RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ५, अंक ५ ] मंगळवार, मार्च १९, २०१९/फाल्गुन २८, शके १९४० [पृष्ठे ३, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक ६
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)
वित्त विभाग
मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरु चौक, मंत्रालय, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित १८ फरवरी २०१९ ।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. III OF 2019.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA CONTINGENCY FUND ACT.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक ३ सन् २०१९ ।
महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने संबंधी अध्यादेश ।
क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;
सन् १९५६ का ४६।
और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका हैं कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं, जिनके कारण उन्हें, इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिये, महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ हैं ।
(१)
भाग सात---६-१महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १९, २०१९/फाल्गुन २८, शके १९४० २ अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश, प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :----
१. (१) यह अध्यादेश महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि (संशोधन) अध्यादेश, २०१९ कहलाए ।
संक्षिप्त नाम और प्रारम्भण।
(२) यह तुरंत प्रवृत्त होगा ।
सन् १९५६ का ४६ । सन् १९५६ का ४६ की धारा २ में अस्थायी संशोधन।
२. इस अध्यादेश के प्रवर्तन की अवधि के दौरान, महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि अधिनियम प्रभावी होगा, मानों कि, उसकी धारा २ में " एक सौ पचास करोड़ रुपयों की राशि " शब्दों के स्थान पर, " दो हजार एक सौ पचास करोड़ रुपयों की राशि " शब्द रखे गये थे ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १९, २०१९/फाल्गुन २८, शके १९४० ३
वक्तव्य।
महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि अधिनियम (सन् १९५६ का ४६) के अधीन स्थापित और बनाए रखी गयी राज्य की आकस्मिकता निधि डेढ़ सौ करोड रुपये हैं।
२. सूखा प्रबंधमंडल, २०१६ की नियमावली में दिए गए संकेतकों के अनुसार खरीप २०१८ के दौरान सूखे के निर्धारण पर, राज्य सरकार ने, देखिए सरकारी संकल्प, दिनांकित ३१ अक्तूबर, २०१८ में राज्य के विभिन्न जिलों के १५१ तालुकाअों में गंभीर और मध्यम सूखा घोषित किया है । मंत्रिमंडल उप-समिति ने, ३ जनवरी, २०१९ को हुई उनकी बैठक में, और आपदा प्रबंधन के अधीन राज्य कार्यकारी समिति ने २२ जनवरी, २०१९ पर हुई उनकी बैठक में, फसल की हानि के कारण किसानों को राहत दिलाने के लिए तथा सूखा कम करने के अन्य विभिन्न उपायों के लिए उपबंध करना प्रस्तावित किया है ।
३. सूखा प्रभावित १५१ तालुकाअों में, प्रभावित किसानों को राहत या र्आथिक सहायता की अदायगी करने के लिए ७,१०४ करोड रुपयों के रकम की आवश्यकता है । राज्य सरकार ने, किसानों को राहत, जल आपर्ूति और पशु छावनीयों के खर्च को पूरा करने के लिए भारत सरकार को ७,९६३ करोड रुपयों का ज्ञापन प्रस्तुत किया है । नैर्सगिक आपदा के कारण फसल की होनेवाली हानि के लिए राहत पर होनेवाले व्यय को पूरा करने के लिए सन् २०१८-२०१९ के दौरान बनाए गए उपबंध अपर्याप्त है । इसलिए, सरकार ने, किसानों की फसल हानि और सूखा कम करने के अन्य विभिन्न उपायों के लिए राहत देने के लिए तत्काल २,००० करोड रुपयों की रकम मुहैया करने का निर्णय लिया है ।
इस व्यय का स्वरुप अनपेक्षित हैं, अत: आवश्यक बजट-संबंधी उपबंध उपलब्ध नहीं हैं । व्यय के यह मदें " नयी सेवाएँ " में गठित होंगी, और, इसलिये, इन्हे राज्य विधानमंडल के ध्यान में लाना आवश्यक हैं । राज्य विधानमंडल का आगामी सत्र २५ फरवरी २०१९ को प्रारंभ होना प्रस्तावित हैं । उपरोल्िलखित प्रयोजनों के लिये निधि उपलब्ध करने के लिये आवश्यक आदेश, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों द्वारा पारित अनुपूरक माँगो और विनियोग विधेयक राज्य विधानमंडल के अधिनियम के रुप में प्रकाशित हुआ हैं, के जरिए, राज्य विधानमंडल के ध्यान में इन " नयी सेवाअों " पर के व्यय को लाने के पश्चात् ही जारी किये जा सकेंगे । तथापि, इन मदों के लिये व्यय शीघ्रतम उपगत करना आवश्यक हैं, अत:, आकस्मिकता निधि से अग्रिम के प्रत्याहत के ज़रिए व्यय उपगत करने का विनिश्चय किया गया हैं ।
४. आकस्मिकता निधि की विद्यमान समग्र निधि केवल १५० करोड़ रुपयों की है । वर्तमान में उपयर्ुक्त उल्लिखित मद्दों और व्यय के अन्य अनपेक्षित और तात्कालिक मद्दों पर व्यय पूरा करने के लिए उपलब्ध शेष अपर्याप्त है । जिसे आकस्मिकता निधि में से पूरा करने की आवश्यकता होगी । इसलिए, आकस्मिकता निधि की विद्यमान समग्र निधि को २,००० करोड़ रुपयों से २,१५० करोड़ रुपयों तक अस्थायी रुप से बढाना इष्टकर समझा गया है ताकि उपरोक्त जैसा व्यय प्राप्त हो सकें।
५. राज्य विधानमंडल के दोनो सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि अधिनियम (सन् १९५६ का ४६) में अधिकतर संशोधन करने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है ।
मुंबई, दिनांकित १६ फरवरी २०१९ ।
चे. विद्यासागर राव, महाराष्ट्र के राज्यपाल।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से, यु. पी. एस. मदान, सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव।
(यथार्थ अनुवाद),
हर्षवर्धन जाधव, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
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