RNI No. MAHBIL /2009/31730
सत्यमेवजयते
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
सोमवार , नोव्हेंबर २२ , २०२१ / अग्रहायण १ , शके १ ९ ४३
वर्ष ७ , अंक १४ ]
[पृष्ठे ४ , किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक २२
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी )
सहकारिता, विपणन तथा वस्त्रोद्योग विभाग
मंत्रालय , मादाम कामा मार्ग , हुतात्मा राजगुरू चौक , मुंबई ४०० ०३२ , दिनांकित २ नवम्बर २०२१ ।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. IX OF 2021 .
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA CO - OPERATIVE SOCIETIES ACT , 1960 .
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक ९ सन् २०२१ ।
महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम , १ ९ ६० में अधिकतर संशोधन करने संबंधी अध्यादेश ।
क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नही चल रहा है ;
सन १ ९ ६१ का
और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि , ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं महा . २४। जिनके कारण उन्हें इसमें आगे दर्शित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम , १ ९ ६० में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ हैं ;
(१)
भाग सात - २२-१ २
महाराष्ट्रशासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर २२ , २०२१/ अग्रहायण १ , शके १ ९ ४३
अब, इसलिए , भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड ( १ ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों प्रयोग करते हुए महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्वारा , निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात्: -
संक्षिप्त नाम तथा १. ( १ ) यह अध्यादेश महाराष्ट्र सहकारी संस्था ( संशोधन और विधिमान्यकरण ) अध्यादेश , २०२१ प्रारम्भण। कहलाए ।
( २ ) यह तुरन्त प्रवृत्त होगा ।
२. महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम , १ ९ ६० ( जिसे इसमें आगे , " मूल अधिनियम " कहां गया है ) की धारा ७३ककक की, उप- धारा ( ३ ) में, -
सन् १ ९ ६१ का महा. २४। सन् १ ९ ६१ का महा. २४ की धारा ७३ ककक में संशोधन ।
" (एक) विद्यमान परंतुक के पूर्व , निम्न परंतुक, निविष्ट किया जायेगा और २४ मार्च २०२० से निविष्ट किया गया समझा जायेगा, अर्थात्: -
परंतु, यदि समिति के निर्वाचित सदस्यों की तथा उनके पदधारियों की पदावधि अवसित हो चुकी है, और यदि संस्था की समिति का निर्वाचन , कोविड-१ ९ महामारी को ध्यान में रखते हुए , राज्य में तालाबंदी लागू करने के कारण नहीं किया जा सका है, सरकार द्वारा समय - समय पर, जारी किये गये आदेशों या संस्था के समिति के सदस्यों को जिम्मेदार नहीं माना जाएगा ऐसे किसी कारणों के लिए निर्वाचन लिया नहीं जाता है, जब तक समिति के ऐसे सदस्यों और पदधारियों की नयी समिति सम्य्कतया गठित नहीं होती है तब तक समिति के विद्यमान सदस्य और पदधारी के रूप में आगे बने रहे समझे जायेंगे : " ;
(दो) विद्यमान परंतुक में, " परंतु " शब्द के स्थान में , " परंतु आगे यह कि " शब्द रखे जायेंगे । विधिमान्यकरण और व्यावृत्ति ।
का महा .
३. मूल अधिनियम या किसी न्यायालय के किसी न्यायनिर्णय , ड़िक्री या आदेश में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , समिति या समिति के सदस्यों और उसके पदधारियों द्वारा मूल अधिनियम के उपबंधों के अधीन या तद्धीन बनाए गए नियमों या आदेशों या उप - विधियों द्वारा कृत कोई बात या की गई कोई कार्यवाही या जारी किया गया कोई आदेश महाराष्ट्र सहकारी संस्था ( संशोधन और विधिमान्यकरण ) अधिनियम , २०२१ द्वारा यथा संशोधित धारा ७३ ककक की उप - धारा , ( ३ ) के प्रथम परंतुक के उपबंध यदि सभी तात्विक समयों पर प्रवर्तन में निरंतर थे सन् २०२१ ऐसा मानकर विधि के अनुसरण में वैध ढंग से कृत , की गई , या, यथास्थिति , जारी किये गये समझे जायेंगे ।
९। ३ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर २२ , २०२१/ अग्रहायण १ , शके १ ९ ४३
वक्तव्य ।
कोविड-१ ९ महामारी प्रकोप के कारण राज्य में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियाँ चूँकि देश में तालाबंदी की घोषणा होने से २४ मार्च २०२० से बंद हुई हैं । राज्य में सहकारी संस्थाओं के क्रियाकलाप भी तालाबंदी के कारण प्रतिकूल रूप से बाधित हूए हैं , और इसलिए , महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९ ६० (सन् १९ ६१ का महा. २४ ) और तद्धदीन विरचित नियमों में यथा उपबंधित विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर सहकारी संस्था की समिति के निर्वाचन करना संभव नहीं हुआ है । इसलिए , महाराष्ट्र सहकारी संस्था ( संशोधन) अध्यादेश , २०२० ( सन् २०२० का महा . अध्या . क्र. १२ ) द्वारा उक्त अधिनियम की धारा ७३ गख की उप- धारा ( १५ ) में तृतीय परंतुक निविष्ट किया गया था जिसमें उक्त अध्यादेश के प्रारम्भण के दिनांक के पूर्व जिन संस्था के समिति के निर्वाचन करना नियत हैं परंतु जिनके निर्वाचन नहीं लिये गये हैं ऐसी संस्थाओं के समितियों का निर्वाचन लेने की समय सीमा बढ़ाने का उपबंध किया हैं ।
२. उक्त अधिनियम की धारा ७३ ककक की उप- धारा ( ३ ) यह उपबंध करती हैं कि , समिति का अवधि अवसित होने पर ऐसी समिति के सदस्य , समिति के सदस्य के रूप में उनके पद रिक्त समझे जायेंगे । उक्त अध्यादेश द्वारा उक्त अधिनियम की धारा ७३ ककक की , उप- धारा (३ ) में परन्तुक जोड़ा गया है जो यह उपबंध करता है कि, संस्था की समिति का निर्वाचन, ऐसी संस्था के समिति के सदस्यों को जिम्मेवार नहीं किया जाएगा ऐसे किसी कारणों के लिए निर्वाचन नहीं किया जा सका है तो जब तक नयी समिति सम्य्कतया गठित नहीं होती है तब तक समिति के विद्यमान सदस्य आगे बने रहे समझे जायेंगे । उक्त अध्यादेश महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक २७ सन् २०२० में परिवर्तित हुआ हैं ।
उक्त अधिनियम ही धारा ७३ ककक की उप- धारा ( ३ ) का उक्त परंतुक, उक्त अध्यादेश के महाराष्ट्र शासन राजपत्र में प्रकाशन के दिनांक से अर्थात् १० जुलाई २०२० से प्रवर्तन में आयेगा । इसे ध्यान में रखते हुए, समिति के सदस्यों और उसके पदधारियों जिनकी पदावधि १० जुलाई २०२० को या के पश्चात् पहले से ही अवसित हो चुकी है को नई समिति सम्यक्तया गठित होने तक समिति के सदस्य के रूप में , कायम रहने की सुरक्षा प्राप्त हो सकें । तथापि , समिति के वह सदस्य और उनके पदधारी जिनकी पदावधि १० जुलाई २०२० के पूर्व पहले से ही अवसित हो चुकी है , उन्हे नई समिति सम्य्कतया गठित होने तक समिति के सदस्य के रूप में कायम रहने की सुरक्षा नहीं प्राप्त हो सकी ।
उक्त अधिनियम की धारा ७७ क के साथ पठित धारा ७३झ के उपबंधों के कारण भी, जहाँ , समितियाँ उसके सदस्यों की पदावधि अवसित हो चुकी है के मामले में , रजिस्ट्रार , या तो स्व- प्रेरणा से या संस्था के किसी अधिकारी या सदस्यों के आवेदन पर , नई समिति गठित होने तक संस्था के कामकाज का प्रबंध करने के लिए संस्था के तीन सदस्यों से अनधिक सदस्यों की , या एक या अधिक प्राधिकृत अधिकारियों से मिलकर एक समिति नियुक्त करेगा ।
ऐसी संस्थाओं की संख्या बड़ी होने के कारण ऐसी संस्थाओं के कामकाज का प्रबंध करने के लिए प्राधिकृत अधिकारियों की नियुक्ति करना यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है और सहकार क्षेत्र के हित में भी नहीं है । प्राधिकृत अधिकारी के नियुक्ति की ऐसी कई कार्यवाही में , न्यायालय में मामले उद्भूत हो सकते हैं ।
३. इसलिए , कोविड-१ ९ महामारी के कारण राज्य में , लागू प्रथम तालाबंदी २४ मार्च २०२० के दिनांक से उक्त अधिनियम की धारा ७३ ककक की उप - धारा ( ३ ) के विद्यमान परंतुक के पूर्व एक परंतुक की निविष्टि द्वारा यह उपबंध करना इष्टकर समझा गया है कि, यदि समिति के निर्वाचित सदस्यों और उसके पदधारियों की पदावधि अवसित हो चुकी है और यदि कोविड-१ ९ महामारी को देखते हुए राज्य में तालाबंदी लागू होने के कारण संस्था की समिति का निर्वाचन नहीं किया गया है , सरकार द्वारा , समय - समय पर , जारी किये गये आदेशों या संस्था के समिति के सदस्यों को जिम्मेवार नहीं किया जायेगा ऐसे किसी कारणों के लिए निर्वाचन लिया नहीं जाता है तो जब तक नई समिति सम्य्कतया गठित नहीं होती है तब तक समिति के सदस्य आगे बने रहे समझे जायेंगे । ४
महाराष्ट्रशासन राजपत्र असाधारण भाग सात , नोव्हेंबर २२ , २०२१/ अग्रहायण १ , शके १ ९ ४३
४. चूँकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान है जिनके कारण उन्हें इसमें उपर्युक्त प्रयोजनों के लिए , महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १ ९ ६० में अधिकतर संशोधन करने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ; अतः यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है ।
मुंबई , दिनांकित १ नवम्बर २०२१ ।
भगत सिंह कोश्यारी, महाराष्ट्र के राज्यपाल । महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,
अनूप कुमार , शासन के प्रधान सचिव ।
(यथार्थ अनुवाद) ,
विजया ल. डोनीकर, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य ।
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