RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ८, अंक १] सोमवार, फेब्रुवारी २१, २०२२/फाल्गुन २, शके १९४३ [पृष्ठे ४, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक १
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय
नगर विकास विभाग
मंत्रालय, मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरू चौक, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित २ फरवरी २०२२।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. I OF 2022.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MUMBAI MUNICIPAL CORPORATION
ACT; THE MAHARASHTRA EDUCATION AND EMPLOYMENT
GUARANTEE (CESS) ACT, 1962 AND THE MAHARASHTRA (URBAN
AREAS) PROTECTION AND PRESERVATION OF TREES ACT, 1975.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक १ सन् २०२२।
मुंबई नगर निगम अधिनियम ; महाराष्ट्र शिक्षा और रोजगार गारंटी (उपकर) अधिनियम,
१९६२ और महाराष्ट्र (नगरीय क्षेत्रों) वृक्षों का संरक्षण और परिरक्षण अधिनियम, १९७५ में
अधिकतर संशोधन करने संबंधी अध्यादेश।
क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;
(१)
भाग सात--१---१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २१, २०२२/फाल्गुन २, शके १९४३ और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, मुंबई नगर निगम अधिनियम, महाराष्ट्र शिक्षा और रोजगार गारंटी (उपकर) अधिनियम, १९६२ और महाराष्ट्र (नगरीय क्षेत्रों) वृक्षों का संरक्षण और परिरक्षण अधिनियम, १९७५ में अधिकतर संशोधन करने के लिये, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ;
सन् १८८८ का ३। सन् १९६२ का महा. २७। सन् १९७५ का ४४। अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :----
अध्याय एक
प्रारम्भिक
१. (१) यह अध्यादेश मुंबई नगर निगम अधिनियम महाराष्ट्र शिक्षा और रोजगार गारंटी (उपकर) और संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भण ।
महाराष्ट्र (नगरीय क्षेत्रों) वृक्षों का संरक्षण और परिरक्षण (संशोधन) अध्यादेश, २०२२ कहलाए।
(२) यह तुरंत प्रवृत्त होगा ।
अध्याय दो
मुंबई नगर निगम अधिनियम में संशोधन।
२. मुंबई नगर निगम अधिनियम की धारा १४० की,----
सन् १८८८ का ३। सन् १८८८ का ३ की धारा १४० में संशोधन।
(क) उप-धारा (१) के, खण्ड (ग) में, परंतुक और स्पष्टीकरण, अपमर्ाजित किया जायेगा और १ जनवरी २०२२ से अपमर्ाजित किया गया समझा जायेगा।
(ख) उप-धारा १ के पश्चात् निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी और १ जनवरी २०२२ से निविष्ट की गई समझी जायेगी, अर्थात् :----
" (१क) इस धारा में या इस अधिनियम के किन्ही अन्य उपबंधों में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, १ जनवरी २०२२ से नगर निगम ४६.४५ वर्ग मीटर (५०० वर्ग फीट) या उससे कम चटाई क्षेत्र होनेवाले निवासी भवनों या निवासी वासगृहों पर धारा १३९क की, उप-धारा (१) में, विर्िनदिष्ट सम्पत्ति कर का कोई कर उद्ग्रहीत नहीं करेगा । "।
अध्याय तीन
महाराष्ट्र शिक्षा और रोजगार गारंटी (उपकर) अधिनियम, १९६२ में संशोधन।
३. महाराष्ट्र शिक्षा और रोजगार गारंटी (उपकर) अधिनियम, १९६२ की धारा ७ के पश्चात्, निम्न सन् १९६२ का २७। धारा, निविष्ट की जायेगी और १ जनवरी २०२२ से निविष्ट की गई समझी जायेगी, अर्थात् :----
सन् १९६२ का महा. २७ की नवीन धारा ७क का निवेशन।
" ७क. धारा ४ या तत्समय प्रवृत किसी अन्य विधि में अन्र्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, १ जनवरी २०२२ से बृहन्मुंबई नगर निगम, बृहन्मुंबई नगर निगम क्षेत्र में ४६.४५ वर्ग मीटर (५०० वर्ग फीट) या उससे कम चटाई क्षेत्र होनेवाले निवासी भवनों या निवासी वासगृहों पर धारा ४ में विर्िनदिष्ट कर की अदायगी से कतिपय निवासी भवनों या निवासी वासगृहों को छूट।
शिक्षा उपकर का उद्ग्रहण और संग्रहण नहीं करेगा । "।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २१, २०२२/फाल्गुन २, शके १९४३ ३ अध्याय चार
महाराष्ट्र (नगरीय क्षेत्रों) वृक्षों का संरक्षण और परिरक्षण अधिनियम, १९७५ में संशोधन।
सन् १९७५ का महा. ४४।
सन् १९७५ का महा. ४४ की धारा १८ में संशोधन । ४. महाराष्ट्र (नगरीय क्षेत्रोें) वृक्षों का संरक्षण और परिरक्षण अधिनियम, १९७५ की धारा १८ की, उप-धारा (१ख) के पश्चात् निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी और १ जनवरी २०२२ से निविष्ट की गई समझी जायेगी, अर्थात् :----
" (१ख-१) उप-धारा (१) और (१क) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, १ जनवरी २०२२ से, बृहन्मुंबई नगर निगम ४६.४५ वर्ग मीटर (५०० वर्ग फीट) या उससे कम चटाई क्षेत्र होने वाले निवासी भवनों या निवासी वासगृहों पर, बृहन्मुंबई क्षेत्र के नगर निगम में वृक्ष उपकर उद्ग्रहीत या संग्रहीत नहीं किया जायेगा । "।४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २१, २०२२/फाल्गुन २, शके १९४३
वक्तव्य ।
मुंबई नगर निगम अधिनियम (सन् १८८८ का ३) की धारा १४० सम्पत्ित कर के उद्ग्रहण के लिए उपबंध करती है ; जिसमें जल कर, जल लाभ कर, मल जल निकास कर, मल जल निकास लाभ कर, सामान्य कर, शिक्षा उपकर, सड़क कर और सुधार प्रभार शामिल है ; महाराष्ट्र शिक्षा और रोजगार गारंटी (उपकर) अधिनियम, १९६२ (सन् १९६२ का महा. २७) शिक्षा उपकर के उद्ग्रहण और संग्रहण के लिए उपबंध करता है ; और महाराष्ट्र (नगरीय क्षेत्रों) वृक्षों का संरक्षण और परिरक्षण अधिनियम, १९७५ (सन् १९७५ का महा. ४४) वृक्ष उपकर का उद्ग्रहण और संग्रहण का उपबंध करता है।
२. बृहन्मुंबई नगर निगम क्षेत्र में अधिकांश छोटे निवासी वासगृह या निवासी भवन राज्य सरकार और नगर निगम के विभिन्न योजनाअों के अधीन विकसित होनेवाले है, मलिनबस्ती क्षेत्र में रहनेवाले कई लोग ४६.४५ वर्ग मीटर (५०० वर्ग फीट) या उससे कम चटाई क्षेत्र होनेवाले अधिभोगी, छोटे निवासी वासगृहों या निवासी भवनों के स्थायी मकानों में स्थानान्तरित हो गए हैं। वर्तमान में बढ़ती मुद्रास्फीती के कारण, बृहन्मुंबई नगर निगम द्वारा उद्ग्रहीत बढ़ाया हुआ सम्पत्ति कर ऐसे मकानों में रहनेवाले लोंगों के लिए अवहनीय है। कोविड़-१९ महामारी के कारण भी मुंबई शहर के कई कारोबार बंद हो गए हैं और कई लोंगों ने उनकी नौकरी और आजीविका के स्रोत गँवा दिए हैं। इसलिए, सम्पत्ति कर को अदा करना लोगों के लिए मुश्किल हुआ है। यहाँ पर ४६.४५ वर्ग मीटर (५०० वर्ग फीट) या उससे कम निवासी क्षेत्र को सम्पत्ति कर से छूट देने की लोगों से लगातार माँग हो रही है।
बृहन्मुंबई नगर निगम ने ऐसे छोटे निवासी भवनों या निवासी वासगृहों पर सम्पत्ति कर उद्ग्रहीत न करने के लिए, एक संकल्प भी पारित किया है। इसलिए मुंबई नगर निगम अधिनियम की धारा १४० में और महाराष्ट्र (नगरीय क्षेत्रों) वृक्षों का संरक्षण और परिरक्षण अधिनियम, १९७५ की धारा १८ में यथोचित संशोधन करना तथा महाराष्ट्र शिक्षा और रोजगार गारंटी (उपकर) अधिनियम, १९६२ में नई धारा ७क का निविष्ट करना इष्टकर समझा गया है ताकि यह उपबंध किया जा सके कि, १ जनवरी २०२२ से बृहन्मुंबई नगर निगम, ४६.४५ वर्ग मीटर (५०० वर्ग फीट) या उसे कम चटाई क्षेत्र होनेवाले निवासी भवनों या निवासी वासगृहों पर, सम्पत्ति कर का कोई कर उद्ग्रहीत नहीं करेगा।
३. चूँकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चूका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें, इसमें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए, मुंबई नगर निगम अधिनियम ; महाराष्ट्र शिक्षा और रोजगार गारंटी (उपकर) अधिनियम, १९६२ और महाराष्ट्र (नगरीय क्षेत्रोें) वृक्षों का संरक्षण और परिरक्षण अधिनियम, १९७५ में अधिकतर संशोधन करने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अतः यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है ।
मुंबई, दिनांकित १ फरवरी २०२२।
भगत सिंग कोश्यारी, महाराष्ट्र के राज्यपाल।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,
महेश पाठक,
सरकार के प्रधान सचिव।
(यथार्थ अनुवाद), विजया ल. डोनीकर, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
शासकीय मध्यवर्ती मुद्रणालय, मुंबई.