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Maharashtra Gazette · Government of Maharashtra

Extra VII Ext. 25 (9-10-2018) नगरविकास विभाग, महाराष्ट्र अध्यादेश क्र. 20 सन 2018.

Published 09 October 2018

Type
Extra - Ordinary
Part
Part 7 (Hindi)
Division
CENTRAL SECTION
Identifier
in.gazette.maharashtra.2018-10-09.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-
Languages
English, Marathi
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ९, २०१८/आशि्वन १७, शके १९४० १

RNI No. MAHBIL /2009/31730

महाराष्ट्र शासन राजपत्र

असाधारण भाग सात

वर्ष ४, अंक १५] मंगळवार, ऑक्टोबर ९, २०१८/आशि्वन १७, शके १९४० [पृष्ठे ६, किंमत : रुपये ४७.००

असाधारण क्रमांक २५

प्राधिकृत प्रकाशन

अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)

नगरविकास विभाग

मंत्रालय, मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरू चौक, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित २७ सितंबर २०१८ । MAHARASHTRA ORDINANCE No. XX OF 2018.

AN ORDINANCE

FURTHER TO AMEND THE MUMBAI MUNICIPAL CORPORATION ACT, THE MAHARASHTRA MUNICIPAL CORPORATION ACT AND THE MAHARASHTRA MUNICIPAL COUNCILS, NAGAR PANCHAYATS AND INDUSTRIAL TOWNSHIP ACT, 1965.

महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक २० सन् २०१८।

मुंबई नगर निगम अधिनियम, महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम और महाराष्ट्र

नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ में

अधिकतर संशोधन करने संबंधी अध्यादेश।

क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;

सन १८८८ का ३। और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका हैं कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं, जिनके कारण उन्हें इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, मुंबई नगर निगम अधिनियम, महाराष्ट्र नगर निगम भाग सात---२५---१

(१)२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ९, २०१८/आशि्वन १७, शके १९४० अधिनियम और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ हैं ;

सन १९४९ का ५९। सन १९६५ का महा. ४०। अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :---

अध्याय एक

प्रारंभिक

१. (१) यह अध्यादेश मुंबई नगर निगम, महाराष्ट्र नगर निगम और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभण।

पंचायत तथा औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, २०१८ कहलाए।

(२) यह तुरंत प्रवृत्त होगा।

अध्याय दो मुंबई नगर निगम अधिनियम में संशोधन।

२. मुंबई नगर निगम अधिनियम (जिसे इसमें आगे इस अध्याय में, "मुंबई निगम अधिनियम" कहा सन १९८८ का ३। गया हैं), की धारा ५ख के,-----

सन् १९८८ की ३ की धारा ५ख में संशोधन।

(क) प्रथम परंतुक के, खण्ड (दो) में, "छह महीने" शब्दों के स्थान में, "बारह महीने" शब्द रखे जायेंगे और ७ अप्रैल, २०१५ से रखे गये समझे जायेंगे ;

(ख) द्वितीय परंतुक में, "छह महीने" शब्दों के स्थान में, "बारह महीने" शब्द रखे जायेंगे और ७ अप्रैल, २०१५ से रखे गये समझे जायेंगे ;

(ग) द्वितीय परंतुक के पश्चात, निम्न परतुंक, जोडा जायेगा, अर्थात :----

सन २०१८ का महा. अध्या. क्र. २०। " परंतु, यह भी कि, मुंबई नगर निगम, महाराष्ट्र नगर निगम और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, २०१८ के प्रारंभण के पूर्व, प्रथम परंतुक के, खण्ड (दो) के अधीन किसी व्यक्ित द्वारा दायर किये गये वचनबंध के संबंध में, ऐसे वचनबंध में विर्िनदिष्ट "छह महीने" की अवधि "बारह महीने" के रुप में प्रतिस्थापित की गई समझी जायेगी "।"।

३. मुंबई नगर निगम अधिनियम की धारा ३७ के, उप-धारा (२क) में,----

(क) प्रथम परंतुक के, खण्ड (दो) में, "छह महीने" शब्दों के स्थान में, "बारह महीने" शब्द सन् १९८८ का ३ की धारा ३७ख में संशोधन।

रखे जायेंगे और ७ अप्रैल, २०१५ से रखे गये समझे जायेंगे ;

(ख) द्वितीय परंतुक में, "छह महीने" शब्दों के स्थान में, "बारह महीने" शब्द रखे जायेंगे और ७ अप्रैल, २०१५ से रखे गये समझे जायेंगे ;

(ग) द्वितीय परंतुक के पश्चात, निम्न परतुंक, जोड़ा जायेगा, अर्थात :----

सन २०१८ का महा. अध्या. क्र. २०। " परंतु, यह भी कि, मुंबई नगर निगम, महाराष्ट्र नगर निगम और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, २०१८ के प्रारंभण के पूर्व, प्रथम परंतुक के खण्ड (दो) के अधीन किसी व्यक्ित द्वारा दायर किये गये वचनबंध के संबंध में, ऐसे वचनबंध में विर्िनदिष्ट "छह महीने" की अवधि "बारह महीने" के रुप में प्रतिस्थापित की गई समझी जायेगी "।"।

अध्याय तीन

महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम में संशोधन।

४. महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम (जिसे इसमें आगे इस अध्याय में, "महाराष्ट्र निगम अधिनियम" कहा गया हैं), की धारा ५ख के,-----

सन् १९४९ का ५९ की धारा ५ख में संशोधन।

(क) प्रथम परंतुक के, खण्ड (दो) में, "छह महीने" शब्दों के स्थान में, "बारह महीने" शब्द रखे जायेंगे और ७ अप्रैल, २०१५ से रखे गये समझे जायेंगे ;

महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ९, २०१८/आशि्वन १७, शके १९४० ३

(ख) द्वितीय परंतुक मे, छह महीने शब्दों के स्थान में, " बारह महीने " शब्द रखे जायेंगे और ७ अप्रैल २०१५ से रखे गये समझे जायेंगे ;

(ग) द्वितीय परंतुक के पश्चात्, निम्न परंतुक, जोड़ा जायेगा, अर्थात् :---

" परंतु, यह भी कि, मुंबई नगर निगम, महाराष्ट्र नगर निगम और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, २०१८ के प्रारंभण के पूर्व, प्रथम परंतुक के खण्ड (दो) के अधीन किसी व्यक्ित द्वारा दायर किये गये वचनबंध के संबंध में, ऐसेे वचनबंध में विर्िनदिष्ट " छह महीने " की अवधि " बारह महीने " के रूप में प्रतिस्थापित की गई समझी जायेगी "। " ।

५. महाराष्ट्र निगम अधिनियम की धारा १९ की, उप-धारा (१ख) के,-----

(क) प्रथम परंतुक के, खण्ड (दो) में, " छह महीने '' शब्दों के स्थान में, " बारह महीने '' शब्द रखे

सन् १९४९ का ५९ की धारा १९ में संशोधन। जायेंगे और ७ अप्रैल २०१५ से रखे गये समझे जायेंगे ;

(ख) द्वितीय परंतुक में, " छह महीने '' शब्दों के स्थान में, " बारह महीने '' शब्द रखे जायेंगे और ७ अप्रैल २०१५ से रखे गये समझे जायेंगे ;

(ग) द्वितीय परंतुक के पश्चात्, निम्न परंतुक, जोड़ा जायेगा, अर्थात् :--

" परंतु यह भी कि, मुंबई नगर निगम, महाराष्ट्र नगर निगम और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, २०१८ के प्रारंभण के पूर्व, प्रथम परंतुक के, खण्ड (दो) के अधीन किसी व्यक्ित द्वारा दायर किये गये वचनबंध के संबंध में, ऐसे वचनबंध में विर्िनदिष्ट " छह महीने '' की अवधि " बारह महीने '' के रूप में प्रतिस्थापित की गई समझी जायेगी "। " ।

अध्याय चार

महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी अधिनियम में संशोधन ।

६. महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ जिसे इसमें आगे, इस अध्याय में, " नगर परिषद अधिनियम '' कहा गया हैं, की धारा ९क के,--

सन् १९६५ का महा. ४० की धारा ९ क में संशोधन। सन् १९६५ चा महा. ४०।

(क) प्रथम परंतुक के, खण्ड (दो) में, " छह महीने '' शब्दों के स्थान में " बारह महीने '' शब्द रखे जायेंगे और ७ अप्रैल २०१५ से रखे गये समझे जायेंगे ;

(ख) द्वितीय परंतुक में, " छह महीने '' शब्दों के स्थान में " बारह महीने '' शब्द रखे जायेंगे और ७ अप्रैल २०१५ से रखे गये समझे जायेंगे ;

(ग) द्वितीय परंतुक के पश्चात्, निम्न परंतुक, जोड़ा जायेगा, अर्थात् :---

सन् २०१८ का अध्या. क्र. २०।

" परंतु यह भी कि, मुंबई नगर निगम, महाराष्ट्र नगर निगम और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, २०१८ के प्रारंभण के पूर्व, प्रथम परंतुक के खण्ड (दो) के अधीन किसी व्यक्ित द्वारा दायर किये गये वचनबंध के संबंध में, ऐसे वचनबंध में विर्िनदिष्ट " छह महीने '' की अवधि " बारह महीने '' के रूप में प्रतिस्थापित की गई समझी जायेगी "। " । ७. नगर परिषद अधिनियम की, धारा ५१-१ख ,----

(क) प्रथम परंतुक के, खण्ड (दो) में, " छह महीने '' शब्दों के स्थान में " बारह महीने '' शब्द रखे

सन् १९६५ का ४० की धारा ५१-१ख में संशोधन। जायेंगे और ७ अप्रैल २०१५ से रखे गये समझे जायेंगे ;

(ख) द्वितीय परंतुक में, " छह महीने '' शब्दों के स्थान में " बारह महीने '' शब्द रखे जायेंगे और ७ अप्रैल २०१५ से रखे गये समझे जायेंगे ;

भाग सात---२५---२४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ९, २०१८/आशि्वन १७, शके १९४० (ग) द्वितीय परंतुक के पश्चात्, निम्न परंतुक, जोड़ा जायेगा, अर्थात् :---

" परंतु यह भी कि, मुंबई नगर निगम, महाराष्ट्र नगर निगम और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर- पंचायत तथा औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, २०१८ के प्रारंभण के पूर्व, प्रथम परंतुक के खण्ड (दो) के अधीन, किसी व्यक्ित द्वारा दायर किये गये वचनबंध के संबंध में, ऐसे वचनबंध में विर्िनदिष्ट " छह महीने '' की अवधि " बारह महीने '' के रूप में प्रतिस्थापित की गई समझी जायेगी "। " ।

अध्याय पाँच

विविध

कतिपय निर्वाचनों के लिये व्यावृत्ति।

८. (१) इस अध्यादेश की कोई भी बात, मुंबई नगर निगम अधिनियम की धारा ५ख या धारा ३७ की उप- धारा (२ क), महाराष्ट्र नगर निगम की धारा ५ख या धारा १९ की उप-धारा (१ख), महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ की धारा ९ क या धारा ५१-१ख के उपबंधों की दृष्टि में, परिणामिक रिक्तियाँ भरने के लिये, मुंबई नगर निगम, महाराष्ट्र नगर निगम, महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, २०१८ के प्रारंभण के दिनांक के पूर्व, राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा इसके लिये इसके द्वारा घोषित निर्वाचन या किसी कार्यक्रम पर, प्रारंभण के ऐसे दिनांक से पहले ही शुरू किये गये होने के कारण, प्रभावित नहीं करेगी।

२०१८ का महा अध्या. क्र. २०। सन १८८८ का ३। सन १९४९ का ५९। सन १९६५ का महा. ४०। कतिपय अनहर्ताअों के लिये व्यावृत्ति।

९. कोई व्यक्ति, जिसमें, इस अध्यादेश के प्रारंभण के दिनांक से पूर्व जाति प्रमाणपत्र और विधिमान्यता प्रमाणपत्र प्राप्त किया हैं किंतु प्रस्तुत किये गये वचनबंध के अनुसरण में ऐसा प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया है, तो, यदि वह, इस अध्यादेश के प्रारंभण के दिनांक से पंद्रह दिनों की अवधि के भीतर ऐसा प्रमाणपत्र प्रस्तुत करता है, तब वह सुसंगत नगर निगम विधि के उपबंधों के अधीन निर्रह नहीं समझा जायोगा :

परंतु, इस उप-धारा के उपबंध, राज्य निर्वाचन आयोग ने, इस अध्यादेश के प्रारंभण के दिनांक से पूर्व, पहले से ही ऐसे व्यक्ति की रिक्ति भरने के लिये निर्वाचन लिये है या ऐसे निर्वाचन के लिए कार्यक्रम घोषित किया हैं, वहाँ लागू नहीं होंगे।

कठिनाई निराकरण की शक्ति।

१०. (१) इस अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित, मुंबई नगर निगम अधिनियम, महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम या, यथास्थिति, महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ के उपबंधों को प्रभावी करने में, यदि कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो, राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित उक्त अधिनियमों के उपबंधों से असंगत न हो, कठिनाई के निराकरण के प्रयोजन के लिए, आवश्यक या इष्टकर प्रतीत हो, ऐसे निदेश देगी।

(२) उप-धारा (१) के अधीन बनाया गया प्रत्येक आदेश, उसके बनाए जाने के पश्चात्, यथा संभव शीघ्र, राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जायेगा।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ९, २०१८/आशि्वन १७, शके १९४० ५

वक्तव्य

मुंबई नगर निगम अधिनियम (सन् १८८८ का ३) की धारा ५ख, महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम (सन् १९४९ का ५९) की धारा ५ख, और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ (सन् १९६५ का महा. ४०) की धारा ९क यह उपबंध करती हैं कि, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या, यथास्थिति, पिछड़े वर्ग के नागरिकों के लिए आरक्षित सींटो पर निर्वाचन लडने का प्रत्येक इच्छुक व्यक्ति, नामांकन पत्रों के साथ, महाराष्ट्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, निरधिसूचित जनजाति (विमुक्त जाति), खानाबदोष जनजाति, अन्य पिछड़े वर्गों और विशेष पिछड़े प्रवर्ग (जाति प्रमाणपत्र जारी करने और सत्यापन का विनियमन) अधिनियम, २००० (सन् २००१ का महा. २३) और तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र और संवीक्षा समिति द्वारा जारी वैधता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेगा।

२. उक्त धाराअों में ७ अप्रैल २०१५ से सन् २०१५ का महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक १३ द्वार संशोधन किया गया है, जिसमें उम्मीदवार को आरक्षित सीट के लिए निर्वाचन लडने के लिए नामनिर्देशन पत्र के साथ, वैधता प्रमाणपत्र जारी करने के लिये संवीक्षा समिति को उसके द्वारा प्रस्तुत किये गये आवेदन की सत्य प्रतिलिपि या संवीक्षा समिति को ऐसा आवेदन किये जाने का कोई अन्य सबूत प्रस्तुत करने ; और यह वचनबंध करेगा कि, वह निर्वाचन के दिनांक से छह महीने की अवधि के भीतर, संवीक्षा समिति द्वारा जारी वैधता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की अनुमती दी गई है।

३. जाति संवीक्षा समिति पर वैधता प्रमाणपत्र जारी करने का अत्यधिक बोझ है और इसके परिणामस्वरूप, निर्वाचित उम्मीदवारों को जाति वैधता प्रमाणपत्र प्राप्त करने में कठिनाईयाँ आ रही हैं। सुसंगत नगर निगम विधि के उपबंधों को ध्यान में रखते हुये, निर्वाचित उम्मीदवार के मामले में, उसके निर्वाचन के दिनांक से छह महीने की अवधि के भीतर, वैधता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने में असफल होता हैं तो उसका निर्वाचन भूतलक्षी प्रभाव से समाप्त हुआ समझा जायेगा और वह पद धारण करने के लिए निर्रहित हो जायेगा।

४. यह सुनिश्चित करना है कि, ऐसे निर्वाचित उम्मीदवारों जिन्होंने जाति प्रमाणपत्र और वैधता प्रमाणपत्र पहले से ही प्राप्त किया है, उनके द्वारा प्रस्तुत किये गये वचनबंध के अनुसार, समय के भीतर, जाति संवीक्षा समिति द्वारा जारी किये गये जाति वैधता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने में असफल होते हैं तो केवल इस कारण निर्रहित नहीं होंगे, उस निर्वाचित उम्मीदवारों को ऐसा प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के लिए छह महीने की अतिरिक्त अवधि के लिए उपबंध करना इष्टकर समझा गया है। इसे ध्यान में रखते हुए मुंबई नगर निगम अधिनियम (सन् १८८८ का ३) और महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम (सन् १९४९ का ५९) की धारा ५ख और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ (सन् १९६५ का महा. ४०) की धारा ९ क में भूतलक्षी प्रभाव से, अर्थात् सन् २०१५ का महाराष्ट्र अधिनियम क्र. १३ के प्रारम्भण के दिनांक से यथोचित संशोधन करना इष्टकर है। नगर निगमों के निर्वाचित महापौरों या, यथास्थिति, नगर परिषद या नगर पंचायतों के अध्यक्षों के संबंध में समरुप उपबंध करना भी इष्टकर समझा गया है।

भूतलक्षी प्रभाव से किये गये ऐसे संशोधनों को ध्यान में रखते हुए, यथोचित व्यावृत्ति उपबंध और प्रस्तावित संशोधनों के कारण उक्त अधिनियमों के उपबंधों को प्रभावी करने में उद्भूत कठिनाईयों के निराकरण के उपबंध भी सम्िमलित करना इष्टकर है।

उक्त प्रयोजनों की प्राप्ति के लिये, सुसंगत नगर विधियाँ, यथोचितरित्या में संशोधित की गई है।

५. राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा हैं और महाराष्ट्र के राज्यपाल का समाधान हो चुका हैं कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं, जिनके कारण उन्हें, उपरोक्त प्रयोजनों के लिये, मुंबई नगर निगम अधिनियम (सन् १९८८ का ३), महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम (सन् १९४९ का ५९) और महाराष्ट्र नगर६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ९, २०१८/आशि्वन १७, शके १९४० परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी अधिनियम (सन् १९६५ का महा. ४०) में अधिकतर संशोधन करने के लिये, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ हैं, अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है। मुंबई,

चे. विद्यासागर राव,

दिनांक २६ सितंबर २०१८।

महाराष्ट्र के राज्यपाल।

महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,

डॉ. नितीन करीर,

सरकार के प्रधान सचिव,

(यथार्थ अनुवाद),

हर्षवर्धन जाधव,

भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।

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Cite this issue. Maharashtra Gazette, Government of Maharashtra, 09 October 2018. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.maharashtra.2018-10-09.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-/. Archive identifier in.gazette.maharashtra.2018-10-09.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-.