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Maharashtra Gazette · Government of Maharashtra

भाग सात असा. क्र. ६ (२४-०३-२०२२) विधानपरिषद का विधेयक ३ सन् २०२२ ।

Published 24 March 2022

Type
Extra - Ordinary
Part
Part 7 (Hindi)
Division
CENTRAL SECTION
Identifier
in.gazette.maharashtra.2022-03-24.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-
Languages
English, Marathi

RNI No. MAHBIL /2009/31730

सत्यमेवजयते

महाराष्ट्र शासन राजपत्र

असाधारण भाग सात

वर्ष ८ , अंक ६ ]

गुरुवार, मार्च २४ , २०२२/चैत्र ३ , शके १ ९ ४४ [पृष्ठे २० , किंमत : रुपये ४७.००

असाधारण क्रमांक ६

प्राधिकृत प्रकाशन

अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी )

महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय

महाराष्ट्र विधानपरिषदमे दिनांक २४ मार्च २०२२ ई . को . पुरःस्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानपरिषद नियम ११३ के अधीन प्रकाशित किया जाता है : -

L. C. BILL No. III OF 2022 .

A BILL TO PROVIDE FOR ESTABLISHMENT , INCORPORATION AND REGULATION OF THE DR . P. A. INAMDAR UNIVERSITY , PUNE FOR THE DEVELOPMENT AND ADVANCEMENT OF HIGHER EDUCATION IN THE STATE OF MAHARASHTRA AND FOR MATTERS CONNECTED THEREWITH OR INCIDENTAL THERETO .

विधानपरिषद का विधेयक क्रमांक ३ सन् २०२२ ।

महाराष्ट्र राज्य में उच्चतर शिक्षा, के विकास और उन्नति के लिए डॉ. पी. ए. इनामदार विश्वविद्यालय, पुणे की स्थापना, निगमन और विनियमन के लिए उपबंध करने तथा तत्संबंधी या उससे आनुषंगिक मामलों के लिये उपबंध करने संबंधी विधेयक ।

क्योंकि इसमें आगे दर्शित प्रयोजनों के लिए , महाराष्ट्र राज्य में उच्चतर शिक्षा के विकास और उन्नति के लिए डॉ. पी . ए . इनामदार विश्वविद्यालय , पुणे विश्वविद्यालय की स्थापना, निगमन और विनियमन के लिए उपबंध करने तथा तत्संबंधी या उससे आनुषंगिक मामलों के लिये उपबंध करना इष्टकर है; इसलिए , भारत गणराज्य के तिहत्तरवें वर्ष में , एतद्वारा , निम्न अधिनियम बनाया जाता है : -

(१)

भाग सात- ६-१ २

महाराष्ट्रशासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २४ , २०२२/चैत्र ३ , शके १ ९ ४४

१ . ( १ ) यह अधिनियम डॉ. पी. ए. इनामदार विश्वविद्यालय , पुणे अधिनियम, २०२२ कहलाए । संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभण ।

( २ ) यह ऐसे दिनांक से प्रवृत्त होगा जिसे राज्य सरकार , राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करें ।

परिभाषाएँ ।

२. इस अधिनियम में , जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो , -

(क) " अनुबद्ध प्राध्यापक , अनुबद्ध सहयुक्त प्राध्यापक या अनुबद्ध सहायक प्राध्यापक " का तात्पर्य , कोई व्यक्ति उद्योग, व्यापार , कृषि, वाणिज्य, सामाजिक सांस्कृतिक, अकादमिक या किसी अन्य सहबद्ध क्षेत्र से है , जो विश्वविद्यालय के सहयोगी या सहयुक्त की अवधि के दौरान इस प्रकार पदाभिहित किया है, से है ;

(ख ) " प्राधिकरण " का तात्पर्य , इस अधिनियम के द्वारा या अधीन यथा विनिर्दिष्ट किये गये विश्वविद्यालय के प्राधिकरणों से है ;

(ग) " प्रबंध मंडल बोर्ड " का तात्पर्य , इस अधिनियम की धारा २२ के अधीन गठित किये गये प्रबंधमंडल बोर्ड से है ;

( घ) " परिसर " का तात्पर्य , विश्वविद्यालय का वह क्षेत्र जिसके अधीन वह स्थापित किया गया है ;

(ङ) " उत्कर्षता केंद्र " का तात्पर्य , छात्रों, सेवांतर्गत कर्मचारियों, कार्यरत व्यावसायिकों की सुसंगत कौशल के सभी प्रकार मुहैय्या करने के लिये , उद्योग से सहयोग में स्थापित अद्यावत प्रशिक्षण या अनुसंधान केंद्र या उद्योग या समाज के लाभ के लिये और संयुक्त परियोजना हाथ लेने के लिये स्थापित से है;

(च) " दूरस्थ और ऑनलाईन शिक्षा " का तात्पर्य , संसूचना के किन्ही दो या अधिक साधनों के समुच्चय द्वारा , जैसे , प्रसारण , दूरदर्शन प्रसारण , पत्राचार पाठ्यक्रम , सेमिनार , संपर्क कार्यक्रम तथा किन्हीं अन्य ऐसी प्रणाली विज्ञान द्वारा प्रदान की गई शिक्षा से है ;

(छ) " कर्मचारी " का तात्पर्य , विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति से है और इसमें विश्वविद्यालय के अध्यापक, अधिकारी तथा अन्य कर्मचारी शामिल होंगे ;

(ज) " फीस " का तात्पर्य , विश्वविद्यालय या उसके महाविद्यालयों , संस्थांओं या , यथास्थिति, अध्ययन केंद्रों , द्वारा किया गया धनीय संग्रहण , जिसे किसी भी नाम से पुकारा जाए , छात्रों से किया गया से है , जो प्रत्यर्पणीय नहीं है ;

राज्य सरकार

(झ) सरकार " या "

कार " का तात्पर्य, महाराष्ट्र सरकार से है ;

(ञ ) " शासी निकाय " का तात्पर्य , इस अधिनियम की धारा २१ के अधीन गठित किये गये शासी निकाय से है ;

(ट) " उच्चतर शिक्षा " का तात्पर्य , उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिक्षा के स्तर पर अध्ययन से परे ज्ञान का अनुसरण करने से है ;

(ठ) " छात्रावास " का तात्पर्य, विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए आवास का स्थान, या विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित किये गये या मान्यताप्राप्त ऐसी उसकी संस्थाएँ तथा अध्ययन केंद्रों से है ;

(ड) " अधिसूचना " का तात्पर्य , राजपत्र में प्रकाशित की गई अधिसूचना से है ;

(ढ) " राजपत्र "पत्र " का तात्पर्य, महाराष्ट्र सरकार के राजपत्र से है ;

(ण) " विहित " का तात्पर्य , इस अधिनियम द्वारा बनाये गए या के अधीन परिनियमों या आर्डिनेन्सों, विनियमों या, यथास्थिति, नियमों द्वारा विहित किये गये से है ;

(त ) " अध्यक्ष या कुलाधिपति " का तात्पर्य , विश्वविद्यालय के कुलाधिपति से है ;

( थ ) " विनियमित निकाय " का तात्पर्य , उच्चतर शिक्षा के अकादमिक मानक सुनिश्चित करने के लिए मानक और शर्ते अधिकथित करने के लिए , केंद्र सरकार द्वारा स्थापित निकाय से है , जैसे कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग , अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद , भारतीय चिकित्सा परिषद , भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद , राष्ट्रीय निर्धारण तथा प्रत्यायन परिषद, भारतीय कृषक अनुसंधान परिषद, दूरस्थ शिक्षा परिषद , भारतीय वैज्ञानिक और अनुसंधान परिषद , आदि और इसमें सरकार भी सम्मिलित है ;

(द ) " नियम " का तात्पर्य , राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों से है ;

३ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २४, २०२२ /चैत्र ३ , शके १ ९ ४४

(ध) " धारा " का तात्पर्य , इस अधिनियम की धारा से है ;

सन् १९ ५०

का २ ९ ।

सन् १८६०

(न) " प्रायोजक निकाय " का तात्पर्य , संस्था रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, १८६० के अधीन संस्था के रूप में रजिस्ट्रीकृत महाराष्ट्र कास्मोपोलिटीन एज्यूकेशन सोसायटी , २३ ९ ० - बी, के . बी. हिदायतुल्ला मार्ग, आझम कॅम्पस , कॅम्प पुणे में रजिस्ट्रीकृत कार्यालय होगा ।

का २१ ।

(प ) " राज्य " का तात्पर्य , महाराष्ट्र राज्य से है ;

(फ) " परिनियम " , " आर्डिनन्सो " तथा " विनियमों " का तात्पर्य , क्रमशः इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विश्वविद्यालय के परिनियमों , आर्डिनन्सों तथा विनियमों से है ;

(ब) " छात्र " का तात्पर्य, विश्वविद्यालय में नामांकन किए गए व्यक्ति से है, जिसने विश्वविद्यालय द्वारा संस्थित उपाधि , डिप्लोमा या अन्य अकादमिक विशेषताओं के पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया हो , इसमें अनुसंधान उपाधि भी सम्मिलित होगी ;

(भ) " अध्ययन केन्द्र " का तात्पर्य, विश्वविद्यालय द्वारा सलाह , परामर्श के प्रयोजन के लिये या दूरस्थ शिक्षा के संदर्भ में छात्रों द्वारा अपेक्षित कोई अन्य किसी सहायता देने के लिये स्थापित और पोषित या मान्यता प्राप्त केन्द्र से है ;

(म) " अध्यापक " का तात्पर्य , प्राध्यापक , सहयोगी प्राध्यापक , सहायक प्राध्यापक या सहयुक्त प्राध्यापक या कोई अन्य व्यक्ति जिससे विश्वविद्यालय की शिक्षा प्रदान करना या अनुसंधान में मार्गदर्शन करना या पाठ्यक्रमानुसार अध्ययन करने के लिए छात्रों को किसी भी प्ररूप में मार्गदर्शन देना अपेक्षित है ;

(य) " विश्वविद्यालय " का तात्पर्य , डॉ . पी . ए. इनामदार विश्वविद्यालय , पुणे से है ।

३. (१ ) डॉ . पी . ए. इनामदार विश्वविद्यालय , पुणे के नाम से एक विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा । निगमन । ( २ ) अध्यक्ष , कुलपति , शासी निकाय , प्रबंधन बोर्ड, अकादमिक परिषद और अन्य समस्त व्यक्ति जो इसके बाद ऐसे अधिकारी बनेंगे या ऐसे पद पर रहेंगे या सदस्यत्व निरंतर धारण करेंगे , वे सभी, एतद्वारा , " डॉ. पी . ए . इनामदार विश्वविद्यालय , पुणे " के नाम द्वारा निगमित निकाय गठित और घोषित होंगे " ।

( ३ ) विश्वविद्यालय का शाश्वत उत्तराधिकार तथा सामान्य मुद्रा होगी और उक्त नाम द्वारा वाद चलाएगी और उस पर वाद चलाया जाएगा ।

( ४ ) विश्वविद्यालय , इस अधिनियम के अधीन स्थापित किये गये असहबद्ध विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करेगा और यह किसी अन्य महाविद्यालय या संस्था को उसमें प्रवेशित छात्रों को उपाधि , डिप्लोमा या प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए सहबद्ध नहीं होगा ।

(५ ) विश्वविद्यालय और उसका मुख्यालय डॉ. पी . ए. इनामदार विश्वविद्यालय , २३ ९ ० - बी , के. बी. हिदायतुल्ला मार्ग , आझम कॅम्पस, कॅम्प, पुणे , महाराष्ट्र ४११००१ में स्थित होगा ।

विश्वविद्यालय के उद्देश्य निम्नअनुसार होंगे, - ४.

विश्वविद्यालय का (क) उच्चतर तथा तकनीकी शिक्षा में अध्ययन , अध्यापन , क्षमता , सामर्थ्य तथा कुशलता विकास और अनुसंधान और विकास जिसमें लिबरल आर्ट , मानविकी सामाजिक विज्ञानों , जीव विज्ञानों तथा जैवप्रौद्योगिकी , नॅनो - विज्ञानों और प्रौद्योगिकी , वृत्तिक शाखाओं , जैसे कि इंजीनियरिंग , प्रौद्योगिकी, प्रबंधन , कारोबार तथा वाणिज्य, अनुप्रयुक्त तथा रचनात्मक कलाएँ , व्यावसायिक शिक्षा , मिडिया, सूचना एवं संसूचना, प्रौद्योगिकी तथा शिक्षा और उनकी आंतर- शाखीय पाठ्यक्रम और विकास का भी समावेश है , के उपबंध करना ; उद्देश्य । (ख) उच्चतर तथा तकनीकी शिक्षा में अनुदेश , अध्यापन तथा प्रशिक्षण का उपबंध करना , कला, क्रीड़ा , संस्कृति, फिल्म , अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी , समुद्री अनुसंधान तथा अनुसंधान के लिए उपबंध करना ;

(ग) ज्ञानात्मक , भावात्मक तथा क्रियात्मक ( दिमाग , दिल और हाथ ) क्षमताओं का उच्चतर स्तर निर्माण करना ;

(घ) बौद्धिक क्षमताओं का उच्चतर स्तर निर्माण करना ;

(ङ) विकास के नए मार्गों के अविष्कार तथा सामाजिक पुनर्निर्माण तथा परिवर्तन के लिए सर्जनात्मकता , नविनता और उद्योग उपक्रम के नए शैक्षिक कार्यक्रमों की निर्मिति तथा अभिनियोजित करना ;

भाग सात-६-१अ ४

महाराष्ट्रशासन राजपत्र असाधारण भाग सात , मार्च २४ , २०२२ /चैत्र ३, शके १९ ४४

(च) शिक्षा तथा विकास के लिए अद्यतन सुविधाएँ संस्थित करना ;

(छ ) अध्यापन तथा अनुसंधान कार्यान्वित करना तथा निरंतर गुणवत्ता शिक्षा कार्यक्रम प्रस्तावित करना ;

(ज ) विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी और सामाजिक- आर्थिक विकास में अनुसंधान और विकास के लिए तथा ज्ञान बाँटने और उसके उपयोजन के लिए उत्कर्ष केंद्रों की निर्मिति करना ;

(झ) अध्ययन , अध्यापन, अनुसंधान, मूल्यांकन, विकास तथा संगठन के शासन और प्रबंधन के लिए आधुनिक और आधुनिकोत्तर प्रक्रियाएँ , यंत्र- क्रिया तथा प्रौद्योगिकी का प्रयोग करना तथा २१ वी सदी में व्यक्ति तथा समाज के लिए सामाजिक- आर्थिक सम्पत्ति की निर्मिति करना ;

कराना ; (ञ) उद्योग तथा सार्वजनिक संगठन तथा समाज को वृत्तिक तथा विकासात्मक सेवाओं का उपबंध करना ; ( ट) नवप्रवर्तक दृष्टिकोण के साथ नए तथा प्रकट क्षेत्रो में उच्चतर शिक्षा कार्यक्रम , पाठ्यक्रम शुरू (ठ) भारत और विदेश में के अन्य उच्चतर शिक्षा तथा अनुसंधान संस्थाओं के साथ संबंध , सहयोग तथा भागीदारी संस्थित करना ;

(ड) परीक्षाएँ या अन्य किसी मूल्यांकन पद्धतियों के आधार पर उपाधियाँ , डिप्लोमाएँ, प्रमाणपत्र तथा अन्य अकादमिक विशेषताएँ गठित करना ;

(ढ) रचनात्मक तथा ठेकेदारी के पालन पोषण और परिष्कार के लिए अकादमिक संरचनाएँ, अध्ययन पद्धतियों का ढाँचा , और कामकाज तथा निरंतन मूल्यांकन प्रक्रियाओं में सीवनहीनता की निर्मिति के लिए नवप्रवर्तक दृष्टिकोण को संस्थित करना ;

(ण ) सरकार द्वारा सुझाए गए कोई अन्य उद्देश्य जारी रखना ;

१९९ ३ का

१९ ५६का (त) विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त किए गए उपाधि , डिप्लोमाएँ , प्रमाणपत्र तथा अन्य अकादमिक विशेषताओं का स्तर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद या राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षण परिषद अधिनियम , सन् १ ९९ ३ के अधीन स्थापित राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद या विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम , १९ ५६ के अधीन गठित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या आयुर्विज्ञान अधिनियम, १ ९ ४८ के अधिन गठित सन् भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद या अधिवक्ता अधिनियम , १ ९ ६१ के अधीन गठित भारतीय बार परिषद, या , यथास्थिति , किसी अन्य कानूनी निकाय द्वारा अधिकथित से कम नहीं है, सुनिश्चित करना ।

१९ ४८ का

१९ ६१ का

७३ । ३। सन् ८। सन् २५। ५. विश्वविद्यालय की, निम्न शक्तियाँ और कृत्य होंगे , अर्थात्: -

विश्वविद्यालय की शक्तियाँऔर कृत्य ।

( एक ) अध्ययन , अध्यापन तथा अनुसंधान संबंधी, परम्परागत के साथ नए नवप्रवर्तक पद्धतियों , जिनमें ऑनलाईन शिक्षा पद्धति सम्मिलित है , के माध्यम से दिए जानेवाले पाठ्यक्रमों से संबंधित उपबंध करना तथा सभी उपायों (जिसमें पाठ्यक्रम को अपनाना तथा अद्यतन करना सम्मिलित है ) को अपनाना ;

(दो) उपाधियाँ, डिप्लोमाएँ प्रमाणपत्र , बक्षिस , श्रेणियाँ , प्रत्यय तथा अकादमिक विशेषताओं को संस्थितऔर प्रदान करना ;

(तीन) परीक्षाएँ संचालित तथा धारण करना ;

(चार ) अन्य मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालयों , बोडों या परिषदों की उपाधियाँ , डिप्लोमाएँ , प्रमाणपत्रों के समतुल्य तथा समरूप उपाधियों , डिप्लोमाओं , प्रमाणपत्रों के लिए उपबंध करना ;

५ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २४, २०२२ /चैत्र ३ , शके १ ९ ४४

(पाँच ) परिसरों की स्थापना के लिए सभी आवश्यक उपाय करना ;

करना ; (छह) केंद्रीय पुस्तकालय , विभागीय पुस्तकालयों, संग्रहालयों तथा सहबद्ध विषयों की स्थापना (सात) मानद उपाधियाँ, जैसा कि विहित किया गया है , को संस्थित करना और प्रदान करना ;

(आठ ) विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार फेलोशिप, छात्रवृत्ति , अध्येतावृत्ति संस्थित तथा अधिनिर्णित करना;

(नौ) समाज के शैक्षणिक रूप से पिछडे स्तर में , शैक्षणिक सुविधाओं को फैलाने के लिए विशेष उपाय करना ;

(दस) क्रीड़ा तथा अन्य पाठ्येतर क्रियाकलापों को बढ़ावा देना तथा प्रवर्तन करना ;

करना ; (ग्यारह ) तकनीकी, प्रशासनिक तथा अन्य आवश्यक पदों का सृजन करना तथा उसमें नियुक्तियाँ (बारह) पारस्पारिक प्रतिग्राह्य शर्ते और निबंधनों पर अनुसंधान परियोजनाओं का जिम्मा लेना ;

(तेरह) परामर्शी सेवाओं का उपबंध करना ;

(चौदह) इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार , विश्वविद्यालय के उद्देश्यों को कार्यान्वित करने के लिए परिनियमों, आर्डिनन्सों , नियमों तथा विनियमों को विरचित करना ;

( पंद्रह ) विश्वविद्यालय के शिक्षक , छात्र तथा कर्मचारी के व्यक्तित्व विकास के लिए पाठ्यक्रमेतर गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा प्रवर्तन करना ;

(सोलह) राज्य सरकार , भारत सरकार तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुदेशों के अनुसार , व्यतिकारी के आधार पर देश के भीतर या बाहर अन्य विश्वविद्यालयों के मुकाबले में दोहरी उपाधियाँ , डिप्लोमाओं या प्रमाणपत्रों का उपबंध करना ;

(सत्रह ) विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रमों में विभिन्न शाखाओं में एकात्मिक पाठ्यक्रमों के लिए ऐसे उपबंधों की निर्मिति करना ;

( अठारह) राज्य सरकार , केंद्र सरकार तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा समय - समय पर जारी किए गए निदेशों के अनुसार केवल राज्य के भीतर महाविद्यालयों , संस्थाओं और परिसर मुक्त केंद्रों को स्थापित करना ;

(उन्नीस) दान , बक्षिस और अनुदान , प्राप्त करना तथा किसी सम्पत्ति को जंगम या स्थावर, जिसमें राज्य के भीतर या बाहर के न्यास या विन्यास सम्पत्ति सम्मिलित है , विश्वविद्यालय के प्रयोजनों तथा उद्देश्यों के लिए अर्जित , धारण , प्रबंध तथा निपटान करना तथा निधि निवेशित करना ;

(बीस ) इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार , विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए, समय - समय पर फीस संरचना विहित करना ;

(इक्कीस) ऐसे फीसों तथा अन्य प्रभार जैसा कि समय - समय पर विनिर्दिष्ट किया गया हों , के भुगतान की माँग तथा प्राप्त करना ;

(बाईस) पारस्परिक ग्राह्य शर्तों और निबंधनों पर अन्य संस्थाओं से सहयोग लेना ;

(तेईस) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा अन्य विनियमित निकायों द्वारा विनिर्दिष्ट मानकों के अनुसार विश्वविद्यालय के शिक्षकों तथा कर्मचारियों का वेतन, पारिश्रमिक , मानदेय अवधारण करना ;

(चौबीस) अतिरिक्त बाह्य अध्यापन तथा विस्तार सेवाओं का आयोजन करना और उपक्रमित करना ;

(पच्चीस) हॉल तथा छात्रावासों को स्थापित तथा पोषित करना ;

६

महाराष्ट्रशासन राजपत्र असाधारण भाग सात , मार्च २४ , २०२२ /चैत्र ३, शके १९ ४४

(छब्बीस) विश्वविद्यालय द्वारा रखरखाव न किये गये , हॉल और छात्रावासों और अन्य वास- सुविधाओं को छात्रों के आवास के लिए मान्यता देना , पर्यवेक्षण तथा नियंत्रण करना और किसी ऐसी मान्यता वापस लेना;

( सत्ताईस ) विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों के बीच अनुशासन विनियमित तथा प्रवर्तित कराना और ऐसे अनुशासनात्मक उपाय करना जैसा वह आवश्यक समझे ;

( अट्ठाईस ) विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य तथा साधारण कल्याण को बढ़ावा देने के लिए व्यवस्था करना ;

(उनतीस) देश के भीतर के या बाहर के अन्य किसी विश्वविद्यालय , प्राधिकरण या संगठन या किसी सार्वजनिक या निजी निकाय से उस विश्वविद्यालय के उसी प्रकार के प्रयोजनों तथा उद्देश्यों को बढ़ावा देने की दृष्टि से , ऐसे प्रयोजनों के लिए , जैसी करार पायी जाए , तथा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो विनिर्दिष्ट की जाए , सहयोग करना ;

(तीस ) विश्वविद्यालय द्वारा जारी किये गये अनुसंधान तथा अन्य कार्य , जिसमें पाठ्य - पुस्तकें सम्मिलित है , के मुद्रण , पुनर्मुद्रण तथा प्रकाशन के लिए उपबंध करना ;

( इकतीस ) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ( निजी विश्वविद्यालय में मानकों की स्थापना तथा रखरखाव ) विनियमों, २००३ या अन्य किन्ही विनियमों के उपबंधों या विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी किये गए निर्देशनों का समय - समय से अनुपालन तथा अनुसरण करना ;

( बत्तीस ) राज्य सरकार द्वारा , समय - समय पर जारी किये गए निदेशों का, विश्वविद्यालय की उपर्युक्त शक्तियाँ , कर्तव्यों तथा जिम्मेदारियों के संदर्भ में, अनुपालन करना तथा कार्यान्वित करना ;

(तेंतिस ) ऐसे सभी कृत्य करना जिसे विश्वविद्यालय के सभी या किन्ही उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये आनुषंगिक या सहायक हो ;

विश्वविद्यालय

सब के लिए खुला रहेगा ।

६. ( १ ) भारत का कोई भी नागरिक , सिर्फ लिंग , धर्म , पन्थ , वर्ग , जाति, जन्मस्थान , धार्मिक मान्यता या व्यवसाय या राजनीतिक या अन्य मत के आधार पर विश्वविद्यालय के किसी पद या उसके किसी प्राधिकरणों, निकायों या समितियों के सदस्यत्व या किसी पद पर की नियुक्ति , या किसी उपाधि, डिप्लोमा , प्रमाणपत्र या अन्य अकादमिक विशेष योग्यता या अध्ययन के पाठ्यक्रम में प्रवेश पाने के लिए अपवर्जित नहीं किया जाएगा । ( २ ) विश्वविद्यालय , विश्वविद्यालय विभागों , और संस्थाओं में छात्रों के प्रवेश के प्रयोजनार्थ , अनुसूचित जातियों , अनुसूचित जनजातियों , निरधिसूचित जनजातियों ( विमुक्त जातियों) , खानाबदोष जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों और विशेष पिछड़े प्रवर्गों , सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछडे नागरिकों के वर्गों ( एसइबीसी) और आर्थिक कमजोर वर्गों (इडब्लूएस ) के आरक्षण के संबंध में सरकारी नीति तथा समय - समय पर जारी आदेशों को अंगीकृत करेगा ।

( ३ ) विश्वविद्यालय, राज्य सरकार द्वारा समय - समय पर यथा निर्देशित, समाज के गरीब वर्गों तथा अल्पसंख्यकों के विभिन्न संवर्गों के कल्याण के संदर्भ में , राज्य सरकार की साधारण नीति को अंगीकृत करेगा । विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित

७. विश्वविद्यालय , स्ववित्तपोषित होगा तथा सरकार से कोई अनुदान या अन्य वित्तीय सहायता पाने का हकदार नहीं होगा ।

होगा।

विन्यास निधि। ८. (१ ) प्रायोजित निकाय , विश्वविद्यालय के लिए , " विन्यास निधि " नामक एक स्थायी कानूनी निधि स्थापित करेगी, जिसमें कम से कम दस करोड़ रुपये समाविष्ट होंगे जिसे स्व-प्रेरणा से बढ़ाया जा सकेगा, परन्तु कम नहीं किया जायेगा ।

( २ ) विन्यास निधि, इस अधिनियम या नियमों , विनियमों, परिनियमों या तद्धीन बनाये गये ऑर्डिनेन्स के उपबंधों के कडाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा निक्षेप के रूप में रखी जायेगी । ७ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २४ , २०२२/चैत्र ३ , शके १ ९ ४४

(३ ) सरकार को, इस अधिनियम के उपबंधों , नियमों , परिनियमों , ऑर्डिनेन्सों या तद्धीन बनाये गये विनियमों का उल्लंघन विश्वविद्यालय या प्रायोजक निकाय के मामले में, विन्यास निधि का अंशतः या संपूर्ण भाग विहित रीत्या समपहृत करने की शक्ति होगी ।

( ४ ) विन्यास निधि से आय , विश्वविद्यालय की मुलभूत सुविधा के विकास के लिए उपयोग में लाया जाएगा किंतु , विश्वविद्यालय के आवर्ती व्यय को पूरा करने के लिए उपयोग में नहीं लाया जाएगा ।

(५ ) विन्यास निधि की राशि, विनिहित रखी जाएगी , जब तक विश्वविद्यालय का विघटन नहीं होता है तब तक, सरकार द्वारा प्राप्त या प्रत्याभूत दीर्घकालिक सुरक्षा के रूप में शर्त के अध्यधीन यह निधि सरकार की अनुमति के बिना , नहीं निकाली जाएगी ।

(६ ) दीर्घकालिक सुरक्षा के प्रमाणपत्र , सरकार की सुरक्षित अभिरक्षा में रखे जाएँगे ; तथा सरकार को, उप- धारा ( ३ ) में उल्लिखित प्रयोजनों के लिए , जमा राशि भुनाने का अधिकार होगा ।

९ . विश्वविद्यालय , साधारण निधि के नाम से एक निधि स्थापित करेगा , जिसमें निम्न , जमा किया साधारण निधि । जाएगा , अर्थात्: -

(एक) विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त फीस और अन्य प्रभारों ;

(दो) प्रायोजक निकाय द्वारा किया गया कोई अंशदान ;

(तीन) विश्वविद्यालय द्वारा परामर्श से तथा हाथ में लिए गए , अन्य कार्य से प्राप्त कोई आय ;

(चार ) वसीयतों , दान, विन्यासों , तथा कोई अन्य अनुदान , तथा ;

(पाँच) विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त सभी अन्य राशियाँ ।

१०. ( १ ) सामान्य निधि का उपयोग , विश्वविद्यालय के कामकाज के संबंध में सभी व्यय जिसमें सामान्य निधि का आवर्ती या अनावर्ती व्यय पूरा करने के लिए किया जायेगा : उपयोग । परन्तु , इस वर्ष के लिए कुल आवर्ती व्यय और कुल अनावर्ती व्यय के लिये सीमाओं के अधिक में व्यय विश्वविद्यालय द्वारा उपगत नहीं किया जायेगा, जिसे प्रबंधमंडल बोर्ड के पूर्वानुमोदन के बिना , प्रबंधमंडल बोर्ड द्वारा नियत किया जा सकेगा ।

विश्वविद्यालय के

होंगे , अर्थात्: -

११. विश्वविद्यालय के , निम्न अधिकारी

अधिकारी । (एक ) अध्यक्ष जो कुलाधिपति भी होगा ;

(दो) कुलपति ;

(तीन) संकायाध्यक्ष ;

(चार ) रजिस्ट्रार ;

(पाँच) मुख्य वित्त तथा लेखाधिकारी ;

(छह) परीक्षा नियंत्रक ; और

(सात) विश्वविद्यालय सेवा में ऐसे अन्य अधिकारी जिन्हें परिनियमों द्वारा विश्वविद्यालय के अधिकारियों के रूप में घोषित किया जाए ।

१२. ( १ ) अध्यक्ष, नियमों द्वारा विहित किया जाए ऐसी रीत्या सरकार के अनुमोदन से तीन वर्षों अध्यक्ष । की अवधि के लिए प्रायोजित निकाय द्वारा नियुक्त किया जायेगा ।

(२ ) अध्यक्ष के पद के लिए पात्रता मापदण्ड जैसा कि, राज्य सरकार द्वारा जारी किये गये नियमों द्वारा विहित किये जायेंगे ।

( ३ ) अध्यक्ष , विश्वविद्यालय का प्रमुख होगा ।

(४) अध्यक्ष, शासी निकाय की बैठकों और उपाधि , डिप्लोमा या अन्य अकादमिक विशिष्ट उपाधियाँ प्रदान करने के लिए होनेवाले विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता करेगा ।

(५ ) अध्यक्ष को , निम्न शक्तियाँ प्राप्त होंगी , अर्थात्: -

(क ) विश्वविद्यालय के कामकाज से संबंधित विश्वविद्यालय किसी अधिकारी या प्राधिकारी से कोई जानकारी या अभिलेख मांगना ;

८

महाराष्ट्रशासन राजपत्र असाधारण भाग सात , मार्च २४ , २०२२ /चैत्र ३, शके १९ ४४

( ख ) कुलपति की नियुक्ति करना ;

(ग) धारा १४ की , उप- धारा ( ७ ) के उपबंधों के अनुसरण में, कुलपति को हटाना;

(घ) ऐसी अन्य शक्तियाँ जैसा परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ।

अध्यक्ष को हटाना ।

१३ . अध्यक्ष को, प्रायोजक निकाय द्वारा उसके पद से हटाया जा सकेगा , यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि पदधारी ,-

(क) विकृत चित्त का है और सक्षम न्यायालय द्वारा , उसे इस प्रकार घोषित ठहराया गया है ; या

(ख) नैतिक अधमता से अन्तर्ग्रस्त किसी अपराध के लिए न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध ठहराया गया है ; या

(ग ) अनुन्मोचित दिवालिया हो गया है और सक्षम न्यायालय द्वारा इस प्रकार घोषित किया गया है ; या

( घ ) शारीरिक रूप से अनुपयुक्त है और दीर्घकालिन बीमारी या शारीरिक विकलांगता के कारण कार्य या पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में असमर्थ है ; या

(ङ) इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने में जानबूझकर छोड देता है या अस्वीकार करता है और सेवा संविदा के किन्ही निबन्धनों और शर्तों का या परिनियमों द्वारा अधिकथित किन्ही अन्य शर्तों का उल्लंघन करता है या उसमें निहित शक्तियों का दुरुपयोग करता है या अध्यक्ष को पद पर बनाए रखने से विश्वविद्यालय के हित पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है :

परन्तु , अध्यक्ष को, उक्त पद से हटाने के लिए , खंड ( घ) और ( ङ) के अधीन कार्यवाही का सहारा लेने के पूर्व प्रायोजक निकाय द्वारा कारण दर्शाने का युक्तियुक्त अवसर दिया जायेगा । कुलपति । १४. ( १ ) कुलपति , शासी निकाय द्वारा गठित किये गये तीन व्यक्तियों के पैनल से परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जायेगा और उप- धारा ( ७ ) में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अध्यधीन तीन वर्षों की अवधि के लिए पद धारण करेगा :

परन्तु, तीन वर्षों की अवधि के अवसान के बाद, कुलपति , अगली तीन वर्षों की अवधि के लिए पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र होगा :

परन्तु आगे यह कि, कुलपति, अपने पद के अवसान के बाद भी , नवीन कुलपति के पदभार ग्रहण करने तक पद पर बना रहेगा, तथापि , किसी मामले में , यह अवधि , एक वर्ष से अधिक नहीं होगी।

( २ ) कुलपति, विश्वविद्यालय का प्रमुख कार्यपालक और अकादमिक अधिकारी होगा और उसकी विश्वविद्यालय के कामकाज पर संपूर्ण अधीक्षण की शक्तियाँ होगी और नियंत्रण रखेगा और विश्वविद्यालय के विभिन्न प्राधिकरणों के विनिश्चयों को निष्पादित करेगा ।

(३ ) कुलपति, अध्यक्ष की अनुपस्थिति में विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता करेगा। ( ४ ) यदि , कुलपति की राय में, ऐसे किसी मामले में जिसके लिए इस अधिनियम द्वारा या के अधीन किसी अन्य प्राधिकरणों को शक्तियाँ प्रदान की गई है , सद्य कार्यवाही करना आवश्यक है तो, वह ऐसी कार्यवाही कर सकेगा जैसा कि वह आवश्यक समझे और तत्पश्चात्, शीघ्रतम अवसर पर अपनी कार्यवाही रिपोर्ट ऐसे अधिकारी या प्राधिकरणों को देगा जो सामान्यतया उस मामले का निपटान करता है :

परन्तु, यदि संबंधित अधिकारी या प्राधिकरण की राय में ऐसी कार्यवाही कुलपति द्वारा नहीं की गई थी तब ऐसे मामले में अध्यक्ष को निर्दिष्ट किया जायेगा जिसपर उसका निर्णय अंतिम होगा।

(५ ) यदि, कुलपति की राय में , विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकरणों का निर्णय इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए परिनियमों , ऑर्डिनेन्स , विनियमों या नियमों द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उल्लंघन करता है या विश्वविद्यालय के हित पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है तो वह अपने निर्णय का पुनरीक्षण करने के लिए संबंधित ९ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २४, २०२२ /चैत्र ३ , शके १ ९ ४४

प्राधिकरण से अनुरोध करेगा और प्राधिकरण , निर्णय का पूर्णतः या अंशतः पुनरीक्षण करने के लिए इनकार करता है या पंद्रह दिनों के भीतर कोई निर्णय लेने में असफल रहता है तब ऐसा मामला, अध्यक्ष को निर्दिष्ट किया जायेगा और जिसपर उसका निर्णय अंतिम होगा ।

( ६ ) कुलपति, ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जैसा परिनियमों या आर्डिनेन्सों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ।

(७ ) यदि किसी समय प्राप्त अभ्यावेदन पर या से अन्यथा और ऐसी जाँच करने के बाद , जैसा आवश्यक समझा जाए , स्थिति इस प्रकार समर्थित करे और यदि कुलपति का पद पर बने रहना विश्वविद्यालय के हित में नहीं है तो अध्यक्ष , शासी निकाय के अनुमोदन से , उसके लिए कारण दर्शाते हुए लिखित आदेश द्वारा आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए ऐसे दिनांक से उस पद को त्यागने के लिए कुलपति को कहेगा :

परन्तु , इस उप - धारा के अधीन कोई कार्यवाही करने के पूर्व , कुलपति को सुनवाई करने का युक्तियुक्त अवसर दिया जायेगा ।

१५. ( १ ) संकायाध्यक्ष , परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ऐसे रीत्या और सेवा के ऐसे निबन्धनों संकायाध्यक्ष । और शर्तों पर अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जायेगा।

( २ ) संकायाध्यक्ष , विश्वविद्यालय के अकादमिक और अन्य कार्यकलापों के प्रबंध में कुलपति को सहायता करेगा और विनियमों द्वारा विहित की जाए या अध्यक्ष और कुलपति द्वारा सोंपे जाए ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे कृत्यों का अनुपालन करेगा ।

१६. ( १ ) रजिस्ट्रार, परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ऐसी रीत्या और सेवा के ऐसे निबन्धनों और रजिस्ट्रार । शर्तों पर नियुक्त किया जायेगा ।

( २ ) रजिस्ट्रार , विश्वविद्यालय का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी होगा । विश्वविद्यालय के प्राधिकरणों के निर्णय के अध्यधीन वह करार करने , संविदा करने, दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने और विश्वविद्यालय की ओर से अभिलेख अधिप्रमाणित करने की शक्ति होगी, वह परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का अनुपालन करेगा।

(३ ) रजिस्ट्रार , शासी निकाय , प्रबंध मंडल बोर्ड और अकादमिक परिषद का सदस्य सचिव होगा किन्तु , उसे मत देने का अधिकार नहीं होगा ।

(४ ) रजिस्ट्रार , विश्वविद्यालय के अभिलेख , सामान्य मुद्रा और ऐसी अन्य सम्पत्ति का अभिरक्षक होगा जैसा शासी निकाय उसके प्रभार में सुपुर्द करें ।

(५ ) रजिस्ट्रार, इस अधिनियम द्वारा या के अधीन विहित किया जाए या परिनियमों द्वारा उसे प्रदान किया जाए या कुलपति द्वारा समय - समय से उसे समनुदेशित किया जाए ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे अन्य कार्यों का अनुपालन करेगा ।

१७. (१ ) परीक्षा नियंत्रक, परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ऐसे रीत्या और सेवा के ऐसे निबन्धनों परीक्षा नियंत्रक । और शर्तों पर अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाएगा ।

(२ ) परीक्षा नियंत्रक , विश्वविद्यालय की परीक्षा और परीक्षण के संचालन और उनके परिणामों की घोषणा करनेवाला प्रभारी प्रधान अधिकारी होगा । वह कुलपति के अधीक्षण , निदेशन और मार्गदर्शन के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करेगा ।

( ३ ) परीक्षा नियंत्रक, विश्वविद्यालय का पूर्ण समय वैतनिक अधिकारी होगा और विश्वविद्यालय के कुलपति के निदेशन और नियंत्रण के अधीन सीधे कार्य करेगा। उसकी नियुक्ति , तीन वर्षों की अवधि के लिए की जाएगी और वह तीन वर्षों से अनधिक अवधि के लिए पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र होगा । परीक्षा नियंत्रक के चयन के प्रयोजन के लिए अर्हता और अनुभव जैसा कि विहित किया जाए ऐसा होगा ।

(४) परीक्षा नियंत्रक ,-

(क) परीक्षाओं के कलैंडर तैयार करना और अग्रिम में घोषित करना ;

भाग सात- ६-२ १०

महाराष्ट्रशासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २४ , २०२२ /चैत्र ३ , शके १ ९ ४४

(ख) प्रश्नपत्रों के मुद्रण के लिए व्यवस्था करना ;

(ग) परीक्षाओं और अन्य परीक्षणों के परिणामों की समय पर प्रकाशन की व्यवस्था करना ;

(घ) परीक्षा संबंधित उम्मीदवारों , पेपर सेटर्स, परीक्षकों , अनुसीमकों या किसी अन्य व्यक्तियों के विरूद्ध और परीक्षाओं के संबंध में कदाचार का दोषी पाये जाने पर जहाँ आवश्यक हो अनुशासनात्मक कार्यवाही करेगा ;

(ङ) विश्वविद्यालय परीक्षाओं के परिणामों का समय- समय पर, पुनर्विलोकन करेगा और अकादमिक परिषद को उसपर रिपोर्ट अग्रेषित करेगा ।

(च) परीक्षाओं का नियंत्रक , ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे अन्य कर्तव्यों का अनुपालन करेगा जैसा कि विहित किया जाए या उसे समनुदेशित किया जाए ।

मुख्य वित्त तथा लेखा अधिकारी।

१८. ( १ ) मुख्य वित्त तथा लेखा अधिकारी, विश्वविद्यालय का प्रधान वित्त, लेखा और लेखा परीक्षा अधिकारी होगा ।

( २ ) मुख्य वित्त तथा लेखाधिकारी , परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ऐसे रीत्या और ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जायेगा ।

(३ ) मुख्य वित्त तथा लेखाधिकारी, परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा और ऐसे कर्तव्यों का अनुपालन करेगा ।

अन्य अधिकारी । १९ . (१ ) विश्वविद्यालय, उसके कर्तव्यों के लिए आवश्यक समझे जाये ऐसे अन्य अधिकारियों की नियुक्ति करेगा ।

(२ ) विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों की नियुक्ति की रीति , ऐसे अधिकारियों के सेवा के निबंधन और शर्तें, उनकी शक्तियाँ और कृत्य परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किये जाए ऐसे होंगे ।

२०. विश्वविद्यालय के निम्न , प्राधिकरण होंगे , अर्थात्: -

विश्वविद्यालय के प्राधिकरण ।

(क) शासी निकाय ;

(ख) प्रबंध मंडल बोर्ड ;

(ग) अकादमिक परिषद ;

(घ) परीक्षा बोर्ड ; और

(ङ) विश्वविद्यालय के प्राधिकरण के रूप में परिनियमों द्वारा घोषित किया जाए ऐसे अन्य प्राधिकरण ।

शासी निकाय । २१. (१ ) विश्वविद्यालय का शासी निकाय , निम्न सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्: -

(क) अध्यक्ष ;

(ख) कुलपति ;

(ग) प्रायोजक निकाय द्वारा नामनिर्दिष्ट पाँच व्यक्ति, जिनमें से दो विख्यात शिक्षाविद् होंगे ;

(घ) अध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट विश्वविद्यालय के बाहर से प्रबंधमंडल या सूचना प्रौद्योगिकी का एक विशेषज्ञ होगा ;

(ङ) राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट दो व्यक्ति ;

(च) अध्यक्ष द्वारा नामनिर्दिष्ट किये जानेवाले उद्योगों के दो प्रतिनिधि ; और

(छ ) विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार, शासी निकाय का स्थायी आमंत्रिति होगा किन्तु , उसे मत देने का अधिकार नहीं होगा ।

(२ ) शासी निकाय , विश्वविद्यालय का सर्वोच्च प्राधिकरण होगा ।

(३ ) शासी निकाय को , निम्न शक्तियाँ होगी , अर्थात्: -

(क) इस अधिनियम या परिनियमों, आर्डिनेन्स , तद्धीन बनाए गए विनियमों या नियमों द्वारा यथा उपबंधित ऐसी सभी शक्तियों के उपयोग द्वारा , विश्वविद्यालय के कार्यों का सामान्य अधीक्षण और निदेशन और नियंत्रण का उपबंध करना ;

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(ख) इस अधिनियम के उपबंधों या तद्धीन बनाए गए परिनियमों , आर्डिनेन्स , विनियमों या नियमों की पुष्टि नहीं हैं के मामले में, विश्वविद्यालय के अन्य प्राधिकरणों के निर्णयों का पुनर्विलोकन करना ;

(ग ) विश्वविद्यालय के बजट और वार्षिक रिपोर्ट को अनुमोदित करना ;

(घ) विश्वविद्यालय द्वारा अपनायी जानेवाली नीतियाँ अधिकथित करना ;

(ङ) विश्वविद्यालय के स्वैच्छिक परिनिर्धारण के बारे में सभी प्रयासों के बावजूद जब विश्वविद्यालय के सुचारू कार्यान्वयन करने की उद्भूत स्थिति शेष संभव नहीं होती हैं तब प्रायोजक निकाय को सिफारिशें करना ; और

(च) ऐसी अन्य शक्तियाँ जैसा कि परिनियमों द्वारा विहित किया जाए ।

(४) शासी निकाय की , कलैन्डर वर्ष में कम से कम तीन बैठकें होंगी ।

( ५ ) शासी निकाय के बैठकों की गणपूर्ति , पाँच सदस्यों से होगी ।

२२. ( १ ) प्रबंधमंडल बोर्ड , निम्न सदस्यों से मिलकर बनेगा , अर्थात्: -

प्रबंधमंडल बोर्ड । (क) कुलपति ;

(ख) प्रायोजक निकाय द्वारा नामनिर्दिष्ट शासी निकाय के दो सदस्य ;

(ग ) कुलपति द्वारा , चक्रानुक्रम द्वारा नामनिर्दिष्ट किये जानेवाले विश्वविद्यालय के दो संकायाध्यक्ष ;

(घ) तीन व्यक्ति, प्रायोजक निकाय द्वारा नामनिर्दिष्ट जो शासी निकाय के सदस्य नहीं है ; और (ङ) प्रायोजक निकाय द्वारा नामनिर्दिष्ट अध्यापकों में से तीन व्यक्तियाँ ।

(२ ) कुलपति , प्रबंधमंडल बोर्ड का अध्यक्ष होगा ।

( ३ ) प्रबंधमंडल बोर्ड की शक्तियाँ और कृत्य, ऐसे होंगे जिसे परिनियमों द्वारा विहित किया जाए । (४ ) प्रबंधमंडल बोर्ड , प्रत्येक दो महीनें में कम से कम एक बार बैठक लेगा ।

( ५ ) प्रबंधमंडल बोर्ड के बैठक की गणपूर्ति, पाँच सदस्यों से होगी ।

परिषद । २३. ( १ ) अकादमिक परिषद , कुलपति और ऐसे अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगी जैसा कि परिनियमों अकादमिक द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ।

( २ ) कुलपति, अकादमिक परिषद का पदेन अध्यक्ष होगा ।

(३ ) अकादमिक परिषद, विश्वविद्यालय की प्रधान अकादमिक निकाय होगी , और इस अधिनियम के उपबंधों और तद्धीन बनाए गए नियमों , परिनियमों और ऑर्डिनेन्स के अध्यधीन विश्वविद्यालय के अकादमिक नीतियों का समन्वयन और सामान्य पर्यवेक्षण करेगी ।

(४ ) अकादमिक परिषद की बैठक के लिए गणपूर्ति , ऐसी होगी जैसा कि परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ।

परीक्षा बोर्ड । २४. (१ ) परीक्षा बोर्ड , परीक्षाओं के संचालन और परीक्षाओं का आयोजन और परीक्षा लेने के बारे में नीति संबंधी निर्णय लेने , परीक्षा पद्धति में सुधार लाने , पेपर - सेटरों, परीक्षकों, अनुसीमकों की नियुक्ति के लिए और परीक्षाओं और परिणामों की घोषणा करने के दिनांकों की अनुसूची भी तैयार करनेवाला विश्वविद्यालय का प्रधान प्राधिकरण होगा । परीक्षा बोर्ड , विश्वविद्यालय के अध्ययन केन्द्रों या विश्वविद्यालय से संबंधित किसी केंद्र में परीक्षाओं के संचालन का निरीक्षण और विनियमन भी करेगा ।

स्पष्टीकरण. - इस धारा और धारा ३८ के प्रयोजनों के लिए, " परीक्षाओं की अनुसूची " की अभिव्यक्ति का तात्पर्य , प्रत्येक पेपर का समय , दिन और दिनांक के प्रारभ्मण के बारे में दी गई ब्योरेवार तालिका से है , जो परीक्षा प्रणाली का हिस्सा है और जिनमें प्रात्यक्षिक परीक्षा के बारे में भी ब्यौरे सम्मिलित होंगे । १२

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( २ ) परीक्षा बोर्ड , निम्न सदस्यों से मिलकर बनेगा , अर्थात्: -

अध्यक्ष ;

(क) कुलपति

सदस्य ;

(ख) प्रत्येक विषय के प्राध्यापक

(ग) परीक्षा बोर्ड द्वारा सहयोजित एक मूल्यांकन विशेषज्ञ सदस्य ;

सदस्य सचिव ।

(घ) परीक्षा नियंत्रक

(३ ) परीक्षा बोर्ड की शक्तियाँ , और कृत्य ऐसे होंगे , जैसा कि परिनियमों द्वारा अधिकथित किया जाए । अन्य प्राधिकरण ।

विश्वविद्यालय के अन्य प्राधिकरणों का गठन, शक्तियाँ और कृत्य ऐसे होंगे जैसा कि परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाएँ । २५.

निरर्हता। २६. कोई व्यक्ति, विश्वविद्यालय के किन्ही प्राधिकरणों या निकायों का सदस्य होने से निरर्ह होगा, यदि वह, -

(एक) विकृत चित्त का है और सक्षम न्यायालय द्वारा , इस प्रकार घोषित किया गया है ; या (दो) नैतिक अधमता से अर्न्तग्रस्त किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है ; या ( तीन ) निजी कोचिंग वर्गों को स्वयं चलाता है या जुडा हुआ है ; या

(चार) कहीं भी , किसी भी रूप में किसी परीक्षा के संचालन में अनुचित व्यवहार करने में जुडे होने या बढावा देने के लिए दंडित किया गया है ।

२७. या उसके गठन में त्रुटि के कारण द्वारा अविधिमान्य नहीं होगी । विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकरण या निकाय के कार्य या कार्यवाहियाँ केवल किसी रिक्ति विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकरण के या निकाय की रिक्तियों संबंधी कार्यवाहियाँ अविधिमान्य नहीं

होगी ।

अस्थायी रिक्तियों २८. किसी मामले में विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकरण या निकाय में सदस्य की मृत्यु, इस्तीफा को भरना। या हटाये जाने के कारण कोई अस्थायी रिक्ति पायी जाती है तो , यथासंभव शीघ्र , व्यक्ति या निकाय द्वारा जिसे ऐसी रिक्ति के स्थान में नियुक्त या सदस्य को नामनिर्देशित किया जाए और अवधि के शेष भाग के लिए अस्थायी रिक्ति पर नियुक्त या नामनिर्दिष्ट व्यक्ति ऐसे प्राधिकरण या निकाय का सदस्य होना चाहिए जिसके लिए व्यक्ति अस्थायी नियुक्ति के लिए नियुक्त किया गया या नामनिर्दिष्ट किया गया व्यक्ति जिस शेष पदावधि के लिए वह ऐसे प्राधिकरण या निकाय का सदस्य होगा , जिस स्थान के लिए रिक्ति भरी जाती है वह सदस्य के रूप में पद धारण करेगा ।

समितियाँ । २९. ( १ ) विश्वविद्यालय के प्राधिकरणों या अधिकारी ऐसे संदर्भों के निबंधनों के साथ ऐसी समितियों द्वारा किये जानेवाले विनिर्दिष्ट कार्यों के लिए जैसा आवश्यक समझें समितियाँ गठित करेंगे ।

( २ ) ऐसी समितियों का गठन, ऐसा होगा जिसे परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ।

प्रथम परिनियम । ३०. ( १ ) विश्वविद्यालय का प्रथम परिनियम, शासी निकाय द्वारा बनाये जायेंगे और उसके अनुमोदन के लिए सरकार को प्रस्तुत कियें जायेंगे ।

( २ ) इस अधिनियम के उपबंधों और तद्धीन बनाए गए नियमों के अध्यधीन विश्वविद्यालय का प्रथम परिनियम निम्न सभी या किन्हीं मामलों के लिए उपबंध कराएगा , अर्थात्: -

( क) विश्वविद्यालय के प्राधिकरणों तथा अन्य निकायों के गठन, शक्तियाँ और कृत्य समय- समय पर गठित किये जायेंगे ;

(ख ) कुलपति की नियुक्ति के निबंधनों और शर्तों तथा उसकी शक्तियाँ और कृत्य ;

(ग ) संकायाध्यक्ष , रजिस्ट्रार तथा मुख्य वित्त तथा लेखा अधिकारी की नियुक्ति की रीति तथा सेवा के निबंधनों और शर्तों तथा उनकी शक्तियाँ और कृत्य ;

( घ) कर्मचारियों के नियुक्ति की रीति तथा सेवा के निबंधनों और शर्तों तथा उनकी शक्तियाँ और कृत्य ;

(ङ) कर्मचारियों, छात्रों तथा विश्वविद्यालय के बीच विवादों के मामले में माध्यस्थम् के लिए प्रक्रिया ;

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(च) सम्मानिक उपाधियों को प्रदान करना ;

(छ) छात्रों को अध्यापन फीस अदायगी से छूट देने तथा उन्हें छात्रवृत्ति और अध्येतावृत्ति प्रदान करने के संबंध में उपबंध ;

(ज) आरक्षित सीटों के विनियमन समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों के प्रवेशों की नीति , सीटों की संख्या के संबंध में उपबंध ; और

(झ) छात्रों से प्रभारित किए जानेवाली फीस के संबंध में उपबंध ।

( ३ ) सरकार , शासी निकाय द्वारा प्रस्तुत प्रथम परिनियम का विचार करेगी और यदि कोई हो , ऐसे उपांतरणों के साथ जैसा वह आवश्यक समझे , उसकी प्राप्ति की दिनांक से चार महिने के भीतर , उस पर उसका अनुमोदन देगी ।

( ४ ) सरकार , राजपत्र में अपने अनुमोदन द्वारा प्रथम परिनियम प्रकाशित करेगी , और उसके बाद , ऐसे प्रकाशन के दिनांक से प्रथम परिनियम प्रवृत्त होगा ।

परिनियम । ३१. (१ ) इस अधिनियम के उपबंधों तथा उसके अधीन बनाये गये नियमों के अध्यधीन, विश्वविद्यालय पश्चात्वर्ती के पश्चात्वर्ती परिनियम , निम्न सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध करेंगें , अर्थात्: -

(क) विश्वविद्यालय के नए प्राधिकरणों का सृजन करना ;

(ख) लेखा नीति और वित्तीय प्रक्रिया ;

( ग) विश्वविद्यालय के प्राधिकरणों में अध्यापकों का प्रतिनिधित्व करना ;

(घ) नए विभागों का निर्माण और विद्यमान विभाग का उत्सादन या पुनःसंरचना करना ;

(ङ) पदकों तथा पुरस्कारों को संस्थित करना ;

(च) पदों के उत्सादन के लिए पदों तथा प्रक्रिया का सृजन करना ;

(छ) फीस का पुनरीक्षण ;

(ज) विभिन्न पाठ्यविवरण में सीटों की संख्या का परिवर्तन ; और

(झ ) परिनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन जो सभी अन्य मामलें है । ( २ ) विश्वविद्यालय के परिनियम , प्रथम परिनियम से अन्य शासी निकाय के अनुमोदन के साथ प्रबंध मंडल बोर्ड द्वारा बनाया जायेंगे ।

( ३ ) प्रबंधमंडल बोर्ड, समय - समय से नये या अतिरिक्त परिनियम बनाएगा या इस धारा में उपबंधित जिसे इसमें आगे ऐसी रीत्या बनाए गए परिनियमों में संशोधन या निरसन करेगा :

परंतु, प्रबंधमंडल बोर्ड, विश्वविद्यालय के किसी विद्यमान प्राधिकरण के किसी प्रास्थिति, शक्तियों या गठन पर प्रभाव डालने वाले कोई परिनियमों या परिनियम में किसी संशोधन नहीं बनाएगा जब तक ऐसा प्राधिकरण प्रस्ताव पर अपनी राय अभिव्यक्त करने का अवसर नहीं देता है और इस प्रकार कोई राय लिखित में अभिव्यक्त नहीं करता है तब तक होगा तथा उसका शासी निकाय द्वारा विचार किया जाएगा ।

(४ ) प्रत्येक ऐसे परिनियम या परिनियम में परिवर्धन या किसी संशोधन या परिनियम के निरसन सरकार के अनुमोदन के अध्यधीन होंगे :

परंतु, विद्या अकादमिक परिषद से परामर्श के बिना , विद्यार्थियों के अनुशासन और अध्यापन , शिक्षा तथा परीक्षा के मानक पर प्रभाव ड़ालने वाले कोई परिनियम प्रबंधमंडल बोर्ड द्वारा नहीं बनाए जाएंगे ।

३२. (१ ) विश्वविद्यालय के प्रथम ऑर्डिनेन्स, शासी निकाय और उसके अनुमोदन के लिये राज्य प्रथम ऑर्डीनेन्स । सरकार को प्रस्तुत किये जायेंगे ।

भाग सात- ६-३ १४

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( २ ) इस अधिनियम के उपबंधों या तद्धीन बनाए गए नियमों या परिनियमों के अध्यधीन, विश्वविद्यालय के उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिए जैसे उसे उचित समझे शासी निकाय के अनुमोदन के साथ प्रबंध मंडल बोर्ड ऐसे प्रथम ऑर्डिनेन्सेस बनाएगा और ऐसे ऑर्डिनेन्सेस निम्न सभी या किन्हीं मामलों के लिए मुहैया कराएगा , अर्थात्: -

(क) विश्वविद्यालय में छात्रों के प्रवेश तथा उनके ऐसे नामांकन

(ख ) विश्वविद्यालय की उपाधियों , डिप्लोमा और प्रमाणपत्रों के लिए अधिकथित किए जाने वाले अध्ययन पाठ्यक्रम ;

(ग) उपाधियों, डिप्लोमा , प्रमाणपत्रों तथा अन्य अकादमिक विशिष्टताओं को प्रदान करना , उनके लिए न्यूनतम अर्हताएँ वही होंगी तथा मंजूर करने और प्राप्त करने से संबंधित वही अर्थ होगा ;

( घ ) अध्येतावृत्ति , छात्रवृत्ति, वृत्तिका, पदक और पुरस्कारों को प्रदान करने के लिए शर्तें ;

(ङ) कार्यालय की शर्तें और नियुक्ति की रीति और परीक्षा निकाय के कर्तव्य , परीक्षकों तथा अनुसीमकों समेत परीक्षाओं का संचालन ;

(च) विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यचर्याओं, परीक्षाओं, उपाधियों तथा डिप्लोमाओं के लिए प्रभारित की जानेवाली फीस ;

(छ) विश्वविद्यालय के छात्रावास में छात्रों के आवास की शर्तें ;

(ज ) छात्रों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कारवाई करने संबंधी उपबंध

( झ) विश्वविद्यालय के अकादमिक जीवन में सुधार करने के लिए किसी अन्य निकाय के सृजन , संरचना और कृत्य जो कि आवश्यक माने गए हैं ;

और (ञ) उच्च शिक्षा के अन्य विश्वविद्यालयों तथा संस्थाओं से सहकारिता और सहयोग की रीति ;

(ट) इस अधिनियम के उपबंधों या तद्धीन बनाए गए परिनियमों के अधीन जो अन्य सभी मामलें ऑर्डिनेन्सों द्वारा मुहैया करना अपेक्षित है ।

(३ ) सरकार , उप- धारा ( १ ) के अधीन कुलपति द्वारा प्रस्तुत किये गये प्रथम ऑर्डिनेन्सों का विचार करेगी और ऐसे उपांतरण के साथ यदि कोई आवश्यक समझे तो , उसकी प्राप्ति के दिनांक से , चार महीनों के भीतर अनुमोदन देगी ।

पश्चात्वर्ती ३३. (१ ) अकादमिक परिषद द्वारा बनाए गए प्रथम ऑर्डिनेन्स से , अन्य सभी ऑर्डिनेन्स , प्रबंध मंडल ऑर्डिनेन्स। बोर्ड द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद उसके अनुमोदन के लिए शासी निकाय को प्रस्तुत किए जाएँगे । (२ ) अकादमिक परिषद, या तो प्रबंधमंडल बोर्ड और शासी निकाय के सुझावों को सम्मिलित करके ऑर्डिनेन्सेस उपांतरित करेगी या सुझावों को सम्मिलित न करने के लिए कारण देगी , यदि कोई हो , ऐसे कारणों के साथ ऑर्डिनेन्सेस लौटाएगी । प्रबंधमंडल बोर्ड और शासी निकाय अकादमिक परिषद के सुझावों का विचार करेंगे और विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेन्सेस ऐसे उपांतरणों के साथ या के बिना अनुमोदित किए जायेंगे और तत्पश्चात्, शासी निकाय द्वारा अनुमोदित रूप में ऑर्डिनेन्सेस प्रवृत्त होंगे ।

विनियम । ३४. विश्वविद्यालय के प्राधिकरण , प्रबंधमंडल बोर्ड के पूर्वानुमोदन के अध्यधीन , उसके स्वयं के कारोबार और उसके द्वारा नियुक्त समितियों को संचालित करने के लिए इस अधिनियम के उपबंधों और नियमों, तद्धीन बनाए गए ऑर्डिनेन्स और परिनियमों से संगत विनियम बनाएँगे ।

प्रवेश। ३५. ( १ ) विश्वविद्यालय में प्रवेश , गुणागुण के आधार पर कडाई से किये जायेंगे ।

( २ ) विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए गुणागुण के आधार पर या प्रवेश के लिए अर्हता परीक्षा में प्राप्त किए गए श्रेणी के आधार पर और पाठ्यक्रमेतर तथा पाठ्येतर गतिविधियों में प्राप्त उपलब्धि या राज्य स्तर पर संचालित प्रवेश परीक्षा में प्राप्त गुण या श्रेणी के आधार पर या विश्वविद्यालय के सहयोजन द्वारा या राज्य के किसी एजेंसी द्वारा होंगे :

परंतु , वृत्तिक तथा तकनिकी पाठ्यचर्याओं में प्रवेश केवल प्रवेश परीक्षा के ज़रिए होंगे । १५ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २४, २०२२ /चैत्र ३ , शके १ ९ ४४

( ३ ) अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति, निरधिसूचित जनजाति ( विमुक्त जाति ) , खानाबदोश जनजाति , अन्य पिछड़े वर्गों , विशेष पिछड़े प्रवर्गों, तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (इडब्लूएस ) से संबंध रखनेवाले और विकलांग छात्रों के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए सीटें राज्य सरकार की नीति के अनुसार आरक्षित रखी जाएँगी ।

( ४ ) महाराष्ट्र का अधिवास रखनेवाले छात्रों के लिए चालीस प्रतिशत सीटें अनुमोदित कुल ग्रहण क्षमता में से आरक्षित रखीं जायेगी ।

३६. (१ ) विश्वविद्यालय , की फ़ीस संरचना नियत करने के लिए फ़ीस नियतन समिति होगी । फीस नियतन समिति । ( २ ) समिति की संरचना, उसका अवधि और उसके सदस्य , उसकी यंत्रणा और फ़ीस नियतन समिति द्वारा अपनाई जानेवाली प्रक्रिया ऐसी होगी जिसे राज्य सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , अधिसूचित किया जा सके :

परंतु , प्रत्येक ऐसी अधिसूचना, यथासंभव शीघ्र, राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जायेगी ।

(३) फ़ीस नियतन समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के भत्ते और मानदेय , राज्य सरकार द्वारा, समय- समय पर विनिर्दिष्ट किया जाए ऐसे होंगे , जिसका भुगतान विश्वविद्यालय द्वारा किया जायेगा ।

प्रतिव्यक्ति फीस का प्रतिषेध । ३७. (१ ) कोई प्रतिव्यक्ति फ़ीस , विश्वविद्यालय द्वारा या कि और से या कोई व्यक्ति जो ऐसी , संस्था के प्रबंधन के लिए प्रभारी है या जिम्मेवार है , के द्वारा , किसी छात्र से या उसके प्रवेश के प्रतिफलेन और ऐसी संस्था में किसी अध्ययन के पाठ्यक्रम या उच्चतर कक्षा या वर्ग में उसकी प्रोन्नति के लिए , संग्रहीत नहीं की जाएगी ।

सन् १ ९ का महा . ६ ।

(२ ) उप- धारा (१ ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुऐ भी , प्रबंधनमंडल नगद या उसी प्रकार में विहित रीत्या विन्यास निधि , परोपकारी व्यक्तियों या संगठन या लोकन्यासों या किसी अन्य लोगों के संगठन से छात्रवृत्ति या पुरस्कार या जैसे प्रदान करने के लिए विन्यास निधि सृजन करने के लिए नए शिक्षण संस्थाओं को खोलने के लिए सद्भाव में दान संग्रह या प्राप्त करेगी लेकिन, ऐसे दान संग्रहित या स्वीकारते समय प्रबंधनमंडल ऐसे दान के विचार में उसके द्वारा चलित किसी शैक्षणिक संस्था में कोई सीटें आरक्षित नहीं रखेगी । जहाँ ऐसे संदान की स्वीकृति के विचार में ऐसी संस्था में किसी छात्र के प्रवेश के लिए कोई जगह ८८ आरक्षित है तो दान के ऐसे प्रतिग्रहण , प्रतिव्यक्ति फ़ीस , महाराष्ट्र शैक्षणिक संस्थान (प्रतिव्यक्ति फ़ीस का प्रतिषेध ) अधिनियम , १ ९ ८७ की धारा २ के खण्ड (क) के अर्थान्तर्गत समझे जाएँगे ।

समय-सारणी । परीक्षाओं की ३८. प्रत्येक शैक्षणिक सत्र के शुरुआत में और किसी मामले में, प्रत्येक कलैंडर वर्ष के ३० जून से पहले विश्वविद्यालय उसके द्वारा संचालित हर और प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए सत्रवार या , यथास्थिति, वार्षिक परीक्षाओं की समय-सारणी तैयार तथा प्रकाशित करेगी और ऐसे समय - सारणी का कडाई से पालन होगा :

परंतु, यदि चाहे जिस किसी भी कारण के लिए, विश्वविद्यालय यह समय - सारणी अनुसरण करने में असमर्थ है तो वह यथासंभव शीघ्र सरकार को प्रकाशित समय- सारणी से प्रस्थान तैयार करने के लिए विस्तृत कारणों को देने की रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी । सरकार , उस पर भविष्य में अनुपालन के लिए जैसा कि उचित समझे, ऐसे निदेश जारी करेगी ।

परिणामों की घोषणा । ३९ . (१ ) विश्वविद्यालय , विशिष्ट पाठ्यक्रम के लिए उसके द्वारा संचालित प्रत्येक परीक्षा के परिणामों की घोषणा परीक्षा की अंतिम दिनांक से लेकर तीस दिनों के भीतर करने का प्रयास करेगी और किसी मामले में नवीनतम परिणाम ऐसे दिनांक से पैंतालीस दिनों के भीतर घोषित करेगा :

परंतु यदि, जो कोई भी कारण हो, विश्वविद्यालय किसी भी परीक्षा के परिणाम पैंतालीस दिन की अवधि के भीतर, अंतिमतः घोषित करने में असमर्थ है , वह सरकार को ऐसे विलंब के विस्तृत भाग सात- ६-३अ १६

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कारणों में समाविष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा । सरकार , उस पर , भविष्य में बेहतर अनुपालन के लिए , जैसा कि वह उचित समझे , ऐसे निर्देश जारी करेगा ।

( २ ) कोई परीक्षा या परीक्षा के परिणाम, विश्वविद्यालय ने धारा ३८ में अनुबद्ध परीक्षा की अनुसूची का अनुसरण नहीं किया है या उप - धारा ( १ ) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर , विश्वविद्यालय परिणाम घोषित करने में असफल हुआ है सिर्फ इसी कारण के लिए अविधिमान्य नहीं होगी ।

दीक्षांत समारोह । ४०. उपाधियाँ , डिप्लोमाएँ प्रदान करने के लिए या किसी अन्य प्रयोजनार्थ विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह परिनियमों द्वारा विहित रित्या में , प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष , में किया जाएगा ।

विश्वविद्यालय का प्रत्यायन ।

४१. विश्वविद्यालय राष्ट्रीय मूल्यांकन तथा प्रत्यायन परिषद ( नॅक ) , बैंगलोर से उसके संस्थित होने से तीन वर्ष के भीतर , प्रत्यायन अभिप्राप्त करेगा तथा विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन तथा प्रत्यायन परिषद ( नॅक ) द्वारा उपबंधित श्रेणी के बारे में सरकार तथा अन्य ऐसी विनियमित निकायों को जो विश्वविद्यालय द्वारा चलाए जानेवाले पाठ्यक्रमों से संबंधित है, को जानकारी देगा । विश्वविद्यालय , तत्पश्चात्, ऐसे प्रत्यायन प्रत्येक पाँच वर्ष के अंतराल पर नवीकृत कर सकती है ।

विश्वविद्यालय ४२. इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , विश्वविद्यालय विनियमित निकायों के नियमों , विनियमों , मानकों आदि के पालन के लिये और ऐसे निकायों को उनके द्वारा उनके कर्तव्यों का निर्वहन तथा उनके कार्यों को कार्यान्विन करने के लिए आवश्यक है, ऐसी सभी सुविधाओं और सहायता मुहैया करने के लिये बाध्यकारी होगी ।

विनियमित निकायों के नियमों, विनियमों, मानकों आदि का अनुसरण करेगा ।

वार्षिक रिपोर्ट । ४३. (१ ) विश्वविद्यालय का वार्षिक रिपोर्ट, प्रबंधनमंडल बोर्ड तैयार करेगा , जिसमें अन्य मामलों में, विश्वविद्यालय द्वारा उसके उद्देश्यों को पूरा करने हेतु उठाए गए कदमों का समावेश होगा तथा शासी निकाय द्वारा अनुमोदित किया जाएगा तथा उसी की प्रति प्रायोजक निकाय को भेजी जाएगी ।

( २ ) उप - धारा (१ ) के अधीन तैयार की गई वार्षिक रिपोर्ट की प्रतियाँ , सरकार को भी प्रस्तुत की जाएगी । (३ ) राज्य सरकार , ऐसी रिपोर्ट राज्य विधान मंडल के हर एक सदन के समक्ष रखेगी ।

वार्षिक लेखा और संपरीक्षा ।

४४. (१ ) प्रबंधनमंडल बोर्ड के निर्देशों के अधीन तुलनपत्र समेत विश्वविद्यालय के वार्षिक लेखा तैयार किए जाएँगे और इस प्रयोजन के लिए विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त लेखापरीक्षकों द्वारा प्रत्येक वर्ष में कम से कम एक बार लेखापरीक्षा की जाएगी ।

( २ ) लेखापरीक्षा रिपोर्ट के साथ वार्षिक लेखा की प्रति , शासी निकाय को प्रस्तुत की जाएगी । (३ ) वार्षिक लेखाओं तथा शासी निकाय के संप्रेक्षणों के साथ जोड़ी गई लेखापरीक्षा रिपोर्ट प्रायोजक निकाय को प्रस्तुत की जाएगी ।

(४ ) उप - धारा ( १ ) के अधीन तैयार किए गए वार्षिक लेखाओं और तुलनपत्र की प्रतियाँ सरकार को भी प्रस्तुत की जाएगी ।

( ५ ) सरकार की सलाह, यदि कोई हो , विश्वविद्यालय के लेखा और लेखापरीक्षा की रिपोर्ट से उद्भूत होती है तो , शासी निकाय के सामने रखी जाएगी और शासी निकाय , जैसा उचित समझे ऐसे निदेश जारी करेगी और उसके अनुपालन के लिए सरकार को प्रस्तुत करेगी ।

विश्वविद्यालय का निरीक्षण करने की

४५. ( १ ) विश्वविद्यालय से संबंधित अध्यापन , परीक्षा और संशोधन या किसी अन्य मामले की श्रेणियाँ अभिनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए , सरकार , कुलपति से परामर्श के बाद, जैसा वह उचित समझे ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा जैसा कि विहित किया जाए ऐसी रीति में मामला निर्धारण करेगी ।

शक्तियाँ। सरकार की

( २ ) सरकार, सुधारक कार्यवाही के लिए ऐसे निर्धारण के परिणामस्वरूप , संबंध में उसकी सिफारिशें विश्वविद्यालय को संसूचित करेगी और विश्वविद्यालय सिफारिशों के अनुपालन की सुनिश्चिति के लिए आवश्यकता के रूप में ऐसे सुधारक उपाय करेगी ।

( ३ ) यदि विश्वविद्यालय , उचित समय के भीतर , उप - धारा ( २ ) के अधीन की गई सिफारिशों का अनुपालन करने में असफल रहती है तो सरकार , जैसा वह उचित समझे ऐसे निर्देश देगी जो विश्वविद्यालय पर बाध्यकारी होंगे । १७ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २४, २०२२ /चैत्र ३ , शके १ ९ ४४

४६. (१ ) प्रायोजक निकाय , विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और छात्रों को अग्रिम रूप में कम से कम प्रायोजक निकाय एक वर्ष की इस प्रभाव की सूचना सरकार को देकर , विश्वविद्यालय विघटित करेगी :

द्वारा विश्वविद्यालय का विघटन । परंतु , विश्वविद्यालय का विघटन, केवल उसके नियमित पाठ्यक्रम पूरे करनेवाले छात्रों की अंतिम बॅच का होगा और उन्हें उपाधि, डिप्लोमा या , यथास्थिति, पुरस्कारों से पुरस्कृत किये जाने पर ही प्रभावी होगा । ( २ ) विश्वविद्यालय के विघटन पर विश्वविद्यालय की सभी आस्तियाँ और दायित्व , तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अध्यधीन , प्रायोजक निकाय में निहित होंगे :

परंतु , विश्वविद्यालय उसकी स्थापना से पंद्रह वर्ष पूरे होने के पूर्व प्रायोजक निकाय द्वारा विघटन किये जाने के मामले में विश्वविद्यालय की सभी आस्तियाँ, सभी ऋणभारों से मुक्त होकर सरकार में निहित होंगी ।

राज्य सरकार की कतिपय परिस्थितियों में विशेष शक्तियाँ । ४७. (१ ) यदि, सरकार को यह प्रतीत होता है कि विश्वविद्यालय इस अधिनियम या तद्धीन बनाये गये नियमों, परिनियमों या ऑर्डिनेन्स के किन्ही उपबंधों का उल्लंघन करता है या इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा जारी किन्ही निर्देशों का उल्लंघन हुआ है या धारा ५ के अधीन दिये गये किन्हीं उपक्रमों के निर्वहन से परिविरत होता है या विश्वविद्यालय में वित्तीय अव्यवस्था या कुप्रशासन की स्थिति उद्भूत होती है तो वह अपेक्षित विश्वविद्यालय को पैंतालिस दिनों के भीतर कारण बताओ नोटीस जारी करेगा कि क्यों न उसके समापन का आदेश बनाया जाये ।

( २ ) यदि, सरकार का, उप - धारा ( १ ) के अधीन जारी की गई सूचना पर विश्वविद्यालय के जबाब की प्राप्ति पर , समाधान हो जाता है कि प्रथमदृष्ट्या इस अधिनियम या तद्धीन बनाये गये नियमों , परिनियमों या ऑर्डिनेन्स के समस्त या किन्हीं उपबंधों का उल्लंघन हुआ है या इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा जारी निर्देशों का उल्लंघन हुआ है या धारा ५ के अधीन दिये गये किन्ही उपक्रमों के निर्वहन से परिविरत हुआ है या वित्तीय अव्यवस्था या कुप्रशासन हुआ है तो वह आवश्यक समझे ऐसी जाँच के आदेश बना सकेगी ।

(३ ) सरकार , उप- धारा ( २ ) के अधीन किसी जाँच के प्रयोजन के लिए , किन्हीं भी अभिकथनों में जाँच करने के लिए किसी जाँच अधिकारी या अधिकारियों को नियत करेगी और उसपर रिपोर्ट बनायेगी । सन् १ ९ ०८

का ५।

(४) उप- धारा (३ ) के अधीन नियत किये गये जाँच अधिकारी या अधिकारियों को सिविल प्रक्रिया संहिता , १ ९ ०८ के अधीन सिविल न्यायालय में जो शक्तियाँ निहित होती है वह निम्नलिखित मामलों के संबंध में वाद का विचारण करते समय होगी , अर्थात्: -

(क) किसी व्यक्ति को उपस्थित रहने के लिए , समन जारी करना और प्रवृत्त करना और शपथ पर उसका परीक्षण करना ;

(ख) साक्ष्य में प्रतिपादित किये गये अपेक्षित किसी ऐसे दस्तावेज या किसी अन्य सामग्री की खोज या निर्माण करना ;

(ग) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी सार्वजनिक अभिलेख की अपेक्षा करना; और

(घ) कोई अन्य मामला जिसे विहित किया जाये ।

सन् १ ९७४

का

(५) जाँच अधिकारी या अधिकारियों की इस अधिनियम के अधीन जाँच , दण्ड प्रक्रिया संहिता , १ ९ ७३ २। की धारा १ ९ ५ और अध्याय २६ के प्रयोजनों के लिये सिविल न्यायालय समझा जायेगा ।

(६ ) उप- धारा ( ३ ) के अधीन नियुक्त किये गये अधिकारी या अधिकारियों से जाँच रिपोर्ट की प्राप्ति पर , यदि सरकार का यह समाधान हो जाता है कि विश्वविद्यालय ने इस अधिनियम के सभी या किन्ही उपबंधों या तद्धीन बनाये गये नियमों , परिनियमों , या ऑर्डिनेन्स का उल्लंघन किया है या इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा जारी किन्ही निर्देशों का उल्लंघन किया है, धारा ५ के अधीन उसके द्वारा किये गये उपक्रमों को कार्यान्वित करने के लिये परिविरत है या विश्वविद्यालय के अकादमिक मानकों के आशंकाओं से वित्तीय कु-प्रबंध या कु-प्रशासन की स्थिति विश्वविद्यालय में उद्भूत हुई है तो विश्वविद्यालय के समापन या प्रशासक की नियुक्ति के लिए प्रारंभिक आदेश जारी किये जायेंगे ।

भाग सात- ६-३ १८

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(७ ) उप- धारा ( ६ ) के अधीन नियुक्त किये गये प्रशासक को इस अधिनियम के अधीन शासी निकाय और प्रबंधमंडल बोर्ड के सभी शक्तियाँ होंगी और सभी कर्तव्यों के अध्यधीन होगा और विश्वविद्यालय के कामकाज का प्रबंधमंडल तब तक करेगा जब तक नियमित पाठ्यक्रमों के छात्रों की अंतिम बॅच उनके पाठ्यक्रम को पूरा नहीं करती हैं और उपाधि , डिप्लोमा या, यथास्थिति , पुरस्कार प्रदान नहीं किया गया है ।

(८ ) उपाधि, डिप्लोमा या , यथास्थिति, पुरस्कार प्रदान करने के पश्चात्, नियमित पाठ्यक्रमों के छात्रों की अंतिम बॅच के लिये प्रशासक, सरकार को इस प्रभाव की रिपोर्ट करेगा ।

( ९ ) उप - धारा (८ ) के अधीन रिपोर्ट की प्राप्ति पर सरकार , राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , विश्वविद्यालय के विघटन के अंतिम आदेश जारी करेगी और ऐसी अधिसूचना के प्रकाशन के दिनांक से विश्वविद्यालय विघटित होगा और विश्वविद्यालय की सभी आस्तियाँ और दायित्व ऐसे दिनांक से प्रायोजक निकाय में निहित होगी । सचिव स्तरीय समिति।

४८. ( १ ) इस अधिनियम के प्रारंभण के तुरंत पश्चात्, राज्य सरकार द्वारा , समय - समय पर विरचित स्व-वित्तपोषित विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित मार्गदर्शक सिद्धांतो की आवश्यकताओं के अनुपालन के सत्यापन और सुनिश्चित करने के क्रम में , सचिव स्तरीय समिति स्थापित की जायेगी और प्रायोजक निकाय को परिवचन प्रस्तुत करेगी । समिति, उच्चतर तथा तकनीकी शिक्षा विभाग , वित्त विभाग और नियोजन विभाग के सचिवों से मिलकर बनेगी ।

के अधीन गठित समिति, उसकी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत करेगी ।

(२ ) उप - धारा ( १ )

(३ ) उप- धारा ( २ ) के अधीन रिपोर्ट की प्राप्ति पर, राज्य सरकार , विश्वविद्यालय के परिचालन को अनुमति देते हुये राजपत्र में, अधिसूचना प्रकाशित करेगी ।

( ४ ) विश्वविद्यालय, उप- धारा ( ३ ) के अधीन जारी की गई अधिसूचना के पश्चात् ही केवल छात्रों को प्रवेश देगा।

सचिव स्तर समिति द्वारा निरीक्षण

४९ . धारा ४८ की उप - धारा ( १ ) के अधीन स्थापित सचिव स्तर समिति , जब - जब सरकार द्वारा । निर्देशित किया गया हो , विश्वविद्यालय का निरीक्षण कर सकेगी और स्व-वित्तपोषित विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित राज्य सरकार या केंद्र सरकार द्वारा , समय समय पर, जारी किये गये मार्गदर्शक सिद्धांतो की आवश्यकताओं के अनुपालन और तत्समय प्रवृत्त सुसंगत विधियों के उपबंधों के अनुपालन की जाँच और सुनिश्चित किया जा सके ।

दंड । ५०. इस अधिनियम के किन्ही उपबंधों का उल्लंघन , यह अपराध होगा और धारा ११ के अधीन विनिर्दिष्ट विश्वविद्यालय के साथ - साथ विश्वविद्यालय के अधिकारी तीन महिने से अनधिक परंतु एक वर्ष से बढाई न जा सकनेवाले अवधि के लिए कारावास और पचास हजार रुपयों से अनधिक परंतु जो पाँच लाख रुपयों तक बढाए जा सकनेवाले जुर्माने से दण्डित होंगे :

परंतु, इस धारा में की कोई बात , इस अधिनियम के उपबंधों के अननुपालन के लिए विश्वविद्यालय के परिसमापन की प्रक्रिया समेत, कोई कार्यवाही चाहे वह सिविल या दाण्डिक हो प्रारंभ करने से सरकार को नहीं रोकेगी ।

नियम बनाने की शक्ति।

५१. (१ ) सरकार , राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा , इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।

( २ ) पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्न समस्त या किन्ही मामलों का उपबंध कर सकेंगे , अर्थात्: -

(क) धारा १२ की , उप- धारा ( १ ) के अधीन अध्यक्ष के नियुक्ति का रीति ;

(ख) धारा १२ की, उप- धारा ( २ ) के अधीन अध्यक्ष के पद के लिये पात्रता निकष १९ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २४, २०२२ /चैत्र ३ , शके १ ९ ४४

(ग) धारा ४५ की , उप- धारा ( १ ) के अधीन विश्वविद्यालय के अध्यापन , परीक्षा और अनुसंधान के मानक सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए किसी निर्धारण करने की रीति ;

(घ) धारा ४७ की , उप- धारा ( ४ ) के खंड ( घ ) के अधीन विहित किये जानेवाले मामले ;

(ङ) कोई अन्य मामला जिसे नियमों द्वारा विहित करना आवश्यक है या किया जा सके ।

(३ ) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम , उसके बनाए जाने के पश्चात् यथा संभव शीघ्र , राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो , कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा जो कि चाहे वह एक सत्र में हो या दो या अधिक अनुक्रमिक सत्रों में हो , और यदि , उस सत्र में जिसमें उसे रखा गया है , उसके ठीक बाद के सत्र या सत्रों के अवसान के पूर्व दोनों सदन नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत होते हों या दोनों सदन इस बात के लिए सहमत होते हों कि नियम न बनाया जाए तो नियम, अधिसूचना के प्रकाश के दिनांक से , केवल ऐसे परिवर्तित रुप में हों प्रभावी होगा , या , यथास्थिति , निष्प्रभावी हो जायेगा; तथापि , ऐसा कोई परिवर्तन या बातिलिकरण , उस नियम के अधीन पहले की गई किसी बात या विलुप्ति की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी ।

निराकरण की शक्ति। कठिनाई के ५२. (१ ) इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में यदि कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो सरकार, जैसा अवसर उद्भूत हो , राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा , इस अधिनियम के उपबंधों से अनसंगत कोई बात कर सकेगी , जो उसे कठिनाई के निराकरण के लिए आवश्यक या इष्टकर प्रतीत हों :

परंतु , ऐसा कोई भी आदेश , इस अधिनियम के प्रारंभण के दिनांक से दो वर्षों की अवधि के अवसान के बाद , नहीं बनाया जायेगा ।

( २ ) उप - धारा (१ ) के अधीन बनाया गया प्रत्येक आदेश , उसके बनाए जाने के पश्चात्, यथा संभव शीघ्र , राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों के समक्ष रखा जायेगा।

भाग सात- ६-३अ.

२०

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उद्देश्यों और कारणों का वक्तव्य ।

भारत सरकार द्वारा हाथ में लिये गये आर्थिक सुधार से नीति निर्माण में तेजी से बदलाव आ रहा है और उच्चतर शिक्षा से संबंधित मूलभूत सुविधा विकास में निजी क्षेत्रों को शामिल किया गया है । तद्नुसार , महाराष्ट्र सरकार ने , राज्य में अच्छे दर्जे की मूलभूत सुविधा के सृजन द्वारा राज्य में उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में पहुँच, उत्कर्ष, अंतर्वेश और अनुसंधान बढ़ाने के लिये निजी सहभागिता सुकर करने में बृहत्तर प्रयास करने का विनिश्चय किया हैं ।

२. महाराष्ट्र सरकार , उच्चतर शिक्षा के अवसरों में सुधार करने के इच्छुक होने और उच्चतर शिक्षा में निजी क्षेत्रों की सक्रिय सहभागिता और निवेश को प्रोत्साहन देने की दृष्टि से, राज्य में, स्व- वित्तपोषित विश्वविद्यालय बनाने के लिये प्रोत्साहित करना इष्टकर समझती है । राज्य, राजकोष में किसी वित्तीय भार डाले बिना , उच्चतर , तकनीकी, व्यावसायिक और प्रबंधमंडल शिक्षा में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए इससे मदद होगी । यह भी लाभ उठाना इष्टकर समझा गया है कि, सरकार, ऐसे स्व - वित्तपोषित विश्वविद्यालयों के लिये समुचित और उचित पर्यावरण के उपबंधों की सुनिश्चिति द्वारा राज्य में उच्चतर शिक्षा के विकास में उत्प्रेरक की भूमिका निभायेगी ।

३. उच्चतर शिक्षा का उच्चतर मानक और दरजा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से , निरन्तर बदलाव के अकादमिक और आर्थिक परिदृश्य के अधीन छात्रों की जरुरतों को पूरा करने के लिए और लोगों के मन में आत्मविश्वास जगाने के लिए , महाराष्ट्र सरकार ने, इन निजी संस्थाओं को उच्चतर शिक्षा पाठ्यक्रम की स्थापना में और चलाने के लिये विशिष्ट ट्रॅक रिकार्ड का प्रदर्शन करके , राज्य में स्व -वित्तपोषित विश्वविद्यालयों की स्थापना करने की अनुमति देने की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू करने का विनिश्चय किया है ।

४. ऐसे स्व- वित्तपोषित विश्वविद्यालयों को पर्याप्त स्वायत्तता मुहैया करने की दृष्टि से , सरकार उनके निर्माण और कार्य में कम से कम विनियामक हस्तक्षेप करने का विनिश्चय करती है । तथापि , स्व- वित्तपोषित विश्वविद्यालयों की वृद्धि को सुनिश्चित करने और ऐसे स्व - वित्तपोषित विश्वविद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं की उच्चतर स्तर और अकादमिक आवश्यकताओं की पुष्टी करने पूर्ति होने का पता लगाने के लिए , ऐसी वृद्धि को प्रोत्साहन देनेवाली प्रक्रिया समाज के कम - विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों की शिक्षा के लिए रूकावटें पैदा न हों या लोकहित या सरकार के सामान्य शिक्षा नीति के लिए हानिकारक किसी भी प्रकार के कु -प्रबंध को मौका न मिले ; महाराष्ट्र सरकार ने, विधि के अधीन कुछ पर्यवेक्षकीय और कतिपय विनियामक शक्तियाँ अपने पास सुरक्षित रखना इष्टकर समझा है ।

देखिए , शासन संकल्प , उच्चतर तथा तकनीकी शिक्षा विभाग क्र. यू एस जी २००६/(२५४/२००६)/यू एन आय-४ / भाग दो , दिनांकित २ ९ मई २०१३ तद्नुसार , सरकार ने , राज्य में स्व- वित्तपोषित विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिये मार्गदर्शक सिद्धांतों को विहित किया है । जिसे देखिए शासन संकल्प , उच्चतर तथा तकनीकी शिक्षा विभाग क्रमांक एम आय एस सी -२०१७ / (१४४/१७ ) /यूएनआय -४ , दिनांकित १ ९ जनवरी २०१ ९ को पुनरीक्षित किया गया है ।

५. संस्था रजिस्ट्रीकरण अधिनियम , १८६० ( सन् १८६० का २१ ) के अधीन संस्था के रुप में रजिस्ट्रीकृत और महाराष्ट्र लोक न्यास अधिनियम ( सन् १ ९ ५० का २ ९ ) के अधीन भी लोक न्यास के रूप में रजिस्ट्रीकृत महाराष्ट्र कॉस्मोपोलिटीन एज्यूकेशन सोसायटी प्रायोजक निकाय है जो डॉ . पी . ए. इनामदार विश्वविद्यालय, पुणे की स्थापना और मंजूरी के लिये आवेदन करती है की सरकार द्वारा जारी किये गये आशय पत्र (एल ओ आय ) के अनुसार अनुपालन के सत्यापन और विधिमान्यता के प्रयोजन के लिये नियुक्त की गई निरीक्षण समिति द्वारा निरीक्षण रिपोर्ट पर विचार करने के पश्चात्, अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करती है । इसलिए, " डॉ. पी . ए. इनामदार विश्वविद्यालय, पुणे " के नाम द्वारा स्व - वित्तपोषित विश्वविद्यालय को स्थापित और निगमित करना इष्टकर समझा गया है ।

६. प्रस्तुत विधेयक का आशय उपर्युक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है ।

उदय सामंत,

मुंबई ,

उच्चतर तथा तकनीकी शिक्षा मंत्री । दिनांकित २३ मार्च , २०२२ ।

राजेन्द्र भागवत ,

विधान भवन ,

प्रधान सचिव ,

मुंबई,

दिनांकित २४ मार्च , २०२२ ।

महाराष्ट्र विधानपरिषद ।

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Cite this issue. Maharashtra Gazette, Government of Maharashtra, 24 March 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.maharashtra.2022-03-24.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-/. Archive identifier in.gazette.maharashtra.2022-03-24.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-.