RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ५, अंक ८ ] सोमवार, एप्रिल २२, २०१९/वैशाख २, शके १९४१ [पृष्ठे ५, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक १०
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)
राजस्व तथा वन विभाग
मंत्रालय, मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरू चौक, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित ८ मार्च २०१९ ।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. VII OF 2019.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA STAMP ACT.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक ७, सन् २०१९।
महाराष्ट्र स्टाम्प अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने संबंधी अध्यादेश ।
क्योंकि, महाराष्ट्र के राज्यपाल ने महाराष्ट्र स्टाम्प (संशोधन और विधिमान्यकरण) अध्यादेश, २०१९ (जिसे इसमे आगे "उक्त अध्यादेश" कहा गया है) १३ फरवरी २०१९ को प्रख्यापित किया गया था ;
सन् २०१९ का महा. अध्या. क्र. १ ।
और क्योंकि, २५ फरवरी २०१९ को राज्य विधानमंडल के पुन:समवेत होने पर, उक्त अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के अधिनियम मे बदलने के लिये, महाराष्ट्र स्टाम्प (संशोधन और विधिमान्यकरण) विधेयक, २०१९ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, एप्रिल २२, २०१९/वैशाख २, शके १९४१ २ (वि.स. विधेयक क्र. १, सन् २०१९), २६ फरवरी २०१९ को महाराष्ट्र विधान सभा द्वारा पारित किया गया था ; और महाराष्ट्र विधान परिषद को पारेषित किया गया था ;
और क्योंकि, तत्पश्चात्, महाराष्ट्र विधान परिषद का सत्र २८ फरवरी २०१९ को सत्रावसित होने के कारण उक्त विधेयक महाराष्ट्र विधान परिषद द्वारा पारित नहीं हो सका था ;
और क्योंकि, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ (२)(क) द्वारा यथा उपबंधित उक्त अध्यादेश, राज्य विधानमंडल के पुन:समवेत होने के दिनांक से छह सप्ताह के अवसान पर, अर्थात् ७ अप्रैल २०१९ के पश्चात् प्रवृत्त होने से परिविरत हो जायेगा ;
और क्योंकि, उक्त अध्यादेश के उपबंधों का प्रवर्तन जारी रखना इष्टकर समझा गया है ;
और क्योंकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ; और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, उक्त अध्यादेश के उपबंधों का प्रवर्तन जारी रखने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ;
अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :---
१. (१) यह अध्यादेश महाराष्ट्र स्टाम्प (संशोधन और विधिमान्यकरण) (जारी रहना) अध्यादेश, २०१९ संक्षिप्त नाम और प्रारम्भण।
कहलाए ।
(२) यह १३ फरवरी २०१९ को प्रवृत्त हुआ समझा जायेगा ।
२. महाराष्ट्र स्टाम्प अधिनियम (जिसे इसमें आगे, '' मूल अधिनियम '' कहा गया है) की धारा ९ के सन् १९५८ का ६० । खण्ड (क) में, " शुल्क " शब्द के स्थान में, " शुल्क या शास्ति, यदि कोई हो, या दोनों " शब्द रखे जायेंगे और सन् १९५८ का ६० की धारा ९ में संशोधन।
१ अप्रैल १९९४ से रखे गये समझे जायेंगे ।
३. मूल अधिनियम की धारा ३९ की, उप-धारा (१) के, खण्ड (ख) में,---
(एक) प्रथम परन्तुक के पूर्व, निम्न निविष्ट किया जायेगा, अर्थात्:----
सन् १९५८ का महा. ६० की धारा ३९ में संशोधन।
"परंतु शुल्क, जिसके लिए किसी प्रचलित नीति के अधीन धारा ९ के खण्ड (क) के अधीन सरकार द्वारा कटौती या परिहार अनुदत्त है, शास्ति की गणना के प्रयोजन के लिए शुल्क का त्रुटिपूर्ण भाग के रुप में मानी नहीं जायेगी, यदि लाभग्राही को सरकार से पूर्वानुमोदन से या निराक्षेप से ऐसे लाभ से छूट या परिहार किया गया या अभ्यपर्ण या क्षमापित या अभ्र्यपित किया गया है : " ;
(दो) प्रथम परन्तुक में, " परंतु कि ", शब्दों के स्थान में, " परंतु यह और भी कि ", शब्द रखे जायेंगे ;
(तीन) द्वितीय परन्तुक में, " परंतु यह और भी कि ", शब्दों के स्थान में, " परंतु यह भी कि " शब्द रखे जायेंगे।
विधिमान्यकरण । ४. (१) किसी न्यायालय के न्यायनिर्णय, डिक्री या आदेश के प्रतिकूल या मूल अधिनियम में अन्र्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, उक्त अधिनियम के अधीन प्राधिकरण द्वारा ऐसी कटौती या परिहार के अनुसरण में, की गयी किसी कार्यवाही समेत, मूल अधिनियम की धारा ९ के खण्ड (क) के अधीन अनुदत्त शुल्क या शास्ति या दोनों में छूट या परिहार, मूल अधिनियम के उपबंधों के अधीन कृत या करने के लिए तात्र्पयित है तो विधिमहाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, एप्रिल २२, २०१९/वैशाख २, शके १९४१ ३ ३ के अनुसरण में, वैधता अनुदत्त हुई समझी जायेगी मानों कि, महाराष्ट्र स्टाम्प (संशोधन और विधिमान्यकरण) (जारी रहना) अध्यादेश, २०१९ (जिसे इसमें आगे, इस धारा में " संशोधन अध्यादेश," कहा गया है) द्वारा
सन् २०१९ का महा. अध्या. क्र. ७ । यथा संशोधित, मूल अधिनियम की धारा ९ के खण्ड (क) के उपबंध सभी समय में, निरन्तर प्रवृत्त थे और तद्नुसार,---
(क) शुल्क या शास्ति या दोनों की कटौती या परिहार के संबंध में मूल अधिनियम के अधीन प्राधिकरण द्वारा कृत सभी कारवाई, या की गई कार्यवाहियाँ या बातें सभी प्रयोजनों के लिए मूल अधिनियम के उपबंधों के अनुसरण में, कृत या की गई समझी जायेगी ;
(ख) वाद या अन्य कार्यवाहियाँ शुल्क या शास्ति या दोनों के अनुदत्त परिहार या कटौती के लिए उक्त प्राधिकरण के विरुद्ध किसी न्यायालय में बनाए रखी या जारी रखी नहीं जायेंगी ।
(२) संदेह के निराकरण के लिए, एतद्द्वारा, यह घोषित किया जाता है कि, उप-धारा (१) की कोई भी बात,----
(क) संशोधन अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित मूल अधिनियम के उपबंधों के अनुसरण में प्रश्नगत होने से, इस धारा की उप-धारा (१) में र्िनदिष्ट स्टाम्प शुल्क या शास्ति या दोनों के किसी निर्धारण, पुर्ननिर्धारण, उद्ग्रहण या संग्रहण करने के लिये किसी व्यक्ति को रोकने के रूप में नहीं मानी जायेगी ; या
(ख) संशोधन अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित मूल अधिनियम के अधीन शुल्क या शास्ति या दोनों के ज़रिए उससे देय राशि के अधिक में मूल अधिनियम के अधीन उसके द्वारा अदा किसी स्टाम्प शुल्क के प्रतिदाय से किसी व्यक्ति को रोकने के रूप में नहीं मानी जायेगी ।
५. (१) महाराष्ट्र स्टाम्प (संशोधन और विधिमान्यकरण) अध्यादेश, २०१९ एतद्द्वारा, निरसित किया जाता है ।
सन् २०१९ का महा. अध्या. क्र. १ ।
सन् २०१९ का महा. अध्या. क्र. १ का निरसन तथा व्यावृत्ति । (२) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित मूल अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन कृत कोई बात या की गई कोई कार्यवाही (जारी किसी अधिसूचना या आदेश समेत) इस अध्यादेश द्वारा, यथा संशोधित मूल अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन कृत, की गई, या यथास्थिति, जारी की गई समझी जायेगी । महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, एप्रिल २२, २०१९/वैशाख २, शके १९४१ ४
वक्तव्य।
महाराष्ट्र सरकार ने समय-समय पर, महाराष्ट्र स्टाम्प अधिनियम (सन् १९५८ का ६०) की धारा ९ के खण्ड (क) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, उक्त अधिनियम की धारा ३१ की उप-धारा (४) के खण्ड (दो), धारा ३२ क की उप-धारा (२) और (४) और धारा ३९, की उप-धारा (१) के खण्ड (ख) के अधीन निर्धारित स्टाम्प शुल्क के त्रुटिपूर्ण भाग के संबंध में प्रभार्य शास्ति की रकम की कटौती करने या छूट देने की विभिन्न अवधियों के लिये, वर्ष १९९४, १९९७, १९९८, २००४ और २००८ में सर्व माफी योजना अधिसूचित की है।
२. उक्त अधिनियम के अधीन प्राधिकरण द्वारा ऐसी कटौती या परिहार के अनुसरण में, की गयी किसी कारवाई समेत उक्त सर्व माफी योजना के अधीन उक्त अधिनियम की धारा ९ के खण्ड (क) के अधीन अनुदत्त शास्ति में वैध कटौती या परिहार के उद्देश्य से, उक्त अधिनियम के उपबंधों के अधीन कृत या करने के लिए तात्र्पयित है तो भूतलक्षी प्रभाव से अर्थात् १ अप्रैल १९९४ से उक्त अधिनियम की धारा ९ के खण्ड (क) में यथोचित संशोधन करना इष्टकर समझा गया है।
३. उक्त अधिनियम की धारा ३९ में उपबंध करने की दृष्टि से यह भी प्रस्तावित किया गया था कि, किसी प्रचलित नीति के अधीन उक्त अधिनियम की धारा ९ के खण्ड (क) के अधीन सरकार द्वारा शुल्क जिसके लिए कटौती या छूट अनुदत्त है तो स्टाम्प शुल्क में छूट या परिहार शास्ति की गणना के लिए स्टाम्प शुल्क के त्रुटिपूर्ण भाग के रूप में माना नहीं जायेगा, यदि लाभग्राही जिसे राज्य सरकार के पूर्वानुमोदन या निराक्षेप से छूट या परिहार किया गया है या अभ्यर्पण या क्षमापित या अभ्र्यपित किया गया है।
४. प्रस्तावित संशोधनों से विभिन्न मामलो में स्टाम्प शुल्क के त्रुटिपूर्ण भाग पर शास्ति कमी करने के लिए सरकार को नई सर्व माफी योजना शुरू करने के लिए मदद होगी।
५. राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा था और महाराष्ट्र के राज्यपाल का समाधान हो चुका था कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान थीं, जिनके कारण उन्हें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र स्टाम्प अधिनियम (सन् १९५८ का ६०) में अधिकतर संशोधन करने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ था। अत: महाराष्ट्र स्टाम्प (संशोधन और विधिमान्यकरण) अध्यादेश, २०१९ (सन् २०१९ का महा. अध्या. क्र. १) महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा, १३ फरवरी २०१९ को प्रख्यापित किया गया था।
६. तत्पश्चात् २५ फरवरी, २०१९ को राज्य विधानमंडल के पुन:समवेत होने पर, उक्त अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के अधिनियम में बदलने के लिये, महाराष्ट्र स्टाम्प (संशोधन और विधिमान्यकरण) विधेयक, २०१९ (वि.स. विधेयक क्र. १ सन् २०१९), २६ फरवरी २०१९ को महाराष्ट्र विधान सभा द्वारा पारित किया गया था और महाराष्ट्र विधान परिषद को पारेषित किया गया था। तथापि, तत्पश्चात्, महाराष्ट्र विधान परिषद का सत्र २८ फरवरी २०१९ को सत्रावसित होने के कारण उक्त विधेयक महाराष्ट्र विधान परिषद द्वारा पारित नहीं हो सका था। ७. भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ (२)(क) द्वारा यथा उपबंधित उक्त अध्यादेश, राज्य विधानमंडल के पुन:समवेत होने के दिनांक से छह सप्ताह के अवसान पर, अर्थात् ७ अप्रैल २०१९ को प्रवृत्त होने से परिविरत होगा। इसलिए, नवीन अध्यादेश के प्रख्यापन द्वारा उक्त अध्यादेश के उपबंधों को जारी रखने के लिये सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, एप्रिल २२, २०१९/वैशाख २, शके १९४१ ५ ५ ८. राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ; और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें महाराष्ट्र अध्यादेश क्र. १ सन् २०१९ के उपबंधों का प्रवर्तन जारी रखने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है।
मुंबई,
चे. विद्यासागर राव,
दिनांकित ८ मार्च २०१९।
महाराष्ट्र के राज्यपाल।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,
मनु कुमार श्रीवास्तव,
सरकार के अप्पर मुख्य सचिव।
(यथार्थ अनुवाद),
श्रीमती नं. मा. राऊत, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
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