किए गए आदेश के विरुद्ध कोई लेन - देन नहीं हो ।

33. उपदान संदाय की रीति इन नियमों में अन्यथा उपबंधित के अतिरिक्त , उपदान एकमुश्त संदत्त किया जाएगा ।

34. कोषालय नियमों का लागू होना.- इन नियमों में जैसा अन्यथा उपबंधित है , उसके सिवाय , मध्यप्रदेश कोषालय संहिता के सहायक नियम, उपदान दावों के भुगतान की प्रक्रिया हेतु लागू होंगे ।

35. निर्वचन.- जहां इन नियमों के निर्वचन के संबंध में कोई विवाद उत्पन्न हो तो , उसे विनिश्चित करने के लिए शासन के वित्त विभाग को संदर्भित किया जाएगा ।

36. शिथिल करने की शक्ति. जहां वित्त विभाग का समाधान हो कि इन नियमों के किसी नियम के क्रियान्वयन से किसी विशेष प्रकरण में अनावश्यक अवरोध उत्पन्न हो रहा है तो वह ऐसे कारणों को लेखबद्ध करेगा । ऐसे प्रकरणों को न्याय संगत और साम्यपूर्ण रीति से उस सीमा तक, जैसा भी आवश्यक समझा जाय , मंत्रि परिषद के आदेश से उस नियम की अपेक्षाओं को अभिमुक्त अथवा शिथिल कर सकेगा ।

37. निरसन और व्यावृत्ति.- इन नियमों के प्रारम्भ होने पर , पूर्व प्रभावशील प्रत्येक आदेश, अनुदेश या कार्यालयीन ज्ञापन , जहां तक कि वह इन नियमों में अन्तर्विष्ट किसी भी विषय का प्रावधान करता है, प्रवृत्त नहीं रह जाते हैं ।

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, मनीष रस्तोगी , अपर मुख्य सचिव.

नियंत्रक , शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित -2026.

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 24 February 2026. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2026-02-24.48.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2026-02-24.48.Extraordinary.