RNI No. MAHBIL /2009/ 31730
सत्यमेव जयते
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ७ , अंक २ ]
मंगळवार , मार्च २ , २०२१/ फाल्गुन ११ , शके १ ९ ४२ [पृष्ठे ३ , किंमत: रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक २
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश , विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी) .
महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय
महाराष्ट्र विधानसभा में दिनांक २ मार्च २०२१ ई . को पुरःस्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियम ११७ के अधीन प्रकाशित किया जाता है :-
L. A. BILL No. II OF 2021 .
A BILL
TO AMEND THE MAHARASHTRA GUNTHEWARI DEVELOPMENT (REGULARISATION , UPGRADATION AND CONTROL ) ACT , 2001 .
विधानसभा का विधेयक क्रमांक २ सन् २०२१ ।
महाराष्ट्र गुंठेवारी विकास ( नियमन , उन्नयन और नियंत्रण ) अधिनियम , २००१ में अधिकतर संशोधन करने संबंधी विधेयक ।
सन् २००१ और क्योंकि इसमें आगे दर्शित प्रयोजनों के लिए , महाराष्ट्र गुंठेवारी विकास ( नियमन , उन्नयन का महा . और नियंत्रण ) अधिनियम, २००१ में संशोधन करना इष्टकर है ; अतः भारत गणराज्य के बहत्तर वे वर्ष २७ । में एतद्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है : -
१. यह अधिनियम महाराष्ट्र गुंठेवारी विकास ( नियमन , उन्नयन और नियंत्रण ) संशोधन अधिनियम , संक्षिप्त नाम । २०२१ कहलाए ।
(१)
भाग सात- २-१ २
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २ , २०२१ / फाल्गुन ११ , शके १ ९ ४२
२. महाराष्ट्र गुंठेवारी विकास ( नियमन , उन्नयन और नियंत्रण ) अधिनियम , २००१ की धारा ३ की , उप-धारा ( १ ) में,-
सन् २००१ का महा . २७ । सन् २००१ का महा . २७ की धारा ३ में संशोधन ।
(एक) " १ जनवरी २००१ " शब्दों, अंकों तथा अक्षरों के स्थान में , " ३१ दिसम्बर २०२०" शब्द, अंक तथा अक्षर रखे जायेंगे ;
(दो) द्वितीय परंतुक के, खण्ड (क) में, " १ जनवरी २००१ " शब्दों, अंकों तथा अक्षरों के स्थान में, " ३१ दिसम्बर २०२० " शब्द, अंक तथा अक्षर रखे जायेंगे । ३ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २ , २०२१ / फाल्गुन ११, शके १ ९ ४२
उद्देश्यों और कारणों का वक्तव्य
राज्य में निजी भूमियाँ उपविभाजित करके अनधिकृत रीत्या में प्लॉट बनाने की प्रवृत्ति बढी थी जिसके कारण कतिपय गुंठेवारी विकास नियमन और उन्नयन और गुंठेवारी विकास के नियंत्रण के लिए और उससे संबंधित मामलों के लिए महाराष्ट्र गुंठेवारी विकास ( नियमन, उन्नयन और नियंत्रण ) अधिनियम , २००१ (सन् २००१ का महा . २७ ) अधिनियमित किया गया है । १ जनवरी २००१ को विद्यमान गुंठेवारी विकास उक्त अधिनियम के अधीन नियमित और उन्नयित किया गया था ।
२. यद्यपि, गुंठेवारी विकास अविधिपूर्ण है और ऐसे विकासों पर नियंत्रण रखना स्पष्ट तौर पर जरूरी है , साथ ही यह महत्त्वपूर्ण माना गया है कि , ऐसे प्लाटों पर बडे पैमाने पर काफी समय पहले बने और पुराने संनिर्माणों को गिरा देना न तो व्यवहार्य है और न ही वांछनीय है । इसका विशेष कारण यह है कि आवास का औपचारिक बाजार, समाज के आर्थिक दृष्टि से दुर्बल वर्गों की आवास संबंधी माँग, संख्या और कीमत दोनों की दृष्टि से पूरा करने में विफल रहा है । गुंठेवारी विकास अनौपचारिक आवास व्यवस्था का रुप है और इसलिए इसकी ओर सकारात्मक दृष्टि से देखना जरूरी है तथापि यह आम व्यक्ति के लिए उनकी आवास संबंधी जरुरतों को पूरा करने की दृष्टि से त्रुटीपूर्ण और अपूर्ण है ।
३. निम्नतर आय समूह और मध्यम आय समूह से संबंधित व्यक्ति उक्त अधिनियम के, उचित कार्यान्वयन और गुंठेवारी नियमन में कमी होने के कारण सरकारी लाभों से वंचित रहे हैं या सरकारी योजना का सीमित लाभ प्राप्त करते हैं । अतः आर्थिक दृष्टि से दुर्बल वर्गों और मध्यम आय समूह से संबंधित आम लोंगों के आवासों की मूलभूत जरुरतों तथा इस संबंध में जनता से बढती माँगो को भी ध्यान में रखकर उक्त अधिनियम में यथोचित संशोधन द्वारा ३१ दिसम्बर २०२० को विद्यमान रूप में गुंठेवारी विकासों को नियमित और उन्नयित करना इष्टकर समझा गया है ।
४. प्रस्तुत विधेयक का आशय उपर्युक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है ।
मुंबई,
एकनाथ शिंदे,
नगर विकास मंत्री ।
दिनांकित १ मार्च , २०२१ ।
विधान भवन:
राजेन्द्र भागवत ,
सचिव,
मुंबई ,
महाराष्ट्रविधानसभा.
दिनांक २ मार्च , २०२१ .
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