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Maharashtra Gazette · Government of Maharashtra

Part VII Ext. 16 (17-8-2022) L. A. BILL No. XIX OF 2022. A BILL FURTHER TO AMEND THE MUMBAI MUNICIPAL CORPORATION ACT AND THE MAHARASHTRA MUNICIPAL CORPORATION ACT.

Published 17 August 2022

Type
Extra - Ordinary
Part
Part 7 (Hindi)
Division
CENTRAL SECTION
Identifier
in.gazette.maharashtra.2022-08-17.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-
Languages
English, Marathi

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RNI No. MAHBIL /2009/31730

महाराष्ट्र शासन राजपत्र

असाधारण भाग सात

वर्ष ८, अंक ११(४)] बुधवार, ऑगस्ट १७, २०२२/श्रावण २६, शके १९४४ [पृष्ठे ६, किंमत : रुपये ४७.००

असाधारण क्रमांक १६

प्राधिकृत प्रकाशन

अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).

महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय

महाराष्ट्र विधानसभा में दिनांक १७ अगस्त, २०२२ ई.को. पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियम ११७ के अधीन प्रकाशन किया जाता है :----

L. A. BILL No. XIX OF 2022.

A BILL

FURTHER TO AMEND THE MUMBAI MUNICIPAL CORPORATION

ACT AND THE MAHARASHTRA MUNICIPAL CORPORATION ACT.

विधानसभा का विधेयक क्रमांक १९ सन् २०२२ ।

मुंबई नगर निगम अधिनियम और महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम में अधिकतर

संशोधन करने संबंधी विधेयक ।

क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा था ;

और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका था कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान थीं जिनके कारण उन्हें, इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, मुंबई नगर निगम अधिनियम और महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ था ; और इसलिए, मुंबई नगर निगम और महाराष्ट्र नगर निगम (संशोधन) अध्यादेश, २०२२, ४ अगस्त २०२२ को प्रख्यापित किया गया था ;

सन् १८८८ का ३ सन् १९४९ का ५९। सन् २०२२ का अध्यादेश क्रमांक ७।

(१)

भाग सात----१६--१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑगस्ट १७, २०२२/श्रावण २६, शके १९४४ और क्योंकि उक्त अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के अधिनियम में बदलना इष्टकर है ; अत: भारत गणराज्य के तिहत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है :—

अध्याय एक

प्रारम्भिक

संक्षिप्त नाम तथा १. (१) यह अधिनियम मुंबई नगर निगम और महाराष्ट्र नगर निगम (संशोधन) अधिनियम, २०२२ प्रारम्भण । कहलाए ।

(२) यह ४ अगस्त २०२२ से प्रवृत्त हुआ समझा जायेगा ।

अध्याय दो

मुंबई नगर निगम अधिनियम में संशोधन।

२. मुंबई नगर निगम अधिनियम की धारा ५ की, उप-धारा (१) के, खण्ड (क) में, ""दो सौ छत्तीस"" सन् १८८८ का ३। शब्दों के स्थान में, ""दो सौ सत्ताईस"" शब्द रखे जायेंगे।

सन् १८८८ का ३ की धारा ५ मंें संशोधन ।

अध्याय तीन

महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम में संशोधन।

३. महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम की धारा ५ की, उप-धारा (२) के, खण्ड (क) की, तालिका के सन् १९४९ का ५९। स्थान में, निम्न तालिका, रखी जायेगी, अर्थात् :----

सन् १९४९ का ५९ की धारा ५ मंें संशोधन ।

तालिका

आबादी

पार्षदों की संख्या

(१)

(२)

(एक) ३ लाख के उपर तथा ६ लाख तक निर्वाचित पार्षदों की निम्नतम संख्या ६५ होगी।

३ लाख के उपर प्रत्येकी १५,००० की अतिरिक्त आबादी के लिए एक अतिरिक्त पार्षद होगा, तथापि, इस प्रकार निर्वाचित पार्षदों की अधिकतर संख्या ८५ से अधिक नहीं होगी।

(दो) ६ लाख के उपर तथा १२ लाख तक निर्वाचित पार्षदों की निम्नतम संख्या ८५ होगी।

६ लाख के उपर प्रत्येकी २० हजार की अतिरिक्त आबादी के लिए एक अतिरिक्त पार्षाद होगा, तथापि इस प्रकार कि, निर्वाचित पार्षदों की अधिकतर संख्या ११५ से अधिक नहीं होगी।

(तीन) १२ लाख के उपर तथा २४ लाख तक निर्वाचित पार्षदों की निम्नतम संख्या ११५ होगी।

१२ लाख के उपर प्रत्येकी ४० हजार की अतिरिक्त आबादी के लिए १ अतिरिक्त पार्षद होगा, तथापि इस प्रकार कि, निर्वाचित पार्षदों की अधिकतम संख्या १५१ से अधिक नहीं होगी।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑगस्ट १७, २०२२/श्रावण २६, शके १९४४ ३ आबादी

पार्षदों की संख्या

(१)

(२)

(चार) २४ लाख के उपर तथा ३० लाख तक निर्वाचित पार्षदों की निम्नतम संख्या १५१ होगी।

२४ लाख के उपर प्रत्येकी ५० हजार की अतिरिक्त आबादी के लिए एक अतिरिक्त पार्षद होगा, तथापि इस प्रकार कि, निर्वाचित पार्षदों की अधिकतम संख्या १६१ होगी।

(पाँच) ३० लाख से उपर

निर्वाचित पार्षदों की निम्नतम संख्या १६१ होगी।

३० लाख के उपर प्रत्येकी १ लाख की अतिरिक्त आबादी के लिए १ अतिरिक्त पार्षद होगा, तथापि इस प्रकार कि, निर्वाचित पार्षदों की अधिकतम संख्या १७५ होगी।""

अध्याय चार

विविध

प्रक्रिया का रद्दकरण। सन् १८८८ का ३। सन् १९४९ का ५९।

४. मुंबई नगर निगम अधिनियम और महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम (जिसे इसमें आगे, इस अध्याय में ""उक्त अधिनियम"" कहा गया है) और तद्धीन बनाए गये नियमों, अधिसूचनाअों या आदेशों में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहाँ मुंबई नगर निगम और महाराष्ट्र नगर निगम (संशोधन) अधिनियम, २०२२ के प्रारम्भण के दिनांक के पूर्व की,----

(क) नगर निगम का क्षेत्र, प्रभागों में विभाजित करना और उसकी सीमाएँ विर्िनदिष्ट करना राज्य निर्वाचन आयोग या, यथास्थिति, राज्य सरकार द्वारा प्रक्रिया शुरू की है या पूरी की गई है, या

(ख) नगर निगम में पार्षदों की सीटों के आरक्षण की प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू या पूरी की गई है,

रद्द समझी जायेगी और ऐसी प्रक्रिया इस अधिनियम द्वारा यथा संशोधित उक्त अधिनियमों के उपबंधों के अनुसार नए सिरे से पूरी की जायेगी।

सन् २०२२ का महा. .......।

कठिनाई के निराकरण की शक्ति। ५. (१) इस अधिनियम द्वारा यथा संशोधित उक्त अधिनियमों के उपबंधों को प्रभावी करने में यदि कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित किसी आदेश द्वारा जैसा अवसर उद्भूत हो, इस अधिनियम द्वारा यथा संशोधित, मूल अधिनियम के उपबंधों से अनसंगत न हो, ऐसे निदेश दे सकेगी जो उसे कठिनाई के निराकरण के प्रयोजनों के लिए आवश्यक या इष्टकर प्रतीत हो :

परंतु, इस अधिनियम के प्रारम्भण के दिनांक से दो वर्ष की अवधि अवसित होने के पश्चात् ऐसा कोई आदेश, नहीं बनाया जायेगा ।

(२) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक आदेश, उसके बनाए जाने के पश्चात्, यथासंभव शीघ्र, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों के समक्ष रखा जायेगा।

भाग सात----१६--२४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑगस्ट १७, २०२२/श्रावण २६, शके १९४४ ६. (१) महाराष्ट्र मुंबई नगर निगम और महाराष्ट्र नगर नियम (संशोधन) अध्यादेश, २०२२ एतद् द्वारा, निरसित किया जाता है।

सन् २०२२ का महा. अध्या. क्रमांक ७। सन् २०२२ का महा. अध्या. क्रमांक ७ का निरसन तथा व्यावृत्ति।

(२) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित मूल अधिनियम ते तत्स्थानी के उपबंधों के अधीन कृत कोई बात या न की गई कोई कार्यवाही (जारी किसी अधिसूचना या आदेश समेत) इस अधिनियम द्वारा यथा संशोधित मूल अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन कृत, की गई या, यथास्थिति जारी की गई समझी जायेगी।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑगस्ट १७, २०२२/श्रावण २६, शके १९४४ ५

उद्देश्यों और कारणों का वक्तव्य।

मुंबई नगर निगम अधिनियम (सन् १८८८ का ३) की धारा ५ बृहन्मुंबई के नगर निगम में प्रभाग निर्वाचनों पर सीधे निर्वाचित पार्षदों की संख्या के लिए उपबंध करती है और महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम (सन् १९४९ का ५९) की धारा ५ संबंधित नगर निगम की आबादी के अनुपात में निम्नतम और अधिकतम निर्वाचित पार्षदों की संख्या के लिए उपबंध करती है।

२. शहरी आबादी में वृद्धि तथा शहरीकरण की गति को ध्यान में लेते हुये सन् २०११ के जनगणना आँकडे तथा सन् २०२१-२०२२ में आबादी की परिकल्पित गणना के आधार पर बृहन्मुंबई के नगर निगम में पार्षदों की संख्या तथा अन्य नगर निगमों के निर्वाचित पार्षदों की निम्नतम और अधिकतम संख्या सन् २०२२ का महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक २ और सन् २०२२ का महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक १२ द्वारा क्रमश: बढाई गई थी। तथापि, २०२१ के जनगणना पूरी होने के पश्चात् उसके अनुसार, जनसंख्या के आँकडों के आधार पर नगर निगमों के पार्षदों की संख्या विर्िनदिष्ट करना इष्टकर समझा गया था।

३. बृहन्मुंबई का क्षेत्र प्रभागों में विभाजित करने और उसकी सीमाएँ विर्िनदिष्ट करने तथा प्रत्येक शहर के लिए प्रभागों की संख्या और सीमाएँ, जिसमेंे ऐसा शहर पार्षद के प्रभाग निर्वाचन के प्रयोजन के लिए विभाजित किया जायेगा, विर्िनदिष्ट करने की शक्ति राज्य सरकार को देने के लिए उक्त नगर निगम अधिनियम, सन् २०२२ के महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक १२ द्वारा संशोधित किया गया है।

राहुल रमेश वाघ बनाम महाराष्ट्र राज्य (एल.एल.पी.सी) (सन् २०२१ का क्रमांक १९७५६) में सम्मानिय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांकित ४ मई २०२२ और २० जुलाई २०२२ के उनके आदेश द्वारा उक्त संशोधन अधिनियमों के प्रवर्तन के दिनांक के ११ मार्च २०२२ को और उसके पूर्व किए गए परिसीमन के आधार पर निर्वाचन कार्यक्रम अधिसूचित करने के निदेश निर्वाचन आयोग को दिए गये थे।

४. उपयर्र्ुक्त को ध्यान में रखते हुए, सन् २०२२ का महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक २ और सन् २०२२ का महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक १२ के पूर्व पार्षदों की संख्या पुन: प्रतिष्ठित करने के लिए उक्त अधिनियमों की धारा ५ का यथोचित संशोधन करना इष्टकर समझा गया था।

५. चूँकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा था और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चूका था कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान थीं, जिनके कारण उन्हें इसमें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए, मुंबई नगर निगम अधिनियम और महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ था, महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा मुंबई नगर निगम और महाराष्ट्र नगर निगम (संशोधन) अध्यादेश २०२२ (सन् २०२२ का महा. अध्या. क्रमांक ७) ४ अगस्त २०२२ को प्रख्यापित किया गया था ।

६. प्रस्तुत विधेयक का आशय उक्त अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के अधिनियम में बदलना है । मुंबई, दिनांकित १२ अगस्त, २०२२।

एकनाथ संभाजी शिंदे, मुख्यमंत्री।६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑगस्ट १७, २०२२/श्रावण २६, शके १९४४

प्रत्यायुक्त विधान संबंधी ज्ञापन।

प्रस्तुत विधेयक में, विधायी शक्ति के प्रत्यायोजनार्थ निम्न प्रस्ताव अन्तर्ग्रस्त हैं, अर्थात् :—

खंड ५.—इस खंड के अधीन, राज्य सरकार को, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा इस अधिनियम को प्रभावी करनेे में उद्भूत किसी कठिनाई का निराकरण करने के लिए आदेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई है ।

२. विधयी शक्ति के प्रत्यायोजन के लिये उपरल्लिखित प्रस्ताव सामान्य स्वरूप का है ।

(यथार्थ अनुवाद), विजया ल. डोनीकर, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।

विधान भवन : मुंबई, दिनांकित १७ अगस्त, २०२२।

राजेन्द्र भागवत, प्रधान सचिव, महाराष्ट्र विधानसभा।

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Cite this issue. Maharashtra Gazette, Government of Maharashtra, 17 August 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.maharashtra.2022-08-17.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-/. Archive identifier in.gazette.maharashtra.2022-08-17.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-.