RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ४, अंक १६] बुधवार, नोव्हेंबर १४, २०१८/कर्ातिक २३, शके १९४० [पृष्ठे ११, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक २६
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)
सहकारिता, विपणन और वस्त्रोद्योग विभाग
मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरु चौक, मंत्रालय, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित २५ अक्तूबर २०१८।
MAHARASHTRA ORDINANCE NO. XXIV OF 2018.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA AGRICULTURAL PRODUCE
MARKETING (DEVELOPMENT AND REGULATION) ACT, 1963.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक २४ सन् २०१८।ं
महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास और विनियमन) अधिनियम, १९६३ में अधिकतर
संशोधन करने संबंधी अध्यादेश।
क्योंकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;
सन् १९६४ का महा. २०।
और क्योंकि, महाराष्ट्र के राज्यपाल का समाधान हो चुका हैं कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं, जिनके कारण उन्हें, इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिये, महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास तथा विनियमन) अधिनियम, १९६३ में अधिकतर संशोधन करने के लिये, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ हैं ;
(१)
भाग सात--२६-१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १४, २०१८/कर्ातिक २३, शके १९४० अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा, प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतदद्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :----
१. (१) यह अध्यादेश महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास तथा विनियमन) (तृत्तीय संशोधन) अध्यादेश, संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभन। २०१८ कहलाए।
(२) यह तुरंत प्रवृत्त होगा।
सन् १९६४ का महा. २० के दीर्घ शीर्षक में संशोधन।
सन् १९६४ का महा. २०। २. महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास तथा विनियमन) अधिनियम, १९६३ (जिसे इसमें आगे, " मूल अधिनियम " कहा गया हैं) के बृहत् नाम में ""कतिपय अन्य उपज"" शब्दों के पश्चात्, ""और पशु-धन"" शब्द निविष्ट किये जायेंगे।
३. मूल अधिनियम की धारा १ की, उप-धारा (१) में, ""(विकास तथा विनियमन)"" कोष्ठकों और शब्दों के स्थान में, ""(संप्रवर्तन और सरलीकरण)"" कोष्ठक और शब्द रखे जायेंगे।
४. मूल अधिनियम की धारा २ की, उप-धारा (१) में,
(क) खण्ड (क) में, ""पशुपालन"" शब्दों के स्थान में, ""पशु-धन"" शब्द रखे जायेंगे ;
सन् १९६४ का महा. २० की धारा १ में संशोधन। सन् १९६४ का महा. २० की धारा २ में संशोधन।
(ख) खण्ड (ख) में,----
(एक) ""जिनपर प्रक्रिया नहीं की गई हैं"" शब्दों के पश्चात्, ""पशुधन को पालने समेत और इनमें, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत और पशुधन समेत किसान सदस्यों के एकत्रीकरण में जुड़ें हो, चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाये, किसानों का सहयोजन भी सम्मिलित होगा"" शब्द निविष्ट किये जायेंगे ;
(दो) ""कृषि उपज के उत्पादन या उगाने में जुडे हो"" शब्दों के पश्चात्, ""पशुधन को पालने समेत"" शब्द जोड़े़ं जायेंगे ;
(तीन) निम्न स्पष्टीकरण, जोड़ा जायेगा, अर्थात् :----
""स्पष्टीकरण.----इस अधिनियम के प्रयोजन के लिये, जहाँ कोई व्यक्ति कृषक हैं या नहीं, का प्रश्न उदभूत होता हैं, तब, जिसमें ऐसा व्यक्ति कृषि गतिविधि में जुड़ा हैं, के क्षेत्र की अधिकारिता रखनेवाले मामलतदार को वह, र्िनदिष्ट किया जायेगा और उसपर मामलतदार का निर्णय अंतिम होगा ;"";
(ग) खण्ड (ख) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात्, :----
""(खक) ""परख प्रयोगशाला"" का तात्पर्य, व्यापारयोग्य प्राचलों या श्रेणी-मानकों के अनुसार, गुणवत्ता प्राचलों का परीक्षण करने के लिये, समय-समय से निदेशक द्वारा जारी मार्गदर्शक सिद्धांतो में विर्िनदिष्ट अनुसार, प्रतिष्ठापित की गई प्रयोगशाला, से हैं ;"" ;
(घ) खण्ड (घ) में, ""६१"" आँकडों के पश्चात्, ""धारा ६१क की, उप-धारा (१) या (२)"" शब्द, आँकडे और अक्षर निविष्ट किये जायेंगे ;
(ङ) खण्ड (घ) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
""(घक) ""शीतागार"" का तात्पर्य, कृषि उपज के परिरक्षण के लिये, शीतकरण, हिमीकरण और शीतसंग्रहण के लिये आशायित प्रतिष्ठापन, से हैं ;"" ;
(च) खण्ड (ङक) के स्थान में, निम्न खण्ड, रखा जायेगा, अर्थात् :----
""(ङक) कृषि उपज के संबंध में, ""सीधे विपणन"" का तात्पर्य, धारा ५घ की उप-धारा (१) के अधीन सीधे विपणन अनुज्ञाप्तिधारक द्वारा, इस अधिनियम की धारा ५ के अधीन, मुख्य बाजार यार्ड, उप-बाजार यार्ड, निजी बाजार यार्ड और बाजार उप-यार्ड के बाहर, प्रक्रियाकर्ताअों, निर्यातकर्ताअों और संगठित खुदरा श्रृंखला प्रचालकों द्वारा संविदा कृषि प्रबंधन के अधीन किसानों से कृषि उपज की थोक खरीद, से है ; "" ;
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १४, २०१८/कर्ातिक २३, शके १९४० ३(छ) खण्ड (ङ४) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
""(ङ५) ""अंकित बाजार क्षेत्र"" का तात्पर्य, बाजार समिति और उसमें विपणन संबंधी विकास उपक्रमों के सदस्यों के निर्वाचन के प्रयोजन के लिये, धारा ४ की उप-धारा (१) के अधीन अधिसूचित भौगोलिक क्षेत्र, से हैं ;"" ;
(ज) खण्ड (च) में, ""का तात्पर्य, व्यक्ति,"" शब्दों के पश्चात् ""विपणन बोर्ड के प्रबंधन निदेशक के अलावा,"" शब्द, निविष्ट किये जायेंगे ;
(झ) खण्ड (च-१ग) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
""(च-१घ) ""निर्यात"" का तात्पर्य, भारत के बाहर कृषि उपज भेजने, से हैं ;"" ;
(ञ) खण्ड (च १) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किये जायेंगे, अर्थात् :----
सन् २०१३ का १८।
""(च १क) ""किसान-उत्पादक कंपनी (एफपीसी) का तात्पर्य, कंपनी अधिनियम, २०१३ या कंपनीयों को सम्मिलित करने से संबंधित किसी अन्य विधि के अधीन निर्गमित किसान-उत्पादक सदस्यों की कंपनी, से हैं ;
(च १ख) ""वित्तीय वर्ष"" का तात्पर्य, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिये, राज्य सरकार द्वारा, समय-समय से, वित्तीय वर्ष के रूप में, घोषित की गई अवधि से हैं ;"" ;
(ट) खण्ड (छ १) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
(छ २) ""पशुधन"" का तात्पर्य, गाँय, भैंस, बैल, सांड, बकरी और भेड और इनमें, कुक्कुट, मच्छलियाँ और ऐसे अन्य जानवरों और उनके उत्पादों का समावेश हैं, जिन्हे अनुसूची में विर्िनदिष्ट किया हैं, से है ;"" ;
(ठ) खण्ड (छक) के स्थान में, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
""(छक) ""प्रबंधन निदेशक"" का तात्पर्य, कृषि विपणन निदेशक के अलावा, धारा ३९ख-१ के अधीन राज्य विपणन बोर्ड के प्रबंधन निदेशक के रूप में, राज्य सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति से है ; तथापि, इलेक्ट्रॉनिक विपणन मंच के मामले मे प्रबंधन निदेशक, अर्थात्, पशुधन समेत कृषि उपज के लिए कमिशनिंग और प्रबंधन इलेक्ट्रॉनिक विपणन मंच के लिये कानूनी व्यक्ति को अनुज्ञप्त किये गए मुख्य कार्यकारी से है ;"" ;
(ड) खण्ड (ञ) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किये जायेंगे, अर्थात् :----
""(ञ-१) कृषि उपज के संबंध में, ""विपणन"" का तात्पर्य, फसल काँटने की अवस्था से शुरू होनेवाले उत्पाद स्थिति से लेकर उपज, अंतिम उपभोक्ता तक पहँुचने के कृषि उपज की प्रक्रिया में अंतर्ग्रस्त सभी गतिविधियाँ, जैसे---वर्गीकृत करना, प्रक्रिया करना, भंडारण, परिवहन, वितरण के माध्यम और उत्पादक के स्वयं के अलावा अन्य द्वारा हाथ में लिये गये प्रक्रिया में अंतर्ग्रस्त सभी अन्य कार्यों, से हैं ;
(ञ-२) ""बाजार उप-यार्ड"" का तात्पर्य, गोदाम, साइलों शीत, भण्डारण या धारा ५गख के अधीन बाजार उप-यार्ड के रूप में घोषित या बाजार यार्ड मानी जानेवाली अन्य संरचना या स्थान, से है ; (ञ-३) अंकित बाजार क्षेत्र के संबंध में, ""बाजार यार्ड"" में, सरकार द्वारा अधिसूचित और कृषि उपज और पशुधन बाजार समिति द्वारा प्रबंधित और प्रर्वतित ऐसे अंकित बाजार क्षेत्र के मुख्य बाजार यार्ड, उप-बाजार यार्ड और बाजार उप-यार्ड सम्मिलित है ;
(ञ-४) ""राष्ट्रीय नामचिन बाजार यार्ड"" का तात्पर्य, इस अधिनियम की धारा ५गक में र्िनदिष्ट किये गये राष्ट्रीय नामचिन बाजार यार्ड से है ;"";
४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १४, २०१८/कर्ातिक २३, शके १९४०(ढ) खण्ड (ट) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किये जायेंगे, अर्थात् :----
""(ट-१) ""राष्ट्रीय कृषि बाजार (एनएएम)"" का तात्पर्य, एकीकृत बाजार, जहाँ, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि का प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कृषि उपज की खरीद और बिक्री और उससे आनुषंगिक गतिविधियाँ, समय तथा स्थान से परे, विपणन उपयोगिता को ध्यान में रखते हुये, भारत में इलेक्ट्रानिक रूप से कार्यान्वित की जाती हैं, से हैं ;
(ट-२) व्यापारी के संबंध में, ""अत्याधिक व्यापार"" का तात्पर्य, बाजार समिति के पास सुरक्षा जमाराशि की रकम या उसने प्रस्तुत की हुई क्रेडिट सीमा या इलेक्ट्रानिक व्यापार मंच पर व्यापार के लिये की रकम के संदर्भ में किसी भी समय के मुकाबले में खरीदी हुई कृषि उपज के मूल्य से अधिक की रकम से हैं ;"";
(ण) खण्ड (ठ) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जाता है, अर्थात् :----
""(ठ-ठ) ""व्यक्ति"" में, व्यक्ित, सहकारी संस्था, हिंदू अविभक्त कुटुम्ब, कंपनी या भागीदारी फर्म या सहयोजन या व्यष्टि-निकाय, चाहे निर्गमित हो या न हो और सरकारी संगठन और गैर-सरकारी संगठन, सम्मिलित होंगे ;"";
(त) खण्ड (डक) में, ""निजी बाजार"" शब्दों के स्थान में ""यार्ड "" शब्द निविष्ट किया जायेगा ;
(थ) खण्ड (डक) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
""(ड-ख) बाजार यार्ड के संबंध में, ""प्रक्रियाकरण युनिट"" का तात्पर्य इस अधिनियम की धारा ५गख के अधीन बाजार उप-यार्ड के रूप में घोषित प्रक्रियाकरण युनिट, से हैं ;"";
(द) खण्ड (ढ) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
""(ढ-१) ""विनियमों"" का तात्पर्य, इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसरण में, धारा ३९ट के अधीन राज्य विपणन बोर्ड द्वारा बनाए गये विनियमों से है ;"";
(ध) खण्ड (द) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किये जायेंगे, अर्थात् :----
""(द-१क) ""विक्रेता"" का तात्पर्य, कृषक समेत, जो कीमत के प्रतिफल के लिये कृषि उपज की विक्री करता हैं या करने के लिए सहमत है, से है ;
""(द-१ख) ""साईलांे"" का तात्पर्य, इस अधिनियम की धारा ५गख के अधीन बाजार उप-यार्ड के रूप में घोषित साईलो, से हैं ;"";
(न) खण्ड (द-१) में, ""विशेष पण्य पदार्थ बाजार"" शब्दों के पश्चात् ""यार्ड"" शब्द निविष्ट किये जायेंगे ;
(प) खण्ड (ध) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
सन् १९६० का ५।
सन् १९६२ का ५८। ""(ध-क) बाजार यार्ड के संबंध में, ""गोदाम"" का तात्पर्य, घोषित कृषि उपज के संग्रहण जमाकर्ताअों की ओर से माल होते हुये के प्रयोजन के लिये उपयोग किया जानेवाला कोई भवन, संरचना या अन्य संरक्षित अहाता, से हैं और इसमें, महाराष्ट्र गोदाम अधिनियम, के अधीन अनुज्ञाप्तिप्राप्त या गोदाम निगम अधिनियम, १९६२ के अधीन चलाए जानेवाले गोदाम का समावेश हैं किंतु, भोजनालय, रेल्वे स्थानक, पत्तन या ऐसे स्वरुप के किन्हीं परिसरों से जुडे हुये अमानती सामानघर का समावेश नहीं हैं ;""।
५. मूल अधिनियम की धारा ४ की,
(क) उप-धारा (१) में,----
सन १९६३ का महा. २० की धारा ४ में संशोधन।
(एक) ""बाजार क्षेत्र होगा"" शब्दों के पश्चात्, ""और इस प्रकार विर्िनदिष्ट क्षेत्र में, बाजार समिति के सदस्यों के निर्वाचन के प्रयोजन के लिये भौगोलिक रूप से अंकित बाजार क्षेत्र का भी, समावेश होगा ;
(दो) निम्न स्पष्टीकरण, जोडा जायेगा, अर्थात् :---
""स्पष्टीकरण.----बाजार समिति, उसके अंकित बाजार क्षेत्र में कृषि उपज और पशुधन के विपणन को विनियमित नहीं करेेगी। बाजार समिति, प्रमुख बाजार यार्ड, उप-बाजार यार्ड और बाजार उप-यार्ड के भीतर कृषि उपज और पशुधन के विपणन पर विनियम प्रर्वतित करेगी ।"";
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १४, २०१८/कर्ातिक २३, शके १९४० ५(ख) उप-धारा (३) में,----
(एक) ""से अपर्वजित होगा"" शब्दों के पश्चात्, ""अंकित "" शब्द निविष्ट किये जायेंगे ;
(दो) ""किसी बाजार में"" शब्दों के पश्चात्, ""यार्ड"" शब्द निविष्ट किया जायेगा ;
(तीन) ""बाजार में"" शब्दों के पश्चात्, ""यार्ड"" शब्द निविष्ट किया जायेगा ;
(ग) उप-धारा (४) के स्थान में, निम्न उप-धारा, रखी जायेंगी, अर्थात् :----
" (४) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विशेष कृषि उपज या पशुधन के विपणन के लिये, आवर्तन और विशेष आधारभूत संरचना को ध्यान में रखने के पश्चात्, किसी बाजार क्षेत्र के लिये, विद्यमान बाजार के अतिरिक्त में, एक विशेष पण्य वस्तु बाजार, घोषित कर सकेगी।
ऐसा बाजार,----
(एक) फल, सब्जीयाँ और फूल बाजार इनमें, प्याज बाजार, सेब बाजार, संत्रा बाजार, किशमिश बाजार, हल्दी बाजार, काजू बाजार सम्मिलित होंगे ;
(दो) कपास बाजार ;
(तीन) औषधीय और सुगंधित पौधे बाजार ;
(चार) मवेशी, बकरी, भेड़, गधा, घोड़ा बाजार, मछली बाजार, कुक्कुट बाजार और अन्य ऐसे बाजार समेत पशूधन बाजार ; और
(पाँच) किन्ही ऐसे अन्य बाजार, हो सकेंगे :
परन्तु, महाराष्ट्र सहकारी संस्था (तृतीय संशोधन) अध्यादेश, २०१८ के प्रारम्भण के पूर्व पहले से ही जारी की गई अधिसूचना, विद्यमान प्रमुख और बाजारों के संबंध में, प्रवृत्त रहेगी। " ।
६. (१) मूल अधिनियम की धारा ५ के स्थान में, निम्न धारा, रखी जायेगी, अर्थात् :----
सन् १९६३ का महा. २० की धारा ५ में संशोधन। " ५. (१) राज्य में, वहाँ----
विभिन्न बाजारों की स्थापना। (क) बाजार समिति द्वारा प्रबंधित मुख्य बाजार यार्ड या कई यार्ड होंगे ;
(ख) बाजार समिति द्वारा प्रबंधित उप-बाजार यार्ड या कई यार्ड होंगे ;
(ग) बाजार समिति द्वारा प्रबंधित बाजार उप-यार्ड या यार्ड होंगे ;
(घ) धारा ५घ के अधीन अनुज्ञप्ति धारण करनेवाले व्यक्ति द्वारा प्रबंधित निजी बाजार यार्ड होंगे ;
(ङ) धारा ५घ के अधीन अनुज्ञप्ति धारण करनेवाले व्यक्ति द्वारा, प्रबंधित निजी बाजार उप- यार्ड या यार्ड होगे ;
(च) बाजार समिति द्वारा प्रबंधित एक या कई किसान उपभोक्ता बाजार यार्ड होंगे ;
(छ) नियम ४ङ के अधीन अनुज्ञप्ति धारण करनेवाले व्यक्ति द्वारा प्रबंधित एक या कई किसान- उपभोक्ता बाजार यार्ड हेंगे ;
(ज) विशेष पण्य वस्तु बाजार यार्ड होंगे ;
(झ) इलेक्ट्रॉनिक व्यापार मंच होंगे :
सन् २०१८ का महा. अध्या. क्र. २४।
परंतु, महाराष्ट्र सहकारी संस्था (तृतीय संशोधन) अध्यादेश, २०१८ के प्रारंभण के पूर्व मुख्य या सहायक बाजारों के संबंध में, पहले से ही जारी किये की गई अधिसूचनाएँ, जब तक कि, स्पष्टतया उपांतरित या विखंडित नहीं की जाती है, तब तक प्रवृत्त होंगी।
भाग सात--२६-२६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १४, २०१८/कर्ातिक २३, शके १९४० (२) सरकार, धाराएँ ३ और ४ के अधीन अधिसूचना जारी करने के पश्चात्, यथासंभव शीघ्र, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन, भौतिक, इलेक्ट्रॉनिक या अन्य ऐसे स्वरूप में स्पष्ट रूप से विवक्षित रूप सें, अधिसूचित कृषि उपज और पशुधन के विपणन के विनियमन के प्रयोजन के लिये, बाजार समिति द्वारा मुख्य बाजार यार्ड या उप-बाजार यार्ड या बाजार उप-यार्ड या, यथास्थिति, किसान उपभोक्ता बाजार यार्ड के रूप में अंकित बाजार क्षेत्र में, कोई स्थान घोषित करेगी ।
स्पष्टीकरण.--- उप-धारा (२) में, "स्थान" अभिव्यक्ति में, अंकित बाजार क्षेत्र की बाजार समिति में निहित गोदाम, साइलांे, पैक हाऊस, गुणवत्ता निर्धारण प्रयोगशाला, सफाई, श्रेणीकरण या संवेष्टन और प्रक्रियाकरण युनिट समेत कोई संरचना, अहाता, खुली जगह इलाके, मार्ग, सम्मिलित होंगे।
(३) सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन, भौतिक, इलेक्ट्रॉनिक या अन्य किसी स्वरूप में स्पष्टरूप से या विवक्षित रूप से, कृषि उपज या पशूधन के विपणन के लिये निजी बाजार यार्ड, निजी बाजार उप-यार्ड, या, यथास्थिति, किसान उपभोक्ता बाजार यार्ड बनाने के लिये धारा, ५घ के अधीन अनुज्ञप्तिप्राप्त "स्थान" घोषित कर सकेगी ।
स्पष्टीकरण.--- इस उप-धारा (३) में, " स्थान " अभिव्यक्ति में, इस अधिनियम के अधीन प्रयोजन के लिये अनुज्ञप्तिप्राप्त व्यक्ति में निहित गोदाम, साईलों, पैक हाऊस, गुणवत्ता निर्धारण प्रयोगशाला, सफाई, श्रेणीकरण और संवेष्टन और प्रक्रियाकरण युनिट समेत, कोई संरचना, अहाता, खुली जगह इलाके, मार्ग सम्मिलित होंगे। ""। ७. (१) मूल अधिनियम की धारा ५ग के बाद, निम्न धारा निविष्ट की जायेगी अर्थात् :-----
सन् १९६३ का महा. २० में धारा ५गक का निवेशन।
राष्ट्रीय नामचीन (एमएनआय) के बाजार यार्ड की स्थापना।
५ ग क. धारा १३ की उप-धारा (१) के अधीन यथा उपबंधित के सिवाय, राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, "राष्ट्रीय नामचिन बाजार यार्ड" के रूप में धारा ५ के अधीन स्थापित किये गये या "राष्ट्रीय नामचिन बाजार यार्ड" के रूप में स्थापित कोई बाजार अभिहित करना, कुल संवेश प्रवाह,मूल्य, ऊपरी स्त्रवण क्षेत्र, अनुप्रवाह सेवा दिऐ गये उपभोक्ताअों की संख्या और उसके लिये विशेष मूलभूत सुविधा की आवश्यकता में, राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड द्वारा विनियमन आवश्यक है और इस अधिनियम में, अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुये भी, ऐसे बाजार में, विपणन का विनियमन विहित किया जाये ऐसे रित्या में होगा :
परंतु, बाजार यार्ड का संचालन, विहित किया जाये ऐसे, वर्ाषिक टनेज या ऐसे वर्ाषिक मूल्य से कम नहीं होकर वह, "राष्ट्रीय नामचिन के बाजार यार्ड" के प्रदत्त प्रतिष्ठा के लिए विचार में लिया जायेगा :
परंतु, यह और कि, ऐसे वार्षिक टनेज या ऐसे वर्ाषिक मूल्य में से, ३० प्रतिशत, दो अन्य राज्यों से अनधिक आनेवाला नहीं होगा।"" ;
८. (१) मूल अधिनियम के अध्याय एक-क के पश्चात, निम्न अध्याय, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :---
सन् १९६३ का महा. २० के अध्याय एक-क क की निविष्टि।
" अध्याय एक-क क
बाजार उप-यार्ड के रूप में गोदाम या साइलों या शीत भंडारण, आदि....।
५ गख. (१) इस अधिनियम में, अन्यथा उपबंधित के सिवाय, राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, बाजार उप-यार्ड के रूप में कार्य करने के लिये, यथाविर्िनदिष्ट आधारभूत संरचना और सुविधाअों के साथ, गोदाम, साइलों या शीत भण्डार या अन्य ऐसी संरचना या स्थान घोषित कर सकेगी ।
स्पष्टीकरण.--- इस उप-धारा के अधीन, " स्थान " अभिव्यक्ति में, कोई संरचना, अहाता, खुली जगह इलाकें, मार्ग, पैक हाऊस या सफाई, श्रेणीकरण और प्रक्रियाकरण युनिट आदि समेत, का समावेश होगा। बाजार उप-यार्ड के रूप में, गोदाम, या साइलों या शीत भण्डारण या अन्य ऐसी संरचना या स्थान घोषित करना।
(२) उप-धारा (१) के अधीन बाजार उप-यार्ड के रूप में ऐसे स्थान की घोषणा करने में आशयित, ऐसे गोदाम या शीत भण्डार या अन्य ऐसी संरचना या, यथास्थिति, " स्थान " का स्वामी, विर्िनदिष्ट किये जाये ऐसे प्ररूप और ऐसी रित्या में और ऐसी फीस के साथ और साथ ही ऐसी अवधि के लिये, किंतु, तीन वर्षों से कम-नहीं होगी, निदेशक या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी को आवेदन करेगा ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १४, २०१८/कर्ातिक २३, शके १९४० ७ (३) ऐसे गोदाम, साइलों या शीत भण्डार या अन्य ऐसी संरचना या स्थान का अनुज्ञप्तिधारी, सरकार द्वारा अधिसूचित किये गये दर से अनधिक मूल्यर्वधित दर पर घोषित बाजार उप-यार्ड में अंतरित किये गये अधिसूचित कृषि उपज पर उपभोगकर्ता प्रभार संग्रहीत कर सकेगा :
परंतु, कोई उपयोगकर्ता-प्रभार, कृषक-विक्रेता से संग्रहीत नहीं किया जायेगा।
(४) घोषित बाजार उप-यार्ड अनुज्ञप्तिधारी, ऐसे उपभोग प्रभार के संग्रहण में से बाजार समिति द्वारा धारा ३१ की उप-धारा (१) के अधीन उद्ग्रहीत फीस के सममूल्य पर प्रतिशत में दर पर निदेशक द्वारा अलग से संपोषित "परिक्रामी विपणन विकास निधि" के लिये फीस का भाग देगा। निधि का, कृषि उपज के विपणन विकास के प्रयोजन के लिए और जैसा कि विहित किया जाए ऐसी रीत्या में उपयोग किया जायेगा। " ।
९. (१) मूल अधिनियम की धारा ५घ की, उप-धारा (६) के, खण्ड (ख) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
सन् १९६३ का महा. २० की धारा ५घ में संशोधन। " (ग) निजी बाजार यार्ड में, प्रत्येक कृषि उपज या तो लोक निलामी या ई-निलामी द्वारा विक्रय की जा सकेगी। जब कोई भी घोषित कृषि उपज, निजी बाजार में लोक निलामी या ई-निलामी द्वारा विक्रय की जाती हैं, वह, अत्याधिक बोली लगानेवाले को बेची आयेगी, किंतु, विक्रेता, अपनी उपज को अत्याधिक बोली लगानेवाले को बेचने से इन्कार कर सकेगा या कम बोली का स्वीकार कर सकेगा या उसकी उपज की विक्रय अगले घंटे या दिन के लिये बढ़ा सकेगा :
परंतु, विक्रेता जिन्होंने विकल्प भरे हैं, वह संबंधित विक्रेता को, अपना निर्णय, समय, जो, निजी बाजार अनुज्ञप्तिधारी, संबंधित बाजार में निलामी या ई-निलामी के लिये नियत कर सकेगा, के अवसान के पूर्व, संसूचित करेगा। "।
१०. (१) मूल अधिनियम की धारा ६ की,----
(क) उप-धारा (३) के पश्चात्, निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :-----
सन् १९६३ का महा. २० की धारा ४ में संशोधन। " (४) (क) इस अधिनियम के अधीन यथा उपबंधित के सिवाय, सभी कृषि उपज, साधारणतया मुख्य बाजार यार्ड, उप-बाजार यार्ड, बाजार उप-यार्ड, निजी बाजार यार्ड या इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्तिप्राप्त इलेक्ट्रॉनिक व्यापार मंच पर विक्रय की जायेगी :
परंतु, कृषि उपज, सीधे विपणन के लिये, धारा ५ घ के अधीन, इस निमित्त विशेष रूप से अनुज्ञेय अनुज्ञप्तिधारक को, अन्य जगहों पर भी बेची जा सकती हैं। (ख) कृषि उपज के संबंध में, कोई भी बात, निम्न विक्रय या क्रय को, जहाँ,----
(एक) नियमों के अधीन विहित सीमा से अधिक मात्रा में, उत्पादक ने स्वयं द्वारा, किसी व्यक्ति को उसके घरेलू उपभोग के लिये, विक्रय किया हैं ;
(दो) सिर पर उठकर विक्री के लिये लायी गई हैं ; (तीन) क्रय और विक्रय छोटे-मोटे व्यापारी द्वारा किया गया हैं ;
(चार) लोक वितरण प्रणाली के ज़रिए, अत्यावश्यक वस्तूओं के वितरण के लिये, भारतीय खाद्य निगम से प्राधिकृत उचित दाम दुकान ब्यौहारी, " राज्य वस्तु व्यापार निगम " या केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार प्रशासन द्वारा प्राधिकृत किन्हीं अन्य अभिकरण या संस्था द्वारा क्रय किया गया हैं ; (पाँच) ऐसी कृषि उपज की, सहकारी संस्था को, उससे अग्रिम प्राप्त करने के प्रयोजन के लिये अंतरण किया गया हैं ; और
(छह) महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार (पेसा) नियम, २०१४ के अधीन नियमों के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र में लघु वन उपजों, को लागू नहीं होगी। (ग) पशुधन के संबंध में, उप-धारा (१) की कोई भी बात, अधिसूचित किये जाये, ऐसे मूल्य से अनधिक पशुधन के क्रय और विक्रय के कारोबार को लागू नहीं होगी।
(घ) मुख्य बाजार यार्डों, उप-बाजार यार्डों, निजी यार्डो, बाजार उप-यार्डो में विक्रय के लिये लाये गये पशुधन समेत, अधिसूचित कृषि उपज की कीमत, निविदा बोली या खुली निलामी, ई-निलामी या अन्य किन्हीं पारदर्शी प्रणाली समेत, द्वारा तय की जायेगी और विक्रेता से चाहे किसी भी कारणवंश सहमत कीमत से कोई भी कटौती नहीं की जायेगी।
भाग सात--२६-२अ८ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १४, २०१८/कर्ातिक २३, शके १९४० (ङ) इस प्रकार खरीदी गई सभी अधिसूचित कृषि उपज की तोल या मापन या गणना, उप-विधियों में यथा उपबंधित ऐसे व्यक्ति और, ऐसी प्रणाली द्वारा की जायेगी या निदेशक या उसके द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा इस प्रयोजन के लिये विर्िनदिष्ट किसी अन्य स्थान पर की जायेगी। "।
११. (१) मूल अधिनियम की धारा ६ के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----
सन् १९६३ का महा. २० की धारा ६क की निविष्टि।
क्रय और विक्रय निबंधन और प्रक्रिया।
" ६क. (१) दो व्यापारियों के बीच के वाणिज्यिक अंतरण को छोडकर, कोई अन्य व्यक्ति, जिसने मुख्य उप-बाजार यार्ड, बाजार उप-यार्ड और निजी बाजार यार्ड या इलेक्ट्रॉनिक व्यापार मंच से अधिसूचित कृषि उपज की खरीद की हैं, विक्रेता के पक्ष में विहित किये जाये, ऐसे प्ररूप में, आंतर- राज्ियक व्यापार के मामले में, तीन प्रतियों में करार और आंतरराज्ियक व्यापार के मामले में तीन लेखा पर्ची कार्यान्वित करेगा। करार या लेखा पर्ची की एक प्रति, क्रयकर्ता द्वारा अपने पास रखी जायेगी, एक प्रति विक्रेता को दी जायेगी और शेष प्रति बाजार समिति के अभिलेख में रखी जायेगी। (२) (क) मुख्य बाजार यार्ड, उप-बाजार यार्ड, निजी बाजार यार्ड, बाजार उप-यार्ड में दो लाख रुपयों के उपर के कृषि उपज के संव्यवहार और ई-प्लेटफॉर्म पर में के सभी संव्यवहार की कीमत, पानेवाले के खाते में देय चैक, डिमांड ड्राफ्ट या आरटीजीएस या एनईएफटी जैसे रकम अंतरित करने के किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक ढंग द्वारा, उसी दिन बेचनेवाले को या अधिकतम में अगले दिन को यदि इस प्रकार प्रक्रिया में आवश्यक है तो अदा की जायेगी, किंतु आस्थगित संदायों के ऐसे मामलों में, क्रेता को बाजार समिति को सुरक्षा प्रदान करनी होंगी जो उसकी उधार सीमा को प्रचलित कर सकेगी जो उधार संव्यवहारों और व्यापारी द्वारा किये गये संदाय पर गतिशिल समायोजित आधार पर प्राप्त होगी। आस्थगित संदायों के संव्यवहारों के मामलों मे कोई भी अत्याधिक व्यापार अनुज्ञप्त नहीं होगा। अधिसूचित कृषि उपज पर का संदाय, कृषिक-विक्रेता को भी मिलेगा, यदि सीधे विपणन लाईसेंसी को उसी दिन स्थल पर या इलेक्ट्रॉनिक संव्यवहार के मामले में वास्तविक समय के आधार पर माल बेचा गया है। (ख) इलेक्ट्रॉनिक व्यापार प्लेटफॉर्म पर कृषि उपज के लिये क्रेता बोलियाँ होने के मामले में, बोली लगाने की उसकी क्षमता, गतिशील उधार सीमा द्वारा सीमित होगी और क्रेता को संदाय, इलेक्ट्रॉनिक व्यापार प्लेटफॉर्म के जरिए उसकी सीमा के सामने विकलित होगा। विक्रेता विषय के साथ या खण्ड (क) के अधीन आस्थगित संदाय के विकल्प के लिये खरीददार को चुनने के मामले में, वह, पशुधन समेत कृषि उपज की कुल कीमत का प्रतिदिन, एक प्रतिशत की दर पर अतिरिक्त संदाय करने का दायी होकर, पाँच दिनों के भीतर विक्रेता को देय होगा। ऐसे मामलोंे में, आस्थगित उधार सीमा अतिरिक्त संदाय की रकम को ध्यान में रखते हुये घटाई जायेगी ताकि सुनिश्चित होगी कि कोई भी अत्याधिक व्यापार होने की अनुमति नहीं होगी।
(३) कमिशन एजेंट, उसकी या उसके कमिशन की वसूली इलेक्ट्रॉनिक निधि अन्तरण के जरिए या डिमांड ड्राफ्ट या पानेवाले के खाते में देय चैक द्वारा उसके या उनके मुख्य व्यापारी से गैर-विनश्वर कृषि उपज के संव्यवहारित पर मूल्यानुसार तीन प्रतिशत से अनधिक दर पर वसूल करेगा ; विनश्वर कृषि उपज के मासले में, वह संव्यवहारित उपज पर मूल्यानुसार छह प्रतिशत से अनधिक का होगा, सभी खर्चों समेत, उपज के संग्रहण में उसके द्वारा उपजत होगा और उसके द्वारा अन्य सेवा में दी जायेगी :
परंतु, कमिशन एजेंट विक्रेता और खरीददार दोनों की ओर से ऐसा कार्य नहीं करेगा और बाजार समिति या निजी बाजार यार्ड के प्रबंधन की ओर से कृषि उपज की कोई निलामीं नहीं कर सकेगा :
परंतु आगे यह कि, कमिशन एजेंट, ना तो विक्रेता की ओर से नगद संदाय प्राप्त करेगा, ना तो उसके स्वयं के खाते से कृषि उपज के मूल्य का क्रेता की ओर से विक्रेता संदाय नहीं करेगा। "।
१२. मूल अधिनियम की धारा १३ के पश्चात्, निम्न धारा में, निविष्ट की जायेंगी, अर्थात् :-----
"१३क. राज्य सरकार, राष्ट्रीय नामचीन के बाजार यार्ड की बाजार समिति पर निम्न को नामित करेगी,-----
सन् १९६३ का महा. २० में धारा में १३क और १३ख का निवेशन। राष्ट्रीय नामचिन (एमएनआय) के बाजार यार्ड की बाजार समितियों का संयोजन।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १४, २०१८/कर्ातिक २३, शके १९४० ९ (एक) अध्यक्ष - विपणन मंत्री या राज्य सरकार उचित समझे ऐसा कोई अन्य व्यक्ति ;
(दो) उपाध्यक्ष - अतिरिक्त रजिस्ट्रार, सहकारिता से अनिम्न श्रेणी का कोई अधिकारी ;
(तीन) छह कृषक, जिसमें से महाराष्ट्र राज्य के प्रत्येक राजस्व प्रभाग का एक होगा ;
(चार) संबंधित अन्य राज्य सरकारों द्वारा सिफारिश किऐ गए दो कृषक, जहाँ राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड में कृषिक उपज प्राप्त होकर अधिकतम पहुँचती है उन दो अन्य राज्यों में से एक एक ;
(पाँच) राष्ट्रीय नामचिन बाजार यार्ड से संबंधित ब्यापार का लाईसेंस धारण करनेवाले पाँच सदस्य ;
(छह) कृषि तथा संसाधित खाद्यान्य उत्पादन निर्यात विकास प्राधिकरण (अपेडा) का एक प्रतिनिधि ;
(सात) केंद्रीय गोदाम निगम या राज्य गोदाम निगम समेत एकीकृत गोदाम प्रचालक का प्रतिनिधित्व करनेवाला एक प्रतिनिधि ;
(आठ) बगली रेलपथ सुविधा प्रदान करनेवाले भारतीय रेल का एक प्रतिनिधि ;
(नौ) भारत सरकार के सीमाशुल्क विभाग का एक प्रतिनिधि ;
(दस) राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड को सेवा प्रदान करनेवाले बँको का एक प्रतिनिधि ;
(ग्यारह) भारत सरकार का कृषिक विपणन सलाहकार या भारत सरकार के अवर सचिव से अनिम्न श्रेणी का उसका नामनिर्देशिती ;
(बारह) मुख्य कार्यचालक अधिकारी या क्षेत्र के नगर निगम का आयुक्त या उसका नामनिर्देशिती ;
(तेरह) राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जानेवाला कार्यकारी सदस्य, जो राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड के बाजार समिति का सचिव या मुख्य कार्यचालक अधिकारी जो सहकारिता विभाग के संयुक्त रजिस्ट्रार की अनिम्न श्रेणी का होगा ;
परंतु, राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड की अधिसूचना जारी होने के शीघ्र ही विद्यमान बाजार समिति के कृत्य परिविरत होंगे और विद्यमान समिति के सभी सदस्य, उनके पद धारण करने से परिविरत होगे । १३ख. (१) कार्यकारी समिती, राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड के लिये उसके सदस्यों में से बाजार समिति द्वारा नियुक्त की जायेगी ।
राष्ट्रीय नामचिन बाजार यार्ड के लिए कार्यकारी समिति। (२) राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड के लिए, कार्यकारी समिति, सदस्यों के ऐसी संख्या से गठित होगी और विहित की जाये ऐसी प्रक्रिया का अनुपालन करेगी ।
(३) आपातकाल के मामले में कार्यकारी समिति, राष्ट्रीय नामचीन मार्केट यार्ड को बाजार समिति के आवश्यक अनुमोदक के मदों का विचार करेगी ।
परंतु, ऐसे विनिश्यय, राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड की बाजार समिति द्वारा, ऐसे विनिश्चता लेने जाने की दिनांक से अगली बैठक में अनुमोदित किये जायेंगे । ऐसा करने में विफल रहने पर या राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड की बाजार समिति द्वारा ऐसे विनिश्चयों के अननुमोदन करने की घटना में, ऐसा विनिश्चय, इस प्रकार अकृत और शून्य होगा, तथापि, यह कि कोई ऐसा अननुमोदन, उस विनिश्चय के अधीन की गई किसी बात की पूर्ववर्ती वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा ;
परंतु यह और कि, यदि राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड की बाजार समिति, ऐसे विनिश्चय में कोई उपांतरण करती है तो ऐसा विनिश्चय, ऐसे उपांतरण की दिनांक से ऐसे उपांतरित से प्रभावी होगा ।
(३) कार्यकारी समिति, यथा आवश्यकता में बांरबार बैठक लेगी किन्तु, कैलेंडर महिने में कम से कम एक बार लेगी ।
१३ग. इस अधिनियम के सभी अन्य उपबंध, राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड के लिये विर्िनदिष्ट नहीं है, वह, जबतक धारा ५ग क के अधीन इस निमित्त बनाये गये नियमों द्वारा से अन्यका विर्िवदिष्ट नहीं किये जाते है तब तक यथावश्यक परिवर्तन समेत, राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड को लागू होंगे।""।
राष्ट्रीय नामचिन बाजार यार्ड को अधिनियम का लागू होना।१० महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १४, २०१८/कर्ातिक २३, शके १९४० १३. मूल अधिनियम की धारा ६० की, उप-धारा (२) में, (क) खंड (क) के पश्चात्, निम्न खंड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
सन् १९६३ का महा. २० की धारा ६० में संशोधन।
""(कक) धारा ५गक के अधीन, निम्न विहित करने के लिए,----
""(एक) राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड में विपणन के विनियमन की रीति ;
(दो) बाजार यार्ड में संचालित की जानेवाली कृषि उपज के वर्ाषिक औसतन या वर्ाषिक मूल्य की अधिकतम सीमा, उसमें के राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड के रूप में प्रदत्त प्रास्थिति के प्रयोजनों के लिये होगी ;
(कख) धारा ५गख के अधीन, निम्न विहित करने के लिए,----
(एक) उसमें की उप-धारा (१) के अधीन, बाजार उप-यार्ड के रूप में गोदाम सीईलो, शीतागार या अन्य ऐसी संरचना या स्थान घोषित करने के लिये, मूलभूत सुविधा और सुविधायें आवश्यक है ;
(दो) उसमें की उप-धारा (२) के अधीन, तद्धीन आवेदन करने के प्रयोजनों के लिये प्ररुप, रीति और फीस और उसके लिये तीन वर्षों से कम नहीं की, अवधि होगी ;
(तीन) उसमें की उप-धारा (४) के अधीन, प्रयोजनों और उसकी रीति परिक्रामी विपणन विकास निधि की उपयोगिता के लिये, कृषि उपज के विकास विपणन के लिये होगी ; "" ;
(ख) खंड (क-६) के पश्चात्, निम्न खंड, निविष्ट किये जायेंगें, अर्थात् :----
""(क-७) धारा ६ की उप-धारा (४) के परिच्छेद (ख) के खंड (एक) के अधीन, उक्त परिच्छेद (ख) प्रयोजनों के लिये, उत्पादक के स्वयं द्वारा किसी व्यक्ति को उसकी घरेलू खपत के लिये की गई बिक्री की मात्रा की सीमा विहित करने के लिये ;
(क-८) धारा ६क के अधीन, उसमें की उप-धारा (१) के अधीन, आंतर राज्यीय व्यापार के मामले में करार का प्ररूप और आंतर राज्यीय व्यापार के मामले में एक लेखा पर्चो के प्ररूप विहित करने के लिये ;"" ;
(ग) खंड (ग-१) के पश्चात्, निम्न खंड, निविष्ट किया जायेंगा, अर्थात् :----
(ग-२) धारा १३ख के अधीन, उसमें की उप-धारा (२) के अधीन, राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड की कार्यकारी समिति के सदस्यों की संख्या और उसके द्वारा अपनायी जानेवाली प्रक्रिया विहित करने के लिये ;""।
कठिनाई के निराकरण की शक्ति।
१४. (१) यदि, इस अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित मूल अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो, राज्य सरकार, जैसा अवसर उद्भूत हो, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसी कोई बात कर सकेगी जो इस अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित मूल अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो, जो उसे कठिनाई के निराकरण हेतु आवश्यक या इष्टकर प्रतीत हो।
(२) उप-धारा (१) के अधीन बनाया गया प्रत्येक आदेश, उसके बनाये जाने के पश्चात,् यथासंभव शीघ्र, राज्य विधान मंडल के सदन के समक्ष रखा जायेगा।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १४, २०१८/कर्ातिक २३, शके १९४० ११
वक्तव्य ।
महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास तथा विनियमन) अधिनियम, १९६३ (सन् १९६४ का महा. २०), राज्य में स्थापित निजी बाजारों और किसान उपभोक्त बाजारों समेत बाजार क्षेत्रों और बाजारों में कृषिक और कतिपय अन्य उपज के विपणन का विकास और विनियमन करने के लिये ऐसे बाजारों से जुडे बाजार समिति के प्रयोजनों के संबन्ध में और बाजार समिति के प्रयोजनों के लिये बाजार निधि स्थापित करने हेतु या कार्यरत बाजार समितियों पर शक्ति प्रदत्त करने हेतु और उपयर्ुक्त मामलों के साथ जुडे प्रयोजनांे के लिये उपबंध करने हेतु अधिनियमित किया गया था।
२. कृषि उपज बाजार समिति, किसानों के लिये एक मंच के रुप में उनकी कृषि उपज बेचने के लिये और उसके बदले में पर्याप्त और उचित कीमत प्राप्त करने के लिये स्थापित की गई थी। उक्त अधिनियम के प्रस्तावित संशोधनों की पुर:स्थापना करने के साथ, किसानों को जो बाजार समिति का मेरूदण्ड है और कृषि उपज के विपणन में आनेवाली बाधाअों और कठिनाईयोंका ज्ञान है उन्हें प्रतियोगिता में अधिकतम लाभ मिलने चाहिये।
३. केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर, किसानों को कृषि उपज की बेहत्तर कीमतें मिलने के लिये प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार, महाराष्ट्र राज्य की ६० कृषि उपज विपणन समितियों में ई-नाम योजना कार्यान्वित कर रही है, ताकि कृषि उपज बाजार समिति में कृषि उपज के व्यापार में आनेवाली बाधाअों को कम किया जा सके और किसानों को उनकी कृषि उपज के लिये बेहत्तर कीमत मिलने के लिये कृषि उपज के व्यापार के लिये ऑनलाईन प्रणाली कार्यान्वित की जा सके। इन प्रयोजनों के लिये, महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास तथा विनियमन) अधिनियम, १९६३ (सन् १९६४ का महा. २०), सन् २०१८ के महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक ५१ द्वारा संशोधित किया जा रहा है। राज्य में ई-व्यापार और ई-काम योजना का अतिरिक्त प्रभावी कार्यान्वयन के शीघ्रता से करने के लिये, उक्त अधिनियम में अधिकतर यथोचित संशोधन करना इष्टकर समझा गया है।
४. प्रस्तावित संशोधनों की मुख्य विशेषतायें निम्न है :----
(क) पशुधन के संबंध में विपणन विनियमन के लिये उपबंध ; (ख) राष्ट्रीय नामचीन बाजार यार्ड और उससे आनुषंगिक और संबंधित मामलों के लिये उपबंध ; (ग) बाजारों की विभिन्न प्रकारों की स्थापना के लिये उपबंध ; (घ) गोदाम, साईलों, शीतागार आदि के लिये बाजार उप-यार्ड के उपबंध ; और (ङ) उसके लिये अन्य पारिणामिक संशोधन।
५. क्योकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का समाधान हो चुका है कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं, जिनके कारण उन्हें इसमें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिये महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास तथा विनियमन) अधिनियम, १९६३ (सन् १९६४ का महा. २०) में अधिकतर संशोधन करने लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता हैं।
मुंबई, दिनांकित २४ अक्तूबर २०१८।
चे. विद्यासागर राव, महाराष्ट्र के राज्यपाल।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,
अनुप कुमार,
शासन के प्रधान सचिव,
(यथार्थ अनुवाद) हर्षवर्धन जाधव, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY I/C DIRECTOR SHRI MANOHAR SHANKAR GAIKWAD, PRINTED AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATIONS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 EDITOR : I/C DIRECTOR SHRI MANOHAR SHANKAR GAIKWAD.