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Maharashtra Gazette · Government of Maharashtra

Part VII Ext. 9 (4-4-2019),वित्त विभाग, MAHARASHTRA ORDINANCE No. VI OF 2019, महाराष्ट्र राज्य में परिचालित कतिपय कर विधियों में संशोधन करने संबंधी अद्यादेश।

Published 04 April 2019

Type
Extra - Ordinary
Part
Part 7 (Hindi)
Division
CENTRAL SECTION
Identifier
in.gazette.maharashtra.2019-04-04.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-
Languages
English, Marathi

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महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, एप्रिल ४, २०१९/चैत्र १४, शके १९४१ १

RNI No. MAHBIL /2009/31730

महाराष्ट्र शासन राजपत्र

असाधारण भाग सात

वर्ष ५, अंक ७(२) ] गुरुवार, एप्रिल ४, २०१९/चैत्र १४, शके १९४१ [पृष्ठे ४, किंमत : रुपये ४७.००

असाधारण क्रमांक ९

प्राधिकृत प्रकाशन

अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).

वित्त विभाग मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरू चौक, मंत्रालय, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित ६ मार्च २०१९। MAHARASHTRA ORDINANCE No. VI OF 2019.

AN ORDINANCE

FURTHER TO AMEND CERTAIN TAX LAWS IN OPERATION IN THE STATE OF MAHARASHTRA.

महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक ६ सन् २०१९ ।

महाराष्ट्र राज्य में परिचालित कतिपय कर विधियों में संशोधन करने संबंधी अध्यादेश।

क्योंकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;

और क्योंकि, महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं, जिनके कारण उन्हें इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र राज्य में परिचालित कतिपय कर विधियों में संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक है ;

अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्ितयों का प्रयोग करते हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :---

अध्याय एक

प्रारंम्िभक

१. (१) यह अध्यादेश महाराष्ट्र कर विधि (संशोधन और विधिमान्यकरण) अध्यादेश, २०१९ कहलाए। संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भण।

(२) इस अध्यादेश में यथाअन्यथा उपबंधित के सिवाय, वह तुरंत प्रवृत्त होगा।

(१)

भाग सात ९-१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, एप्रिल ४, २०१९/चैत्र १४, शके १९४१

अध्याय दो

महाराष्ट्र राज्य के वृत्ति, व्यापार, आजीविका और नियोजन पर कर अधिनियम, १९७५ में संशोधन।

सन् १९७५ का महा. १६ की धारा ६ में संशोधन।

२. " महाराष्ट्र राज्य में वृत्ति, व्यापार, आजीविका और नियोजन पर कर अधिनियम, १९७५ की, धारा ६ की, उप-धारा (३) में, " एक हजार रुपए ", शब्दों के स्थान में, " ऐसा विवरण दाखिल करने के लिए विहित समय के अवसान के पश्चात्, तीस दिनों की अवधि के भीतर वह विवरण दाखिल करने के मामले में, दो सौ रुपए और अन्य किसी मामले में, एक हजार रुपए की राशि " शब्द रखे जायेंगे।

अध्याय तीन

महाराष्ट्र मूल्यर्वधित कर अधिनियम, २००२ में संशोधन ।

सन् २००५ का महा. ९। सन् २००५ का महा. ९ की धारा १० में संशोधन।

३. महाराष्ट्र मूल्यर्वधित कर अधिनियम, २००२ (जिसे इसमें आगे, " मूल्यर्वधित कर अधिनियम " कहा गया हैं) की धारा १० की, उप-धारा (२) में, निम्न परन्तुक, निविष्ट किया जायेगा और १ जुलाई २०१७ से निविष्ट किया गया समझा जायेगा, अर्थात् :----

" परंतु, महाराष्ट्र माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ के अधीन नियुक्त किये गये अधिकारी, इस सन् २०१७ का महा. ४३।

अधिनियम के उपबंधों के अधीन नियुक्त किए गए अधिकारी समझे जायेंगे।"।

४. मूल्यर्वधित कर अधिनियम की धारा २४, की उप-धारा (२) के पश्चात्, निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी अर्थात् :----

सन् २००५ का महा. ९ की धारा २४ में संशोधन।

" (२क) जहाँ कोई ब्यौहारी, विवरणी में मुजराई का दावा करता है परंतु, ऐसी मुजराई चाहे किसी कारणों के लिए, धारा २३ के अधीन निर्धारण के आदेश पारित होने के पूर्व पुष्टि नहीं होती है, तब वित्तीय वर्ष के समाप्ति से दो वर्ष की अवधि के भीतर किसी समय पर निर्धारण का उक्त आदेश तामिल किया है, वह,- (क) यदि, उसने उक्त आदेश के विरुद्ध अपील दाखिल नहीं की है, या

(ख) यदि वह उक्त आदेश के विरुद्ध अपील दाखिल करता है, और वह संपूर्ण अपील वापस लेता है तो,

आयुक्त को, आदेश के परिशोधन के लिए उस आधार पर कि उक्त मुजराई की पृष्टि की जा सके और उसके समान आवश्यक सबूत प्रस्तुत करने की स्थिति में है तो आयुक्त को आवेदन कर सकेगा और उसपर आयुक्त, जिसे वह ठिक समझे, ऐसी जाँच करेगा और आवेदक को सुनवाई का अवसर देने पश्चात्, यदि मुजराई के लिए दावे की पुष्िट की है, तो निर्धारण आदेश में सुधार करेगा :

परंतु, उपयर्ुक्त खण्ड (ख) द्वारा समाविष्ट आवेदक के मामले में इस उप-धारा के अधीन आवेदन दाखिल करता है तब, देय की रकम जो अपील के वापस लेने के पूर्व पहले रोकी गई थी, ऐसे आवेदन के निपटान करने तक वसूल नहीं की जायेगी।"।

५. मूल्यर्वधित कर अधिनियम की धारा २६, की उप-धारा (६ग) के पश्चात्, निम्न स्पष्टीकरण, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :--

सन् २००५ का महा. ९ की धारा २६ में संशोधन।

" स्पष्टीकरण.---- संदेह के निराकरण के लिए, एतद्द्वारा, यह स्पष्ट किया जाता है की, उप-धारा (६क), (६ख), और (६ग) के उपबंध, किसी अपील के लिए उन उप-धाराअों में र्िनदिष्ट किए गए, सभी ऐसे आदेशों के विरुद्ध, जिस आदेश की अवधि पर ध्यान दिए बिना, अपील के विरुद्ध जिसमें ऐसे आदेश के संबंध में प्रक्रिया प्रारम्भिक होने के दिनांक से संबंधित या ध्यान दिए बिना किए गए है, को लागू होंगे।"।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, एप्रिल ४, २०१९/चैत्र १४, शके १९४१ ३ ६. मूल्यर्वधित कर अधिनियम की अनुसूची ' क ' की प्रविष्टि २ के पश्चात्, निम्न प्रविष्टि, जोड़ी जायेगी, अर्थात् :---

" ३. भारत लिमिटेड गॅस प्राधिकरण द्वारा १ अप्रैल २०१७ से १५ सितम्बर

सन् २००५ का महा. ९ की अनुसूची क में संशोधन । २०१७ की अवधि के दौरान रत्नागिरी गॅस और पॉवर प्रायव्हेट लिमिटेड को

घरेलू नैर्सगिक गॅस की बिक्री।

१. क्रय ब्यौहारी ने, घरेलु नैर्सगिक गॅस का उपयोग भारतीय रेलवे की बिजली शून्य। "। का उत्पादन करने के, लिए किया है।

२. दावेदार ब्यौहारी ने, पश्चिम क्षेत्रिय विद्युत समिति से रत्नागिरी गॅस

और पॉवर प्रायवेट लिमिटेड द्वारा ऊर्जा लेखा विवरणी प्रस्तुत की है।

अध्याय चार

विधिमान्यता और व्यावृत्ति।

७ (१) किसी न्यायालय या अधिकरण के किसी न्यायनिर्णय, डिक्री या आदेश में अन्र्तविष्ट किसी बात सन् २०१९ का महा. ६ ।

विधिमान्यता और व्यावृत्ति। के होते हुए भी, किसी ब्यौहारी या व्यक्ित द्वारा प्रभावित विक्रय या क्रय के संबंध में कर का कोई निर्धारण अपील, पुनरीक्षण, उद्ग्रहण या संग्रहण, महाराष्ट्र कर विधि (संशोधन और विधिमान्यकरण) अधिनियम, २०१९ (जिसे इसमें आगे, इस धारा में, " संशोधन अधिनियम " के रूप में र्िनदिष्ट किया गया है) द्वारा यथा संशोधित, मूल्यर्वधित कर अधिनियम के उपबंधों के अधीन ऐसे निर्धारण, अपील, पुनरीक्षण, उद्ग्रहण या संग्रहण के संबंध में की गई कोई कार्यवाही या कृत कोई बात, उसी प्रकार विधिमान्य और प्रभावी समझी जायेगी, मानों कि ऐसा निर्धारण, अपील, पुनरीक्षण, उद्ग्रहण या संग्रहण या कार्यवाही या बातें किए जाने से तात्र्पयित मूल्यर्वधित कर अधिनियम के अधीन, सुसंगत दिनांक पर प्रचलित थी और तद्नुसार,---

(क) ऐसे किसी कर के निर्धारण, अपील, पुर्ननिर्धारण, उद्ग्रहण या संग्रहण के संबंध में राज्य सरकार द्वारा या राज्य सरकार के किसी अधिकारी या किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा किया गये समस्त कृत्य, कार्यवाहियाँ या बातें, सभी प्रयोजनों के लिए, विधि के अनुसार किया गया या की गई और सदैव किया गया और की गई समझी जाएगी ;

(ख) इस प्रकार अदा किये गये किसी कर के प्रतिसंदाय के लिए, किसी न्यायालय में या किसी अधिकरण, अधिकारी या अन्य प्राधिकारी के समक्ष, कोई वाद, अपील, आवेदन या अन्य कार्यवाहियाँ संस्थित या बनाये या जारी नहीं रखी जाएगी ;

(ग) कोई न्यायालय, अधिकरण, अधिकारी या अन्य प्राधिकारी, ऐसे किसी कर के प्रतिदाय के लिए कोई डिक्री या आदेश प्रर्वतित नही करेगा।

(२) संदेह निवारणार्थ, एतद्द्वारा, यह घोषित किया जाता है कि, उप-धारा (१) की कोई बात, किसी व्यक्ित को,---

(क) उप-धारा (१) में र्िनदिष्ट कर के किसी निर्धारण अपील, पुर्ननिर्धारण, उद्ग्रहण या संग्रहण के बारे में इस संशोधन अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित मूल्यर्वधित कर अधिनियम के उपबंधों के अनुसार प्रश्न करने से, या

(ख) संशोधन अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित मूल्यर्वधित कर अधिनियम के अधीन कर के जरिए उसके द्वारा देय राशि से अधिक, उसके द्वारा अदा किये गये किसी कर के प्रतिसंदाय का दावा करने से, रोकती हुई नहीं समझी जाएगी।४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, एप्रिल ४, २०१९/चैत्र १४, शके १९४१ वक्तव्य । कतिपय उपबंधों में स्पष्टता लाने और करदाताअों को कतिपय राहत देने के लिये राज्य सरकार ने महाराष्ट्र राज्य वृत्ति, व्यापार, आजीविका और नियोजन पर कर अधिनियम, १९७५ (सन् १९७५ का महा. १६) और महाराष्ट्र मूल्यर्वधित कर अधिनियम, २००२ (सन् २००५ का महा. ९) में यथोचित संशोधन करना इष्टकर समझा गया है।

२. प्रस्तावित किये गये संशोधनों को मोटे तौर पर निम्न रुप से स्पष्ट किया गया है :---

(१) महाराष्ट्र राज्य वृत्ति, व्यापार, आजीविका और नियोजन पर कर अधिनियम, १९७५ में, तीस दिनों तक विलंब से विवरणी दाखिल करने के मामले में दो सौ रुपये की विलंब फीस के लिये उपबंध करने हेतु संशोधित किया जा रहा हैं ;

(२) महाराष्ट्र मूल्यर्वधित कर अधिनियम, २००२ संशोधित किया जा रहा है ;

(क) उक्त अधिनियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने के लिये महाराष्ट्र माल तथा सेवा कर अधिनियम, २०१७ के अधीन अधिकारियों की नियुक्ति करने के लिये प्राधिकृत किया जा रहा है ;

(ख) निर्धारण आदेश में मुजराई के मामले में और मुजराई के दावे के संबंध में, ब्यौहारी सबूत जुटाने की स्थिति में, किसी निर्धारण आदेश में धारा २४ के अधीन परिशोधन के लिये किसी आवेदन को दाखिल करने की अनुमति देना ;

(ग) संदिग्धता दूर करना, यदि कोई दो, सन् २०१७ का महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक ३१ द्वारा यथा निविष्ट, अधिनियम की धारा २६की उप-धारायें (६क), (६ख) और (६ग) के उपबंधों द्वारा उपबंध किया गया है तो, वह कार्यवाहियों के प्रारंभण कि दिनांक का विचार किये बिना, समस्त अपीलों को लागू होगा ;

(घ) दिनांक १ अप्रैल २०१७ से १५ सितंबर २०१७ तक प्रारंभ होनेवाली अवधियों के लिये रत्नागिरी गैस अॅन्ड पॉवर प्रा. लि. को भारतीय गैस प्राधिकरण लिमिटेड द्वारा घरेलू प्राकृतिक गैस की विक्रयों पर देय कर से छूट देना।

३. राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल है रहा है, और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है की, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें, उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र राज्य में परिचालित कतिपय कर विधियों में संशोधन करने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है।

मुंबई, दिनांकित ६ मार्च २०१९।

चे. विद्यासागर राव, महाराष्ट्र के राज्यपाल।

महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,

यू. पी. एस. मदान, सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव।

(यथार्थ अनुवाद) हर्षवर्धन जाधव, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य। ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY DIRECTOR DR. NAMDEO KONDAJI BHOSALE, PRINTED AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATIONS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 EDITOR : DIRECTOR DR. NAMDEO KONDAJI BHOSALE.

Cite this issue. Maharashtra Gazette, Government of Maharashtra, 04 April 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.maharashtra.2019-04-04.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-/. Archive identifier in.gazette.maharashtra.2019-04-04.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-.