RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ६, अंक ४(५) ] मंगळवार, फेब्रुवारी २५, २०२०/फाल्गुन ६, शके १९४१ [पृष्ठे ६, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक १०
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)
महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय
महाराष्ट्र विधानसभा में दिनांक २५ फरवरी, २०२० ई.को. पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियम ११७ के अधीन प्रकाशन किया जाता है :----
L. A. BILL NO. V OF 2020.
A BILL
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA MUNICIPAL COUNCILS,
NAGAR PANCHAYATS AND INDUSTRIAL TOWNSHIPS ACT, 1965.
विधानसभा का विधेयक क्रमांक ५ सन् २०२०।
महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ में अधिकतर
संशोधन करने संबंधी विधेयक ।
क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा था ;
सन् १९६५ का महा. ४०।
और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चूका था कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान थीं जिनके कारण उन्हें इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र नगरपरिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ में अधिकतर संशोधन करने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ था ; और, इसलिए, महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, २०२०, ४ फरवरी, २०२० को प्रख्यापित हुआ था ;
सन् २०२० का महा. अध्या. क्र. ४।
(१)
भाग सात----१०-१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २५, २०२०/फाल्गुन ६, शके १९४१ और क्योंकि, उक्त अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के अधिनियम द्वारा लघु उपांतरण के साथ बदलना इष्टकर है ; इसलिए, भारत गणराज्य के इकत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है :----
१. (१) यह अधिनियम महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) रूहह्य द्ध न्द्ध अधिनियम, २०२० कहलाए।
(२) ४ फरवरी, २०२० को प्रवृत्त हुआ समझा जायेगा ।
सन् १९६५ का महा. ४०। रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० ॅ्र न् २ द्ध रूह
२. महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ (जिसे इसमें आगे, " मूल अधिनियम " कहा गया है) की धारा २ के, खण्ड (७) के, उप-खण्ड (दो) में, " के रुप में निर्वाचित हुए " ' शब्दों को पश्चात् ' " धारा ५१ के अधीन धारा ५१क-१ख के अनुसरण में परिषद का अध्यक्ष या " शब्द निविष्ट किए जायेंगे।
३. मूल अधिनियम की धारा ५१क-१क के पश्चात्, निम्न धारा निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :-----
रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० द्ध न् ५१ॅ-१ ॅ ह्यम्
सन् २०२० का महा.। ह्यन्रु ॅ + ॅ ह्यम् ॅ ह्य न् ५१ॅ- १ॅ ॅ
" ५१क-१ख. महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, २०२० के प्रारम्भण के दिनांक के पश्चात्, परिषद के आम निर्वाचन और उप-निर्वाचनों के संबंध में, धारा ५१क-१क के उपबंध लागू होने से परिविरत हो जायेंगे और प्रत्येक परिषद का अध्यक्ष वह होगा जो धारा ५१ के अधीन निर्वाचित किया जायेगा और उसके लिये उक्त धारा ५१ के उपबंध लागू होंगे । "।
४. मूल अधिनियम की धारा ५१क की, उप-धारा (६क) के पश्चात्, निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :-----
रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० ॅ्र न् ५१ॅ द्ध रूह
सन् २०२० का महा.। " (६ख) महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, २०२० के प्रारम्भण के दिनांक के पश्चात्, परिषद के आम निर्वाचन और उप-निर्वाचन के संबंध में, उप-धारा (६क) के उपबंध लागू होने से परिविरत हो जायेंगे और प्रत्येक परिषद का उपाध्यक्ष वह होगा जो धारा ५१क के अधीन निर्वाचित किया जायेगा और उसके लिये उक्त धारा, ५१क के उपबंध लागू होंगे। "।
५. मूल अधिनियम की धारा ५२, की उप-धारा (३) के पश्चात्, निम्न उप-धारा निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :-----
रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० ॅ्र न् ५२ द्ध रूह सन् २०२० का महा. अध्या. ४।
" (४) महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, २०२० के प्रारम्भण के दिनांक के पश्चात्, धारा ५१ के अधीन धारा ५१क-१ख के अनुसरण में अध्यक्ष की पदावधि उप-धारा (१) में यथा उपबंधित ऐसी होगा। "।
६. मूल अधिनियम की धारा ५५ के स्थान में, निम्न धारा, रखी जायेगी, अर्थात् :----
रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० ॅ्र न् ५५ ॅ ह्यरू रु न् + ॅ ]क्ष्
" ५५. (१) धारा ५१ के अधीन निर्वाचित अध्यक्ष को हटाने की माँग पर पार्षदों की कुल संख्या के आधे से अनिम्न पार्षदों द्वारा हस्ताक्षर किये जायेंगे और उसमें ऐसे अध्यक्ष के विरुद्ध कदाचार के आरोप अंर्तविष्ट होंगे और उसे कलक्टर को भेजा जायेगा :
परंतु, ऐसे अध्यक्ष के निर्वाचन के दिनांक से एक वर्ष की अवधि के भीतर ऐसी माँग नहीं भेजी जायेगी। (२) उप-धारा (१) के अधीन माँग की प्राप्ति पर, कलक्टर, ऐसे आरोपों की जाँच संचालित करेगा और ऐसी जाँच, माँग की प्राप्ति के दिनांक से एक महिने की अवधि के भीतर पूरी की जायेगी :
परंतु, किसी मामले में जाँच का ऐसा अवधि तीन महिने से आगे नहीं बढ़ाया जायेगा और यदि जाँच प्रक्रिया अपरिहार्य कारणों द्वारा विलंबित होती है तो ऐसे विस्तारित अवधि के लिए राज्य सरकार की पूर्वानुमति कलक्टर द्वारा प्राप्त की जायेगी।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २५, २०२०/फाल्गुन ६, शके १९४१ ३ (३) कलक्टर, धारा ५५क के अधीन समुचित कार्यवाही करने के लिए राज्य सरकार को जाँच के निष्कर्ष प्रस्तुत करेगा।"।
रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० ॅ्र न् ५८ द्ध रूह ७. मूल अधिनियम की धारा ५८ की उप-धारा (१क) में, " धारा ५१क---१क के अधीन सीधे निर्वाचित अध्यक्ष को, जैसा कि समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा, विहित किया जाए, ऐसे विकास कार्यों के ऐसे प्रस्ताव को वित्तीय मंजूरी देने की शक्ति होगी " शब्दों, अंकों और अक्षरों के स्थान में, " धारा ५१ के अनुसरण में निर्वाचित अध्यक्ष या, यथास्िथति, धारा ५१क-१क के अधीन सीधे निर्वाचित अध्यक्ष को, राज्य सरकार द्वारा, जैसा कि समय- समय पर, आदेश द्वारा विर्िनदिष्ट किया जाए, विकास कार्यों के ऐसे प्रस्ताव को वित्तीय मंजूरी देने की शक्ति होगी, " शब्द, अंक और अक्षर रखे जायेंगे।
८. मूल अधिनियम की धारा ९३ की, उप-धारा (२), के, खण्ड (ग) के, परन्तुक के स्थान में, निम्न परन्तुक, रखा जायेगा, अर्थात् :-----
रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० ॅ्र न् ९३ द्ध रूह " परंतु, जैसा कि समय-समय पर, राज्य सरकार, आदेश द्वारा, विर्िनदिष्ट कर सकें ऐसी संविदा के लिए, अध्यक्ष की समिति (धारा ५१ के अनुसरण में निर्वाचित या, यथास्थिति, धारा ५१क-१क के अधीन सीधे निर्वाचित) और मुख्य अधिकारी उसकी प्राप्ति के दिनांक से पंद्रह दिनों की अवधि के भीतर ऐसी संविदा को अनुमोदन देगी। "।
९. मूल अधिनियम की धारा ३४१ख-१क के पश्चात्, निम्न धारा निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----- रूष् १९६५ ॅ द्ध. ४० ॅ्र न् ३४१-१ ॅ ह्यम् सन् २०२० का महा.।
न् ह ॅ + ॅ ह्यम् ॅ ह्य न् ३४१ -१ॅ ॅ " ३४१ख-१ख महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, २०२० के प्रारम्भण के दिनांक के पश्चात्, नगर पंचायत के आम निर्वाचनों और उप-निर्वाचनों के संबंध में, धारा ३४१ख-१क के उपबंध लागू होने से परिविरत हो जायेंगे और प्रत्येक नगर पंचायत का एक अध्यक्ष होगा जो धारा ३४१ख-१ के अधीन निर्वाचित किया जायेगा और उसके लिये उक्त धारा ३४१ ख-१ के उपबंध लागू होंगे । "।
१०. मूल अधिनियम की धारा ३४१ख-२ की, उप-धारा (६क) के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :-----
सन् १९६५ का महा. ४० की धारा ३४१ख-२ में संशोधन। सन २०२० का महा.।
""(६ख) महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, २०२० के प्रारम्भण के दिनांक के पश्चात्, नगर पंचायत के आम निर्वाचनों और उप-निर्वाचनों के संबंध में, उप-धारा (६क) के उपबंध लागू होने से परिविरत हो जायेंगे और प्रत्येक नगर पंचायत का एक उपाध्यक्ष होगा जो धारा ३४१ख-२ के अधीन निर्वाचित किया जायेगा और उसके लिये उक्त धारा ३४१ख-२ के उपबंध लागू होंगे।
सन २०२० का महा.।
(६ग) ""महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, २०२० के प्रारम्भण के दिनांक के पश्चात्, धारा ३४१ख-२ की, उप-धारा (६ख) के अनुसरण में, निर्वाचित उपाध्यक्ष के पदावधि, धारा ३४१ख-२ की उप-धारा (६) में यथा उपबंधित ऐसा होगा।""।
११. मूल अधिनियम की धारा ३४१ख-४ की, उप-धारा (३) के पश्चात्, निम्न उप-धारा, जोडी जायेगी, अर्थात् :----
सन् १९६५ का महा. ४० की धारा ३४१ख-४ में संशोधन। ""(४) महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, २०२० के प्रारम्भण के दिनांक के पश्चात्, धारा ३४१ ख-१, के अधीन धारा ३४१ ख-१ख के अनुसरण में सन २०२० का महा. .......। निर्वाचित अध्यक्ष की पदावधि इस धारा की उप-धारा (१) में यथा उपबंधित ऐसा होगा।""।
भाग सात----१०-२४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २५, २०२०/फाल्गुन ६, शके १९४१ १२. मूल अधिनियम की धारा ३४१ख-५ के, स्थान में, निम्न धारा रखी जायेगी, अर्थात् :-----
सन् १९६५ का महा. ४० की धारा ३४१ख-५ का प्रतिस्थापन। पार्षदों द्वारा नगर पंचायत के अध्यक्ष को हटाना।
""३४१ख-५. (१) धारा ३४१ ख-१ के अधीन निर्वाचित अध्यक्ष हटाए जाने की माँग पर पार्षदों की कुल संख्या के आधे से अनिम्न द्वारा हस्ताक्षर किये जायेंगे और उसमें ऐसे अध्यक्ष के विरूद्ध कदाचार के आरोप अंर्तविष्ट होंगे और उसे कलक्टर के पास भेजा जाएगा :
परंतु, ऐसे अध्यक्ष के निर्वाचन के दिनांक से एक वर्ष की अवधि के भीतर ऐसी कोई माँग भेजी नहीं जायेगी।
(२) उप-धारा (१) के अधीन माँग की प्राप्ति पर, कलक्टर ऐसे आरोपों की जाँच संचालित करेगा और माँग की प्राप्ति के दिनांक से एक महीने की अवधि के भीतर ऐसी जाँच पूरी करेगा :
परंतु, किसी मामले में, यदि जाँच प्रक्रिया, अपरिहार्य कारणों द्वारा विलंबित होती है तो जाँच के ऐसी अवधि तीन महीने से अधिक नहीं बढाई जायेगी और ऐसे विस्तारीत अवधि के लिए, कलक्टर द्वारा, राज्य सरकार की पुर्वानुमति प्राप्त की जायेगी।
(३) कलक्टर, उस के लिए यथा प्रयुक्त धारा ५५क के अधीन समुचित कार्यवाही करने के लिए सरकार को जाँच के निष्कर्ष प्रस्तुत करेगा।""।
कठिनाई के निराकरण की शक्ति।
१३. (१) इस अधिनियम द्वारा यथा संशोधित, मूल अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में यदि कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो, राज्य सरकार, जैसा अवसर उद्भूत हो, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, मूल अधिनियम के उद्देश्यों और कारणों से असंगत कोई बात कर सकेगी, जो उसे कठिनाई के निराकरण के प्रयोजनों के लिये आवश्यक या इष्टकर प्रतीत हों :
परन्तु, इस अधिनियम के प्रारम्भण के दिनांक से दो वर्षों की अवधि के अवसान के पश्चात् ऐसा कोई आदेश नहीं बनाया जायेगा।
(२) उप-धारा (१) के अधीन बनाया गया प्रत्येक आदेश उसके बनाये जाने के पश्चात्, यथा संभव शीघ्र, राज्य विधान मंडल के दोनों सदनों के समक्ष रखा जायेगा।
१४. (१) महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, २०२० एतद्द्वारा, निरसित किया जाता है।
सन् २०२० का महा. अध्या. क्र. ४। सन् २०२० का महा. अध्या. क्र. ४ का निरसन और व्यावृत्ति। (२) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित, मूल अधिनियम के अधीन कृत कोई बात या की गयी कोई कार्यवाही (जारी किसी अधिसूचना या आदेश समेत) इस अधिनियम द्वारा, यथा संशोधित, मूल अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन कृत, की गई या, यथास्थिति, जारी की गयी समझी जायेगी।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २५, २०२०/फाल्गुन ६, शके १९४१ ५
उद्देश्यों और कारणों का वक्तव्य।
महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ (सन् १९६५ का महा. ४०) के विद्यमान उपबंधों के अनुसार, नगर परिषद, और नगर पंचायत के अध्यक्ष, परिषद और नगर पंचायत के आम निर्वाचन में मतदाताअों द्वारा सीधे निर्वाचित होते हैं।
सद्य स्थिति का पुर्नविलोकन करने के पश्चात् और नगर परिषद और नगर पंचायत का सुचारू कार्य सुनिश्चित करने की दृष्टि से, राज्य सरकार, उक्त अधिनियम के उपबंधों का यथोचित उपांतरण करना इष्टकर समझती है। २. प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश निम्न है,-----
(क) यह उपबंध करना कि, नगर परिषद, और नगर पंचायत के अध्यक्ष, उनमें से निर्वाचित पार्षदों द्वारा निर्वाचित किये जायेंगे ;
(ख) अध्यक्ष और पार्षदों के बीच में पारस्पारिक उत्तरदायित्व और समझदारी को बढ़ावा देना।
(ग) नगरपालिका क्षेत्रों में विकास क्रियाकलापों की गति को बढ़ावा देना ; और
(घ) आवश्यक पाए जानेवाले अन्य परिणामस्वरूप संशोधनों को कार्यान्वित करना।
३. चूँकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा था और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका था, कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान थीं जिनके कारण उन्हें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ (सन् १९६५ का ४०) में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ था, अत: यह महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा, महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, २०२० (सन् २०२० का महा. अध्या. क्र. ४), ४ फरवरी, २०२० को प्रख्यापित किया गया है।
४. प्रस्तुत विधेयक का आशय उक्त अध्यादेश को लघु उपांतरणों के साथ राज्य विधानमंडल के अधिनियम में बदलना है।
मुंबई,
एकनाथ शिंदे,
दिनांकित १३ फरवरी, २०२०।
नगर विकास मंत्री।६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २५, २०२०/फाल्गुन ६, शके १९४१
प्रत्यायुक्त विधान संबंधी ज्ञापन
प्रस्तुत विधेयक में विधायी शक्ति के प्रत्यायोजन के लिये निम्न प्रस्ताव अन्र्तग्रस्त है, अर्थात् :---
खंड ७.---इस खंड के अधीन, जिसका आशय, महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ (सन् १९६५ का महा. ४०) की धारा १८ की, उप-धारा (१-क) में संशोधन करना है, जिसमें, धारा ५१ के अनुसरण में निर्वाचित अध्यक्ष या, यथास्थिति, धारा ५१क-१क के अधीन सीधे निर्वाचित अध्यक्ष को विकास कार्यों के ऐसे प्रस्ताव को वित्तीय मंजूरी देने के लिये जैसा कि समय-समय से, आदेश द्वारा विर्िनदिष्ट करने की शक्ति प्रदान की गई है।
खंड ८.---इस खंड के अधीन, जिसका आशय, उक्त अधिनियम की धारा ९३ की उप-धारा (२) का परन्तुक निविष्ट करना है, जिसमें अध्यक्ष (धारा ५१ के अनुसरण में निर्वाचित, या, यथास्थिति, धारा ५१क- १क के अनुसरण में निर्वाचित, या, यथास्थिति, धारा ५१क-१क के अधीन सीधे (निर्वाचित) और मुख्य अधिकारी से मिलकर बनी समिति द्वारा जैसा कि समय-समय से संविदा के प्रवर्ग को अनुमोदित करने के लिये आदेश द्वारा, राज्य सरकार को विर्िनदिष्ट करने की शक्ति प्रदान की गयी है।
खंड १३(१).---इस खंड के अधीन, इस अधिनियम के प्रारम्भण के दिनांक से दो वर्षों की अवधि के भीतर इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में उद्भूत किसी कठिनाई के निराकरण करने के लिये राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, राज्य सरकार को शक्ति प्रदान की गई है।
(२) विधायी शक्ति के प्रत्यायोजन के लिये उपयर्ुक्त उल्लिखित प्रस्ताव सामान्य स्वरूप के है।
(यथार्थ अनुवाद), नं. मा. राऊत, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
विधान भवन :
मुंबई,
राजेन्द्र भागवत,
दिनांकित २५ फरवरी, २०२०।
सचिव (कार्यभार),
महाराष्ट्र विधानसभा ।
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