RNI No. MAHBIL /2009/31746
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
भाग सात
वर्ष ५, अंक १९] गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१ [पृष्ठे १५
किंमत : रुपये ३७.००
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)
अनुक्रमणिका
पृष्ठे महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक ६१, सन २०१७.---- महाराष्ट्र दुकानों तथा स्थापना (नियोजन और सेवा की शर्तों . . २ का विनियमन) अधिनियम, २०१७।
(१)
भाग सात-----१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग सात, गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१
MAHARASHTRA ACT No. LXI OF 2017.
THE MAHARASHTRA SHOPS AND ESTABLISHMENTS
(REGULATION OF EMPLOYMENT AND CONDITION OF SERVICE)
ACT, 2017.
महाराष्ट्र विधानमंडल का निम्न अधिनियम, राज्यपाल की अनुमति दिनांक ६ सितम्बर, २०१७
को प्राप्त होने के बाद, इसके द्वारा सार्वजनिक सूचनार्थ प्रकाशित किया जाता है।
नि. ज. जमादार, प्रधान सचिव, विधि तथा न्याय विभाग, महाराष्ट्र शासन।
MAHARASHTRA ACT No. LXI OF 2017.
AN ACT TO PROVIDE FOR THE REGULATION OF CONDITIONS OF EMPLOYMENT AND OTHER CONDITIONS OF SERVICES OF WORKERS EMPLOYED IN SHOPS, RESIDENTAL HOTELS,
RESTAURANTS, EATING HOUSES, THEATRES, OTHER PLACES OF PUBLIC AMUSEMENT OR ENTERTAINMENT AND OTHER
ESTABLISHMENTS AND FOR MATTERS CONNECTED THEREWITH
OR INCIDENTAL THERETO.
महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक ६१, सन् २०१७।
(जो कि राज्यपाल की अनुमति प्राप्त होने के पश्चात्, " महाराष्ट्र राजपत्र " में दिनांक ७ सितम्बर, २०१७ को प्रथम बार प्रकाशित हुआ।)
दुकानों, निवासी होटलों, रेस्तरां, भोजनालय, थिएटरों, सार्वजनिक आमोद-प्रमोद
या मनोरंजन के अन्य स्थानों और अन्य स्थापनाअों में नियोजन की शर्तों और
नियोजित कर्मकारों की सेवा की अन्य शर्तों के विनियमन और तत्संबंधी या उससे
आनुषंगिक मामलों के लिए उपबंध करने संबंधी अधिनियम।
क्योंकि दुकानों, निवासी होटलों, रेस्तरां, भोजनालय, थिएटरों, सार्वजनिक आमोद-प्रमोद या मनोरंजन अन्य स्थानों और अन्य स्थापनाअों में नियोजन की शर्तों और नियोजित कर्मकारों की सेवा की अन्य शर्तों के विनियमन और तत्संबंधी या उससे आनुषंगिक मामलों के लिए उपबंध करना इष्टकर है ; इसलिए, भारत गणराज्य के अड़सठवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम बनाया जाता है :---
अध्याय एक
प्रारम्भिक
१. (१) यह अधिनियम, महाराष्ट्र दुकानों और स्थापना (नियोजन और सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, २०१७ कहलाए।
संक्षिप्त नाम, विस्तार, प्रयुक्ति और प्रारम्भण।
(२) इसका विस्तार संपूर्ण महाराष्ट्र राज्य में होगा ।
(३) इस अधिनियम के उपबंध, धारा ७ को छोड़कर, दस या अधिक कर्मकारोंे के रोजगार की स्थापनाअों को लागू होंगे और धारा ७ के उपबंध, दस कर्मकारों से कम के रोजगार की स्थापनाअों को लागू होंगे।
(४) यह ऐसे दिनांक को प्रवृत्त होगा जिसे राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करें।महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग सात, गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१ ३ परिभाषाएँ। २. इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-----
(१) " मुख्य सुविधाकार " का तात्पर्य, इस अधिनियम की धारा २८ के अधीन ऐसी रीत्या नियुक्त किये गये मुख्य सुविधाकार से है ;
(२) " दिन " का तात्पर्य, का आधी रात से शुरू होनेवाली चौबीस घंटों की अवधि से है ;
(३) " नियोक्ता " का तात्पर्य, किसी स्थापना में स्वामित्व या कार्य पर अंतिम नियंत्रण रखनेवाले व्यक्ति से है, और,------
(एक) फर्म या व्यक्ति संगम के मामले में फर्म या संघ के भागीदार या सदस्य से है ;
(दो) कंपनी के मामले में कंपनी के निदेशक से है ;
(तीन) केन्द्र सरकार या राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन किसी स्थापना के मामले में केन्द्र सरकार या राज्य सरकार या, यथास्थिति, स्थानीय प्राधिकरण द्वारा ऐसी स्थापना के कार्य के प्रबंध के लिए नियुक्त व्यक्ति या व्यक्तियोें से है ;
सन् १८६० का २१।
सन् १९४८ का ६३।
(४) " स्थापना " का तात्पर्य, किसी कारोबार, व्यापार, विनिर्माण या किसी पत्रकारिता या मुद्रण कार्य या बैंकिंग, बीमा, स्टॉक और शेयर, दलाली या उत्पाद विनियमन या किसी कारोबार, व्यापार या व्यवसाय या विनिर्माण से संबंधित या आनुषंगिक या अधीनस्थ किसी कार्य से है और इसमें किसी चिकित्सा व्यवसायी (इसमें अस्पताल, औषधालय, क्लिनिक, पॉलीक्लिनिक, प्रसूतिगृह, और ऐसे अन्य सम्मिलित है) वास्तुकार, इंजीनियर, लेखापाल, कर सलाहकार या किसी अन्य तकनीकी या व्यावसायिक सलाहकार की स्थापना सम्मिलित है, इसमें संस्था रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, १८६० के अधीन रजिस्ट्रीकृत संस्था सामिल है, और पूर्त या अन्य न्यास चाहे वह रजिस्ट्रीकृत हो या न हो, जो पर काम किया जाता है, किसी कारोबार, व्यापार या व्यवसाय या से संबंधित या आनुषंगिक या उसके अधीनस्थ कार्य चाहे वह लाभ के प्रयोजन का हो या न हो, उस पूर्त या अन्य न्यास सम्मिलित होगा और जिसमें कारखाना अधिनियम, १९४८ के उपबंध लागू नहीं होते हैं ऐसे दुकान, निवासी होटल, रेस्तरां, भोजनालय, थिएटर या सार्वजनिक आमोद-प्रमोद या मनोरंजन के अन्य स्थान सम्मिलित है ; और इसमें ऐसी अन्य स्थापना जिसे राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए स्थापना घोषित की जानेवाली है ; परन्तु इसमें कारखाने का परिसर शामिल नहीं होगा ;
(५) " सुविधाकार " का तात्पर्य, इस अधिनियम की धारा २८ के अधीन नियुक्त सुविधाकार से है ;
सन् १९४८ का ६३।
(६) " कारखाना " का तात्पर्य, किसी परिसर जिसे कारखाना अधिनियम, १९४८ की धारा २ के खण्ड ड के अर्थान्तर्गत कारखाना से है या जो उक्त अधिनियम की धारा ८५ के अधीन कारखाना समझे जाने से है ;
(७) " छुट्टी का दिन " का तात्पर्य, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन जिस दिन पर कर्मकार को सात्पाहिक छुट्टी दी जाती है, से है ;
(८) " अवकाश " का तात्पर्य, इस अधिनियम के अध्याय चार में उपबंधित अवकाश से है ;
(९) " स्थानिय क्षेत्र " का तात्पर्य, यह अधिनियम लागू होनेवाले किसी क्षेत्र या क्षेत्रों के संयोजन से है ;
(१०) " स्थानिय प्राधिकरण " का तात्पर्य, मुंबई नगर निगम अधिनियम के अधीन गठित या गठित की गई है या समझी गई बृहन्मुंबई नगर निगम और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ के अधीन गठित या गठित की गई समझी गयी नगर परिषद, और इसमें इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए स्थानीय प्राधिकरण के रुप में जिसे राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा घोषित करे ऐसे किसी अन्य सम्मिलित निकाय से है ;
सन् १८८८ का ३। सन् १९४९ का ५९। सन् १९६५ का महा. ४०।
भाग सात-----१अ४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग सात, गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१ (११) " प्रबंधक " का तात्पर्य, धारा ६ के अधीन आवेदन में उल्लिखित व्यक्ति से है ;
(१२) " नियोक्ता के परिवार का सदस्य " का तात्पर्य, नियोक्ता के साथ जो रहते और नियोक्ता पर निर्भर है पति, पत्नि, बेटा, बेटी, पिता, माता, भाई या बहन से है ;
(१३) " खुला " का तात्पर्य, किसी ग्राहक की सेवा के लिए, या स्थापना के किसी कारोबार के लिए, या कार्य के लिये, स्थापना के किसी कर्मकार की मदत द्वारा या से या स्थापना के संबंधित सेवा देने ते लिए खुला से है ;
(१४) " कार्यावधि " का तात्पर्य, जिस दौरान कर्मकार नियोक्ता के पास काम करता है उस से समय है ;
(१५) " विहित " का तात्पर्य, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित से है ;
(१६) " विहित प्राधिकरण " का तात्पर्य, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए श्रम आयुक्त से है ;
(१७) " स्थापना का रजिस्टर " का तात्पर्य, या तो हाथ से या इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में इस अधिनियम के अधीन स्थापना के रजिस्ट्रीकरण के लिए बनाए रखे गए रजिस्टर से है ;
(१८) " रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र " का तात्पर्य, किसी स्थापना के रजिस्ट्रीकरण के प्रमाणपत्र से है ;
(१९) " निवासी होटल " का तात्पर्य, निवास या उसमें सोने के इच्छूक अतिथियों और यात्रियों के स्वागत के लिए उपयोगी किसी परिसर से है और इसमें निवासी क्लब सम्मिलित है ;
(२०) " रेस्तरां या भोजनालय " का तात्पर्य, किसी भवन में संपूर्णतया या मुख्यतया लोगों को या लोगों के वर्ग को भोजन या अल्पाहार की आपर्ूति का व्यवसाय चलाया जाता है ऐसे भवन है ;
(२१) " दुकान " का तात्पर्य, किसी भवन में जहाँ माल या तो खुदरा या थोक रूप में बेचा जाता है या ग्राहकों को सेवा दी जाती है और इसमें ऐसे व्यापार या व्यवसाय के संबंध में मुख्यत: उपयोग में लाया जानेवाला कार्यालय, भांडारगृह, गोदाम, मालगोदाम या कार्यालय स्थल सम्मिलित है चाहे वही भवन में या से अन्यथा हो, किन्तु, इसमें कारखाना सम्मिलित नहीं होगा ;
(२२) " समय-विस्तार " का तात्पर्य, किसी दिन पर कर्मकार के कार्य-प्रारम्भण और समापन के बीच की अवधि से है ;
(२३) " थिएटर " का तात्पर्य, चलचित्र या अन्य उपयुक्त उपकरण की सहायता से चित्रों या अन्य दृष्टि पर चित्रों के प्रदर्शन के लिए या नाटकीय प्रदर्शन या किसी अन्य आमोद-प्रमोद या मनोरंजन के लिए जो मुख्यत: या संपूर्ण रूप से उपयोग करने के आशय से है, ऐसा किसी परिसर सम्मिलित है, से है ;
(२४) " मजदूरी " का तात्पर्य, मजदूरी अधिनियम, १९३६ में यथा परिभाषित मजदूरी से है ; सन् १९३६ का ४। (२५) " सप्ताह " का तात्पर्य, शनिवार की आधी रात से प्रारम्भ होनेवाले सात दिनों की अवधी से है ;
सन् १९६१ का ५२। (२६) " कर्मकार " का तात्पर्य, कोई व्यक्ति से है (शिक्षु अधिनियम, १९६१ के अधीन किसी शिक्षु को छोड़कर) व्यक्तिगत, अकुशल, कुशल तकनीकी, प्रचालन या उसके वारिस या इनाम के लिये लिपकीय कार्य चाहे रोजगार के निबन्धन व्यक्त या ध्वनित से है।
३. इस अधिनियम के उपबंध,-----
(१) केन्द्र और राज्य सरकार की स्थापना ;
कतिपय स्थापनाअों और व्यक्तियों को अधिनियम का लागू न होना।
(२) स्थानिय प्राधिकरणों की स्थापना ;
(३) मुंबई पत्तन न्यास की स्थापना ;
महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग सात, गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१ ५(४) रेल प्रशासन की स्थापना ;
(५) भारतीय रिझव्र्ह बँक के कार्यालय ;
(६) व्यापार आयुक्त और वाणिज्यिक अधिकारीयों और विदेशी सरकार के अन्य राजनयिक प्रतिनिधियों के कार्यालय ;
(७) हवाई सेवा कंपनीयों के कार्यालय ;
(८) कमजोर, निराश्रित या मानसिक अक्षम के उपचार या देखभाल के उपयोगी स्थापनाअों ;
(९) किसी भी किस्म के शैक्षणिक क्रियाकलापों से संबंधित स्थापनाअों (व्यक्तिगत या किसी संस्था द्वारा कोचिंग या टयूशन वर्गों को चलाये जाते हैं ऐसी स्थापना को छोड़कर),----
(क) विधि द्वारा स्थापित किन्हीं स्थापनाअों से सहबद्ध ; या
(ख) महाराष्ट्र माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अधिनियम, १९६५ के अधीन प्रभागीय बोर्ड द्वारा मान्यताप्राप्त ; या
सन् १९६५ का महा. ४१।
(ग) शिक्षा निदेशालय या तकनीकी शिक्षा निदेशक द्वारा निजी माध्यमिक या तकनीकी विद्यालय, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आय.टी.आय.) बहुशिल्प, इंजिनिअरिंग महाविद्यालय या सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त पाठयक्रम संचालित करनेवाली अन्य तकनीकी संस्थाअों के रूप में मान्यताप्राप्त ;
(१०) उच्चतर न्यायालय विधि पुस्तकालय और अन्य न्यायालय के विधि पुस्तकालय ;
(११) दुकान या स्थापना में, गोपनीय, प्रबंधकीय या पर्यवेक्षकीय पद धारण करनेवाला कर्मकार हो, तब, उनकी सूची, स्थापनाअों की वेबसाईट पर और वेबसाईट न होने पर, स्थापनाअों में सहजदृश्य स्थान पर प्रर्दशित करेगा और उसकी प्रति सुविधाकार को भेजेगा ;
(१२) श्रमिक, जिसका कार्य स्वाभाविक रुप से विरामी हैं ;
(१३) नियोक्ता के परिवार का सदस्य।
४. (१) इस अधिनियम में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुये भी, राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किन्हीं स्थापना या स्थापनाअों के वर्ग, जिन्हें या किन्हीं कर्मकार या व्यक्ति या कर्मकारों का वर्ग या व्यक्तियों,
अन्य स्थापनाअों और कर्मकारों के लिये अधिनियम का अनुप्रयोग। जिन्हें, इस अधिनियम या उसके किन्ही उपबंध तत्समय लागू नहीं हैं, की स्थापना या स्थापनाअों का प्ररुप या कर्मकारों या व्यक्ति या कर्मकारों के वर्ग या व्यक्तियों, जिन्हें या जिसे इस अधिनियम या उसके किन्हीं उपबंध, ऐसे राज्य सरकार के मत से आवश्यक हो, ऐसे उपांतरणों या रुपांतरणों के साथ, अधिसूचना में विर्िनदिष्ट किये जाये ऐसे दिनांक से लागू होंगे, अधिसूचित करेगी।
(२) उप-धारा (१) के अधीन ऐसी अधिघोषणा पर, ऐसी स्थापना या स्थापनाअों के वर्ग या ऐसा कर्मकारों या व्यक्ति या कर्मकारों या व्यक्तियों के वर्ग स्थापना या स्थापनाअों के वर्ग माने जायेंगे, जिन्हें या कर्मकारों या व्यक्ति या कर्मकारों या व्यक्ति का वर्ग माना जायेगा, जिसे यह अधिनियम लागू हैं, और ऐसी अधिघोषणा में विर्िनदिष्ट किये जाये ऐसे उपांतरणों या रुपांतरणों के साथ इस अधिनियम के सबी या किन्हीं उपबंध, ऐसी स्थापना या स्थापनायों के वर्ग या ऐसे कर्मकार या व्यक्ति या कर्मकारों के वर्ग या व्यक्य्ितयों को लागू होंगे।
५. राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के सभी या किन्हीं उपबंधों का कार्यान्वयन, किन्हीं छुट्टीयों या अवसरों के कारण, ऐसी अवधि के लिये और ऐसी शर्तों के अध्यधीन निलंबित करेगी।
इस अधिनियम के सभी या किन्हीं उपबंधों का निलंबन।६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग सात, गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१ अध्याय दो
स्थापनाअों का रजिस्ट्रीकरण।
स्थापनाअों का रजिस्ट्रीकरण।
६. (१) अधिनियम के प्रारम्भण के दिनांक या दिनांक, जिस पर स्थापना ने उसका कार्य प्रारंभ किया हैं, से साठ दिनों कि अवधि के भीतर, दस या अधिक कर्मकारों को नियोजन करनेवाली प्रत्येक स्थापना का नियोक्ता, संबंधित स्थानिय क्षेत्र के सुविधाकार को,----
(क) नियोक्ता और प्रबंधक के नाम, यदि किन्हीं हो ;
(ख) स्थापना का डाक-पता ;
(ग) स्थापना का नाम, यदि कोई हो ;
(घ) स्थापना के कार्य का वास्तविक स्वरुप ; और
(ङ) विहित किये जाये ऐसे अन्य विवरण अंर्तविष्ट होनेवाले, विहित किये जाये ऐसी फीस और ऐसी स्व-अधिघोषणा और स्व-प्रमाणित दस्तावेजों के साथ, विहित प्ररुप में ऑनलाईन आवेदन प्रस्तुत करेगा :
सन् १९४८ का ७९। परंतु, उपरोक्त में अंर्तविष्ट कोई बात, उनके रजिस्ट्रीकरण या नवीकरण के अवसान तक महाराष्ट्र दुकान और स्थापना अधिनियम के अधीन विधिमान्य रजिस्ट्रीकरण या नवीकरण पहले से रखनेवाले स्थापना को लागू नहीं होंगे।
(२) दस्तावेजों के साथ आवेदन और ऑनलाईन फीस की प्राप्ति पर, सुविधाकार, विहित किये जाये ऐसी रित्या में, स्थापनाअों के रजिस्टर में, स्थापना रजिस्टर करेगा और विहित समय सीमा के भीतर नियोक्ता को श्रमिक पहचान क्रमांक (लीन) के साथ, विहित प्ररुप में, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र, ऑनलाईन जारी करेगा। सुविधाकार, विहित किये जाये ऐसे समय के भीतर अपलोड किये गये आवेदन और उसे संलग्नित दस्तावेजों की यथातथ्यता का सत्यापन करेगा। रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र, जब भी मांग की जाये सुविधाकार द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा।
(३) उप-धारा (२) के अधीन प्रदान किया गया रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र, उसमें विर्िनदिष्ट दस वर्षों की अधिकतम अवधि के अध्यधीन, आवेदनकर्ता द्वारा अनुरोध किया जाये ऐसी अवधि के लिये, विधिमान्य होगा। रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के नवीकरण के लिये आवेदन, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र या , यथास्थिति, नवीकृत रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के अवसान के पूर्व तीस दिनों के भीतर ऑनलाईन प्रस्तुत करेगा, ऐसी फीस के साथ होगा, और नवीकृत रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र, विहीत किये जाये ऐसे प्ररुप में होगा।
(४) यदि, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के नवीकरण के लिये आवेदन, उप-धारा (३) में विर्िनदिष्ट अवधि के अवसान के पश्चात्, किन्तु रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र या यथास्थिति, नवीकृत रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के अवसान के दिनांक के पश्चात् तीस दिनों के भीतर, प्रस्तुत करता हैं, तब, ऐसा आवेदन, रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र के नवीकरण के लिये भुगतान योग्य फीस के आधे के समान विलंब फीस के रुप में अतिरिक्त फीस के साथ होगा।
(५) अधिनियम के किन्हीं उपबंधों के संबंध में नियोक्ता और सुविधाकार के बाच में किसी संदेह या मतभिन्नता की घटना में, सुविधाकार, विहित प्राधिकरण को मामला र्िनदिष्ट करेगा, जो, उचित समझे ऐसी जाँच के पश्चात, मामला विनिश्चित करेगा और इसका निर्णय, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये अंतिम होगा। दस कर्मकारों से कम को नियोजन देनेवाली स्थापना की सूचना।
७. (१) इस अधिनियम के प्रारंभण के दिनांक या जिस पर स्थापना ने अपना कार्य शुरू किया था के दिनांक से साठ दिनों कि अवधि के भीतर, दस कर्मकारों से कम को नियोजन देने वाली प्रत्येक स्थापना का नियोक्ता, कार्य के प्रारंभण की सूचना, सुविधाकार को, जिसकी अधिकारिता में, स्थापना स्थित हैं, विहित किये जाये ऐसे स्वयं-घोषणा और स्व-प्रमाणित दस्तावेजों जिनमें, नियोक्ता का नाम, प्रबंधक, स्थापना का नाम, कार्य का स्वरुप, कर्मकारों की संख्या और विहित किया जाये ऐसे अन्य विवरण अंर्तविष्ट हैं, के साथ विहित प्ररुप में, ऑनलाईन आवेदन द्वारा, देगा। सूचना प्राप्ति का विवरण, विहित किया जाये, ऐसे प्ररुप में संपोषित किये जानेवाले रजिस्टर में ऑनलाईन अभिलिखित होंगे :
महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग सात, गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१ ७परंतु, यदि, किसी भी समय पर, स्थापना से जुडे कर्मकारों की संख्या दस या अधिक होती हैं, तब इस अधिनियम के सभी उपबंध, ऐसी स्थापना और ऐसे नियोक्ता को लागू होंगे और धारा ६ के उपबंधों के अनुसार रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करना होगा :
सन् १९४८ का ७९।
परंतु, आगे यह कि, इस उप-धारा में अंर्तविष्ट कोई बात, उनके रजिस्ट्रीकरण या नवीकरण का अवसान नहीं होता, तब तक महाराष्ट्र दुकान तथा स्थापना अधिनियम के अधीन पहले से ही विधिमान्य रजिस्ट्रीकरण या नवीकरण होनेवाली स्थापनाअों को लागू नहीं होंगे।
(२) दस से कम कर्मकारों को नियोजन देनेवाली ऐसी स्थापना का नियोक्ता, कार्य को बन्द करने के दिनांक से तीस दिनों के भीतर सुविधाकार को विहित किया जाये ऐसे प्ररुप या रीति में कार्य को बंद किया गया हैं, अधिसूचित करेगा। सूचना के प्राप्त होने पर सुविधाकार, ऐसी स्थापना की प्रविष्टि, उस प्रयोजन के लिये रखे गये रजिस्टर में से हटा देगा।
(३) जो कोई इस धारा या तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबंधों का उल्लंघन करता है तो एक हजार रुपयों के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा।
रजिस्ट्रीकरण का रद्दकरण। ८. किसी भी समय पर, सुविधाकार को यह पाया जाता हैं या देखा जाता हैं कि, किसी स्थापना का रजिस्ट्रीकरण, मिथ्या-निरूपण या भौतिक तथ्यों के उन्मूलन द्वारा या गलत या नकली दस्तावेजों या गलत अभिघोषणा प्रस्तुत करने द्वारा या छल द्वारा प्राप्त किया गया हैं और इसलिये, रद्द करना आवश्यक हैं, तब सुविधाकार स्थापना के नियोक्ता को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् विहित रीत्या में रजिस्ट्रीकरण रद्द करेगा और स्थापनाअों के रजिस्टर से ऐसी स्थापना मे प्रविष्टि हटायेगा।
सुविधाकार को परिवर्तन संसूचित करना। ९. यह प्रत्येक नियोक्ता का कर्तव्य हैं कि, धारा ६ के अधीन प्रस्तुत आवेदन में अंर्तविष्ट विवरण में कोई परिवर्तन, परिवर्तन होने के पश्चात् विहित प्ररूप में, राज्य सरकार विहित करे ऐसी अवधि में अधिसूचित करें। सुविधाकार, ऐसी सूचना और विहित किये जाये ऐसे आवेदनकर्ता की, स्वयं-घोषणापत्र और स्वयं-प्रमाणित दस्तावेजों के साथ विहित फीस की प्राप्ति पर, ऐसी सूचना के अनुसरण में स्थापना के रजिस्टर में परिवर्तन करेगा और ऑनलाईन नया रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र जारी करेगा।
सुविधाकार को स्थापना बंद किये जाने की संसूचना देना। १०. नियोक्ता, सुविधाकार को, विहित किया जाये, ऐसे प्ररुप और रीति में, स्थापना का कार्य बंद करने के दिनांक से तीस दिनों के भीतर, स्थापना का कार्य बंद किया गया है, अधिसूचित करेगा। सुविधाकार सूचना की प्राप्ति पर और उसकी यथातथ्यता के बारे में समाधानी होने पर, स्थापना के रजिस्टर में से, ऐसी स्थापना को निकाल देगा और रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र रद्द करेगा :
परंतु, यदि सुविधाकार सूचना प्राप्त नहीं करता हैं, किंतु, वह अन्यथा समाधानी होता हैं की, कोई स्थापना बंद हुई हैं, तब, वह स्थापना के रजिस्टर में से, ऐसी स्थापना को निकाल देगा और रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर सकेगा।
अध्याय तीन
खुलने और बंद करने का समय, कार्य का समय, विश्राम के लिये मध्यावकाश, समय-विस्तार,
अतिकालिक कार्य के लिये मजदूरी और साप्ताहिक छुट्टी।
स्थापना के खुलने और बंद करने का समय। ११. (१) इस अधिनियम में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुये भी, राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, लोकहित में, स्थापना के विभिन्न वर्गों और विभिन्न परिसरों, विपणन समूह या मॉल के लिये या विभिन्न क्षेत्र या क्षेत्रों के लिये और विभिन्न अवधि के लिये, खुलने और बंद करने का ऐसा समय, नियत कर सकेगी।
स्थापना में कार्य करने के दैनिक या साप्ताहिक घंटे और विश्राम के लिये मध्यावकाश। १२. इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन, किसी वयस्क कर्मकार को, किसी स्थापना में एक दिन में नौ घंटे और एक सप्ताह में अड़तालीस घंटे से अधिक के लिये काम करना आवश्यक या अनुमत नहीं होगा। किसी भी वयस्क कर्मकार को, जबतक उसे आधे घंटे से कम नहीं ऐसा विराम नहीं दिया जाये, तब तक पाँच घंटे से अधिक निरंतर काम करने के लिये नहीं कहा जायेगा :
८ महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग सात, गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१परंतु, कार्य का समय या साप्ताहिक छुट्टी अति-महवपूर्ण स्वरूप के कार्य के मामले में, सुविधाकार की पूर्वानुमति के साथ, शिथिल कर सकेगा।
१३. (१) किसी महिला कर्मकार से भर्ती, प्रशिक्षण, अंतरण या पदोन्नति या मजदूरी के मामले भेदभाव नहीं किया जायेगा।
महिला मजदूर के प्रति भेदभाव का प्रतिषेध।
(२) किसी महिला कर्मचारी को, किन्हीं स्थापना में सुबह ७ से रात ९-३० तक के अलावा, कार्य करना आवश्यक या अनुमत नहीं होगा :
परंतु, महिला कर्मकार को, अपनी सम्मति से, किन्हीं स्थापनाअों में रात ९-३० और सुबह ७-०० बजे के दौरान कार्य करना अनुमत होगा, जिसमें नियोक्ता या उसके प्राधिकृत प्रतिनिधि या प्रबंधक या पर्यवेक्षक द्वारा, उसकी प्रतिष्ठा, सम्मान और सुरक्षा का पर्याप्त संरक्षण और यौन-उत्पीड़न से सुरक्षा, संरक्षण और स्थापना से उसके आवास दहलीज तक उनको पहुँचाने का उपबंध किया गया है।
(३) पूर्ववर्ती उप-धाराअों में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुये भी, राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, लोकहित में, ऐसी स्थापनाअों, होटलों, उपाहारगृहों, आवासी हॉटलों परमिट रूम, मद्यालय, स्पा-मसाज पार्लर, लॉजेस या वह उचित समझे ऐसे क्षेत्र या क्षेत्रों में किसी व्यवसाय या किन्ही व्यापार या कारबार में, रात ९-३० के पश्चात् और सुबह ७-०० बजे से पूर्व महिला कर्मकार के रोजगार को प्रतिबिद्ध या विनियमित कर सकेगी। स्थापनाअों में समय-विस्तार।
१४. स्थापना में कर्मकार के कार्य का समय-विस्तार, प्रत्येक दिन साढ़े दस से अधिक नहीं होगा और कर्मकार को आन्तरिक स्वरूप का कार्य या अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य सौंपा जाने के मामले में, कार्य का समय-विस्तार बारह घंटे से अधिक नहीं होगा।
अतिकालिक कार्य के लिये मजदूरी।
१५. जहाँ कर्मकार को प्रत्येक दिन नौ घंटे और प्रति सप्ताह अड़तालीस घण्टों से परे काम करना पडता हैं, वहाँ, वह अतिकालिक कार्य के संबंध में उसके सामान्य मजदूरी के दर के दुगने दर पर मजदूरी के लिये हकदार होगा। अतिकालिक कार्य के घण्टो की कुल संख्या, तीन महिनों की अवधि में एक सौ पच्चीस से अधिक नहीं होगी। कर्मकारों को साप्ताहिक छुट्टी।
१६. (१) (क) स्थापना का विभाग या विभाग का कोई भाग, नियोक्ता के स्व-निर्णय से एक अधिक शिफ्ट में कार्य करता है और यदि, एक से अधिक शिफ्ट कार्यरत हैं, तब कर्मकार को नियोक्ता के स्व-निर्णय से किन्हीं एक शिफ्ट में कार्य करना आवश्यक होगा।
(ख) स्थापना, शर्त के अध्यधीन की, प्रत्येक कर्मकार को, विश्राम के कम-से-कम चौबीस अनुर्वति घण्टों की साप्ताहिक छुट्टी अनुमत होगी, एक सप्ताह में सभी दिनों को कारोबार के लिये खुला रहेगा।
(ग) यदि कर्मकार साप्ताहिक छुट्टी मना करता हैं, तब, उसके बदले में ऐसी साप्ताहिक छुट्टी के दो महीने के भीतर प्रतिपूरक छुट्टी दी जायेगी।
(घ) ऐसी शिफ्ट के कर्मकार के सभी वर्गों के लिये सप्ताह में कार्य की अवधि और समय, लिखित में सभी कर्मकार को, अग्रीम में, सूचित किया जायेगा और सुविधाकार को विद्युत माध्यम या अन्य से भेजा जायेगा। (ङ) जब कर्मकार को अपने विश्राम के दिन कार्य करना आवश्यक होता है, तब, वह, उसकी मजदूरी का सामान्य दर के दुगने दर पर मजदूरी के लिये हकदार होगा।
(२) इस धारा के अधीन, कोई दिन, जिस पर साप्ताहिक छुट्टी होती हैं के कारण, स्थापना में किन्हीं कर्मकार की मजदूरी में से कोई कटौती नहीं होगी। यदि, मजदूर दैनिक मजदूरी पर नियोजित हैं, तब, उसे, उसके साप्ताहिक छुट्टी के दिन के लिये उसके दैनिक मजदूरी से कम न हो, रकम का भुगतान किया जायेगा। यदि कर्मकार को उजरनि (खण्डश:) दर का भूगतान किया जाता हैं, तब उसके साप्ताहिक छुट्टी के दिन के लिये, उसे मजदूरी, दिनों पर जिसपर उसने ऐसे छुट्टी के पूर्वर्वति छह दिनों के दौरान वास्तविक रूप में काम किया हैं, अतिकालिक कार्य के संबंध में, किसी कमाई को छोडकर, उसकी मजदूरी के दैनिक औसत के समान दर पर, उसकी मजदूरी का भूगतान किया जायेगा ;
परंतु, इस उप-धारा की कोई बात, किसी कर्मकार को, जिसका निरंतर रोजगार छह दिनों से कम नहीं हैं, को लागू नहीं होगी।महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग सात, गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१ ९ १७. स्थापना का नियोक्ता, प्रत्येक कर्मकार को पहचान-पत्र देगा, जो सुविधाकार की माँग पर कर्मकार को प्रस्तुत करना होगा। ऐसे कार्ड में, निम्न और विहित की जाये ऐसे अन्य विवरण अंर्तविष्ट होंगे, अर्थात् :----
नियोक्ता ने कर्मकार को पहचान-पत्र देना। (क) नियोक्ता का नाम ;
(ख) स्थापना का नाम, यदि, किन्हीं हो और डाक-पता ;
(ग) कर्मकार का नाम और आयु ;
(घ) कार्यग्रहण दिनांक, विभाग, कार्य का स्वरूप, पदनाम ;
(ङ) नियोक्ता या प्रबंधक का हस्ताक्षर (दिनांक के साथ) ;
(च) रक्त वर्ग ;
(छ) आधार कार्ड संख्या।
अध्याय चार
वेतन अवकाश और मजदूरी का भुगतान।
अवकाश। १८. (१) प्रत्येक कर्मकार को मजदूरी के साथ एक साप्ताहिक छुट्टी अनुमत होगी।
(२) प्रत्येक कर्मकार, प्रत्येक कॅलेण्डर वर्ष में, मजदूरी के साथ, आठ दिनों की आकस्मिक अवकाश के लिये हकदार होगा ; जो त्रैमासिक आधार पर मजदूर के खाते में जमा किया जायेगा किंतु यदि, वर्ष की समाप्ति पर अनुपलब्ध हो, तब रद्द होगा।
(३) प्रत्येक कर्मकार, जिसने, प्रत्येक कॅलेण्डर वर्ष के दौरान स्थापना में दो सौ चालिस दिन या अधिक अवधि के लिये कार्य किया हैं, उसे, पूर्वर्वति कॅलेण्डर वर्ष के दौरान, पूर्व कॅलेण्डर वर्ष के दौरान उसके द्वारा किये गये कार्य के प्रत्येक बीस दिनों के लिये एक दिन, दर पर परिकलित दिनों की संख्या के लिये मजदूरी सहित अवकाश, अनुमत होगा।
(४) खण्ड (३) के उपबंधों के अधीन, प्रत्येक कर्मकार, जिसने किसी वर्ष में तीन महीनों से कम के लिये कार्य किया हैं, प्रत्येक साठ दिनों के लिये, जिन पर उसने वर्ष के दौरान कार्य किया हैं, पाँच दिनों से अनधिक अवधि के लिये, अनुर्वति या अन्यथा, अवकाश अनुमत होगा।
(५) प्रत्येक कर्मकार, अधिकतम पैंतालिस दिनों तक की र्अजित अवकाश लेने के लिये अनुमत होगा।
(६) जहाँ नियोक्ता, उप-धारा (३) के अधीन अवकाश मंजूर करने से, मना करना हैं, जो, अग्रिम मे पंद्रह दिन आवोदित हैं, तब, कर्मकार, को, पैंतालिस दिनों के अधिक में अवकाश भुनाने का अधिकार होगा :
परंतु, यदि कर्मकार, इस धारा के अधीन आकस्मिक और उत्सव अवकाश से अन्य अवकाश का हकदार हैं, तब उसे उसके अवकाश लेने के पूर्व, उसके नियोक्ता द्वारा सेवामुक्त किया जायेगा या यदि, आवेदन किया गया हैं और अवकाश मना किया गया हैं, तब, वह, सेवानिवृत्ति, इस्तीफा, मृत्यू या स्थायी विकलांगता के कारण, उसका पद छोड देता हैं, तब नियोक्ता, उसे देय अवकाश अवधि के लिये संपूर्ण मजदूरी का उसे भुगतान किया जायेगा। (७) कर्मकार, कॅलेण्डर वर्ष में आठ सवेतन उत्सव छुट्टीयों के लिये, हकदार होगा, अर्थात् २६ जनवरी, १ मई, १५ अगस्त और २ अक्टूबर और वर्ष के प्रारंभण के पूर्व, कार्य के स्वरुप के अनुसार, नियोक्ता और कर्मकार के बीच सहमत किये जाये ऐसे अन्य चार त्यौहार, इन दिनों की अवकाश के लिये, उसे उसकी मजदूरी (अतिकालिक काम को छोड़कर) जिसे वह महीने के भीतर, जिसमें ऐसी अनिवार्य अवकाश आता हैं, के दैनिक औसत के समतुल्य दर पर, मजदूरी का भुगतान किया जायेगा ।
परंतु, नियोक्ता किसी कर्मकार के, सभी या इन दिनों में से किसी दिन स्थापना में कार्य करना, शर्तों के अध्यधीन कि, ऐसे कार्य के लिये कर्मकार को, दैनिक औसत मजदूरी की रकम से दुगनी का भुगतान और अनिवार्य अवकाश के कारण किसी अन्य दिन पर अवकाश भी देगा, आवश्यक कर सकेगा।
भाग सात-----२१० महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग सात, गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१ (८) उप-धारा (३) के प्रयोजन के लिये,-----
(क) करार या संविदा या औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम, १९४६ के अधीन सन् १९४६ का २६। प्रमाणित मॉडेल स्थायी आदेशों या स्थायी आदेशों के अधीन यथा अनुज्ञेय मंदी के कोई दिन ;
(ख) महिला कर्मकार के मामले में, प्रसव-लाभ अधिनियम, १९६१ में यथा उपबंधित प्रसव-अवकाश सन् १९६१ का ५३। ;
(ग) वर्ष में अर्जन किया गया अवकार उससे पूर्व, जिसमें अवकाश उपलब्ध हैं ; या
(घ) उसके नियोजन के कारण या के समय में उदभूत हुये दुर्घटना के द्वारा घटित हुये अस्थायी अंगहानि के कारण मजदूर अनुपस्थित हैं ;
ऐसे दिन समझे जायेंगे, जिन पर, दो सौ पैंतालिस दिन या अधिक की अवधि के संगणक के प्रयोजन के लिये किसी स्थापना में कर्मकार ने कार्य किया हैं, किंतु इन दिनों के लिये अवकाश र्अजित नहीं करेगा। (९) इस धारा के अधीन स्वीकार्य अवकाश, चाहे अवकाश की अवधि के दौरान या तो अंत पर आती हो, सभी अवकाशों के अतिरिक्त होंगा।
(१०) प्रत्येक मजदूर को, उप-धारा (३) और (४) के अधीन, उसके मजदूरी के दैनिक औसत के समतुल्य दर पर, दिन, जिन पर अतिकालिक कार्य के संबंध में किन्हीं अर्जन के अतिरिक्त पूर्ववर्ती तीन महिनों के दौरान उसने वास्तविक कार्य किया है, के लिये उसके र्अजित अवकाश के अवधि के लिये, भुगतान किया जायेगा।
अध्याय पाँच
कल्याण उपबंध।
१९. (१) प्रत्येक नियोक्ता, विहित किये गये स्वच्छता, प्रकाश-व्यवस्था, वायुसंचार और अग्नि-बचाव कर्मकारों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से संबंधित ऐसे उपाय करेगा।
कर्मकारों का स्वास्थ्य और सुरक्षा।
(२) प्रत्येक नियोक्ता, स्थापना में कार्यरत कर्मकारों को निरंतर पर्याप्त पर्यवेक्षण मुहैय्या करने और उप- धारा (१) के अधीन बनाये गये स्वास्थ्य और सुरक्षा से संबंधित नियमों के अनुसरण की सुनिश्चिति करने के लिये और दुर्घटनाअों को रोकने के लिये आवश्यक कदम उठाने के लिये, जिम्मेवार होगा।
प्रथमोपचार। २०. प्रत्येक नियोक्ता, प्रथमोपचार सुविधा कार्य स्थल पर उपबंधित करेगा, जैसा कि विहित किया जाये। पिने का पानी। २१. नियोक्ता, स्थापना में नियोजित सभी व्यक्तियों के लिये, स्वास्थ्यकर पीने के पानी की पर्याप्त आपर्ुति, सुविधाजनक स्थित यथोचित स्थान पर मुहैय्या करेगा और संपोषण करेगा।
२२. नियोक्ता, पुरुषों और महिलाअों के लिये पर्याप्त शौचालय और मूत्रालय का उपबंध करेगा और यह शौचालय और मूत्रालय।
स्थापना में नियोजित कर्मकारों के लिये जैसे कि सुगम्य से, सुविधाजनक स्थान पर स्थित हो :
परंतु, जगह या अन्यथा के प्रतिबंध के कारण, स्थापना में उसकी असंभाव्यता के मामले में, कई नियोक्ता, शौचालय और मूत्रालय की सार्वजनिक सुविधाएँ मुहैय्या कर सकते हैं।
२३. प्रत्येक स्थापना में जिसमें पचास या अधिक कर्मकार नियोजित हैं, वहाँ, ऐसे कर्मकारों के बच्चों के बालवाडी की सुविधा। उपयोग के लिये, बालवाडी के रूप में, यथोचित कमरा या कमरों का उपबंध और रखरखाव किया जायेगा :
परंतु यदि, स्थापना का समूह, ऐसा निश्चित करते हैं की, एक किलोमीटर के घेरे के भीतर एक सार्वजनिक बालवाडी का उपबंध किया जाये, तब, आदेश में विर्िनदिष्ट की जाये, ऐसी शर्तों के अध्यधीन मुख्य सुविधाकार द्वारा, उसे अनुमति दी जायेगी ।
कैंटीन। २४. राज्य सरकार, स्थापना में, जिसमें एक सौ से कम न हों कर्मकार नियोजित हैं या सामान्य रूप से नियोजित हैं ; उसके कर्मकार के उपयोग के लिये जल-पान गृह (कैंटींन) मुहैय्या करना और संपोषित करना आवश्यक करेगा :
महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग सात, गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१ ११परंतु, स्थापनाअों का समूह, इस प्रकार निश्चित करता हैं कि, सार्वजनिक जल-पान गृह मुहैय्या किया जाये, तब आदेश में, विर्िनदिष्ट की जाये ऐसी शर्तों के अध्यधीन, आदेश द्वारा, मुख्य सुविधाकार द्वारा अनुमत किया जायेगा।
२५. (१) प्रत्येक नियोक्ता, विहित किया जाये ऐसे रजिस्टर और अभिलेख का रखरखाव करेगा।
(२) अभिलेख या इलेक्ट्रॉनिक रूप से या हस्तचालित रूप से रखरखाव करेगा :
रजिस्टर और अभिलेख का रखरखाव। परंतु, सुविधाकार द्वारा निरीक्षण के समय, यदि ऐसे अभिलेखों की संपठनीय प्रति की माँग की जाये, तब नियोक्ता या उसके प्रतिनिधि द्वारा सम्यक्तया हस्ताक्षरित कर प्रस्तुत की जायेगी।
(३) प्रत्येक नियोक्ता और उसकी अनुपस्थिति में प्रबंधक, माँग की जाने पर, मुख्य सुविधाकार और सुविधाकार के निरीक्षण के लिये, इस अधिनियम के अधीन और प्रयोजनों के लिये रखे गये सभी रजिस्टर, अभिलेख और सूचनाएँ प्रस्तुत करेगा।
(४) सभी ऐसे रजिस्टर और अभिलेख, स्थापना, जिससे वह संबंधित हैं, के परिसर में, रखे जायेंगे।
वर्ाषिक विवरण। २६. स्थापना का नियोक्ता, विहित किये जाये ऐसे प्राधिकरण को, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में (इलेक्ट्रॉनिक प्ररूप समेत) वर्ाषिक विवरण प्रस्तुत करेगा।
अध्याय छह
प्रवर्तन और निरीक्षण।
स्थानीय प्राधिकरणों को अधिनियम का प्रवर्तन सौंपने के लिये उपबंध। २७. इस अधिनियम में अंर्तविष्ट किसी बाद के होते हुये भी, राज्य सरकार, राजपत्र, में अधिसूचना द्वारा, कोई अधिकतर सूचना या कारण देने की आवश्यकता के बिना, अधिघोषित करेगी कि, उस अधिसूचना में विर्िनदिष्ट किन्हीं स्थानीय प्राधिकरण या प्राधिकरणों या स्थानीय प्राधिकरणों के वर्ग, उस अधिसूचना में विर्िनदिष्ट दिनांक से इस अधिनियम के उपबंधों को प्रर्वतित करने के कर्तव्य का पालन करेगा। ऐसे दिनांक से, उस स्थानिय प्राधिकरण का, ऐसे स्थानीय प्राधिकरणों की अधिकारिता के अध्यधीन, राज्य सरकार, विहित कर सके ऐसे पर्यवेक्षण के अध्यधीन क्षेत्रों के संबंध में, अधिनियम के उपबंधों को प्रर्वतित करने का कर्तव्य होगा।
२८. (१) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, मुख्य सुविधाकार की नियुक्ति कर सकेगी, जो, इस अधिनियम के अधीन, मुख्य सुविधाकार को प्रदत्त की गयी शक्तियों के अतिरिक्त में संपूर्ण राज्य में, सुविधाकार की शक्ति का प्रयोग करेगा।
मुख्य सुविधाकार या सुविधाकार की नियुक्ति और उनकी शक्तियाँ। (२) राज्य सरकार, राजपत्र, में अधिसूचना द्वारा, ऐसे व्यक्ति को नियुक्त कर सकेगी, जो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये, सुविधाकार या सुविधाकार को बनने के लिये, विहित की जाये ऐसी अर्हता धारण करते हो तो नियुक्त कर सकेगी।
(३) राज्य सरकार, स्थापनाअों के यादृच्छिक निरीक्षण के लिये योजना विहित कर सकेगी, जो वेब-आधारित निरीक्षण की समय-सारणी के निर्माण का उपबंध करेगी।
(४) विहित की जाये ऐसी शर्तों के अध्यधीन, सुविधाकार स्थानिक सीमाअों के भीतर, जिसके लिये वह नियुक्त हैं,-----
(एक) नियोक्ताअों और मजदूरों को सलाह देगा और इस अधिनियम के उपबंधों के साथ प्रभावी रूप से अनुपालन करने के लिये, आवश्यक समझे जाये, ऐसी सूचना का उपबंध करेगा ;
(दो) उप-धारा (३) में विर्िनदिष्ट निरीक्षण के लिये, योजनाअों के अनुसरण में, स्थापना का निरीक्षण करना, और-----
(क) सभी युक्तियुक्त समय पर और सभी सहायताअों के साथ, यदि किन्हीं, जैसा कि वह उचित समझे, सरकार की सेवा या स्थानीय प्राधिकरण में के व्यक्ति होते हुये, कोई स्थान, जो, स्थापना हैं का विश्वास करता हैं या कारण बनता हैं, प्रवेश करेगा ;
भाग सात-----२अ१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग सात, गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१ (ख) परिसरों, विहित किये गये रजिस्टरों, अभिलेखों और सूचनाअों का ऐसा परीक्षण करेगा और प्रत्यक्ष स्थान पर या अन्यथा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के कार्यन्वयन के लिये, वह आवश्यक समझे, ऐसे किन्हीं व्यक्तियों का सबूत लेगा ;
(ग) किसी व्यक्ति को, सूचना देने के लिये, जो उसकी शक्ति में, व्यक्तियों के नामों और पतों के संबंध में हैं, आवश्यक करेगा ;
(घ) किसी भी व्यक्ति, व्यक्ति के नाम और पतों के संबंध में जो जानकारी देना उसके अधिकार में, है ऐसी कोई भी जानकारी देना ;
(ङ) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के संबंध में सुसंगत समझी जाए और सुविधाकार का यह विश्वास करने का कारण है कि नियोक्ता द्वारा अपराध हुआ है तो सुविधाकार के रूप में ऐसा रजिस्टर, मजदूरी अभिलेख या सूचना या उसका भाग की तलाशी, अभिग्रहण या प्रतियाँ ले सकेगा ;
(च) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा आवृत्त न होनेवाले दोष या दुरुपयोग राज्य सरकार के ध्यान में लायेगा ; और
(छ) जैसा कि विहित किया जाए ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा :
परन्तु, इस धारा के अधीन किसी भी व्यक्ति को उसे स्वयं दोषी ठहराया गया है तो किसी प्रश्न का जवाब देने या प्रवृत्त किसी दस्तावेज देने के लिए मजबूर नहीं करेगा।
(५) मुख्य सुविधाकार, सुविधाकार की सभी शक्तियों और कार्यों का प्रयोग करेगा और सुविधाकार के कार्यों पर नियंत्रण और पर्यवेक्षण करेगा और स्थानिय क्षेत्र की अधिकारिता के अध्यधीन सुविधाकार के कार्यक्षेत्र समनुदेशित या पूर्वसमनुदेशित कर सकेगा।
सन् १८६० का ४५। (६) उप-धारा (१) और (२) के अधीन नियुक्त किये गये मुख्य सुविधाकार और सुविधाकार द्वारा आवश्यक किसी दस्तावेज प्रस्तुत करने या किसी जानकारी देनेवाली कोई व्यक्ति भारतीय दण्ड़ संहिता की धारा १७५ और १७६ के अर्थान्तर्गत विधिक रूप से बाध्य समझी जायेगी।
सन् १९७४ का २। (७) दण्ड़ प्रक्रिया संहिता, १९७३ के उपबंध, उप-धारा (४) के खण्ड (दो) के उप-खण्ड (ङ) के अधीन तलाशी या अभिग्रहण को जहाँ तक लागू होगी उक्त संहिता की धारा ९४ के अधीन जारी किये गये अधिपत्र के प्राधिकरण के अधीन की गई तलाशी या अभिग्रहण को लागू होगी।
(८) उप-धारा (१) और (२) अधीन नियुक्त किया गया प्रत्येक मुख्य सुविधाकार और सुविधाकार, भारतीय सन् १८६० का ४५। दण्ड़ संहिता की धारा २१ के अथार्ंन्तर्गत लोक सेवक समझा जायेगा।
अध्याय सात
अपराध और शास्तियाँ।
२९. (१) जो कोई इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गये नियमों का उल्लंघन करता है तो ऐसे जुर्माने से जो एक लाख रुपयों तक बढ़ाया जा सकेगा और उल्लंघन जारी रहने के मामले में अतिरिक्त जुर्माने से जो ऐसा उल्लंघन जारी रहने के दौरान प्रत्येक दिन के लिए दो हजार रुपयों तक बढ़ाया जा सकेगा, से दण्डित किया जायेगा :
इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन के लिए शास्ति।
परन्तु, जुर्माने की कुल रकम नियोजित प्रति कर्मकार, दो हजार रुपयों से अधिक नहीं होगी।
(२) यदि कोई व्यक्ति जो उप-धारा (१) के अधीन दण्डनिय किसी अपराध का दोषसिद्ध है तो उसी समान उपबंधों का उल्लंघन या अनुपालन करने में असमर्थ रहा है तो किसी अपराध का दुबारा दोषी पाया जाता है तो उसे उत्तरवर्ती दोषसिद्धि पर ऐसे जुर्माने से जो दो लाख रुपयों तक बढ़ाया जा सकेगा, से दण्डित किया जायेगा :
परन्तु, जुर्माने की कुल रकम नियोजित प्रति कर्मकार तीन हजार रुपयों से अधिक नहीं होगी।महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग सात, गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१ १३ अपघात के परिणास्वरूप इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन के लिए शास्ति। ३०. इस अधिनियम में अन्यथा अभिव्यक्त रूप से उपबंधित के सिवाय, जहाँ नियोक्ता जिसके परिणामस्वरुप, कर्मकार को गंभीर शारीरिक क्षति या मृत्यू किसी अपघात के कारण के हुई हे तो इस अधिनियम के उपबंधों या तद्धीन बनाए गए नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया जाता है तो उसे दोषसिद्धि पर ऐसे जुर्माने से जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकेगा या ऐसे जुर्माने से जो दो लाख रूपयों से कम नहीं होगा और जो पाँच लाख रुपयों तक बढ़ाया जा सकेगा या दोन्हों से दण्डित किया जायेगा।
रजिस्टर, आदि के उपबंधों को बाधा डालने या अस्वीकृत करने के लिए शास्ति। ३१. (१) जो कोई इस अधिनियम द्वारा या के अधीन किन्ही प्रदत्त शक्तियोें के प्रयोग में सुविधाकार जानबूझकर बाधा डालता है या किसी स्थापना के संबंध में इस अधिनियम द्वारा या के अधीन प्राधिकृत किये गये सुविधाकार को किसी निरीक्षण, परीक्षा, जाँच या अन्वेषण करने के लिए किसी युक्तियुक्त सुविधा देने के लिए इन्कार करता है या जानबूझकर उपेक्षा करता है तो दोषसिद्धि पर, ऐसे जुर्माने से जो दो लाख रूपयों तक बढ़ाया जा सकेगा, से दण्डित किया जायेगा।
(२) जो भी कोई, इस अधिनियम या दद्धीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में गए किसी रजिस्टर या अन्य दस्तावेज सुविधाकार की माँग पर प्रस्तुत करने के लिए जानबूझकर इंकार करता है या इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों के अनुसरण में कार्य करनेवाला सुविधाकार के समक्ष उपस्थित होने से रोकने या रोकने का प्रयास करने या उसे रोकने का विश्वास करने का कारण है कुछ करेगा तो दोषसिद्धि पर, ऐसे जुर्माने से जो दो लाख रूपयों तक बढ़ाया जा सकेगा, से दण्डित किया जायेगा :
परन्तु, जुर्माने की कुल रकम नियोजित प्रति कर्मकार दो हजार रूपयों से अधिक नहीं होगी।
अपराधों का संज्ञान। ३२. (१) सुविधाकार को तथाकिथित अपराध हुआ है की जानकारी के दिनांक से तीन महीनों की अवधि के भीतर सुविधाकार द्वारा उसके संबंध में कोई शिकायत नहीं की जाती है तबतक न्यायालय इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का संज्ञान नहीं करेगा :
परन्तु, जहाँ सुविधाकार द्वारा लिखित आदेश की अवज्ञा से मिलकर ऐसे अपराध के संबंध में जिसमें तथाकथित अपराध हुआ है के दिनांक से छह महीने के भीतर उसकी शिकायत की याजेगी।
(२) महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट से अधीनस्थ न्यायालय, इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा।
अपराधों का प्रशमन। ३३. (१) इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध, केवल कारावास, या कारावास से, और जुर्माने से भी दण्डनीय किसी अपराध के लिए अभियुक्त व्यक्ति के किसी आवेदन पर, या तो किसी अभियोजन के पूर्व या के पश्चात्, जैसा कि विहित किया जाए ऐसी रीत्या, ऐसे अपराध के लिए उपबंधित जुर्माने से राज्य सरकार राजपत्र में विर्िनदिष्ट करे ऐसे राजपत्रित अधिकारी द्वारा, अपराध प्रशमित किया जायेगा।
(२) उप-धारा (१) में अन्र्तविष्ट कोई बात किसी व्यक्ति द्वारा घटित हुआ कोई अपराध उस दिनांक से पाँच वर्षों की अवधि के भीतर दूसरी बार या उसके पश्चात् हुआ है तो लागू नहीं होगा,----
(क) जो अपराध पूर्वतर प्रशमित या उसके समान अपराध उससे हुआ है ;
(ख) जिस अपराध के लिए ऐसा व्यक्ति पूर्वतर दोषसिद्ध या समान अपराध उससे हुआ है ;
(३) उप-धारा (१) में र्िनदिष्ट प्रत्येक अधिकारी, राज्य सरकार के निदेशन, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अध्यधीन किसी अपराध के प्रशमन की शक्तियों का प्रयोग करेंगे।
(४) अपराध के प्रशमन के लिए प्रत्येक आवेदन जैसा कि विहित किया जाए ऐसे प्ररुप और रीत्या किया जाएगा।
(५) किसी अभियोजन संस्थित करने के पूर्व कोई अपराध प्रशमित होता है तो अभियोजन जिसमें अपराध इस प्रकार प्रशमित है के संबंध में अपराधी के विरुद्ध ऐसे अपराध के संबंध में संस्थित किया जायेगा।१४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग सात, गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१ (६) किसी अपराध का प्रशमन किसी अभियोजन के संस्थित होने के पश्चात् किया गया है तो ऐसा अभियोजन, उप-धारा (१) में र्िनदिष्ट अपराध द्वारा जिसमें अभियोजन लंबित है तो लिखित में न्यायालय के ध्यान में लाया जायेगा और अपराध के अभियोजन की ऐसी सूचना पर जिस व्यक्ति के विरुद्ध अपराध इस प्रकार प्रशमित है उसे छोड दिया जायेगा।
(७) कोई व्यक्ति जो उप-धारा (१) में र्िनदिष्ट अधिकारी द्वारा किये गये किसी आदेश का अनुपालन करने में असफल होता है तो, ऐसे जुर्माने के अतिरिक्त अपराध के लिए उपबंधित अधिकतम जुर्माने के बीस प्रतिशत के समान राशि आदा करने के लिए दायी किया जाएगा।
(८) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन दण्डनीय अपराध इस धारा के उपबंधों के अधीन और के अनुसरण में, को छोडकर प्रशमित किया जायेगा।
अध्याय आठ
विविध।
छूट देने की शक्ति।
३४. राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह अधिनियम जिसे लागू होता है उस किसी स्थापना या उसके वर्ग या किसी नियोक्ता या कर्मकार या व्यक्ति या नियोक्ताअों के वर्ग या कर्मकार या व्यक्तियों को इस अधिनियम या नियमों के सभी या किन्हीं उपबंधों के प्रवर्तन से, यदि वह उचित समझे, ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर किसी अवधि के लिए छूट दे सकेगी।
३५. इस अधिनियम की कोई भी बात, ऐसी स्थापना को लागू किसी अन्य विधि, संविधा, रुढी या प्रथा या ऐसी स्थापना में नियोक्ता या कर्मकार बाध्यकारी किसी फैसला, समझोता या करार के अधीन जिसमें किसी स्थापना में कर्मकार इस अधिनियम के प्रारम्भण के दिनांक पर किसी अधिकार या विशेषाधिकार के लिए हकदार है तो ऐसा अधिकार या विशेषाधिकार उससे अधिक अनुकूल है तो वह इस अधिनियम के अधीन हकदार होगा।
अन्य विधि आदि के अधीन अधिकार और विशेषाधिकार प्रभावी नहीं होंगे।
३६. इस अधिनियम के अधीन सद्भावनापूर्वक कृत या किये जाने के लिये आशायित किसी बात के लिये, सद्भावना पूर्वक कृत्यों का संरक्षण।
किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाहीयाँ नहीं की जायेगी।
३७. (१) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ को कार्यान्वित करने नियम बनाने की शक्ति। के लिये नियम बना सकेगी।
(२) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए, सभी नियम पूर्व प्रकाशन की शर्तों के अध्यधीन होंगे।
(३) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम उसके बनाए जाने के पश्चात् यथा संभव शीघ्र, राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो कि जाहे एक सत्र में हो या दो या अधिक अनुक्रमिक सत्रों में हो, और यदि उस सत्र के, जिसमें उसे इस प्रकार रखा गया है या ठिक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन नियम में कोई उपांतरण करने के लिये सहमत होते हों या दोनों सदन इस बात के लिए सहमत होते हों कि नियम न बनाया जाये और ऐसे विनिश्चय को राजपत्र में अधिसूचित करते है, तो नियम राजपत्र में ऐसे निर्णय के प्रकाशन के दिनांक से केवल ऐसे परिर्वतिक रूप में ही प्रभावी होगा, या, यथास्थिति, निष्प्रभावी हो जाएगा ; तथापि, ऐसा कोई उपांतरण या बातिलिकरण, उस नियम के अधीन पहले की गई या किये जाने से विलुप्त किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा। कठिनाईयों के निराकरण की शक्ति।
३८. (१) इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में, यदि कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो, राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों से अन् असंगत ऐसी कोई बात कर सकेगी, जो उसे कठिनाई के निराकरण के प्रयोजन के लिए आवश्यक या इष्टकर प्रतीत हो :
परन्तु, इस अधिनियम के प्रारम्भण के दिनांक से दो वर्षों की अवधि अवसित होने के बाद, ऐसा कोई आदेश नहीं बनाया जायेगा।
(२) उप-धारा (१) के अधीन बनाया गया प्रत्येक आदेश, उसके बनाए जाने के बाद, यथासंभव शीघ्र, राज्य विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जायेगा।महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग सात, गुरुवार ते बुधवार, सप्टेंबर १२-१८, २०१९/भाद्र २१-२७, शके १९४१ १५ ३९. इस अधिनियम के प्रारम्भण के दिनांक को और से, महाराष्ट्र दुकान और स्थापना अधिनियम निरसित सन् १९४८ का ७९। होगा :
महाराष्ट्र दुकान और स्थापना अधिनियम का निरसन। परन्तु,-----
(क) इस प्रकार निरसित अधिनियम के उपबंधों के अधीन किया गया, जारी या दिया गया प्रत्येक नियुक्ति आदेश, नियम, उप-विधि, विनियम, अधिसूचना, रजिस्ट्रीकरण या सूचना इस अधिनियम के अधीन किया गया, जारी या दिया गया प्रत्येक नियुक्ति आदेश, नियम, उप-नियम, विनियम अधिसूचना, रजिस्ट्रीकरण या सूचना जहाँ तक इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं है तो इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किया गया, जारी या दिया गया समझा जायेगा ;
(ख) इस प्रकार निरसित अधिनियम के उपबंधों के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के विचारण संबंधी कोई कार्यवाही यदि मानों कि उक्त अधिनियम निरसित नहीं किया गया था परन्तु वह प्रवर्तक में जारी था तो जारी और पूरा किया जायेगा और ऐसी कार्यवाही पर अधिरोपित किसी शास्ति इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन वसूल की जायेगी।
(यथार्थ अनुवाद),
हर्षवर्धन जाधव, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY DIRECTOR, DR. NAMDEO KONDAJI BHOSALE, PRINTED AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004, EDITOR : DIRECTOR, DR. NAMDEO KONDAJI BHOSALE.