Servants of Knowledge
Maharashtra Gazette · Government of Maharashtra

Part VII (Ex. 29) (Nov. 16, 2018) (वित्त विभाग) (महाराष्ट्र अध्यादेश क्र. २२, सन २०१८ ।

Published 16 November 2018

Type
Extra - Ordinary
Part
Part 7 (Hindi)
Division
CENTRAL SECTION
Identifier
in.gazette.maharashtra.2018-11-16.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-
Languages
English, Marathi

click here for IIIF manifest

महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १६, २०१८/कर्ातिक २५, शके १९४० १

RNI No. MAHBIL /2009/31730

महाराष्ट्र शासन राजपत्र

असाधारण भाग सात

वर्ष ४, अंक १८] शुक्रवार, नोव्हेंबर १६, २०१८/कर्ातिक २५, शके १९४० [पृष्ठे ११, किंमत : रुपये ४७.००

असाधारण क्रमांक २९

प्राधिकृत प्रकाशन

अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).

वित्त विभाग

मंत्रालय, मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरू चौक, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित १३ अक्तूबर, २०१८।

MAHARASHTRA ORDINANCE No. XXII OF 2018.

AN ORDINANCE

TO AMEND THE MAHARASHTRA GOODS AND SERVICES

TAX ACT, 2017.

महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक २२, सन् २०१८।

महाराष्ट्र माल और सेवा कर अधिनियम में संशोधन करने संबंधी अध्यादेश।

क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा हैं ;

और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का समाधान हो चुका हैंै कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ में अधिकतर संशोधन करने के लिये, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ हैं ;

सन् २०१७ का महा. ४३।

(१)

भाग सात----२९---१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १६, २०१८/कर्ातिक २५, शके १९४० अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :----

१. (१) यह अध्यादेश महाराष्ट्र माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, २०१८ कहलाए।

संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभण।

(२) धारा (१) तुरन्त प्रवृत्त होगी।

(२) यथा अन्यथा उपबंधित के सिवाय, शेष धाराएँ ऐसे दिनांक को प्रवृत्त होगी, जिसे राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करें और इस अध्यादेश के विभिन्न उपबंधों के लिये, विभिन्न दिनांक नियत किये जा सकेंगे और इस अध्यादेश के प्रारंभण के लिये किन्ही ऐसे उपबंध का किसी संदर्भ, का, उस उपबंध के प्रवृत्त होने के लिये संदर्भ के रूप में अर्थ लगाया जायेगा।

२. महाराष्ट्र माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ (जिसे इसमें आगे "मूल अधिनियम" कहा गया हैं) की धारा २ के,----

सन् २०१७ का महा. ४३। सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा २ में संशोधन।

(क) खण्ड (४) में, "अपील प्राधिकरण और अपिल अधिकरण" शब्दों के स्थान में, "अपील प्राधिकरण, अपील अधिकरण और धारा १७१ की उप-धारा (२) में निर्देशित प्राधिकरण" शब्द, कोष्ठक तथा अंक रखे जायेंगे ;

(ख) खण्ड (१६) में, "केन्द्रीय उत्पादशुल्क तथा सीमा शुल्क बोर्ड " शब्दों के स्थान में, "अप्रत्यक्ष करों तथा सीमाशुल्कों " शब्द रखे जायेंगे ;

(ग) खण्ड (१७) के उप-खण्ड (ज) में के स्थान में, निम्न उप-खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :---

" (ज) योगमापी या पुस्तक-निर्माता कों अनुज्ञप्ति के ज़रिए के समेत रेस क्लब के या ऐसे क्लब में अनुज्ञप्तिप्राप्त पुस्तक निर्माता की गतिविधियाँ ; और" ;

(घ) खण्ड (१८), अपमर्ाजित किया जायेगा ;

(ङ) खण्ड (३५) में, "खण्ड (ग)" शब्द, कोष्ठक तथा अक्षर के स्थान में, "खण्ड (ख)" शब्द, कोष्ठक और अक्षर रखे जायेंगे ;

(च) खण्ड (६९) के, उप-खण्ड (च) में, "अनुच्छेद ३७१ " शब्द और अंकों के पश्चात्, "और अनुच्छेद ३७१ञ " शब्द, अंक और अक्षर निविष्ट किये जायेंगे ;

(छ) खण्ड (१०२) में, निम्न स्पष्टीकरण, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----

"स्पष्टीकरण.-----संदेहों के निराकरण के लिये, यह स्पष्ट किया जाता हैं कि, "सेवाअों " अभिव्यक्ति में, सुरक्षा में किये गये संव्यवहारा की सुविधा करना या प्रबंध करना सम्मिलित हैं ;"। ३. मूल अधिनियम की धारा ७ में, निम्न १ जुलाई, २०१७ से प्रभावी होंगे,----

(क) उप-धारा (१) के,----

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ७ में संशोधन।

(एक) खण्ड (ख) में, "या कारोबार के प्रोत्साहन" शब्दों के पश्चात्, "और" शब्द, निविष्ट किया जायेगा और हमेशा निविष्ट किया गया समझा जायेगा ;

(दो) खण्ड (ग) में, "प्रतिफल" शब्दों के पश्चात्, "और" शब्द, अपमर्ाजित किया जायेगा और हमेशा अपमर्ाजित किया गया समझा जायेगा ;

(तीन) खण्ड (घ) अपमर्ाजित किया जायेगा और हमेशा अपमर्ाजित किया गया समझा जायेगा ;

महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १६, २०१८/कर्ातिक २५, शके १९४० ३

(ख) उप-धारा (१) के पश्चात्, निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी और हमेशा निविष्ट की गई समझी जायेगी, अर्थात् :----

"(१क) जहाँ, उप-धारा (१) के उपबंधों के अनुसरण में, कतिपय गतिविधियों या संव्यवहारों में आपर्ूति समाविष्ट हैं, वहाँ, वे अनुसूची दो में यथा निर्देशित या तो मालों की आपर्ूति या सेवाअों की आपर्ूति के रूप में मानी जायेगी।";

(ग) उप-धारा (३) में "उप-धाराएँ (१) और (२)" शब्दों, कोष्ठकों तथा अंकों के स्थान में, "उप- धाराएँ (१), (१क) और (२)" शब्द, कोष्ठक तथा अंक निविष्ट किये जायेंगे।

४. मूल अधिनियम की धारा ९ में, उप-धारा (४) के स्थान में, निम्न उप-धारा, रखी जायेंगी, अर्थात् :---- सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ९ में संशोधन। "(४) सरकार, परिषद की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों का वर्ग विर्िनदिष्ट करेगा, जो, अरजिस्ट्रीकृत आपर्ूतिदाता से प्राप्त मालों या सेवाअों या दोनों के विर्िनदिष्ट प्रवर्गों के संबंध में, मालों या सेवाअों या दोनों की ऐसी आपर्ूति के प्राप्तिकर्ता के रूप में प्रतिवर्ती प्रभार के आधार पर कर का भुगतान करेगा, और इस अधिनियम के सभी उपबंध ऐसे प्राप्तिकर्ता को यदि वह मालों या सेवाअों या दोनों की ऐसी आपर्ूति के संबंध में कर का भुगतान करने के लिये दायी हैं, को लागू होंगे।"।

५. मूल अधिनियम की धारा १० की,----

(क) उप-धारा (१) में,----

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १० में संशोधन। (एक) "उसके द्वारा भुगतानयोग्य कर के बदले में, ऐसे दर पर परिगणित रकम" शब्दों के स्थान में, "धारा ९ की उप-धारा (१) के अधीन, उसके द्वारा भुगतानयोग्य कर के बदले में, ऐसे दर पर परिगणित कर की रकम" शब्द, कोष्टक और अंक रखे जायेंगे ;

(दो) परंतुक में, "एक करोड़ रुपये " शब्दों के स्थान में, "एक करोड़ और पचास लाख रुपये " शब्द रखे जायेंगे ;

(तीन) परंतुक के पश्चात्, निम्न परंतुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :---

"परंतु यह और भी कि, व्यक्ति, जिसने खण्ड (क) या खण्ड (ख) या खण्ड (ग) के अधीन कर का भुगतान करना चुना हैं, पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में राज्य के आवर्तन के दस प्रतिशत या पाँच लाख रुपये, जो भी अधिक हो, से अनधिक मूल्य की सेवाअों (अनुसूची दो के परिच्छेद ६ के खण्ड (ख) में निर्देशित उनके अलावा) की आपर्ूति कर सकेगा।" ;

(ख) उप-धारा (२) में, खण्ड (क) के स्थान में, निम्न खण्ड, रखा जायेगा, अर्थात् :----

"(क) उप-धारा (१) में यथा-उपबंधित के सिवाय, वह सेवाअों की आपर्ूति से जुड़ा नहीं होगा ;"।

६. मूल अधिनियम की धारा १२ की, उप-धारा (२) के, खण्ड (क) में, "की उप-धारा (१)" शब्द, कोष्टक तथा अंक अपमर्ाजित किये जायेंगे।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १२ में संशोधन। ७. मूल अधिनियम की धारा १३ की, उप-धारा (२) में, "की उप-धारा (२)" शब्द, कोष्टक औऱ अंक, दोनों स्थानों पर, जहाँ कहीं वे आए हों, अपमर्ाजित किये जायेंगे।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १३ में संशोधन। ८. मूल अधिनियम की धारा १६ की, उप-धारा (२) के,----

(क) खण्ड (ख) में, स्पष्टीकरण के स्थान में, निम्न स्पष्टीकरण, जोड़ा जायेगा, अर्थात् :---

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १६ में संशोधन। "स्पष्टीकरण.---- इस खण्ड के प्रयोजनों के लिये, यह समझा जायेगा कि, रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति ने, माल या, यथास्थिति, सेवाएँ----

४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १६, २०१८/कर्ातिक २५, शके १९४०

(एक) जहाँ माल, एजंट या अन्यथा के रूप में, ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के निदेशों पर, या तो मालों के हक्कों के दस्तावेजों के अंतरण या अन्यथा के मार्ग से, मालों को ले जाने से पूर्व, आपर्ूतिदाता द्वारा प्राप्तिकर्ता या किन्हीं अन्य व्यक्ति को सुपुर्द किया गया हैं ;

(दो) जहाँ ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के निदेशों पर और के कारण किसी व्यक्ति को आपर्ूतिदाता द्वारा सेवाएँ मुहैय्या की गई हैं से प्राप्त की हैं।" ;

(ख) खण्ड (ग) में, "धारा ४१" शब्दों और अंकों के स्थान में, "धारा ४१ या धारा ४३क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जायेंगे।

९. मूल अधिनियम की धारा १७ की,-----

(क) उप-धारा (३) में, निम्न स्पष्टीकरण निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १७ में संशोधन।

"स्पष्टीकरण.----इस उप-धारा के प्रयोजनों के लिये, "छूट-प्राप्त आपर्ूति का मूल्य" अभिव्यक्ति में, उक्त अनुसूची के परिच्छेद ५ में विर्िनदिष्ट उन को छोड़कर, अनुसूची तीन में विर्िनदिष्ट गतिविधियों या संव्यवहारों का मूल्य सम्मिलित नहीं होगा।";

(ख) उप-धारा (५) के, खण्ड (क) तथा (ख) के स्थान में, निम्न खण्ड, निविष्ट किये जायेंगे, अर्थात् :----

"(क) व्यक्तियों के परिवहन के लिये मोटर वाहन जिन्हें तेरह व्यक्तियों (चालक समेत) से अनधिक की अनुमोदित बैठक क्षमता हो, जब वह निम्न करयोग्य आपर्ूतियाँ करने के लिये उपयोग में लाये जाते हैं, को छोड़कर, अर्थात् :----

(क) ऐसे मोटर वाहनों की अधिकतर आपर्ूति ; या

(ख) यात्रियों का परिवहन ; या

(ग) ऐसे मोटर वाहनों को चलाने के लिए प्रशिक्षण देना ;

(कक) जलयान या वायूयान, जब वह निम्न के लिये, उपयोग में लाये जाते हैं,

को छोडकर,

(एक) निम्न करयोग्य आपर्ूतियाँ करने के लिये अर्थात् :----

(क) ऐसे जलयानों या वायुयानों की अधिकतर आपर्ूति ; या

(ख) यात्रियों के परिवहन के लिये ; या

(ग) ऐसे जलयानों को चलाने के लिए प्रशिक्षण देने ; या

(घ) ऐसे वायुयानों को उड़ाने के लिय प्रशिक्षण देनेे ;

(दोन) मालोंें के परिवहन के लिये ;

(कख) खण्ड (क) या खण्ड (कक) में निर्देशित मोटर वाहनों, जलयानों या वायुयानों से जब तक वह संबंधित हैं, सामान्य बिमा की सेवाएँ, सफाई-धुलाई, मरम्मत, और रखरखाव :

परंतु, ऐसी सेवाअों के संबंध में इनपुट कर सा,---

(एक) जहाँ, खण्ड (क) या खण्ड (क क) में निर्देशित मोटर वाहन, जलयान या वायुयान, का उसमें विर्िनदिष्ट प्रयोजनों के लिये उपयोग किया जाता हैं ;

(दो) जहाँ---

(एक) ऐसे मोटर वाहन, जलयान या वायुयान के विनिर्माण

में ; या

(दो) उसके द्वारा ऐसे मोटर वाहनों, जलयानोंे या वायुयानों के संबंध में साधारण बीमा के आपर्ूति से जुडे करयोग्य व्यक्ति द्वारा प्राप्त किये हो,

को उपलब्ध होगी ;

महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १६, २०१८/कर्ातिक २५, शके १९४० ५

(ख) मालों या सेवाअों या दोनों की निम्न आपर्ूति--

(एक) खाद्य तथा पेय पदार्थ, बाहरी खानपान, सौंदर्य उपचार, स्वास्थ्य सेवाएँ, सौंदर्य प्रसाधन और प्लास्टिक शल्यकर्म, खण्ड (क) या खण्ड (कक) में निर्देशित मोटर वाहन, जलयान या वायुयान को, जब वह उसमें विर्िनदिष्ट प्रयोजनों के लिये उपयोग में लाए जाते हैं, को छोडकर पट्टे पर देना, भाडे पर देना या, किराए पर ले जीवन बीमा तथा स्वास्थ्य बीमा को उपलब्ध होगा :

परंतु, ऐसे मालों या सेवाअों या दोनों के संबंध में इनपुट कर साख, जहाँ, ऐसे मालों या सेवाअों की आंतरविभाग आपर्ूति रजिस्ट्रीकृत व्यक्ित द्वारा मालों या सेवाअों या दोनों के समान प्रवर्गों के बा विभाग करयोग्य आपर्ूति करने के लिये या करयोग्य संम्मिश्र या मिश्र आपर्ूति के घटक के रुप में उपयोग किया जाता हैं;

(दो) क्लब, स्वास्थ्य तथा स्वस्थता केंद्रों की सदस्यता ; और

(तीन) छुट्टी या स्वगृह यात्रा सहुलियत के रुप में ऐसे अवकाश पर गये कर्मचारियों के लिये यात्रा लाभ विस्तारित किये गये हैं :

परंतु, ऐसे मालों या सेवाअों या दोनों के संबंध में इनपुट कर साख, जहाँ, नियोक्ता को उसके कर्मचारी को तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन इसे मुहैय्या करना अनिवार्य हो, वहाँ उपलब्ध होंगे। "।

१०. मूल अधिनियम की धारा २० के स्पष्टीकरण के, खण्ड (ग) में, " प्रविष्टि ८४ के अधीन " शब्दों और अंकों के स्थान में, " प्रविष्टियँा ८४ तथा ९२क " शब्द अंक और अक्षर रखे जायेंगे।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा २० में संशोधन। ११. मूल अधिनियम की धारा २२ की,----

(क) उप-धारा (१) में, परंतुक के पश्चात्, निम्न परंतुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :--

सन् २०१० का महा. ४३ की धारा २२ में संशोधन। " परंतु, यह और भी कि, सरकार, राज्य विशेष प्रवर्ग के अनुरोध और परिषद की सिफारिशों पर, प्रथम परंतुक में निर्देशित कुल आवर्तन, दस लाख रुपये से बीस लाख रुपये से अनधिक ऐसी रकम तक, और इस प्रकार अधिसूचित किये जाये ऐसी शर्तों ओर मर्यादाअों के अध्यधीन बढ़ा सकेगी। " ;

(ख) स्पष्टीकरण के खण्ड (तीन) में " गठन ", शब्द के पश्चात्, " जम्मू और कश्मीर के राज्य और अरुणाचल प्रदेश, असम, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम और उत्तराखंड के राज्यों को छोड़कर" शब्द निविष्ट किये जायेंगे।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा २४ में संशोधन। १२. मूल अधिनियम की धारा २४ के, खण्ड (दस) में, " वाणिज्यिक प्रचालक " शब्दों के पश्चात्, " जिसे धारा ५२ के अधीन स्थान पर कर संकलन करना आवश्यक होगा " शब्द और अंक निविष्ट किये जायेंगे।

१३. मूल अधिनियम की धारा २५ की,----

(क) उप-धारा (१) में, परंतुक के पश्चात् और स्पष्टीकरण से पूर्व, निम्न परंतुक, निविष्ट किया

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा २५ में संशोधन। जायेगा, अर्थात् :---

सन् २००५ का २८।

" परंतु, यह और भी कि, व्यक्ित जिसका विशेष र्आथिक झोन में, विशेष र्आथिक झोन अधिनियम, २००५ में यथा परिभाषित एक युनिट हैं या एक विशेष र्आथिक झोन विकासक होते हुये, उसे, उसी राज्य में विशेष र्आथिक झोन के बाहर स्थित उसके कारोबार के स्थान से एक पृथक रुप में एक अलग रजिस्ट्रीकरण के लिये आवेदन करना होगा। "; (ख) उप-धारा (२) में, परंतुक के स्थान में, निम्न परंतुक, रखा जायेगा, अर्थात् :--

" परंतु, व्यक्ित जिसके राज्य में कारोबार के कई स्थान है, वह, विहित किये जाये ऐसी शर्तों के अध्यधीन, ऐसे प्रत्येक कारोबार के स्थान के लिये अलग से रजिस्ट्रीकरण मंजूर किया जा सकेगा। "।

भाग सात----२९---२६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १६, २०१८/कर्ातिक २५, शके १९४० १४. मूल अधिनियम की धारा २९ में,----

(क) पाश्र्व टिप्पणी में, " रद्दकरण " शब्द के पश्चात्, " या निलंबन " शब्द निविष्ट किये जायेंगे ;

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा २९ में संशोधन।

(ख) उप-धारा (१) के, खण्ड (ग) के पश्चात्, निम्न परंतुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----

" परंतु रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा दायर किये गये रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण से संबंधित कार्यवाहियों के विलंबन के दौरान, रजिस्ट्रीकरण, विहित किये जाये ऐसी अवधि के लिये और ऐसी रीत्या में निलंबित किया जायेगा। ";

(ग) उप-धारा (२) के परंतुक के पश्चात्, निम्न परंतुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :-----

" परंतु यह और कि, रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण से संबंधी प्रक्रिया की प्रलंबिता के दौरान, उचित अधिकारी जैसा कि विहित किया जाए ऐसी अवधि के लिये और ऐसी रीति में रजिस्ट्रीकरण निलंबित कर सकेगा। "।

१५. मूल अधिनियम की धारा ३४ की,----

(क) उप-धारा (१) में,

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ३४ में संशोधन।

(एक) " जहाँ एक कर बीजक हैं " शब्दों के स्थान में, " जहाँ एक या अधिक कर बीजक है " शब्द रखे जायेंगे ;

(दो) " साखपत्र " शब्दों के स्थान में, " वित्तीय वर्ष में की गयी आपर्ूति के लिये एक या अधिक साखपत्रों " शब्द रखे जायेंगे ;

(ख) उप-धारा (३) में,---

(एक) " जहाँ एक कर बीजक हैं " शब्दों के स्थान में, " जहाँ एक या अधिक कर बीजक है " शब्द रखे जायेंगे ;

(दो) " साखपत्र " शब्दों के स्थान में, " वित्तीय वर्ष में की गयी आपर्ूति के लिये एक या अधिक साखपत्रों " शब्द रखे जायेंगे ।

१६. मूल अधिनियम की धारा ३५ की, उप-धारा (५) में, निम्न परंतुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :--

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ३५ में संशोधन।

" परंतु, इस उप-धारा में अन्र्तविष्ट कोई भी बात केन्द्र सरकार, राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण के किसी विभाग को लागू नहीं होगी जो लेखा किताबें, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन स्थानीय प्राधिकरणों के लेखाअों की लेखापरीक्षा के लिये नियुक्त किये गये भारत का नियंत्रक और महालेखा परीक्षक या लेखापरीक्षक द्वारा लेखापरीक्षा के अध्यधीन है। "।

१७. मूल अधिनियम की धारा ३९ की,----

(क) उप-धारा (१) में,---

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ३९ में संशोधन।

(एक) " जैसा कि विहित किया जाए, ऐसे प्ररुप और रीति में " शब्दों के स्थान में, " जैसा कि विहित किया जाए ऐसे प्ररुप, रीति और ऐसे समय के भीतर" शब्द रखे जायेंगे ;

(दो) " ऐसे कलैंडर महीने या उसके भाग के उत्तरवर्ती महीने के बीसवें दिन को या के पूर्व " शब्द अपमर्ाजित किये जायेंगे ;

(तीन) निम्न परंतुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :--

" परंतु, सरकार, परिषद की सिफारिशों पर रजिस्ट्रीकृत व्यक्ितयों के कतिपय वर्गों को अधिसूचित कर सकेगी जो उसमें विर्िनदिष्ट की जा सके ऐसी शर्तों और सुरक्षाअों के अध्यधीन, प्रत्येक तिमाही या उसके भाग के लिये विवरण प्रस्तुत करेगा। ";

महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १६, २०१८/कर्ातिक २५, शके १९४० ७

(ख) उप-धारा (७) में, निम्न परंतुक, र्िनविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :---

" परंतु, सरकार, परिषद की सिफारिशों पर रजिस्ट्रीकृत व्यक्ितयों के कतिपय वर्गों को अधिसूचित कर सकेगी जो उसमें विर्िनदिष्ट की जा सके ऐसी शर्तों और सुरक्षाअों के अध्यधीन जो उसे ऐसा विवरण प्रस्तुत करने की आवश्यकता है उस अंतिम दिनांक को या के पूर्व विवरण के अनुसार देय कर या उसका भाग सरकार को अदा करेगा। ";

(ग) उप-धारा (९) में,---

(एक) " महीने या तिमाही के लिये प्रस्तुत किये जानेवाले विवरण में जिसके दौरान ऐसा लोप या गलत विशिष्िटयों पर ध्यान दिया जाता है " शब्दों के स्थान में, " जैसा कि विहित किया जाए ऐसे प्ररुप और रीति में " शब्द रखे जायेंगे ;

(दो) परंतुक में " वित्तीय वर्ष की समाप्ति " शब्दों के स्थान में, " जिसके लिए ऐसे विवरण संबंधित है के वित्तीय वर्ष की समाप्ति " शब्द रखे जायेंगे ।

१८. मूल अधिनियम की धारा ४३ के पश्यात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ४३ क का निवेशन । " ४३ क. (१) धारा १६ की उप-धारा (२), धारा ३७ या धारा ३८ में अन्र्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ित, धारा ३९ की उप-धारा (१) के अधीन प्रस्तुत किये गये विवरणों में आपर्ूतिकताआंे द्वारा प्रस्तुत आपर्ूति का विवरण सत्यपित, विधिमान्य, उपांतरित या अपमर्ाजित करेगी।

विवरण प्रस्तुत करने और इनपुट कर साख का लाभ लेने के लिये प्रक्रिया। (२) धारा ४१, धारा ४२ या धारा ४३ में अन्र्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, प्रापक और उसके सत्यापन द्वारा इनपुट कर साख का लाभ लेने के लिये प्रक्रिया जैसा कि विहित की जाए, ऐसी होगी।

(३) प्रापक द्वारा इनपुट कर साख प्राप्त करने के प्रयोजनों के लिए सामान्य पोर्टल पर आपर्ूतिकर्ता द्वारा आपर्ूति का विवरण प्रस्तुत करने की प्रक्रिया, जैसा कि विहित किया जाए, ऐसी होगी।

(४) उप-धारा (३) के अधीन प्रस्तुत न की गई आपर्ूति के संबंध में इनपुट कर साख प्राप्त करने की प्रक्रिया जैसा कि विहित किया जाए, ऐसी होगी और ऐसी प्रक्रिया मे इनपुट कर साख की अधिकतम रकम इस प्रकार प्राप्त की जा सकेगी जो उक्त उप-धारा के अधीन आपर्ूतिकर्ताअों द्वारा प्रस्तुत विवरण के आधार पर उपलब्ध इनपुट कर साख के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। (५) उप-धारा (३) के अधीन आपर्ूतिकर्ता द्वारा जिसके लिए विवरण प्रस्तुत किया गया है, आपर्ूति के संबंध में विर्िनदिष्ट कर की रकम, अधिनियम के उपबंधों के अधीन उसके द्वारा देय कर समझी जायेगी।

(६) उप-धारा (३) या उप-धारा (४) के अधीन जिसके लिए विवरण प्रस्तुत किया गया है, परन्तु उसकी विवरणी प्रस्तुत नहीं की गई है, आपर्ूति के संबंध में आपर्ूतिकर्ता और आपर्ूति के प्रापक, कर अदा करने या, यथास्थिति, प्राप्त इनपुट कर साख अदा करने के लिए संयुक्त रुप से और अलग-अलग दायी होंगे।

(७) उप-धारा (६) के प्रयोेजनों के लिए वसूली, जैसा कि विहित किया जाए, ऐसी रीत्या में की जायेगी और ऐसी प्रक्रिया, कर या इनपूट कर साख की रकम की गैर वसुली के लिये उपबंध कर सकेगी जो गलत तरीके से एक हजार रुपयों सें अधिक न हो ।

(८) बाहरी आपर्ूति के संबंध में कर राशि की प्रक्रिया, सुरक्षा और सीमा जिसका विवरण किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ित द्वारा उप-धारा (३) के अधीन प्रस्तुत किया जा सकता है,----

(एक) रजिस्ट्रीकरण लेने के छह महीने के भीतर ;

(दो) जो, कर के भुगतान में चूक करता है और ऐसी चूक राशि की अदायगी के देय दिनांक से दो महीने से अधिक के लिये ऐसी चूक जारी रखता है, जैसा कि विहित किया जा सकेगा ऐसा होगा । "।

भाग सात----२९---२अ८ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १६, २०१८/कर्ातिक २५, शके १९४० १९. मूल अधिनियम की धारा ४८ की, उप-धारा (२) मे, "धारा ४५" शब्द और अंको के पश्चात्, "और ऐसे अन्य कृत्यों के अनुपालन के लिए" शब्द निविष्ट किये जायेंगे।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ४८ में संशोधन।

२०. मूल अधिनियम की धारा ४९ की,-----

(क) उप-धारा (२) में, " धारा ४१ " शब्द और अंको के पश्चात्, " धारा ४१ या धारा ४३ क " सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ४९ में संशोधन।

शब्द, अंक और अक्षर रखे जायेंगे ;

(ख) उप-धारा (५) के,----

(एक) खण्ड (ग) में, निम्न परन्तुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----

" परन्तु, राज्य कर के कारण इनपुट कर साख का उपयोग केवल एकीकृत कर के भुगतान के लिये किया जाएगा, जहाँ केंद्रीय कर के कारण इनपुट कर साख का शेष, एकीकृत कर के भुगतान के लिए उपलब्ध नहीं है ;";

(दो) खण्ड (घ) में, निम्न परन्तुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----

" परन्तु, संघराज्य क्षेत्र कर के कारण इनपुट कर साख का उपयोग केवल एकीकृत कर के भुगतान के लिए किया जायेगा, जहाँ केन्द्रीय कर के कारण इनपुट कर साख का शेष एकीकृत कर के भुगतान के लिए उपलब्ध नहीं है ;";

२१. मूल अधिनियम की धारा ४९ के पश्चात, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात :---

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ४९क और ४९ख का निवेशन।

" ४९क. धारा ४९ में अन्र्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, राज्य कर के कारण इनपुट कर साख का उपयोग एकीकृत कर या, यथास्थिति, राज्य कर के भुगतान के लिये किया जायेगा, केवल एकीकृत कर के कारण उपलब्ध इनपुट कर साख के पश्चात, ऐसे भुगतान के लिए पूरी तरह से उपयोग किया गया है। इनपुट कर क्रेडिट के उपयोग आदेश।

४९ख. इस अध्याय में अन्र्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी और धारा ४९ की उप-धारा (५) के खण्ड (ड.) और खण्ड (च) के उपबंधों के अध्यधीन, सरकार, परिषद की सिफारिशों पर, किसी ऐसे कर के भुगतान से एकीकृत कर, केन्द्रीय कर या, यथास्थिति, संघराज्य क्षेत्र कर के कारण इनपुट कर साख के उपयोग के आदेश और रीति विहित कर सकेगी। " ।

२२. मूल अधिनियम की धारा ५२ की, उप-धारा (९) में, " धारा ३७ " शब्द और अंकों के स्थान में, " धारा ३७ " या " धारा ३९ " शब्द और अंक रखे जायेंगे।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ५२ में संशोधन।

२३. मूल अधिनियम की धारा ५४ की,-----

(क) उप-धारा (८) के, खण्ड (क) में, " शून्य दर आपर्ूति " शब्दों के स्थान में, " निर्यात करना " सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ५४ में संशोधन।

और " निर्यात " शब्द क्रमश: रखे जायेंगे ;

(ख) स्पष्टीकरण के, खण्ड (२) के,-----

(एक) उप-खण्ड (ग) के, मद्द (एक) में, " विदेशी मुद्रा " शब्दों के पश्चात्, " या जहाँ भारतीय रिजर्व बँक द्वारा अनुमत है, भारतीय रुपयों में " शब्द निविष्ट किये जायेंगे ;

(दो) उप-खण्ड (ड.) के स्थान में, निम्न उप-खण्ड रखा जायेगा, अर्थात्--

" (ड) उप-धारा (३) के प्रथम परन्तुक के, खण्ड (दो) के अधीन, उपयोग न किये गये इनपुट कर साख के प्रतिदाय के मामले में, जिस अवधि में प्रतिदाय के लिए ऐसा दावा उद्भूत हो सके उस अवधि में, धारा ३९ के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने के लिये देय दिनांक ; "। २४. मूल अधिनियम की धारा ७९ की, उप-धारा (४) के पश्चात्, निम्न स्पष्टीकरण निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----

" स्पष्टीकरण.----इस धारा के प्रयोजनों के लिये, व्यक्ित जिसमें धारा २५ की, उप-धारा (४) या, सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ७९ में संशोधन।

यथास्थिति, उप-धारा (५) में यथा र्िनदिष्ट " सुस्पष्ट व्यक्तियों " शब्द सम्मिलित होंगे।"।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १६, २०१८/कर्ातिक २५, शके १९४० ९ २५. मूल अधिनियम की धारा १०७ की, उप-धारा (६) के, खण्ड (ख) में, " उक्त आदेश से उद्भूत " शब्दों के पश्चात् , " अधिकतम पच्चीस करोड़ रुपयों के अध्यधीन " शब्द निविष्ट किये जायेंगे।

सन् २०१७ का महा. ४० की धारा १०७ में संशोधन। २६. मूल अधिनियम की धारा ११२ की, उप-धारा (८) के खण्ड (ख) में, " उक्त आदेश से उद्भूत " शब्दों के पश्चात् , " अधिकतम पचास करोड़ के अध्यधीन " शब्द निविष्ट किये जायेंगे।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ११२ में संशोधन। २७. मूल अधिनियम की धारा १२९ की, उप-धारा (६) में, " सात दिनों " शब्दों के स्थान मेंें, " चौदह दिनों " शब्द रखे जायेंगे ;

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १२९ में संशोधन। २८. मूल अधिनियम की धारा १४३ की, उप-धारा (१), के खण्ड (ख) में, परन्तुक के पश्चात्, निम्न परन्तुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :---

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १४३ में संशोधन। " परन्तु आगे यह और भी कि, एक और तीन वर्षों की अवधि के लिये पर्याप्त कारण दर्शाये जा रहे है, आयुक्त द्वारा क्रमश: एक वर्ष और दो वर्षां से अधिक न हो अधिकतर अवधि विस्तारित की जायेगी। "। २९. मूल अधिनियम की संलग्न अनुसूची-एक के परिच्छेद ४ में, " कर योग्य व्यक्ित " शब्दों के स्थान में, " व्यक्ित " शब्द रखा जायेगा।

सन् २०१७ का महा. ४३ की अनुसूची-एक मेंें संशोधन। ३०. मूल अधिनियम की संलग्न अनुसूची-दो के शीर्षक में, " क्रियाकलाप " शब्दों के पश्चात्, " या संव्यवहार " शब्द निविष्ट किया जायेगा और १ जुलाई २०१७ से हमेशा निविष्ट किया गया समझा जायेगा।

सन् २०१७ का महा. ४३ की अनुसूची-दो मेंें संशोधन। ३१. मूल अधिनियम की संलग्न अनुसूची-तीन के,-----

(एक) परिच्छेद ६ के पश्चात्, निम्न परिच्छेद, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----

सन् २०१७ का महा. ४३ की अनुसूची-तीन मेंें संशोधन। " ७. भारत में प्रवेश करनेवाले ऐसे मालों के बिना, भारत के बाहर किसी अन्य स्थान से भारत के बाहर के किसी स्थान से मालों की आपर्ूति।

८. (क) देशी उपभोग के लिये निकासी के पूर्व किसी व्यक्ित को भाण्डागार मालों की आपर्ूति ;

(ख) मालों की शीर्षक के दस्ताऐंअों का पृष्ठांकन द्वारा किसी अन्य व्यक्ित को प्रापक द्वारा मालों की आपर्ूति बाहर के स्थित मूल के पतन से भेजी गई है, परन्तु देशी उपभोग के लिये निकासी के पूर्व हो। ";

(दो) विद्यमान स्पष्टीकरण के स्पष्टीकरण १.----- के रुप में पुन: क्रमांकित किया जायेगा और इस प्रकार पुन: क्रमांकित किये गये स्पष्टीकरण, के पश्चात्. निम्न स्पष्टीकरण, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :---

स्पष्टीकरण २.----- परिच्छेद ८ के प्रयोजनों के लिये, " भाण्डागार मालों " अभिव्य्ािक्त का अर्थ, सीमा-शुल्क अधिनियम, १९६२ में समनुदेशित अर्थान्तर्गत होगा ।" ।१० महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १६, २०१८/कर्ातिक २५, शके १९४०

वक्तव्य

महाराष्ट्र सरकार द्वारा माल या सेवाअों या दोनों की राज्यान्तरिक आपर्ूति कर के उद्ग्रहण और संग्रहण के लिए उपबंध करने की दृष्टि से, महाराष्ट्र माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ (सन् २०१७ का महा. अधिनियम क्रमांक ४३) अधिनियमित किया गया है।

२. इस अधिनियमन में नवीन मालों और सेवा कर पद्धति के लिये विद्यमान करदाताअों के सुचारु संव्यवहार के लिये कतिपय उपबंध उपबंधित किये गये है। तथापि, नवीन कर पद्धति में कतिपय कठिनाईयों का सामना करना पडा था। करदाताअों, विशेष रुप से छोटे और मध्यम उद्यमों को होनेवाली मुख्य असुविधा में से एक माल और सेवा कर विधि के अधीन कर के प्रतिदाय और अदायगी करने की प्रक्रिया का एक कारण था । इस संबंध में न्यूनतम कागजी काम के साथ छोटे करदाताअों के लिये कर का प्रतिदाय और अदायगी त्रैमासिक करने की परिकल्पना नई रिटर्न फायलिंग प्रणाली में प्रस्तावित की गई है। नई रिटर्न फायलिंग प्रणाली के कार्यान्वयन के उद्देश्य से और उपयर्ुक्त कठिनाईयों को दूर करने के लिये भी, महाराष्ट्र माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ में संशोधन करने के लिये प्रस्तावित किया गया है।

३. महाराष्ट्र माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, २०१८ अन्य बातों के साथ साथ, निम्न उपबंध करने के लिये प्रस्तावित किया गया है, अर्थात् :---

(एक) अधिनियम की धारा ७ में संशोधन करना है ताकि आपर्ूति के दायरे को स्पष्ट किया जा सके ;

(दो) अरजिस्ट्रीकृत आपर्ूतिकर्ताअों से मालो या सेवाअों या दोनों के कतिपय विर्िनदिष्ट प्रवर्गाे के आपर्ूति की प्राप्ति के संबंध में प्रतिर्वति प्रभार के आधार पर, कर के भुगतान के लिए, रजिस्ट्रीकृत व्यक्ितयों के अधिसूचित वर्गों को राज्य सरकार द्वारा सशक्त करने के लिये अधिनियम की धारा ९ में संशोधन करना है ;

(तीन) अधिनियम की धारा १० में संशोधन करना है ताकि, एक करोड़ रुपयों से एक करोड़ पचास लाख रुपयों तक उद्ग्रहण सीमा को बढाया जा सके ;

(चार) अधिनियम की धारा १७ में संशोधन करना है ताकि इनपुट कर साख का दायरा विर्िनदिष्ट किया जा सके ;

(पाँच) दस लाख रुपयों से बीस लाख रुपयों तक राज्यों के विशेष प्रवर्गो में रजिस्ट्रीकरण के लिये छूट सीमा बढ़ाने के लिये अधिनियम की धारा २२ में संशोधन करने ;

(छह) अधिनियम की धारा २५ में संशोधन करना है, ताकि करदाता को उसी राज्य के भीतर स्थित कारोबार के कई स्थानों के लिये एक से अधिक रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने और विशेष र्आथिक झोन यूनिट या विकासक के लिये अलग-अलग रजिस्ट्रीकरण के लिये उपबंध करने के लिए सुविधा मिल सके ;

(सात) अधिनियम की धारा २९ में संशोधन करना है, ताकि, रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण की प्रक्रिया के तहत् है तो रजिस्ट्रीकरण के अस्थायी निलंबन के लिये उपबंध निविष्ट किये जा सके।

(आठ) नई धारा ४३क निविष्ट करना है ताकि, विवरण फाईल करने की नई प्रणाली और इनपूट कर साख प्राप्त करने के लिये उपबंध किये जा सके।

(नौ) अपील से संबंधित अधिनियम की धारा १०७ की उप-धारा (६) में संशोधन करना है, ताकि यह उपबंध किया जा सके कि, अपील दायर करने के लिये देय प्रति जमा रक्कम की राशि पच्चीस करोड़ रुपयों में होगी ;

महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर १६, २०१८/कर्ातिक २५, शके १९४० ११

(दस) अधिनियम की धारा १२९ में संशोधन करना है, ताकि सात दिनों से चौदह दिनों तक माल और परिवहन में रोकथाम या अभिग्रहण से संबंधित अवधि को बढाया जा सके।

४. राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान है, जिनके कारण उन्हें, उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिये महाराष्ट्र माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ (सन् २०१७ का महा. ४३) में अधिकतर संशोधन करने के लिये, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है।

चे. विद्यासागर राव, महाराष्ट्र के राज्यपाल।

मुंबई, दिनांकित १३ अक्तूबर २०१८। महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,----

यु. पी. एस. मदान, शासन के अप्पर मुख्य सचिव।

(यथार्थ अनुवाद),

हर्षवर्धन जाधव, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।

ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY I/C DIRECTOR SHRI MANOHAR SHANKAR GAIKWAD, PRINTED AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATIONS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 EDITOR : I/C DIRECTOR SHRI MANOHAR SHANKAR GAIKWAD.

Cite this issue. Maharashtra Gazette, Government of Maharashtra, 16 November 2018. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.maharashtra.2018-11-16.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-/. Archive identifier in.gazette.maharashtra.2018-11-16.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-.