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Maharashtra Gazette · Government of Maharashtra

Part VII Asa 32 (16-12-2019) Further to Amend the Maharashtra Zilla Parishad and Panchayat Samitis Act, 1961.

Published 16 December 2019

Type
Extra - Ordinary
Part
Part 7 (Hindi)
Division
NAGPUR DIVISION
Identifier
in.gazette.maharashtra.2019-12-16.Extra-Ordinary_NAGPUR-DIVISION_Part-7-Hindi-
Languages
English, Marathi
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १६, २०१९/अग्रहायण २५, शके १९४१ ३

RNI No. MAHBIL/2009/31730

महाराष्ट्र शासन राजपत्र

असाधारण भाग सात

वर्ष ५, अंक १९] सोमवार, डिसेंबर १६, २०१९/अग्रहायण २५, शके १९४१ [पृष्ठे ३, किंमत : रुपये ४७.००

असाधारण क्रमांक ३२

प्राधिकृत प्रकाशन

अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).

महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय

महाराष्ट्र विधानसभा में दिनांक १६ दिसम्बर, २०१९ ई. को. पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियम ११७ के अधीन प्रकाशन किया जाता है :---

L. A. BILL No. XLIII OF 2019.

A BILL

FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA ZILLA PARISHAD AND PANCHAYAT SAMITIS ACT, 1961.

विधानसभा विधेयक क्रमांक ४३ सन् २०१९।

महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ में अधिकतर संशोधन करने

संबंधी विधेयक।

क्योंकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा था ;

सन् १९६२ का महा. ५।

और क्योंकि, महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका था कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान थीं, जिनके कारण उन्हें इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिये, महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिती अधिनियम १९६१ में अधिकतर संशोधन करने के लिये सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ था ; और, इसलिए, महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिती (संशोधन) अध्यादेश, २०१९, २३ अगस्त, २०१९ को प्रख्यापित किया गया था ;

सन् २०१९ का महा. अध्या. क्र. २१।

(१)

भाग सात-३२-१ एचबी १८०३-----१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १६, २०१९/अग्रहायण २५, शके १९४१ और क्योंकि, उक्त अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के अधिनियम में बदलना इष्टकर हैं ; अत: भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता हैं :---

१. (१) यह अधिनियम महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिती (संशोधन) अधिनियम, २०१९ संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भण।

कहलाए।

(२) यह २३ अगस्त, २०१९ से प्रवृत्त हुआ समझा जायेगा ।

२. महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ (जिसे इसमें आगे '' मूल अधिनियम " कहा गया है) की धारा ७५ख में, निम्न परंतुक, जोडे जायेंगे, अर्थात् :----

सन् १९६२ का. महा. ५। सन् १९६२ का महा. ५ की धारा ७५ख में संशोधन।

'' परंतु, इस धारा के अधीन प्राधिकार देने की अवधि चार महिने से अधिक नहीं होगी :

परंतु यह और भी कि, आदेश में अभिलिखित की गयी आपवादिक परिस्थितियों में, उक्त अवधि, आदेश में विर्िनदिष्ट की जाये ऐसी अधिकतर अवधि के लिये समय-समय पर विस्तारित की जायेगी किन्तु, प्राधिकार देने की ऐसी अवधि, कुल मिलाकर छह महिने से अधिक नहीं होगी। " ।

३. मूल अधिनियम की धारा ९१ख में, निम्न परंतुक, जोडे जायेंगे, अर्थात् :----

'' परंतु, इस धारा के अधीन प्राधिकार देने की अवधि, चार महिने से अधिक नहीं होगी :

सन् १९६२ का महा. ५ की धारा ९१ख में संशोधन।

परंतु यह और भी कि, आदेश में अभिलिखित की गई आपवादिक परिस्थितियों में, उक्त अवधि आदेश में विर्िनदिष्ट की जाये ऐसी अधिकतर अवधि के लिये समय-समय पर विस्तारित की जायेगी किन्तु, प्राधिकार देने की ऐसी अवधि, कुल मिलाकर छह महीने से अधिक नहीं होगी। "।

४. (१) महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिती (संशोधन) अध्यादेश, २०१९, एतद्द्वारा, निरसित किया जाता है।

सन् २०१९ का महा. अध्या. क्र. २१। सन् २०१९ का महा. अध्या. क्र. २१ का निरसन तथा व्यावृत्ति।

(२) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित मूल अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन कृत कोई बात या की गई कोई कार्यवाही (जारी किसी अधिसूचना या आदेश समेत) इस अधिनियम द्वारा यथा संशोधित मूल अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन कृत, की गई या यथास्थिति, जारी की गई समझी जायेगी।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १६, २०१९/अग्रहायण २५, शके १९४१ ३

उद्देश्यों और कारणों का वक्तव्य।

महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ (सन् १९६२ का महा. ५) की धाराएँ ७५ख और ९१ख, जब पीठासीन अधिकारियों के पद एक साथ रिक्त हो जाते है तब पदों की सभी शक्तियों का प्रयोग करने और सभी कर्तव्यों का पालन करने के लिये अधिकारियों को प्राधिकार देने का आदेश जारी करने के लिये राज्य सरकार को सशक्त करती है ।

२. तथापि, यह धाराएँ स्पष्टतया अवधी विर्िनदिष्ट नहीं करती है जिस दौरान ऐसे प्राधिकार देना प्रभावी होता है ।

३. यह सुनिश्चित करना है कि, पीठासीन अधिकारियों के पद शीघ्रता से भरने के लिये, इन धाराअों के अधीन प्राधिकार देने की अवधियों के लिये उपबंध करना इष्टकर समझा गया था वह अवधि चार महिने से अधिक प्रभावी नहीं होगी और आपवादिक परिस्थितियों में उक्त अवधि समय-समय पर विस्तारित की जायेगी किन्तु, ऐसे प्राधिकार देने के दौरान कुल छह महिने से अधिक की प्रभावी नहीं होगी ।

४. चँूकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा था और महाराष्ट्र के राज्यपाल का समाधान हो चुका था कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान थी जिनके कारण उन्हे उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिये, महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ में अधिकतर संशोधन करने के लिये सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ था, अत: महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा, महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति (संशोधन) अध्यादेश, २०१९ (सन् २०१९ का महा. अध्या. २१) २३ अगस्त, २०१९ को प्रख्यापित किया गया था।

५. प्रस्तुत विधेयक का आशय उक्त अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के अधिनियम में बदलना है।

छगन चंद्रकांत भुजबळ,

ग्रामविकास मंत्री ।

मुंबई, दिनांकित १५ दिसंबर, २०१९।

(यथार्थ अनुवाद),

नं. मा. राऊत, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।

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Cite this issue. Maharashtra Gazette, Government of Maharashtra, 16 December 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.maharashtra.2019-12-16.Extra-Ordinary_NAGPUR-DIVISION_Part-7-Hindi-/. Archive identifier in.gazette.maharashtra.2019-12-16.Extra-Ordinary_NAGPUR-DIVISION_Part-7-Hindi-.