RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ७, अंक १८ (३) ] बुधवार, डिसेंबर २२, २०२१/पौष १, शके १९४३ [पृष्ठे ३, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक २९
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय
महाराष्ट्र विधानपरिषद में दिनांक २२ दिसंबर, २०२१ ई. को. पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानपरिषद नियम ११३ के अधीन प्रकाशित किया जाता है :--
L. C. BILL No. V OF 2021.
A BILL
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA ZILLA PARISHADS
AND PANCHAYAT SAMITIS ACT, 1961.
विधानपरिषद का विधेयक क्रमांक ५ सन् २०२१।
महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ में अधिकतर संशोधन करने
संबंधी विधेयक ।
सन् १९६२ का महा. ५।
क्योंकि इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिये, महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ में अधिकतर संशोधन करना इष्टकर है; अत: भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम, अधिनियमित किया जाता हैं :---
संक्षिप्त नाम। १. (१) यह अधिनियम महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति (संशोधन) अधिनियम, २०२१ कहलाये ।
(१)
भाग सात-२९----१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २२, २०२१/पौष १, शके १९४३ सन् १९६२ का महा. ५। २. महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ की धारा ९ की, उप-धारा (१) के, खण्ड (क) में, '' संख्या में पचहत्तर से अधिक नहीं होगी तथा पचास से कम नहीं होगी " शब्दों के स्थान में, '' संख्या में पचासी से अधिक नहीं होगी तथा पचपन से अनिम्न होगी " शब्द रखे जायेंगे ।
सन् १९६२ का महा. ५ की धारा ९ में संशोधन ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २२, २०२१/पौष १, शके १९४३ ३
उद्देश्यों तथा कारणों का वक्तव्य ।
महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ (सन् १९६२ का महा. पाँच) की, धारा ९ यह उपबंध करती है कि, जिला परिषद, राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा, जैसा कि राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अवधारित किया जाए, ऐसी संख्या में पचहत्तर से अधिक न होनेवाले तथा पचपन से कम न होनेवाले, जिले में सीधे निर्वाचक प्रभागों द्वारा चयनित पार्षदों से मिलकर बनेगी, तथापि, इसप्रकार जिला परिषद के प्रादेशिक क्षेत्रों की जनसंख्या और निर्वाचन द्वारा भरी जानेवाली ऐसी जिला परिषदों में सीटों की संख्या के बीच का अनुपात जहाँतक व्यवहार्य हैे संपूर्ण राज्य में एकसमान होगा।
२. सीधे निर्वाचित पार्षदों की अधिकतम संख्या और निम्नतम संख्या में वर्ष १९९० में वृद्धि की गई है। राज्य में, अंतिम तीस वर्षों में, ग्रामीण क्षेत्रों की जनसंख्या में, वृद्धि हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या की वृद्धि को ध्यान में रखकर, जिला परिषद में ग्रामीण जनसंख्या को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना इष्टकर समझा गया है और इसलिए, निर्वाचित पार्षदों की संख्या में वृद्धि करना, जो संख्या में पचासी से अधिक नहीं होंगी तथा पचपन से कम नहीं होगी प्रस्तावित है। इसलिए, महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ की धारा ९ में यथोचित संशोधन करना प्रस्तावित किया गया है।
३. प्रस्तुत विधेयक का आशय उपयर्ुक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है।
मुंबई,
हसन मुश्रीफ,
दिनांकित १६ दिसंबर, २०२१।
ग्राम विकास मंत्री।
(यथार्थ अनुवाद), विजया ल. डोनीकर, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य ।
विधान भवन:
राजेन्द्र भागवत,
मुंबई, दिनांकित २२ दिसंबर, २०२१।
प्रधान सचिव, महाराष्ट्र विधानपरिषद।
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