RNI No. MAHBIL / 2009/ 31730
सत्यमेव जयते
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ७ , अंक १५]
मंगळवार, डिसेंबर ७ , २०२१ / अग्रहायण १६, शके १ ९ ४३ [ पृष्ठे १३, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक २३
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश , विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद ( देवनागरी लिपी)
कृषि, पशुपालन , दुग्ध उद्योग विकास तथा मत्स्य उद्योग विभाग
मादाम कामा मार्ग , हुतात्मा राजगुरू चौक, मंत्रालय , मुंबई ४०० ०३२ , दिनांकित २३ नवंबर २०२१ .
MAHARASHTRA ORDINANCE No. XII OF 2021 .
AN ORDINANCE FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA MARINE FISHING REGULATION ACT , 1981 .
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक १२ सन् २०२१ ।
महाराष्ट्र समुद्री मछुवाही विनियमन अधिनियम, १ ९८१ में अधिकतर संशोधन करने संबंधी अध्यादेश ।
क्योंकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;
और क्योंकि, महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हे इसमें आगे दर्शित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र समुद्री मछुवाही विनियमन अधिनियम , १ ९ ८१ में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ;
(१)
भाग सात - २३-१ २
महाराष्ट्रशासन राजपत्र असाधारण भाग सात , डिसेंबर ७ , २०२१/अग्रहायण १६ , शके १ ९ ४३
अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड ( १ ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए महाराष्ट्र के राज्यपाल , एतद्वारा , निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते है , अर्थात्:-
१. ( १ ) यह अध्यादेश महाराष्ट्र समुद्री मछुवाही विनियमन ( संशोधन ) अध्यादेश , २०२१ कहलाए । संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भण ।
(२ ) (क) यह धारा ६ की उप- धारा ( २ ) और धारा ७ को छोडकर तुरंत प्रवृत्त होगा ।
(ख) धारा ६ की उप- धारा ( दो) और धारा ७ ऐसे दिनांक पर प्रवृत्त होगी, जिसे राज्य सरकार , राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , नियत करे ।
२. महाराष्ट्र समुद्री मछुवाही विनियमन अधिनियम , १९८१ ( जिसे इसमें आगे "मूल अधिनियम" कहा गया है) की धारा २ के, -
सन् १९ ८१ का महा. ५४ की धारा २ में संशोधन।
सन् १९ ८१ का महा. ५४। ( १ ) खण्ड ( क) के स्थान में , निम्न खण्ड , रखा जायेगा , अर्थात्-
" (क) न्याय निर्णायक अधिकारी " का तात्पर्य , इस अधिनियम द्वारा कोई न्याय निर्णायक अधिकारी , जिसपर प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने की अधिकारिता हो तथा उसपर अधिरोपित कर्तव्यों का निर्वहन करनेवाला सहायक मत्स्य उद्योग आयुक्त, से है " ;
( २ ) खण्ड (क ) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात्: -
" (क-एक) " सलाहकारी तथा मानीटरिंग समिति " का तात्पर्य , धारा ३ के अधीन गठित राज्य सलाहकारी तथा मानीटरिंग समिति , से है ; " ;
(३ ) खण्ड (ख ) , अपमार्जित किया जायेगा ;
(४ ) खण्ड ( ग ) में, " मत्स्योद्योग निदेशालय " शब्दों के स्थान में " मत्स्योद्योग आयुक्तालय " शब्द रखे जायेंगे ;
(५ ) खण्ड ( ग) के पश्चात्, निम्न खण्ड , निविष्ट किया जायेगा, अर्थात्: -
" ( ग - एक ) " मछली " का तात्पर्य , समुद्री स्नतपायी , सरीसृप और समुद्री पक्षी से अन्यथा मछली , घोंघा , कड़े खोलवाला जलजीव और समुद्री प्राणी के सभी अन्य प्ररूप और वनस्पतियों, से है ;
(ग - दो ) " मत्स्य उद्योग " का तात्पर्य , " मछुवाही " और " मछुवाही से संबंधित गतिविधियाँ " और ,-
(एक) मछली ढूँढने के लिए या खोजने या उन्हें इकठ्ठा करना ;
(दो) किसी पद्धति द्वारा मछली को पकड़ना , लुभावना या मछली को इकठ्ठा करना ;
(तीन) मछली उतारना , पॅक करना, विपणन करना, प्रक्रिया करना, परिरक्षित करना, या परिवहन करना ;
(चार ) इस खण्ड के अधीन विवरणित किसी गतिविधियों से सीधे संबंधित समुद्र का कोई परिचालन ; "
(ग -तीन) " मछुवाही के उपकरण " का तात्पर्य , ' मछली ' पकड़ने के लिए उपयोगी साधन जैसे कि कोई जाली, खटोला , जाल या अन्य यंत्र और मत्स्य उद्योग से संबंधित गतिविधियाँ में उपयोगी । "
(६ ) खण्ड ( घ) के स्थान में, निम्न खण्ड , रखा जायेगा , अर्थात्: -
(घ) " मछुवाही जलयान " का तात्पर्य, प्रणोदन के नौका, जहाज या जलयान , चाहे यंत्र से युक्त हो ना हो , जो फायदे के लिए समुद्र में मछुवाही में व्यस्त है, और इसमें, -
(एक) बिना मोटर का जलयान,
(दो) मोटर युक्त जलयान , और
(तीन) यांत्रिक जलयान ।
जो फायदे के लिये समुद्र में मछुवाही में व्यस्त है ; " ;
३ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर ७ , २०२१ / अग्रहायण १६ , शके १ ९ ४३
( ७ ) खण्ड (ङ) में, " मत्स्योद्योग निदेशालय " शब्दों के स्थान में, " मत्स्योद्योग आयुक्तालय " शब्द रखे जायेंगे ;
(८ ) खण्ड (ङ) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा , अर्थात्: -
(ङ -एक) मछुवाही जलयान के संबंधित "कप्तान " का तात्पर्य , जलयान का प्रभुत्व या उत्तरदायी होनेवाला या जलयान की जिम्मेदारी होनेवाले किसी व्यक्ति, से है ;
(ङ-दो) " यांत्रिक जलयान " का तात्पर्य , कोई मछुवाही जलयान जिसके अंदर स्थायीरूप से इंजन बिठाया है , जिसका उपयोग फायदे के लिए समुद्र में मछुवाही में व्यस्त प्रणोदन साथ ही साथ मछुवाही परिचालन जैसै ढलाई और मछुवाही के साधनों की खिंचाई करने के काम में होता है, से है।
(ङ- तीन) " यंत्रचालित जलयान " का तात्पर्य, कोई मछुवाही जलयान जिसके बाहरी या अंदर की बाजू में इंजीन बिठाया है जिसका उपयोग केवल प्रणोदन के लिए होता है न कि मछुवाही परिचालन के लिए ;
(ङ- चार ) " बिना यंत्रचालित जलयान " का तात्पर्य, कोई मछुवाही जलयान जिसके प्रणोदन साथ ही साथ मछुवाही परिचालन के लिए किसी मशीन ( यांत्रिक) ऊर्जा का उपयोग नहीं किया जाता है ;
(ङ- पाँच) " परिचालक " ( तांडेल ) का तात्पर्य , कोई व्यक्ति या उद्योग , जो मछुवाही जलयान को परिचालन या प्रबंधन का नियंत्रण करता है या जिसने जलयान के परिचालन के लिए दायित्व कल्पित किया है ।
(ङ- छह) मछुवाही जलयान के संबंध में, " स्वामी " का तात्पर्य , जलयान का स्वामी साथ ही साथ किसी संगठन या व्यक्तियों के संघ चाहे निगमित हो या न हो , जिसके द्वारा जलयान है या जलयान में हिस्सा स्वामित्व है समेत किसी अन्य व्यक्ति , से है ; " ;
(९ ) खण्ड (ट ) के पश्चात्, निम्न खण्ड, जोड़ा जायेगा , अर्थात्: -
(ठ) " सम्पोषणीय मछुवाही " का तात्पर्य , ऐसी मछुवाही गतिविधियाँ जो कि जैविक और आर्थिक उत्पादकता, जैविक विभिन्नता या परिस्थितिक तंत्र संरचना का अवांछनीय कारण नहीं होगी और एक मानवी पीढ़ी से अगली पीढ़ी के कार्य में नेतृत्व को आगे ले जानेवाली है । "
३. मूल अधिनियम की धारा ३ में, -
(क) उप- धारा (१ ) के स्थान में, निम्न उप- धारायें रखी जायेगी , अर्थात्: -
सन् १ ९८१ का महा. ५४ की धारा ३ में संशोधन । " (१ ) इस अधिनियम के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने और इनपर अधिरोपित कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए एक राज्य सलाहकार और मानिटरिंग समिति होगी ।
(१ -क ) राज्य सलाहकार और मानिटरिंग समिति , निम्न सदस्यों से मिलकर बनेगी : -
(एक ) महाराष्ट्र राज्य मत्स्योद्योग के आयुक्त
अध्यक्ष
सदस्य ;
( दो) कोकण विभाग के विभागीय आयुक्त या उनके प्रतिनिधि
(तीन) महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सदस्य ;
(चार ) भारतीय तटवर्ती रक्षक सेना के उप- महा निरीक्षक सदस्य ;
(पाँच) पुलिस महा निरीक्षक तटवर्ती रक्षक और सुरक्षा सदस्य ;
(छह ) कृषि, पशुपालन , दुग्ध विकास और मत्स्य उद्योग सदस्य ; विभाग के उप- सचिव (मत्स्योद्योग )
सदस्य- सचिव ।
(सात ) मत्स्योद्योग ( समुद्री ) के संयुक्त आयुक्त
भाग सात - २३-२ ४
महाराष्ट्रशासन राजपत्र असाधारण भाग सात , डिसेंबर ७ , २०२१/अग्रहायण १६ , शके १ ९ ४३
(१ -ख) सलाहकार और मानिटरिंग समिति केंद्रीय या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त अनुसंधान संस्था से मत्स्योद्योग में जानकारी होनेवाले दो प्रतिनिधियों को विशेष निमंत्रिति के रूप में निमंत्रित कर सकेगी । विशेष निमंत्रिति , सलाहकार और मानिटरिंग समिति की बैठक में चर्चा में हिस्सा ले सकते है, किंतु उन्हे मत देने का अधिकार नहीं होगा ;
(१ -ग) सलाहकार और मानिटरिंग समिति , राज्य सरकार को अध्याय दो के अधीन लागू किए जानेवाले विनियमनों की सिफारिश करेगी । सलाहकार और मानिटरिंग समिति , राज्य सरकार को उक्त विनियमनों की सिफारिश करने के पूर्व , जिला समितियों की सिफारिशों को, यदि कोई हो, विचारार्थ ले सकेगी । सलाहकार और मानिटरिंग समिति, जिला समिति को, इस अधिनियम के अधीन उनको प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने तथा उनपर अधिरोपित कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए समन्वयन, मानिटर करेगी और सलाह और निदेशन देगी । " ;
(२ ) उप- धारा ( २ ) में, " समिति सलाह देगी " शब्दों के स्थान में, " सलाहकार और मानिटरिंग समिति सिफारिश करेगी " शब्द रखे जायेंगे ;
(३ ) उप - धारा ( २ ) के पश्चात्, निम्न उप- धारा , जोड़ी जायेगी, अर्थात्: -
" ( ३ ) ( क) यहाँपर प्रत्येक तटवर्ती जिलों के लिए अध्यक्ष के रूप में जिलाधिकारी के साथ एक जिला समिति होगी ; और पुलिस सदस्यों के रूप में, पुलिस अधीक्षक , तटवर्तीरक्षक सेना कमांडेट और पत्तन अधिकारी होंगे ; तथा सदस्य- सचिव के रूप में मत्स्योद्योग सहायक आयुक्त होंगे। (ख ) अध्यक्ष, अन्य सरकारी विभागों और मछुआरे और व्यापार , जिसे वह ठिक समझे के प्रतिनिधियों को सहयोजित करेगी ।
(ग) जिला समिति, अध्याय दो के अधीन जिले में प्रवर्तित किए जानेवाले विनियमों की सलाहकार और मानिटरिंग समिति को सिफारिश करेगी । " ;
(४) पार्श्व टिप्पणी में, " सलाहकार समिति का गठन " शब्दों के स्थान में, " सलाहकार और मानिटरिंग समिति का गठन " शब्द रखे जायेंगे ।
४. मूल अधिनियम की धारा ४ की, -
(१ ) उप- धारा (१ ) में ,
सन् १ ९८१ का महा. ५४ की धारा ४ में संशोधन ।
(एक) " सलाहकार समिति " शब्दों के स्थान में , " सलाहकार और मानिटरिंग समिति " शब्द रखे जायेंगे ;
(दो ) खण्ड (ग ) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात्: -
" (ग- एक) विभिन्न मछुवाही जलयान और मछुवाही के प्रकारों के मामले में, नाविक सदस्यों की संख्या तथा मछुवाही के उपस्कर ; या " ;
(२ ) उप- धारा ( २ ) के , खण्ड ( ख ) में, " वैज्ञानिक आधार " शब्दों के पश्चात् " और सम्पोषणीय मछुवाही के लिए " शब्द जोड़े जायेंगे ;
(३ ) उप - धारा ( २ ) के पश्चात्, निम्न उप - धारा, जोड़ी जायेगी , अर्थात्,
" ३. मछुआरे और वहाँ की सहकारी संस्थाएँ , मछुआरों की सुरक्षा तथा कानून और सुव्यवस्था के लिए, समय - समय पर , तटवर्ती पुलिस और मत्स्योद्योग विभाग के अधिकारियों द्वारा जारी कोई अनुदेशों या निदेशनों का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होंगे । " ।
५. मूल अधिनियम की धारा ५ में, -
सन् १९ ८१ का महा . ५४ की धारा ५ में संशोधन ।
(१ ) " कप्तान " शब्द के स्थान में, " कप्तान या प्रचालक (तांडेल) " शब्द रखे जायेंगे ;
(२ ) द्वितीय परंतुक में, " पारम्परिक मछुवाही करना जैसे कि देशी नौका या डोंगी " शब्दों के स्थान में, " अयांत्रिक जलयान या मोटरयुक्त जलयान या यांत्रिक जलयान " शब्द रखे जायेंगे । ५ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर ७ , २०२१/ अग्रहायण १६, शके १ ९ ४३
६. मूल अधिनियम की धारा ६ की, उप - धारा (४ ) में, -
( १ ) खण्ड ( ग) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किए जायेंगे , अर्थात्: -
सन् १ ९८१ का महा . ५४ की धारा ६ में संशोधन । ( ग- एक) चाहे मछुवाही जलयान को जैसा कि विहित किया जाए ऐसे प्राधिकरण का समुद्री यात्रा योग्य प्रमाणपत्र है ;
(२ ) खण्ड (ग ) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा , अर्थात्: -
(ग - दो) चाहे कप्तान या प्रचालक ( तांडेल) , जो मोटरयुक्त या यांत्रिक मछुवाही जलयान का परिचालन करता है , अनुज्ञप्ति धारण की है और समुद्र नौपरिवहन का प्रशिक्षण लिया है ; " । ७. मूल अधिनियम की धारा ८ के पश्चात्, निम्न धारा , निविष्ट की जायेगी , अर्थात्, :-
सन् १९ ८१ का महा. ५४ की धारा ८क की निविष्टि। " ८क. ( १ ) मोटरयुक्त या यांत्रिक मछुवाही जलयान के कप्तान या प्रचालक (तांडेल) , ऐसे मछुवाही जलयान का परिचालन करने के लिए अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने के लिए अनुज्ञापन अधिकारी को आवेदन करेगा।
कप्तान या परिचालक (तांडेल) का अनुज्ञापन। ( २ ) ऐसी आवश्यक अर्हता और जैसा कि विहित किया जाए ऐसे समुद्र में नौपरिवहन का प्रशिक्षण प्रमाणपत्र धारण करनेवाले मोटरयुक्त या यांत्रिक मछुवाही जलयान के कप्तान या प्रचालक ( तांडेल ) मछुवाही जलयान परिचालित करने के लिए अनुज्ञप्ति प्राप्त करने के लिए पात्र होंगे ।
(३) उप- धारा ( १ ) के अधीन का प्रत्येक आवेदन , ऐसे प्ररूप , अंतर्विष्ट ऐसी विशिष्टियाँ आवश्यक अर्हता समेत और प्रशिक्षण के ब्यौरे और विहित की जाये ऐसी फीस के द्वारा संलग्न होगा । इस धारा के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञप्ति , ऐसे प्ररूप और ऐसी शर्तों के अध्यधीन होंगी , जैसा विहित किया जाये । ८. मूल अधिनियम की धारा १३ के स्थान में , निम्न धारा , रखी जायेगी , अर्थात्:-
सन् १९ ८१ का महा . ५४ की धारा १३ की
प्रतिस्थापना ।
अनुज्ञप्ति या रजिस्ट्रीकरण आदि की मंजूरी को अस्वीकृत करने के आदेश के विरुद्ध अपील । " १३. (१ ) अनुज्ञप्ति अधिकारी के मछुवाही जलयान के लिए अनुदत्त अनुज्ञप्ति को अस्वीकृत करने या ऐसी अनुज्ञप्ति स्थगित करने, रद्द करने या बदलने या संशोधित करने के आदेश द्वारा व्यथित कोई व्यक्ति या रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के कोई जलयान रजिस्टर करने से इंकार करने या ऐसे जलयान का रजिस्ट्रीकरण रद्द करने के आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति उस दिनांक से जिस दिनांक पर उसे आदेश संसूचित किया है के तीस दिनों के भीतर प्रथम अपीलीय प्राधिकारी अर्थात् मत्स्य उद्योग आयुक्त, महाराष्ट्र राज्य को अपील प्रस्तुत करेगा ।
( २) प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के किसी आदेश से कोई व्यक्ति व्यथित होता है तो वह जिस दिनांक पर उसे आदेश संसूचित किया है , से तीस दिनों के भीतर द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी को अर्थात् सरकार से कोई अपील प्रस्तुत कर सकेगा :
परंतु अपीलीय प्राधिकारी , तीस दिनों का उक्त अवधि अवसित होने के पश्चात् भी कोई अपील ग्रहण कर सकेगा , यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि, अपीलकर्ता को, समय में अपील दाखिल करने से पर्याप्त कारणों द्वारा रोका गया था ।
(३) उप- धारा (१ ) या ( २ ) के अधीन किसी अपील की प्राप्ति पर , अपीलीय प्राधिकरण , अपीलकर्ता को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, यथा संभव शीघ्र , जिसे वह उचित समझे ऐसे आदेश पारित करेगा ।
(४) द्वितीय अपील दाखिल नहीं किया है के मामले में , प्रथम अपीलीय प्राधिकारी का आदेश अंतिम होगा और जब द्वितीय अपील दाखिल किया जाता है के मामले में , द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी का आदेश अंतिम होगा । " ।
सन् १९८१ का महा. ५४ की धारा १४ में संशोधन । ९. मूल अधिनियम की धारा १४ में, " ऐसा जलयान परिबद्ध करना और उसमें पाई गई कोई मछली का जब्त करना " शब्दों के स्थान में , " सहायक वस्तु और मछुवाही के साधन जो उसमें फिट किया है और उसमें पाई गई कोई मछली समेत ऐसे जलयान का ज़ब्त करना " शब्द रखे जायेंगे । ६
महाराष्ट्रशासन राजपत्र असाधारण भाग सात , डिसेंबर ७ , २०२१/अग्रहायण १६ , शके १ ९ ४३
१०. मूल अधिनियम की धारा १५ के, -
(१ ) उप- धारा ( १ ) में , " परिबद्ध करना " शब्दों के स्थान में, " ज़ब्त करना " शब्द रखे जायेंगे ;
सन् १९ ८१ का महा. ५४ की धारा १५ में संशोधन ।
(२ ) उप- धारा ( २ ) में , " ऐसी मछली का निपटान " शब्दों के स्थान में , " अड़तालीस घंटे के भीतर ऐसी मछली का निपटान " शब्द रखे जायेंगे ।
११. मूल अधिनियम की धारा १७ के स्थान में , निम्न धारा, रखी जायेगी , अर्थात्: -
सन् १९ ८१ का महा . ५४ की धारा १७ की प्रतिस्थापना ।
शास्तिका अधिरोपण ।
" १७. (१ ) न्याय निर्णायक अधिकारी , धारा १६ के अधीन जाँच करने के पश्चात्, इस अधिनियम के किन्हीं उपबंधों, या तद्धीन बनाए किसी आदेश या नियम या अनुज्ञप्ति के किन्ही शर्तों के उल्लंघन में, चाहे किसी व्यक्ति ने , किसी मछुवाही जलयान का उपयोग या के कारण या उपयोग किए जाने की अनुमति दी है, का निर्णय करेगा ।
(२ ) जब ऐसा व्यक्ति, न्याय निर्णायक अधिकारी द्वारा दोषी पाया जाता है , वह लिखित में, किसी आदेश द्वारा , इस धारा में विनिर्दिष्ट शास्ति ऐसे व्यक्ति पर अधिरोपित कर सकेगा । ( ३ ) जो भी कोई इस अधिनियम के अधीन वैध अनुज्ञप्ति प्राप्त किए बिना विनिर्दिष्ट क्षेत्र में , मछुवाही या मछुवाही से संबंधित गतिविधियों में जुड़े किसी मछुवाही जलयान का उपयोग करने, उपयोग करने का कारण बनाना या उपयोग करनें की अनुमति देता है वह, -
( क) जहाँ जलयान मोटरयुक्त जलयान नहीं है के मामले में-
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए एक हजार रुपयों की शास्ति ;
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए दो हजार रुपयों की शास्ति ;
(तीन) तृतीय या पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए पाँच हजार रुपयों की शास्ति के लिए दायी होगा ;
(ख) जहाँ जलयान २० अश्वशक्ति तक यंत्र की क्षमता से मोटरयुक्त मछुवाही जलयान परिचालन होने के मामले में, -
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए तीन हजार रुपयों की शास्ति ;
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए पाँच हजार रुपयों की शास्ति;
(तीन) तृतीय या पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए दस हजार रुपयों की शास्ति, के लिए दायी होगा ;
(ग) जहाँ जलयान २० अश्वशक्ति से उपर १२० अश्वशक्ति तक यंत्र क्षमता के साथ मोटरयुक्त मछुवाही जलयान का परिचालन होने के मामले में,-
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिये दस हजार रुपयों की शास्ति ;
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिये बीस हजार रुपयों की शास्ति ;
(तीन) तृतीय या पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिये तीस हजार रुपये की शास्ति, के लिये दायी होगा ;
(घ) जहाँ जलयान १२० अश्वशक्ति के उपर यंत्र क्षमता के साथ मोटर युक्त मछुवाही जलयान का परिचालन होणे के मामले में, -
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए पच्चीस हजार रुपयों की शास्ति ;
(दो ) द्वितीय और पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए पचास हजार रुपयों की शास्ति ।
(तीन) तृतीय या पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए एक लाख रुपयों की शास्ति, के लिये दायी होगा ;
७ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर ७ , २०२१/ अग्रहायण १६, शके १ ९ ४३
(ड़) जहाँ जलयान कुल मिलाकर बारह मीटर से ज्यादा लंबाई का यांत्रिक जलयान होने के मामले में, -
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए दस हजार रुपयों की शास्ति ;
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए बीस हजार रुपयों की शास्ति ;
(तीन) तृतीय और पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए पचास हजार रुपयों की शास्ति, के लिये दायी होगा ;
(च) जहाँ जलयान , कुल बारह और बीस मीटर के बीच में ( दोनों समावेशित करके) लंबाई का यांत्रिक मछुवाही जलयान होने के मामले में, -
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए चालीस हजार रुपयों की शास्ति
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए एक लाख रुपयों की शास्ति ;
(तीन) तृतीय या पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए दो लाख रुपयों की शास्ति, के लिए दायी होगा ;
( ४ ) जो भी कोई विनिर्दिष्ट क्षेत्र , में मछुवाही या मछुवाही से संबंधित गतिविधियों में जुड़े किसी मछुवाही जलयान का उपयोग करता है , उपयोग करने का कारण बनता है या उपयोग करने की अनुमति देने में,-
(एक) अनुज्ञप्ति की शर्तों ; या
(दो) मछुवारे और मछुवाही जलयान की सुरक्षा और सुरक्षा उपाय या
(तीन) अवकाशीय तथा अस्थायी बंदी और बरसाती मछुवाही प्रतिबन्ध ; या
(चार) हानिकारक मछुवाही पद्धति का प्रतिषेध ; या
(पाँच) उप- धाराएँ ( ५ ) , ( ६ ) और (८ ) में विनिर्दिष्ट किए गए से अन्य मामलों के संबंध में विनियमों के उल्लंघन में, -
(क) जहाँ जलयान मोटरयुक्त जलयान नहीं है के मामले में, -
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए एक हजार रुपयों की शास्ति ;
हजार रुपयों की शास्ति:
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए दो
(तीन) तृतीय या पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए पाँच हजार रुपयों की शास्ति, के लिये दायी होगा ;
(ख ) जहाँ जलयान २० अश्वशक्ति तक यंत्र क्षमता के साथ मोटरयुक्त मछुवाही जलयान प्रचालन करता है के मामले में,-
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए तीन हजार रुपयों की शास्ति ;
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए पाँच हजार रुपयों की शास्ति ;
(तीन ) तृतीय या पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए दस हजार रुपयों की शास्तिके लिये दायी होगा ;
(ग) जहाँ जलयान २० अश्वशक्ति से उपर १२० अश्वशक्ति तक यंत्र क्षमता से मोटरयुक्त मछुवाही जलयान का प्रचालन होता है के मामले में, -
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए सात हजार रुपयों की शास्ति ;
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए पंद्रह हजार रुपयों की शास्ति ;
भाग सात - २३-३ ८
महाराष्ट्रशासन राजपत्र असाधारण भाग सात , डिसेंबर ७ , २०२१/अग्रहायण १६ , शके १ ९ ४३
(तीन) तृतीय या पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए पच्चीस हजार रुपयों की शास्ति के लिये दायी होगा ;
(घ) जहाँ जलयान १२० अश्वशक्ति के उपर यंत्र क्षमता के साथ मोटरयुक्त मछुवाही जलयान का प्रचालन है के मामले में, -
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए बीस हजार रुपयों की शास्ति ;
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए चालीस हजार रुपयों की शास्ति ;
(तीन) तृतीय या पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए अस्सी हजार रुपयों की शास्ति के, लिये दायी होगा ;
(ङ) जहाँ यांत्रिक जलयान कुल मिलाकर बारह मीटर से अनिम्न जलयान होने के मामले में ,-
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए पाँच हजार रुपयों की शास्ति ;
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए दस हजार रुपयों की शास्ति ;
(तीन) तृतीय या पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए बीस हजार रुपयों की
शास्ति ;
(च) जहाँ जलयान कुल मिलाकर बारह और बीस मीटर ( दोनों समावेशित करके) के बीच लंबाई वाला यांत्रिक मछुवाही जलयान होने के मामले में,-
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए बीस हजार रुपयों की शास्ति ;
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए पचास हजार रुपयों की शास्ति ;
(तीन) तृतीय या पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए एक लाख रुपयों की शास्ति के लिये दायी होगा ;
(छ) जहाँ जलयान कुल मिलाकर बीस मीटर से लंबा यांत्रिक मछुवाही जलयान होने के मामले में, -
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए एक लाख रुपयों की शास्ति ;
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए दो लाख रुपयों की शास्ति
(तीन ) तृतीय या पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए पाँच लाख रुपयों की शास्ति, के लिये दायी होगा ;
(५ ) जो भी कोई पर्स सीन या रिंग सीन (लघु पर्स सीन सहित या जाल के आकार सहित ट्रॉल नेट के विनियम से संबंधित इस अधिनियम के अधीन किसी आदेश का उल्लंघन करता है तो , वह ,-
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए एक लाख रुपयों की शास्ति ;
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए तीन लाख रुपयों की शास्ति ;
(तीन) तृतीय या पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए छह लाख रुपयों की शास्ति, के लिए दायी होगा ।
( ६ ) जो भी कोई हानिकारक मछुवाही पद्धति (निशाना या जोडी में खेंचू से जाल में मछली मारना, मछली को आकर्षित करके मछली मारना , एलइडी प्रकाश मछुवाही करना ) के विनियम से संबंधित इस अधिनियम के अधीन कोई आदेश का उल्लंघन करता है तो ,-
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए न्यूनतम पाँच लाख रुपयों की शास्ति;
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए दस लाख रुपयों की शास्ति ;
९ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर ७ , २०२१/ अग्रहायण १६, शके १ ९ ४३
(तीन ) तृतीय और पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए बीस लाख रुपयों की शास्ति के लिये दायी होगा ।
(७ ) जो भी कोई इस अधिनियम के अधीन कछुवा अलग करनेवाले उपकरण (टर्टल एक्सक्लुडींग डिव्हाईस ) लगाने के विनियम से संबंधित इस अधिनियम के अधीन किसी आदेश का उल्लंघन करता है , वह, -
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए एक लाख रुपयों की शास्ति ;
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए दो लाख रुपयों की शास्ति ;
(तीन) तृतीय और पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए पाँच लाख रुपयों की शास्ति, के लिए दायी होगा ।
(८ ) जो भी कोई इस अधिनियम के अधीन किशोर आयु मछुवाही के विनियम से संबंधित इस अधिनियम के अधीन किसी आदेश का उल्लंघन करता है , वह, -
(क) जहाँ कोई मछुवाही जलयान , न्यूनतम कानूनी आकार से निम्नतम आकार की किशोर आयु मछली पकडता है, -
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए एक लाख रुपयों की शास्ति ;
(दो) द्वितीय उल्लंघन के लिए दो लाख रुपयों की शास्ति ;
(तीन) तृतीय और पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए पाँच लाख रुपयों की शास्ति के लिये दायी होगा ;
(ख) जहाँ किशोर आयु मछली ( न्यूनतम वैध आकार की मछली ) मछली व्यापारी द्वारा खरीदी जाती है ,-
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए मछली के मूल्य के पाँच गुणा की शास्ति ;
(दो ) द्वितीय या पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए पाँच लाख रुपयों की शास्ति, के लिए दायी होगा ।
(९ ) (क) जो भी कोई , इस अधिनियम के किन्ही उपबंधों या किसी आदेश या तद्धीन बनाए नियमों के उल्लंघन में मछुवाही के प्रयोजन के लिए या किसी अन्य संबद्ध प्रयोजन के लिए राज्य के राज्यक्षेत्रीय जल से बाहरी क्षेत्र में के राज्यक्षेत्रीय जल में मछुवाही जलयान के साथ प्रवेश करता है, तो,-
(एक) प्रथम उल्लंघन के लिए दो लाख रुपये और ऐसे व्यक्ति द्वारा पकड़े गए मछली के मूल्य के पाँच गुना की शास्ति ;
(दो) द्वितीय और पश्चात्वर्ती उल्लंघन के लिए छह लाख रुपये और ऐसे व्यक्ति द्वारा पकड़े गए मछली के पाँच गुना शास्ति के लिये दायी होगा ।
(ख) जो कोई राज्य के बाहरी राज्यक्षेत्रीय जल क्षेत्र से राज्य के राज्यक्षेत्रीय जलक्षेत्र में , इस अधिनियम के किन्ही उपबंधों या कोई आदेश या तद्धीन बनाए नियमों के उल्लंघन में , मछुवाही या कोई अन्य संबद्ध प्रयोजन के लिए प्रवेश करता है तो वह सहायक वस्तु और मछुवाही उपकरण से जिसमें वह बिठाया है तथा किन्ही मछली जो उसमें पाई गई है समेत प्रथम ऐसे उल्लंघन के लिए अनिवार्य रूप से जब्त किया जायेगा ; तथा सहायक वस्तु और मछुवाही उपकरण जिसमें वह बिठाया गया है समेत सभी नाविक सदस्य प्रचालक (तांडेल ) और कप्तान आवश्यक कार्यवाही के लिए पुलिस प्राधिकरण को सौंपा जायेगा ।
(१० ) इस धारा के अधीन अधिरोपित कोई शास्ति की रकम भू- राजस्व के किसी शेष के रूप में वसूलनीय होगी।
भाग सात - २३-३अ १०
महाराष्ट्रशासन राजपत्र असाधारण भाग सात , डिसेंबर ७ , २०२१/अग्रहायण १६ , शके १ ९ ४३
(११ ) न्याय निर्णायक अधिकारी यह निदेश दे सके कि इसके अतिरिक्त में कोई शास्ति जो इस धारा के अधीन अधिरोपित की जा सकेगी,-
(क) मछुवाही जलयान का रजिस्ट्रीकृत प्रमाणपत्र जिसका इस धारा में निर्देशित रीत्या में उपयोग किया गया है या उपयोग का कारण बना है या उपयोग किए जाने के लिए अनुमति मिली है , या अनुज्ञप्ति में किन्ही शर्तों का जिसका उल्लंघन किया गया वह,-
(एक) रद्द किया जायेगा या , यथास्थिति , प्रतिसंहरण किया जायेगा ; या
(दो) न्याय निर्णायक अधिकारी जिसे वह ठिक समझे ऐसी अवधि के लिए स्थगित किया जायेगा ; या
(ख) सहायक साधन और मछुवाही उपकरण जो इसमें बिठाए है समेत या मछली समेत मछुवाही जलयान जो धारा १४ के अधीन जब्त किया है , सरकार को समपहृत किया जायेगा:
परंतु , मछुवाही जलयान खण्ड ( ख ) के अधीन समपहृत नहीं किया जायेगा, यदि न्याय निर्णायक अधिकारी का ऐसे जलयान के स्वामी या उससे किसी अधिकार का दावा करनेवाले किसी व्यक्ति के सुनवाई के पश्चात्, यह समाधान हो जाता है कि, स्वामी या ऐसी व्यक्ति ने, ऐसी चूक करने की रोकथाम के लिए सम्यक सावधानी बरती थी ।
(१२ ) चूककर्ता मछुवाही जलयान और स्वामी, केंद्र- राज्य सहायता योजना या राज्य सरकार योजना के एक अधीन फायदे की किसी प्रकार के लिए हकदार नहीं होंगे । " ।
१२. मूल अधिनियम की धारा १८ के स्थान में, निम्न धारा रखी जायेगी , अर्थात्: -
सन् १९ ८१ का महा . ५४ की धारा १८ की प्रतिस्थापना ।
अपील तथा अपीलीय प्राधिकरण ।
" १८. ( १ ) न्याय निर्णायक अधिकारी के, किसी आदेश द्वारा व्यथित कोई व्यक्ति जिस दिनांक पर उसे आदेश संसूचित किया है उस दिनांक के तीस दिनों के भीतर , प्रथम अपीलीय प्राधिकारी की अधिकारिता होनेवाले अर्थात् महाराष्ट्र राज्य के मत्स्योद्योग आयुक्त को , ऐसे प्रथम अपील की सुनवाई के लिए , अपील प्रस्तुत करेगा:
परंतु , राज्य सरकार , जब भी आवश्यकता हो राजपत्र में अधिसूचना द्वारा कोंकण राजस्व विभाग में जैसा की अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जा सके ऐसे क्षेत्र के लिये एक या अधिक प्रथम अपीलीय प्राधिकारियों की नियुक्ति कर सकेगी ।
(२) प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के किसी आदेश द्वारा व्यथित कोई व्यक्ति , जिस दिनांक पर उसे आदेश संसूचित किया है उस दिनांक के तीस दिनों के भीतर महाराष्ट्र सरकार को द्वितीय अपील प्रस्तुत कर सकेगा ।
(३ ) उप- धारा ( १ ) और ( २ ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , प्रथम अपीलीय प्राधिकारी या , यथास्थिति , द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी , तीस दिनों के उक्त अवधि के अवसान के पश्चात् कोई अपील स्वीकार कर सकेंगे , यदि उनका यह समाधान हो जाता है कि, अपीलकर्ता को समय में अपील दाखिल करने से पर्याप्त कारणों द्वारा रोका गया या, परंतु, उपर्युक्त दिनांक से साठ दिनों के अवसान के पश्चात् कोई अपील स्वीकार नहीं किया जा सकेगा ।
(४ ) प्रथम अपीलिय प्राधिकारी द्वारा , इस धारा के अधीन कोई अपील , तब तक स्वीकार नहीं की जायेगी जब तक अपीलकर्ता ने , आदेश के विरुद्ध अपील के अधीन देय शास्ति की रकम निक्षेप न की हो:
परंतु , इस निमित्त अपीलीकर्ता द्वारा किए गए किसी आवेदन पर अपीलीय प्राधिकारी, यदि उसकी यह राय होती है कि , इस उप - धारा के अधीन बनाया जानेवाला निक्षेप अपीलकर्ता के लिए असम्य्क कष्ट ११ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर ७ , २०२१ / अग्रहायण १६ , शके १ ९ ४३
है, तो वह लिखित में आदेश द्वारा या तो बिना शर्त के या अधिरोपित करने के लिए जैसा की ठिक समझे जाए ऐसी शर्तों के अध्यधीन, ऐसे निक्षेप के पचास प्रतिशत रकम की अभिमुक्ति प्रदान करेगा ।
(५) उप- धारा ( १ ) या ( २ ) के अधीन किसी अपील की प्राप्ति पर , अपीलीय प्राधिकारी , जिसे वह उचित समझे ऐसी जाँच करने के पश्चात् और संबंधित पक्षकार को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात, आदेश के विरुद्ध अपील की पुष्टि करेगा , उपांतरित करेगा या रद्द करेगा और , -
(क) यदि उप - धारा ( ४ ) के अधीन शास्ति के ज़रिए निक्षेपित राशि अपील प्राधिकारी द्वारा भुगतान किए जाने के लिए निदेशित शास्ति से अधिक है तो अधिक की रकम, या
(ख) यदि अपील प्राधिकारी , अधिरोपित शास्ति का आदेश रद्द करता है , तो शास्ति के ज़रिए निक्षेपित संपूर्ण राशि;
अपीलकर्ता को प्रतिदाय की जायेगी ।
(६ ) प्रथम अपील प्राधिकारी का आदेश, द्वितीय अपील दाखिल नही किया है के मामले में , अंतिम होगा और जब द्वितीय अपील दाखिल किया है के मामले में तब द्वितीय अपील प्राधिकारी का आदेश अंतिम होगा । " ।
सन् १ ९८१ का १३. मूल अधिनियम की धारा १ ९ , अपमार्जित की जायेगी।
महा . ५४ की धारा
१९ का अपमार्जन ।
सन् १ ९ ८१ का
महा . ५४ की धारा १४. मूल अधिनियम की धारा २० में , " अपील बोर्ड " शब्दों के स्थान में उसकी पार्श्व टिप्पणी समेत , जहाँ कहीं वे आए हो , " अपील प्राधिकरण " शब्द रखे जायेंगे ।
२० में संशोधन ।
सन् १ ९ ८१ का
महा. ५४ की धारा
२१ में संशोधन । १५. मूल अधिनियम की धारा २१ में , " एक हजार रुपयों और अधिकतर जुर्माने से जिसे पचास रुपयों तक बढ़ाया जा सकेगा " शब्दों के स्थान में , " दस हजार रुपयों और अधिकतर जुर्माने से जिसे पाँच सौ रुपयों तक बढ़ाया जा सकेगा " शब्द रखे जायेंगे ।
नई धारा २१क का १६. मूल अधिनियम की धारा २१ के पश्चात्, निम्न धारा , निविष्ट की जायेगी, अर्थात्: -
निवेशन । " २१क. कोई भी न्यायालय , अनुज्ञप्ति अधिकारी या प्रवर्तन अधिकार द्वारा की गई लिखित में अपराधों का शिकायत पर को छोडकर इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा । " । संज्ञान ।
सन् १ ९ ८१ का
महा . ५४ की धारा १७. मूल अधिनियम की धारा २३ की, उप- धारा ( १ ) में, " सर्वेक्षण जलयान " शब्दों के स्थान में , " सर्वेक्षण जलयानों, प्रशिक्षण जलयानों या गश्त लगाने वाले जलयान " शब्द रखे जायेंगे ।
२३ में संशोधन । १२
महाराष्ट्रशासन राजपत्र असाधारण भाग सात , डिसेंबर ७ , २०२१/अग्रहायण १६ , शके १ ९ ४३
वक्तव्य ।
महाराष्ट्र समुद्री मछुवाही विनियमन अधिनियम , १ ९ ८१ (सन् १ ९ ८१ का महा. ५४ ) यह महाराष्ट्र राज्य के तटीय सीमा के समुद्र में मछुवाही जलयान द्वारा मछुवाही का विनियमन करने तथा उसे संबंधित या उससे आनुषंगिक मामलों के लिए उपबंध करने के लिए अधिनियमित किया गया है । राज्य सरकार ने , मछुवाही, खास तौर पर पारम्परिक मछुआरों की मछुवाही में जुड़े व्यक्तियों के विभिन्न वर्गों का हित सुरक्षित रखने की जरूरत को ध्यान में लेकर तथा मछली को सुरक्षित रखने और वैज्ञानिक आधार पर मछुवाही विनियमित करने और समुद्र में कानून एवं सुव्यवस्था को बनाए रखने की आवश्यकता को ध्यान में लेने के पश्चात्, मछुवाही का विनियमन करने के लिए उक्त अधिनियम के अधीन राज्य सरकार ने , समय - समय पर, आदेश जारी किए है ।
२. उक्त अधिनियम को अधिनियमित करने को बहुत समय बीत गया है । तहसिलदार के समक्ष मामलों के लंबित रहने में बढ़ोत्तरी होने के कारण किसी निर्णायक अधिकारी के रूप में, यह घोषित करना इष्टकर समझा गया है कि, तहसिलदार के बदले मछुवाही विभाग के किसी अधिकारी को न्याय निर्णायक अधिकारी के रूप में घोषित किया जाये । यह ध्यान में आया है कि, जिला सलाहकार समिति से समय पर सलाह न मिलने के कारण विलंबित होता है । सरकार द्वारा मछुवाही के विनियमन के लिए प्रक्रिया करने का निर्णय , इस अधिनियम में उपबंधित शास्तियाँ उसके अधिनियमित होने से बदली नहीं गई है । उपर्युक्त को देखते हुए , सरकार उक्त अधिनियम के उपबंधों में कतिपय संशोधन करना इष्टकर समझती है ।
३. प्रस्तावित संशोधन की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ यथा निम्न, अर्थात् है: -
(एक) तहसिलदार के बदले न्याय निर्णायक अधिकारी के रूप में , अधिकारिता होनेवाला मत्स्य उद्योग सहायक आयुक्त घोषित करना ;
(दो) नए शब्दों " मछली ", " मछुवाही के साज - सामान " ,", मत्स्योद्योग " कप्तान " यांत्रिक जलयान " मोटरयुक्त जलयान बिना मोटर का जलयान, परिचालक (तांडेल ) " " मालिक " " सम्पोषणीय मछुवाही " को परिभाषित करना ;
(तीन) अध्याय दो के अधीन प्रवर्तन में लाए जानेवाले विनियमन और समन्वयन , मानिटर करने और जिला समिति को सलाह देने , निदेश देने के लिए, राज्य सरकार को सिफारिश करने के लिए राज्य सलाहकार तथा मानिटरिंग समिति के लिए उपबंध करना ;
(चार ) विभिन्न मछुवाही जलयान और मछुवाही के वर्गीकरण के मामले में , नाविक कर्मचारी सदस्यों की संख्या और मछुवाही के साज़ - सामान को विनियमित करना ;
(पाँच) यह उपबंध कि, मछुआरे और उनकी सहकारी संस्था, मछुआरों की सुरक्षा के लिए तथा कानून एवं व्यवस्था के लिए तटवर्ती क्षेत्र पुलिस और मत्स्योद्योग विभाग के अधिकारियों द्वारा जारी कोई अनुदेशों या निदेशनों का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होंगे ;
(छह) मोटरयुक्त या यांत्रिक मछुवाही जलयान के कप्तान या परिचालक ( तांडेल ) को अनुज्ञप्ति देने के लिए उपबंध करना ;
(सात) जलयान पर की वस्तुएँ और उस पर बिठाए गए मछुवाही के साज़ - सामान जब्त करने के लिए उपबंध करना ;
(आठ) मछुवाही में उपर्युक्त जलयानों के विभिन्न प्रकारों के मामले में इस अधिनियम के उपबंधों या किन्ही आदेश या नियम या अनुज्ञप्ति की कोई शर्तों के उल्लंघन के लिए और विनियमों के विभिन्न प्रकारों के उल्लंघन में शास्ति बढ़ाने के लिए उपबंध करना ;
(नौ) अनुज्ञप्ति अधिकारी या रजिस्ट्रेशन अधिकारी के आदेशों के विरुद्ध साथ ही साथ प्रथम अपील प्राधिकारी के रूप में मत्स्य आयुक्त के समक्ष न्याय निर्णायक अधिकारी और द्वितीय अपील प्राधिकारी के रूप में सरकार के आदेशों के विरुद्ध अपील दायर करने के लिये उपबंध करने ;
(दस) अपराधों का संज्ञान लेने के लिए उपबंध करना । १३ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर ७ , २०२१ / अग्रहायण १६ , शके १ ९ ४३
४. चूंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का समाधान हो चुका है कि , ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें, उपर्युक्त प्रयोजनों के लिये , महाराष्ट्र समुद्री मछुवाही विनियमन अधिनियम , १ ९ ८१ में अधिकतर संशोधन करने के लिये सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अतः यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है ।
मुंबई,
दिनांकित १८ नवंबर २०२१ ।
भगत सिंह कोश्यारी , महाराष्ट्र के राज्यपाल ।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से ,
जगदीश गुप्ता, शासन के प्रधान सचिव ।
विजया ल. डोनीकर, भाषा संचालक , महाराष्ट्र राज्य ।
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