RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ४, अंक ७(२)] बुधवार, मार्च १४, २०१८/फाल्गुन २३, शके १९३९ [पृष्ठे ४, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक १४
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)
महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय
महाराष्ट्र विधानसभा में दिनांक १४ मार्च, २०१८ ई. को पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियम ११७ के अधीन प्रकाशन किया जाता है :----
L. A. BILL No. IX OF 2018.
A BILL
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA NURSES ACT, 1966.
विधानसभा का विधेयक क्रमांक ९ सन् २०१८।
महाराष्ट्र परिचारिका अधिनियम, १९६६ में अधिकतर संशोधन करने संबंधी विधेयक।
सन् १९६६ का महा. ४०। क्योंकि, इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिये, महाराष्ट्र परिचारिका अधिनियम, १९६६ में अधिकतर संशोधन करना इष्टकर हैं ; अत: भारत गणराज्य के उनहत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम, अधिनियमित किया जाता हैं :----
१. (१) यह अधिनियम, महाराष्ट्र परिचारिका (संशोधन) अधिनियम, २०१८ कहलाए।
संक्षिप्त नाम और प्रारम्भण। (२) यह ऐसे दिनांक को प्रवृत्त होगा, जिसे राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे। २. महाराष्ट्र परिचारिका अधिनियम, १९६६ (जिसे इसमें आगे, " मूल अधिनियम " कहा गया हैं) की धारा ४ की,----
सन् १९६६ का महा. ४० की धारा ४ में संशोधन। सन् १९६६ का महा. ४०।
(१)
भाग सात------१४----१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १४, २०१८/फाल्गुन २३, शके १९३९ (क) उप-धारा (२) में,----
(एक) परन्तुक के पूर्व, निम्न परन्तुक, निविष्ट किया जायेगा, अथार्ंत् :----
" परन्तु राज्य सरकार, आदेश द्वारा सदस्य, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को, उनकी पदावधि के अवसान के पश्चात् भी, प्रारंभिक छह महिनों की ऐसी अनधिक अवधि दे सकेगी, जो अवधि, छह महिनों से अनधिक अधिकतर अवधि द्वारा वैसी ही अवधि में विस्तारित की जा सके, ताकि विस्तारों की अवधि कुल मिलाकर एक वर्ष से अधिक न होगी। " ;
(दो) विद्यमान परंतुक में, " परंतु यह कि " शब्दों के स्थान में, " परंतु आगे यह कि " शब्द रखे जायेंगे;
(ख) उप-धारा (३), (४) और (५), अपमर्ाजित की जायेगी ।
३. मूल अधिनियम की धारा ४० में, उप-धारा (२) के पश्चात्, निम्न उप-धारा, जोड़ी जायेगी, अर्थात् :----
सन् १९६६ का महा. ४० की धारा ४० में संशोधन।
" (३) इस अधिनियम में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुये भी, यदि किसी भी कारणवश, धारा ४ की उप-धारा (२) में यथाविर्िनदिष्ट अध्यक्ष और उपाध्यक्ष समेत सदस्यों की पदावधि के अवसान के पश्चात्, या, यथास्थिति, उक्त धारा ४ की उक्त उप-धारा (२) के प्रथम परंतुक के अधीन, उन्हें मंजूर की गई विस्तार अवधि के अवसान के पश्चात्, परिषद गठित नहीं कर सकें, तब, सरकार, इस अधिनियम द्वारा या के अधीन परिषद पर प्रदत्त या अधिकथित सभी शक्तियों का प्रयोग करने और कर्तव्यों का अनुपालन और कृत्यों के निर्वहन के लिये, प्रारंभिक एक वर्ष से अनधिक अवधि के लिये और तत्पश्चात् ऐसी अधिकतर अवधि या अवधियों के लिये, ताकि अवधि कुल मिलाकर दो वर्षों से अधिक न हो, के लिये एक प्रशासक या प्रशासकों का बोर्ड नियुक्त कर सकेगी। " ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १४, २०१८/फाल्गुन २३, शके १९३९ ३
उद्देश्यों और कारणों का वक्तव्य।
महाराष्ट्र परिचारिका अधिनियम, १९६६ (सन् १९६६ का महा. ४०), महाराष्ट्र राज्य में परिचारिकाअों के रजिस्ट्रीकरण और प्रशिक्षण को विनियमित करनेवाली विधि को एक करने और उनमें बेहतर उपबंध बनाने के लिये और उपरोक्त प्रयोजनांे से संबंधित मामलों के लिए उपबंध करने के लिए अधिनियमित किया गया हैं उक्त अधिनियम के उपबंध अंतिमत: सन् २०१३ के महा. २३ द्वारा संशोधित किए गए है । सन् १९६६ के उक्त अधिनियम की धारा ३, उक्त अधिनियम के प्रयोजनों के लिये, कतिपय पदेन सदस्यों, निर्वाचित सदस्यों और उसमें यथा विर्िनदिष्ट नामनिर्देशित सदस्यों से मिलकर महाराष्ट्र परिचर्या परिषद के गठन का उपबंध करती है। परिषद के सदस्यों के निर्वाचन, उक्त अधिनियम के अधीन विरचित महाराष्ट्र परिचर्या परिषद नियम, १९७१ के अनुसार संचालित होंगे।
२. उक्त अधिनियम की धारा ४ की उप-धारा (२) यह उपबंध करती हैं कि, पदेन सदस्य के अलावा, सदस्य, उसकी, उप-धारा (१) के अधीन, अधिसूचना के प्रकाशन के दिनांक से पाँच वर्षों की अवधि के लिये पद धारण करेगा। तथापि उक्त अधिनियम की धारा ४ की उप-धाराएँ (३), (४) और (५) के उपबंधों को ध्यान में रखते हुए, विद्यमान सदस्यों और अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की पदावधि, जब तक उनके उत्तराधिकारी उनके पद का प्रभार ग्रहण नहीं करते, तब तक विस्तारित की गई समझी जायेगी,
उक्त अधिनियम में, परिषद के निर्वाचित सदस्य की पाँच वर्षों की अवधि पूर्ण होने के पश्चात्, निर्वाचनों के पश्चात्, नये सदस्यों के प्रभार ग्रहण करने तक प्रशासक नियुक्त करने के लिये सरकार को समर्थ करने के लिए कोई उपबंध नहीं हैं।
३. इसलिये, निर्वाचित सदस्यों की पाँच वर्षों तक की पदावधि निबर्ंधित करने और राज्य सरकार की शक्तियों के साथ, सदस्यों, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की, उनकी पदावधि के अवसान के पश्चात् भी, विस्तार जो, एक वर्ष से अधिक न होगी, मंजूर करने के लिये, उक्त अधिनियम की धाराएँ ४ और ४० यथोचितरित्या में संशोधित करना इष्टकर समझा गया हैं। राज्य सरकार को, यदि किसी भी कारणोंवश, सदस्यों की पदावधि के अवसान के पश्चात् परिषद गठित न कर सकें, तब, मध्यर्वति अवधि में प्रशासक की नियुक्त करने के लिये, सशक्त करना भी प्रस्तावित हैं।
४. प्रस्तुत विधेयक का आशय उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना हैं।
मुंबई,
गिरीष महाजन,
दिनांक ७ मार्च, २०१८।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री।४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १४, २०१८/फाल्गुन २३, शके १९३९
प्रत्यायुक्त विधान संबंधी ज्ञापन ।
प्रस्तुत विधेयक में विधायी शक्ित के प्रत्यायोजनार्थ, निम्न प्रस्ताव अन्तर्ग्रस्त हैं, अर्थात् :---
खण्ड १ (२).----इस खण्ड के अधीन, राज्य सरकार को, राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसा दिनांक, जिसपर अधिनियम प्रभावी हो, नियत करने की शक्ित प्रदान की गई हैं ।
खण्ड २ (क).----इस खण्ड के अधीन, राज्य सरकार को, महाराष्ट्र परिचारिका अधिनियम, १९६६ (सन् १९६६ का ४०) के अधीन गठीत महाराष्ट्र परिचर्या परिषद के सदस्य, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को, उनकी पदावधि के अवसान् के पश्चात् भी, विस्तार मंजूर करने का आदेश जारी करने की शक्ित प्रदान की गई हैं । खण्ड ३.----इस खण्ड के अधीन, राज्य सरकार को, यदि किसी कारणवश, परिषद, उसके सदस्यों की पदावधि के अवसान के पश्चात्, गठित नहीं की गई हो, तब उक्त अधिनियम के द्वारा या के अधीन परिषद पर प्रदत्त तथा अधिकथित सभी शक्ितयों का प्रयोग और कर्तव्यों का अनुपालन तथा कृत्यों का निर्वहन करने के लिये प्रशासक या प्रशासक बोर्ड की नियुक्ित करने की शक्ित प्रदान की गई हैं ।
२. विधायी शक्ति के प्रत्यायोजन के लिए ऊपर उलिखित प्रस्ताव सामान्य स्वरुप के है ।
(यथार्थ अनुवाद) हर्षवर्धन जाधव, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य। विधान भवन : मुंबई, दिनांकित १३ मार्च, २०१८।
डॉ. अनंत कळसे, प्रधान सचिव, महाराष्ट्र विधानसभा।