RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ५, अंक १४(५)] बुधवार, सप्टेंबर १८, २०१९/भाद्र २७, शके १९४१ [पृष्ठे ३, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक २६
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)
ग्रामविकास विभाग
बांधकाम भवन, २५ मर्झबान मार्ग, फोर्ट, मुंबई ४०० ००१, दिनांकित २३ अगस्त २०१९ ।
MAHARASHTRA ORDINANCE NO. XXI OF 2019.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA ZILLA PARISHADS AND
PANCHAYAT SAMITIS ACT, 1961.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक २१, सन् २०१९।
महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ में अधिकतर संशोधन करने
संबंधी अध्यादेश ।
क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;
और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं, जिनके कारण उन्हें इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिये महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम १९६१ में अधिकतर संशोधन करने के लिये सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ;
(१)
भाग सात----२६-१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, सप्टेंबर १८, २०१९/भाद्र २७, शके १९४१ अब इसलिये, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खंड (१) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते है, अर्थात् :----
१. (१) यह अध्यादेश महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति (संशोधन) अध्यादेश, २०१९ कहलाये। रूहह्य द्ध न्द्ध
(२) यह तुरंत प्रवृत्त होगा ।
२. महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ (जिसे इसमें आगे '' मूल अधिनियम " सन् १९६२ का महा. ५। कहा गया है) की धारा ७५ख में, निम्न परंतुक, जोडे जायेंगे, अर्थात् :----
रूष्ष् १९६२ ॅ द्ध. ५ ॅ्र न् ७५ द्ध रूह
'' परंतु, इस धारा के अधीन प्राधिकार देने की अवधि चार महिने से अधिक नहीं होगी ;
परंतु यह और कि, आदेश में अभिलिखित की गयी आपवादिक परिस्थितियों में, उक्त अवधि आदेश में विर्िनदिष्ट की जाये ऐसी अधिकतर अवधि के लिये समय-समय पर विस्तारित की जायेगी किन्तु, प्राधिकार देने की ऐसी अवधि, कुल मिलाकर छह महिने से अधिक नहीं होगी " ।
३. मूल अधिनियम की धारा ९१ख में, निम्न परंतुक, जोडे जायेंगे, अर्थात् :----
'' परंतु, इस धारा के अधीन प्राधिकार देने की अवधि, चार महिने से अधिक नहीं होगी ;
रूष् १९६२ ॅ द्ध. ५ ॅ्र न् ९१ द्ध रूह
परंतु, यह और कि, आदेश में अभिलिखित की गई आपवादिक परिस्थितियों में, उक्त अवधि आदेश में विर्िनदिष्ट की जाये ऐसी अधिकतर अवधि के लिये समय-समय पर विस्तारित की जायेगी किन्तु, प्राधिकार देने की ऐसी अवधि, कुल मिलाकर छह महीने से अधिक नहीं होगी "।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, सप्टेंबर १८, २०१९/भाद्र २७, शके १९४१ ३
वक्तव्य
महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ (सन् १९६२ का महा. ५) की धाराएँ ७५ख और ९१ख, जब पीठासीन अधिकारियों के समस्त पद एक साथ रिक्त हो जाते है तब पदों की सभी शक्तियों का प्रयोग करने और सभी कर्तव्यों का पालन करने के लिये अधिकारियों को प्राधिकार देने का आदेश जारी करने के लिये राज्य सरकार को सशक्त करती है ।
२. तथापि, यह धाराएँ स्पष्टतया उपबंध नहीं करती है जिस दौरान ऐसे प्राधिकार देना प्रभावी होता है । ३. यह सुनिश्चित करना है कि, पीठासीन अधिकारियों के पद शीघ्रता से भरने के लिये, इन धाराअों के अधीन प्राधिकार देने की अवधियाँ के लिये उपबंध करना इष्टकर समझा गया है वह अवधि चार महिने से अधिक प्रभावी नहीं होगी और आपवादिक परिस्थितियों में उक्त अवधि समय-समय पर विस्तारित की जायेगी किन्तु, ऐसे प्राधिकार देने के दौरान कुल मिलाकर छह महिने से अधिक की प्रभावी नहीं होगी ।
चँूकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का समाधान हो चुका है कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हे उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिये, महाराष्ट्र जिल्हा परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ में अधिकतर संशोधन करने के लिये सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है ।
चे. विद्यासागर राव, महाराष्ट्र के राज्यपाल ।
मुंबई, दिनांकित २२ अगस्त २०१९।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से, असीम गुप्ता,
सरकार के प्रधान सचिव ।
(यथार्थ अनुवाद), नं. मा. राऊत, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
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