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Maharashtra Gazette · Government of Maharashtra

Part VII (Ex. 34) (Dated the 16th December 2019) (महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय) (L.A. BILL No.XLV of 2019) (to provide for temporary postponement of elections of the President, Vice-President and Chairmen of the Subjects Committees of certain Zilla Parishads and the Chairmen and Deputy Chairmen of certain Panchayat Samitis on account of ensuing general elections to the State Legislative Assembly).

Published 16 December 2019

Type
Extra - Ordinary
Part
Part 7 (Hindi)
Division
CENTRAL SECTION
Identifier
in.gazette.maharashtra.2019-12-16.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-
Languages
English, Marathi

RNI No. MAHBIL/2009/31730

महाराष्ट्र शासन राजपत्र

असाधारण भाग सात

वर्ष ५, अंक १९(३)] सोमवार, डिसेंबर १६, २०१९/अग्रहायण २५, शके १९४१ [पृष्ठे ६, किंमत : रुपये ४७.००

असाधारण क्रमांक ३४

प्राधिकृत प्रकाशन

अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)

द्धन्रु]क्ष् ह्यम्द्धहभ् रूह्यम्

द्धन्रु]क्ष् ह्यम्रू द्ध ह्यहॅ १६ ह्यरूद्धदन्, २०१९ .ॅ. ान्:रूह्य ह्यद्ध ह्यम्ॅ द्धन्रु]क्ष् ह्यम्रू ह्यद्ध ११७ ॅ +्र ॅ ह्यॅ :---

L. A. BILL No. XLV OF 2019.

A BILL

TO PROVIDE FOR TEMPORARY POSTPONEMENT OF ELECTIONS OF THE PRESIDENT, VICE-PRESIDENT AND CHAIRMEN OF THE SUBJECTS COMMITTEES OF CERTAIN ZILLA PARISHADS AND THE CHAIRMEN AND DEPUTY CHAIRMEN OF CERTAIN PANCHAYAT SAMITIS ON ACCOUNT OF ENSUING GENERAL ELECTIONS TO THE STATE LEGISLATIVE ASSEMBLY.

विधानसभा का विधेयक क्रमांक ४५ सन् २०१९ ।

राज्य विधान सभा के आगामी आम निर्वाचनों के कारण कतिपय जिला परिषदों के अध्यक्ष,

उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और कतिपय पंचायत समितियों के सभापति और

उप-सभापति के निर्वाचनों के अस्थायी स्थगन का उपबंध करनेे संबंधी विधेयक ।

क्योंकि राज्य विधानसभा के आम चुनाव सन् २०१९ के अक्तूबर महीने में किसी भी समय पर लिये जाने की संभावना थी ;

भाग सात--३४-१.

एचबी---१८०९-१.

(१)२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १६, २०१९/अग्रहायण २५, शके १९४१ और क्योंकि कतिपय जिला परिषदों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और कतिपय पंचायत समितियों के सभापति और उप-सभापति की पदावधि अगस्त-सितम्बर, २०१९ में समाप्त होने वाली थी ;

और क्योंकि महाराष्ट्र विधान सभा के आगामी आम निर्वाचनों के कारण सभी कलक्टरों और जिलों के कलक्टर कार्यालयों के कर्मचारीवृन्द साथ ही साथ जिलों के पुलिस कर्मचारीवृन्द भी महाराष्ट्र विधान सभा के आगामी आम् निर्वाचनों के कारण तैयारी में व्यस्त रहेंगे और निर्वाचन पूर्व और पश्च कर्तव्यों से पूर्णत: व्यस्त रहे थे ;

और क्योंकि उक्त निर्वाचनों के किसी संभाव्य अतिव्याप्ति और सिविल तथा पुलिस प्रशासन पर पड़नेवाले किसी अनुचित तनाव की किसी संभावना और नागरिकों साथ ही साथ उम्मीदवारों और संबंधित मतदाताअों को किसी कानून और व्यवस्था संबंधी समस्या से होनेवाली असुविधा को रोकने के लिए कतिपय जिला परिषदों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और कतिपय पंचायत समितियों के सभापति और उप-सभापति के निर्वाचनों का चार महिने की अवधि के लिए अस्थायी स्थगन करना इष्टकर समझा गया था ;

और क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा था ;

और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका था कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान थीं जिनके कारण उन्हें उपयर्ुक्त कारणों के लिए कतिपय जिला परिषदों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पंचायत समिति के सभापति और कतिपय पंचायत समिति के सभापति और उप-सभापति के निर्वाचनों को अस्थायी रूप से स्थगित करने के लिए उपबंध करने हेतु सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ था ; और इसलिए, महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति (राज्य विधान सभा के आगामी आम निर्वाचनों के कारण कतिपय जिला परिषदों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और कतिपय पंचायत समितियों के सभापति और उप-सभापति) के निर्वाचनों का अस्थायी स्थगन अध्यादेश, २०१९, २३ अगस्त २०१९ को प्रख्यापित किया गया था ;

और क्योंकि उक्त अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के अधिनियम में बदलना इष्टकर है ; अत: भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है :----

संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भण।

१. (१) यह अधिनियम महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति (राज्य विधान सभा के आगामी आम निर्वाचनों के कारण कतिपय जिला परिषदों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और कतिपय पंचायत समितियों के सभापति और उप-सभापति) के निर्वाचनों का अस्थायी स्थगन अधिनियम, २०१९ कहलाए ।

(२) यह २३ अगस्त २०१९ को प्रवृत्त हुआ समझा जायेगा ।

२. इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,---

परिभाषाएँ ।

(क) " पंचायत समिति " का तात्पर्य, जिला परिषद अधिनियम के अधीन गठित पंचायत समिति से है ;

(ख) " जिला परिषद " का तात्पर्य, जिला परिषद अधिनियम के अधीन गठित जिला परिषद से है ;

(ग) " जिला परिषद अधिनियम " का तात्पर्य, महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ से है ;

सन् १९६२ का महा. ५ । (घ) इस अधिनियम में प्रयुक्त किन्तु परिभाषित न किए गए शब्दों और अभिव्यक्तियों का वही अर्थ होगा जो जिला परिषद या पंचायत समिति के संबंध में जिला परिषद अधिनियम में उनके लिए समनुदेशित किया जाए ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १६, २०१९/अग्रहायण २५, शके १९४१ ३ ३. (१) जिला परिषद अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों या किसी न्यायालय के किसी न्याय निर्णय, डिक्री या आदेश में, अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी,---

(क) जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति, और पंचायत समितियों के सभापति और उप-सभापति के पदों का कोई निर्वाचन, ऐसे जिला परिषद या, यथास्थिति, पंचायत समिति के विद्यमान अवधि के दौरान, ढाई वर्ष के अवसित हो जाने के पश्चात्, इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के दिनांक से एक सौ बीस दिनों की अवधि में या ऐसे पूर्वतर दिनांक तक जिसे राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा (जिसे इसमें आगे, इस अधिनियम में " उक्त अवधि " कहा गया है) विर्िनदिष्ट कर सके, ऐसी अवधि में नहीं लिये जायेंगे ;

अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और पंचायत समितियों के सभापति और उप-सभापति के निर्वाचनों का स्थगन और उनकी पदावधि का विस्तार । (ख) उक्त अवधि के पश्चात् निर्वाचित किए गए जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और पंचायत समिति के सभापति और उप-सभापति के पदों की अवधि निर्वाचित पार्षदों या, यथास्थिति, सदस्यों की अवधि के साथ सहपर्यवसित होगी ;

(२) उप-धारा (१) में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम द्वारा यथा बढाई गई जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और पंचायत समितियों के सभापति और उप-सभापति की पदावधि अवसित होने के पश्चात्, वह जिला परिषद अधिनियम के अधीन जिला परिषद के नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और पंचायत समितियों के सभापति और उप-सभापति निर्वाचित होने तक पद पर बने रहेंगे ।

अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और पंचायत समितियों के सभापति और उप-सभापति जिनकी पदावधि बढ़ायी गई है की शक्ितयाँ और कतिपय कृत्यों का विधिमान्यता । ४. जिला परिषद के सभी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और पंचायत समितियों के सभापति और उप-सभापति जिनकी पदावधि धारा ३ के अधीन बढ़ाई गई समझी गई है या, यथास्थिति, बढायी गई है, ऐसी संपूर्ण बढ़ाई गई अवधि के दौरान, जिला परिषदों के ऐसे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति औऱ पंचायत समिति के सभापति और उप-सभापति के रूप में, सभी शक्तियों का प्रयोग, सभी कर्तव्यों का अनुपालन और सभी कृत्यों का निर्वहन करने के लिए सक्षम समझे जायेंगे और सक्षम होंगे ; और उक्त अवधि के दौरान उनमें से किसी के भी द्वारा किया गया कोई भी कृत्य अविधिमान्य नहीं होगा या किसी न्यायालय में, केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जायेगा कि जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और पंचायत समितियों के सभापति और उप-सभापति की ऐसी बढ़ाई गई अवधि के दौरान, जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और पंचायत समिति के सभापति और उप-सभापति की समस्त या किन्ही शक्तियों का प्रयोग या सभी या किन्ही कर्तव्यों का पालन या सभी या किन्ही कृत्यों का निर्वहन नहीं कर सकते थे ।

५. इस अधिनियम में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, जिला परिषदों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और पंचायत समिति के सभापति और उप-सभापति की बढ़ायी गई पदावधि समाप्त होने से पूर्व, या यथा संभव बाद में, जिला परिषद अधिनियम के उपबंधों और तद्धीन बनाए गए नियमों के अनुसार, जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और पंचायत समिति के सभापति और उप-सभापति के निर्वाचन करने के लिए कलक्टर और संबंधित अन्य अधिकारी द्वारा प्रबंध किया जायेगा ।

जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और पंचायत समिति के सभापति और उप-सभापति के निर्वाचन लेने की व्यवस्था करना ।

कठिनाईयों के निराकरण की शक्ति । ६. (१) इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में या उसमें अन्र्तविष्ट किसी बात के कारणों द्वारा या इस अधिनियम में अन्र्तविष्ट किन्ही मामलों के संबंध में जिला परिषद अधिनियम प्रभावी करने में यदि कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो राज्य सरकार आदेश द्वारा, जैसा अवसर उद्भूत हो, ऐसा कोई कार्य कर सकेगी जो उसे कठिनाई दूर करने के प्रयोजनों के लिए आवश्यक प्रतीत हो । परन्तु इस अधिनियम के प्रारम्भण के दिनांक से छह महीने की अवधी समाप्त होणे के पश्चात, ऐसा कोई भी आदेश जारी नही किया जाएगा ।४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १६, २०१९/अग्रहायण २५, शके १९४१ (२) इस धारा के अधीन बनाया गया ऐसा प्रत्येक आदेश, उसके बनाए जाने के पश्चात, यथा संभव शीघ्र, राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जायेगा ।

संदेह का निराकरण ।

७. संदेह के निराकरण के लिए, एतद्द्वारा, यह घोषित किया जाता है कि, इस अधिनियम में अन्र्तविष्ट कोई बात, जिला परिषद, या, यथास्थिति, पंचायत समिति के आम निर्वाचन के सद्य पश्चात् लिये जानेवाले जिला परिषदों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और पंचायत समिति के सभापति और उप-सभापति के पदों के निर्वाचन के संबंध में लागू नहीं होगी ।

सन् २०१९ का महा. अध्या. क्र. २२ का निरसन और व्यावृत्ति ।

सन् २०१९ का महा. अध्या. क्र. २२ । ८. (१) महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति (राज्य विधान सभा के आगामी आम निर्वाचनों के कारण कतिपय जिला परिषदों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और कतिपय पंचायत समितियों के सभापति और उप-सभापति) के निर्वाचनों का अस्थायी स्थगन अध्यादेश, २०१९ एतद्द्वारा, निरसित किया जाता है ।

(२) ऐसे निरसन होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन कृत कोई बात या की गई कोई कार्यवाही, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन कृत की गई या, यथास्थिति, जारी की गई समझी जायेगी।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १६, २०१९/अग्रहायण २५, शके १९४१ ५

उद्देश्यों और कारणों का वक्तव्य।

महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ (सन् १९६२ का ५) के विद्यमान उपबंधों के अनुसार, राज्य में, जिला परिषदों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभापति और पंचायत समिति के सभापति और उप-सभापति की पदावधि ढ़ाई वर्ष की है । कुछ जिला परिषदों और पंचायत समितियों में जिला परिषदों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति, पंचायत समिति के सभापति और उप- सभापति की पदावधि अगस्त-सितम्बर, २०१९ महिने में समाप्त होनेवाली है ।

२. राज्य विधानसभा के आम निर्वाचन सन् २०१९ के अक्तूबर महीने में किसी भी समय, लिये जाने की संभावना है । महाराष्ट्र विधानसभा के उक्त आम निर्वाचनों के कारण जिलों के सभी कलक्टरों और कलक्टर कार्यालयों के कर्मचारीवृन्द साथ ही साथ जिलों में के पुलिस कर्मचारीवृन्द भी उक्त आम निर्वाचनों की तैयारी में व्यस्त रहेंगे और निर्वाचन पूर्व और पश्च कर्तव्यों से पूर्णत: व्यस्त होंगे । उक्त निर्वाचनों के किसी संभाव्य अतिव्याप्ति और सिविल तथा पुलिस प्रशासन पर पडनेवाले किसी अनुचित तनाव की किसी संभावना और नागरिकों साथ ही साथ उम्मीदवारों और संबंधित मतदाताअों को होनेवाली किसी कानून और व्यवस्था संबंधी समस्या या किसी असुविधा को रोकने के लिये जिला परिषदों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समिति के सभापति और पंचायत समिति के सभापति और उप-सभापति के निर्वाचन, अस्थायी रुप से, एक सौ बीस दिनों की अवधि के लिये स्थगित करना इष्टकर समझा गया है ।

३. चूँकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा था और महाराष्ट्र के राज्यपाल का समाधान हो चुका था कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान थीं जिनके कारण उन्हे, महाराष्ट्र विधानसभा के आगामी आम निर्वाचनों के कारण कतिपय जिला परिषदों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और कतिपय पंचायत समिति के सभापति और उप-सभापति के पदों के निर्वाचनों का अस्थायी स्थगन और कतिपय अन्य अनुषंगिक मामलों का उपबंध करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ था, अत: महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति (राज्य विधान सभा के आगामी आम निर्वाचनों के कारण कतिपय जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विषय समितियों के सभापति और कतिपय पंचायत समितियों के सभापति और उप-सभापति) के निर्वाचनों का अस्थायी स्थगन अध्यादेश, २०१९ (सन् २०१९ का महा. अध्या. क्र. २२), २३ अगस्त, २०१९ को प्रख्यापित किया गया था।

४. प्रस्तुत विधेयक का आशय उक्त अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के अधिनियम में बदलना है। मुंबई, दिनांकित १५ दिसंबर, २०१९ ।

छगन चंद्रकांत भुजबळ, ग्रामविकास मंत्री।

भाग सात--३४-२.

एचबी---१८०९-२.

महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १६, २०१९/अग्रहायण २५, शके १९४१

प्रत्यायुक्त विधानसंबंधी ज्ञापन।

प्रस्तुत विधेयक में, विधायी शक्ित के प्रत्यायोजनार्थ, निम्न प्रस्ताव अन्तर्ग्रस्त है, अर्थात् :----

खण्ड ३(१).----इस अधिनियम में, इस अधिनियम के प्रारम्भण के दिनांक से एक सौ बीस दिनों की अवधि के लिए शेष प्रवर्तन आशयित है। तथापि, इस खण्ड के अधीन, राज्य सरकार को, यदि आवश्यकता होने पर राजपत्र में अधिसूचना जारी करने द्वारा, इस अधिनियम के परिचालन का अवधि घटाने की शक्ित प्रदान की जाती है।

खण्ड ६.----इस खण्ड के अधीन, इस अधिनियम के उपबंधो को प्रभावी करने में यदि कोई कठिनाई हो तो उसका निराकरण करने के लिए राजपत्र में प्रकाशित किसी आदेश द्वारा कोई कार्यवाही करने की शक्ित राज्य सरकार को प्रदान की जाती है।

२. विधायी शक्ित के प्रत्यायोजन के लिए उपयर्ुक्त सभी प्रस्ताव सामान्य स्वरूप के है।

(यथार्थ अनुवाद),

नं. मा. राऊत, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।

विधान भवन, नागपूर,

दिनांकित १६ दिसंबर, २०१९।

राजेन्द्र भागवत, सचिव (कार्यभार), महाराष्ट्र विधानसभा।

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Cite this issue. Maharashtra Gazette, Government of Maharashtra, 16 December 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.maharashtra.2019-12-16.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-/. Archive identifier in.gazette.maharashtra.2019-12-16.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-.