महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ७, अंक ११ (२)] बुधवार, ऑक्टोबर २७, २०२१/कर्ातिक ५, शके १९४३ [पृष्ठे ४, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक १९
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
नगरविकास विभाग
मंत्रालय, मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरू चौक, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित १ अक्तूबर २०२१।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. VI OF 2021.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MUMBAI MUNICIPAL CORPORATION ACT, THE MAHARASHTRA MUNICIPAL CORPORATIONS ACT AND THE MAHARASHTRA MUNICIPAL COUNCILS, NAGAR PANCHAYATS AND INDUSTRIAL TOWNSHIPS ACT, 1965.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक ६ सन् २०२१।
मुंबई नगर निगम अधिनियम, महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर
पंचायत और औद्योगिक नगरी, अधिनियम, १९६५ में अधिकतर संशोधन करने संबंधी अध्यादेश।
क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ; और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें, इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, मुंबई नगर निगम अधिनियम, महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ;
सन् १८८८ का ३। सन् १९४९ का ५९। सन् १९६५ का महा. ४०।
भाग सात १९-१
(१)२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर २७, २०२१/कर्ातिक ५, शके १९४३ अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्ितयों का प्रयोग करते हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात्------
अध्याय एक
प्रारम्भिक
१. (१) यह अध्यादेश मुंबई नगर निगम, महाराष्ट्र नगर निगम और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भण ।
पंचायत और औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, २०२१ कहलाए।
(२) यह तुरंत प्रवृत्त होगा।
अध्याय दो
मुंबई नगर निगम अधिनियम में संशोधन।
२. मुंबई नगर निगम अधिनियम की धारा ५क की, उप-धारा(४) के, खण्ड (क) के स्थान में, निम्न खण्ड, रखा जायेगा, अर्थात् :—
सन् १८८८ का महा. ३ की धारा ५क में संशोधन।
सन् १८८८ का महा. ३। " (क) नागरिकों के पिछड़े वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्ितयों के लिए आरक्षित रखी जानेवाली सीटें, नगर निगम में सीधे, निर्वाचन द्वारा भरी जानेवाली सीटों की कुल संख्या के २७ प्रतिशत तक होगी और कुल आरक्षण, नगर निगम में कुल सीटों के ५० प्रतिशत से अनधिक होगा ;"।
अध्याय तीन
महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम में संशोधन।
३. महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम की, धारा ५क की, उप-धारा (१) के, खण्ड (ग) के स्थान में, सन् १९४९ का ५९। निम्न खण्ड, रखा जायेगा, अर्थात् :—
सन् १९४९ का ५९ की धारा ५क में संशोधन।
" (ग) नागरिकों के पिछड़े वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्ितयों के लिए आरक्षित रखी जानेवाली सीटें, नगर निगम में सीधे, निर्वाचन द्वारा भरी जानेवाली सीटों की कुल संख्या के २७ प्रतिशत तक होगी और कुल आरक्षण, नगर निगम में कुल सीटों के ५० प्रतिशत से अनधिक होगा तथा ऐसी सीटें, नगर निगम में विभिन्न प्रभागों को चक्रानुक्रम द्वारा आबंटित की जायेगी :
परंतु, इसप्रकार आरक्षित सीटों की कुल संख्या की आधी सीटें नागरिकों के पिछड़े वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित महिलाअों के लिए आरक्षित रखी जायेगी ; "।
अध्याय चार
महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ में संशोधन।
४. महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ की धारा ९ की, उप-धारा (२) के खण्ड (घ) के स्थान में, निम्न खण्ड, रखा जायेगा, अर्थात् :—
सन् १९६५ का महा. ४० की धारा ९ में संशोधन।
सन् १९६५ का महा. ४०। " (घ) नागरिकों के पिछड़े वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्ितयों के लिए आरक्षित रखी जानेवाली सीटें, नगर परिषद में सीधे, निर्वाचन द्वारा भरी जानेवाली सीटों की कुल संख्या के २७ प्रतिशत तक होगी तथा कुल आरक्षण, नगर परिषद में, कुल सीटों के ५० प्रतिशत से अनधिक होगा :
परंतु, इसप्रकार आरक्षित सीटों की कुल संख्या की आधी सीटें नागरिकों के पिछड़े वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित महिलाअों के लिए आरक्षित रखी जायेगी ; "।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर २७, २०२१/कर्ातिक ५, शके १९४३ ३
वक्तव्य
मुंबई नगर निगम अधिनियम (सन् १८८८ का ३) की, धारा ५क (४) (क), महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम (सन् १९४९ का ५९) की धारा ५क (१) (ग) और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ (सन् १९६५ का महा.४०) की धारा ९(२) (घ) क्रमश: नगर निगमों तथा नगर परिषदों में नागरिकों के पिछड़े वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्ितयों के लिए सीटों के आरक्षण का उपबंध करती है। उक्त अधिनियम, नगर निगमों और नगर परिषदों में सीधे निर्वाचन द्वारा भरी जानेवाली सीटों की कुल संख्या के २७ प्रतिशत का आरक्षण नागरिकों के पिछड़े वर्ग लिए रखने का उपबंध करते है। २. अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा नागरिकों के पिछड़े वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्ितयों के लिए आरक्षण का उपबंध करने के लिए, राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दिनांकित २७ जुलाई २०१८ और १४ फरवरी २०२० की अधिसूचना तथा अन्य अधिसूचना जारी की गई थी और तद्नुसार, राज्य निर्वाचन आयोग ने, जिला परिषद और पंचायत समिति के निर्वाचनों का आयोजना किया था।
३. महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ (सन् १९६२ का महा.५) की धारा १२ (२) (ग) के उपबंध तथा वाशिम, अकोला, नागपुर और भंडारा जिले की जिला परिषदों तथा पंचायत समितियों के संबंध में ५० प्रतिशत से अधिक आरक्षण का उपबंध करने के लिए, राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दिनांकित २७ जुलाई २०१८ और १४ फरवरी २०२० को जारी की गई अधिसूचनाअों को, विकास किशनराव गवली बनाम महाराष्ट्र राज्य तथा अन्य [सन् २०१९ की रिट याचिका (सिविल) क्रमांक ९८०] में उच्चतम न्यायालय के समक्ष चुनौति दी गई थी।
उच्चतम न्यायालय ने, दिनांकित ४ मार्च २०२१ के उनके आदेश द्वारा उक्त अधिसूचना अवैध और अनस्तित्व होनेवाले अन्य पिछड़े वर्गों के लिए सीटों के आरक्षण का जिस हद तक वह उपबंध करते हंै, उस हद तक उक्त अधिसूचना खारिज की है और इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए संबंधित स्थानीय निकायों के अनुस्मारक अवधि के लिए सामान्य/खुले प्रवर्ग के उम्मीदवारों से राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा तुरंत भरी जाने की घोषणा करने के कारण हुई सीटों की रिक्ति की उक्त अधिसूचना खारिज की है। उच्चतम न्यायालय ने, यह भी निर्णय दिया है कि, संबंधित स्थानीय प्राधिकरणों में अन्य पिछडे़ वर्ग के पक्ष में का आरक्षण इस हद को अधिसूचित किया जा सकेगा कि, वह अनुसूचित जातियो/अनुसूचित जनजातियों/अन्य पिछडे वर्गो को एक साथ पक्ष में कुल सीटों के आरक्षण के ५० प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
४. उक्त न्यायनिर्णय के परिच्छेद १२ में, उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया है कि, अन्य पिछडे़ वर्गों के लिए स्थानिय निकायों में सीटों का आरक्षण करने के पूर्व, राज्य द्वारा तीन परीक्षण/शर्तों का अनुपालन किया जाना आवश्यक है :----- (१) राज्य के भीतर, स्थानीय निकायों के पिछडेपन के स्वरूप और विवक्षाअों में की समकालिन सख्त जाँच करने के लिए सर्मपित आयोग स्थापित करानें, (२) आयोग की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए, नियोजित की जानेवाले स्थानीय निकाय को आवश्यक आरक्षण का अनुपात विर्िनदिष्ट करनें ताकि अत्याधिक गलतियाँ न हों ; और (३) किसी मामले में ऐसा आरक्षण अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों/अन्य पिछडे वर्गो को साथ लेकर के पक्ष में कुल सीटों के आरक्षण के कुल मिलाकर ५० प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
उक्त न्यायनिर्णय के अनुसरण में, सरकार ने, महाराष्ट्र राज्य पिछडा वर्ग आयोग अधिनियम, २००५ (सन् २००६ का महा. ३४) के अधीन गठित महाराष्ट्र राज्य पिछडा वर्ग आयोग को उक्त कार्य के लिए नियुक्त किया है। आयोग को, उक्त प्रयोजन के लिए समकालिन सख्त जाँच को आयोजित करने के लिए समय की आवश्यकता होगी।
५. उक्त न्यायनिर्णय में के परिच्छेद २८ में, उच्चतम न्यायालय ने, यह निर्णय दिया है कि, सन् १९६१ के अधिनियम की धारा १२(२)(ग) की विधिमान्यता को दी गई चुनौती नकारात्मक है। इसके बदले वह उपबंध पढा जाना है कि संबंधित स्थानीय निकायों में अन्य पिछडे वर्गों के पक्ष में का आरक्षण यह अधिसूचित कर सकेगा कि यह अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों/अन्य पिछडे वगार्ंे को साथ लेकर आरक्षित कुल सीटों के कुल मिलाकर४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर २७, २०२१/कर्ातिक ५, शके १९४३ ५० प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। अन्य शब्दों में, अभिव्यक्ित का अर्थ, धारा १२(२) (ग) में अस्तित्व में होनेवाले पिछला २७ प्रतिशत, " हो सकेगा " के आशय में है समेत का अर्थ यह है कि अन्य पिछडे वर्गो के लिए आरक्षण २७ प्रतिशत तक हो सकेगा परंतु, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछडे वगार्ंे को साथ लेकर के पक्ष में कुल मिलाकर ५० प्रतिशत की बा सीमा के अध्यधीन इस न्यायालय के संविधान न्यायपीठ द्वारा ऐसा कहा गया है।
६. उक्त न्यायनिर्णय को ध्यान में रखतेे हुए अन्य पिछडे़ वर्गों के लिए स्थानीय प्राधिकरणों में आरक्षण नहीं है। स्थानीय प्राधिकरणों में अन्य पिछडे वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के लिए, सरकार ने, मध्यांतरिक उपाय के रूप में यह विनिश्िचत किया गया है कि, नगर निगमों तथा नगर परिषदों में नागरिकों पिछडे़ वर्ग के प्रवर्ग से संबंधित व्यक्ितयों के लिए २७ प्रतिशत तक आरक्षण देने के लिए उपबंध करने तथा यह उपबंध करना कि, स्थानीय निकायों में कुल आरक्षण कुल सीटों के ५० प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। इसलिए, मुंबई नगर निगम अधिनियम की धारा ५क (४) (क), महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम की धारा ५क (१) (ग) तथा महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ की धारा ९(२) (घ) में यथोचित संशोधन करना प्रस्तावित है।
७. चूँकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चूका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान है जिनके कारण उन्हें इसमें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए, मुंबई नगर निगम अधिनियम, महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम और महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत तथा औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ; अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है।
मुंबई,
भगतसिंग कोश्यारी,
दिनांकित ३० सितम्बर २०२१।
महाराष्ट्र के राज्यपाल।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,
महेश पाठक,
सरकार के प्रधान सचिव।
(यथार्थ अनुवाद),
विजया ल. डोनीकर,
भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
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