Servants of Knowledge
Maharashtra Gazette · Government of Maharashtra

Part VII Ext. 1 (25-2-2021) Maharashtra Ordinance No. I of 2021

Published 25 February 2021

Type
Extra - Ordinary
Part
Part 7 (Hindi)
Division
CENTRAL SECTION
Identifier
in.gazette.maharashtra.2021-02-25.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-
Languages
English, Marathi

RNI No. MAHBIL /2009/31730

सत्यमेव जयते

महाराष्ट्र शासन राजपत्र

असाधारण भाग सात

वर्ष ७ , अंक १ ]

गुरुवार, फेब्रुवारी २५, २०२१/फाल्गुन ६ , शके १ ९ ४२

[पृष्ठे ४, किंमत : रुपये ४७.००

असाधारण क्रमांक १

प्राधिकृत प्रकाशन

अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद ( देवनागरी लिपी)

राजस्व तथा वन विभाग मंत्रालय , मादाम कामा मार्ग , हुतात्मा राजगुरू चौक, मुंबई ४०० ०३२ , दिनांकित ९ फरवरी २०२१ ।

MAHARASHTRA ORDINANCE No. I OF 2021 .

AN ORDINANCE further to amend the Maharashtra Stamp Act .

महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक १ सन् २०२१ ।

महाराष्ट्र स्टाम्प अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने संबंधी अध्यादेश ।

क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;

सन् १ ९५८

६०।

और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं , जिनके का महा. कारण उन्हें इसमें आगे दर्शित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र स्टाम्प अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ;

(१)

भाग सात १-१ २

महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २५ , २०२१ /फाल्गुन ६ , शके १ ९ ४२

अब , इसलिए , भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड ( १ ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए , महाराष्ट्र के राज्यपाल , एतद्वारा , निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं , अर्थात्: -

१ . ( १ ) यह अध्यादेश महाराष्ट्र स्टाम्प ( संशोधन और विधिमान्यकरण ) अध्यादेश , २०२१ कहलाये । संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भण ।

( २ ) यह तुरंत प्रवृत्त होगा ।

सन् १ ९ ५८ का ६० । २ . महाराष्ट्र स्टाम्प अधिनियम ( जिसे इसमें आगे , " मूल अधिनियम " कहा गया है) की धारा ५ के स्थान में, निम्न धारा रखी जायेगी और ११ अगस्त , २०१५ से रखी गई समझी जायेगी, अर्थात्: -

सन् १९ ५८ का ६० की धारा ५ के स्थान में नवीन धारा की प्रतिस्थापना ।

कई सुभिन्न

" ५. कई सुभिन्न मामलों या संव्यवहारों में समावेशित या उससे संबंधित कोई लिखत उसके शुल्क के साथ , जो अलग लिखत है , कुल रकम के साथ प्रभार्य होगी , ऐसे मामलों या संव्यवहारों की प्रत्येकी एक में समावेशित या संबंधित लिखत इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य हो जायेगी । " ।

मामलों या संव्यवहारों से संबंधित लिखतें ।

३. मूल अधिनियम की संलग्न अनुसूची एक के, -

(क) अनुच्छेद ६ के, -

सन् १९ ५८ का ६० की अनुसूची एक में संशोधन ।

(एक) खण्ड ( १ ) के, उप- खण्ड ( ख) के , स्तंभ ( २ ) में , " के ०.२ प्रतिशत " अंक तथा अक्षरों के स्थान में , " ०.३ प्रतिशत " अंक तथा अक्षर रखे जायेंगे ;

(दो) खण्ड (२ ) के , उप- खण्ड (ख) के, स्तंभ ( २ ) में , " ०.२ प्रतिशत " अंकों तथा अक्षरों के स्थान में, " ०.३ प्रतिशत " अंक तथा अक्षर रखे जायेंगे ;

(तीन) खण्ड ( २ ) के पश्चात्, निम्न खण्ड, जोड़ा जायेगा , अर्थात्: -

" ( ३ ) इस अनुच्छेद के अधीन दाखिल लिखत केवल पाँच सौ रुपये । " ;

जब सांपर्श्विक या सहायक या अतिरिक्त प्रतिभूति के रूप में निष्पादित की जा रही है और जहाँ इस अनुच्छेद के अधीन मूल या प्रारम्भिक प्रतिभूति पर उचित शुल्क की अदायगी की गई है ।

(ख) अनुच्छेद ४० के, खंड (ख ) के स्थान में, निम्न खण्ड , रखा जायेगा , अर्थात्: -

" (ख ) जब कब्जा नहीं दिया गया है या यथा उपर्युक्त दी जानेवाली सहमति नहीं दी गई है, - (एक) यदि ऐसे विलेख द्वारा प्रतिभूति रक्कम पाँच लाख रूपयों से अधिक नहीं है,

न्यूनतम एक सौ रुपयों के अध्यधीन ऐसे विलेख द्वारा प्रतिभूति रकम ०.१ प्रतिशत ।

(दो) किन्ही अन्य मामलों में ,

अधिकतम दस लाख रुपयों के अध्यधीन , ऐसे विलेख द्वारा प्रतिभूति रक्कम के ०.३ प्रतिशत । " । विधिमान्यकरण ।

४. किसी न्यायालय या मूल अधिनियम में के प्रतिकूल किसी न्यायनिर्णय, डिक्री या आदेश में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , स्टाम्प शुल्क का निर्धारण , उग्रहण और संग्रहण , उक्त अधिनयम के अधीन प्राधिकारियों द्वारा ऐसे निर्धारण , उग्रहण और संग्रहण के अनुसरण में की गई किसी कार्यवाही समेत , मूल अधिनियम की अनुसूची एक में धारा ५ और अनुच्छेद ६ तथा ४० के उपबंधों के अधीन कृत कार्यवाही या की गई बात उसी सन् २०२१ प्रकार विधिमान्य और प्रभावी समझी जायेगी मानों कि, महाराष्ट्र स्टाम्प ( संशोधन और विधिमान्यकरण ) अध्यादेश, का महा . अध्या. २०२१ (जिसे इसमें आगे , इस धारा में " संशोधन अध्यादेश " कहा गया है ) द्वारा यथा संशोधित उक्त धारा ६ और अनुच्छेद ६ और ४० के उपबंध सभी संबद्ध समयों पर निरंतर प्रवृत्त हो रहे थे और तद्नुसार , - क्र . १ ।

(क) स्टाम्प शुल्क के उग्रहण और संग्रहण के संबंध में , मूल अधिनियम के अधीन प्राधिकारियों द्वारा कृत या किये गये सभी कार्य या कार्यवाहियाँ या बातें सभी प्रयोजनों के लिए मूल अधिनियम के उपबंधों के अनुसरण में कृत या की गई समझी जायेगी ;

३ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २५ , २०२१ /फाल्गुन ६ , शके १ ९ ४२

(ख) इस प्रकार उद्ग्रहीत और संग्रहीत स्टाम्प शुल्क के प्रतिदाय करने के लिए उक्त प्राधिकारियों के विरूद्ध किसी न्यायालय में कोई वाद या अन्य कार्यवाहियाँ बनाई रखी या जारी रखी नहीं जायेगी ;

(ग ) कोई न्यायालय या कोई अन्य प्राधिकारी इस प्रकार उद्ग्रहीत या संग्रहीत स्टाम्प शुल्क के प्रतिदाय का निदेश देनेवाली कोई डिक्री या आदेश प्रवर्तित नहीं करेगा ।

( २ ) संदेह के निराकरण के लिए , एतद्वारा, यह घोषित किया जाता है कि, उप - धारा ( १ ) में कोई भी बात , किसी व्यक्ति को, -

(क) उप- धारा ( १ ) में निर्दिष्ट स्टाम्प शुल्क के किसी निर्धारण , पुनर्निर्धारण , उदग्रहण या संग्रहण संशोधन अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित , मूल अधिनियम के उपबंधों के अनुसरण में प्रश्नगत करने से, या

(ख ) संशोधन अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित मूल अधिनियम के अधीन स्टाम्प शुल्क के ज़रिए उसके द्वारा देय राशि से अधिक अदा किए गए कर के प्रतिदाय का दावा करने से , किसी व्यक्ति को रोकते हुए नहीं समझी जायेगी । ४

महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २५ , २०२१/ फाल्गुन ६ , शके १९ ४२

वक्तव्य ।

دو महाराष्ट्र स्टाम्प अधिनियम ( सन् १ ९ ५८ का ६० ) ( जिसे इसमें आगे " उक्त अधिनियम " कहा गया है ) की धारा ५ यह उपबंध करती है कि, कई सुभिन्न मामलों में समावेशित या उससे संबंधित कोई लिखत पर ऐसे मामलों के प्रत्येक समावेशित या एक मामलों से संबंधित या अलग लिखत पर उस अधिनियम के अधीन जो प्रभार्य होगा , उस शुल्क की कुल रकम प्रभार्य होगी । सुभिन्न संव्यवहारों से समावेशित या से संबंधित लिखत का समावेश वर्ष २००७ में यथा संशोधित गुजरात स्टाम अधिनियम , १९ ५८ की धारा ५ सम्मानिय उच्चतम न्यायालय द्वारा सन् २०१५ के सिविल अपील क्रमांक ६०५४ में दिनांकित ११ अगस्त २०१५ के अपने न्यायनिर्णय में कायम रखी गयी है । बम्बई उच्च न्यायालय ने, सन् २०१ ९ की रिट याचिका क्रमांक ८०१४ में उक्त अधिनियम की धारा ५ की व्याख्या करते समय दिनांकित ११ सितम्बर, २०१ ९ अपने आदेश में यह निर्णय दिया है कि , " सुभिन्न मामलों " वाक्यांश में " सुभिन्न संव्यवहारों " वाक्यांश के समान है ।

कई सुभिन्न संव्यवहारों में समावेशित या संबंधित कोई लिखत के संबंध में प्रभारित स्टाम्प शुल्क के बारे में, उक्त अधिनियम की धारा ५ में यथोचित संशोधन किया जाना प्रस्तवित किया गया है , जिसमें गुजरात स्टाम्प अधिनियम, १ ९ ५८ में किये गये संशोधन की तर्ज पर विशेषतः उसमें " सुभिन्न संव्यवहारों " समाविष्ट किया गया है । २. हक विलेखों के निक्षेप द्वारा बंधपत्र दर्शानेवाले लिखतों और सरल बंधपत्र विलेख के संबंध में स्टाम शुल्क उक्त अधिनियम की अनुसूची एक में क्रमशः अनुच्छेद ६ (१ ) और ४० के अनुसार प्रभार्य है । उक्त अनुच्छेद ६ ( १ ) के अधीन लिखत पर प्रभार्य स्टाम शुल्क उक्त अनुच्छेद ४० के अधीन उस प्रभार्य से कम है ।

वर्ष २०१३ से वर्ष २०१ ९ तक से प्रारम्भ होनेवाली अवधि के दौरान , रजिस्ट्रीकृत दस्तावेजों से , यह ध्यान में आया है कि, हक विलेखों का निक्षेप द्वार बंधपत्र दर्शानेवाले दस्तावेजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है ।

स्टाम शुल्क प्रभार्य में भिन्नता के कारण , कभी- कभी दस्तावेजों को इस तरह से प्रारुपित किया जाता है कि भलेही दस्तावेज की नामपद्धति से ही हक विलेख का निक्षेप द्वारा बंधपत्र दर्शाया जाता है तो भी सामान्य बंधपत्र समाविष्ट करने का प्रयास होता है । ऐसे दस्तावेज, उसके संबंध में , उक्त अधिनियम के अधीन प्रभार्य उचित स्टाम्प शुल्क रक़म का न्याय निर्णयन करनें में कठिनाई पैदा होती हैं ।

हक विलेखों के निक्षेप द्वारा बंधपत्र से संबंधित करारों का निष्पादन समर्थ करने की दृष्टि से, सम्पत्ति का अंतरण अधिनियम , १८८२ ( सन् १८८२ का ४ ) की धारा ५८ के खण्ड (च) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए , महाराष्ट्र राज्य द्वारा कतिपय शहरों को अधिसूचित किया है । तथापि , वहाँ के सव्यवहारों में बढ़ोत्तरी होने के कारण उक्त धारा ५८ के खण्ड (च) के प्रयोजनों के लिए नए शहरों को अधिसूचित किये जाने की जरूरत हो रही है । जहाँ , उक्त खण्ड ( च) के अधीन शहर अधिसूचित नहीं किया गया है वहाँ के नागरिकों पर हक विलेख निक्षेप द्वारा बंधपत्र के बजाय सामान्य बंधपत्र विलेख के निष्पादन के लिए विकल्प चुनने का बोझ पड रहा है, जिसके लिए उक्त अधिनियम के अधीन स्टाम्प शुल्क प्रभार्य अधिक है ।

अतः , उपर्युक्त का ध्यान में रखकर उक्त अनुच्छेद ६ और ४० के अधीन हक विलेंखों के निक्षेप द्वारा बंधपत्र , दर्शनेवाले विलेखों और सामान्य बंधपत्र विलेखों पर प्रभार्य स्टाम्प शुल्क में एकसमानता लाना इष्टकर समझा गया है । उस प्रयोजन के लिये , उक्त अधिनियम को संलग्नित अनुसूची एक में उक्त अनुच्छेद ६ और ४० में यथोचित संशोधन करने का प्रस्तावित किया गया है ।

३. चूँकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चूका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें इसमें आगे उपर्युक्त प्रयोजनों के लिए , महाराष्ट्र स्टाम्प अधिनियम (सन् १ ९ ५८ का ६० ) में अधितर संशोधन करने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अतः यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है ।

भगतसिंह कोश्यारी ,

मुंबई,

दिनांकित ५ फरवरी , २०२१ ।

महाराष्ट्र के राज्यपाल । महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से, -

डा. नितीन करीर ,

सरकार के अपर मुख्य सचिव ।

(यथार्थ अनुवाद) ,

श्रीमती विजया ल. डोनीकर ,

भाषा संचालक ,

महाराष्ट्र राज्य ।

ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING , STATIONERY AND PUBLICATION , PRINTED AND PUBLISHED BY DIRECTOR , RUPENDRA DINESH MORE , PRINTED AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS , 21 - A , NETAJI SUBHASH ROAD , CHARNI ROAD , MUMBAI 400 004 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING , STATIONERY AND PUBLICATIONS , 21 - A , NETAJI SUBHASH ROAD , CHARNI ROAD , MUMBAI 400 004. EDITOR : DIRECTOR , RUPENDRA DINESH MORE .

Cite this issue. Maharashtra Gazette, Government of Maharashtra, 25 February 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.maharashtra.2021-02-25.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-/. Archive identifier in.gazette.maharashtra.2021-02-25.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-.