RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ५, अंक १७(२)] बुधवार, ऑक्टोबर २३, २०१९/कर्ातिक १, शके १९४१ [पृष्ठे ६, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक ३०
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)
गृह विभाग मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरू चौक, मंत्रालय, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित १८ सितंबर २०१९।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. XXV OF 2019.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA PROHIBITION ACT.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्र. २५ सन् २०१९।
महाराष्ट्र मद्यनिषेध अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने संबंधी अध्यादेश ।
क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;
और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें, इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र मद्यनिषेध अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ;
सन् १९४९ का महा. २५।
भाग सात--३०-१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर २३, २०१९/कर्ातिक १, शके १९४१ अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्ितयों का प्रयोग करते हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :----
१. (१) यह अध्यादेश महाराष्ट्र मद्यनिषेध (संशोधन) अध्यादेश, २०१९ कहलाए।
संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भण।
(२) यह तुरन्त प्रवृत्त होगा।
२. महाराष्ट्र मद्यनिषेध अधिनियम (जिसे इसमें आगे, " मूल अधिनियम " कहा गया है), की धारा सन् १९४९ का २५। २ के,---
सन् १९४९ का २५ की धारा २ में संशोधन।
(एक) खण्ड (१) के पूर्व निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
" (१-क) " पूर्णतया मद्यनिषेधित क्षेत्र " का तात्पर्य, धारा १३९ की, उप-धारा (१) के खण्ड (क) के अधीन सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किये गये राजपत्र में प्रकाशित सामान्य या विशेष आदेश द्वारा मद्यर्वजित जिला या उसके भाग के रूप में घोषित, राज्य के भीतर का जिला या जिलों का या उसके भाग से है ; "।
(दो) खण्ड (३४) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :---
" (३४क) " विहित सीमा " का तात्पर्य, सरकार द्वारा समय-समय से, राजपत्र में जारी किये गये आदेश द्वारा घोषित मादक-द्रव्य या कतिपय रुपयों की रक्कम तक जब्त किये गये मादक-द्रव्य के मूल्य की मात्रा कब्जे में रखने की सीमा, से है ; "।
३. मूल अधिनियम की धारा ६५ के,----
(क) खण्ड (ङ) में, " कब्जेे में रखेगा " शब्दों के स्थान में, " विहित की गई सीमा से अधिक कब्जे सन् १९४९ का २५ की धारा ६५ का संशोधन।
में रखने की मात्रा " शब्द रखे जायेंगे ;
(ख) " दोषसिद्धि पर, " शब्दों से प्रारम्भ होनेवाले और " पचास हजार रुपयों या दोनों से " शब्दों के समाप्त होनेवाले प्रभाग के स्थान में, निम्न रखा जायेगा, अर्थात् :---
" दोषसिद्धि पर,----
(क) यदि अपराध, पूर्णतया मद्यनिषेधित क्षेत्र से अन्य क्षेत्र में हुआ है तो, प्रत्येक ऐसे अपराध के लिए तीन वर्षों से कम न हो परंतु, पाँच वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास से या पच्चीस हजार से कम न हो परंतु, पचास हजार रुपयों तक बढाया जा सके ऐसे जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा ;
(ख) यदि अपराध, पूर्णतया मद्यनिषेध क्षेत्र में हुआ है तो,---
(एक) प्रथम अपराध के लिए, तीन वर्षों से कम न हो परंतु, पाँच वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास से और पच्चीस हजार रुपयों से कम न हों परंतु, एक लाख रुपयों तक बढाया जा सके या उसके द्वारा अपवंचित शुल्क या फीस की राशि के दुगनी बार, इनमें से जो भी अधिकतर हो, के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा ;
(दो) द्वितीय अपराध के लिए, पाँच वर्षों से कम न हो परंतु, सात वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास के और एक लाख रुपयों से कम न हो परंतु, दो लाख रुपयों तक बढाया जा सके या उसके द्वारा अपवंचित शुल्क या फीस की राशि तिगुनी इनमें से जो भी अधिकतर हो, के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा ;
(तीन) तिसरे या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, सात वर्षों से कम न हो परंतु, दस वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास से और दो लाख रुपयों से कम न हो परंतु, पाँच लाख रुपयों तक बढाया जा सके या उसके द्वारा अपवंचित शुल्क या फीस की राशि से चौगुना इनमें से जो भी अधिकतर हो, के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा। "।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर २३, २०१९/कर्ातिक १, शके १९४१ ३ ४. मूल अधिनियम की धारा ६६ की, उप-धारा (१) के,----
(क) खण्ड (ख) में, " उपभोग " शब्द के पश्चात्, " विहित की गई सीमा तक की मात्रा कब्जे में
सन् १९४९ का २५ की धारा ६६ में संशोधन। रखने " शब्द निविष्ट किए जायेंगे ;
(ख) परिच्छेद (एक), (दो) और (तीन) के स्थान में, निम्न रखा जायेगा, अर्थात् :---
(एक) यदि, अपराध, पूर्णतया से मद्यनिषेध क्षेत्र से अन्य क्षेत्र में हुआ है तो,----
(क) प्रथम अपराध के लिए, छह महीने तक बढाई जा सके ऐसी अवधि के कारावास से या दस हजार रुपयों तक बढाया जा सके ऐसे जुर्माने से दण्डित किया जायेगा :
परंतु, न्यायालय के न्याय निर्णय में उल्लिखित किए जानेवाले उपबंधों के प्रतिकूल विशेष और पर्याप्त कारण न होते है तो ऐसा कारावास तीन महीने से कम नहीं होगा या जुर्माना पाँच हजार रुपयों से कम नहीं होगा।
(ख) द्वितीय अपराध के लिए, दो वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास से या बीस हजार रुपयों तक बढाया जा सके ऐसे जुर्माने से दण्डित किया जायेगा :
परंतु, न्यायालय के न्याय निर्णय में उल्लिखित किए जानेवाले उपबंधों के प्रतिकूल विशेष और पर्याप्त कारण न होते है तो ऐसे कारावास से जो छह महीने से कम नहीं होगा या जुर्माना दस हजार रुपयों से कम नहीं होगा ;
(ग) तिसरे या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, दो वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास से या बीस हजार रुपयों तक बढाया जा सके ऐसे जुर्माने से दण्डित किया जायेगा :
परंतु, न्यायालय के न्याय निर्णय में उल्लिखित किए जानेवाले उपबंधों के प्रतिकूल विशेष और पर्याप्त कारण न होते है तो ऐसा कारावास नौ महीने से कम नहीं होगा या जुर्माना दस हजार रुपयों से कम नहीं होगा ;
(दो) यदि, अपराध, पूर्णतया मद्यनिषेधित क्षेत्र में हुआ है तो,----
(क) प्रथम अपराध के लिए, छह महीने तक बढाई जा सके ऐसी अवधि के कारावास से जो दस हजार रुपयों तक बढाया जा सके या जब्त किये गये शराब के मूल्य के दोगुनी बार, इनमें से जो भी अधिकतर हो के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा ;
(ख) द्वितीय अपराध के लिए दो वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास से जो बीस हजार रुपयों तक बढाया जा सके या जब्त किये गये शराब के मूल्य से तिगुनी बार इनमें से जो भी अधिकतर हो, के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा ;
(ग) तिसरे या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, दो वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास से, जो बीस हजार रुपयों तक बढाया जा सके या जब्त किये गये शराब के मूल्य से चौगुना बार, इनमें से जो भी अधिकतर हो के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा।े "।
५. मूल अधिनियम की धारा ६८ में, " दोषसिद्धि पर " शब्दों से प्रारम्भ होनेवाले और " पचास हजार रुपयों या दोनों से दण्डित किया जायेगा " शब्दों से समाप्त होनेवाले प्रभाग के स्थान में, निम्न रखा जायेगा, अर्थात् :----
सन १९४९ का २५ की धारा ६८ में संशोधन। " दोषसिद्धि पर,----
(क) यदि अपराध, पूर्णतया मद्यनिषेधित क्षेत्र से अन्य क्षेत्र में हुआ है तो ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए तीन वर्षों से कम न हो परंतु, पाँच वर्षों तक बढायी जा सके ऐसे अवधि के कारावास से जो पच्चीस हजार रुपयों से कम न हो परंतु, पचास हजार रुपयों तक बढाया जा सके ऐसे जुर्माने से या दोनोंें से दण्डित किया जायेगा।
(ख) यदि अपराध, पूर्णतया मद्यनिषेधित क्षेत्र में हुआ है तो,---
(क) प्रथम अपराध के लिए, तीन वर्षों से कम न हो परंतु, पाँच वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास से, जो पच्चीस हजार रुपयों से कम न हो, परंतु, एक लाख रुपयों तक बढाया जा सके या उसके द्वारा अपवंचित शुल्क या फीस की राशि से दोगुनी बार, जो भी अधिकतर हो, के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा ;
भाग सात--३०-२४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर २३, २०१९/कर्ातिक १, शके १९४१ (ख) द्वितीय अपराध के लिए, पाँच वर्षों से कम न हो परंतु, सात वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास से जो एक लाख रुपयों से कम न हों, परंतु, दो लाख रुपयों तक बढाया जा सके या उसके द्वारा अपवंचित शुल्क या फीस की राशि से तिगुनी बार इसमें से जो भी अधिकतर हो, के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा।
(ग) तिसरे या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, सात वर्षों से कम न हो परंतु, दस वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास से जो दो लाख रुपयों से कम न हों परंतु पाँच लाख रुपयों तक बढाया जा सके या उसके द्वारा अपवंचित शुल्क या फीस की राशि से चौगुना बार, इनमें से जो भी अधिकतर हो, के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा।"।
रूष् १९४९ ॅ २५ ॅ्र न् ८३ द्ध रूह
६. मूल अधिनियम की धारा ८३ में, " ऐसे प्रत्येक व्यक्ितयाँ " शब्दों से प्रारम्भ होनेवाले और " पचास हजार रुपयों या दोनो से दण्डित किया जायेगा " शब्दों से समाप्त होनेवाले प्रभाग के स्थान में, निम्न रखा जायेगा, अर्थात् :----
" ऐसे प्रत्येक व्यक्ितयों को दोषसिद्धि पर,----
(एक) यदि अपराध, पूर्ण रूप से मद्यनिषेधित क्षेत्र से अन्य क्षेत्र में हुआ है तो ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए तीन वर्षों से कम न हो परंतु, जिसे पाँच वर्षों तक बढाया जा सके ऐसे अवधि के कारावास से या पच्चीस हजार रुपयों से कम न हो परंतु, जिसे पचास हजार रुपयों तक बढाया जा सके ऐसे जुर्माने से या दोनोंें से दण्डित किया जायेगा ;
(दो) यदि वह अपराध, पूर्णतया मद्यनिषेधित क्षेत्र में किया है तो,---
(क) प्रथम अपराध के लिए, तीन वर्षों से कम न हो परंतु, पाँच वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास से, और पच्चीस हजार रुपयों से कम न हो, परन्तुु, एक लाख रुपयों तक बढाया जा सके या उसके द्वारा अपवंचित शुल्क या फीस की राशि के दुगनी बार, इसमें से जो भी अधिक हो, के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा ;
(ख) दूसरे अपराध के लिए, पाँच वर्षों से कम न हों परन्तु, सात वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास से और एक लाख रुपयों से कम न हों, परन्तु, दो लाख रुपयों तक बढाया जा सके या उसके द्वारा अपवंचित शुल्क या फीस की राशि के तिगुनी बार, इसमें जो भी अधिकतर हो, के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा ;
(ग) तृतीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिए, सात वर्षों से कम न हों परन्तु, दस वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास से और दो लाख रुपयों से कम न हों परन्तुु पाँच लाख रुपयों तक बढाया जा सके या उसके द्वारा अपवंचित शुल्क या फीस की राशि से चौगुना बार, इसमें से जो भी अधिकतर हो, के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा।"।
७. मूल अधिनियम की धारा ८५ की उप-धारा (१) के,----
(क) खण्ड (क) में, " और " शब्द के स्थान में, " या " शब्द रखा जायेगा ;
रूष् १९४९ ॅ २५ ॅ्र न् ८५ द्ध रूह
(ख) खण्ड (ख) में, " और " शब्द के स्थान में, " या " शब्द रखा जायेगा।
८. मूल अधिनियम की धारा ८६ की, उप-धारा (१) में, " दोषसिद्धि पर " शब्दों से प्रारम्भ होनेवाले और " पाँच हजार रुपयों से कम न हो " शब्दों से समाप्त होनेवाले प्रभाग के स्थान में, निम्न रखा जायेगा, अर्थात् :---
सन् १९४९ का २५ की धारा ८६ में संशोधन।
" दोषसिद्धि पर,----
(एक) यदि अपराध पूर्णतया मद्यनिषेधित क्षेत्र से अन्य क्षेत्र में किया गया है तो छह महीने से बढाया जाए ऐसी अवधि के कारावास से या दस हजार रुपयों से बढाया जाए ऐसे जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा :
परन्तु, न्यायालय के न्यायनिर्णय में उल्लिखित किये जानेवाले उपबंधों के विरुद्ध विशेष और पर्याप्त कारण न होते है, तो कारावास तीन महिने से कम नहीं होगा और जुर्माना पाँच हजार रुपयों से कम नहीं होगा ;
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर २३, २०१९/कर्ातिक १, शके १९४१ ५(दो) यदि अपराध पूर्णतया मद्यनिषेधित क्षेत्र में हुआ है तो ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए, तीन वर्षों से कम न हों परन्तु, जिसे पाँच वर्षों तक बढायी जा सके ऐसी अवधि के कारावास से और पच्चीस हजार रुपयों से कम न हो परन्तु, पचास हजार रुपयों से बढाया जा सके या उसके द्वारा अपवंचित शुल्क या फीस की राशि के दुगनी बार, इसमें जो भी अधिकतर हो, के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा।
९. मूल अधिनियम की धारा १०४ क के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :---
सन् १९४९ का २५ की नवीन धारा १०४ख का निदेशन। अप्रशमित अपराध। " १०४ख. धारा १०४ में अन्र्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन किसी शराब के विक्रय या विनिर्माण के लिये, जो कोई भी लाईसेंस धारण करता है या उसके नियोजन में किसी व्यक्ित या उसके स्पष्ट या विवक्षित अनुमति से, उसकी ओर से कार्य करनेवाले व्यक्ित द्वारा पूर्णतया मद्यनिषेधित क्षेत्र में, शराब का विक्रय करने या परिवहन करने या उसे कब्जे में रखने का अपराध किया है तो ऐसा अपराध प्रशमित नहीं होगा।"।
१०. मूल अधिनियम की धारा ११५ में, " परन्तु, जुर्माना, तीन हजार रुपयों से अधिक नहीं होगा " शब्द अपमर्ाजित किये जायेंगे।
सन् १९४९ का २५ की धारा ११५ में संशोधन। ११. मूल अधिनियम की धारा ११६ में, निम्न धारा रखी जायेगी, अर्थात् :---
सन् १९४९ का २५ की धारा ११६ में संशोधन। " ११६. (१) किये गये अपराधों के विचारण के लिए,----
(क) राज्य के किसी क्षेत्र में धाराएँ ६५, ६८, ७०, ७२ और ८३ के अधीन ; और
मजिस्ट्रटों द्वारा अपनायी जानेवाली प्रक्रिया। (ख) पूर्णतया मद्यनिषेधित क्षेत्र में, धारा ८६ के अधीन, मजिस्ट्रेट, वारंट मामले के विचारण के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ में विहित की गयी प्रक्रिया अपनायेगा।
सन् १९७४ का २।
सन् १९७४ का २।
(२) इस अधिनियम के अधीन अपराधों के विचारण के लिए, उप-धारा (१) में विर्िनदिष्ट से अन्य राज्य के किसी क्षेत्र में मजिस्ट्रेट, जिसमें किसी अपील संस्थित होने पर संक्षिप्त मामलों के विचारण के लिए, दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ में विहित प्रक्रिया अपनायेगा।"।
१२. मूल अधिनियम की धारा ११९ में, " और ८३ " अंक और शब्द के स्थान में, " ८३ और ८६ " अंक और शब्द रखे जायेंगे।
सन् १९४९ का २५ की धारा ११९ में संशोधन।६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर २३, २०१९/कर्ातिक १, शके १९४१
वक्त्तव्य ।
महाराष्ट्र मद्यनिषेध अधिनियम (सन् १९४९ का २५) के उपबंधों और तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन विभिन्न प्रकार के लाइसेंस और परमिट दिये जाते हैं। उक्त अधिनियम के उपबंधों और तद्धीन बनाए गए नियमों के उल्लंघन के लिए दंड उपबंधित किया गया है।
सरकार नें, समय-समय से, जारी किये गये आदेश द्वारा, कतिपय जिलों को मद्यर्वजित जिलों के रूप में घोषित किया है और इसलिए, उक्त जिलों में, उक्त अधिनियम और नियमों के अधीन मंजूर किये गये लाइसेंस और परमिट रद्द किये गये हैं। उक्त जिलों में शराब के विक्रय करने, खरीद करने कब्जे में रखने, उपयोग और उपभोग करने के लिए मद्यनिषेधित किया गया है। उक्त जिलों में उक्त अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी रीत्या प्रवृत्त करने और मद्यनिषेध नीति प्रभावीरीत्या कार्यान्वित करने के लिये उक्त अधिनियम में कतिपय संशोधनों को कार्यान्वित करना प्रस्तावित है।
२. उक्त अधिनियम में किये जाने के लिए प्रस्तावित कुछ महत्वपूर्ण संशोधन यथा निम्न, मोटे तौर पर स्पष्ट किये गये हैं :----
(क) " पूर्णतया से मद्यनिषेधित क्षेत्र " इस शब्द की परिभाषा निविष्ट करना ;
(ख) पूर्णतया से मद्यनिषेधित क्षेत्र में धाराएँ ६५, ६६, ६८, ८३ और ८६ के अधीन किये गये अपराधों के लिये दंड की प्रमात्रा बढाना ;
(ग) शराब के विक्रय या विनिर्माण करने के लिये लाईसेंसधारक द्वारा या उसके नियोजन में किसी व्यक्ित या उसके स्पष्ट या विवक्षित अनुमति सें, उसकी ओर से कार्य करनेवाले व्यक्ित द्वारा पूर्ण रूप से मद्यनिषेधित क्षेत्र में, शराब का विक्रय करने या उसके कब्जे में रखने या परिवहन करने का अपराध किया है तो प्रशमित न हो, ऐसे उपबंध करना।
३. चूँकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा था और महाराष्ट्र के राज्यपाल का समाधान हो चुका था कि ऐसी परिस्िथतियाँ विद्यमान थीं, जिनके कारण उन्हें, उपयर्ुक्त्त प्रयोजनों के लिये, महाराष्ट्र मद्यनिषेध अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है।
मुंबई, दिनांकित १८ सितंबर २०१९।
भगत सिंह कोश्यारी, महाराष्ट्र के राज्यपाल ।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,
वल्सा नायर-सिंह, शासन के प्रधान सचिव ।
(यथार्थ अनुवाद)
नं. मा. राऊत, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य। ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY DIRECTOR DR. NAMDEO KONDAJI BHOSALE, PRINTED AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATIONS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 EDITOR : DIRECTOR DR. NAMDEO KONDAJI BHOSALE.