RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ८, अंक १५ ] शुक्रवार, नोव्हेंबर ११, २०२२/कर्ातिक २०, शके १९४४ [पृष्ठे ३, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक २४
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
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वित्त विभाग
मंत्रालय, मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरू चौक, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित १ नवम्बर २०२२।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. X OF 2022.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA CONTINGENCY FUND ACT.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक १० सन् २०२२।
महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि अधिनियम में अधिकतर
संशोधन करने संबंधी अध्यादेश।
क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;
सन् १९५६ का ४६।
और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ;
भाग सात---२४-१
अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्ितयों का प्रयोग करते (१)महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर ११, २०२२/कर्ातिक २०, शके १९४४ २ हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :----
१. (१) यह अध्यादेश महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि (संशोधन) अध्यादेश, २०२२ कहलाए।
संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भण।
(२) यह तुरंत प्रवृत्त होगा।
सन् १९५६ का ४६। २. इस अध्यादेश के प्रवर्तन की अवधि के दौरान, महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि अधिनियम प्रभावी होगा, मानों कि, उसकी धारा २ में " डेढ सौ करोड़ रूपयों की राशि " शब्दों के स्थान में " तीन सौ पचास करोड़ रूपयों की राशि " शब्द रखे गये है।
सन् १९५६ का ४६ की धारा २ में अस्थायी संशोधन।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, नोव्हेंबर ११, २०२२/कर्ातिक २०, शके १९४४ ३
वक्तव्य
महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि अधिनियम (सन् १९५६ का ४६) के अधीन स्थापित और सम्पोषित रखी गयी राज्य की आकस्मिकता निधि का संग्रह डेढ़ सौ करोड़ रुपए है।
२. महाराष्ट्र सरकारने, किसी आस्ति पुर्ननिर्माण कंपनी के रूप में महा. ए आर सी लिमिटेड की स्थापना की है और वह कम्पनी अधिनियम, २०१३ (सन् २०१३ का १८) के अधीन रजिष्ट्रीकृत है। उक्त कम्पनी को शेअर पूँजी का उपबंध करने के लिए दिनांकित २७ सितम्बर २०२२ सरकारी ज्ञापन के अनुसार, आकस्मिकता निधि से १११ करोड़ रूपयों का अग्रिम मंजूर किया गया है। अत: उक्त कम्पनी का विद्यमान निधि (एन ओ एफ) १११ करोड़ रूपये है।
आस्ति पूर्ननिर्माण कंपनी के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी मार्गदर्शक तवों के अनुसार उनका दिनांकित ११ अक्तूबर २०२२ का पत्र देखिए, निम्नतम शुद्ध स्वामित्वाधीन निधि (एन ओ एफ) की रकम सौ करोड़ के बजाय कम से कम तीन सौ करोड़ तक बढ़ाई गई है। इसलिए, उक्त कंपनी के अतिरिक्त २०० करोड़ रूपयों की आवश्यकता है और तद्नुसार, उक्त कम्पनी की कुल शेअर पूँजी ३११ करोड़ तक बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार द्वारा प्राप्त किया है।
३. इस व्यय का स्वरूप अनपेक्षित है ; अत: आवश्यक बजट-संबंधी उपबंध नहीं है। व्यय की यह मद्दें " नयी सेवाएँ " में गठित होंगी और इसलिये, इन्हे राज्य विधानमंडल के ध्यान में लाना आवश्यक हैं। राज्य विधानमंडल का आगामी सत्र १९ दिसम्बर २०२२ से प्रारम्भ करना निर्धारित है। उपरोल्लिखित प्रयोजनों के लिये निधि उपलब्ध कराने के लिये आवश्यक आदेश, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों द्वारा पारित अनुपूरक माँगों और विनियोग विधेयक राज्य विधानमंडल के अधिनियम के रूप में प्रकाशित हुआ हैं, के ज़रिए, राज्य विधानमंडल के ध्यान में इन " नयी सेवाअों " पर के व्यय को लाने के पश्चात् ही जारी किये जा सकेंगे। तथापि, इन मद्दों के लिये व्यय शीघ्रतम उपगत करना आवश्यक हैं, अत:, आकस्मिकता निधि से अग्रिम के प्रत्याहरण के ज़रिए व्यय उपगत करने का विनिश्चय किया गया हैं।
४. आकस्मिकता निधि की विद्यमान समग्र निधि केवल डेढ़ सौ करोड़ रूपयों की है। वर्तमान में उपयर्ुक्त उल्लिखित मद्द, और व्यय के अन्य अनपेक्षित और तात्कालिक मद्दों पर व्यय पूरा करने के लिए उपलब्ध शेष अपर्याप्त है, जिसे आकस्मिकता निधि में से पूरा करने की आवश्यकता होगी। इसलिए, आकस्मिकता निधि की विद्यमान समग्र निधि को दो सौ करोड़ रूपयों से तीन सौ पचास करोड़ रूपयों तक अस्थायी रूप से बढ़ाना इष्टकर समझा गया है ताकि उपरोक्त जैसा व्यय प्राप्त हो सके।
५. चूँकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए महाराष्ट्र आकस्मिकता निधि अधिनियम (सन् १९५६ का ४६) में अधिकतर संशोधन करने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है।
मुंबई, दिनांकित १ नवम्बर २०२२।
भगतसिंघ कोश्यारी, महाराष्ट्रा के राज्यपाल।
महाराष्ट्रा के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,
मनोज सौनिक, सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव। (यथार्थ अनुवाद),
विजया ल. डोनीकर, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
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