महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ६, अंक २] गुरुवार, फेब्रुवारी १३, २०२०/माघ २४, शके १९४१ [पृष्ठे ३, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक ३
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
सहकारिता, विपणन और वस्त्रोद्योग विभाग
मंत्रालय, मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरू चौक,
मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित ३१ जनवरी २०२०.
MAHARASHTRA ORDINANCE No. III OF 2020.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA AGRICULTURAL PRODUCE MARKETING (DEVELOPMENT AND REGULATION) ACT , 1963.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक ३ सन् २०२०।
महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास और विनियमन) अधिनियम, १९६३ में अधिकतर संशोधन
करने संबंधी अध्यादेश।
क्योंकी, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;
(१)
भाग सात--३-----१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी १३, २०२०/माघ २४, शके १९४१ और क्योंकि, महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं, जिनके कारण उन्हें, इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास और विनियमन) अधिनियम, १९६३ में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ;
सन् १९६४ का महा. २०। अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्ितयों का प्रयोग करते हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :---
१. (१) यह अध्यादेश महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास और विनियमन) (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भण. २०२० कहलाए।
(२) यह तुरंत प्रवृत्त होगा।
२. महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास और विनियमन) अधिनियम, १९६३ की धारा १३ की, (१) उप-धारा (१) में,---
सन् १९६४ का महा. २० की धारा १३ में संशोधन।
सन् १९६४ का महा. २०। (क) खण्ड (क) के, उप-खण्ड (एक) के स्थान में, निम्न उप-खण्ड, रखा जायेगा अर्थात् :-
सन् १९६१ का महा. २४।
"(एक) बाजार क्षेत्र में कार्यरत कृषि साख संस्थाअों और बहुउद्देशिय सहकारी संस्थाअों (महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० और तद्धीन बनाए गये नियमों के अर्थान्तर्गत) प्रबंध समिति के सदस्यों द्वारा ग्यारह सदस्य (जिनमें से दो महिला होगी, एक अन्य पिछड़े वर्ग का व्यक्ित होगा और एक निरधिसूचित जनजाति (विमुक्त जाति) या खानाबदोश जनजाति का व्यक्ित होगा) निर्वाचित किये जायेंगे :
परंतु, जहाँ बाजार समिति जनजाति क्षेत्रों में स्थित है, वहाँ यथा उपयर्ुक्त निरधिसूचित जनजाति (विमुक्त जाति या खानाबदोश जनजाति के व्यक्ित के निर्वाचन के स्थान में अनुसूचित जनजाति में से एक व्यक्ित निर्वाचित किया जायेगा ; और
(दो) बाजार क्षेत्र में कार्यरत ग्राम पंचायत के सदस्यों द्वारा चार सदस्य (जिनमें से एक व्यक्ित अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का होगा और एक व्यक्ित र्आथिक रुप से कमजोर वर्गों में से होगा) निर्वाचित किये जायेंगे ;"";
(ख) खण्ड (छ) के, पश्चात्, परन्तुक, अपमर्ाजित किया जायेगा ।
(२) उप-धारा (१ख) के खण्ड (ग) के उप-खण्ड (एक) और (दो) के स्थान में, निम्न खण्ड, रखा जायेगा अर्थात् :--
(एक) प्रभागीय बाजार समिति के परिचालन क्षेत्र समेत प्रत्येक जिले से कृषि उपज बाजार समिति के कृषक सदस्यों द्वारा निर्वाचित कृषकों के दो प्रतिनिधि ; या
(दो) प्रादेशिक बाजार समिति के परिचालन क्षेत्र समेत प्रत्येक तहसिल से कृषि उपज बाजार समिति के कृषक सदस्यों द्वारा निर्वाचित कृषकों में से एक प्रतिनिधि ;"।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी १३, २०२०/माघ २४, शके १९४१ ३
वक्तव्य।
महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास और विनियमन) अधिनियम, १९६३ (सन १९६४ का महा. २०) बाजार क्षेत्रों और निजी बाजार और किसान उपभोक्ता बाजार समेत बाजारों में कृषिक और कतिपय अन्य उपज के विपणन का विकास और विनियमन करने के लिए, राज्य में स्थापित किए गए ऐसे बाजारों से संबंधित या ऐसे बाजारों से संबंधित प्रयोजनों के लिए कार्य करने के लिए गठित की जानेवाली बाजार समितियों को शक्ितयाँ प्रदत्त करने के लिए और बाजार समिति के प्रयोजनों के लिए बाजार निधि स्थापित करने और उपयर्ुक्त मामलों से संबंधित प्रयोजनों के लिए उपबंध करने के लिए अधिनियमित किया गया है।
२. उक्त अधिनियम की धारा १३, बाजार समितियों के गठन का उपबंध करती है। बाजार समितियों पर विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों या प्रवर्गों से प्रतिनिधित्व देने के लिये विभिन्न अवसरों पर उक्त धारा १३ संशोधित की गई है। धारा १३(१) और धारा (१ख) यह उपबंध करती है कि, संबंधित बाजार क्षेत्र में रहनेवाले तथा १०आर भूमी धारण करनेवाले कृषकों द्वारा बाजार क्षेत्र में रहनेवाले कृषकों को बाजार समिति पर और प्रभागीय बाजार समिति या प्रादेशिक बाजार समिति पर निर्वाचित किए जायेंगे। अन्य सदस्य व्यापारियों, कमिशन अभिकर्ताअों, हमालों और तुलाईकारों में से निर्वाचित किए जायेंगे।
इन उपबंधों के कारण बाजार समिति निर्वाचन में मतदाताअों की संख्या में बडे पैमाने पर वृद्धि हुई है। परिणामस्वरुप ऐसे निर्वाचनों को करने के खर्च में भी वृद्धि हुई है। विद्यमानत: राज्य सरकार, बाजार समितियों को कोई अनुदान नहीं देती है। बाजार समितियाँ उनका खर्च बाजार क्षेत्र में विपणन किए गए कृषि उपज विपणन के प्रत्येक खरीदकर्ता से उसके द्वारा उद्ग्रहीत और संग्रहीत बाजार फीस से पूरा करती है। इसलिए, अधिकाश बाजार समितियाँ ऐसे निर्वाचन का खर्च वहन करने के लिए कठिनाईयों का सामना कर रही है। परिणामस्वरुप, इन समितियों के निर्वाचन समय पर नहीं लिए जा सकेंगे। मुंबई उच्च न्यायालय ने भी कुछ बाजार समितियों के निर्वाचन समय में आयोजित न करने पर असन्तुष्टताभी प्रकट की है।
इस पृष्ठपट में, कृषक सदस्यों के अप्रत्यक्ष निर्वाचनों के पूर्वतर उपबंधों को यथापूर्व करने की दृष्टि से, उक्त अधिनियम की धारा १३(१) और (१ख) के उपबंधों में संशोधन करना इष्टकर समझा गया है,---
(एक) कृषि साख संस्थाअों और बहुउद्देशीय सहकारी संस्थाअों के प्रबंध समितियों के सदस्यों और ग्रामपंचायतों के सदस्यों द्वारा, बाजार समिति पर ; और
(दो) क्रमश: प्रभागीय बाजार समिति के परिचालन क्षेत्र में सम्मिलित प्रत्येक जिले में से बाजार समितियाँ और जिसमें प्रादेशिक बाजार समिति के परिचालन क्षेत्र से सम्मिलित प्रत्येक तहसिल में से बाजार समितियाँ कृषक सदस्यों द्वारा प्रभागीय बाजार समिति पर या प्रादेशिक बाजार समिति पर, होंगे। ३. चूँकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नही चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हे इसमें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास और विनियमन) अधिनियम, १९६३ (सन् १९६४ का महा. २०) में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है।
मुंबई, दिनांकित ३१ जनवरी २०२०।
भगत सिंह कोश्यारी, महाराष्ट्र के राज्यपाल, महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से, अनुप कुमार सरकार के प्रधान सचिव,
(यथार्थ अनुवाद), नं. मा. राऊत, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
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