RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ४, अंक १०(२) ] मंगळवार, मे १५, २०१८/वैशाख २५, शके १९४० [पृष्ठे ३, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक १८
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)
वित्त विभाग
मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरु चौक, मंत्रालय, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित २५ अप्रैल २०१८ ।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. X OF 2018.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA CONTINGENCY FUND ACT.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक १० सन् २०१८ ।
महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने संबंधी अध्यादेश ।
क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;
सन् १९५६ का ४६।
और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका हैं कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं, जिनके कारण उन्हें, इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिये, महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ हैं ।
भाग सात---१८-१महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मे १५, २०१८/वैशाख २५, शके १९४० २ अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश, प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :----
१. (१) यह अध्यादेश महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि (संशोधन) अध्यादेश, २०१८ कहलाए ।
संक्षिप्त नाम और प्रारम्भण।
(२) यह तुरंत प्रवृत्त होगा ।
सन् १९५६ का ४६ । सन् १९५६ का ४६ की धारा २ में अस्थायी संशोधन।
२. इस अध्यादेश के प्रवर्तन की अवधि के दौरान, महाराष्ट्र आकस्मिक निधि अधिनियम प्रभावी होगा, मानों कि, उसकी धारा २ में " एक सौ पचास करोड़ रुपयों की राशि " शब्दों के स्थान पर, " एक हजार छह सौ अठ्ठहत्तर करोड़ रुपयों की राशि " शब्द रखे गये थे ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मे १५, २०१८/वैशाख २५, शके १९४० ३
वक्तव्य।
महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि अधिनियम (सन् १९५६ का ४६) के अधीन स्थापित किये गये और संपोषित रखे गये राज्य की आकस्मिक निधि का संग्रह डेढ़ सौ करोड रुपये हैं।
२. सन् २०१६-१७ के मौसम में तूर के अत्यधिक फसल को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने तूर की खरीद के लिये २७ अप्रैल २०१७ को बाजार मध्यवर्ती योजना घोषित की हैं । राज्य सरकार की तरफ से महाराष्ट्र राज्य सहकारी विपणन संघ ने न्यूनतम सहायता रकम (एमएसपी) पर २५.२५ लाख क्िंवटल तूर की खरीद की है । किसानों को भुगतान करने और अनुषंगी व्यय के लिये, महाराष्ट्र राज्य सहकारी विपणन संघ ने १४९३ करोड़ रुपयों का ऋण लिया और राज्य सरकार ने उसकी गारंटी दी है । ३१ मार्च २०१८ तक, महाराष्ट्र राज्य सहकारी विपणन संघ ने ७७.९५ करोड़ रुपये ब्याज के लिये भुगतान किया है । महाराष्ट्र राज्य सहकारी विपणन संघ ने तूर पर प्रक्रिया करना और उसे तूर दाल में बदलना और उसकी बिक्री करना तथा ऋण चूकाना अपेक्षित हैं । तथापि, २०१७-१८ के दौरान खरीप मौसम में भी अत्यधिक फसल के कारण, तूर दाल के बाजार मूल्य न्यूनतम सहायता किमत (एमएसपी) से कम हो गये है । इसलिए, महाराष्ट्र राज्य सहकारी विपणन संघ के लिये नजदीकी भविष्य में ऋण चुकाना मुश्किल हो गया हैं । इसलिए, ब्याज के हेतु व्यय रोकने के लिये, सरकार ने ऋण लौटाने का विनिश्चय किया हैं ।
३. इस व्यय का स्वरुप अनपेक्षित हैं, अत: आवश्यक बजट-संबंधी उपबंध उपलब्ध नहीं हैं । व्यय के यह मदें " नयी सेवाएँ " में गठित होंगी, और, इसलिये, इन्हे राज्य विधानमंडल के ध्यान में लाना आवश्यक हैं । राज्य विधानमंडल का आगामी सत्र ४ जुलाई २०१८ को प्रारंभ होना प्रस्तावित हैं । उपरोल्िलखित प्रयोजनों के लिये निधि उपलब्ध कराने के लिये आवश्यक आदेश, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों द्वारा पारित अनुपूरक माँगो और विनियोग विधेयक राज्य विधानमंडल के अधिनियम के रुप में प्रकाशित हुआ हैं, के जरिए, राज्य विधानमंडल के ध्यान में इन " नयी सेवाअों " पर के व्यय को लाने के पश्चात् ही जारी किये जा सकेंगे । तथापि, इन मदों के लिये व्यय शीघ्रतम उपगत करना आवश्यक हैं, अत:, आकस्मिकता निधि से अग्रिम के प्रत्याहत के ज़रिए व्यय उपगत करने का विनिश्चय किया गया हैं ।
४. आकस्मिकता निधि की विद्यमान समग्र निधि केवल १५० करोड़ रुपयों की है । वर्तमान में उपयर्ुक्त उल्लिखित मद और व्यय के अत्य अनपेक्षित और तात्कालिक मदों पर व्यय पूरा करने के लिए उपलब्ध शेष अपर्याप्त है । जिसे आकस्मिकता निधि में से पूरा करने की आवश्यकता होगी । इसलिए, आकस्मिकता निधि की विद्यमान समग्र निधि को १५२८ करोड़ रुपयों की से १६७८ करोड़ रुपयों तक अस्थायी रुप से बढाना इष्टकर समझा गया है ताकि उपरोक्त जैसा व्यय प्राप्त हो सके ।
५. राज्य विधानमंडल के दोनो सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि अधिनियम (सन् १९५६ का ४६) में अधिकतर संशोधन करने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है ।
मुंबई, दिनांकित २४ अप्रैल २०१८।
चे. विद्यासागर राव, महाराष्ट्र के राज्यपाल।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से, दिनेश कुमार जैन, सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव।
(यथार्थ अनुवाद),
श्री. हर्षवर्धन जाधव, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।