RNI No. MAHBIL/2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ५, अंक २० ] गुरूवार, डिसेंबर १९, २०१९/अग्रहायण २८, शके १९४१ [पृष्ठे १३, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक ३६
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय
महाराष्ट्र विधानसभा में दिनांक १९ दिसम्बर, २०१९ ई.को. पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियम ११७ के अधीन प्रकाशन किया जाता है :-
L. A. BILL No. XLVII OF 2019.
A BILL
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA GOODS AND SERVICES TAX ACT , 2017.
विधानसभा का विधेयक क्रमांक ४७ सन् २०१९।
सन् २०१७ का महा. ४३।
महाराष्ट्र माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ में अधिकतर संशोधन करने संबंधी विधेयक। क्योंकि, इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ में अधिकतर संशोधन करना इष्टकर है; अत: भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है :---
(१)
रू-३६-१. द्र-१८२०-१.
२ द्धन्रु]क्ष् रू न् +रून् रू, ह्यरूदन् १९, २०१९/+ २८, ॅ १९४११. (१) यह अधिनियिम महाराष्ट्र माल और सेवा कर (संशोधन) अधिनियम, २०१९ कहलाए। संक्षिप्त नाम और प्रारम्भण।
(२) यह १ जून २०२० को प्रवृत्त होगा ।
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा २ में संशोधन।
२. महाराष्ट्र माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ (जिसे इसमें आगे "मूल अधिनियम" कहा गया है) की धारा २ के खण्ड (४) में, " अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकारी " शब्दों के पश्चात्, " राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकारी " शब्द निविष्ट किए जायेंगे।
३. मूल अधिनियम की धारा १० की,---
(क) उप-धारा (१) में, द्वितीय परंतुक के पश्चात्, निम्न स्पष्टीकरण, निविष्ट किया जायेगा, सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १० में संशोधन।
अर्थात् :---
"स्पष्टीकरण.---द्वितीय परन्तुक के प्रयोजनों के लिए, जहाँ तक विस्तारित निक्षेप, ऋण या अग्रिम के जरिए उपबंधित सेवाअों की छूट आपर्ूति का मूल्य ब्याज या बट्टे के जरिए विचारार्थ प्रस्तुत है, तो राज्य में आवर्तन के मूल्य को निर्धारित करने के लिए ध्यान में नहीं लिया जायेगा।";
(ख) उप-धारा (२) में,---
(एक) खण्ड (घ) के, अंत में आनेवाला "और" शब्द हटाया जायेगा;
(दो) खण्ड (ङ) में, "परिषद" शब्द के स्थान में, "परिषद; और" शब्द रखे जायेंगे;
(तीन) खण्ड (ङ) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :--
"(च) वह ना ही नैमित्ितक कराधेय व्यक्ित है ना ही अनिवासी कराधेय व्यक्ित हैं " (ग) उप-धारा (२) के पश्चात् निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :---
"(२क) इस अधिनियम में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, परंतु, धारा ९ की उप-धारा (३) और (४) के उपबंधों के अध्यधीन, कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ित, जिसका पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में कुल आवर्तन, पचास लाख रुपयों से अधिक नहीं है, उप-धारा (१) और उप-धारा (२) के अधीन कर भुगतान करने के विकल्प चुनने के लिए पात्र नहीं होगा, वह धारा ९ की उप-धारा (१) के अधीन उसके द्वारा कर भुगतान के बदले में जैसा विहित किया जाए, ऐसे दर पर संगणित कर की रकम परंतु, राज्य में आवर्तन के तीन प्रतिशत से अधिक न हो, की रकम का भुगतान करने का विकल्प चुन सकेगा यदि वह--
(क) किसी माल या सेवाअों प्रदान करने में व्यस्त नहीं है जिसका इस अधिनियम के अधीन कर उद्ग्रहीत नही है;
(ख) माल या सेवाअों की किसी आंतर-राज्य बा आपर्ूति करने में व्यस्त नहीं है;
(ग) किसी इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य परिचालक के जरिए माल या सेवाअों की किसी प्रदाय करने में व्यस्त नहीं है जिसका धारा ५२ के अधीन स्त्रोत में कर संग्रहण आवश्यक है;
(घ) परिषद की सिफारिशों पर सरकार द्वारा जैसा कि अधिसूचित किया जाए ऐसे मालों का विनिर्माता या ऐसी सेवाअों का प्रदायकर्ता नहीं है; और
(ङ) आकस्मिक कराधेय व्यक्ित या अ-निवासी कराधेय व्यक्ित नहीं है;
सन् १९६१ का महा. ४३। परंतु, जहाँ आय-कर अधिनियम, १९६१ के अधीन एक से अधिक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ितयों को एक ही स्थायी लेखा नंबर जारी किया गया है, वहाँ रजिस्ट्रीकृत व्यक्ित इस उप-धारा के अधीन जब तक ऐसे सभी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ित इस उप-धारा के अधीन कर के भुगतान के विकल्प को चुनते नहीं है, तब तक स्कीम के लिए विकल्प चुनने के लिये पात्र नहीं होंगे।";
द्धन्रु]क्ष् रू न् +रून् रू, ह्यरूदन् १९, २०१९/+ २८, ॅ १९४१ ३(घ) उप-धारा (३) में "उप-धारा (१) के अधीन" शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के पश्चात्, दोनों स्थानों पर, जहाँ कही वे आए हों " या, यथास्थिति, उप-धारा (२क)" शब्द कोष्ठक, अंक और अक्षर निविष्ट किये जायेंगे।
(ड) उप-धारा (४) में, "उप-धारा (१) के " शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के पश्चात्, " या, यथास्थिति, उप-धारा (२क)" शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर निविष्ट किये जायेंगे;
(च) उप-धारा (५) में "उप-धारा (१) के अधीन" शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के पश्चात्, " या, यथास्थिति, उप-धारा (२क)" शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर निविष्ट किये जायेंगे;
(छ) उप-धारा (५) के पश्चात्, निम्न स्पष्टीकरण, निविष्ट किये जायेंगे अर्थात्---
" स्पष्टीकरण १.—इस धारा के अधीन कर भुगतान करने की उसकी पात्रता अवधारित करने के लिए किसी व्यक्ित के कुल आवर्तन परिकलित करने के प्रयोजनों के लिए ""कुल आवर्तन"" अभिव्यक्ित का तात्पर्य, जिसमें जब तक वह इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण करने के लिए दायी हो तब तक ऐसे व्यक्ित द्वारा वित्तीय वर्ष के १ एप्रिल से ऐसे व्यक्ित द्वारा किये गये प्रदाय मूल्य सम्मिलित होगा परंतु, विस्तारित निक्षेप, ऋण या अग्रिम के ज़रिए उपबंधित सेवाअों की प्रदाय छूट का मूल्य सम्मिलित नहीं होगा जहाँ तक वह ब्याज या बट्टे के ज़रिए विचारार्थ प्रस्तुत है।
स्पष्टीकरण २.—इस धारा के अधीन किसी व्यक्ित द्वारा, भुगतान कर के अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए, ""राज्य में आवर्तन"" अभिव्यक्ित में, निम्न प्रदाय का, मूल्य सम्मिलित नहीं होगा अर्थात् :—
(एक) वित्तीय वर्ष के १ अप्रैल से उस दिनांक तक प्रदाय करता है ऐसा व्यक्ित इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण करने के लिए दायी होगा ; और
(दो) जहाँ तक कि विस्तारीत निक्षेपक, ऋण या अग्रिम के ज़रिए उपबंधित सेवाअों की प्रदाय छूट प्रदाय ब्याज या बट्टेे के ारिए विचारार्थ प्रस्तुत है।""।
४. मूल अधिनियम की धारा २२ की, उप-धारा (१) में, द्वितीय परंतुक के पश्चात्, निम्न निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा २२ में संशोधन। ""परंतु यह भी कि, सरकार परिषद की सिफारिशों पर, जैसा कि अधिसूचित किया जाए ऐसी शर्तों तथा सीमाअों के अध्यधीन, प्रदायकर्ता के मामले में, जो केवल माल की प्रदायगी में जुडा हुआ है के बीस लाख रुपयों से जो चालीस लाख रुपयों से अधिक न हो तक ऐसी रकम के कुल आवर्तन को बढ़ा सकेगा। स्पष्टीकरण .—इस उप-धारा के प्रयोजनों के लिए, कोई व्यक्ित, मालों की प्रदाय में केवल जुडा हुआ समझा जायेगा जैसा कि यदि वह विस्तारित निक्षेप, ऋण या अग्रिम के ज़रिए उपबंधित सेवाअों के प्रदाय छूट में ाडा है हाँ तक ब्याज या बट्टे के ज़रिए विचारार्थ प्रस्तुत है ।""।
५. मूल अधिनियम की धारा २५ की, उप-धारा (६) के पश्चात्, निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :—
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा २५ में संशोधन। ""(६क) प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ित, जैसा कि विहित किया जाए ऐसे प्ररुप और रित्या में और ऐसे समय के भीतर आधार क्रमांक का अधिप्रमाणन करेगा या आधार क्रमांक के कब्जे का सबूत प्रस्तुत करेगा :
परंतु, यदि आधार क्रमांक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ित से समनुदेशित नहीं किया गया है तो, ऐसी व्यक्ित, परिषद की सिफारिशों पर, जैसा कि सरकार विहित कर सकें ऐसी रीत्या में पहचान के वैकल्पिक और व्यवहार्यता को प्रस्तुत करेगी :
४ द्धन्रु]क्ष् रू न् +रून् रू, ह्यरूदन् १९, २०१९/+ २८, ॅ १९४१परंतु यह और भी कि, आधार क्रमांक के अधिप्रमाणन करने या आधार क्रमांक के कब्जे का सबूत प्रस्तूत करने में और पहचान की वैकल्पिक और व्यवहार्यता प्रस्तुत करने में असफल होने के मामले में ऐसे व्यक्ित को आबंटित किया गया रजिस्ट्रीकरण अवैध किया गया समझा जायेगा और इस अधिनियम के अन्य उपबंध लागू होंगे मानों कि ऐसी व्यक्ित का रजिस्ट्रीकरण नहीं हुआ है। (६ख) अधिसूचना के दिनांक पर या से, प्रत्येक व्यक्ितगत रूप से सरकार परिषद की सिफारिशों पर उक्त अधिसूचना में विर्िनदिष्ट ऐसी रीत्या, रजिस्ट्रीकरण की मंजूरी के लिए पात्र होने के उद्देश्य में, अधिप्रमाणन करने या आधार क्रमांक के कब्जे का सबूत प्रस्तुत करेगी :
परंतु, किसी व्यक्ितगत रूप से आधार क्रमांक समनुदेशित नहीं किया गया है तो ऐसा व्यक्ितगत रूप से जैसा कि सरकार परिषद की सिफारिशों पर उक्त अधिसूचना में विर्िनदिष्ट कर सके ऐसी रित्या पहचान के वैकल्पिक और व्यवहार्यता को प्रस्तुत करेगी ।
(६ग) अधिसूचना के दिनांक पर और से प्रत्येक व्यक्ित, व्यक्ितगत रूप से अन्य रजिस्ट्रीकरण की मंजूरी के लिए पात्र होने के उद्देश्य से सरकार परिषद की सिफारिशों पर उक्त अधिसूचना में विर्िनदिष्ट कर सके ऐसी रीत्या, अधिप्रमाणन करने या कर्ता, प्रबंध निदेशक, पूर्ण समय निदेशक, भागीदारों की ऐसी संख्या सहयोजन प्रबंध समिति के सदस्य, न्यासीयों का बोर्ड, प्राधिकृत प्रतिनिधि, प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और व्ययिों के ऐसे अन्य वर्ग के आधार क्रमांक के कब्जे का सबूत, प्रस्तुत करेंगे :
परंतु, जहाँ ऐसे व्यक्ित या व्यक्ितयों के वर्ग का आधार क्रमांक समनुदेशित नहीं किया गया है तो ऐसे व्यक्ित या ऐसे व्यक्ितयों का वर्ग जैसा कि सरकार परिषद की सिफारिशों पर उक्त अधिसूचना में विर्िनदिष्ट कर सके ऐसी रीत्या पहचान के वैकल्पिक और व्यवहार्यता को प्रस्तुत करेगी । (६घ) उप-धारा (६क) या उप-धारा (६ख) या उप-धारा (६ग) के उपबंध ैसा कि सरकार परिषद की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा विर्िनदिष्ट कर सके, ऐसे व्यक्ित या व्यक्ितयों के वर्ग या राज्य के भाग को लागू नहीं होंगे।
स्पष्टीकरण.----इस धारा के प्रयोजनों के लिए ""आधार क्रमांक"" अभिव्यक्ति का अर्थ वहीं होगा जो आधार (वित्तिय और अन्य सहायता, लाभ और सेवाअों का लक्ष्यित परिदान) अधिनियम, २०१६ की धारा २ के खण्ड (क) में उसे समनुदेशित से हैं।""।
६. मूल अधिनियम की धारा ३१ के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----
सन् २०१७ का महा. ४३ में नई धारा ३१क का निवेशन।
प्राप्तिकर्ता को डिजिटल भुगतान की सुविधा।
" ३१क. सरकार, परिषद की सिफारिश पर, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों का वर्ग विहित करने के लिये जो उसके द्वारा की गई माल या सेवा या दोनों की आपर्ूति प्राप्तिकर्ता को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान की प्रणाली विहित करने के लिये उपबंध करेगी और तद्नुसार, जैसा कि विहित किया जाए ऐसी रीत्या में और ऐसी शर्तों तथा निबर्ंधनों के अध्यधीन, ऐसे प्राप्तिकर्ता को भुगतान करने का विकल्प देगी।""।
७. मूल अधिनियम की धारा ३९ की,-----
(क) उप-धारा (१) और (२) के स्थान में, निम्न उप-धारा, रखी जायेगी, अर्थात् :-------
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ३९ में संशोधन।
""(१) किसी इनपुट सेवा वितरक या अनिवासी कर योग्य व्यक्ति या धारा १० या धारा ५१ या धारा ५२ के उपबंधों के अधीन कर भुगतान करने वाला किसी व्यक्ति से अन्य, प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक कॅलेंडर महीने या उसके भाग के लिए जैसा कि विहित किया जाए ऐसे प्ररूप और रीत्या में और ऐसे समय के भीतर कोई विवरण, इलेक्ट्रॉनिक रुप में, माल या सेवा या दोनों की आवकद्धन्रु]क्ष् रू न् +रून् रू, ह्यरूदन् १९, २०१९/+ २८, ॅ १९४१ ५ और जावक आपर्ूतियाँ, प्राप्त इनपुट कर साख देय कर, भुगतान कर और ऐसी अन्य विशिष्टियाँ प्रस्तुत करेगा :
परंतु, सरकार, परिषद की सिफारिश पर, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के अधिसूचित कतिपय वर्ग जैसा कि उसमें विर्िनदिष्ट किया जाए ऐसी शर्तों तथा निबर्ंधनों के अध्यधीन, प्रत्येक तिमाही या उसके भाग के लिए विवरणी प्रस्तुत करेंगें।
(२) धारा १०क उपबंधों के अधीन कर भुगतान करनेवाला रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक वित्तीय वर्ष या उसके भाग के लिए जैसा की विहित किया जाए ऐसे प्ररूप और रीत्या में और ऐसे समय के भीतर विवरण इलेक्ट्रॉनिक रूप में, राज्य में,आवर्तन माल या सेवाअों या दोनों के आवक प्रदायों देय कर, भुगतान कर और अन्य विशिष्टियाँ प्रस्तुत करेगा।"";
(ख) उप-धारा (७), के स्थान में, निम्न उप-धारा, रखी जायेगी, अर्थात् :-----
""(७) प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जो उप-धारा (१) या उसके परन्तुक में र्िनदिष्ट व्यक्ति से अन्य, उप-धारा (३) या उप-धारा (५) के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने की आवश्यकता है, जिस पर वह ऐसा विवरण प्रस्तुत करने की आवश्यकता है उस अंतिम दिनांक के बाद न हो ऐसे विवरण के अनुसार देय कर सरकार को अदा करेगा :
परंतु, उप-धारा (१) के परन्तुक के अधीन विवरणी प्रस्तुत करनेवाला प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति जैसा कि विहित किया जाए ऐसे प्ररूप में और रीत्या और ऐसे समय के भीतर, माल या सेवाअों या दोनों की आवक और जावक प्रदाय प्राप्त इनपूट कर साख, देय कर और महीने के दैारान ऐसी अन्य विशिष्टियों को ध्यान में रखते हुए देय कर सरकार को भुगतान करेगा :
परंतु यह और भी कि, उप-धारा (२) के अधीन विवरणी प्रस्तुत करनेवाला प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति जैसा कि विहित किया जाए ऐसे प्ररूप में और रीत्या और ऐसे समय के भीतर राज्य में आवर्तन माल या सेवाअों या दोनों के आवक प्रदाय देय कर तिमाही के दौरान ऐसी अन्य विशिष्टियों को ध्यान में रखते हुए देय कर सरकार को भुगतान करेगा।""
८. मूल अधिनियम की धारा ४४ की, उप-धारा (१) में, निम्न परन्तुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
" परंतु, आयुक्त, परिषद की सिफारिश पर और लिखित में लेखबद्ध किये जानेवाले कारणों के लिये
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ४४ में संशोधन। अधिसूचना द्वारा, जैसा कि उसमें विर्िनदिष्ट किया जाए, ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ितयों के ऐसे वर्ग के लिए वर्ाषिक विवरणी प्रस्तुत करने के लिए, समय सीमा बढ़ा सकेगा :
परंतु यह और भी कि, केंद्रीय कर आयुक्त द्वारा अधिसूचित की गई समय सीमा का कोई विस्तार आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जायेगा । "।
९. मूल अधिनियम की धारा ४९ की, उप-धारा (९) के पश्चात्, निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----
" (१०) रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, सामान्य पोर्टल पर कर, ब्याज, शास्ति या फीस की कोई रकम या इस
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ४९ में संशोधन। अधिनियम के अधीन इलेक्ट्रॉनिक रोकड बही में उपलब्ध कोई अन्य रकम, एकीकृत कर, केंद्रीय कर, राज्य कर, या उपकर के लिए, इलेक्ट्रॉनिक रोकड बही को, जैसा कि विहित किया जाए ऐसे प्ररूप और रीत्या में और ऐसे शर्तों तथा निबर्ंधनों के अध्यधीन, अंतरित कर सकेगा और ऐसा अंतरण, इस अधिनियम के अधीन इलेक्ट्रॉनिक रोकड बही से प्रतिदाय की जानेवाली रकम समझा जायेगा ।
(११) जहाँ कोई रकम इस अधिनियम के अधीन इलेक्ट्रॉनिक रोकड बही में अंतरित की गई है, तो उसे उप-धारा (१) में यथा उपबंधित उक्त बही में निक्षेपित की गई समझी जायेगी । "।६ द्धन्रु]क्ष् रू न् +रून् रू, ह्यरूदन् १९, २०१९/+ २८, ॅ १९४१ १०. मूल अधिनियम की धारा ५० की, उप-धारा (१) में, निम्न परन्तुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ५० में संशोधन।
" परंतु, कर अवधि के दौरान की गई आपर्ूतियों के संबंध में कर भुगतान पर ब्याज और धारा ३९ के उपबंधों के अनुसरण में देय दिनांक के पश्चात्, प्रस्तुत उक्त अवधि के लिये विवरणी में घोषित की गयी, विवरणी जहाँ ऐसी विवरणी उक्त अवधि के संबंध में, धारा ७३ और धारा ७४ के अधीन किसी कार्यवाहियों के प्रारम्भण के पश्चात्, प्रस्तुत की गई है को छोडकर कर उस भाग पर उद्ग्रहीत होगा वह इलेक्ट्रॉनिक रोकड बही विकलन द्वारा भुगतान किया गया है । "।
११. मूल अधिनियम की धारा ५२ की,----
(क) उप-धारा (४) में निम्न परन्तुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ५२ में संशोधन।
परन्तु, आयुक्त, लेखबध्द किये जानेवाले कारणों के लिये , अधिसूचना द्वारा, उसमें विर्िनदिष्ट किया जाए रजिस्ट्रीकृत व्यक्ितयों के ऐसे वर्ग के लिए विवरण प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा विस्तारित करेगा :
परन्तु यह और भी कि, केन्द्रीय कर आयुक्त द्वारा अधिसूचित समय-सीमा का किसी विस्तार, आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जायेगा । "।
(ख) उप-धारा (५) में, निम्न परन्तुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :-----
" परन्तु, आयुक्त, परिषद की सिफारिश पर और लेखबद्ध किये जानेवाले कारणों के लिये, अधिसूचना द्वारा, उसमें विर्िनदिष्ट किया जाए रजिस्ट्रीकृत व्यक्ितयों के ऐसे वर्ग के लिये वर्ाषिक विवरण प्रस्तुत करने के लिये समय-सीमा बढ़ा सकेगा :
परन्तु यह और भी कि, केन्द्रीय कर आयुक्त द्वारा अधिसूचित समय-सीमा का कोई विस्तार आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जायेगा । "।
१२. मूल अधिनियम की धारा ५३ के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----
सन् २०१७ का महा. ४३ की नवीन धारा ५३क का निवेशन।
" ५३क. जहाँ केंद्रीय माल और सेवा कर अधिनियम के अधीन या एकीकृत माल और सेवा कर अधिनियम के अधीन या माल और सेवा कर (राज्यों को प्रतिपर्ूति) अधिनियम के अधीन इलेक्ट्रॉनिक नकद खाता बही से इस अधिनियम के अधीन इलेक्ट्रॉनिक नकद खाता बही से कोई रकम अन्तरित की गयी है तो, सरकार, जैसा कि विहित किया जाए, ऐसे रीत्या और ऐसे समय के भीतर, इलेक्ट्रॉनिक नकद खाता बही से अन्तरित रकम के समान रकम, केन्द्रीय कर लेखा या एकीकृत कर लेखा या उपकर लेखा को अन्तरित करेगी । "।
१३. मूल अधिनियम की धारा ५४ की, उप-धारा (८) के पश्चात्, निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ५४ में संशोधन।
" (८क) जहाँ केन्द्र सरकार ने, राज्य कर को प्रतिदाय के लिये संवितरित किया है तो सरकार केन्द्र सरकार को इस प्रकार प्रतिदाय की गयी रकम के समान रकम अन्तरित करेगी । "।
१४. मूल अधिनियम की धारा ९५ के,----
(एक) खण्ड (क) में,----
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ९५ में संशोधन।
(क) " अपील प्राधीकरण " शब्दों के पश्चात्, " या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण " शब्द निविष्ट किये जायेंगे ;
(ख) " धारा १०० के " शब्द और अंकों के पश्चात्, " या केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम की, धारा १०१ग के " शब्द, अंक और अक्षर निविष्ट किये जायेंगे ;
(दो) खंड (ङ) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात्:----
"(च) " राष्ट्रीय अपीलीय प्राधिकरण " का तात्पर्य धारा १०१क में र्िनदिष्ट अग्रिम विनिर्णय के लिये राष्ट्रीय अपीलीय प्राधिकरण से है। "।द्धन्रु]क्ष् रू न् +रून् रू, ह्यरूदन् १९, २०१९/+ २८, ॅ १९४१ ७ १५. मूल अधिनियम की धारा १०१ के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----
सन् २०१७ का महा. ४३ में धारा १०१क का निवेशन।
अग्रिम विनिर्णय के लिये राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण। " १०१क. इस अध्याय के उपबंधों के अध्यधीन, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये, केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम की धारा १०१क के अधीन गठित अग्रिम विनिर्णय के लिये राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण, इस अधिनियम के अधीन अग्रिम विनिर्णय के लिये राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण समझा जायेगा। "। १६. मूल अधिनियम की धारा १०२ के प्रारंभिक प्रभांग में,---
(क) " अपील प्राधिकरण " शब्द जहाँ कहीं वह दोनों स्थानों पर आये हों, के पश्चात्, " या राष्ट्रीय
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १०२ में संशोधन। अपील प्राधिकरण " शब्द निविष्ट किये जायेंगे ;
(ख) " या धारा १०१ " शब्द और अंकों के पश्चात्, " या केंद्रीय माल और सेवा कर अधिनियम की धारा १०१ग क्रमश: " शब्द अंक और अक्षर निविष्ट किये जायेंगे ;
(ग) " या अपीलार्थी " शब्द के पश्चात्, " अपीलार्थी, प्राधिकरण या अपील प्राधिकरण " शब्द रखेे जायेंगे।
१७. मूल अधिनियम की धारा १०३ की,---
(एक) उप-धारा (१) के पश्चात्, निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १०३ में संशोधन। " (१क) इस अध्याय के अधीन राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण द्वारा घोषित अग्रिम विनिर्णय,----
(क) आवेदक, विशिष्ट व्यक्ित होने के नाते,जो केंद्रीय माल और सेवा कर अधिनियम की धारा १०१ख की, उप-धारा (१) के अधीन विनिर्णय चाहा गया था और सभी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ितयों को आय-कर अधिनियम, १९६१ के अधीन जारी किये गये समान स्थायी लेखा क्रमांक होंगे ;
(ख) खंड (क) में र्िनदिष्ट आवेदक के संबंध में, संबंधित अधिकारियों और अधिकारितावाले अधिकारियों और रजिस्ट्रीकृत व्यक्ितयों को आय-कर अधिनियम, १९६१ के अधीन जारी किये गये समान स्थायी लेखा क्रमांक होंगे। ";
(दो) उप-धारा (२) में, " उप धारा (१) में " शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के पश्चात्, " और उप-धारा (१क) " शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर निविष्ट किये जायेंगे।
१८. मूल अधिनियम की धारा १०४ की, उप-धारा (१) में,---
(क) " प्राधिकरण या अपील प्राधिकरण " शब्दों के पश्चात्, " या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण " शब्द
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १०४ में संशोधन। निविष्ट किये जायेंगे ;
(ख) " धारा १०१ " शब्दों और अंकों के पश्चात्, " या केंद्रीय माल और सेवा कर अधिनियम की धारा १०१ग के अधीन " शब्द, अंक और अक्षर निविष्ट किये जायेंगे।
१९. मूल अधिनियम की धारा १०५ में,---
(क) पाश्र्व टिप्पणी के स्थान में, निम्न पाश्र्व टिप्पणी, रखी जायेगी, अर्थात् :---
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १०५ में संशोधन। " प्राधिकरण, अपील प्राधिकरण और राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण की शक्ितयाँ "
(ख) उप-धारा (१) में, " अपील प्राधिकरण " शब्दों के पश्चात् " या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण " शब्द निविष्ट किये जायेंगे ;
(ग) उप-धारा (२) में, " अपील प्राधिकरण " शब्द जहाँ कहीं वह दोनों स्थानों पर आये हों के पश्चात्, " या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण " शब्द निविष्ट किये जायेंगे।८ द्धन्रु]क्ष् रू न् +रून् रू, ह्यरूदन् १९, २०१९/+ २८, ॅ १९४१ २०. मूल अधिनियम की धारा १०६ में,---
(क) पाश्र्व टिप्पणी के स्थान में, निम्न पाश्र्व टिप्पणी, रखी जायेगी, अर्थात् :---
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १०६ में संशोधन।
" प्राधिकरण, अपील प्राधिकरण और राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण की प्रक्रिया।";
(ख) " अपील प्राधिकरण " शब्दों के पश्चात्, " या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण " शब्द निविष्ट किये जायेंगे।
२१. मूल अधिनियम की धारा १७१ की, उप-धारा (३) के पश्चात्, निम्न उप-धारा निविष्ट कि जायेगी, अर्थात् :---
सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १७१ में संशोधन।
" (३क) जहाँ उप-धारा (२) में र्िनदिष्ट प्राधिकरण, उक्त उप-धारा के अधीन यथा आवश्यक परीक्षण करने के पश्चात्, इस निष्कर्ष पर आता है कि, कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ित, उप-धारा (१) के अधीन मुनाफ़ाखोरी करता है ऐसे व्यक्ित को इस प्रकार मुनाफ़ाखोरी की रकम के दस प्रतिशत के समान शास्ति का भुगतान करने के लिये दायी किया जायेगा :
परन्तु, यदि मुनाफ़ाखोरी की रकम प्राधिकारी द्वारा आदेश पारित करने के दिनांक से तीस दिनों के भीतर मुनाफ़ाखोरी की गयी रकम निक्षेपित करता है तो शास्ति उद्ग्रहित नहीं की जायेगी।
स्पष्टीकरण.---इस धारा के प्रयोजनों के लिए, " मुनाफ़ाखोरी " अभिव्यक्ित का तात्पर्य, माल या सेवा या दोनों के प्रदाय पर करके दर में कटौती के लाभ प्रासंगिक न होने कारण या इनपुट कर क्रेडिट का लाभ माल या सेवा या दोनों की किमत में अनुरूप कटौती के मार्ग से प्राप्तिकर्ता को प्रासंगिक न होने के कारण निर्धारित रकम से है। "।
२२. (१) मूल अधिनियम, की धारा ११ की, उप-धारा (१) के अधीन, परिषद की सिफारिशों पर महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी की गई, सरकार की अधिसूचना वित्त विभाग क्रमांक / महाराष्ट्र माल और सेवा कर/ सी.आर.१०३(१)] कराधान-१ दिनांकित २९ जून २०१७, की संंलग्न अनुसूची में अनुक्रमांक १०३क और उससे संबंधित प्रविष्टि के स्थान में निम्न प्रविष्टि रखी जायेगी और १ जुलाई, २०१७ से प्रभावी रूप से रखी गयी समझी जायेगी, अर्थात् :---
"१०३क २६ युरेनियम और कॉन्सन्ट्रेट" सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ११ की उप-धारा १ सरकारी अधिसूचना, वित्त विभाग क्रमांक एमजीएसटी/ सी.आर. १०३(१)] कराधान-१ दिनांकित २९ जून, २०१७ में संशोधन।
(२.) उप-धारा (१) के प्रयोजनों के लिए, सरकार को, उप-धारा (१) में र्िनदिष्ट अधिसूचना का संशोधन करने की शक्ित होगी और ऐसा समझा जायेगा मानों कि सरकार को उक्त अधिनियम की धारा ११ की उप-धारा (१) के अधीन उक्त अधिसूचना का संशोधन करने की शक्ित, सभी तात्विक समय पर भूतलक्षी रूप से दी गई थी। (३.) ऐसे सभी ऐसे कर का, जो संग्रहित किए गए है, किंतु, इस प्रकार संग्रहित नहीं किए गये है, यदि उप-धारा (१) में र्िनदिष्ट की गई अधिसूचना सभी तात्विक समयों पर प्रवर्तन में आ गई थी, का प्रतिदाय नहीं किया जायेगा।द्धन्रु]क्ष् रू न् +रून् रू, ह्यरूदन् १९, २०१९/+ २८, ॅ १९४१ ९
उद्देश्यों तथा कारणों का वक्तव्य।
माल और सेवाएँ कर विधियों में आवश्यक संशोधन करने के लिये माल और सेवा कर परिषद द्वारा अनेक निर्णय लिए गए है। तद्नुसार, केंद्रीय माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ (सन् २०१७ का १२) और एकीकृत माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ (सन् २०१७ का १३), संसद द्वारा वित्त (क्र.२)अधिनियम, २०१९ (सन् २०१९ का २३) द्वारा संशोधित किये गये है। अत: तद्नुसार, महाराष्ट्र माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ (सन् २०१७ का महा.४३) में संशोधन करना इष्टकर हुआ है।
२. प्रस्तावित विधेयक अन्य बातों के साथ साथ निम्न के लिए उपबंध करता है, अर्थात् :----
(एक) ""न्याय निर्णायक प्राधिकारी"" की परिभाषा से की ""राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकारी"" को अपर्वजित करने की दृष्टी से महाराष्ट्र माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ की, धारा २ को खंड ४ में संशोधन करना ;
(दो) पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में पचास लाख रुपयों तक वर्ाषिक आवर्त होनेवाले सेवाअों के प्रदायकर्ता या मिश्रित आपर्ूतिकारों (पूर्वतम संरचना प्रणाली के लिए पात्र नहीं है) के लिए अनुकल्पिक संरचना प्रणाली का उपबंध करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा १० में संशोधन करना ;
(तीन) प्रदायकर्ता के मामले में, जो अनन्य रूप से मालों की प्रदायगी में आशयित है कि बीस लाख से ऐसी रकम चालीस लाख रुपयों से अधिक न हो कि रियायत मर्यादा की उच्चतम अब सीमा के लिए उपबंध करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा २२ में संशोधन करना ;
(चार) व्ययिाँ जो इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण करने का विचार करती है या किया है के लिए परिषद की सिफारिशों पर सरकार द्वारा जैसा कि अधिसूचित किया जाए ऐसी रीत्या में, आज्ञापक आधार अनुदेश या अधिप्रमाणन के लिए उपबंध करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा २५ में संशोधन करना ;
(पाँच) प्रदायकर्ता, उसके प्राप्तिकर्ता को डिजीटल भुगतान के लिए आज्ञापक रुप से सुविधा का प्रस्ताव करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की नवीन धारा ३१क को निविष्ट करने के लिये उपबंध करना ;
(छह) करदाता द्वारा जो संरचना उद्ग्रहण का विकल्प चुनता है, तिमाही कर के भुगतान की विवरणी प्रस्तुत करने और कतिपय कर दाताअों के अन्य प्रवगार्ं को, प्रस्तावित नई विवरणी दाखिल प्रणाली के अधीन तिमाही और मासिक भुगतान के विकल्प चुनने के लिए उपबंध करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा ३९ में संशोधन करना ;
(सात) वर्ाषिक विवरणी और समाधान विवरण प्रस्तुत करने लिए देय दिनांक बढाने के लिए आयुक्त को सशक्त करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा ४४ में संशोधन करना ;
(आठ) करदाता को, इलेक्ट्रॉनिक रोकड वही में एक के नाम से दूसरे के नाम पर कोई रकम अंतरित करने की सुविधा का उपबंध करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा ४९ में संशोधन करना ;
(नौ) उन मामलों को, जहाँ कर, धारा ७३ या ७४ के अधीन किसी कार्यवाहियाँ के शुरु करके पश्चातवर्ती भुगतान किया है को छोडकर केवल शुद्ध रोकड कर दायित्व पर प्रभारित ब्याज के लिए उपबंध करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा ५० में संशोधन करना ;
(दस) स्रोत पर संग्रहित किया हुआ कर का व्यक्ति द्वारा मासिक और वर्ाषिक विवरण प्रस्तुत करने के लिए की देय सम्यक् दिनांक को बढावा के लिए आयुक्त को सशक्त करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा ५२ में संशोधन करना ;
(ग्यारह) धारा ४९ के अधीन कर को नई सुविधा देने के परिणाम स्वरूप केंद्र और राज्यों के बीच इलेक्ट्रॉनिक रोकड वही में रकम का अंतरण करने के लिए उपबंध करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की नवीन धारा ५३क निविष्ट करना ;
(बारह) केंद्रीय सरकार द्वारा प्रत्यर्ापित की गई राज्य कर की रकम के समान कोई रकम केंद्र सरकार को अंतरित करने के लिए सरकार को सशक्त करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा ५४ में संशोधन करना ; रू-३६-२. द्र-१८२०-२.
१० द्धन्रु]क्ष् रू न् +रून् रू, ह्यरूदन् १९, २०१९/+ २८, ॅ १९४१(तेरह) ""अग्रिम विनिर्णय"" की परिभाषा में, अग्रिम विनिर्णय के लिए राष्ट्रीय अपीलिय प्राधिकरण द्वारा पारीत आदेशों को सम्मिलित करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा ९५ के खंड (क) में संशोधन करना है। ""राष्ट्रीय अपीलिय प्राधिकरण"" को परिभाषित करने के लिये धारा ९५ में खंड (च) को निविष्ट करने का भी आशय है।
(चौदह) केंद्रीय माल और सेवा कर अधिनियम के अधीन अग्रिम निर्णय के लिए गठित किया गया राष्ट्रीय अपीलिय प्राधिकरण इस अधिनियम के अधीन अग्रिम निर्णय के लिये राष्ट्रीय अपीलिय प्राधिकरण समझा जाने के लिये नवीन धारा १०१क को निविष्ट करने की दृष्टी से उपबंध करना ;
(पंद्रह) राष्ट्रीय अपीलिय प्राधिकरण को, उसके अग्रिम विनिर्णय का परिशोधन करने के लिए सशक्त बनाने के लिए उस धारा की परिधि में लाने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा १०२ में संशोधन करना ;
(सोलह) यह उपबंध करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा १०३ में संशोधन करना है कि, राष्ट्रीय अपीलिय प्राधिकरण द्वारा सुनिश्चित किए गए अग्रिम विनिर्णय आवेदन कर्ताअों, सुनिश्चित होनेवाले व्यक्तियों और समान स्थायी खाता क्रमांक होनेवाले सभी रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों और समान स्थायी खाता क्रमांक होनेवाले सभी रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों, और संबंधित अधिकारियों, या उक्त आवेदनकर्ताअों और समान स्थायी क्रमांक होनेवाले सभी रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के संबंध अधिकारिता वाले अधिकारियों पर बाध्यकारी होंगे। यह भी प्रस्तावित किया जाता है कि विनिर्णय, जब तक वहाँ विधि या तथ्यों में परिवर्तन नहीं होता है तब तक बाध्यकारी होंगे ;
(सत्रह) राष्ट्रीय अपीलिय प्राधिकरण द्वारा सुनाए गए अग्रिम विनिर्णय जहाँ पर विनिर्णय कपट, तात्विक तथ्यों को छिपाकर या तथ्यों के दुव्र्यपदेशन द्वारा प्राप्त किए गए है वहाँ पर शून्य करने का उपबंध करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा १०४ में संशोधन करना ;
(अठारह) राष्ट्रीय अपीलिय प्राधिकारी को इस अधिनियम के अधीन उसके शक्तियों का प्रयोग करने के प्रयोजन के लिए, सिविल प्रक्रिया संहिता, १९०८ के अधीन सिविल न्यायालय की सभी शक्तियों प्राप्त होने हेतु उपबंध करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा १०५ में संशोधन करना ;
(उन्नीस) राष्ट्रीय अपीलिय प्राधिकरण को उसकी अपनी प्रक्रिया विनियमित करने की शक्तियों हेतु उपबंध करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा १०६ में संशोधन करना ;
(बीस) नई उप-धारा (३क) को निविष्ट करने की दृष्टी से उक्त अधिनियम की धारा १७१ में संशोधन करना है ताकि, मुनाफाखोरी विरुद्ध प्राधिकरण मुनाफे के रकम के दस प्रतिशत के समतुल्य शास्ति अधिरोपित करने के लिए सशक्त बने।
(इक्कीस) धारा ११ की उप-धारा (१) के अधीन महाराष्ट्र सरकार की अधिसूचना, वित्त विभाग क्रमांक २/२०१७-राज्य कर (दर) [क्रमांक महाराष्ट्र माल और सेवा कर/सी.आर. १०३(१)] कराधान-१, दिनांकित २९ जून २०१७ में संशोधन करना है ताकि १ जुलै २०१७ से १४ नवम्बर २०१७ से राज्य माल और सेवा कर के उद्ग्रहण से " युरेनियम और कॉन्सन्ट्रेट " को भूतलक्षी रुप से छूट दी जा सकें।
३. प्रस्तुत विधेयक का आशय उपयर्ुक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है।
नागपूर,
जयंत पाटील,
दिनांकित १८ दिसंबर, २०१९।
वित्त मंत्री।द्धन्रु]क्ष् रू न् +रून् रू, ह्यरूदन् १९, २०१९/+ २८, ॅ १९४१ ११
प्रत्यायुक्त विधान संबंधी ज्ञापन।
प्रस्तुत विधेयक में, विधायी शक्ति के प्रत्यायोजनार्थ, निम्न प्रस्ताव अन्तर्ग्रस्त हैं, अर्थात् :-
खण्ड ३ (ग) .-- इस खण्ड के अधीन, जिसका आशय महाराष्ट्र माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ (जिसे इसमें आगे ''मूल अधिनियम '' कहा गया है) की धारा १० में नवीन उपधारा (२ क) को निविष्ट करणा है, जिसमें, परिषद की सिफारिशों पर, उक्त उप-धारा के अधीन कर की रकम को परिकालित करने के प्रयोजनों के लिये राज्य में आवर्तन के और संघ राज्यक्षेत्र के आवर्तन की दर तीन प्रतिशत से अनधिक विहित करने की शक्ति राज्य सरकार को प्रदान की गई हैं।
खण्ड ४.-- इस खण्ड के अधीन, जिसका आशय मूल अधिनियम की धारा २२ को उप-धारा (१) में तृतीय परंतुक निविष्ट करना है, जिसमें, परिषद की सिफारिशों पर, अधिसूचना में विर्िनदिष्ट किया जाने ऐसी कतिपय शर्तों और सीमाअों के अध्यधीन, प्रदायकर्ता के मामले में, जो माल की प्रदायगी में जुडा हुआ है के बीस लाख रुपयों से ऐसी रकम जो चालीस लाख रुपयों से अधिक न हो तक के कुल आवर्तन को बढाने की शक्ति राज्य सरकार को प्रदान की गई है।
खण्ड ५.-- इस खण्ड के अधीन, जिसका आशय मूल अधिनियम की धारा २५ में नवीन उप-धारा में (६क), (६ख), (६ग) और (६घ) निविष्ट करना है, जिसमें उप-धारा (६क) में, परिषद को सिफारिशों पर, रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति जिसका प्ररुप और रीति और समय नियमों द्वारा विहित करने की शक्ति राज्य सरकार को प्रदान की गई है वह, आधार क्रमांक का अधिप्रमाणन करेगा या उसके कब्जे का सबूत प्रस्तुत करेगा और यदि ऐसे व्यक्ति के मामले में आधार क्रमांक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति से समनुदेशित नहीं किया गया है तब, ऐसे व्यक्ति को वह रीति जिसमें पहचान के वैकल्िपक और व्यवहारिता का प्रस्ताव देगी।
खण्ड ६.-- इस खंड के अधीन, जिसका आशय मूल अधिनियम में नवीन धारा ३१ क निविष्ट करनी है, जिसमें परिषद की सिफारिशों पर रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों का वर्ग विहित करने की शक्ति राज्य सरकार को प्रदान की गई है जो, उसके द्वारा की गई माल या सेवा या दोनों की आपर्ूति प्रप्तिकर्ता को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान की प्रणाली विहित करने के लिये उपबंध करेगी और ऐसे नियमों द्वारा ऐसी प्रणाली, रीति में और शर्तों और प्रतिबंधों के अध्यधीन, भुगतान करने का विकल्प प्राप्तिकर्ता को देगी।
खण्ड ७.-- इस खंड के अधीन जिसका आशय मूल अधिनियम की उप-धारा (१), (२) और (७) प्रतिस्थापित करना है, जिसमें राज्य सरकार को विवरणी प्रस्तुत कर सके ऐसे प्ररुप, रीति और समय के भीतर विवरणी में प्रस्तुत की जानेवाली विशिष्टियाँ नियमों द्वारा विहित करने के लिये शक्ति प्रदान की गई है।
खण्ड ९.-- इस खंड के अधीन, जिसका आशय मूल अधिनियम की धारा ४९ की नवीन उप-धाराएँ (१०) और (११), उप-धारा (१०) के अधीन निविष्ट करना है जिसमें राज्य सरकार को रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति सामान्य पोर्टल पर अन्तरण के लिये कर, ब्याज, शास्ति, फीस या उक्त अधिनियम के अधीन इलेक्ट्रॉनिक रोकड बही में उपलब्ध कोई अन्य रकम, एकीकृत कर, केन्द्रीय कर, राज्य कर या उपकर के लिये प्ररुप, रीति, शर्तो और निबर्ंधनों को नियमो ्द्वारा विहित करने के लिये शक्ति प्रदान की गई है और ऐसा अन्तरण प्रतिदाय समझा जायेगा।
खण्ड १२.-- इस खंड के अधीन, जिसका आशय मूल अधिनियम की नवीन धारा ५३ क निविष्ट करना है, जिसमें राज्य सरकार को इलेक्ट्रॉनिक नकद खाता से अन्तरित रकम के लिये कोई समान रकम केन्द्रीय कर लेखा या एकीकृत कर लेखा या उपकर लेखा को अन्तरित करने के लिये रीति और समय नियमों द्वारा विहित करने की शक्ति प्रदान की है।
२. विधायी शक्ति के प्रत्यायोजन के लिये उपरोल्िलखित प्रस्ताव सामान्य स्वरूप के है।
रू-३६-३. द्र-१८२०-३.
१२ द्धन्रु]क्ष् रू न् +रून् रू, ह्यरूदन् १९, २०१९/+ २८, ॅ १९४१वित्तीय ज्ञापन।
प्रस्तावित विधेयक महाराष्ट्र माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ (सन् २०१७ का महा. ४३) में संशोधन करना प्रस्तावित है।
प्रस्तुत विधेयक में उसके राज्य विधानमंडल के अधिनियम के रूप में उसकी अधिनियमिति होने पर, राज्य की समेकित निधि में से कोई आर्वति या अनार्वति व्यय का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
(यथार्थ अनुवाद),
नं. मा. राऊत,
भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य ।द्धन्रु]क्ष् रू न् +रून् रू, ह्यरूदन् १९, २०१९/+ २८, ॅ १९४१ १३
भारत संविधान के अनुच्छेद २०७ के अधीन राज्यपाल की अनुशंसा
(महाराष्ट्र शासन, विधी व न्याय विभाग, आदेश कि प्रत)
भारत संविधान के अनुच्छेद २०७ के खंड (१) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हूए, महाराष्ट्र राज्यपाल महोदय, महाराष्ट्र माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, २०१९ ई. पर पुर:स्थापना करने की अनुशंसा करते है।
विधान भवन, नागपूर, दिनांकित १९ दिसम्बर, २०१९।
राजेन्द्र भागवत, सचिव (कार्यभार), महाराष्ट्र विधानसभा ।
ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY DIRECTOR, RUPENDRA DINESH MORE, PRINTED AT GOVERNMENT PRESS AND BOOK DEPOT, CIVIL LINES, NAGPUR-440 001 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI-400 004. EDITOR : DIRECTOR, RUPENDRA DINESH MORE.