RNI No. MAHBIL / 2009/31730
सत्यमेवजयते
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ७ , अंक ८ ]
गुरुवार , ऑक्टोबर ७ , २०२१/ आश्विन १५ , शके १ ९ ४३ [पृष्ठे ५, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक १४
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी) .
ग्राम विकास विभाग
बांधकाम भवन , २५ , मर्झबान पथ, फोर्ट , मुंबई ४०० ००१ , दिनांकित २३ सितंबर २०२१ ।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. III OF 2021 .
AN ORDINANCE FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA VILLAGE PANCHAYAT ACT , AND THE MAHARASHTRA ZILLA PARISHADS AND PANCHAYAT SAMITIS ACT, 1961 .
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक ३ सन् २०२१ ।
महाराष्ट्र ग्रामपंचायत अधिनियम और महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १ ९ ६१ में अधिकतर संशोधन करने संबंधी अध्यादेश ।
क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा हैं ;
सन् १ ९ ५९
का महा.
और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं , का ३। जिनके कारण उन्हें इसमें आगे दर्शित प्रयोजनों के लिए , महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम और महाराष्ट्र जिला सन् १९६१ परिषद तथा पंचायत समिति अधिनियम , १ ९ ६१ में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक ५। हुआ है ;
(१)
भाग सात- १४-१ २
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ७ , २०२१/ आश्विन १५ , शके १ ९ ४३
अब इसलिए , भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड ( १ ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए महाराष्ट्र के राज्यपाल , एतद्वारा , निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात्:-
अध्याय एक
प्रारम्भिक
संक्षिप्त नाम तथा १. (१ ) यह अध्यादेश महाराष्ट्र ग्राम पंचायत और महाराष्ट्र जिला परिषद तथा पंचायत समिति ( संशोधन) प्रारंभण। अध्यादेश , २०२१ कहलाए ।
( २ ) यह तुरंत प्रवृत्त होगा ।
अध्याय दो
महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम में संशोधन ।
सन् १ ९ ५९ का ३
का ३ । की
२. महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम (जिसे इसमें आगे , " ग्राम पंचायत अधिनियम " कहा गया है) की सन् १ ९ ५ ९ धारा १० में धारा १० की उप - धारा ( २ ) के , खण्ड (ग ) के , स्थान में , निम्न खण्ड, रखा जायेगा , अर्थात्: -
संशोधन ।
" (ग ) नागरिकों के पिछडे वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्तियों के लिए आरक्षित रखी जानेवाली सीटें , पंचायत में निर्वाचन द्वारा भरी जाने वाली कुल संख्या के २७ प्रतिशत तक होगी और पंचायत में, कुल आरक्षण कुल सीटों के ५० प्रतिशत से अनधिक होगा और ऐसी सीटें , पंचायत में विभिन्न प्रभागों को चक्रानुक्रम पद्धति द्वारा आबंटित की जायेगी :
परंतु, संपूर्ण अनुसूचित क्षेत्रों का समावेश होनेवाली पंचायत में , नागरिकों के पिछडे प्रवर्ग से संबंधित व्यक्तियों के लिए आरक्षित रखी जानेवाली सीटें अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के लिए सीटों के आरक्षण देने के पश्चात्, यदि कोई हो शेष सीटें होगी :
परंतु यह भी कि, पंचायत में नागरिकों के पिछडे प्रवर्ग से संबंधित व्यक्तियों के लिए आरक्षण इस खण्ड के उपबंधों के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में केवल आंशिक रूप में माना जायेगा:
परंतु यह और भी कि, इसप्रकार आरक्षित सीटों की कुल संख्या के आधी सीटें नागरिकों के पिछडे वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित महिला के लिए आरक्षित रखी जायेगी । " ।
सन् १ ९ ६१ का ३
३. ग्राम पंचायत अधिनियम की धारा ३० की , उप- धारा ( ४ ) के, खण्ड ( ख ) के , स्थान में निम्न खण्ड, की धारा ३० में
रखा जायेगा , अर्थात्: -
संशोधन ।
" (ख ) पंचायतों में नागरिकों के पिछडे वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्तियों के लिए आरक्षित रखे जानेवाले सरपंचों के पद, पंचायतों में ऐसे पदों की कुल संख्या के २७ प्रतिशत तक रखे जायेंगे और पंचायतों में कुल आरक्षण कुल सीटों के ५० प्रतिशत से अधिक का नहीं होगा :
परंतु इसप्रकार आरक्षित पदों के आधे पद नागरिकों के पिछडे वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित महिला के लिए आरक्षित रखे जायेंगे । " ।
अध्याय तीन
महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम , १९ ६१ में संशोधन ।
सन् १९ ६१ का
का महा.
४. महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम १ ९ ६१ (जिसे इसमें आगे " जिला परिषद और सन् १ ९ ५ ९ महा . ५ की धारा पंचायत समिति अधिनियम " कहा गया है की धारा १२ , की उप - धारा ( २ ) के , खण्ड ( ग) के, स्थान में , निम्न खण्ड, ५। १२ में संशोधन । रखा जायेगा, अर्थात्: -
" ( ग) जिला परिषद में , नागरिकों के पिछडे वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्तियों के लिए आरक्षित रखी जानेवाली सीटे निर्वाचन द्वारा भरी जानेवाली सीटों की कुल संख्या के २७ प्रतिशत तक होगी और जिला परिषद में, कुल आरक्षण , कुल पदों के ५० प्रतिशत से अनधिक होगा तथा जिला परिषद में ऐसी सीटें विभिन्न निर्वाचक विभागों को चक्रानुक्रम द्वारा आबंटित की जायेगी:
३ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात , ऑक्टोबर ७ , २०२१/ आश्विन १५ , शके १ ९ ४३
परंतु , संपूर्ण अनुसूचित क्षेत्रों का समावेश होनेवाली जिला परिषद में , नागरिकों के पिछडे वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्तियों के लिए आरक्षित रखी जानेवाली सीटें, अनुसूचित जनजाति, और अनुसूचित जाति के लिए सीटों के आरक्षण देने के पश्चात्, यदि कोई हो , शेष सीटें होगी :
परंतु आगे यह कि, जिला परिषद में , नागरिकों के पिछडे वर्ग से संबंधित व्यक्तियों के लिए आरक्षण , इस खण्ड के उपबंधो के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में, केवल आंशिक रूप में , माना जायेगा ;
परंतु यह और भी कि, इस प्रकार आरक्षित पदों में से आधे पर नागरिकों के पिछड़े वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित महिला के लिए आरक्षित रखे जायेंगे ; " ।
सन् १ ९६१ का ५. जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम की धारा ४२ , की उप - धारा ( ४ ) के, खण्ड (ख ) के , स्थान में, निम्न खण्ड, रखा जायेगा , अर्थात्-
महा . ५ की धारा ४२ में संशोधन । " (ख) जिला परिषद में , नागरिकों के पिछडे वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्तियों के लिए आरक्षित रखे जानेवाले अध्यक्षों के पद, ऐसे पदों की कुल संख्या के २७ प्रतिशत तक रखे जायेंगे और राज्य में , कुल आरक्षण, कुल सीटों के ५० प्रतिशत से अनधिक होगा:
सन् १ ९ ६१ का
महा. ५ की धारा परंतु , इसप्रकार आरक्षित पदों में से आधे पद नागरिकों के पिछडे वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित महिला के लिए आरक्षित रखे जायेंगे । " ।
५८ में संशोधन । ६. जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम की धारा ५८ , की उप- धारा (१ ख ) के, खण्ड ( ग) के, स्थान में निम्न खण्ड, रखा जायेगा , अर्थात्: -
"(ग) पंचायत समिति में, नागरिकों के पिछडे वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्तियों के लिए आरक्षित रखी जानेवाली सीटें निर्वाचन द्वारा भरी जानेवाली सीटों की कुल संख्या के २७ प्रतिशत तक होगी और पंचायत समिति में कुल आरक्षण , कुल सीटों के ५० प्रतिशत से अनधिक होगा और ऐसी सीटें विभिन्न निर्वाचकगण को चक्रानुक्रम द्वारा आबंटित की जाएगी:
परंतु, संपूर्ण अनुसूचित क्षेत्रों का समावेश होनेवाली पंचायत समिति में , नागरिकों के पिछडे वर्ग से संबंधित व्यक्तियों के लिए आरक्षित रखी जानेवाली सीटें , अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के सीटों के आरक्षण के पश्चात्, यदि कोई हो तो शेष सीटें होगी :
परंतु आगे यह कि , इस खण्ड के उपबंधों के अनुसार पंचायत समिति में नागरिकों के पिछडे वर्ग से संबंधित व्यक्तियों के लिए आरक्षण , अनुसूचित क्षेत्रों में केवल आंशिक रुप से माना जाएगा:
परंतु आगे यह कि, इसप्रकार आरक्षित सीटों की कुल संख्या के आधी सीटें नागरिकों के पिछड़े वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित महिला के लिए आरक्षित रखी जायेंगी । " ।
७. जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम की धारा ६७ की उप - धारा ( ५ ) के , खण्ड ( ख ) के , स्थान में निम्न खण्ड , रखा जायेगा , अर्थात्: ---
सन् १ ९६१ का महा . ५ की धारा ६७ में संशोधन । "(ख ) पंचायत समिति में, नागरिकों के पिछडे वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्तियों के लिए आरक्षित रखी जानेवाली सभापति के पद, ऐसे पदों की कुल संख्या के २७ प्रतिशत तक रखे जायेंगे और राज्य में , कुल आरक्षण , कुल सीटों की संख्या के ५० प्रतिशत से अनधिक होगा:
परंतु, इसीप्रकार आरक्षित पदों में से आधे पद नागरिकों के पिछडे वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित महिला के लिए आरक्षित रखे जायेंगे । " ।
भाग सात- १४-२ ४
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ७ , २०२१/ आश्विन १५ , शके १ ९ ४३
वक्तव्य ।
महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम ( सन् १ ९ ५ ९ का ३ ) की धारा १० ( २ ) (ग) और धारा ३० ( ४ ) ( ख ) तथा महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम , १ ९ ६१ (सन् १ ९ ६२ का महा . ५ ) की धारा १२ ( २ ) ( ग ) , धारा ४२ (४ ) (ख ) , धारा ५८ ( १ ख) (ग) और धारा ६७ ( ५ ) (ख) पंचायतों में और जिला परिषदों में तथा पंचायत समितियों में सीटों के आरक्षण के लिए क्रमशः नागरिकों के पिछडे वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्तियों के आरक्षण का करती है उपबंध करती हैं । उक्त अधिनियम पंचायतो में और जिला परिषदों में तथा पंचायत समितियों में, निर्वाचन द्वारा भरी जाने वाली सीटों की कुल संख्या के २७ प्रतिशत का आरक्षण , नागरिकों के पिछडे वर्ग के लिए उपबंधित करता हैं ।
२. अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति और नागरिकों के पिछडे वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्तियों के लिये आरक्षण का उपबंध करने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दिनांक २७ जुलाई २०१८ और १४ फरवरी २०२० की अधिसूचना तथा अन्य अधिसूचना जारी की गई थी और तद्नुसार , राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला परिषद और पंचायत समितियों के निर्वाचनों का संचालन किया था ।
३. महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम , १ ९ ६१ की धारा १२ ( २ ) ( ग) के उपबंध तथा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दिनांक २७ जुलाई २०१८ और १४ फरवरी २०२० को जारी अधिसूचना में वाशिम , अकोला, नागपुर और भंडारा जिलों की जिला परिषद और पंचायत समितियों के संबंध में ५० प्रतिशत से अधिक आरक्षण का उपबंध किया है जिसे विकास किशनराव गवली बनाम महाराष्ट्र राज्य तथा अन्य ( रिट याचिका (सिविल) सन् २०१ ९ का क्रमांक ९ ८० ) में उच्चतम न्यायालय के समक्ष चुनौति दी गई थी ।
उच्चतम न्यायालय ने , ओबीसीयों के लिए सीटों के आरक्षण जिस हद तक वे प्रदान करते है, को शून्य तथा नास्ति विधि में अभिवाक करते हुए रद्द किया है तथा उक्त अधिसूचना खारिज की है और इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए संबंधित स्थानीय निकायों के अनुस्मारक अवधि के लिए सामान्य / खुले वर्ग के उम्मिदवारों से राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा तुरंत भरी जाने की घोषणा करने के कारण हुई सीटों की रिक्ति की उक्त अधिसूचना खारिज की है । उच्चतम न्यायालय ने , यह भी निर्देश दिए है कि, संबंधित स्थानीय प्राधिकरणों में अन्य पिछडे वर्ग के पक्ष में का आरक्षण इस हद को अधिसूचित किया जा सकेगा कि, वह अनुसूचित जातियों / अनुसूचित जनजातियों / अन्य पिछडे वर्गों को एक साथ पक्ष में कुल सीटों के आरक्षण के ५० प्रतिशत से अधिक नही होना जाहिए ।
४. उक्त न्यायनिर्णय के परिच्छेद १२ में , सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्देश दिए है कि, अन्य पिछडे वर्गों के लिए स्थानिय निकायों में सीटों का आरक्षण करने के पूर्व , राज्य द्वारा तीन कसौटी/ शर्तों का अनुपालन किया जाना आवश्यक हैः- ( १ ) राज्य के भीतर , स्थानीय निकाय पिछडेपन की हैसियत की श्रेणी और विवक्षाओं में की समकालीन कठोर जाँच आयोजित करने के लिए विशेष आयोग स्थापित करें , ( २ ) आयोग की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए, नियोजित की जानेवाले स्थानीय निकाय को आवश्यक आरक्षण का अनुपात विनिर्दिष्ट करें जिसकी वजह से आरक्षण की विस्तृतता के चंगुल में ना फँसे और ( ३ ) किसी मामले में ऐसा आरक्षण अनुसूचित जातियों/ अनुसूचित जनजातियों / अन्य पिछडे वर्गो को साथ लेकर के पक्ष में कुल सीटों के आरक्षण के कुल मिलाकर ५० प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए ।
उक्त न्यायनिर्णय के अनुसरण में, सरकार ने , महाराष्ट्र राज्य पिछडा वर्ग आयोग अधिनियम , २००५ के अधीन गठित महाराष्ट्र राज्य पिछडा वर्ग आयोग को उक्त कार्य के लिए नियुक्त किया है । आयोग को , उक्त प्रयोजन के लिए समकालीन कठिन जाँच को आयोजित करने के लिए समय की आवश्यकता होगी ।
५. उक्त न्यायनिर्णय में के परिच्छेद २८ में , उच्चतम न्यायालय ने यह निर्देश दिए है कि , सन् १ ९ ६१ के अधिनियम की धारा १२ ( २ ) ( ग ) की विधिमान्यता को दी गई चुनौती नकारात्मक है । इसके बदले वह उपबंध पढा जाना आवश्यक है जिसका अर्थ यह हैं कि संबंधित स्थानीय निकायों में अन्य पिछडे वर्गों के पक्ष में का आरक्षण इस हैसियत को अधिसूचित कर सकेगा कि यह अनुसूचित जातियों/ अनुसूचित जनजातियों/ अन्य पिछडे वर्गों को साथ लेकर आरक्षित कुल सीटों के कुल मिलाकर ५० प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए । अन्य शब्दों में, अभिव्यक्ति का अर्थ धारा १२ ( २ ) ( ग) में अस्तित्व में होनेवाले पिछला २७ प्रतिशत , " हो सकेगा " के आशय में है समेत का ५ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात , ऑक्टोबर ७ , २०२१/ आश्विन १५ , शके १ ९ ४३
अर्थ यह है कि अन्य पिछडे वर्गों के लिए आरक्षण २७ प्रतिशत तक हो सकेगा परंतु, अनुसूचित जाति / अनुसुचित जनजाति/ अन्य पिछडे वर्गों को साथ लेकर के पक्ष में कुल मिलाकर ५० प्रतिशत की बाह्य सीमा के अध्यधीन इस न्यायालय के संविधान न्यायपीठ द्वारा ऐसा कहा गया है ।
६. उक्त न्यायनिर्णय को देखते हुए अन्य पिछडे वर्गों के लिए स्थानीय प्राधिकरणों में आरक्षण नहीं हैं । स्थानीय प्राधिकरणों में अन्य पिछडे वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के लिए सरकार ने, उच्चतम न्यायालय की अनुमति से , माध्यमिक उपायों के रूप में, पंचायत में , पंचायत समिति में तथा जिला परिषद में नागरिकों के पिछडे वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्तियों को सीटों के २७ प्रतिशत तक आरक्षण के लिए उपबंध बनाना और यह उपबंध करना की, स्थानीय प्राधिकरणों में कुल आरक्षण के, कुल सीटों के ५० प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं होगा । इसलिए महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम की धारा १० ( २) ( ग) और धारा ३० ( ४) ( ख) तथा महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम , १ ९ ६१ की धारा १२( २ ) ( ग) , धारा ४२ ( ४)( ख) , धारा ५८ ( १ख )( ग) और धारा ६७ (५ ) (ख ) में यथोचित संशोधन करना प्रस्तावित किया है ।
७. चूँकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चूका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें इसमें उपर्युक्त प्रयोजनों के लिए महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम और महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम , १ ९ ६१ में अधिकतर संशोधन करना आवश्यक हुआ है, अतः यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है ।
मुंबई,
दिनांकित २३ सितंबर २०२१ ।
भगत सिंह कोश्यारी , महाराष्ट्र के राज्यपाल।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से ,
राजेश कुमार , सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव ।
(यथार्थ अनुवाद) ,
विजया ल. डोनीकर , भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य ।
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