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Maharashtra Gazette · Government of Maharashtra

Part VII Ext. 12 (9th March 2018)

Published 09 March 2018

Type
Extra - Ordinary
Part
Part 7 (Hindi)
Division
CENTRAL SECTION
Identifier
in.gazette.maharashtra.2018-03-09.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-
Languages
English, Marathi

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महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च ९, २०१८/फाल्गुन १८, शके १९३९ १

RNI No. MAHBIL /2009/31730

महाराष्ट्र शासन राजपत्र

असाधारण भाग सात

वर्ष ४, अंक ६] शुक्रवार, मार्च ९, २०१८/फाल्गुन १८, शके १९३९ [पृष्ठे ८, किंमत : रुपये ४७.००

असाधारण क्रमांक १२

प्राधिकृत प्रकाशन

अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)

महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय

महाराष्ट्र विधानसभा में दिनांक ९ मार्च २०१८ ई. को. पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियम ११७ के अधीन प्रकाशन किया जाता है :----

L. A. BILL No. VII OF 2018.

A BILL

FURTHER TO AMEND THE RIGHT TO FAIR COMPENSATION AND TRANSPERANCY IN LAND ACQUISITION, REHABILITATION AND RESETTLEMENT ACT, 2013, IN ITS APPLICATION

TO THE STATE OF MAHARASHTRA.

विधानसभा का विधेयक क्र. ७ सन् २०१८।

महाराष्ट्र राज्य में यथाप्रयुक्त भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और

पारर्दशिता का अधिकार अधिनियम, २०१३ में अधिकतर संशोधन करने संबंधी विधेयक।

क्योंकि इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिये, महाराष्ट्र राज्य में यथाप्रयुक्त, भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारर्दशिता का अधिकार अधिनियम, २०१३ में अधिकतर संशोधन करना सन् २०१३ का ३०।

भाग सात---१२-१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च ९, २०१८/फाल्गुन १८, शके १९३९ आवश्यक हुआ हैं ; अत: भारत गणराज्य के उनहत्तरवे वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है, अर्थात् :-----

संक्षिप्त नाम । १. यह अधिनियम भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारर्दशिता का अधिकार (महाराष्ट्र संशोधन) अधिनियम, २०१८ कहलाए ।

२. महाराष्ट्र राज्य में, यथाप्रयुक्त भूमि अर्जन, पुनर्वासन तथा पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारर्दशिता का अधिकार अधिनियम, २०१३ (जिसे इसमें आगे, " मूल अधिनियम " कहा गया है) की धारा २ की उप-धारा (२) में, द्वितीय परंतुक के पश्चात्, निम्न परंतुक, जोड़ा जायेगा, अर्थात् :----

सन् २०१३ का ३०। सन् २०१३ का अधिनियम ३० की धारा २ में संशोधन।

" परंतु यह भी कि, धारा १०क में सूचित परियोजनाअों और उसमें विर्िनदिष्ट प्रयोजनों के लिये, भूमि का अर्जन, इस उप-धारा के प्रथम परंतुक के उपबंधों से छूट प्राप्त होगा। "।

३. मूल अधिनियम की धारा १० के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----

सन् २०१३ का अधिनियम क्र. ३० में नयी धारा १०क की निविष्टि।

" १०क. राज्य सरकार, लोक हित में, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अध्याय दो और अध्याय तीन के उपबंधों की यथाप्रयुक्ित से निम्न किन्हीं परियोजनाअों से छूट दे सकेगी, अर्थात् :----

(क) रक्षा या रक्षा उत्पादन के लिये की तैयारी समेत, राष्ट्रीय सुरक्षा या भारत की रक्षा के लिये महवपूर्ण ऐसी परियोजनाएँ ;

(ख) सिंचाई और विद्युतीकरण समेत ग्रामीण आधारभूत संरचना ;

(ग) किफायती आवास और गरीब लोगों के लिये आवास ;

(घ) राज्य सरकार और उसके उपक्रमों द्वारा स्थापित औद्योगिक क्षेत्र या औद्योगिक संपदा ;

(ङ) राज्य सरकार और उसके उपक्रमों द्वारा स्थापित औद्योगिक परिसर (जिसके मामले में, ऐसे औद्योगिक परिसर के लिये पदाभिहित रेल मार्ग या सड़कों के दोनों तरफ एक किलोमीटर तक भूमि र्अजित की जायेगी) ; और

(च) सार्वजनिक निजी भागीदारीता के अधीन परियोजनाअों समेत आधारभूत संरचना परियोजना जहाँ निरन्तर भूमि का स्वामित्व, सरकार में निहित हैं ;

परंतु, राज्य सरकार, अधिसूचना जारी करने के पूर्व, ऐसी परियोजना के लिये आवश्यक न्यूनतम भूमि केवल ध्यान में रखते हुये प्रस्तावित अर्जन के लिये भूमि का विस्तार सुनिश्चित करेगी ।"।

४. मूल अधिनियम की धारा २३ के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----

सन् २०१३ का अधिनियम क्र. ३० में नयी धारा २३क की निविष्टि।

हितबद्ध व्यक्ितयों की सहमति के मामले में बिना जाँच कलक्टर का अधिनिर्णय।

" २३क. (१) धारा २३ में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुये भी, यदि, कार्यवाहियों के किसी भी स्तर पर, कलक्टर का समाधान हो जाता हैं कि, भूमि में हितबद्ध सभी व्यक्ित, जो उसके समक्ष उपस्थित हैं, राज्य सरकार द्वारा बनाये गये नियमों द्वारा विहित प्ररुप में, कलक्टर के अधिनिर्णय में समाविष्ट किये जानेवाले मामलों पर, लिखित में सहमति देते हैं, तब, वह, अधिकतर जाँच किये बिना, ऐसे करार के निबंधनों के अनुसार अधिनिर्णय बना सकेगा।

(२) उप-धारा (१) के अधीन किसी भूमि के लिये, प्रतिकर का अवधारण, इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अनुसरण में, उसी स्थान या अन्यत्र में अन्य भूमियों के संबंध में प्रतिकर के अवधारण को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करेगा।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च ९, २०१८/फाल्गुन १८, शके १९३९ ३ (३) रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, १९०८ में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुये भी, उप-धारा (१) के सन् १९०८ का १६।

अधीन बनाया गया कोई भी करार, उस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिये दायी नहीं होगा। "। ५. मूल अधिनियम की धारा २४ की, उप-धारा (२) के परंतुक के पश्चात्, निम्न परंतुक, जोड़ा जायेगा, अर्थात् :----

" परंतु आगे यह कि, इस उप-धारा में र्िनदिष्ट अवधि की परिगणना में, कोई अवधि या अवधियाँ,

सन् २०१३ का अधि. क्र. ३० की धारा २४ में संशोधन। जिनके दौरान, किन्ही रोक या किसी न्यायालय द्वारा जारी निषेधादेश के कारण भूमि के अर्जन के लिये की कार्यवाहीयाँ रोकी गयी हैं या कब्जा लेने के लिये अधिकरण के अधिनिर्णय में विर्िनदिष्ट अवधि या ऐसी अवधि जहाँ, कब्जा ले लिया हैं किंतु भूमि अर्जन अधिनियम, १८९४ की धारा १२ की उप-धारा (२) के सन् १८९४ का १।

अधीन ऐसी सूचना की प्राप्ति के बावजूद प्रतिकर लेने से इन्कार करने या लेने के लिये सामने न आने के कारण, न्यायालय में या इस प्रयोजन के लिये बनाये रखे गये किसी पदाभिहित खाते में प्रतिकर जमा किया रखा हैं, अपर्वजित होगा। यह भी कि, यदि उक्त भूमि, अर्जन करनेवाले निकाय के नाम से अधिनिर्णय मंजूर होेने के पश्चात्, तीन वर्षों के भीतर परिर्वतित की गई हैं, तब यह समझा जायेगा कि, भूमि का कब्जा कर लिया गया हैं । ''।

६. मूल अधिनियम की धारा ३१ के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----

सन् २०१३ का अधि. क्र. ३० में नयी धारा ३१ क की निविष्टि। ''३१क. इस अधिनियम में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार को, जहाँ कहीं भी भूमि, सौ एकड़ से कम भूमि उसके अपने उपयोग के लिये र्अजित की जाने वाली हैं या जहाँ, कहीं भी, भूमि, परियोजनाएँ, जो धारा १० की उप-धारा (४) के परंतुक में यथा निर्देशित रेखीय स्वरुप की हैं, के मामले में, र्अजित की जाने वाली है, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन लागत के रुप में, बाधित परिवारों

परियोजनाअों को उसके रेखिय स्वरूप के लिए राज्य सरकार द्वारा एकमुश्त रकम की अदायगी । को धारा २७ के अधीन यथा निर्धारित प्रतिकर की रकम के पचास प्रतिशत के समान ऐसी एकमुश्त रकम का भुगतान करना होगा ।''।

७. मूल अधिनियम की धारा ४० की, उप-धारा (२) में, '' संसद का अनुमोदन '' शब्दों के पश्चात्, '' या राज्य सरकार को केन्द्रीय सरकार द्वारा दिये गये निदेशों का अनुपालन करना '' शब्द जोड़े जायेंगे ।

सन् २०१३ का अधि. क्र. ३० की धारा ४० में संशोधन। ८. मूल अधिनियम की धारा ४६, की उप-धारा (६) के स्पष्टीकरण में, खण्ड (ख) के, उप-खण्ड (एक) और (दो), अपमर्ाजित किये जायेंगे ।

सन् २०१३ का अधि. क्र. ३० की धारा ४६ में संशोधन। ९. मूल अधिनियम की धारा ८७ के स्थान में, निम्न धारा, रखी जायेगी, अर्थात् :-----

सन् २०१३ का अधि. क्र. ३० की धारा ८७ की प्रतिस्थापना। '' ८७. जहाँ, इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध, किसी व्यक्ति ने, जो अभिकथित अपराध करने के समय केन्द्रीय सरकार या, यथास्थिति, राज्य सरकार में नियोजित हैं या था, वहाँ न्यायालय, ऐसे

सरकारी पदाधिकारियों द्वारा अपराध। अपराध का संज्ञान लेगा, साथ ही, महाराष्ट्र राज्य में यथाप्रयुक्त दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ की, धारा सन् १९७४ का २।

१९७ में अधिकथित प्रक्रिया का अनुपालन करेगा ।''।

भाग सात--१२--१अ४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च ९, २०१८/फाल्गुन १८, शके १९३९ १०. मूल अधिनियम की धारा १०५ के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----

सन् २०१३ का अधि. क्र. ३० मे नयी धारा १०५ क की निविष्टि।

'' १०५-क. (१) उप-धारा (२) के अध्यधीन, इस अधिनियम के उपबंध, पाँचवी अनुसूची में विर्िनदिष्ट अधिनियमितियों के अधीन, भूमि के अर्जन को लागू नहीं होंगे ।

सन् २०१८ का महा. । इस अधिनियम के उपबंध कतिपय महाराष्ट्र अधिनियमों को लागू नहीं होंगे या कतिपय उपांतरणो के साथ लागू नहीं होंगे।

(२) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, भूमि-अर्जन, अधिनियम पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारर्दशिता का अधिकार (महाराष्ट्र संशोधन) अध्यादेश, २०१८ के प्रारंभण के दिनांक से एक वर्ष के भीतर, निदेश देगी कि, प्रथम अनुसूची के अनुसार प्रतिकर के निर्धारण और द्वितीय तथा तृतीय अनुसूची में विर्िनदिष्ट पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन से संबंधित, इस अधिनियम के किन्हीं उपबंध, बाधित परिवारों के लिये लाभकारी होते हुये, पाँचवी अनुसूची में विर्िनदिष्ट अधिनियमितियों के अधीन भूमि अर्जन के मामलों में लागू होंगे या उपांतरणों के ऐसे अपवादो के साथ लागू होंगे कि प्रतिकर कम न हो या जैसा कि मामला हो अधिसूचना में विर्िनदिष्ट किये जाए ऐसा प्रतिकर, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन से संबंधित इस अधिनियम के उपबंध कम न हों :

परंतु, ऐसी कोई अधिसूचना, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों द्वारा मंजूर संकल्प के अलावा जारी नहीं की जायेगी ।''।

११. मूल अधिनियम की चतुर्थ अनुसूची के पश्चात्, निम्न अनुसूची, जोड़ी जायेगी, अर्थात् :----

सन् २०१३ का अधि. क्र. ३० में पाँचवी अनुसूची जोडना।

'' पाँचवी अनुसूची

(देखिए धारा १०५-क)

महाराष्ट्र राज्य में भूमि अर्जन से संबंधित महाराष्ट्र अधिनियमितियों की सूची

१. महाराष्ट्र राजमार्ग अधिनियम (सन् १९५५ का ५५) ।

२. महाराष्ट्र औद्योगिक विकास अधिनियम, १९६१ (सन् १९६२ का महा. ३)।

३. महाराष्ट्र प्रादेशिक तथा नगर योजना अधिनियम, १९६६ (सन् १९६६ का महा. ३७)।

४. महाराष्ट्र गृहनिर्माण तथा क्षेत्र विकास अधिनियम, १९७६ (सन् १९७७ का महा. २८)।''।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च ९, २०१८/फाल्गुन १८, शके १९३९ ५

उद्देश्यों तथा कारणों का वक्तव्य।

भूमि अर्जन, पुनर्वासन तथा पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारर्दशिता का अधिकार अधिनियम, २०१३ (सन् २०१३ का ३०) भूमि अर्जन में एकरूप प्रक्रिया के लिए उपबंध करने और व्यक्तियों को, जिनकी भूमि र्अजित की गई है, को ठिक तथा उचित प्रतिकर की सुनिश्चिति करने के लिए संसद द्वारा अधिनियमित किया गया है।

२. महाराष्ट्र राज्य में, कतिपय राज्य अधिनियमों में, जैसे कि, महाराष्ट्र राजमार्ग अधिनियम (सन १९५५ का ५५), महाराष्ट्र औद्योगिक विकास अधिनियम, १९६१ (सन् १९६२ का महा.३), महाराष्ट्र प्रादेशिक तथा नगर योजना अधिनियम, १९६६ (सन् १९६६ का महा.३७), महाराष्ट्र गृहनिर्माण तथा क्षेत्र विकास अधिनियम, १९७६ (सन् १९७७ का महा.२८) आदि में भूमियों के अर्जन के लिए कतिपय उपबंध भी अंर्तविष्ट है। तथापि, उन अधिनियमों के अधीन भूमियों के अर्जन के लिए प्रतिकर मिलने से संबंधित उपबंध भिन्न-भिन्न होने से यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि वे उपबंध २०१३ के उक्त अधिनियम के उपबंधो के साथ संरेखन में लाना है। ३. यह सुनिश्चित करना है कि, विकास परियोजनाअों के लिए उक्त राज्य अधिनियमों के अधीन भूमि का अर्जन, उक्त अधिनियमों के उद्देश्यों को प्राप्त करने की दृष्टि से, प्रभावी तथा शीघ्र रित्या में बने हैं जिससे राज्य का र्आथिक विकास अधिकतर शीघ्रता से हो, महाराष्ट्र राज्य में यथा प्रयुक्त के लिएसन् २०१३ के उक्त अधिनियम में यथोचित संशोधन करना इष्टकर समझा गया है तथा राज्य सरकार को समर्थ बनाने के लिए यह उपबंध किये गये है कि सन् २०१३ के अधिनियम के उपबंध जैसा कि वह उचित समझे ऐसेउपांतरणों के साथ उक्त राज्य अधिनियमितियों के अधीन अर्जन प्रक्रिया को लागू होंगे। यह भी सुनिश्चित करना इष्टकर समझा गया है कि, व्यक्तियों जिसकी भूमि उक्त राज्य अधिनियमितियों के अधीन अर्जन की गई है, उसे तद्धीन भूमियों के अर्जन के लिए निरंतर उचित प्रतिकर मिल सकें।

४. शीघ्रता से सामाजिक और र्आथिक विकास प्राप्त करने के लिए, यह आवश्यक माना गया है कि, भूमि अर्जन की प्रक्रिया खास तौर पर विकास परियोजनाअों के लिए शीघ्र, सुचारू और निर्बाध बनाना चाहिए, परंतु व्यक्तियों के अधिकारों का हासन किए बिना, उनकी भूमियों का अर्जन किया गया है। उपयर्ुक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने की दृष्टि से कतिपय संशोधन करना भी प्रस्तावित किया गया है, जिसकी प्रमुख विशेषताएँ, अन्य बातों के साथ-साथ यथा निम्न है :----

(एक) भूमि में हितबद्ध सभी व्यक्तियों की सहमति के आधार पर कलक्टर द्वारा अधिनिर्णय पारित करने में सुकरता लाना तथा रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, १९०८ (सन् १९०८ का १६) के अधीन ऐसे सहमति के रजिस्ट्रीकरण की आवश्यकता के साथ प्रबन्ध करना ;

(दो) उसके परंतुक को जोडकर व्यावहारिक स्िथति को संबोधित करके सन् २०१३ के उक्त अधिनियम की धारा २४, की उप-धारा (२) के उपबंधों को सुव्यवस्थित करना ;

(तीन) राज्य सरकार के लिए या परियोजना के लिए जिसमें रेखीय स्वरूप में है के अर्जन करने के लिए पुनर्वास और पुनव्र्यवस्थापन लागत के रूप में एकमुश्त प्रतिकर की अदायगी को सुकर बनाना।

५. प्रस्तुत विधेयक का आशय उपरोेक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है।

मुंबई, दिनांक ७ मार्च २०१८।

चंद्रकांत (दादा) पाटील, राजस्व मंत्री।६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च ९, २०१८/फाल्गुन १८, शके १९३९

प्रत्यायुक्त विधान संबंधी ज्ञापन।

प्रस्तुत विधेयक में, विधायी शक्ित के प्रत्यायोजनार्थ, निम्न प्रस्ताव अन्तर्ग्रस्त हैं, अर्थात् :----

खण्ड ३.----इस खण्ड के अधीन, जिसका आशय, नयी धारा १०क की निविष्टि करना हैं, जिसमें राज्य सरकार को, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अध्याय दो और अध्याय तीन के उपबंधों के लागू होने से, उक्त नयी धारा १०क में विर्िनदिष्ट परियोजनाअों को छूट देने की शक्ित प्रदान की गई हैं ।

खण्ड ४.----इस खण्ड के अधीन, राज्य सरकार को, प्ररूप, जिसमें कलक्टर मंजूर कर सके, नियमों द्वारा विहित करने की शक्ित प्रदान की गई हैं।

खण्ड १०.----इस खण्ड के अधीन, जिसका आशय नयी धारा १०५क की निविष्टि करना हैं, जिसमें राज्य सरकार को, प्रतिकर, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन से संबंधित अधिनियम के उपबंध, प्रतिकर, पुनर्वास और पुनव्र्यवस्थापन से संबंधित मूल अधिनियम के उपबंधों को कमजोर न करते हुए, ऐसी छूट और उपांतरणों के साथ लागू होंगे, का निदेश देनेवाली अधिसूचना, जारी करने की शक्ित प्रदान की गई हैं। २. विधायी शक्ित के प्रत्यायोजन के लिये उपरोल्लिखित प्रस्ताव सामान्य स्वरूप के हैं ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च ९, २०१८/फाल्गुन १८, शके १९३९ ७

वित्तीय ज्ञापन।

प्रस्तुत विधेयक, भूमि अर्जन की प्रक्रिया बनाने द्वारा, विशेष, रूप से, शीघ्र, सुचारू और निर्बाध विकास परियोजनाअों के लिये, किंतु व्यक्ित, के अधिकारों का हासन किये बिना, जिसकी भूमि का अर्जन किया गया है, शीघ्रता से सामाजिक और र्आथिक विकास प्राप्त करने के लिये, भूमि अर्जन, पुनर्वासन तथा पुनव्र्यस्थापन में उचित प्रतिकर और पारर्दशिता का अधिकार, २०१३ संशोधित करने के लिये उपबंध करता हैं ।

कतिपय अनार्वति व्यय, ऐसी भूमि के अर्जन के लिये प्रतिकर के भुगतान के रूप में, राज्य के समेकित निधि में से उपगत किया जाता हैं । तथापि, हाथ में लिये गये परियोजना के अनुसरण में, प्रतिकर की रकम भिन्न हो सकती हैं। ऐसे में, राज्य के समेकित निधि में से, इस निमित्त, उपगत किये जाने वाले, वास्तविक व्यय का प्राक्कलन देना, इस स्तर पर संभव नहीं हैं ।

(यथार्थ अनुवाद),

हर्षवर्धन जाधव, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।८ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च ९, २०१८/फाल्गुन १८, शके १९३९

भारत संविधान के अनुच्छेद २०७ के अधीन राज्यपाल की अनुशंसा

(महाराष्ट्र शासन, विधी व न्याय विभाग, आदेश कि प्रत)

भारत संविधान के अनुच्छेद २०७ के खंड (३) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, महाराष्ट्र राज्यपाल महोदय, महाराष्ट्र यह अधिनियम भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारर्दशिता का अधिकार (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक, २०१८ ई. पर विचारार्थ करने की अनुशंसा करते है।

विधान भवन, मुंबई, दिनांकित ९ मार्च २०१८।

डॉ. अनंत कळसे, प्रधान सचिव, महाराष्ट्र विधानसभा। ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY SHRI PARSHURAM JAGANNATH GOSAVI, PRINTED AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004, EDITOR : SHRI PARSHURAM JAGANNATH GOSAVI.

Cite this issue. Maharashtra Gazette, Government of Maharashtra, 09 March 2018. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.maharashtra.2018-03-09.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-/. Archive identifier in.gazette.maharashtra.2018-03-09.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-.