RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ६, अंक ३ ] शनिवार, फेब्रुवारी १५, २०२०/माघ २६, शके १९४१ [पृष्ठे ५, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक ४
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)
नगर विकास विभाग
मंत्रालय, मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरू चौक, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित ४ फरवरी २०२० ।
MAHARASHTRA ORDINANCE NO. IV OF 2020.
AN ORDINANCE
further to amend the Maharashtra Municipal Councils,
Nagar Panchayats and Industrial Townships Act, 1965.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक ४ सन् २०२०।
महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ में अधिकतर
संशोधन करने संबंधी अध्यादेश ।
क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;
(१) २ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी १५, २०२०/माघ २६, शके १९४१ अब, इसलिए भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करतेे हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हंै, अर्थात् :----
१. (१) यह अध्यादेश महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) रूहह्य द्ध न्द्ध
अध्यादेश, २०२० कहलाए।
(२) यह तुरंत प्रवृत्त होगा ।
सन् १९६५ का महा. ४०। रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० ॅ्र न् २ द्ध रूह
२. महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ (जिसे इसमें आगे, " मूल अधिनियम " कहा गया है) की धारा २ के, खण्ड (७) के, उप-खण्ड (दो) में, " के रुप में निर्वाचित हुए " शब्दों को पश्यात् '' धारा ५१ के अधीन धारा ५१क-१ख के अनुसरण में परिषद का अध्यक्ष या '' शब्द निविष्ट किए जायेंगे :----
३. मूल अधिनियम की धारा ५१क-१क के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :-----
रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० द्ध न् ५१ॅ-१ ॅ ह्यम्
सन् २०२० का महा अध्या. ४। ह्यन्रु ॅ + ॅ ह्यम् ॅ ह्य न् ५१ॅ- १ॅ ॅ
" ५१क-१ख. महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, २०२० के प्रारम्भण के दिनांक के पश्चात्, परिषद के आम निर्वाचन और उप-निर्वाचनों के संबंध में, धारा ५१क-१क के उपबंध लागू होने से परिविरत हो जायेंगे और प्रत्येक परिषद का अध्यक्ष वह होगा जो धारा ५१ के अधीन निर्वाचित किया जायेगा और उसके लिये उक्त धारा ५१ के उपबंध लागू होंगे । "।
४. मूल अधिनियम की धारा ५१क की, उप-धारा (६क) के पश्चात, निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :-----
रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० ॅ्र न् ५१ॅ द्ध रूह
सन् २०२० का महा अध्या. ४। " (६ख) महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, २०२० के प्रारम्भण के दिनांक के पश्चात्, परिषद के आम निर्वाचन और उप-निर्वाचन के संबंध में, उप-धारा (६क) के उपबंध लागू होने से परिविरत हो जायेंगे और प्रत्येक परिषद का उपाध्यक्ष वह होगा जो धारा ५१क के अधीन निर्वाचित किया जायेगा और उसके लिये उक्त धारा ५१क के उपबंध लागू होंगे।
५. मूल अधिनियम की धारा ५२, की उप-धारा (३) के पश्चात, निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :-----
रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० ॅ्र न् ५२ द्ध रूह
सन् २०२० का महा अध्या. ४।
" (४) महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, २०२० के प्रारम्भण के दिनांक के पश्चात्, धारा ५१ के अधीन धारा ५१क-१ख के अनुसरण में, अध्यक्ष की पदावधी की शर्ते उप-धारा (१) में यथा उपबंधित ऐसी होंगी। "।
६. मूल अधिनियम की धारा ५५ के स्थान में, निम्न धारा रखा जायेगा, अर्थात् :-----
रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० ॅ्र न् ५५ ॅ ह्यरू रु न् + ॅ ]क्ष्
" ५५. (१) धारा ५१ के अधीन निर्वाचित अध्यक्ष को हटाने की माँग पर कुल पार्षदों की संख्या के आधे से अनिम्न पार्षदों द्वारा हस्ताक्षर होने चाहिये और उसमें ऐसे अध्यक्ष के विरुद्ध कदाचार के आरोप अंर्तविष्ट होंगे और उसे कलक्टर को भेजा जायेगा :
परंतु, ऐसे अध्यक्ष के निर्वाचन के दिनांक से एक वर्ष की अवधि के भीतर ऐसी माँग नहीं भेजी जायेगी। (२) उप-धारा (१) के अधीन माँग की प्राप्ति पर, कलक्टर, ऐसे आरोपों की जाँच संचालित करेगा और ऐसी जाँच, माँग की प्राप्ति के दिनांक से एक महिने की अवधि के भीतर पूरी की जायेगी ;
परंतु, किसी मामले में जाँच का ऐसा अवधि तीन महिने से आगे नहीं बढ़ाया जायेगा और यदि जाँच प्रक्रिया अनिवार्य कारणों द्वारा विलंबित होती है तो ऐसे विस्तारित अवधि के लिए राज्य सरकार की पूर्वानुमति कलक्टर द्वारा प्राप्त की जायेगी।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी १५, २०२०/माघ २६, शके १९४१ ३ (३) कलक्टर, धारा ५५क के अधीन समुचित कार्यवाही करने के लिए राज्य सरकार को जाँच के निष्कर्ष प्रस्तुत करेगा।
७. मूल अधिनियम की धारा ५८ की उप-धारा (१क) में, " धारा ५१क १क के अधीन सीधे निर्वाचित अध्यक्ष को, राज्य सरकार द्वारा, जैसा कि समय-समय पर विहित किया जाए, विकास कार्यों के ऐसे प्रस्ताव को
रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० ॅ्र न् ५८ द्ध रूह वित्तीय मंजूरी देने की शक्ति होगी " शब्द, अंक और अक्षरों के स्थान में, " धारा ५१ के अधीन धारा ५१क-१ख के अनुसरण में निर्वाचित अध्यक्ष या, यथास्िथति, धारा ५१क-१क के अधीन सीधे निर्वाचित अध्यक्ष को, राज्य सरकार द्वारा, जैसा कि समय-समय पर, आदेश द्वारा विर्िनदिष्ट किया जाए, विकास कार्यों के ऐसे प्रस्ताव को वित्तीय मंजूरी देने की शक्ति होगी " शब्द, अंक और अक्षर रखे जायेंगे।
८. मूल अधिनियम की धारा ९३ की, उप-धारा (२), के, खण्ड (ग) के, परन्तुक के स्थान में, निम्न परन्तुक, रखा जायेगा, अर्थात् :-----
रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० ॅ्र न् ९३ द्ध रूह " परंतु, जैसा कि राज्य सरकार, समय-समय पर, आदेश द्वारा, विर्िनदिष्ट कर सकें ऐसी संविदा के लिए, अध्यक्ष की समिति (धारा ५१ के अधीन धारा ५१क-१ख के अनुसरण में निर्वाचित, या, यथास्थिति, धारा ५१क-१क के अधीन सीधे निर्वाचित) और मुख्य अधिकारी उसकी प्राप्ति के दिनांक से पंद्रह दिनों की अवधि के भीतर ऐसी संविदा को अनुमोदित करेगा। "।
९. मूल अधिनियम की धारा ३४१ख-१क के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :-----
" ३४१ख-१ख महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, सन् २०२० का महा. अध्या. ४। २०२० के प्रारम्भण के दिनांक के पश्चात्, नगर पंचायत के आम निर्वाचनों और उप-निर्वाचनों के संबंध में, धारा ३४१ख-१क के उपबंध लागू होने से परिविरत हो जायेंगे और प्रत्येक नगर पंचायत का एक अध्यक्ष होगा जो धारा ३४१ख-१ के अधीन निर्वाचित किया जायेगा और उसके लिये उक्त धारा ३४१ख-१ के उपबंध
रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० ॅ्र न् ३४१-१ ॅ ह्यम् न् ह ॅ + ॅ ह्यम् ॅ ह्य न् ३४१ -१ ॅ लागू होंगे । "।
१०. मूल अधिनियम की धारा ३४१ख-२ की, उप-धारा (६क) के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :-----
सन् १९६५ का महा. ४० की धारा ३४१ख-२ में संशोधन। ""(६ख) महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, २०२० के प्रारम्भण के दिनांक के पश्चात्, नगर पंचायत के आम निर्वाचनों और उप-निर्वाचनों के संबंध में, सन् २०२० का महा. अध्या. ४
उप-धारा (६क) के उपबंध लागू होने से परिविरत हो जायेंगे और प्रत्येक नगर पंचायत का एक उपाध्यक्ष होगा जो धारा ३४१ख-२ के अधीन निर्वाचित किया जायेगा और उसके लिये उक्त धारा ३४१ख-२ के उपबंध लागू होंगे।""
११. मूल अधिनियम की धारा ३४१ख-४ की, उप-धारा (४) के पश्चात्, निम्न उप-धारा, जोडी जायेगी, अर्थात् :----
सन् १९६५ का महा. ४० की धारा ३४१ख-४ में संशोधन। (४) ""महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, ४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी १५, २०२०/माघ २६, शके १९४१ १२. मूल अधिनियम की धारा ३४१ख-५ के, स्थान में, निम्न धारा, रखी जायेगी, अर्थात् :-----
सन १९६५ का महा. ४० की धारा ३४१ख-५ का प्रतिस्थापन। पार्षदों द्वारा नगर पंचायत के अध्यक्ष को हटाना।
""३४१ख-५. (१) धारा ३४१ख-१ के अधीन निर्वाचित अध्यक्ष हटाए जाने की माँग पर पार्षदों की कुल संख्या के आधे से अनिम्न द्वारा हस्ताक्षर होने चाहिए और उसमें ऐसे अध्यक्ष के विरूद्ध कदाचार के आरोप अंर्तविष्ट होंगे और उसे कलक्टर के पास भेजा जाएगा :
परंतु, ऐसे अध्यक्ष के निर्वाचन के दिनांक से एक वर्ष की अवधि के भीतर ऐसी कोई माँग भेजी नहीं जायेगी।
(२) उप-धारा (१) के अधीन माँग की, प्राप्ति पर, कलक्टर ऐसे आरोपों की जाँच संचालित करेगा और माँग की प्राप्ति के दिनांक से एक महीने की अवधी के भीतर ऐसी जाँच पूरी करेगा :
परंतु, किसी मामले में, यदि जाँच प्रक्रिया, अपरिहार्य कारणों द्वारा विलंबित होती है तो जाँच के ऐसी अवधि तीन महीने से अधिक नहीं बढाई जायेगी और ऐसे विस्तारीत अवधि के लिए, कलक्टर द्वारा, राज्य सरकार की पूर्वानुमति प्राप्त की जायेगी।
(३) कलक्टर, उसके लिए यथा प्रयुक्त धारा ५५क के अधीन समुचित कार्यवाही करने के लिए सरकार को जाँच के निष्कर्ष प्रस्तुत करेगा।""।
कठिनाई के निराकरण की शक्ित।
१३. (१) यदि इस अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित, मूल अधिनियम, के उपबंधो को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो, राज्य सरकार, जैसा अवसर उद्भूत हो, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, मूल अधिनियम के उद्देश्यों और कारणों से अनसंगत कोई बात कर सकेगी, जो उसे कठिनाई के निराकरण के प्रयोजनों के लिये आवश्यक या इष्टकर प्रतीत हों ।
(२) उप-धारा (१) के अधीन, बनाया गया प्रत्येक आदेश उसके बनाये जाने के पश्चात्, यथा संभव शीघ्र, राज्य विधान मंडल के दोनों सदनों के समक्ष रखा जायेगा ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी १५, २०२०/माघ २६, शके १९४१ ५
वक्तव्य
महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ (सन् १९६५ का महा. ४०) के विद्यमान उपबंधों के अनुसार, नगर परिषद, और नगर पंचायत के अध्यक्ष, परिषद, और नगर पंचायत के मतदाताअों द्वारा उसके आम निर्वाचन में सीधे निर्वाचित होते है।
विद्यमान स्थिति का पुर्नविलोकन करने के पश्चात् और नगर परिषद और नगर पंचायत का कार्य आसान बनाने की सुनिश्चिति करने की दृष्टी से, राज्य सरकार, उक्त अधिनियम के उपबंधों का यथोचित उपांतरण करना इष्टकर समझती है।
२. प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश निम्न है,-----
(क) यह उपबंध करना कि, नगर परिषद, और नगर पंचायत के अध्यक्ष, उनमें से निर्वाचित पार्षदों द्वारा निर्वाचित किये जायेंगे ;
(ख) अध्यक्ष और पार्षदों के बीच में पारस्पारिक उत्तरदायित्व और समझदारी को बढावा देना।
(ग) नगरपालिका क्षेत्रों में, विकास क्रियाकलापों की गति को बढावा देना ; और
(घ) आवश्यक पाए जानेवाले अन्य परिणामस्वरूप संशोधनों को कार्यान्वित करना।
३. चूँकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है, कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें इसमें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ (सन् १९६५ का ४०) में अधिकतर संशोधन करने के सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है।
मुंबई,
भगत सिंह कोश्यारी,
दिनांकित २ फरवरी २०२०।
महाराष्ट्र के राज्यपाल,
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,
मनीषा पाटणकर-म्हैसकर,
सरकार के प्रधान सचिव।
(यथार्थ अनुवाद),
नं. मा. राऊत,
भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
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